उमड़ा आस्था का जन सैलाब,कीर्तन मंडली रहा आकर्षक का केंद्र,चहुंओर जय जगन्नाथ का उद्घोष

उमड़ा आस्था का जन सैलाब,कीर्तन मंडली रहा आकर्षक का केंद्र,चहुंओर जय जगन्नाथ का उद्घोष

मुसाबनी

मुसाबनी में रथ खींचने की मची रही होड़।

मुसाबनी: मुसाबनी में महाप्रभु की रथयात्रा मंगलवार को आस्था व जनसैलाब के साथ श्रद्धापूर्वक संपन्न हुई। रथ यात्रा में भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा था।
सुसज्जित रथों पर भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा की मूर्तियों को भजन कीर्तन के साथ मंदिर से लाकर रथ पर आसीन कराया गया। पूजा-अर्चना के साथ रथ यात्रा का शुभारंभ हुआ।

वहीं कार्यक्रम में विधायक रामदास सोरेन, पूर्व विधायक लक्ष्मण टूडू, डीएसपी चंद्रशेखर आजाद, डुमरिया बीड़ी साधु चरण देवगम, मुसाबनी बीडीओ सीमा कुमारी, आईसीसी के जीएम एसएस सेठी,प्लांट हेड एसके राउत, इंस्पेक्टर दीपक कुमार, थाना प्रभारी अंचित कुमार,घाटशिला जिला पार्षद कर्ण सिंह, गालूडीह जिला पार्षद सुभाष सिंह, डॉक्टर सुनीता देवदूत सोरेन, बाघराय मार्डी, कान्हू सामंत, प्रधान सोरेन,मुखिया बसंती सोरेन,दुलारी मुर्मु, जगन्नाथ सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष जीसी सतपति, राजा बिरेंद्र नारायण सिंह देव, दिनेश साव, बादल लामा, संजय महंती, तपन पंडा, हिमांशु मिश्रा, अरविंद यादव, सत्या तिवारी, ऋषि देव प्रसाद, बी बी पटनायक, पप्पू सिंह, विरमान लामा,हिमांशु पात्रो,तुषारकान्त पातर, शत्रुघ्न प्रसाद, ग्राम प्रधान गौरव किस्कू सहित अन्य गणमान्य लोगों का कमेटी द्वारा अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया।

अतिथियों ने नारियल फोड़कर महाप्रभु की पूजा-अर्चना की। इसके बाद सभी ने रथ का रस्सा खींचकर रथ यात्रा की शुरुआत की। रथ के ऊपर से प्रसाद आदि का वितरण किया जा रहा था। रथ पर सवार श्रद्धालु मिठाई, केला, कटहल, पीठा आदि विभिन्न प्रकार के प्रसाद वितरण करते रहे। रथ यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।

रथ खींचने की लगी रही होड़

भक्ति भाव से विभोर होकर बच्चे, बूढ़े, जवान सभी रथ खींचने को होड़ करते रहे, महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रसाद चढ़ाने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ देर रात्रि तक लगी रही। संध्या पांच बजे से लेकर देर रात्रि तक सड़क पर चहल-पहल व मेले का माहौल रहा। रथ यात्रा में शांति बनाए रखने के लिए भी पुलिस के जवान तैनात रहे।

मुसाबनी नं. 1 दुर्गा मंडप में बनाया गया मौसीबाड़ी

रथ यात्रा मुसाबनी नं. 2 स्थित जगन्नाथ मंदिर से बाबू लाइन मुसाबनी नं. 1 दुर्गा मंडप परिसर मौसीबाड़ी तक महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व सुभद्रा को रथ पर बैठाकर रथ खींचकर श्रद्धालु रथ को दुर्गा मंडप मौसी बाड़ी तक लेकर आये। रथ यात्रा में हज़ारो लोगो की भीड़ थी। ग्रामीण क्षेत्र से सैकड़ों की संख्या में लोग रथ यात्रा में शामिल होने पहुंचे थे। हर वर्ष भक्तों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। महाप्रभु के प्रति लोगों की आस्था बढ़ी है। इस वर्ष भी परंपरा के अनुसार श्रद्धापूर्वक रथ यात्रा निकाली गई। रथ खींचने का पुण्य लाभ प्राप्त करने को लेकर लोगों में गजब का उत्साह दिखा। रथ यात्रा के दौरान लगे छोटे-मोटे मेले में बच्चों ने खूब धमा-चौकड़ी की। महिलाओं का उत्साह भी कम नहीं रहा। महिलाओं ने भी पूरी सक्रियता से रथ यात्रा में हिस्सा लिया।

पति की लंबी उम्र की कामना के लिए सुहागन महिलाएं ने वट सावित्री पूजा की

पति की लंबी उम्र की कामना के लिए सुहागन महिलाएं ने वट सावित्री पूजा की

आदित्यपुर

( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )

आदित्यपुर: पति की लंबी उम्र की कामना के लिए सुहागिन महिलाएं शुक्रवार को वट सावित्री की पूजा की हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष जेष्ठ माह की अमावस्या और पूर्णिमा तिथि को ये पूजा की जाती है। शुक्रवार के दिन विवाहित महिलाएं यमराज और माता सावित्री की पूजा करती हैं। साथ ही माता सावित्री के निमित्त व्रत भी रखती हैं। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि वट सावित्री व्रत करने से विवाहित स्त्रियों को सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही पति की आयु भी लंबी होती है। यह व्रत पति के दीर्घायु होने के लिए ही किया जाता है। वट सावित्री व्रत पर सुहागिन निर्जला उपवास कर डलिया और फलों से पूजा करती हैं। पति की लंबी उम्र की कामना को लेकर किए जाने वाले वट सावित्री व्रत का महिलाओं को साल भर इंतजार रहता है।

इस व्रत में सुहागिन महिलाएं फल-पकवान से वट वृक्ष की पूजा करती हैं। साथ ही अमर सुहाग की कामना भी करते हैं।वट सावित्री पूजा सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यह व्रत करने से महिलाओं को अखंड सुहाग का आशीष प्राप्त होता है।

अखंड सौभाग्य के लिए महिलाओं ने की वट सावित्री पूजा

अखंड सौभाग्य के लिए महिलाओं ने की वट सावित्री पूजा

मुसाबनी

( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )

मुसाबनी: मुसाबनी प्रखंड में शुक्रवार को वट सावित्री का पर्व धूमधाम से मनाया गया। मुसाबनी नंबर 1शिव मंदिर, मेड़िया काली मंदिर ,विश्वनाथ मंदिर मुसाबनी नंबर 3, महाकालेश्वर मंदिर मुसाबनी न्यू कॉलोनी आदि धार्मिक स्थलों पर महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर पतियों के दीर्घायु की कामना की। शहर व कस्बे के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं ने व्रत रख भगवान विष्णु की विधिविधान से पूजा-अर्चना की और उनसे सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद मांगा।

मुसाबनी शहरी इलाके के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं सुबह से ही सजने संवरने लगीं थी। अक्षत रोली से तिलक करने के बाद महिलाओं ने पंचामृत से भगवान विष्णु का पूजन वंदन किया। वट वृक्ष में धागा लपेटते हुए महिलाओं ने अखंड सौभाग्य की कामना कर व्रत रखा। पूजन-अर्चन कर महिलाओं ने पति की दीर्घायु के साथ ही परिवार में सुख-समृद्धि की कामना की।

पूजा अर्चना के बाद महिलाओं ने पंडित के वट सावित्री की कथा सुनी। सुबह से ही वट वृक्ष के नीचे महिलाओं की भीड़ लगने लगी थी। महिलाओं ने वट वृक्ष की परिक्रमा कर विधिविधान से पूजन वंदन किया। मौके पर महिलाओं ने पंडित को दान पुण्य भी किया।

घोड़ालांग में पांचवें दिन भी रंगारंग रहा श्रीमद् भागवत कथा का कार्यक्रम

घोड़ालांगा में पांचवें दिन भी रंगारंग रहा श्रीमद् भागवत कथा का कार्यक्रम

सरायकेला/सीनी

श्री भगवते वासुदेवाय नमः के नारे से गूंज उठा पूरा घोड़ालांग क्षेत्र

ईश्वर की भक्ति में डूबा पूरा घोड़ालांग क्षेत्र

जीवन जीने की सही प्रेरणा देती है श्रीमद भगवत कथा

( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )

सरायकेला: सिनी ओपी क्षेत्र अंतर्गत घोड़ालांग गांव में एडवोकेट दीनदयाल उपाध्याय के नेतृत्व में हो रहे श्रीमद् भागवत कथा महापुराण ज्ञान यज्ञ कार्यक्रम पांचवें दिन भी रंगारंग रहा

आगामी 16 मई तक चलने वाली श्रीमद् भागवत कथा महापुराण ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ पवित्र 108 कलशों के साथ श्री भगवते वासुदेवाय का जयकारा लगाते हुए भव्य कलश यात्रा के साथ किया गया इसके साथ-साथ ग्राम स्थित मंदिर में कलश स्थापना और पूजा पाठ के पश्चात पुष्पांजलि एवं भव्य आरती के कार्यक्रम किए गए

क्या होती है श्रीमद् भागवत कथा: नीचे पढ़ें

श्रीमद् भागवत कथा साक्षात भगवान श्री कृष्ण चंद्र जी महाराज का वांग्मय स्वरूप है जो काली काल के समस्त दोष ताप और पाप को नाश कर मृत्यु को भी मंगलमय बनाता है यह इस संसार का सर्वश्रेष्ठ सत्कर्म है जो किसी व्यक्ति के पुरुषार्थ के कारण ही नहीं पिछले जन्मों के पुण्य अर्जित होने के कारण मिलता है

वहीं महायज्ञ के पांचवें दिन भी व्यासपीठ से प्रयागराज से पधारें कथावाचक संजय त्रिवेदी एवं दीनदयाल मिश्रा द्वारा श्रीमद् भागवत कथा महापुराण का पाठ वाचन किया गया

वही कार्यक्रम के संचालक दीनदयाल उपाध्याय द्वारा बताया गया कि आगामी 16 मई को प्रार्थना के पश्चात पाठ एवं यज्ञ पूर्ण पूर्णाहुति के साथ दोपहर के 3:00 बजे से महाप्रसाद भोग वितरण करते हुए आध्यात्मिक कार्यक्रम का समापन किया जाएगा

आपको बताते चलें कि घोड़ालांग गांव में हो रहे श्रीमद् भागवत कथा महापुराण ज्ञान यज्ञ कार्यक्रम को गांव के सभी भक्तों ग्रामीणों के सहयोग से किया जा रहा है जिसमें की एडवोकेट दीनदयाल उपाध्याय, संजय त्रिवेदी और जगरनाथ आचार्य की अहम भूमिका रही

मां संतोषी पूजा के अवसर पर निकाली गई कलश यात्रा,,भक्तिमय हुआ मीरुडीह का क्षेत्र,,

मां संतोषी पूजा के अवसर पर निकाली गई कलश यात्रा,,भक्तिमय हुआ मीरुडीह का क्षेत्र,,

सरायकेला/मीरुडीह

( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )

सरायकेला: सरायकेला जिले के आर आई टी थाना क्षेत्र अंतर्गत मीरूडीह बस्ती में मां संतोषी पूजा के अवसर पर निकाली गई कलश यात्रा

आपको बताते चलें कि इस कलश यात्रा में भारी संख्या में महिलाएं व पुरुषों ने भाग लिया यह कलश यात्रा मीरूडीह के 9 नंबर रोड से निकाली गई और सीतारामपुर डैम से कलश में पानी भरकर वापस 9 नंबर रोड में आकर कलश यात्रा का समापन किया गया

कलश यात्रा के समापन के बाद पंडित के मंत्रोच्चार से पूजा आरंभ की गई पूजा में भगवान के प्रति लोगों की आस्था देखते बनी वहां पूजा में मौजूद सभी लोगों ने माता की आरती की और अपने परिवार के सुख समृद्धि के लिए माता से आशीर्वाद मांगा वहीं स्थानीय लोगों की मानें तो यह संतोषी मां की पूजा पिछले 12 सालों से की जा रही है

भूमिज समाज के भोगता टांगान में शामिल हुए आजसू नेता हरेलाल महतो

भूमिज समाज के भोगता टांगान में शामिल हुए आजसू नेता हरेलाल महतो

सरायकेला/चांडिल

( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )

चांडिल: चांडिल प्रखंड के दलमा तराई क्षेत्र स्थित काठजोड़ गांव में 500 साल पहले से ऐतिहासिक चड़क पूजा का आयोजन होता आ रहा है। शुक्रवार रात को काठजोड़ में शिव पूजा (भोगता पूजा) का आयोजन हुआ। रात को सांस्कृतिक छौ नृत्य का आयोजन किया गया। वहीं, शनिवार सुबह से भोगता घूरा किया गया।

वहीं चडक पूजा में पाट भोगता श्रद्धालुओं ने पीठ पर लोहे की अंकुश लगवाया और रस्सी के सहारे सौ फीट ऊंची लकड़ी से झूलते है करतब दिखाए। शुक्रवार को दर्जनभर श्रद्धालुओं ने भोगता घूरा में भाग लिया। भोगता घूरा देखने के लिए दर्शकों की काफी भीड़ उमड़ी थी। काठजोड़ गांव के मंगल सिंह सरदार ने बताया कि यहां चार पीढ़ी से यह परंपरा चली आ रही हैं, तब भारत में अंग्रेजों का भी आगमन नहीं हुआ था।

भोगता घूरा के अवसर पर आजसू केंद्रीय सचिव हरेलाल महतो भी शामिल हुए। उन्होंने शिव मंदिर में माथा टेककर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर हरेलाल महतो ने रस्सी खींचकर भोगता श्रद्धालुओं को घुमाया। मौके पर हरेलाल महतो ने कहा कि चड़क पूजा, भोगता घूरा हमारी प्राचीन पूजा एवं संस्कृति का हिस्सा है। इससे प्राचीन भारत से चली आ रही हठयोग को दर्शाता है। चड़क पूजा में ग्रामीणों की काफी आस्था है। मौके पर भादूडीह के मुखिया बुद्धेश्वर बेसरा, पूर्व मुखिया नरसिंह सरदार, शत्रुघ्न सिंह, मंगल सिंह सरदार, आरती सिंह, षष्टी महतो, शिबू महतो आदि मौजूद थे।

पोटका:-तिरिंग मे सरहुल पूजा का भव्य आयोजन, पुरे गांव के लोग शामिल हुये

पोटका:-तिरिंग मे सरहुल पूजा का भव्य आयोजन, पुरे गांव के लोग शामिल हुये

पूर्वी सिंहभूम

पोटका

नाया (पूजारी) ने सभी को गाल मे गुंड़ी लगाकर एवं साल फुल देकर आशिर्वाद दिया।

( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )

पोटका : पोटका प्रखंड अंतर्गत जुड़ी पंचायत के तिरिंग गांव मे सरहुल पूजा का आयोजन धूमधाम के साथ किया गया. इस आयोजन मे मौजा तिरिंग, रोलाघुटू एवं खेरनासाई के सैकड़ो लोग उत्साह के साथ शामिल हुये.

वहीं पूजा में महिला पारंपरिक भूमिज साड़ी एवं युवा धोती पहने हुये थे, पूजा के पश्चात नाया (पूजारी) जिगिनदर सरदार सभी को गाल मे गुड़ी लगाकर (चावल का पाउडर) एवं साल का फुल देकर आशिर्वाद दिया, जिसे महिलायें अपने खौंपा एवं पुरुष कान मे लगाकर सरहुल नृत्य किये. इस दौरान पुरे गांव मे सांस्कृतिक झलक देखने को मिले, जिसकी सराहना सभी ने किया.

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप मे पोटका के विधायक प्रतिनिधि भरत सरदार एवं विशिष्ट अतिथि के रूप मे पोटका के उप-प्रमुख उर्मिला सामाद, मुखिया सुकलाल सरदार एवं वार्ड सदस्य बासंती सरदार उपस्थित थी.

विधायक प्रतिनिधि भरत सरदार ने कहा कि तिरिंग गांव मे भूमिज समाज की एैतिहासिक सांस्कृतिक झलक देखने को मिला, जो गांव के लिए बहुत ही गर्व का विषय है. इसी तरह गांव के लोग परंपरा को बचाये रखे, ताकि हमारी पहचान बनी रहे. मौके पर उप-प्रमुख उर्मिला सामाद एवं मुखिया सुकलाल सरदार ने कहा कि तिरिंग गांव के हर स्तर से मजबूत किया जायेगा, जिसके तहत गांव को विकास के क्षेत्र मे बढ़ाने के साथ-साथ सांस्कृतिक क्षेत्र मे भी मजबूत किया जायेगा. दशकों बाद तिरिंग गांव मे भव्य सरहुल पूजा देखने को मिला, जो हम आगे भी जारी रखेंगे.

उक्त आयोजन को सफल बनाने मे ग्राम प्रधान मंजू सरदार, म्यूजिक मास्टर दशरथ सरदार, वार्ड सदस्य ललिता सरदार, गांव के शुरू सरदार, रोहिन सरदार, लालटू सरदार, झानकु सरदार, कोंदा सरदार, गोपाल सरदार, शाम सरदार, दीपक सरदार, कल्याणी सरदार, फुदेन सरदार, बुलेट सरदार, चांदराय सरदार, गयाराम सरदार, भीम सरदार, सुशील सरदार, बासु सरदार, हुसैन सरदार, शेखर सरदार समेत सभी लोगों का सराहनीय योगदान रहा.

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