मां संतोषी पूजा के अवसर पर निकाली गई कलश यात्रा,,भक्तिमय हुआ मीरुडीह का क्षेत्र,,
सरायकेला/मीरुडीह
( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )
सरायकेला: सरायकेला जिले के आर आई टी थाना क्षेत्र अंतर्गत मीरूडीह बस्ती में मां संतोषी पूजा के अवसर पर निकाली गई कलश यात्रा
आपको बताते चलें कि इस कलश यात्रा में भारी संख्या में महिलाएं व पुरुषों ने भाग लिया यह कलश यात्रा मीरूडीह के 9 नंबर रोड से निकाली गई और सीतारामपुर डैम से कलश में पानी भरकर वापस 9 नंबर रोड में आकर कलश यात्रा का समापन किया गया
कलश यात्रा के समापन के बाद पंडित के मंत्रोच्चार से पूजा आरंभ की गई पूजा में भगवान के प्रति लोगों की आस्था देखते बनी वहां पूजा में मौजूद सभी लोगों ने माता की आरती की और अपने परिवार के सुख समृद्धि के लिए माता से आशीर्वाद मांगा वहीं स्थानीय लोगों की मानें तो यह संतोषी मां की पूजा पिछले 12 सालों से की जा रही है
भूमिज समाज के भोगता टांगान में शामिल हुए आजसू नेता हरेलाल महतो
सरायकेला/चांडिल
( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )
चांडिल: चांडिल प्रखंड के दलमा तराई क्षेत्र स्थित काठजोड़ गांव में 500 साल पहले से ऐतिहासिक चड़क पूजा का आयोजन होता आ रहा है। शुक्रवार रात को काठजोड़ में शिव पूजा (भोगता पूजा) का आयोजन हुआ। रात को सांस्कृतिक छौ नृत्य का आयोजन किया गया। वहीं, शनिवार सुबह से भोगता घूरा किया गया।
वहीं चडक पूजा में पाट भोगता श्रद्धालुओं ने पीठ पर लोहे की अंकुश लगवाया और रस्सी के सहारे सौ फीट ऊंची लकड़ी से झूलते है करतब दिखाए। शुक्रवार को दर्जनभर श्रद्धालुओं ने भोगता घूरा में भाग लिया। भोगता घूरा देखने के लिए दर्शकों की काफी भीड़ उमड़ी थी। काठजोड़ गांव के मंगल सिंह सरदार ने बताया कि यहां चार पीढ़ी से यह परंपरा चली आ रही हैं, तब भारत में अंग्रेजों का भी आगमन नहीं हुआ था।
भोगता घूरा के अवसर पर आजसू केंद्रीय सचिव हरेलाल महतो भी शामिल हुए। उन्होंने शिव मंदिर में माथा टेककर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर हरेलाल महतो ने रस्सी खींचकर भोगता श्रद्धालुओं को घुमाया। मौके पर हरेलाल महतो ने कहा कि चड़क पूजा, भोगता घूरा हमारी प्राचीन पूजा एवं संस्कृति का हिस्सा है। इससे प्राचीन भारत से चली आ रही हठयोग को दर्शाता है। चड़क पूजा में ग्रामीणों की काफी आस्था है। मौके पर भादूडीह के मुखिया बुद्धेश्वर बेसरा, पूर्व मुखिया नरसिंह सरदार, शत्रुघ्न सिंह, मंगल सिंह सरदार, आरती सिंह, षष्टी महतो, शिबू महतो आदि मौजूद थे।
पोटका:-तिरिंग मे सरहुल पूजा का भव्य आयोजन, पुरे गांव के लोग शामिल हुये
पूर्वी सिंहभूम
पोटका
नाया (पूजारी) ने सभी को गाल मे गुंड़ी लगाकर एवं साल फुल देकर आशिर्वाद दिया।
( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )
पोटका : पोटका प्रखंड अंतर्गत जुड़ी पंचायत के तिरिंग गांव मे सरहुल पूजा का आयोजन धूमधाम के साथ किया गया. इस आयोजन मे मौजा तिरिंग, रोलाघुटू एवं खेरनासाई के सैकड़ो लोग उत्साह के साथ शामिल हुये.
वहीं पूजा में महिला पारंपरिक भूमिज साड़ी एवं युवा धोती पहने हुये थे, पूजा के पश्चात नाया (पूजारी) जिगिनदर सरदार सभी को गाल मे गुड़ी लगाकर (चावल का पाउडर) एवं साल का फुल देकर आशिर्वाद दिया, जिसे महिलायें अपने खौंपा एवं पुरुष कान मे लगाकर सरहुल नृत्य किये. इस दौरान पुरे गांव मे सांस्कृतिक झलक देखने को मिले, जिसकी सराहना सभी ने किया.
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप मे पोटका के विधायक प्रतिनिधि भरत सरदार एवं विशिष्ट अतिथि के रूप मे पोटका के उप-प्रमुख उर्मिला सामाद, मुखिया सुकलाल सरदार एवं वार्ड सदस्य बासंती सरदार उपस्थित थी.
विधायक प्रतिनिधि भरत सरदार ने कहा कि तिरिंग गांव मे भूमिज समाज की एैतिहासिक सांस्कृतिक झलक देखने को मिला, जो गांव के लिए बहुत ही गर्व का विषय है. इसी तरह गांव के लोग परंपरा को बचाये रखे, ताकि हमारी पहचान बनी रहे. मौके पर उप-प्रमुख उर्मिला सामाद एवं मुखिया सुकलाल सरदार ने कहा कि तिरिंग गांव के हर स्तर से मजबूत किया जायेगा, जिसके तहत गांव को विकास के क्षेत्र मे बढ़ाने के साथ-साथ सांस्कृतिक क्षेत्र मे भी मजबूत किया जायेगा. दशकों बाद तिरिंग गांव मे भव्य सरहुल पूजा देखने को मिला, जो हम आगे भी जारी रखेंगे.
उक्त आयोजन को सफल बनाने मे ग्राम प्रधान मंजू सरदार, म्यूजिक मास्टर दशरथ सरदार, वार्ड सदस्य ललिता सरदार, गांव के शुरू सरदार, रोहिन सरदार, लालटू सरदार, झानकु सरदार, कोंदा सरदार, गोपाल सरदार, शाम सरदार, दीपक सरदार, कल्याणी सरदार, फुदेन सरदार, बुलेट सरदार, चांदराय सरदार, गयाराम सरदार, भीम सरदार, सुशील सरदार, बासु सरदार, हुसैन सरदार, शेखर सरदार समेत सभी लोगों का सराहनीय योगदान रहा.