ट्रैफिक इंस्पेक्टर अजय तिवारी की लापरवाही से नहीं संभाल रहा है ट्रैफिक व्यवस्था।
वहान जांच के नाम पर पैसे की हो रही उगाही,, जिले वासीयों में आक्रोश
जानता है परेशान ट्रैफिक सिपाही है मालामाल।
सरायकेला-खरसावां
सरायकेला खरसावां जिले की ट्रैफिक व्यवस्था चरमराती हुई नजर आ रही है। हेलमेट, लाइसेंस, गाड़ी के कागजात सीट बेल्ट एवं मोटरसाइकिल पर ट्रिपल लोडिंग जांच के नाम पर पैसे की उगाही चरम सीमा पर पहुंच चुकी है। ट्रैफिक व्यवस्था में लगाए गए पुलिस कर्मियों को कानून को ताक पर रखकर अपनी जेब भरने से मतलब है।

सूत्रों ने यह जानकारी दी है कि जिले में ट्रैफिक व्यवस्था की स्थिति चरमराने से जनता में आक्रोश देखा जा रहा है।
ट्रैफिक इंस्पेक्टर से नहीं संभाल पा रही है जिला की ट्रैफिक व्यवस्था। पैसा दीजिए चालान भरने की आवश्यकता नहीं जेब का भरना जरूरी है। क्योंकि 60 और 40 का हिसाब को कायम रखना है।
सूत्रों ने यह भी बताया है कि ट्रैफिक के सिपाही जन मानस को डरा कर घूस लेने के लिए पहचानी जाती है। ट्रैफिक सिपाही या फिर ट्रैफिक इंस्पेक्टर अगर किसी को पकड़ता है तो नियमबद्ध उसे ऑनलाइन चालान करना चाहिए ना की डरा धमका कर चालान करना चाहिए। वहीं लोग अगर चालान भरने को राजी भी है तो उसे चालान नहीं भरवा कर घुस लेकर छोड़ दिया जाता है।
यह स्टींग ऑपरेशन को देखिए जिससे सरकार का राजस्व का नुकसान हो रहा है ट्रैफिक के सिपाही के द्वारा ट्रैफिक इंस्पेक्टर का जेब भर रहा है
सूत्रों ने यह भी बताया है कि प्रतिदिन ट्रैफिक इंस्पेक्टर को आंख खुलते ही ₹100000 टेबल पर चाहिए उनके अपने लिए बाकी बचे पैसों को सिपाही आपस में बांट लेते हैं। कलेक्शन का 40% सरकार को जिला से दिया जाता है बची हुई 60% में 40% इंस्पेक्टर का और 20% में सभी सिपाही आपस में बटवारा कर लेते हैं।
यहां पर कहने का मतलब है कि पर सिपाही कम से कम ₹5000 से ₹10000 घर लेकर जाते हैं।
अगर यह अवैध पैसा सरकारी राजस्व में जमा होता तो झारखंड की स्थिति में कुछ और सुधार हुई होती। लेकिन यहां तो लूट मचा हुआ है।
जनता को लूटिए अपना जेब भरिए साथ में झारखंड सरकार से पेमेंट भी लीजिए और नियम को ताख (किनारे )में रख दीजिए। सर्विस रोड में वैसे ही बड़ी-बड़ी गाड़ियों का लग जाने से जाम देखा जा रहा है। चालान करने की वजह घूस लेकर के छोड़ा जा रहा है।























