हूल दिवस पर आजसू पार्टी ने दी शहीद सिदो-कान्हू को श्रद्धांजलि।

हूल दिवस पर आजसू पार्टी ने दी शहीद सिदो-कान्हू को श्रद्धांजलि।

सरायकेला/चांडिल

अंग्रेजी हुकूमत, ज़मींदारों के शोषण और अन्याय के विरुद्ध 1855 की ऐतिहासिक ‘हूल क्रांति’ का शंखनाद करने वाले अमर क्रांतिकारी शहीद सिदो-कान्हू, चांद-भैरव तथा वीरांगनाओं फूलो-झानो के बलिदान दिवस ‘हूल दिवस’ के अवसर पर मंगलवार को आजसू पार्टी ने श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके योगदान को याद किया। चांडिल के चिलगु स्थित आजसू पार्टी के प्रधान कार्यालय में केंद्रीय महासचिव हरेलाल महतो के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने शहीद सिदो-कान्हू के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।

इस अवसर पर हरेलाल महतो ने कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई में झारखंड के वीर सपूतों का योगदान अतुलनीय और प्रेरणादायी रहा है। अंग्रेजी शासन के अत्याचार, शोषण और अन्याय के विरुद्ध सिदो-कान्हू, चांद-भैरव तथा फूलो-झानो ने जिस साहस और त्याग का परिचय दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को हूल क्रांति के इतिहास और हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष से अवगत कराना समय की आवश्यकता है, ताकि उनके बलिदान और आदर्शों को सदैव स्मरण रखा जा सके। कार्यक्रम में पूर्व चांडिल प्रमुख अमला मुर्मू, भीम महापात्र, देवराज महतो, हिमेश महतो सहित आजसू पार्टी के कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

हूल दिवस पर जिप उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने सिदो-कान्हू को दी श्रद्धांजलि।

हूल दिवस पर जिप उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने सिदो-कान्हू को दी श्रद्धांजलि।

सरायकेला/ईचागढ़

हूल दिवस के अवसर पर सरायकेला-खरसावां जिला परिषद की उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने कुकडू प्रखंड के सिंदूरपुर स्थित अमर शहीद सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में हूल क्रांति के महान वीरों के बलिदान को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया गया।

इस अवसर पर मधुश्री महतो ने कहा कि सिदो-कान्हू, चांद-भैरव के साथ-साथ फूलो-झानो जैसी वीरांगनाओं ने भी अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष में अपनी अमिट भूमिका निभाई। उनका साहस और बलिदान आज भी समाज को अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई हो या अलग झारखंड राज्य आंदोलन, महिलाओं ने हर दौर में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। आज भी शिक्षा, राजनीति, सामाजिक सेवा, प्रशासन और अन्य क्षेत्रों में महिलाएं अपनी प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता का परिचय दे रही हैं, जिससे समाज निरंतर आगे बढ़ रहा है।

मधुश्री महतो ने महिलाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे अपने अधिकारों, समाज और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए हमेशा सजग और संगठित रहें। उन्होंने कहा कि हर महिला में नेतृत्व की क्षमता होती है। जरूरत केवल आत्मविश्वास, एकजुटता और आगे बढ़ने के संकल्प की है। किसी भी सामाजिक आंदोलन, जनहित के कार्य या जरूरतमंदों की सहायता के लिए महिलाओं को सदैव अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं जागरूक और सशक्त होंगी, तभी समाज और राष्ट्र वास्तविक अर्थों में प्रगति करेगा। कार्यक्रम का समापन हूल क्रांति के शहीदों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने के संकल्प के साथ हुआ।

विधायक सविता महतो ने सिदो-कान्हु की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दी श्रद्धांजलि।

विधायक सविता महतो ने सिदो-कान्हु की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दी श्रद्धांजलि।

सरायकेला/ईचागढ़

हूल दिवस के अवसर पर मंगलवार को विधायक सविता महतो ने झामुमो नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के साथ चांडिल गोलचक्कर स्थित वीर शहीद सिदो-कान्हु की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने चौका के टुईटुंगरी मोड़ स्थित वीरांगना फूलो-झानो की प्रतिमा पर भी माल्यार्पण किया। वहीं नीमडीह प्रखंड के पाढ़कीडीह तथा कुकड़ू प्रखंड के सिंदूरपुर और हाईतिरुल गांव में स्थापित वीर शहीद सिदो-कान्हु की प्रतिमाओं पर भी श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन किया।

इस दौरान सिंदूरपुर में विधायक सविता महतो ने वीर शहीद सिदो-कान्हुके आदमकद मूर्ति का अनावरण किया। इस अवसर पर विधायक सविता महतो ने कहा कि वीर शहीदों का बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाएगा। उनके सपनों का झारखंड बनाने के लिए हम सभी को मिलकर कार्य करना होगा।  हूल विद्रोह का बिगुल फूंकने वाले अमर वीर शहीद सिदो-कान्हु, चांद-भैरव, फूलो-झानो सहित हजारों शहीदों का बलिदान सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।

इस मौके पर अनुमंडल पदाधिकारी नितिन शिवम गुप्ता, डीएसपी शिव प्रकाश कुमार, बीडीओ तालेश्वर रविदास, जिला परिषद सदस्य पिंकी लायेक, झामुमो केंद्रीय सदस्य चारु चांद किस्कू, ओम प्रकाश लायेक, काबलू महतो, जिला सचिव बैद्यनाथ टुडू, प्रखंड अध्यक्ष कृष्णा किशोर महतो, सचिन गोप, कित्तीवास महतो, अरुण टुडू, धर्मु गोप, अर्जुन सिंह मुंडा, समर भुईयां, अजीत सिंह मुंडा, श्रीकांत महतो, नव किशोर हांसदा सहित बड़ी संख्या में झामुमो नेता एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।

विभिन्न राजनीतिक दलों ने मनाया हुल दिवस ,सिद्धु कान्हु के मुर्ती पर किया माल्यार्पण।

विभिन्न राजनीतिक दलों ने मनाया हुल दिवस ,सिद्धु कान्हु के मुर्ती पर किया माल्यार्पण।

सरायकेला/ईचागढ़

सरायकेला-खरसावां जिला के ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र में विभिन्न राजनीतिक दलों ने ताम झाम के साथ हुल दिवस मनाया। ईचागढ़ प्रखंड मोड़ में झामुमो, भाजपा, आजसू पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सिद्धु कान्हु के मुर्ती पर माल्यार्पण कर अन्याय के खिलाफ संघर्ष की प्रेरणा लिया। वहीं भाजपा जिला महामंत्री डॉ भूषण चन्द्र मुर्मू ने हूल क्रांति का गौरवशाली इतिहास के संबंध में प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि 30 जुन 1855 को भोगनाडीह में हूल क्रांति के महानायक बीर सिद्धु कान्हु के नेतृत्व में अंग्रेजी हुकूमत,सुदखोर और जमिंदारो के खिलाफ हूल क्रांति का बिगुल फुंका था, जिसमें सिद्धु, कान्हु,चांद , भैरव सहित हजारों आदिवासी अपनी जान का बलिदान दिया था। वहीं झामुमो प्रखंड अध्यक्ष निताई उरांव ने कहा कि हूल दिवस झारखंड के गौरवशाली इतिहास और आदिवासी अस्मिता का प्रतीक है। मौके पर , सुल्तान अंसारी,मनोरंजन महतो , रंजीत टुडु सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे।

उत्क्रमित उच्च विद्यालय बुरुडीह में मनाया गया हूल दिवस।अन्याय के विरुद्ध साहसपूर्वक खड़े होने की प्रेरणा देता है हूल दिवस:- प्रदीप कुमार महतो।

उत्क्रमित उच्च विद्यालय बुरुडीह में मनाया गया हूल दिवस।अन्याय के विरुद्ध साहसपूर्वक खड़े होने की प्रेरणा देता है हूल दिवस:- प्रदीप कुमार महतो।

सरायकेला/खरसावां

उत्क्रमित उच्च विद्यालय, बुरुडीह में सोमवार को हूल दिवस श्रद्धा, सम्मान एवं उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलिय सह सिदो- कान्हू के तस्वीर पर माल्यार्पण व पुष्प अर्पित कर की गई। जिसमें विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाए, कर्मचारी के साथ बाल संसद के सदस्य मौजूद रहे।
इस अवसर पर विद्यार्थियों के बीच हूल दिवस पर आधारित ओपन क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया

इस दौरान विद्यालय के शिक्षक प्रदीप कुमार महतो ने अपने संबोधन में कहा कि हूल दिवस केवल एक स्मृति दिवस ही नहीं, बल्कि यह हमें अन्याय के विरुद्ध साहसपूर्वक खड़े होने की प्रेरणा देता है। सिदो-कान्हू,चांँद-भैरव सहित सभी अमर शहीदों का बलिदान हमें सत्य, साहस और राष्ट्र प्रेम की प्रेरणा देता है।

इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक प्रशांत कुमार प्रधान ने कहा कि अपने इतिहास और महान विभूतियों को जानना प्रत्येक विद्यार्थी का दायित्व है। हूल आंदोलन हमें एकता और संघर्ष की शक्ति का संदेश देता है।
वहीं शिक्षक तुषार कांति महतो ने कहा की उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि सत्य, साहस और आत्मसम्मान के लिए किया गया संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता।उन्होंने विद्यार्थियों को उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने को कहा।

इस दौरान मुख्य रूप से विद्यालय के शिक्षक प्रदीप कुमार महतो, प्रशांत कुमार प्रधान, तुषार कांति महतो, लवली कुमारी, लक्ष्मण साहू, श्यामलाल अंगारिया, नील मोहन महतो, मौसमी दास, संध्या प्रधान,युधिष्ठिर पान एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

गणेश महाली के नेतृत्व में भाजपाईयों ने शिद्धु कान्हू को किया नमन। कहा:शिद्धु कान्हू की देन है सीएनटी एसपीटी एक्ट,जो आदिवासीयों का रक्षा कवच है।

गणेश महाली के नेतृत्व में भाजपाईयों ने शिद्धु कान्हू को किया नमन। कहा:शिद्धु कान्हू की देन है सीएनटी एसपीटी एक्ट,जो आदिवासीयों का रक्षा कवच है।

राजनगर

राजनगर : राजनगर बाजार स्थित सिदो कान्हु चौक में भारतीय जनता पार्टी की ओर से भाजपा एसटी मोर्चा के प्रदेश कोषाध्यक्ष गणेश महाली के नेतृत्व में हुल दिवस के अवसर पर सिदो कान्हु के मुर्ति पर उपस्थित भाजपाइयों ने एक के बाद एक करके माल्यार्पण कर नमन किया।

मौके पर गणेश महाली ने कहा कि सिदो कान्हु के नेतृत्व में अंग्रेजों के हुकुमत के खिलाफ लड़ाई लड़ कर सीएनटी एक्ट मिला, जो आदिवासियों का सुरक्षा कवच है. सीएनटी एक्ट मिलने के बाद भी यहां के वर्तमान सरकार के कारण यहां के आदिवासी, मुलवासी सुरक्षित नहीं है.जो दुर्भाग्य की बात है.हमें अपने हक और अधिकार के लिये पुनः लड़ाई लड़ने की आवश्यकता है. वह हक और अधिकार तभी मिलेगा, जब आने वाले लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के खिलाफ वोट कर भाजपा को विजय बनाना है।

इस अवसर पर रमेश हांसदा,कुबेर कांत षाड़ंगी, सोमनाथ सोरेन,बीजू बास्के,नारायण महतो,अंनत साहू,शंकर महतो,जगदीश महतो,रवि महतो,अजित राऊत,दीपू राऊत आदि उपस्थित थे।

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हुल दिवस पर प्रेम मार्डी के नेतृत्व में निकाली गई जेबीकेसएसएस की बाईक रैली।

हुल दिवस पर प्रेम मार्डी के नेतृत्व में निकाली गई जेबीकेसएसएस की बाईक रैली।

राजनगर

राजनगर: झारखंडी भाषा खतियानी संघर्ष समिति की ओर से हुल दिवस के अवसर पर प्रेम मार्डी के नेतृत्व में बाइक रैली निकाली. बाइक रैली निकलने के पुर्व राजनगर बाजार स्थित सिदो कान्हु चौक पर सिदो कान्हु के आदमकद मुर्ति माल्यार्पण किया.बाइक रैली राजनगर से शुरू होकर रोला होते हुए सरायकेला तक पहुंचा।

मौके पर प्रेम मार्डी ने कहा कि सिदो,कान्हु, फुलो झानो के संयुक्त नेतृत्व में 30 जुन 1855 में संताल विद्रोह की शुरुआत की थी . इन वीरों ने लगभग 60 हजार लोगों को अपने साथ लड़ाई में शामिल किया था. सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस समय लोगों की कमी वावजूद भी इतनी बड़ी फौज खड़ा किया.अंग्रेजो के खिलाफ लड़ाई भयंकर रुप ले लिया. अंग्रेजों ने इन लड़ाई को देखकर घुटने टेक दिए और सीएनटी एक्ट दिया, जो आदिवासियों, मुलवासियों का सुरक्षा कवच है. अंग्रेजों द्वारा दिया गया सुरक्षा कवच को भी यहां के सरकार एवं अधिकारियों ने तोड़ दिया, बाहर से आये लोगों को जमीन उपलब्ध कराया. वास्तव में आज यदि जांच किया जाय तो कई आदिवासियों, मुलवासियों के जमीन कब्जा किए हुए मिलेंगे.आज आदिवासी मुलवासी सुरक्षित नहीं है।

वहीं बेबी महतो ने कहा कि झारखंडी भाषा खतियानी संघर्ष समिति ने झारखंडवासियों के हक और अधिकार के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं. सरकार ने अभी तक झारखंडवासियों को जितनी हक मिलना चाहिए नहीं दिया है.हक और अधिकार के लिए कई आंदोलन किये मगर अभी तक नहीं मिला. इस लिए पार्टी ने निर्णय लिया कि अब लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव लड़ कर अपने जीते हुए प्रत्याशी के माध्यम से सदन में हक और अधिकार को उठायेंगे।

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आदिवासी दिशोम जाहेर गाड़ विकास समिति ने शिद्धु कान्हू की पूजा कर मनाया हुल दिवस।

आदिवासी दिशोम जाहेर गाड़ विकास समिति ने शिद्धु कान्हू की पूजा कर मनाया हुल दिवस।

राजनगर

राजनगर: राजनगर बाजार स्थित सिदो कान्हु चौक में शुक्रवार को आदिवासी दिशोम जाहेर गाढ़ समिति राजनगर की ओर से हुल दिवस बड़ी धुम धाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया. हुल दिवस के अवसर पर आदिवासी दिशोम जाहेर गाढ़ के नायके ( पुजारी )बिशु हेम्ब्रम ने आदिवासी रीति-रिवाज के अनुसार राजनगर बाजार स्थित सिदो कान्हु के मुर्ति स्थापित जगह पर हड़िया एवं लड्डू की पुजा अर्चना की।

मौके पर आदिवासी दिशोम जाहेर गाढ़ समिति राजनगर के अध्यक्ष बीजू बास्के ने कहा कि सिदो कान्हु के नेतृत्व में अंग्रेजों के हुकुमत एवं महाजन प्रथा के खिलाफ लड़ाई लड़ी. सिदो कान्हु ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ कर सीएनटी एक्ट मिला. जो आदिवासियों का सुरक्षा कवच है. आज हमें उन्हीं के पदचिन्ह पर चलने की आवश्यकता है.

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इस अवसर पर नायके बिशु हेम्ब्रम, बीजू बास्के, रायसेन मार्डी, धानू टुडू, मुनीराम हेम्ब्रम, सुराय मुर्मू, सावन सोय, मोटाय मेलगांडी, सुशील सुंडी, सिदो मुर्मू, कालीचरण हांसदा, सुतीलाल हांसदा, सिंघु हेम्ब्रम, सीताराम हांसदा, प्रेम मार्डी आदि उपस्थित थे।

संयुक्त आदिवासी सामाजिक संगठन चांडील अनुमंडल ने हुल दिवस पर शहीदों को किया नमन।

संयुक्त आदिवासी सामाजिक संगठन चांडील अनुमंडल ने हुल दिवस पर शहीदों को किया नमन।

सरायकेला/चांडिल

बाइक रोड शो निकाल कर समान नागरिक संहिता कानून का किया भारी विरोध प्रदर्शन।

चांडिल: संयुक्त आदिवासी सामाजिक संगठन चांडिल अनुमंडल ने शुक्रवार को शहीद बिरसा मुंडा सेतु कामारगौड़ा से शहीद गंगानारायण सिंह चौक पुंडीशीली ,शहीद सिदो -कान्हु चौक चांडील गोलचक्कर, शहीद फूलो – झानो चौक, शहीद सिदो -कान्हु चौक गौरांगकोचा तक निकाला विशाल बाइक रोड शो। तमाम शहीदों को बारी – बारी से पुष्प अर्पित कर दिया श्रद्धांजलि।विशाल रोड शो निकाल कर समान नागरिक संहिता कानून का किया पुरजोर विरोध प्रदर्शन। रोड शो समाप्ति के बाद गौरांगकोचा में आयोजित हुल जनसभा में हुए शामिल।

मीडिया से मुखातिब होते हुए संयुक्त आदिवासी सामाजिक संगठन चांडील अनुमंडल के प्रवक्ता सुधीर कुस्कू ने कहा की समान नागरिकता संहिता कानून आदिवासी समाज के लिए गले का फंदा है। यह कानून लागू होने से आदिवासी समाज की पहचान और अस्तित्व ही मीट जाएगी। आदिवासी समाज के मूल पहचान हो जाएगी खत्म। आदिवासी समाज की कास्टोमरी लॉ खत्म हो जाएगी। किस्कू ने आगे कहा कि आदिवासी समाज अपनी अस्तित्व को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाएगी।संयुक्त आदिवासी सामाजिक संगठन चांडील अनुमंडल समान नागरिक संहिता कानून का विरोध आगे गांव गांव तक ले जाएगी और भारी विरोध करेगी।इस कानून से आदिवासी समाज के लिए बने विशेष कानून सीएनटी/एसपीटी एक्ट, पेसा एक्ट, पांचवी अनुसूची और छठी अनुसूची खत्म हो जाएगी।आदिवासी समाज की आरक्षण खत्म हो जाएगी। किसी भी हाल में इस कानून को लागू नही होने देंगे।इस तरह से आयोजित हुल जनसभा में बारी- बारी सभी वक्ताओं समान नागरिक संहिता कानून का कड़ा विरोध किया गया।

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मौके पर श्यामल मार्डी, पारगाना रामेश्वर बेसरा ,श्याम सिंह सरदार, सुखराम हेंब्रम, चारुचंद किस्कू, रविंदर सरदार, जगदीश सिंह सरदार, भद्रु सिंह सरदार, लक्षण सिंह, सुरेंदर सिंह ज्योतीलाल बेसरा, धनेश्वर मुर्मू, भादूडीह माझी बाबा बुद्धेश्वर मारडी, डोमन बास, प्रकाश मारडी जगन्नाथ किस्कू, रवींद्रनाथ सिंह , बधुसूदन हेंब्रम और भी संगठन के सक्रिय सदस्य गण एवं आदिवासी अगुवा गण उपस्थित थे।

आदित्यपुर मिरूडीह सिदो कान्हू के प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गयाऔर हुल दिवस मनाया।

आदित्यपुर मिरूडीह सिदो कान्हू के प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गयाऔर हुल दिवस मनाया।

सरायकेला/आदित्यपुर

आदित्यपुर: वीर अमर सिदो-कान्हू स्मारक विकास सेवा समिति मीरुडीह द्वारा शुक्रवार को मीरुडीह चौक पर हूल दिवस मनाया गया. सर्वप्रथम सिदो-कान्हू की मूर्ति पर माल्यार्पण किया गया. फिर समिति के लोगों ने पूजा की. मौके पर भाजपा नेता बास्को बेसरा, शैलेंद्र सिंह, आरआईटी मंडल अध्यक्ष अमितेश अमर थे।

भाजपा नेता वास्को बेसरा ने कहा कि देश की आजादी का पहला आंदोलन हूल दिवस था. इसके प्रणेता सिदो-कान्हू थे. 1855 में अंग्रेजों ने सिदो-कान्हू को फांसी दे दी थी. सिदो कान्हू ने अपने जल जंगल और अपनी माटी को बचाने के लिए बलिदान दिया इसीलिए संथाली उसी समय से 30 जून को हूल दिवस मनाया जाता है. कार्यक्रम के आयोजन में समिति के अध्यक्ष डॉ बेसरा के साथ सदस्य रामेश्वर मार्डी, मंगल टुडू, मधुसुदन मार्डी, चैतन्य मुर्मू आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा

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नारायण प्राइवेट आईटीआई संस्थान परिसर में सिदो-कान्हू के तस्वीर पर कर्मचारियों ने श्रद्धा सुमन अर्पित की गई।

नारायण प्राइवेट आईटीआई संस्थान परिसर में सिदो-कान्हू के तस्वीर पर कर्मचारियों ने श्रद्धा सुमन अर्पित की गई।

सरायकेला

सरायकेला : नारायण प्राइवेट आईटीआई संस्थान परिसर में सिदो-कान्हू के तस्वीर पर सभी कर्मचारियों के द्वारा तस्वीर पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर हुल दिवस मनाया गया।इस अवसर पर संस्थान के संस्थापक डाक्टर जटा शंकर पांडे ने कहा सिदो-कान्हू मुर्मू का जन्म भोगनाडीह नामक गाँव में एक संथाल आदिवासी परवार में हुआ था जो कि वर्तमान में झारखण्ड के साहेबगंज जिला के बरहेट प्रखंड में है। सिदो मुर्मू का जन्म 1815 ई0 में हुआ था एवं कान्हू मुर्मू का जन्म 1820 ई0 में हुआ था।संथाल विद्रोह में सक्रिय भूमिका निभाने वाले इनके और दो भाई भी थे जिनका नाम चाँद मुर्मू और भैरव मुर्मू था।

इन छः भाई बहनो का जन्म भोगनाडी गाँव मे हुआ था जो कि वर्तमान में झारखण्ड राज्य के संथाल परगाना परमण्ल के साहेबगंज जिला के बरहेट प्रखण्ड के भोगनाडीह में है।
सिदो ने अपनी दैवीय शक्ति का हवाला देते हुए सभी मांझीयों को साल की टहनी भेजकर संथाल हुल में शामिल होने के लिए आमंत्रन भेजा। 30 जून 1855 को भेगनाडीह में संथालो आदिवासी की एक सभा हुई जिसमें 400 गांवों के 50000 संथाल एकत्र हुए।जिसमें सिदो को राजा, कान्हू को मंत्री, चाँद को मंत्री एवं भैरव को सेनापति चुना गया। संथाल विद्रोह भोगनाडीह से शुरू हुआ जिसमें संथाल तीर-धनुष से लेस अपने दुश्मनो पर टुट पड़े।

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संस्थान में मुख्य रूप से उपस्थित थे महाधिवक्ता निखिल कुमार , बिमल ओझा ,हरी नारायण साहू, शांति राम महतो महतो ,पवन कुमार महतो,अजय मण्डल,शंकर दस,देव कृष्णा महतो, कृष्णा महतो, , गोराब महतो, आदि मौजूद थे।

गौरंगकोचा स्थित स्थापित संथाल सिदो कान्हू के प्रतिम माल्यापर्ण एवं श्रद्धांजलि दी गई।

गौरंगकोचा स्थित स्थापित संथाल सिदो कान्हू के प्रतिम माल्यापर्ण एवं श्रद्धांजलि दी गई।

सरायकेला/चांडिल

हूल दिवस के अवसर पर शुक्रवार को ईचागढ़ प्रखंड के गौरांगकोचा स्थित ब्लॉक मोड़ पर स्थापित संथाल हुल के अमर नायक सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यापर्ण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई. मौके पर गौरांगकोचा के माझी बाबा धनेश्वर मुर्मू की अगुवाई में पूजा-अर्चना की गई. इसके बाद उपस्थित लोगों ने भी श्रद्धा सुमन अर्पित किया. इस अवसर पर समाजसेवी भूषण मुर्मू ने कहा कि क्रांति के महानायक सिदो-कान्हू और उनके भाई-बहनों का किसी के गुलामी के खिलाफ प्रतिबद्धता, माटी के प्रति प्रेम और समाज के प्रति समर्पण जन मानस के बीच ऊर्जा पैदा करता है।

एक और क्रांति की जरूरत।

भूषण मुर्मू ने कहा कि वर्तमान समय में भी एक हूल यानी एक क्रांति की जरूरत है. यह किसी सरकार और व्यक्ति के विरूद्ध नहीं, व्यवस्था के विरूद्ध नहीं बल्कि अपना वजूद बचाने के लिए, समाज में फैले अंधविश्वास के लिए, सुशासन व पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए क्रांति की जरूरत है. उन्होंने कहा कि प्रकृति प्रेमी आदिवासियों को हर वर्ष एक-एक पौधा लगाने की आवश्यकता है. ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे और आदिवासियों का प्रकृति के साथ संबंध बना रहे. इस अवसर पर मुखिया राखोहरि सिंह मुंडा, निताई उरांव, रंजीत टुडू, खगेन महतो, गोविंद बंसरा, अजित मुर्मू, सपन सिंहदेव समेत बड़ी संख्या में लोग शामिल थे।

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