भारत अब कूटनीति के माध्यम से विश्व राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था के केंद्र में तेजी से अपनी जगह बना रहा है।

भारत अब कूटनीति के माध्यम से विश्व राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था के केंद्र में तेजी से अपनी जगह बना रहा है।

गोंदिया/महाराष्ट्र

भारत की सक्रिय कूटनीति, वैश्विक रणनीतिक साझेदारियाँ मील का पत्थर साबित होगी- वैश्विक निवेश प्रवाह, विदेशी संस्थागत निवेश, ऊर्जा कंपनियों रक्षाउद्योग टेक्नोलॉजी सेक्टर पर दुर्गामी प्रभाव -समग्र व्यापक विश्लेषण

भारत क़ा विश्व राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था के केंद्र में तेजी से अपनी जगह बनाने का सकारात्मक प्रभाव,अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के विश्वास,विदेशी पूंजी प्रवाह, रणनीतिक उद्योगों और शेयर बाजारों की दीर्घकालिक दिशा पर पड़ेगा -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी

वैश्विक स्तरपर मई 2026 के तीसरे सप्ताह में भारत की विदेश नीति और वैश्विक कूटनीतिक सक्रियता ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति के साथ-साथ भारतीय तथा वैश्विक वित्तीय बाजारों तथा अर्थव्यवस्थाओं का भी ध्यान आकर्षित किया।

एक ओर भारत के पीएम की 15 से 20 मई 2026 संयुक्त अरब अमीरात नीदरलैंड, स्वीडन,नॉर्वे और इटली की बहु-देशीय यात्रा ने ऊर्जा सुरक्षा,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,हरित प्रौद्योगिकी, रक्षा सहयोग और रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को नई गति दी, वहीं दूसरी ओर साइप्रस के राष्ट्रपति निकोसक्रिस्चिदोलिडेस की 20 से 23 मई 2026 भारत यात्रा ने यूरोप और भूमध्य सागरीय क्षेत्र में भारत की आर्थिक उपस्थिति को मजबूत करने के संकेत दिए। इसी क्रम में अमेरिकी विदेश मंत्री मारको रूबीओ का शनिवार 23 मई 2026 शाम को भारत आगमन और क्वाड देशों की बैठक ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को और मजबूत बनाया।

मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि इन तीनों घटनाओं का संयुक्त प्रभाव केवल कूटनीतिक व भारतीय अर्थव्यवस्था पर ही नहीं बल्कि वैश्विक निवेश प्रवाह, विदेशी संस्थागत निवेश,भारतीय शेयर बाजार, ऊर्जा कंपनियों, रक्षा उद्योग, टेक्नोलॉजी सेक्टर और अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों पर भी सटीकता वह गहराई से पड़ने वाला है।

साथियों, सबसे पहले यदि भारतीय पीएम की पांच देशों की यात्रा को आर्थिक दृष्टि से देखा जाए तो यह स्पष्ट होता है कि भारत अब केवल विकासशील अर्थव्यवस्था नहीं बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, डिजिटलअर्थव्यवस्था और रणनीतिक भू-राजनीतिक संतुलन का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। संयुक्त अरब अमीरात के साथ भारत के संबंध पहले से ही ऊर्जा, निवेश और व्यापार के आधार पर मजबूत रहे हैं, लेकिन इस यात्रा में ऊर्जा सुरक्षा और भविष्य की प्रौद्योगिकियों पर जो जोर दिया गया, उसने निवेशकों के बीच भारत के प्रति भरोसा और बढ़ाया है। यूएई पहले से भारत के सबसे बड़े निवेश साझेदारों में से एक है। यदि ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल्स, ग्रीन हाइड्रोजन और इंफ्रास्ट्रक्चर में संयुक्त निवेश तेजी पकड़ता है तो भारतीय शेयर बाजार में रिलायंस, ओएनजीसी, इंडियन ऑयल, अदाणी समूह और ग्रीन एनर्जी कंपनियों के शेयरों में दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए यह संकेत है कि भारत भविष्य की ऊर्जा अर्थव्यवस्था में केंद्रीय भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है।ऊर्जा सुरक्षा का प्रश्न वैश्विक निवेशकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि तेल और गैस की कीमतें सीधे मुद्रास्फीति, औद्योगिक लागत और कॉरपोरेट मुनाफे को प्रभावित करती हैं। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच यदि भारत यूएई जैसे स्थिर साझेदारों के साथ दीर्घकालिक ऊर्जा आपूर्ति समझौते करता है तो इससे भारतीय अर्थव्यवस्था की ऊर्जा लागत स्थिर रह सकती है। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर सकारात्मक होगा क्योंकि ऊर्जा आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं में स्थिर आपूर्ति निवेशकों का भरोसा बढ़ाती है। विदेशी संस्थागत निवेशक ऐसे देशों में पूंजी लगाना पसंद करते हैं जहाँ ऊर्जा संकट की संभावना कम हो। इसलिए यह यात्रा भारतीय बाजारों के लिए स्थिरता का संकेत बन सकती है। नीदरलैंड और स्वीडन की यात्रा का महत्व तकनीकी और नवाचार आधारित निवेशों के संदर्भ में और भी बड़ा माना जा रहा है। नीदरलैंड सेमीकंडक्टर, लॉजिस्टिक्स और स्मार्ट पोर्ट टेक्नोलॉजी का वैश्विक केंद्र है। यदि भारत इस क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग बढ़ाता है तो इसका सीधा प्रभाव भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षमता पर पड़ेगा। वर्तमान समय में दुनिया चीन पर निर्भर सप्लाई चेन को विविध बनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में भारत यदि यूरोपीय तकनीकी सहयोग के साथ सेमीकंडक्टर और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में आगे बढ़ता है तो इससे भारतीय टेक और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों में विदेशी निवेश बढ़ सकता है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, डिक्सन टेक्नोलॉजीज और सेमीकंडक्टर से जुड़ी नई भारतीय कंपनियों के प्रति निवेशकों का आकर्षण बढ़ सकता है।स्वीडन के साथ सहयोग का एक बड़ा आयाम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हरित उद्योग और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग है। वर्तमान वैश्विक शेयर बाजार में एआई आधारित कंपनियां निवेशकों की पहली पसंद बनी हुई हैं। अमेरिका में एनवीडिया जैसी कंपनियों की तेज वृद्धि ने दुनिया को यह दिखा दिया है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था एआई आधारित होगी।

साथियों, यदि भारत यूरोपीय देशों के साथ एआई अनुसंधान, डेटा सेंटर, क्लाउड टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा में सहयोग बढ़ाता है तो भारतीय आईटी कंपनियों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं।इससे इनफ़ोसिस टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज , विप्रो और एचसीएलटेक जैसी कंपनियों में दीर्घकालिक तेजी देखी जा सकती है। विदेशी निवेशक उन बाजारों की ओर आकर्षित होते हैं जहाँ भविष्य की तकनीकों में सरकारी और कूटनीतिक समर्थन दिखाई देता है।नॉर्वे की यात्रा का प्रभाव हरित ऊर्जा और समुद्री अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ माना जा रहा है। नॉर्वे दुनिया में ग्रीन शिपिंग, स्वच्छ ऊर्जा और संप्रभु संपत्ति कोष के लिए प्रसिद्ध है। नॉर्वे का सरकारी निवेश कोष दुनिया का सबसे बड़ा सॉवरेन वेल्थ फंड माना जाता है। यदि भारत और नॉर्वे के बीच हरित ऊर्जा, अपतटीय पवन ऊर्जा और समुद्री अवसंरचना में सहयोग बढ़ता है तो भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में बड़े विदेशी निवेश आने कीसंभावना बन सकती है। इससे भारतीय ग्रीन एनर्जी कंपनियों और ईएसज़ी आधारित निवेशों को मजबूती मिलेगी। आज दुनिया के बड़े निवेशक केवल लाभ नहीं बल्कि पर्यावरणीय स्थिरता को भी महत्व दे रहे हैं।

साथियों, भारत की ग्रीन डिप्लोमेसी शेयर बाजार के लिए नया सकारात्मक संकेत बन सकती है।इटली यात्रा का सबसे बड़ा महत्व यूरोप के साथ भारत की रणनीतिक आर्थिक साझेदारी में दिखाई देता है। इटली यूरोप की प्रमुख औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और प्रधानमंत्री जिओर्जिया मेलोनी के साथ भारत की बढ़ती निकटता यूरोपीय संघ में भारत की स्थिति को मजबूत कर सकती है। इससे रक्षा विनिर्माण, ऑटोमोबाइल, मशीनरी और फैशन उद्योगों में निवेश सहयोग बढ़ सकता है। यूरोप की कंपनियां चीन से उत्पादन हटाकर वैकल्पिक बाजार खोज रही हैं और भारत इसके लिए सबसे बड़ाउम्मीदवार बनकर उभर रहा है। यदि यह प्रवृत्ति मजबूत होती है तो भारतीय विनिर्माण क्षेत्र में तेज पूंजी प्रवाह संभव है। इससे “मेक इन इंडिया” अभियान को भी बल मिलेगा और भारतीय शेयर बाजार में औद्योगिक तथा पूंजीगत वस्तु कंपनियों में तेजी आ सकती है।

साथियों अब यदि साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टो डौलाइड्स की भारत यात्रा को निवेश और वित्तीय दृष्टि से समझें तो इसका महत्व काफी गहरा है। साइप्रस लंबे समय से भारत में विदेशी निवेश के मार्ग के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय निवेश फंड और कंपनियां साइप्रस के माध्यम से भारत में निवेश करती रही हैं। ऐसे में भारत और साइप्रस के बीच रणनीतिक साझेदारी बढ़ने का अर्थ है कि वित्तीय सहयोग, निवेश संरक्षण और पूंजी प्रवाह को नई मजबूती मिल सकती है। यह भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है क्योंकि विदेशी निवेशक ऐसे देशों में निवेश बढ़ाते हैं जहाँ द्विपक्षीय समझौते स्थिरता और कानूनी सुरक्षा प्रदान करते हैं।साइप्रस यात्रा के दौरान व्यापार, रक्षा, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग पर हुए समझौते अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए भरोसे का वातावरण तैयार करते हैं। साइबर सुरक्षा आज वैश्विक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण विषय बन चुकी है। डिजिटल बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान,ए आई और डेटा आधारित अर्थव्यवस्था के दौर में साइबर सुरक्षा में सहयोग से भारतीय टेक कंपनियों और फिनटेक सेक्टर को मजबूती मिल सकती है। इससे भारतीय डिजिटल अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेश का मार्ग और खुल सकता है।

मुंबई में साइप्रस प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी और बॉलीवुड फिल्म शूटिंग से जुड़ी घोषणाएं यह भी दर्शाती हैं कि भारत अब केवल औद्योगिक निवेश का केंद्र नहीं बल्कि सांस्कृतिक और मनोरंजन आधारितअर्थव्यवस्था का भी वैश्विक केंद्र बन रहा है। मनोरंजन उद्योग में विदेशी निवेश बढ़ने से मीडिया, ओटीटी प्लेटफॉर्म और पर्यटन क्षेत्र को लाभ मिल सकता है। इसका असर संबंधित सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों पर भी दिखाई दे सकता है।

साथियों, अब यदि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की भारत यात्रा और क्वाड बैठक के प्रभाव को समझें तो इसका असर सबसे व्यापक माना जा सकता है। अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और सबसे बड़ा पूंजी बाजार है। भारत-अमेरिका संबंधों में सुधार का सीधा प्रभाव विदेशी संस्थागत निवेशकों की धारणा पर पड़ता है।

हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक मतभेद, वीजा मुद्दे और रणनीतिक चिंताओं को लेकर कुछ तनाव दिखाई दिए थे। ऐसे में यह यात्रा संकेत देती है कि दोनों देश संबंधों को पुनः मजबूत करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। यह संदेश वैश्विक बाजारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। क्वाड बैठक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के संतुलन के रूप में देखी जाती है। निवेशकों की दृष्टि से स्थिर और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक व्यापार के लिए आवश्यक है क्योंकि दुनिया का बड़ा समुद्री व्यापार इसी क्षेत्र से गुजरता है। यदि क्वाड सहयोग मजबूत होता है तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षा मिल सकती है। इसका लाभ भारत को एक वैकल्पिक विनिर्माण और व्यापारिक केंद्र के रूप में मिलेगा। इससे भारतीय बाजारों में दीर्घकालिक विदेशी निवेश बढ़ सकता है। रक्षा सहयोग पर बातचीत का सीधा प्रभाव भारतीय रक्षा कंपनियों पर पड़ सकता है। भारत लगातार रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

अमेरिका के साथ रक्षा तकनीक, ड्रोन, मिसाइल सिस्टम, साइबर रक्षा और सेमीकंडक्टर तकनीक में सहयोग भारतीय रक्षा उद्योग को नई ऊंचाई दे सकता है। इससे हिंदुस्तान ऐरोनाटिक्स लिमिटेड ,भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और निजी रक्षा कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है। वैश्विक निवेशक रक्षा क्षेत्र को अब केवल युद्ध उद्योग नहीं बल्कि उच्च प्रौद्योगिकी और रणनीतिक स्थिरता के क्षेत्र के रूप में देख रहे हैं।महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला पर चर्चा भी निवेशकों के लिए बड़ा संकेत है। इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, सेमीकंडक्टर और रक्षा तकनीक के लिए लिथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थमिनरल्स की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है। यदि भारत अमेरिका और अन्य साझेदार देशों के साथ इस क्षेत्र में दीर्घकालिक समझौते करता है तो भारत भविष्य की हरित औद्योगिक क्रांति में बड़ी भूमिका निभा सकता है। इससे इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी क्षेत्र की भारतीय कंपनियों को भारी लाभ हो सकता है।

साथियों, अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों पर भी इन यात्राओं का प्रभाव दिखाई देगा। यदि भारत पश्चिमी देशों और मध्य-पूर्व के साथ मजबूत रणनीतिक साझेदारी बनाता है तो उभरते बाजारों में भारत का वज़न बढ़ेगा। वैश्विक फंड मैनेजर चीन के विकल्प के रूप में भारत में निवेश बढ़ा सकते हैं। इससे एमएससीआई और अन्य वैश्विक सूचकांकों में भारतीय शेयरों की हिस्सेदारी बढ़ सकती है। लंबे समय में यह भारतीय बाजारों में लगातार विदेशी पूंजी प्रवाह सुनिश्चित कर सकता है। हालांकि, इसके साथ कुछ जोखिम भी मौजूद हैं। यदि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है, तेल कीमतें अचानक बढ़ती हैं या अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता अधिक तीव्र होती है तो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता आ सकती है। विदेशी निवेशक जोखिम बढ़ने पर उभरते बाजारों से पूंजी निकालने लगते हैं। इसलिए भारत को अपनी कूटनीतिक संतुलन नीति को सावधानी से बनाए रखना होगा। भारत की विशेषता यही रही है कि उसने अमेरिका, यूरोप, रूस और मध्य-पूर्व सभी के साथ संतुलित संबंध बनाए हैं। यही संतुलन भविष्य में भारतीय बाजारों की स्थिरता का आधार बन सकता है।

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9284141425

संसद का रण:महिला आरक्षण- सरकार का मास्टरस्ट्रोक रूल 66 की सियासी शतरंज।

संसद का रण:महिला आरक्षण- सरकार का मास्टरस्ट्रोक रूल 66 की सियासी शतरंज।

महाराष्ट्र/गोंदिया

विपक्ष को धर्मसंकट में डालने की रणनीति-विपक्ष की दुविधा:आगे कुआं,पीछे खाई-भारतीय संसद पर टिकी वैश्विक निगाहें

विपक्ष क़ा शाब्दिक हमला: चैरिटी बिगन्स एट होम- सत्ताधारी पार्टी संगठन और सरकार में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दें- प्रधानमंत्री पद भी रोटेशन के आधार पर महिलाओं क़ो दें- सदन में तीखी बहस और हंगामा

रूल 66 का निलंबन,संयुक्त मतदान, अधिसूचना का समय ये सभी कदम एक जटिल राजनीतिक शतरंज के हिस्से, जहां हर चाल का दूरगामी प्रभाव- कानून निर्माण केवल नीति नहीं,रणनीति,संख्या बल और समय प्रबंधन का मिश्रण बन चुका है-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर भारत की संसद में चल रहा 16 से 18 अप्रैल 2026भारतीय संसद का विशेष सत्र केवल एक सामान्य विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक राजनीति के गहरे रणनीतिक, संवैधानिक और वैचारिक संघर्ष का प्रतीक बन गया।वर्तमान घटनाक्रम केवल एक घरेलू राजनीतिक विवाद नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं,संवैधानिक व्याख्याओं और राजनीतिक रणनीति का ऐसा संगम बन गया है, जिसपर पूरी दुनियाँ की निगाहें टिकी हुई हैं।विशेष सत्र के दौरान केंद्र सरकार द्वारा तीन महत्वपूर्ण विधेयकों महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम), परिसीमन (डेलिमिटेशन) और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े संशोधन को एक साथ पेश करना और फिर 16 अप्रैल 2026 को देर रात्रि रूल 66 को निलंबित करने का कदम भारतीय संसदीय इतिहास में एक असाधारण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।इसपर विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया, संसदीय नियमों का प्रयोग और रूल 66 का निलंबन इन सभी ने इस पूरे घटनाक्रम को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया।यह घटनाक्रम केवल कानून बनाने की प्रक्रिया नहीं है,बल्कि सत्ता और विपक्ष के बीच रणनीतिक टकराव,राजनीतिक गणित, और संवैधानिक व्याख्याओं का एक जटिल खेल बन चुका है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि सरकार ने जिन तीन विधेयकों को एक साथ पेश किया है, वे अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण हैं। पहला, नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून), जो संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान करता है।दूसरा, परिसीमन विधेयक, जो लोकसभा और विधानसभा सीटों के पुनर्निर्धारण से जुड़ा है। तीसरा, केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित संशोधन विधेयक, जो प्रशासनिक और प्रतिनिधित्व संरचना को प्रभावित करता है।इन तीनों विधेयकों का एक साथ प्रस्तुत होना संयोग नहीं,बल्कि एक सुविचारित रणनीति प्रतीत होता है। सरकार का दावा है कि यह व्यापक सुधार का हिस्सा है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक पैकेजिंग कह रहा है।


साथियों बात अगर हम रूल 66 क्या है और क्यों बना विवाद का केंद्र? इसको समझने की करेंतो लोकसभा की कार्यप्रणाली में रूल 66 एक तकनीकी लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण प्रावधान है। यह नियम उन परिस्थितियों में लागू होता है, जब एक विधेयक दूसरे विधेयक पर निर्भर होता है। यदि आश्रित विधेयक पारित नहीं होता, तो मूल विधेयक भी निष्प्रभावी हो सकता है।सरकार ने इसी नियम को निलंबित करने का प्रस्ताव लाकर पूरे खेल की दिशा बदल दी सामान्यतःप्रत्येक विधेयक पर अलग- अलग चर्चा और मतदान होता है, जिससे सांसद अपनी स्वतंत्र राय दे सकते हैं। लेकिन ‘रूल 66’ के निलंबन के बाद यह बाध्यता समाप्त हो जाती है।इसका सीधा अर्थ यह है कि अब तीनों विधेयकों को एक साथ, एक ही प्रस्ताव के रूप में पारित कराया जा सकता।

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र


साथियों बात अगर हम सरकार का मास्टरस्ट्रोक: संयुक्त मतदान की रणनीति को समझने की करें तो सरकार ने जिस रणनीति का उपयोग किया है,उसेराजनीतिक विश्लेषक मास्टरस्ट्रोक कह रहे हैं।तीनों विधेयकों को एक ही प्रस्ताव में जोड़कर सरकार ने विपक्ष के लिए विकल्पों को सीमित कर दिया है।अब विपक्ष के सामने केवल दो ही रास्ते हैं,या तो तीनों विधेयकों के पक्ष में वोटकरें या तीनों के खिलाफ।यह रणनीति विपक्ष को एक धर्मसंकट में डालती है।यदि विपक्ष परिसीमन का विरोध करता है,तो उसे महिला आरक्षण के खिलाफ भी वोट देना पड़ेगा। और यदि वह महिला आरक्षण का समर्थन करता है, तो परिसीमन भी सटीक रूप से ही स्वतःपारित हो जाएगा।


साथियों बात अगर हम विपक्ष की दुविधा: आगे कुआं, पीछे खाई इसको समझने की करें तो,विपक्ष,विशेष रूप से इंडिया गठबंधन,इस स्थिति में फंस गया है जहां हर विकल्प राजनीतिक नुकसान की ओर ले जाता है।विपक्ष का रुख स्पष्ट है कि वह महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन परिसीमन को लेकर गंभीर आपत्तियां हैं,खासकर दक्षिण भारत के राज्यों के संदर्भ में।विपक्ष का तर्क है कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन करने से दक्षिणभारत के राज्यों को नुकसान होगा, क्योंकि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है।ऐसे में सीटों का पुनर्वितरण उन्हें कम प्रतिनिधित्व की ओर ले जा सकता है। अब रूल 66 कैंसिल करने से विपक्ष को तीनों विधायकों को एक साथ मतदान करना पड़ेगा अगर वह यस में बदनाम करते हैं तो परिसीमन बिल भी पास होगा ना में मतदान करते हैं तो महिला आरक्षण का अपने आप ही विरोध होगा।
साथियों बात अगर हम संख्या बल का गणित: सरकार के सामने चुनौती इसको समझने की करें तो, संविधान संशोधन विधेयकों को पारित करने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है यानी उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई समर्थन। लोकसभा में कुल 540 सीटें हैं, जिनमें से 3 खाली हैं। ऐसे में 360 वोटों की जरूरत होती है।एनडीए के पास लगभग 293 सांसद हैं, जो आवश्यक संख्या से काफी कम है। इस स्थिति में सरकार को या तो विपक्ष के कुछ सांसदों का समर्थन चाहिए या फिर अनुपस्थित रहने वाले सांसदों की संख्या बढ़ानी होगी, ताकि आवश्यक बहुमत का आंकड़ा कम हो सके।


साथियों बात अगर हम अधिसूचना विवाद: कानून लागू या बचाने की कोशिश? इसको समझने की करें तो इस पूरे घटनाक्रम का सबसे विवादास्पद पहलू है 16 अप्रैल 2026 को जारी की गई अधिसूचना, जिसके तहत 2023 में पारित संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम को लागू करने की तारीख तय की गई।यह अधिसूचना ऐसे समय पर जारी की गई,जब संसद में उसी कानून में संशोधन पर बहस चल रही थी। विपक्ष ने इसे आधी रात का फैसला और हताशापूर्ण प्रयास करार दिया है।कांग्रेस नेता ने इस कदम पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि कोई कानून संशोधन के अधीन है, तो उसे बिना नए विधायी समर्थन के लागू करना संवैधानिक रूप से संदिग्ध है।उन्होंने ‘रूल 66’ का हवाला देते हुए कहा कि यदि आश्रित विधेयक पारित नहीं होता, तो मूल कानून भी निष्प्रभावी हो सकता है। ऐसे में नियम को निलंबित कर अधिसूचना जारी करना कानून को “बचाने” का प्रयास प्रतीत होता है।
साथियों बात अगर हम टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी का 17 अप्रैल 2026 को संसद में अपने विचारों के दौरान शाब्दिक हमला:चैरिटी बिगन्स एट होम इसको समझने की करें तो तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि महिला आरक्षण की बात करने से पहले भाजपा को अपने संगठन और सरकार में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना चाहिए।उन्होंने 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग करते हुए यह भी कहा कि मंत्रिमंडल और यहां तक कि प्रधानमंत्री पद भी रोटेशन के आधार पर महिलाओं को दिया जाना चाहिए। उनके इस बयान ने सदन में तीखी बहस और हंगामा पैदा कर दिया।
साथियों बात अगर हम परिसीमन विवाद: उत्तर बनाम दक्षिण का नया विमर्श इसको समझने की करें तो परिसीमन का मुद्दा भारत में लंबे समय से संवेदनशील रहा है। 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों का निर्धारण स्थगित किया गया था, ताकि जनसंख्या नियंत्रण को प्रोत्साहन मिल सके।अब जब परिसीमन की बात फिर उठी है, तो दक्षिण भारत के राज्यों को डर है कि उनकी सीटें कम हो सकती हैं, जबकि उत्तर भारत के राज्यों को लाभ मिल सकता है। यह विवाद क्षेत्रीय असंतुलन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के नए सवाल खड़े करता है।


साथियों बात अगर हम लोकतंत्र बनाम रणनीति: क्या यह उचित है? इसको समझने की करें तो,इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, क्या संसदीय नियमों का इस तरह उपयोग (या दुरुपयोग) लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप है?सरकार का तर्क है कि वह सुधारों को तेज़ी से लागू करना चाहती है और तकनीकी बाधाओं को हटाना आवश्यक है। वहीं विपक्ष का कहना है कि यह संसदीय प्रक्रिया को कमजोर करने और बहस को सीमित करने का सटीक रूप से प्रयास है।
साथियों बात अगर हम इस पूरे प्रकरण को वैश्विक परिप्रेक्ष्य: भारत की लोकतांत्रिक छवि पर असर इसको समझने की करें तो,भारत को विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है। ऐसे में संसद में होने वाली हर बड़ी घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनती है।
यदि यह घटनाक्रम पारदर्शिता, बहस और सहमति के बिना आगे बढ़ता है, तो यह भारत की लोकतांत्रिक छवि को प्रभावित कर सकता है। वहीं,यदि सरकार सफलतापूर्वक इन सुधारों को लागू कर देती है, तो यह निर्णायक नेतृत्व का उदाहरण भी बन सकता है।


अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि सियासी शतरंज का निर्णायक मोड़,संसद में चल रहा यह संघर्ष केवल तीन विधेयकों का नहीं है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र की कार्यप्रणाली,संवैधानिकमर्यादाओं और राजनीतिक रणनीति का परीक्षण है। रूल 66 का निलंबन, संयुक्त मतदान, अधिसूचना का समय ये सभी कदम एक जटिल राजनीतिक शतरंज के हिस्से हैं,जहां हर चाल का दूरगामी प्रभाव है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह रणनीति सरकार के लिए जीत का रास्ता बनती है या विपक्ष इसे लोकतांत्रिक मुद्दा बनाकर राजनीतिक लाभ उठाता है। लेकिन इतना तय है कि यह घटनाक्रम भारतीय संसदीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होगा।

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9284141425

मध्य प्रदेश में संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर लागू हुआ-संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल हुई।

मध्य प्रदेश में संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर लागू हुआ-संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल हुई।

महाराष्ट्र/गोंदिया

वाह रे डिजिटल दुनियाँ का कमाल!अब जमीन मकान दुकान की रजिस्ट्री कराने पंजीकरण कार्यालय जाने की ज़रूरत नहीं!

डिजिटाइजेशन युग में आर्टिफिशियल मानव (रोबोट) सहित पूरी सृष्टि की रचना की जा सकती है,परंतु मृत मानवीय देह में प्राण डालकर जीवित करना कभी संभव नहीं होगा -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर जिस तेज़ी के साथ प्रौद्योगिकी विस्तार व डिजिटाइजेशन हो रहा है उसमें, मेरा मानना है कि सब कुछ किया जा सकता है परंतु मृत्य में प्राण फ़ूकना शायद कभी संभव नहीं होगा, ऐसा होता तो दिनांक 9 अक्टूबर 2024 को देर रात्रि विश्व प्रसिद्ध उद्योगपति रतन टाटा के 86 वर्ष की उम्र में देहांत की सूचना आई,जिसके शरीर में प्राण डाले जा सकते?, हालांकि वैज्ञानिक स्तरपर आज भी इसे चुनौती मानकर इस दिशा में रिसर्च करने में जुटे हुए हैं।मेरा मानना है कि शायद वह कभी सफल नहीं होंगे,परंतु एक बात का ग़र्व जरूर है कि इसी प्रौद्योगिकी के बल पर आज हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी तक पहुंचे हैं,जिससे हर मानवीय काम आसान हो गया है महीनों का काम मिनट में तो हो रहा है, परंतु सबसे बड़ी मार भ्रष्टाचार को पड़ी है इसीलिए ही उनकी हालत खस्ता हो गई है और डिजिटलाइजेशन में नई प्रौद्योगिकी को कोस रहे हैं।आज हम इस विषय पर बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि 10 अक्टूबर 2024 से मध्य प्रदेश में संपदा रजिस्ट्रेशन का का कार्य 2.0 सॉफ्टवेयर से लागू हो चुका है, संभवतःयह महाराष्ट्र यूपी के बाद यह तीसरा राज्य होगा। हालांकि केंद्रीय बजट 2024 में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए भूमि अभिलेखों के व्यापक डिजिटलीकरण की घोषणा की गई थी। यह एक स्वागत योग्य कदम है,लेकिन बजट में परिकल्पित अगले तीन वर्षों के भीतर पूरे भारत में इसके सफल कार्यान्वयन के लिए कई चुनौतियाँ हैं।वर्तमान में भारत के 28 राज्यों में से 24 में भूमि अभिलेख कम्प्यूटरीकृत हैं। केवल चार पूर्वोत्तर राज्यों अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम और सिक्किम में भूमि अभिलेख पूरी तरहकम्प्यूटरीकृत नहीं हैं। इसलिए समय की मांग है कि सभी राज्यों में भूमि अभिलेखों के रखरखाव में एकरूपता की व्यवस्था हो।परंतु जिस तरह से संबंध था 2.0 सॉफ्टवेयर की खूबियां बताई गई है वह तारीफे काबिल है, इसमें रजिस्ट्री करने वालों के समय की बचत, दिक्कतों कठिनाइयां परेशानियों में काफी हद तक कमी आएगी, ठगी के मामलों पर नियंत्रण होगा, एक ही प्रॉपर्टी की अब दो बार रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी, अगर हुई तो तुरंत पकड़ में आ जाएगी। सबसे बड़ी बात जो होगी वह है भ्रष्टाचार में इस विभाग में काफी हद तक कमी होगी, अब रिश्वत के मामले में बाबू को बगले हाँकना पड़ेगा, दलालों को मुंह की खानें,साहब को भी एक्स्ट्रा एक हज़ार से इतनें हजारों तक ऊपरी मिठाई देने पर नियंत्रण हो जाएगा। सबसे बड़ी बात जानता को सुविधा होगी, मगर इन पंजीयन विभाग के कर्मचारियों अधिकारियों ने मिलकर कोई नया तरीका निकालने की गुंजाइश भी बनी रहेगी, क्योंकि हर कानून में लीकेजेस तो निकल ही आते हैं। चूँकि मध्य प्रदेश मैं संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर लागू हुआ व संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल हो गई है, इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, वाह रे डिजिटल दुनियाँ काकमाल! जमीन मकान दुकान की रजिस्ट्री कराने पंजीयन कार्यालय जाने की जरूरत नहीं!

संकलनकर्ता लेखक- क़र विशेषज्ञ स्तंभक़ार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

साथियों बात कर हम सम्पदा 2.0 सॉफ्टवेयर की करें तो,मध्य प्रदेश में अब जमीन, मकान, दुकान की रजिस्ट्री कराने के लिए पंजीयन कार्यालय आने की जरूरत नहीं होगी। अब कहीं से भी प्रदेश के किसी भी जिले में पंजीयन कराया जा सकेगा। इसके लिए प्रदेश में पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग का संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर लागूहो गया है।हालांकि, इसके लिए शासन दस्तावेजों को अभी अधिसूचित करेगा।सीएम नें 10 अक्तूबर को संपदा 2.0 का शुभारंभ किया हैँ । वित्त एवं वाणिज्यिक कर मंत्री नेमीडिया में बताया कि संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की दिशा में राज्य शासन का यह एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रदेश में रजिस्ट्री के नए नियम लागू किए गए हैं। इस उन्नत सॉफ्टवेयर का पायलेट प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन गुना, हरदा, डिंडोरी और रतलाम जिलों में सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। अब गुरुवार को इसे प्रदेश के सभी 55 जिलों में लागू कियागया हैँ ।संपदा 2.0 से ई-केवाइसी से पहचान होगी। इसकी विशेषताओं में संपत्ति की जीआईएस मैपिंग, बायोमैट्रिक पहचान और दस्तावेजों का स्वतः प्ररूपण शामिल है। इस प्रणाली में दस्तावेजों का निष्पादन ई-साइन और डिजिटल सिग्नेचर से किया जाएगा, जिससे गवाह लाने की अनिवार्यता समाप्त हो जाएगी। कुछ दस्तावेजों के पंजीकरण के लिए अब उप पंजीयक कार्यालय में व्यक्तिगत उपस्थिति की आवश्यकता नहीं होगी। पंजीयन अधिकारी से संवाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया जाएगा और कई मामलों में किसी भी प्रकार के इंटरेक्शन की आवश्यकता नहीं होगी। व्यक्ति की पहचान के लिए वीडियो केवाईसी का प्रावधान भी रखा गया है।पंजीयन के लिये ई-साइन एंव डिजिटल हस्ताक्षर दस्तावेज पर होंगे। दस्तावेजों की ई-कॉपी डिजी लॉकर, व्हाट्सएप, और ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध होगी। साथ ही ई-स्टाप सृजित करने की सुविधा भी होगी। संपत्ति की सर्च प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया गया है।संपदा 2.0 विशेष मोबाइल एप भी लॉन्च किया जा चुका है। यह पहल न केवल आम जनता के लिए सुविधाजनक होगा, बल्कि मध्य प्रदेश को ई-गवर्नेंस की दिशा में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने में भी मदद करेगा। यह पहल साइबर तहसील और डिजिटल प्रक्रियाओं से प्रदेश के राजस्व संग्रहण को भी सुचारू रूप से संचालित करेगी।मध्य प्रदेश में भू माफियाओं की ठगी और रजिस्ट्री के फर्जीवाड़े से लोगों को बचाने के लिए पंजीयन विभाग ने संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर तैयार करवाया है, इस नए सिस्टम के लागू होने के बाद प्रॉपर्टी की खरीदी और बिक्री आसान हो जाएगी।सीएम द्वारा लॉन्च करने के बाद ये सॉफ्टवेयर प्रदेश के सभी जिलों में लागू हो गया।

साथियों बात अगर हम संपदा 2.0 के फीचर्स व फाइदों की जानकारी की करें तो (1)निगम की संपत्ति और टैक्स आईडी और सॉफ्टवेयर मेंvमोबाइल नंबर दर्ज होगा (2) रजिस्ट्री होते ही पक्षकार को मैसेज भी पहुचेगा (3) रजिस्ट्री के वक्त अब गवाही का काम ऑप्शनल रहेगा यानी इसमे वीडियो कॉल सुविधा मिलेगी (4) नक्शे के आधार पर लोकेशन साफ होगी (5)आधार-पैन कार्ड लिंक होने से रजिस्ट्री के वक्त मैसेज सीधे पक्षकार को पहुंचेंगे। ठगी में लगेगी लगाम, ग्वालियर में रजिस्ट्री से संबंधित ठगी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, बीते 8 माह में 150 से अधिक मामले सामने आए हैं, अब ऐसे साइबर ठगी के मामले को लेकर पंजीयन विभाग अलर्ट मोड में आ गया है,जिसका तोड़ संपदा2 के इंतजार के साथ हो रहा था।यह संपदा 2 रूपी हथियार न केवल पक्षकारों को बल्कि पंजीयन विभाग के अफसरों को भी राहत प्रदान करेगा।रजिस्ट्री के समय आधार कार्ड, पैन कार्ड व बायोमैट्रिक्स से छेड़छाड़ कर पक्षकार की पहचान बदलने के मामले तेजी से बढ़े हैं, शहर के थाना झांसी रोड और महाराजपुरा में जनवरी से अगस्त तक 150 से अधिक शिकायतें दर्ज हुई हैं।ऐसी मामलों में जांच करना भी पुलिस के लिए काफी चुनौती है। अब पंजीयन विभाग का दावा है संपदा-2 में इस तरह के ठगी के मामले रुकेंगे।एक जिला पंजीयक ने मीडिया में बताया कि जिले में 90 फीसदी नक्शों में सुधार का काम पूरा हो चुका हैं, इस सॉफ्टवेयर में पक्षकारों हित में सुरक्षा के कई चेक पॉइंट वाले फीचर्स हैं, जिससे ठगी की गुंजाइश नहीं रहेगी। संपदा 2.0 में सर्विस प्रोवाइडर द्वारा डीड लिखने के बाद पक्षकार खुद पढ़ेगा।मोबाइल पर कंफर्म होने के बाद ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि वाह रे डिजिटल दुनियाँ का कमाल!अब जमीन मकान दुकान की रजिस्ट्री कराने पंजीकरण कार्यालय जाने की ज़रूरत नहीं!मध्य प्रदेश में संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर लागू हुआ-संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल हुईडिजिटाइजेशन युग में आर्टिफिशियल मानव (रोबोट) सहित पूरी सृष्टि की रचना की जा सकती है,परंतु मृत मानवीय देह में प्राण डालकर जीवित करना कभी संभव नहीं होगा।

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