मुसाबनी
( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )

मुसाबनी– लाटिया जाहेरगाढ़ में आदिवासी समुदाय द्वारा धूम धाम से बाहा बोंगा का आयोजन किया गया । बाहा बोंगा के दिन लाटिया गांव में सुबह से ही बच्चों से लेकर बूढ़े बुजुर्ग तक बाहा बोंगा के रंग में रंगे हुए थे ।

सभी ग्रामीण आदिवासी परिधान में आदिवासी वाद्ययंत्र के बाजे गाजे के साथ गांव के नायके बाबा खेलाराम सोरेन को आदिवासी नृत्य के साथ जाहेरगाढ़ पूजा स्थल तक लाया गया और सरना धर्म के देवी देवताओं को पूजा अर्चना की गई । ग्रामीणों ने अपने अपने पूजा में मुर्गा बली दी गई । ग्रामीणों ने चढ़ाए गए वाले बली वाले मुर्गा का सोढ़े (प्रसाद) बनाकर ग्रहण किया गया ।
पूजा संपन्न होने के बाद जाहेरगाढ़ में उपस्थित महिलाओं ने नायके बाबा से आशीर्वाद लेते हुए माथे के खोपा पर और पुरुषों ने कान पर साल का फूल लगाकर शाम होते ही लाटिया जाहेरगाढ़ में आदिवासी महिला – पुरुषों ने सामूहिक रूप से बाहा नृत्य का आनंद लिया और आस पास के लोगों को भी आनंदित किया । बाहा नृत्य के बाद पूर्व संध्या पर ग्रामीणों ने नाच गान के साथ नायके बाबा को अपने निवास स्थान तक पहुंचाया गया और ग्रामीण महिला पुरुषों ने रात भर नृत्य कर बाहा बोंगा का आनंद लिया ।
लाटिया जाहेरगाढ़ बाहा बोंगा का सफल आयोजन करने में मुख्य रूप से बुद्धेश्वर मुर्मू, साधु सेन महाली, सुराई बेसरा, युगल महाली, चंदन महाली, मोटू माहली, शामु माहली, जगदीश माहली, शिव माहली,तपन माहली,मुरगेश माहली, प्रसंजीत माहली,कमल माहली, अशोक महाली,जगदीश टुडू,रमेश टुडू , टेपा हेंब्रम, राजू हेंब्रम, तिलका माहली आदि का योगदान अहम रहा है।

