आदिवासी कुड़मि समाज की ओर से 9 सूत्री मांगों को लेकर प्रधानमंत्री के नाम सरायकेला उपायुक्त को सौंपा गया ज्ञापन,

काफी बड़ी संख्या में निकाली गई रैली

( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )

सरायकेला: आदिबासि कुड़मि समाज केंद्रीय समिति के पूर्व निर्धारित निर्देश के आलोक में सरायकेला-खरसावां जिला समिति द्वारा जिलाध्यक्ष मनोज कुमार महतो के नेतृत्व में सरायकेला जिला समाहरणालय में श्रीमान जिला उपायुक्त महोदय के माध्यम से भारत सरकार के माननीय प्रधानमंत्री महोदय के नाम 09 सूत्री माँग पत्र सौंपा गया।

उनकी मांगों में मुख्य रूप से

•कुड़मि जनजाति समुदाय को अनुसूचित जनजाति की सूची में सूचीबद्ध करना
•भारत की जनगणना के भाषा सूची में स्वतंत्र रूप से कुड़मालि (KUDMALI) भाषा कोड लागू करने एवं धर्म के कॉलम में सारना (SARNA) धर्म कॉलम लागू करना
•कुड़मालि भाषा को जनजातीय भाषा की मान्यता देते हुए संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध करना
•कुड़मालि भाषा की पढ़ाई प्राथमिक विद्यालय स्तर से लेकर महाविद्यालय और सभी विश्वविद्यालय स्तर तक कराते हुए सभी स्थानों पर यथोचित संख्या में कुड़मालि अध्यापकों और प्राध्यापकों की नियुक्ति करना
•कुड़मालि भाषा के लिए विद्यालय स्तर से लेकर महाविद्यालय और विश्वविद्यालय स्तर तक वर्तमान में प्रयुक्त त्रुटिपूर्ण कुरमाली (KURMALI) शब्द में संशोधन कर कुड़मालि (KUDMALI) करना
• कुड़मालि एकेडेमिक बोर्ड और कल्चरल बोर्ड का गठन करना
•प्रत्येक गाँव, टोला, मोहल्ला के जाहिरा थान, सारना थान, गोड़ाम (ग्राम) थान आदि पारंपरिक धर्म स्थलों की घेराबंदी और सौंदर्यीकरण करने एवं इसके लिए उक्त स्थल के पारंपरिक ग्राम प्रधान एवं पारंपरिक पुजारी को ही प्रतिनियुक्त करना
•चुआड़ विद्रोह के महानायक क्रांतिवीर शहीद रघुनाथ महतो, संताल हुल के वीर शहीद चानकु महतो, मेड़ि विद्रोह के वीर शहीद कालिया मोहंता व भीम मोहंता (ओड़िशा), सविनय अवज्ञा आंदोलन के वीर शहीद गोकुल महतो, मोहन महतो, शीतल महतो, सहदेव महतो व गणेश महतो (प. बंगाल), भारत छोड़ो आंदोलन के वीर शहीद चुनाराम महतो व गोविंद महतो (प. बंगाल) आदि महापुरुषों की जीवनी और वीर गाथाओं को सरकारी पाठ्यक्रम में शामिल करना
•ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत स्तर पर पुस्तकालय खुलवाये जाने की महत्वपूर्ण मांग की गई है।

इसके अलावे छोटानागपुर पठार अंतर्गत झाड़खंड के गुसटिधारि कुड़मि समुदाय, जिन्हें वर्तनी त्रुटि और ध्वन्यात्मक दोष के कारण भू-अभिलेखों में विभिन्न नामों यथा – कुड़मि, कुड़मी, कुर्मि, कुर्मी, कुरमि, कुरमी से अंकित किया गया है, जो मूल रुप से “कुड़मि” हैं, के लिए तथ्यात्मक आधार पेश करते हुए पूर्व के जनगणनाओं में हुए त्रुटियों का संशोधन कराते हुए आगामी भारत की जनगणना में जाति के कॉलम में – कुड़मि (Kudmi) और मातृभाषा के कॉलम में – कुड़मालि (Kudmali) दर्ज कराने की भी अपील की गई है।

इस अवसर पर मुख्य रूप से केंद्रीय अध्यक्ष प्रसेनजीत महतो महतो, जिलाध्यक्ष मनोज महतो, सदस्य पंचानन महतो, राजेश महतो, गणेश महतो, डॉ. विभीषण महतो, प्रकाश महतो, दीपक महतो, रीना महतो, सूरज महतो, सुरेश महतो, राजकिशोर महतो, सुकदेव महतो, फाल्गुनि महतो, अनूप महतो, शशिभूषण महतो, धनंजय महतो आदि समाज के सैकड़ों लोग उपस्थित थे।

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Author: Reporter : Sonu Kumar Singh ( संपादक : भरत सिंह )

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