सरायकेला-खरसावां
बिरसा मुंडा स्टेडियम परिसर में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की मूर्ति लगाने को लेकर चल रहे विवाद पर झामुमो नेता गणेश महाली ने पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन पर तीखा हमला बोला है। झामुमो के केंद्रीय सदस्य और सरायकेला के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी महाली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि पार्टी का स्टेडियम का नाम बदलने का कोई इरादा कभी नहीं था।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आदिवासी समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए झामुमो ने स्टेडियम परिसर में प्रतिमा न लगाने का फैसला किया है। शिबू सोरेन की प्रतिमा के लिए अब कोई दूसरा उचित स्थान तलाशा जाएगा।
गणेश महाली ने कहा कि स्थानीय विधायक चंपाई सोरेन के पास उठाने लायक कोई बड़ा मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे भगवान बिरसा मुंडा के नाम पर लोगों में भ्रम फैला रहे हैं। उनका आरोप है कि इस बहाने कोल्हान के आदिवासी और मूलवासी समाज में फूट डालने का प्रयास हो रहा है।
उन्होंने दोहराया कि झामुमो ने हमेशा झारखंड के शहीदों और आंदोलनकारियों को सम्मान दिया है। स्टेडियम का नाम परिवर्तन को लेकर पार्टी की तरफ से न कोई प्रस्ताव आया था, न ही ऐसी कोई योजना थी।
2007 की एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए महाली ने चंपाई सोरेन से सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि मधु कोड़ा के शासनकाल में सरायकेला के एनआर हाई स्कूल के सामने वाले पार्क का नाम ‘बिरसा उद्यान’ से बदलकर ‘सिद्धू-कान्हू पार्क’ किया गया था, उस समय यह फैसला किसके स्तर से हुआ था, इसका जवाब देना चाहिए।
महाली ने कहा कि चंपाई सोरेन ने शिबू सोरेन के मार्गदर्शन और झामुमो के बैनर तले ही लंबा राजनीतिक सफर तय किया। कई बार विधायक, मंत्री बनने के बाद वे मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे। ऐसे में अब शिबू सोरेन की प्रतिमा का विरोध करना समझ से परे है।
उन्होंने कहा कि अलग झारखंड राज्य के संघर्ष में दिशोम गुरु की भूमिका अतुलनीय रही है। अगर प्रतिमा लगाने के प्रस्ताव से आदिवासी समाज के किसी तबके की भावना आहत हुई है, तो इसके लिए पार्टी खेद जताती है।
महाली ने अंत में कहा कि इसी संवेदनशीलता को देखते हुए प्रतिमा स्थापना की जगह बदलने का निर्णय लिया गया है और जल्द ही किसी अन्य उपयुक्त स्थल पर इसे स्थापित किया जाएगा।











