सरायकेला/ईचागढ़
मालखान महतो
सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ प्रखंड का कांकीटांड़ गांव आज भी विकास की बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर है। तीन पंचायतों के अंतर्गत आने वाला यह गांव आजादी के बाद से अब तक एक अदद सड़क के लिए तरस रहा है। गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क तो दूर, बरसात के दिनों में खेतों की मेड़ ही ग्रामीणों के लिए एकमात्र सहारा है। स्कूली बच्चों को भी करीब दो किलोमीटर तक फिसलन भरी मेड़ पर गिरते-पड़ते स्कूल जाना पड़ता है। वहीं गंभीर रूप से बीमार मरीजों और गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए ग्रामीणों के सहारे ढोकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।

ये तस्वीरें ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के कांकीटांड़ गांव की हैं। आजादी के इतने वर्षों बाद भी गांव के लोगों को सड़क जैसी बुनियादी सुविधा नसीब नहीं हुई है। गांव तक आने-जाने के लिए कोई सुगम रास्ता नहीं है। बरसात के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं।
धान के खेतों के बीच बनी संकरी मेड़ ही ग्रामीणों के लिए मुख्य सड़क तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता है। इसी रास्ते से ग्रामीण मिलन चौक बाजार जाते हैं और इसी पगडंडी से बच्चे स्कूल का सफर तय करते हैं। करीब दो किलोमीटर तक फिसलन भरी मेड़ पर छोटे-छोटे बच्चे गिरते-पड़ते स्कूल पहुंचते हैं और फिर इसी जोखिम भरे रास्ते से वापस घर लौटते हैं।
सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है, जब गांव में कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार पड़ जाता है या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ती है। सड़क नहीं होने के कारण मरीजों को ढोकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है। ऐसे में समय पर इलाज मिलना भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। गांव में एक नव प्राथमिक विद्यालय भी था, लेकिन शिक्षा विभाग द्वारा इसे बंद कर दिया गया है। बच्चों को दो किलोमीटर पैदल चलकर सितु स्कूल आना पड़ता है।ग्रामीणों का कहना है कि मुख्य सड़क पर वाहनों की आवाजाही के बीच बच्चों को जान जोखिम में डालकर सड़क पार करनी पड़ती है।
ग्रामीणों का कहना है कि आज वैज्ञानिक युग में लोग जी रहे हैं,लेकिन कांकीटांड़ के लोग आज भी अपने गांव तक एक सड़क के लिए तरस रहे हैं। सड़क के अभाव में गांव का विकास भी प्रभावित हो रहा है।यहां आज भी खेत की मेड़ ही सड़क का विकल्प बनी हुई है। ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग है कि गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए जल्द से जल्द पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चों को स्कूल जाने और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में अपनी जान जोखिम में न डालनी पड़े। ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से कांकीटांड़ गांव की समस्या को गंभीरता से लेते हुए सड़क निर्माण कराने की मांग की है।
















