बर्ड फ्लू (H5N1 ) के प्रति सतर्कता बरतने हेतु किए जाने वाले आवश्यक उपाय

बर्ड फ्लू (H5N1 ) के प्रति सतर्कता बरतने हेतु किए जाने वाले आवश्यक उपाय

बर्ड फ्लू

( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )

बर्ड फ्लू- एक Zoonotic बीमारी है एवं इससे संक्रमण का सबसे अधिक खतरा मुर्गी पालन से जुड़े लोगों को होता है, क्योंकि वो लगभग हर वक्त मुर्गियों के ही सम्पर्क में होते हैं। बर्ड फ्लू या एवियन इंफ्लुएंजा एक विषाणु जनित संक्रामक रोग है। यह विषाणु जिसे एवियन इंफ्लुएंजा (H5N1) विषाणु कहते हैं। आम तौर पर यह पक्षियों में पाया जाता है। लेकिन कभी कभी मानव सहित अन्य कई स्तनधारियो को भी संक्रमित कर सकता है संक्रमित व्यक्तियों से स्वस्थ्य व्यक्तियों में भी इस रोग का प्रसार हो सकता है।

मनुष्य में मुख्य लक्षण:-

★ सर्दी, जुकाम व खासी का होना।

★ गले में खराश, मांस पेशियों में सूजन एवं दर्द का होना।

★ सांस लेने में तकलीफ का होना।

★ यकृत, गुर्दा व फेफड़ो का कार्य बंद होना।
बर्ड फ्लू से बचाव:-

★ संक्रमित पक्षी, पशु या सामानो के संपर्क मे आने से बचें।

★ संक्रमित पक्षी को अपनी फूड जोन में आने से रोके।

★ कच्चे या अधपके मांस का सेवन न करे।

★ कच्चे या अधपके अंडे न खायें, यदि खना है तो उसे सही तरीके से उबाल कर खाये।

★ पक्षियों में इस रोग के लक्षण दिखाई दे तो नजदीक के पशुचिकित्सालय को सूचित करें।

★ बर्ड फ्लू के संक्रमण से बचने के लिए मृत या घायल पक्षियों को नहीं छूना चाहिए पक्षियों का संभालने से पहले दस्ताने पहनें। इसके अलावा बर्ड ड्रॉपिंग के संपर्क में आने से भी बचें। H5N1 के प्रसार को रोकने के लिए पशु पक्षियों के संपर्क में आने से बचना हैं।

★ आमतौर पर बैक्टीरिया फ्लू वायरस और अन्य कीटाणु हाथों को सबसे अधिक संक्रमण करते हैं। बर्ड फ्लू के संक्रमण से बचने के लिए नियमित अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह से साफ करें।

अतः उक्त आलोक में अनुरोध है कि जन-सामुदय को बर्ड फ्लू (H5N1) के प्रति जागरूक करना सुनिश्चित करें। अगर उक्त बीमारी से संभावित किसी रोग की सूचना प्राप्त होती है तो उस रोगी को तत्काल Isolate करते हुए IDSP को सूचना उपलब्ध करायेगें। ताकि बर्ड फ्लू (H5N1) को महामारी का रूप लेने से रोका जा सके।

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