80 साल का भारत,2047 की आर्थिक उड़ान: सप्त धारा से वैश्विक महाशक्ति तक-तेल रुपया, शेयर बाजार औरनिवेश की नई परीक्षा -समग्र व्यापक विश्लेषण।

80 साल का भारत,2047 की आर्थिक उड़ान: सप्त धारा से वैश्विक महाशक्ति तक-तेल रुपया, शेयर बाजार औरनिवेश की नई परीक्षा -समग्र व्यापक विश्लेषण।

लाल किले से दुनियाँ के बाजारों तक: मोदी-मुर्मु के आर्थिक संदेश ने दिखाई 2047 के भारत की वैश्विक तस्वीर

सप्त धारा बनाम कच्चे तेल का झटका: विकास की रफ्तार,कमजोर रुपया,व्यापार घाटा और भारत की आर्थिक अग्निपरीक्षा -क्या 2047 का भारत बदलेगा वैश्विक अर्थव्यवस्था का संतुलन?

वैश्विक स्तरपर किसी राष्ट्र के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर दिए गए संबोधन केवल औपचारिक भाषण नहीं होते। विशेषकर भारत जैसे लोकतांत्रिक,विशाल उपभोक्ता बाजार और तेजी से उभरते वैश्विक आर्थिक केंद्र के मामले में शीर्ष संवैधानिक पदों से निकला प्रत्येक बड़ा आर्थिक संकेत घरेलू उद्योग,शेयर बाजार,विदेशी निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय नीति-निर्माताओं के लिए दिशा-सूचक बन जाता है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि,लाल किले से निकली घोषणा अब बाजार, उद्योग और निवेशकों के लिए अवसर का संकेत है;लेकिन उस अवसर को वास्तविक संपत्ति में बदलने की निर्णायक कुंजी अब नीति के क्रियान्वयन, उत्पादक निवेश और आर्थिक अनुशासन के हाथ में है।15 अगस्त 2026 को भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से विकसित भारत @2047, शक्ति की सप्त धारा, आत्मनिर्भरता,कृत्रिम बुद्धिमत्ता,सेमीकंडक्टर,परमाणु ऊर्जा,रक्षा विनिर्माण और युवाओं को केंद्र में रखा।पीएम ने अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रशिक्षण देने,सात-आठ सेमीकंडक्टर संयंत्रों को अगले एक-दो वर्षों में परिचालन में लाने और 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावॉट तक पहुंचाने जैसे बड़े लक्ष्य रखे।स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी भारत की आर्थिक मजबूती, डिजिटल अर्थव्यवस्था, युवा शक्ति, समावेशी विकास, किसानों श्रमिकों,वैज्ञानिकों और उद्यमियों की भूमिका को रेखांकित किया। राष्ट्रपति के संदेश में भारत की आर्थिक लचीलापन और दुनियाँ के वास्तविक समय के डिजिटल लेनदेन में भारत की बड़ी हिस्सेदारी को विशेष महत्व मिला। इन दोनों संबोधनों को साथ रखकर देखें तो भारत का आर्थिक संदेश बिल्कुल स्पष्ट दिखाई देता है,अगले दो दशकों में भारत को केवल बड़ी अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि उत्पादन, तकनीक, ऊर्जा, रक्षा, डिजिटल व्यवस्था और वैश्विक आपूर्ति शृंखला की सटीकता से निर्णायक शक्ति बनाना है।

साथियों, शक्ति की सप्त धारा, भारत के अगले आर्थिक चक्र का खाका इसको समझने की करें तो पीएम की शक्ति की सप्त धारा में विनिर्माण,कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार, गति शक्ति, रक्षा शक्ति, हरित-नीली अर्थव्यवस्था और सॉफ्ट पावर को विकास के सात प्रमुख आधार के रूप में सामने रखा गया। यह महज सात क्षेत्रों की सूची नहीं है,बल्कि यदि इसे नीतिगत और वित्तीय संसाधनों से जोड़ा जाता है तो यह भारत के अगले औद्योगिक चक्र की आधारभूमि बन सकती है।विनिर्माण भारत को रोजगार और निर्यात देगा, कृषि- प्रसंस्करण ग्रामीण आय तथा खाद्य निर्यात बढ़ा सकता है, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नवाचार उत्पादकता को बदल सकते हैं,गति शक्ति लॉजिस्टिक लागत घटा सकती है, रक्षा विनिर्माण आयात निर्भरता कम करते हुए निर्यात का नया बाजार खोल सकता है और हरित-नीली अर्थव्यवस्था ऊर्जा तथा समुद्री संसाधनों को विकास के नए केंद्र में ला सकती है। इसलिए इसका प्रभाव केवल सकल घरेलू उत्पाद पर नहीं,बल्कि रोजगार चालू खाते, विनिर्माण, पूंजी निवेश और निर्यात प्रतिस्पर्धा पर भी पड़ सकता है।

साथियों बात अगर हम  एक करोड़ एआई-कुशल युवा: जनसंख्या से उत्पादक पूंजी की ओर इसको समझने की करें तो एक करोड़ युवाओं को अगले एक वर्ष में कृत्रिम बुद्धिमत्ता कौशल देने की घोषणा भारत की सबसे महत्वपूर्ण दीर्घकालीन आर्थिक घोषणाओं में से एक है। इसका वास्तविक महत्व इस बात में होगा कि प्रशिक्षण कितनी गुणवत्ता का है और कितने प्रशिक्षित युवाओं को वास्तविक रोजगार, उद्यमिता और उद्योग से जोड़ा जाता है।यदि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता को केवल सूचना- प्रौद्योगिकी क्षेत्र तक सीमित न रखकर कृषि, स्वास्थ्य, विनिर्माण, बैंकिंग, शिक्षा, रक्षा और सरकारी सेवाओं में लागू करता है,तो उत्पादकता में बड़ा परिवर्तन संभव है। यही वह क्षेत्र है जहां भारत की विशाल युवा आबादी आर्थिक बोझ के बजाय वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ बन सकती है।मुफ्त ऑनलाइन प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग की घोषणा भी इसी व्यापक सामाजिक-आर्थिक दृष्टिकोण से जुड़ती है। इसका उद्देश्य गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के शिक्षा एवं कोचिंग खर्च को कम करना है।  यदि इससे प्रतिभा और अवसर के बीच की दूरी घटती है, तो इसका दीर्घकालीन प्रभाव सटिका से मानव पूंजी पर पड़ेगा।
साथियों बात कर हम  सेमीकंडक्टर और परमाणु ऊर्जा: आत्मनिर्भरता से रणनीतिक स्वतंत्रता तक को समझने की करें तो, भारत की अर्थव्यवस्था के सामने सबसे बड़ी संरचनात्मक चुनौतियों में ऊर्जा और उच्च-प्रौद्योगिकी आयात निर्भरता शामिल है। ऐसे में सेमीकंडक्टर उत्पादन और 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य केवल औद्योगिक नीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा की रणनीति है। प्रधानमंत्री ने सात-आठ नए सेमीकंडक्टर संयंत्रों को अगले एक-दो वर्षों में परिचालन में लाने की बात कही है। यदि भारत चिप निर्माण, महत्वपूर्ण खनिज, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत विनिर्माण का विश्वसनीय केंद्र बनता है, तो चीन प्लस वन रणनीति भारत के पक्ष में और मजबूत हो सकती है। वहीं परमाणु ऊर्जा का विस्तार आयातित जीवाश्म ईंधन पर दीर्घकालीन निर्भरता कम करने में सहायक हो सकता है। इसका अर्थ है कि ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी सुरक्षा को आर्थिक विकास की मुख्यधारा में सटीकता से शामिल किया जा रहा है।

साथियों लेकिन दूसरी तरफ कच्चे तेल का दबाव,भारत की सबसे बड़ी बाहरी आर्थिक कमजोरी को समझने की करें तो,यहीं भारत की आर्थिक कहानी का दूसरा पक्ष सामने आता है। जुलाई 2026 में भारत का वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 31.98 अरब डॉलर हो गया, जो छह महीने का उच्च स्तर था। आयात 76.22 अरब डॉलर रहा, जबकि वस्तु निर्यात 44.24 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। पश्चिम एशिया के तनाव, महंगे कच्चे तेल और ऊंची माल ढुलाई लागत ने आयात बिल पर दबाव डाला। हालांकि सेवाओं में 16.95 अरब डॉलर का अधिशेष एक महत्वपूर्ण सहारा बना हुआ है।इससे स्पष्ट है कि भारत की विकास कहानी मजबूत होते हुए भी ऊर्जा कीमतों से पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। भारत अपनी तेल आवश्यकता का 90 प्रतिशत से अधिक आयात करता है। जुलाई में रूस की हिस्सेदारी भारत के कच्चे तेल आयात में रिकॉर्ड 50.83 प्रतिशत, अर्थात लगभग 24.7 लाख बैरल प्रतिदिन, रहीयह स्थिति भारत को सस्ता और अपेक्षाकृत सुरक्षित ऊर्जा स्रोत देती है, लेकिन इसके साथ भू- राजनीतिक और प्रतिबंध संबंधी जोखिम भी जुड़े हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें लगातार ऊंची रहती हैं, तो इसका प्रभाव महंगाई, चालू खाते, रुपये, परिवहन लागत, पेट्रोल-डीजल कीमतों और कंपनियों के लाभ मार्जिन तक पहुंच सकता है।

साथियों,तेल और कमजोर रुपया,विकास की राह की अग्निपरीक्षा इसको समझने की करें तो,यदि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत भारतीय मुद्रा में लगभग 90 रुपये प्रति लीटर के आसपास प्रभाव डालने वाली स्थिति तक पहुंचती है, तो उसका प्रभाव केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहेगा। परिवहन महंगा होगा, लॉजिस्टिक लागत बढ़ेगी और कृषि से लेकर विनिर्माण तक लगभग प्रत्येक क्षेत्र पर लागत का दबाव आ सकता है।ऊंचे तेल आयात बिल से डॉलर की मांग बढ़ती है, जिससे रुपये पर दबाव पड़ सकता है। कमजोर रुपया निर्यातकों के लिए कुछ हद तक लाभकारी हो सकता है, लेकिन तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और अन्य आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ाकर आयातित महंगाई को जन्म दे सकता है। इसलिए भारत के लिए तेल कीमत और रुपया दोनों एक साथ आर्थिक परीक्षा बन सकते हैं।

साथियों,भारतीय शेयर बाजार: घोषणा से अवसर लेकिन मूल्यांकन में सावधानी,को समझने की करें तो राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की घोषणाओं से शेयर बाजार में सबसे अधिक रुचि उन्हीं क्षेत्रों में पैदा होगी जिन्हें दीर्घकालीन सरकारी प्राथमिकता मिल रही है,रक्षा, पूंजीगत वस्तुएं, बुनियादी ढांचा, विद्युत, परमाणु ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल सेवाएं, विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स।लेकिन निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है,नीति घोषणा और कंपनी के वास्तविक मुनाफे के बीच कई वर्ष का अंतर हो सकता है।किसी क्षेत्र को सरकारी प्राथमिकता मिलने का अर्थ यह नहीं कि उस क्षेत्र की हर कंपनी का शेयर स्वतः बढ़ेगा। शेयर कीमत में पहले से भविष्य की उम्मीदें शामिल हो सकती हैं। इसलिए आदेश -पुस्तिका,लाभ,ऋण,नकदी प्रवाह, मूल्यांकन और वास्तविक परियोजना क्रियान्वयन को सटीकता से देखना अधिक महत्वपूर्ण होगा।

साथियों, अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजार और वैश्विक निवेशक: भारत अब वैकल्पिक बाजार नहीं इसको समझने की करें तो, भारत की यह रणनीति अंतरराष्ट्रीय पूंजी के लिए भी महत्वपूर्ण है। यदि वैश्विक कंपनियां चीन से उत्पादन का कुछ हिस्सा स्थानांतरित करना चाहती हैं, तो भारत का बड़ा घरेलू बाजार, युवा कार्यबल,डिजिटल आधारभूत ढांचा और लोकतांत्रिक व्यवस्था उसे आकर्षक विकल्प बनाते हैंसेमीकंडक्टर रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हरित ऊर्जा में विदेशी कंपनियों कीभागीदारी बढ़ती है तो उसका लाभ केवल भारत को नहीं, बल्कि वैश्विक कंपनियों को भी मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय निवेशक भारतीय कंपनियों के साथ-साथ उन वैश्विक कंपनियों को भी देख सकते हैं जिनकी भारत में आपूर्ति शृंखला, संयुक्त उद्यम या पूंजी निवेश की रणनीति है।लेकिन विदेशी निवेशक भारत की वृद्धि दर के साथ राजकोषीय अनुशासन, रुपये की स्थिरता, कर व्यवस्था, व्यापार नीति, अमेरिकी शुल्क, भू- राजनीतिक जोखिम और तेल कीमतों को भी सटीकता से बराबर देखेंगे।

साथियों बातें कर हम  सरकार की विनिवेश नीति औरबाजार में पूंजी की नई कहानी को समझने की करें तो आंकड़े के अनुसार 2026 में दस सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से अल्पांश हिस्सेदारी बिक्री के जरिए 62,000 करोड़ रुपये से अधिक जुटाने की बात सामने आई है। इस आंकड़े को अंतिम रूप से प्रकाशित सरकारी आंकड़ों से मिलान करना आवश्यक है;इसलिए इसे यहां उपलब्ध रिपोर्टेड आंकड़े के रूप में देखना उचित होगा। अल्पांश हिस्सेदारी बिक्री का व्यापक आर्थिक महत्व यह है कि इससे सरकार को राजस्व मिलता है और बाजार में सार्वजनिक उपक्रमों की हिस्सेदारी का व्यापक स्वामित्व बढ़ सकता है।यदि विनिवेश से प्राप्त राशि को केवल राजस्व व्यय में लगाने के बजाय बुनियादी ढांचे, पूंजीगत व्यय और उत्पादक परिसंपत्तियों में लगाया जाता है, तो इसका गुणक प्रभाव अर्थव्यवस्था पर अधिक हो सकता है। दूसरी ओर, लगातार सरकारी हिस्सेदारी बिक्री से संबंधित कंपनियों के शेयरों में अल्पकालीन आपूर्ति दबाव भी आ सकता है। इसलिए बाजार इसे अवसर और जोखिम, दोनों रूपों में देखेगा।

साथियों, रक्षा अर्थव्यवस्था: खर्च से निर्यात तक को समझने की करें तो, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की घोषणा का आर्थिक महत्व भी बहुत बड़ा है। भारत यदि ड्रोन, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, विमान, इंजन और उन्नत रक्षा तकनीक का घरेलू उत्पादन बढ़ाता है, तो रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा देश के भीतर उद्योग, अनुसंधान और रोजगार पैदा कर सकता है।यहीं से ‘मेक इन इंडिया’ की अवधारणा ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ में बदल सकती है। इससे भारतीय रक्षा कंपनियों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों तथा प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए नए निर्यात बाजार खुल सकते हैं।निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल, घोषणा नहीं, क्रियान्वयन है,भारत की आर्थिक कहानी के सामने आज सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह नहीं है कि लक्ष्य कितने बड़े हैं, बल्कि यह है कि इन लक्ष्यों को कितनी तेजी और दक्षता से जमीन पर उतारा जाएगा। सेमीकंडक्टर संयंत्र, परमाणु परियोजनाएं, रक्षा उत्पादन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचा सभी में बड़ी पूंजी, कुशल मानव संसाधन, नियामकीय स्थिरता और समयबद्ध क्रियान्वयन की आवश्यकता होगी।यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय निवेशक भारत को लेकर उत्साहित होने के साथ-साथ सावधान भी रहेंगे। यदि भारत व्यापार सुगमता, भूमि,श्रम,कर,लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा संबंधी बाधाओं को कम करता है,तो घोषित लक्ष्य निवेश में परिवर्तित हो सकते हैं। यदि क्रियान्वयन धीमा रहा तो घोषणाओं और वास्तविक आर्थिक परिणामों के बीच अंतर बढ़ सकता है।

क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

सरकारी गैर सरकारी संगठनों में बड़े ही से 80 वें स्वतंत्रता दिवस  झंडोतोलन कर मनाया गया।

सरकारी गैर सरकारी संगठनों में बड़े ही से 80 वें स्वतंत्रता दिवस  झंडोतोलन कर मनाया गया।

सरायकेला/चांडिल

सरायकेला खरसावां जिला के विभिन्न सरकारी गौर सरकारी संगठनों में 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर झंडोत्तोलन कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर में मुख्य अतिथि का संबोधन इस समारोह में उपस्थित मंचासीन अतिथिगण, जनप्रतिनिधिगण, प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारी तथा कर्मीगण, छात्र-छात्राएं, शहीद परिवार के सदस्यगण, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े सभी पत्रकार बंधु उपस्थित थे।

यह ऐतिहासिक दिन उन अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों, राष्ट्रनायकों और अमर शहीदों को नमन करने का दिन है, जिनके अतुलनीय त्याग और बलिदान के कारण आज हम स्वतंत्र भारत की हवा में सांस ले रहे हैं। हमारी यह सरायकेला-खरसावाँ की पावन धरा क्रांति और संस्कृति की अद्‌भुत स्थली रही है। भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धू कान्हू, चांद-भैरव और अमर शहीद पोटो हो जैसे वीरों के पदचिन्हों पर चलते हुए इस क्षेत्र ने आजादी की लड़ाई में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। खरसावाँ का इतिहास हमें सिखाता है कि अपनी माटी, अधिकार और स्वाभिमान के लिए कैसे अडिग रहा जाता है।

सरायकेला की विश्वप्रसिद्ध छऊ नृत्य शैली हमारी सांस्कृतिक आत्मा है। जिला प्रशासन इस कला और इसके कलाकारों के संरक्षण एवं वैश्विक मंचों पर प्रोत्साहन के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। सरायकेला के पारंपरिक प्रसिद्ध मुखौटा शिल्पकार गुरू सुशांत महापात्र को महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के कर कमलों से संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

जिला प्रशासन वर्ष 2026 में सरायकेला-खरसावाँ को समृद्धि और सशक्तिकरण की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। राज्य सरकार की दूरगामी योजनाओं यथा सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना, बिरसा हरित ग्राम योजना को जिले के अंतिम व्यक्ति तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाया जा रहा है। जिले के मॉडल एवं उत्कृष्ट विद्यालयों के माध्यम से दूरदराज के ग्रामीण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है, साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं को सुदूर पंचायतों तक मजबूत किया गया है।

स्वतंत्रता दिवस के इस अवसर पर, मैं जिले में संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं की इस वर्ष की उपलब्धियों को विभागवार आपके समक्ष रखना चाहता हूं। 15अगस्त को विधायक पालिका,और 26 जनवरी को कार्यपालिका झंडोतोलन और झंडा फहराया जाता है।

जल जीवन मिशन के तहत कुचाई प्रखंड के सामुडीह ग्राम में मनाया गया जल अर्पण दिवस।

जल जीवन मिशन के तहत कुचाई प्रखंड के सामुडीह ग्राम में मनाया गया जल अर्पण दिवस।

सरायकेला/कुचाई

जल जीवन मिशन के तहत दिनांक 13 अगस्त 2026 को कुचाई प्रखंड अंतर्गत सामुडीह ग्राम में जल अर्पण दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जलसहिया, ग्रामीणों एवं संबंधित पदाधिकारियों की सहभागिता रही।

इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने सुरक्षित पेयजल के उपयोग एवं जल संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए शपथ ली। साथ ही जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीणों को जल के महत्व, जल की बर्बादी रोकने तथा जलापूर्ति योजनाओं के बेहतर रख-रखाव एवं संचालन के प्रति जागरूक किया गया।

कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों से जल स्रोतों एवं जलापूर्ति योजनाओं के संरक्षण में सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित करने तथा जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने की अपील की गई।

कुड़मि को सारना धर्म-कोड और कुड़मालि भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग, गृहमंत्री अमित शाह से मिले अजीत प्रसाद महतो को मिला सकारात्मक आश्वासन।

कुड़मि को सारना धर्म-कोड और कुड़मालि भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग, गृहमंत्री अमित शाह से मिले अजीत प्रसाद महतो को मिला सकारात्मक आश्वासन।

सरायकेला/चांडिल

( मालखान महतो )

आदिवासी कुड़मि समाज की दशकों पुरानी मांग को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल हुई है। आदिवासी कुड़मि समाज के मूलखूंटी मूलमानता अजीत प्रसाद महतो के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने 9 अगस्त को नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की।

प्रतिनिधिमंडल ने आगामी जनगणना में कुड़मि समाज की अलग जातीय पहचान, मातृभाषा के रूप में कुड़मालि का पृथक अंकन, पारंपरिक प्रकृति-पूजक “सारना कुड़मि धर्म” को धर्म-कोड के रूप में मान्यता और कुड़मालि भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर विस्तृत मांग-पत्र सौंपा।

इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एवं राज्यसभा में नेता सदन जे.पी. नड्डा, जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो, गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी, पुरुलिया सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो, राज्यसभा सांसद खीरू महतो और आदिवासी कुड़मि समाज के केंद्रीय अध्यक्ष शशांक शेखर महतो सहित कई वरिष्ठ नेता और सामाजिक प्रतिनिधि मौजूद रहे।

प्रतिनिधिमंडल ने गृहमंत्री के समक्ष कहा कि यह मांग केवल पहचान की लड़ाई नहीं है, बल्कि कुड़मि समाज की भाषा, संस्कृति, धार्मिक परंपरा और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण से जुड़ा विषय है। इस पर गृहमंत्री ने गंभीरता से विचार कर जल्द आवश्यक निर्णय लेने का आश्वासन दिया है।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 6 अगस्त को समाज के प्रतिनिधिमंडल ने भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त को भी मांग-पत्र सौंपा था, जिसके बाद ही गृह मंत्रालय से मुलाकात का अवसर मिला।

गृहमंत्री से मिले इस आश्वासन के बाद चांडिल सहित पूरे झारखंड, बंगाल, ओडिशा और असम के कुड़मि समाज में अपनी भाषाई और धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को लेकर नई उम्मीद जगी है।

इस मुलाकात के दौरान जयपुर के विधायक विश्वजीत महतो, संजय महतो, कृष्ण पद महतो, प्रेमचांद महतो, परिमल महतो समेत समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

वहीं जनसंपर्क सचिव गुणधाम मुतरुआर ने बताया कि इस आंदोलन की आगे की रणनीति तय करने के लिए 16 अगस्त को सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड के डोबो स्थित कुड़मि भवन में आदिवासी कुड़मि समाज की केंद्रीय समिति की अहम बैठक बुलाई गई है। इसमें झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम सहित विभिन्न राज्यों के केंद्रीय सदस्य शामिल होंगे।

स्वतंत्रता दिवस से पहले आदित्यपुर में सुरक्षा व्यवस्था टाइट, देर रात तक चली पुलिस की स्पेशल ड्राइव।

स्वतंत्रता दिवस से पहले आदित्यपुर में सुरक्षा व्यवस्था टाइट, देर रात तक चली पुलिस की स्पेशल ड्राइव।

सरायकेला/आदित्यपुर

स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर आदित्यपुर पुलिस अलर्ट मोड पर है। क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था बरकरार रखने के लिए पुलिस ने रात में सघन चेकिंग अभियान चलाया।

आदित्यपुर थाना प्रभारी अंजनी कुमार के नेतृत्व में पुलिस की टीम ने थाना क्षेत्र के कई हिस्सों में देर रात तक गश्त और छापेमारी की। इस दौरान टीम ने शराब की दुकानों, होटल, बार और रात में अड्डेबाजी वाले संदिग्ध ठिकानों की औचक जांच की।

अभियान में सड़क पर संदिग्ध अवस्था में घूम रहे युवाओं को रोककर पूछताछ की गई और बिना कारण देर रात घूमने वालों को सख्त हिदायत दी गई। पुलिस ने होटल और बार संचालकों के रजिस्टर चेक किए और निर्देश दिया कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी तुरंत थाने को दें।

थाना प्रभारी अंजनी कुमार ने कहा कि 15 अगस्त जैसे राष्ट्रीय पर्व पर सुरक्षा में कोई चूक नहीं होनी चाहिए, यह पुलिस की पहली प्राथमिकता है। क्षेत्र का माहौल बिगाड़ने वाले असामाजिक तत्वों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। अपराध और अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए इस तरह के चेकिंग अभियान आगे भी जारी रहेंगे।

पुलिस की इस सक्रियता के बाद असामाजिक तत्वों में हड़कंप देखा जा रहा है।

जिला नियोजनालय सह मॉडल कैरियर सेंटर, सरायकेला में रोजगार मेला आयोजित।

जिला नियोजनालय सह मॉडल कैरियर सेंटर, सरायकेला में रोजगार मेला आयोजित।

सरायकेला/खरसावां

विभिन्न पदों पर नियुक्ति हेतु 19 संस्थानों ने लिया भाग, 223 अभ्यर्थी शॉर्टलिस्ट।

बुधवार, 12 अगस्त 2026 को जिला नियोजनालय सह मॉडल कैरियर सेंटर, सरायकेला-खरसावाँ के परिसर में रोजगार मेला का आयोजन किया गया। रोजगार मेले में जिले एवं आसपास के क्षेत्रों के रोजगार इच्छुक अभ्यर्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

रोजगार मेले में रामकृष्णा फोर्जिंग्स लिमिटेड, रूंगटा माइन्स लिमिटेड, ब्राइटटेक इंडस्ट्रियल इंडिया लिमिटेड, आरुष मेटल कास्टिंग लिमिटेड, पैंथर सिक्योरिटीज, प्रवीण इंजीनियरिंग, ग्रीनटेक कंसल्टेंसी, एलआईसी, युवा शक्ति फाउंडेशन, टैलेंटनेक्सा सर्विसेज, मयंक इंटरप्राइजेज, सुभाष पेंटिंग वर्क्स, टाटा स्टील फाउंडेशन, ब्रावो सिक्योरिटी, सुदिशा फाउंड्री, मित्तल मोटर्स एवं यूनिक सोल्युशन सहित कुल 19 संस्थानों के प्रतिनिधियों द्वारा विभिन्न पदों पर नियुक्ति हेतु अभ्यर्थियों की चयन प्रक्रिया की गई।

रोजगार मेले में मोल्डिंग ऑपरेटर, मेल्टिंग इंजीनियर, कोर शॉप ऑपरेटर, मेंटेनेंस इंजीनियर, सीएनसी ऑपरेटर, फिटर, बॉल मिल ऑपरेटर, प्रेशर फिल्टर ऑपरेटर, वेल्डर, गैस कटर, इलेक्ट्रीशियन, लैब एग्जीक्यूटिव, ट्रेनी, सिक्योरिटी गार्ड एवं सुपरवाइजर, बीमा सखी, वीएमसी ऑपरेटर, एचआर एग्जीक्यूटिव, एचएमसी ऑपरेटर, लाइन ऑपरेटर, फोर्कलिफ्ट मशीन ऑपरेटर एवं वीटीएल ऑपरेटर सहित विभिन्न पदों के लिए 223 अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट किया गया।

जिला नियोजन पदाधिकारी सुश्री आशा मक्सिमा लाकड़ा ने बताया कि चयनित अभ्यर्थियों को मुख्यतः सरायकेला-खरसावाँ, चाईबासा एवं जमशेदपुर क्षेत्र में विभिन्न पदों पर रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने बताया कि जिला नियोजनालय सह मॉडल कैरियर सेंटर, सरायकेला-खरसावाँ के माध्यम से नियमित रूप से रोजगार शिविर एवं रोजगार मेले का आयोजन किया जाता है, ताकि जिले के युवाओं एवं रोजगार की तलाश कर रहे अभ्यर्थियों को विभिन्न प्रतिष्ठानों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकें।

उन्होंने जिले के रोजगार इच्छुक युवाओं एवं अन्य योग्य अभ्यर्थियों से अपील की कि भविष्य में आयोजित होने वाले रोजगार मेले एवं भर्ती कैंप में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर उपलब्ध रोजगार अवसरों का लाभ उठाएं। उन्होंने बताया कि रोजगार मेले एवं भर्ती कैंप के माध्यम से नियोजन की प्रक्रिया पूर्णतः निःशुल्क है।

रोजगार मेले में जिला नियोजन पदाधिकारी सुश्री आशा मक्सिमा लाकड़ा, वाईपी श्री रवि प्रकाश सिंह सहित जिला नियोजनालय के कर्मी श्री सुरेंद्र रजक, श्री सुजीत सरदार एवं अन्य कर्मी तथा संबंधित संस्थानों के एचआर मैनेजर एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

विधायक ने स्कूली बच्चों के बीच किया साइकिल का वितरण।

विधायक ने स्कूली बच्चों के बीच किया साइकिल का वितरण।

सरायकेला/ईचागढ़

( सोनू कुमार सिंह )

ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के राजकीयकृत मध्य विद्यालय टीकर में बुधवार को विधायक सविता महतो ने आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों के बीच साइकिल का वितरण किया। इस दौरान टीकर, सीलदा, काठघोड़ा, पातकुम एवं नारो मध्य विद्यालय के कुल 1163 छात्र-छात्राओं को साइकिल प्रदान की गई।

इस अवसर पर विधायक सविता महतो ने कहा कि झारखंड सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना है। योजना के तहत आठवीं कक्षा में अध्ययनरत सभी विद्यार्थियों को साइकिल उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि उन्हें विद्यालय आने-जाने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

उन्होंने कहा कि कल्याण विभाग की ओर से विद्यार्थियों को साइकिल दी जा रही है। साइकिल मिलने से ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को स्कूल आने-जाने में सुविधा होगी और उनकी पढ़ाई भी सुचारू रूप से जारी रखने में मदद मिलेगी। मौके पर बीडीओ एकता वर्मा, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी सुखदेव उरांव,झामुमो केन्द्रीय सदस्य काबलू महतो, प्रखंड सचिव अमित सिन्हा, सपन कुमार आदित्यदेव, प्रधानाध्यापक मेघनाद महतो, राजेश कुमार,शिक्षक शिव शंकर दास आदि उपस्थित थे।

बरडीहा में बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना हेतु जागरूकता रथ रवाना, 31 अगस्त अंतिम तिथि।

बरडीहा में बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना हेतु जागरूकता रथ रवाना, 31 अगस्त अंतिम तिथि।

बरडीहा

बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (खरीफ) को लेकर जागरूकता रथ रवाना, BDO प्रवीण कुमार सिंह ने किसानों से की जल्द से जल्द बीमा कराने की अपील।

प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह ने बरडीहा प्रखंड कार्यालय परिसर से ‘बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ के तहत किसानों को जागरूक करने के उद्देश्य से जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक किसान और फरियादी मौजूद रहे।

जागरूकता रथ को रवाना करते हुए BDO प्रवीण कुमार सिंह ने उपस्थित किसानों एवं आम जनता को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि यह योजना खरीफ फसल (मुख्य रूप से धान और मकई) के लिए चलाई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक आपदा या विपरीत मौसम के कारण फसलों को होने वाले नुकसान से किसानों को सुरक्षा प्रदान करना है।

योजना की प्रमुख बातें एवं आवश्यक विवरण
नामांकन शुल्क: मात्र ₹1 (नामांकन शुल्क के रूप में केवल एक रुपया देय है)।
आवेदन की अंतिम तिथि: 31 अगस्त 2026 (BDO ने अपील की है कि किसान अंतिम तिथि का इंतजार न करें और यथाशीघ्र आवेदन करें)।

आवेदन केंद्र: किसी भी निकटतम सीएससी (CSC) सेंटर या स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की शाखा में जाकर बीमा कराया जा सकता है।

आवश्यक दस्तावेज:
आधार कार्ड
बैंक पासबुक की छायाप्रति
भूमि संबंधी दस्तावेज
वंशावली
चालू मोबाइल नंबर

सहायता एवं संपर्क सूत्र

किसी भी प्रकार की समस्या, जानकारी या शिकायत के लिए किसान निम्नलिखित हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:
टोल-फ्री नंबर: 14447
व्हाट्सएप (WhatsApp) नंबर: 7065514447

अपील:
प्रखंड प्रशासन ने सभी किसान भाइयों से अनुरोध किया है कि वे इस जनकल्याणकारी योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

अंतिम समय की हड़बड़ी से बचने के लिए आज ही अपने नजदीकी सीएससी सेंटर या स्टेट बैंक की शाखा में जाकर अपना बीमा पंजीकरण अवश्य कराएं।

सरायकेला में सुरक्षा बलों को मिली बड़ी सफलता – रिमांड पर लिए नक्सलियों की निशानदेही पर हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद।

सरायकेला में सुरक्षा बलों को मिली बड़ी सफलता – रिमांड पर लिए नक्सलियों की निशानदेही पर हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद।

सरायकेला

सोनू कुमार सिंह

सरायकेला-खरसावां जिले में नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस रिमांड पर लिए गए भाकपा माओवादी के तीन बड़े कैडरों द्वारा बताए गए ठिकानों पर छापेमारी कर कुचाई और चाण्डिल के जंगली इलाके से भारी मात्रा में हथियार, कारतूस और विस्फोटक बरामद किए गए हैं।

पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार नक्सलियों की पहचान सब जोनल कमेटी मेंबर रवि सिंह सरदार उर्फ सागर सिंह सरदार (28), रीजनल कमेटी मेंबर मदन महतो उर्फ चरण महतो (54) और सब जोनल कमांडर मीना पहाड़िया उर्फ नेपू पहाड़िया (26) के रूप में हुई है। पूछताछ में मिले इनपुट के बाद झारखंड पुलिस, खूँटी की 209 कोबरा बटालियन और राँची की 26वीं वाहिनी एसएसबी ने मिलकर ज्वाइंट सर्च ऑपरेशन चलाया था।

इस अभियान के तहत कुचाई थाना क्षेत्र के सिकरम्बा जंगल और चाण्डिल थाना क्षेत्र के आसनबनी स्थित दलमा जंगल के ऊपर बने गुप्त ठिकानों से हथियारों को बरामद किया गया।

*बरामदगी का विवरण*

हथियार: 2 .303 राइफल, एक 5.56 MM इन्सास राइफल, एक 7.62 MM SLR राइफल और 2 देसी पिस्टल।

गोला-बारूद: 7.62 MM के 171 जिंदा कारतूस, 5.56 MM के 126 जिंदा कारतूस, 9 MM के 12 कारतूस, साथ ही 10 मैगजीन और 8 चार्जर।

विस्फोटक: 1 IED और 2 डेटोनेटर मिले, जिन्हें BDS टीम ने प्रोटोकॉल के तहत मौके पर ही नष्ट कर दिया।

यह संयुक्त कार्रवाई एसपी मनोज स्वर्गियारी के निर्देश पर की गई। ऑपरेशन में एसडीपीओ सरायकेला अनुभव भारद्वाज, एसडीपीओ चाण्डिल शिव प्रकाश कुमार, एसएसबी के उप समादेष्टा शक्ति सिंह, कोबरा के सहायक समादेष्टा विपुल राज के अलावा काण्ड्रा, चाण्डिल, नीमडीह, सरायकेला, खरसावाँ, कुचाई, चौका और गम्हरिया थाना की पुलिस टीम मौजूद रही।

पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई से क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को बड़ा नुकसान पहुंचा है।

रांची में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के विधानसभा मार्च पर हंगामा, पुलिस ने किया लाठीचार्ज।

रांची में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के विधानसभा मार्च पर हंगामा, पुलिस ने किया लाठीचार्ज।

रांची

JPSC और JSSC परीक्षाओं में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने सोमवार को विधानसभा मार्च निकाला। विधानसभा का घेराव करने जा रहे छात्रों को रोकने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हो गया। बताया जा रहा है कि बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के बाद पुलिस ने भीड़ को काबू करने के लिए पहले वाटर कैनन का प्रयोग किया और बाद में लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अभ्यर्थी जब विधानसभा की तरफ बढ़ रहे थे तो पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को हटाने लगे। इसी को लेकर जवानों और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने पहले पानी की बौछारों से भीड़ को रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी नहीं रुके तो बल प्रयोग करना पड़ा।

इस कार्रवाई में कुछ छात्रों को चोटें आने की खबर है, हालांकि घायलों की सही संख्या को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

विधानसभा मार्च को देखते हुए पहले से ही पूरे इलाके में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था और विधानसभा जाने वाले कई रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई थी। हंगामे के बाद पुलिस ने भीड़ को अलग-अलग जगहों पर रोक कर स्थिति को नियंत्रण में करने की कोशिश की।

अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि JPSC और JSSC की भर्तियों में हुई कथित धांधली पर सरकार ठोस कदम उठाए। प्रदर्शनकारी खास तौर पर 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा समेत कई परीक्षाओं को निरस्त करने और पूरे मामले की जांच CBI से कराने की मांग पर अड़े हैं। उनका कहना है कि राज्य स्तरीय या विभागीय जांच से उन्हें संतोष नहीं है।

वहीं सरकार का कहना है कि बातचीत के बाद छात्रों की ज्यादातर मांगें मान ली गई हैं और कुछ परीक्षाओं को रद्द करने जैसे फैसले भी लिए गए हैं। लेकिन आंदोलनरत छात्रों का आरोप है कि CBI जांच जैसी उनकी सबसे बड़ी मांग पर अब तक कोई साफ आश्वासन नहीं मिला है, इसलिए आंदोलन जारी रहेगा।

गौरतलब है कि इस विवाद के बीच JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते को CID ने परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया है। इससे पहले उनसे इस मामले में पूछताछ भी हुई थी। इसके अलावा JPSC के तीन सदस्यों के इस्तीफा देने की भी खबर है। इन सब घटनाक्रमों के बाद छात्रों का आंदोलन और तेज हो गया है।

फिलहाल विधानसभा के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।

चक्रधरपुर के मधुसूदन विद्यालय में संस्थापक स्व. श्याम सुंदर महतो की प्रथम पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित।

चक्रधरपुर के मधुसूदन विद्यालय में संस्थापक स्व. श्याम सुंदर महतो की प्रथम पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित।

चाईबासा/चक्रधरपुर

आसनतलिया स्थित मधुसूदन विद्यालय में विद्यालय के संस्थापक और पूर्व चेयरमैन स्वर्गीय श्याम सुंदर महतो की पहली पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ स्व. महतो के तैलचित्र के सामने दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। विद्यालय की बड़ी मैम द्रौपदी महतो ने उनके चित्र पर फूल अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

इसके बाद परिवार के सदस्य लक्ष्मण महतो, लखी देवी, प्रभात कुमार महतो, रंगलाता महतो, कमलेश महतो, यशोदा महतो, बी.के. हिंदवार, आरती कोड़वार, नृपेंद्र महतो, संगीता महतो, कौशल हिंदवार, ईला महतो, जीवेश कुमार हिंदवार, निशा महतो और विधि, रिधि, मयंक, वैभव व वाणी ने भी पुष्पांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम में मधुसूदन मेमोरियल एजुकेशनल सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद राम, सचिव लक्ष्मण महतो, सह-सचिव गणेश्वर महतो, कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश महतो और सरस्वती देवी मेमोरियल एजुकेशनल ट्रस्ट के चेयरमैन बलराज कुमार हिंदवार, सचिव डॉ. सच्चिदानंद राम, कोषाध्यक्ष यशोदा महतो के अलावा शंकर लाल महतो, धारित्री महतो और शिवचरण महतो ने भी उन्हें नमन किया।

विद्यालय परिवार की ओर से चेयरमैन बी.के. हिंदवार, प्राचार्य के. नागराजू, प्रशांत कुमार तिवारी, उप-प्राचार्य वसंत कुमार महतो, उप-प्राचार्या आरती कोड़वार, परीक्षा नियंत्रक दिनेश कुमार चक्रवर्ती, जगदीश जामुदा सहित सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं ने श्रद्धासुमन अर्पित किए।

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए सोसाइटी के सचिव लक्ष्मण महतो ने कहा कि स्व. श्याम सुंदर महतो के बताए मार्ग पर चलते हुए मधुसूदन संस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

वहीं उप-प्राचार्य वसंत कुमार महतो ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्व. एस.एस. महतो द्वारा स्थापित इस शैक्षणिक संस्था को आगे बढ़ाना हम सभी शिक्षकों की नैतिक जिम्मेदारी है।

उनके पूर्व छात्र जेनाराम पूर्ति ने स्व. महतो को अपने जीवन का पथ-प्रदर्शक बताते हुए कहा कि उनके विचार और आदर्श सदैव प्रेरणा देते रहेंगे। इस दौरान पूरे विद्यालय परिसर का माहौल भावुक रहा।

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर नगर भवन, सरायकेला में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित।

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर नगर भवन, सरायकेला में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित।

सरायकेला-खरसावां

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आज नगर भवन, सरायकेला में जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन सिंहभूम लोकसभा क्षेत्र की माननीय सांसद श्रीमती जोबा मांझी की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, भाषा, लोक-परंपराओं एवं गौरवशाली विरासत के संरक्षण-संवर्धन के साथ जल, जंगल एवं जमीन के संरक्षण तथा जनजातीय समुदाय के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तीकरण का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम से पूर्व उपायुक्त नितिश कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी एवं अन्य पदाधिकारियों द्वारा सिदो-कान्हू पार्क, बिरसा चौक एवं समाहरणालय परिसर स्थित महापुरुषों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण एवं श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन किया गया। इस दौरान वीर शहीदों के संघर्ष, त्याग एवं बलिदान को स्मरण करते हुए उनके आदर्शों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की गई।

जिला स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके उपरांत महापुरुषों के तैलचित्रों पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। कार्यक्रम का स्वागत संबोधन परियोजना निदेशक, आईटीडीए श्रीमती उषा मुंडू द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों द्वारा आदिवासी एवं स्थानीय संस्कृति पर आधारित मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से वातावरण को जीवंत बनाया गया। सरायकेला छऊ नृत्य, नटुआ नृत्य, मानभूम छऊ नृत्य, मुंडारी नृत्य एवं महिला पाइका नृत्य की प्रस्तुतियों के माध्यम से जिले की समृद्ध लोक एवं आदिवासी सांस्कृतिक विरासत को आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया गया। पारंपरिक वेशभूषा, लोकधुनों एवं नृत्य की प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को स्थानीय संस्कृति एवं परंपराओं से जोड़ा। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से स्थानीय कला, भाषा, लोक परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया गया। स्थानीय कलाकारों द्वारा किए जा रहे इन प्रयासों की सराहना भी की गई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने कहा कि आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराएं एवं प्रकृति के साथ उसका गहरा जुड़ाव झारखंड की विशिष्ट पहचान है। जल, जंगल एवं जमीन के संरक्षण तथा प्रकृति के साथ संतुलित जीवन की परंपरा समाज को सतत एवं समावेशी विकास का महत्वपूर्ण संदेश देती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार एवं कौशल विकास के अवसरों का विस्तार करते हुए सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुंचाना आवश्यक है। इसके लिए प्रशासनिक प्रयासों के साथ जनभागीदारी एवं जागरूकता भी महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि युवाओं को शिक्षा एवं कौशल विकास के अवसरों से जोड़ना तथा बालिकाओं की शिक्षा एवं महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। आधुनिक शिक्षा एवं विकास के साथ अपनी भाषा, परंपरा, कला एवं सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। विकास की प्रक्रिया में स्थानीय संसाधनों एवं सामुदायिक क्षमता का प्रभावी उपयोग करते हुए समाज की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माननीय सांसद श्रीमती जोबा मांझी ने विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सभी को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज का जल, जंगल और जमीन के साथ सदियों पुराना गहरा संबंध रहा है। प्रकृति उनके लिए केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति एवं आस्था का आधार है। जनजातीय समाज ने अपनी भाषा, संस्कृति, परंपराओं एवं प्रकृति के प्रति आस्था को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित रखा है। इस समृद्ध विरासत को आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा एवं विकास के अवसरों से नई पीढ़ी को जोड़ना जरूरी है, लेकिन इसके साथ अपनी भाषा, संस्कृति एवं सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। युवाओं को अपनी संस्कृति, परंपरा एवं प्रकृति के संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए परिवार, समाज एवं संस्थाओं को मिलकर प्रयास करना चाहिए। उन्होंने जल, जीवन, जंगल एवं जमीन के संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए सभी से इसके संरक्षण में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।

उन्होंने वीर शहीदों एवं महापुरुषों के संघर्ष, त्याग एवं बलिदान को स्मरण करते हुए उनके आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उनके संघर्ष एवं बलिदान से समाज को अपनी पहचान, सम्मान एवं मूल्यों के संरक्षण की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा जनजातीय समुदाय के विकास एवं उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर पात्रता के अनुसार उनका अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की।

स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत गीत, नाटक एवं पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास स्थानीय संस्कृति एवं परंपराओं को जीवंत बनाए रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी से एकजुट होकर संस्कृति, भाषा, विरासत, जल, जीवन, जंगल एवं जमीन के संरक्षण के लिए सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान पांच पंचायतों के लिए कुल 1,891.12 एकड़ सामुदायिक वन पट्टा वितरित किया गया। इसके साथ ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत नव नियुक्त 57 स्वास्थ्य कर्मियों के बीच नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। कृषि विभाग की ओर से पांच किसानों के बीच अरहर बीज का वितरण किया गया। विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉल के माध्यम से जनकल्याणकारी योजनाओं, विभागीय सेवाओं एवं उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी आमजनों को दी गई।

कार्यक्रम स्थल पर स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक कला एवं स्थानीय उत्पादों का भी प्रदर्शन किया गया। इससे स्थानीय कलाकारों, कारीगरों एवं उत्पादकों को अपनी कला, हुनर एवं उत्पादों को प्रदर्शित करने का अवसर मिला तथा स्थानीय विरासत एवं परंपराओं को प्रोत्साहन मिला।

कार्यक्रम में परियोजना निदेशक, आईटीडीए उषा मुंडू, अपर उपायुक्त जयवर्धन कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी, सरायकेला अभिनव प्रकाश, सिविल सर्जन सरयू प्रसाद राय, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी अविनाश कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक, सब-रजिस्ट्रार सरायकेला, जिला गब्य विकास पदाधिकारी, डीपीएम, जेएसएलपीएस सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त स्थानीय सांसद एवं विधायक के प्रतिनिधिगण तथा अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधिगण भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में आमजनों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता सुनिश्चित की।

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