मुसाबनी
मुसाबनी: मुसाबनी अग्रसेन भवन में आयोजित सात दिवसीय श्री शिवमहापुराण कथा का समापन मंगलवार को प्रवचन, हवन पूजन व भव्य भंडारे के आयोजन से हुआ इस मौके पर व्यास पीठ पर बैठे स्वामी हंसानन्द गिरि जी महाराज द्वारा प्रसाद के रूप में सिद्ध किए गए एक एक रुद्राक्ष सभी भक्तों को प्रदान किया गया। कथा के अंतिम दिन उन्होंने भक्तों को शिव की महिमा एवं उनके मंत्र उच्चारण विधि की जानकारी दी। उन्होंने कथा में कहा कि एक घर में एक ही देवस्थान होना चाहिए ।भगवान की पूजा भी एक जगह ही होनी चाहिए। शयन कक्ष में मंदिर नहीं होना चाहिए। यदि कोई घर पर मंदिर बनाते हैं तो उसमें गुंबद व शिखर ना बनाएं। मंदिर के ऊपर और कोई कमरा नहीं होना चाहिए। घर में यदि चूल्हा चौकी एक है तो मंदिर भी एक ही होना चाहिए। उन्होंने भगवान की पूजन विधि के बारे में बताया कहा भगवान का पूजा नित्य समयानुसार करें। इससे भक्तों को मनचाहा फल मिलता है।भक्तों से कहा कि मंगलवार के दिन कोई भी धन कर्ज के रूप में ना लें। मंगलवार के दिन लिया गया कर्ज कभी समाप्त नहीं होता। यदि लिया गया कर्ज चुकाना है तो मंगलवार को चुका दें। इससे धन में बरक्कत आती है। कथा के क्रम में उन्होंने बाणासुर की रोचक कथा भी सुनाई। उन्होंने कहा की शिव महापुराण की कथा का विश्राम कभी नहीं होता। भगवान स्वंय विराट है ,विशाल हैं ।उनकी कथा अनंत है ।


उन्होंने अपनी कथा में व्यापारी वर्ग को सचेत करते हुए कहा कि घर, ऑफिस , दुकान या फैक्ट्री में आपने तिजोरी रखा है तो हमेशा तिजोरी दक्षिण दीवाल की तरफ होना चाहिए और उसका पल्ला उत्तरमुखी खुलना चाहिए। इस तिजोड़ी में रखे गए धन स्थाई होता है। अन्य दिशा में रखे तिजोरी का धन स्थायित्व प्रदान नहीं करता। उन्होंने अधिक मास में सुनी गई शिव महापुराण की कथा लोगों को शिवलोक प्राप्त कराता है। बड़ी दूर से चलकर आया हूं, बाबा तेरे दर्शन के लिए, एक बेलपत्र मैं लाया हूं चरणों में तेरे अर्पण के लिए—- गाय गए भजन पर श्रद्धालु झूमने लगे।





















