सरायकेला/ईचागढ़
(मालखान महतो )
प्रखंड अंतर्गत बिस्टाटांड गांव से प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की एक बेहद दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। यहाँ सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ (PMAY) गरीबों के लिए महज़ एक छलावा बनकर रह गई है। कागजों पर विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाले प्रशासन की नाक के नीचे बिस्टाटांड गांव के असली जरूरतमंद आज भी नारकीय जीवन जीने को विवश हैं।
गांव के अत्यंत गरीब और लाचार ग्रामीण धनंजय महतो और भजोहरि महतो का जीवन आज गंभीर संकट में है। दोनों परिवारों के कच्चे मकान पूरी तरह से जर्जर और ढलने की कगार पर पहुंच चुके हैं। स्थिति इतनी दयनीय है कि घरों की छतें पूरी तरह टूट चुकी हैं, जिसके कारण उन्हें बारिश और धूप से बचने के लिए बांस और प्लास्टिक शीट (तिरपाल) का सहारा लेना पड़ रहा है।

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह पूरा इलाका हाथी प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, जहाँ अक्सर जंगली हाथियों का आतंक बना रहता है। ऐसे संवेदनशील और खतरनाक इलाके में जर्जर और कच्चे मकानों में रहना इन गरीब परिवारों के लिए मौत को दावत देने जैसा है। सिर पर पक्की छत न होने और हाथियों के हमले के लगातार बने रहने वाले खौफ के कारण इन परिवारों को हर पल अनहोनी का डर सताता रहता है और उनका हर दिन जान हथेली पर लेकर गुजर रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक गरीबों तक पहुंचने के बजाय, बिचौलियों और स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले अपात्र लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। जरूरतमंदों के हक को ताक पर रखकर उन लोगों को आवास आवंटित किए जा रहे हैं जो आर्थिक रूप से पहले से ही सक्षम हैं, जबकि असली हकदार दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।
इस गंभीर मामले को लेकर बिस्टाटांड गांव के लोगों ने कई बार स्थानीय प्रखंड कार्यालय के चक्कर काटे और अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण अब तक कोई सुध नहीं ली गई है। अधिकारियों की इस गहरी उदासीनता से ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
अब ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च-स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके। इसके साथ ही, हाथी प्रभावित इस संवेदनशील क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए पीड़ित धनंजय महतो और भजोहरि महतो को फौरन प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सुरक्षित पक्का मकान मुहैया कराया जाए, और इस योजना में गड़बड़ी करने वाले तथा अपात्रों को लाभ दिलाने वाले भ्रष्ट तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।











