
“माँ तो माँ होती है साहब ” वो हार नहीं मानती कविता की इस लाइन से माँ के संघर्षो को बड़ी भावनात्मक तरीके से ई अशोक कुमार नें अपनी प्रस्तुति दी मौका था विजया मिलन सह कवि सम्मेलन नगर की साहित्यिक सांस्कृतिक सामाजिक संस्था परिमल के तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित कवियों कवित्रियों नें अपनी विधा प्रस्तुति की वहां मौजूद दर्शक श्रोताओं को साहित्यओं को साहित्यिक धारा में गोते लगाने को मजबूर कर दिया।
आदित्यपुर रोड न 7 वीर कुंवर सिंह मैदान में आयोजित इस कवि सम्मेलन में शहर और शहर के बाहर से आये कवियों देर रात तक अपनी शायरी कवितायो से दर्शकों को झूमाया राँची से आये शायर दिलशाद नजमी की शायरी की लाइन “अपने दुश्मन को दिल में जिन्दा रखिये नें” खूब तालियां बटोरी कवि दीपक वर्मा की कविता की लाइन “भ्र्ष्टाचार से भ्र्ष्टाचार को निकाल रहें है” नें ब्यबस्था पर चोट किया कवित्री शोभा किरण निवेदिता श्रीवास्तव उपासना सिन्हा कवि शायर संतोष चौबे सूरज सिँह राजपूत शशि ओझा संजय सुरीला भोगेन्द्र झा संचालक श्री नविन अग्रवाल अध्यछता ब्रिशिष्ठ कवि शायमल सुमन जी नें किया।
इससे पूर्ब कार्यक्रम का उद्घाटन ज़ियादा के क्षेत्रीय निदेशक श्री प्रेम रंजन जी नें किया इस अवसर पर समाजसेवी सरायकेला बार एसोशियन के उपाध्यक्ष ओम प्रकाश अम्बुज कुमार पांडे श्रीमती शारदा देवी श्री राम ठाकुर हरे कृष्णा दुबे मनोज कुमार सिंह रबिन्द्र नाथ चौबे अतिथि के रूप में उपस्थित थे कार्यक्रम को सफल बनाने में संयोजक सुरेश धारी सुबोध शरण अधिवक्ता अनिल सिंह लक्समन प्रसाद दिवाकर झा सहित अन्य लोग मौजूद थे।
