मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पत्नी कल्पना सोरेन संग किया झारखंड के पर्यटन स्थलों का भ्रमण।
झारखंड की इस अनुपम धरती पर सभी सैलानियों का हार्दिक स्वागत है, जोहार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन झारखंड
झारखंड की हरियाली का व्याख्या करना यह शब्दों के बाहर की बात है:- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, झारखंड
झारखंड/रांची
( सोनू कुमार सिंह )
साथियों काफी वर्षों ( 1982 ) पहले बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्रीज में एक फिल्म आई थी “नदिया के पार” और फिल्म का एक गाना बेहद ही प्रसिद्ध हुआ था जिसे आज भी हम और आप गुनगुनाते हैं उस गाने की एक लाइन मुख्यमंत्री के इस मनमोहन कार्य में फिट बैठती है “ठहेर ठहेर ये सुहानी सी डगर तनी देखने दे”। कैने दिशा में लेके चला रहे बटोहिया।
प्राकृतिक की गोद में बसा 24 जिलों वाला झारखंड राज्य अपने आप में एक हरियाली का प्रतीक है। जहां नजर घुमाओ बड़े-बड़े पहाड़ बड़े-बड़े पेड़ पौधे फूल पत्तियां पक्षियां जानवर यह सब एक अलग ही मनमोहक दृश्य दिखाई देती है जिसे देखने के बाद हर किसी का मन प्रसन्न हो जाता है फिर और किसी नजारे को देखने की चाहत नहीं रहती।
प्रकृति की गोद में बहती निर्मल जलधारा, घने जंगलों की हरियाली और पहाड़ों का शांत सौंदर्य बार-बार यह एहसास कराता है कि झारखंड प्रकृति का अनुपम उपहार है। यह हमारी साझी धरोहर है, जिसे सहेजना और संरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। झारखंड के किसी भी कोने में आप चले जाइए, प्रकृति अपने अलग-अलग रंगों में आपका स्वागत करती दिखाई देगी।
आपको बताते चलें कि झारखंड हमारे भारत देश का एक पर्यटक स्थल के नाम से भी जाना जाता है यहां के पर्यटक स्थल बाहरी सैलानियों को काफी आकर्षित करती है जिससे कि बाहर से भी लाखों की संख्या में सैलानी खासकर मानसून के महीने में झारखंड के पर्यटन स्थलों का नजारा देखने के लिए हजारों मील दूर से यात्रा कर झारखंड प्रदेश में प्रवेश करते हैं।
वहीं रविवार का दिन झारखंड के लिए बेहद ही खास दिन रहा जिसमें की झारखंड के माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के संग सेल्फ ड्राइव करते हुए झारखंड के कुछ चुनिंदा पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया।
वहीं मुख्यमंत्री के पर्यटन स्थलों का जायजा लेते हुए मुख्यमंत्री ने कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की जिसे देखने के बाद यूजर्स की मानो कमेंट करने का तांता लग गया। किसी ने जोहार झारखंड कहा तो किसी ने जोहार झारखोंड कहा है।
साथियों आपको बताते चलें कि 24 जिलों वाला राज्य झारखंड के मुख्यमंत्री का एक-एक क्षण काफी कीमती माना जाता है उनके ऊपर 24 जिलों का कार्यभार की जिम्मेदारी है फिर भी वे काफी व्यस्त होने के बावजूद भी रांची से लौटने के क्रम में जोन्हा जलप्रपात का दृश्य देखकर वह खुद को रोक नहीं पाएं और वही अपनी गाड़ी को खड़ी कर प्राकृतिक का नजारा देखने के लिए कुछ क्षण अपनी पत्नी कल्पना सोरेन संघ रुक गए और कुछ देर प्रकृतिक के मनमोहक नजारे का अवलोकन करने के बाद कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा है कि रांची शहर से कुछ ही दूरी पर स्थित जोन्हा फ़ॉल की हरी-भरी वादियों के बीच कुछ पल बिताने का अवसर मिला। इस बीच वहां फलों का भी आनंद लिया और स्थानीय लोगों से बातचीत भी हुई।
साथियों फुर्सत के क्षण मे से कुछ समय प्रकृति के गोद में अवश्य जाना चाहिए, वहां शांतिपूर्ण आनन्द एवं चिन्तन-मनन प्रदेश के खुशहाली में मील का पत्थर साबित होता है । प्रकृति की गोद में समय बिताना सबसे अच्छा है, यह हमारे जीवन को नई दिशा देता है। झारखंड की प्रकृतिक वातावरण का अनुभव प्राप्त करना बहुत ही प्रभावित करता है मन को बस उसे समझने की आवश्यकता है।
जियाडा रेगुलेशन 2026′ के ड्राफ्ट को लेकर उद्यमियों की बैठक सम्पन्न।
रांची/झारखंड
JIADA द्वारा सोमवार को रांची के होटल रेडिसन ब्लू में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। JIADA द्वारा राज्य में निवेश को बढ़ावा देने और नियमों को सरल बनाने के लिए नया ‘जियाडा रेगुलेशन 2026’ लाने की तैयारी में है. जिसे लेकर के उक्त कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में झारखंड की प्रस्तावित नई औद्योगिक नीति एवं ड्राफ्ट रेगुलेशंस पर राज्यभर के विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने विस्तार से चर्चा की।
इसरो प्रतिनिधिमंडल ने औद्योगिक नीति के मसौदे से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को तथ्यात्मक रूप से जियाड़ा के प्रबंध निदेशक वरुण रंजन एवं उनकी टीम के समक्ष रखा। साथ ही संगठन की ओर से लिखित सुझाव सौंपते हुए औद्योगिक क्षेत्रों में आधारभूत संरचनाओं के विकास और सुविधाओं में सुधार की मांग की गई।
आपको बताते चलें कि जियाडा द्वारा राज्य में निवेश को बढ़ावा देने और नियमों को सरल बनाने के लिए नया ‘जियाडा रेगुलेशन 2026’ लाने की तैयारी में है.
वहीं कार्यशाला में जियाडा के एमडी वरुण रंजन ने विभिन्न उद्योग संगठनों के उद्यमियों से सीधा संवाद किया और उनसे पूछा कि वे कैसा रेगुलेशन चाहते हैं? एमडी ने स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य निवेश को आसान बनाना और उद्यमियों की समस्याओं को दूर करना है.
कार्यक्रम में शामिल FJCCI, JASSIA और AIADA के प्रतिनिधियों ने जियाडा के सामने अपनी कई महत्वपूर्ण मांगें और सुझाव रखें. जिसमें उद्यमियों ने कहा कि पहले औद्योगिक क्षेत्रों में 99 साल की लीज पर जमीन मिलती थी, जिसे घटाकर 30 साल कर दिया गया है. बिहार समेत कई राज्यों ने इसे दोबारा 99 साल कर दिया है, झारखंड में भी यही व्यवस्था लागू होनी चाहिए. साथ ही साथ निवेशकों ने ऐसे ‘प्लग एंड प्ले’ परिसरों की मांग की जहां विकसित भूमि, तैयार शेड, बिजली, पानी, सड़क और अपशिष्ट प्रबंधन (वेस्ट मैनेजमेंट) जैसी सुविधाएं पहले से उपलब्ध हों, ताकि उद्योग तुरंत शुरू हो सकें. ओनरशिप ट्रांसफर (स्वामित्व हस्तांतरण) को आसान बनाने के लिए ज्वाइंट वेंचर के प्रावधान शामिल करने का भी सुझाव दिया गया. इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में कर्मचारियों के लिए 10 फीसदी आवासीय सुविधा की मांग की गई. इस पर जियाडा की ओर से बताया गया कि इंडस्ट्रियल एरिया में वर्किंग वुमेंस हॉस्टल का निर्माण कराया जा रहा है.
कार्यक्रम में जियाडा आदित्यपुर के क्षेत्रीय निदेशक प्रेम रंजन तथा आरडीडी दिनेश रंजन भी उपस्थित रहे। इसरो प्रतिनिधिमंडल में अध्यक्ष रुपेश कटरियार, उपाध्यक्ष समीर सिंह, अशोक सतपति, महासचिव संदीप मिश्रा, सचिव राजीव शुक्ला, कार्यकारिणी सदस्य गौतम महापात्रा एवं अवनीत मूतरेजा शामिल थे।
आयकर कर्मचारी महासंघ, राँची का चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न।
झारखंड/रांची
दिनांक 03 जून 2026 को आयकर कर्मचारी महासंघ, राँची का चुनाव शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण एवं लोकतांत्रिक वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। चुनाव में कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
चुनाव परिणामों के अनुसार मनोज कुमार शुक्ला अध्यक्ष पद पर, आभाष नाथ सचिव पद पर तथा बबलू रजक कोषाध्यक्ष पद पर निर्वाचित घोषित किए गए। तीनों पदाधिकारियों ने अपने-अपने प्रतिद्वंद्वियों को भारी मतों के अंतर से पराजित कर उल्लेखनीय विजय प्राप्त की।
इसके अतिरिक्त डेलीगेट पद के लिए श अरविंद कुमार प्रसाद, राकेश सिंह, रवि कुमार, मनीष रंजन, आनंद कुमार, मिथलेश कुमार सुमन एवं रजनीश कुमार भी भारी मतों से विजयी घोषित हुए। इस प्रकार कर्मचारियों ने एक सशक्त एवं अनुभवी टीम पर अपना विश्वास व्यक्त किया है।
नवनिर्वाचित अध्यक्ष मनोज कुमार शुक्ला ने सभी कर्मचारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह विजय व्यक्तिगत नहीं, बल्कि कर्मचारी एकता, विश्वास एवं संगठन की विजय है। उन्होंने कर्मचारियों के अधिकारों, सम्मान एवं कल्याण की रक्षा हेतु पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण के साथ कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया।
नवनिर्वाचित सचिव आभाष नाथ ने कर्मचारियों द्वारा प्रदत्त जनादेश के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि संगठन सदैव कर्मचारियों के हितों को सर्वोपरि रखेगा तथा उनकी समस्याओं के समाधान एवं कल्याणकारी कार्यों के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगा।
चुनाव प्रक्रिया मुख्य चुनाव अधिकारी सुजीत सिंह, संजय कुमार गुप्ता, अमन आनंद, चिंटू कुमार एवं अंतोष कुमार की निगरानी में निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। सभी प्रत्याशियों एवं कर्मचारियों ने चुनाव की गरिमा बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
आयकर कर्मचारी महासंघ, राँची के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने कर्मचारियों के विश्वास पर खरा उतरने तथा संगठन को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया।
जारीकर्ता: आयकर कर्मचारी महासंघ, राँची (नवनिर्वाचित कार्यकारिणी की ओर से)
आयकर कर्मचारी महासंघ के गौरवशाली 74 वर्ष पूर्ण होने एवं संगठन के 75वें वर्ष में प्रवेश के उपलक्ष में ITEF UNIT द्वारा platinum bubbles celebration अत्यंत उत्साह गरिमा एवं संगठनित्मक एकजुटता के साथ केंद्रीय राजस्व भवन रांची के प्रांगण में मनाया गया।
आपको बताते चलें कि यह अवसर संगठन के लंबे संघर्ष कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा हेतु किए गए ऐतिहासिक प्रयासों तथा कर्मचारी एकता की सशक्त परंपरा को स्मरण करने का महत्वपूर्ण छान रहा।
वहीं कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजारोहण के साथ की गई ITEF रांची इकाई के महिला सदस्यों ने संगठन का ध्वज फहराकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया जो एक अनूठी पहल है ध्वजारोहण के दौरान उपस्थित सदस्यों ने संगठन की एकता अनुशासन एवं कर्मचारी हितों की रक्षा हेतु सदैव प्रतिबध्द रहने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर यूनिट के अधिकारियों वरिष्ठ साथियों युवा कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ITEF सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही । पूरे परिषद में संगठनात्मक उत्साह भाईचारा एवं कर्मचारी एकता का वातावरण देखने को मिला।
कार्यक्रम का संबोधित करते हुए अध्यक्ष मनोज शुक्ला ने कहा कि ITEF केवल एक संगठन नहीं है बल्कि कर्मचारियों के अधिकार सम्मान और न्याय की आवाज है उन्होंने कहा कि पिछले 74 वर्षों से federation ने अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए कर्मचारियों के ही तो की रक्षा हेतु ऐतिहासिक संघर्ष किए हैं। आज का यह platinum bubbles celebration उन सभी पूर्वज साथियों के योगदान को नमन करने का अवसर है जिन्होंने संगठन को मजबूत आधार प्रदान किया।
अपने संबोधन उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान समय में कर्मचारियों के समक्ष नई चुनौतियां हैं जिनका सामना केवल संगठनात्मक एकता और सामूहिक प्रयासों से ही किया जा सकता है। उन्होंने सभी सदस्यों से संगठन को और अधिक सशक्त बनाने तथा कर्मचारियों के हितों के लिए निरंतर सक्रिय रहने का आवाहन किया है।
वंही कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सचिन आभास नाथ ने कहा कि ITEF का इतिहास संघर्ष समर्पण एवं उपलब्धियां से भरा हुआ है उन्होंने कहा कि platinum bubbles वर्ष संगठन के लिए आत्ममंथन, उपलब्धियों के मूल्यांकन तथा भविष्य की नई दिशा तय करने का अवसर है उन्होंने सभी सदस्यों से संगठन की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने एवं आने वाली पीढ़ी को संगठन के मूल्यों से जोड़ने की अपील की है।
ज्ञात हो कि ITEF का PLATINUM BUBBLES CELEBRATION 20 मई 2026 से प्रारंभ होकर 10 फरवरी 2027 तक विभिन्न कार्यक्रमों, संगोष्ठियों, सामाजिक गतिविधियों एवं संगठनात्मक आयोजनों के माध्यम से मनाया जाएगा।
इस ऐतिहासिक पल के अवसर पर अविनाश कुमार उपाध्याय आईटीएफ बिहार झारखण्ड, सी के झा सहायक आयकर आयुक्त, प्रशांत कुमार सिंह, रवि कुमार, मनीष रंजन, बबलू रजक, राकेश सिंह, अरविंद प्रसाद, रजनीश कुमार, मिथिलेश कुमार के साथ-साथ रांची धनबाद एवं जमशेदपुर के सदस्य वृहद संख्या में शामिल होकर कार्यक्रम को अविश्वसनीय एवं अद्भुत बनाया।
कार्यक्रम का समापन संगठन आत्मक एकता एवं कर्मचारी हितों की रक्षा के संकल्प के साथ हुआ।
झारखंड में बढ़ती गर्मी के बीच स्कूलों के समय में बदलाव, 21 अप्रैल से लागू होगा नया आदेश।
झारखंड/रांची
राज्य में लगातार बढ़ती गर्मी को देखते हुए झारखंड सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने सभी विद्यालयों के संचालन समय में बदलाव का महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। यह आदेश 21 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा और अगले आदेश तक लागू रहेगा।
जारी निर्देश के अनुसार, राज्य के सभी सरकारी, गैर-सरकारी सहायता प्राप्त (अल्पसंख्यक सहित) एवं निजी विद्यालयों में कक्षा K.G. से लेकर कक्षा 8 तक की पढ़ाई सुबह 7:00 बजे से 11:30 बजे तक संचालित की जाएगी। वहीं कक्षा 9 से 12 तक की कक्षाएं सुबह 7:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक चलेंगी।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों को शेष समय, यानी सुबह 7:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक विद्यालय में रहकर गैर-शैक्षणिक कार्यों का निष्पादन करना होगा।
सरकार का यह निर्णय छात्रों को भीषण गर्मी से राहत देने के उद्देश्य से लिया गया है। आदेश को विभागीय सचिव की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।
झारखंड: उत्पाद सिपाही परीक्षा पेपर लीक कांड का भंडाफोड़।
राजधानी/रांची
मुख्य सरगना समेत 164 गिरफ्तार, एग्जाम पास कराने के लिए एक अभ्यर्थी से 10 से 15 लाख में हुआ था सौदा।
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएस स) द्वारा आयोजित की जाने वाली झारखंड उत्पाद सिपाही प्रतियोगिता परीक्षा-2023 में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे एक बड़े अंतर्राज्यीय गिरोह का रांची पुलिस ने पर्दाफाश किया है. एसएसपी राकेश रंजन को मिली गुप्त सूचना के आधार पर ग्रामीण एसपी के नेतृत्व में पुलिस की टीम ने तमाड़ थाना क्षेत्र के एक निर्माणाधीन भवन में छापेमारी कर गिरोह के पांच मुख्य सदस्यों और 159 अभ्यर्थियों (जिनमें 7 महिला अभ्यर्थी शामिल हैं) को गिरफ्तार किया है.
रांची पुलिस को 11 अप्रैल 2026 को गुप्त सूचना मिली थी कि तमाड़ थाना क्षेत्र के एक सुनसान निर्माणाधीन भवन में भारी संख्या में जेएसएससी अभ्यर्थी जुटे हैं और उनकी गतिविधियां संदिग्ध हैं. सूचना के आधार पर पुलिस ने एक विशेष छापेमारी दल का गठन किया और 11 अप्रैल की देर रात उक्त स्थल पर दबिश दी. पुलिस के पहुंचते ही वहां अफरा-तफरी मच गई. करीब 150 से अधिक लोग इधर-उधर भागने लगे और अपने मोबाइल फोन व अन्य दस्तावेज छिपाने की कोशिश करने लगे. पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए घेराबंदी की और सभी को हिरासत में लेकर तलाशी शुरू की.
बिहार का शातिर अपराधी निकला गिरोह का सरगना: गिरफ्तार किए गए गिरोह का मुख्य सरगना अतुल वत्स (पिता: अरुण कुमार उर्फ अरुण केशरी) है, जो जहानाबाद (बिहार) का रहने वाला है. अतुल वत्स का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड काफी चौंकाने वाला है. वह देश की कई बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक मामले में वांछित रहा है.
– राजस्थान क्लर्क भर्ती परीक्षा (2017)
– नीट परीक्षा पेपर लीक (2024)
– कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर भर्ती, बिहार (2024)
– RO/ARO प्रारंभिक परीक्षा, उत्तर प्रदेश (2024) – इसमें वह यूपी STF द्वारा गिरफ्तार भी किया गया था.
आने वाले समय में झारखंड में लगभग ₹17,000 करोड़ की लागत से 450 किमी नई सड़क परियोजनाएँ शुरू होंगी। इनमें Varanasi–Kolkata Expressway भी शामिल है, जो झारखण्ड में लोकल कनेक्टिविटी और व्यापार को नई दिशा देगा।
साथ ही रांची में 6000 करोड़ रुपये की लागत से आउटर रिंग रोड के निर्माण की घोषणा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने की है जो राजधानी के विकास को और विस्तार देने वाला होगा। यह रांची शहर के लिए भी महत्वपूर्ण कदम है।
300 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से रांची बाईपास एनएच 33 के विकास स्थित रांची-हजारीबाग रोड जंक्शन और रामपुर रामपुर स्थित रांची-जमशेदपुर जंक्शन पर 02 ग्रेड सेपरेटेड इंटरचेंज के निर्माण कार्य होगा।
केन्द्रीय परिवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी के द्वारा वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से एवं रक्षा राज्यमंत्री श्री संजय सेठ के द्वारा शिलान्यास होगा।
नही रहे झारखंड के जननायक दिशोम गुरू शिबू सोरेन दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में ली आखरी सांस निधन
दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन पर 3 दिन का राज्यकिया शोक घोषित
झारखंड/रांची
झारखंड के जननायक दिशोम गुरु शिबू सोरेन (81 वर्ष ) का सोमवार को दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में निधन हो गया. पिछले कई दिनों से बीमार चल रहा थे. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद ट्वीट कर इसकी आधिकारिक जानकारी देते हुए कहा कि उनके निधन से मैं हो गया.गुरुजी शिबू सोरेन झारखंड अलग राज्य के जननायक हैं और उन्होंने ही अपने संघर्ष से झारखंड अलग राज्य का गठन कराया था. शिबू सोरेन का निधन के बाद है झारखंड आंदोलन के एक बड़े युग का समापन हो गया है. शिबू सोरेन अभी राज्यसभा सांसद थे. उनके निधन की खबर पाकर पूरे झारखंड ही नहीं पूरे देश में शोक की लहर है. करीब 81 वर्ष के शिबू सोरेन पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे और वे दिल्ली में इलाजरत थे.झारखंड मुक्ति मोर्चा का उन्होंने झारखंड अलग राज्य के गठन को लेकर अन्य लोगों के साथ मिलकर गठित किया था.
शिबू सोरेन, राष्ट्रीय पटल पर एक चिर परिचित पहचान है. एक आम शख्स से शख्सियत बनने का उनका सफर
झारखंड की राजनीति में ध्रुव तारा की तरह चमकते रहे गुरुजी का निधन हो गया. गुरूजी का शुरुआती जीवन संघर्षों से भरा रहा. 11 जनवरी 1944 को गोला प्रखंड के नेमरा गांव में सोबरन सोरेन के घर जन्मे शिबू सोरेन को बचपन में प्यार से शिवलाल कहकर पुकारा जाता था. लेकिन उनकी प्रारंभिक शिक्षा शिवचरण मांझी के नाम से हुई. शिवचरण के नाम से उन्होंने 1972 में पहली बार जरीडीह से विधानसभा का चुनाव भी लड़ा था. उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही प्राइमरी स्कूल में हुई. फिर गोला प्रखंड में मौजूद राज्य संपोषित हाई स्कूल में उनके पिता ने नामांकन कराया. जहां आदिवासी छात्रावास में रहकर उन्होंने पढ़ाई को जारी रखा.
किशोरावस्था में ही महाजनों को देने लगे चुनौती
जब उनकी उम्र महज 13 साल थी, तभी एक घटना ने किशोर शिबू सोरेन के जीवन को बदल कर रख दिया. तारीख- 27 नवंबर 1957, जब उन्हें सूचना मिली कि उनके पिता सोबरन सोरेन की महाजनों ने हत्या कर दी है. वरिष्ठ पत्रकार अनुज कुमार सिन्हा की पुस्तक दिशोम गुरु शिबू सोरेन के मुताबिक महाजनों के लड़कों ने एक आदिवासी महिला के खिलाफ अपशब्द कहा था, जिसका विरोध शिबू सोरेन के पिता सोबरन सोरेन ने किया था. यह बात महाजनों को इतनी नागवार गुजरी की साजिश रचकर उनकी हत्या कर दी गई.
पिता की हत्या की घटना ने बदल दी गुरुजी की जिंदगी
गांधीवादी पिता की हत्या ने शिबू सोरेन को भीतर से झकझोर कर रख दिया. उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और महाजनों के खिलाफ फूंक बिगुल दिया. लेकिन महाजनों से लड़ना आसान नहीं था. क्योंकि ग्रामीण महाजनों के कर्ज तले दबे हुए थे. सूद नहीं देने पर जमीन हड़प ली जाती थी. शराब पीलाकर सादे कागज पर अंगूठे का निशान ले लिया जाता था. इन घटनाओं ने शिबू सोरेन को आंदोलन खड़ा करने का रास्ता दिखा दिया. उन्होंने आवाज बुलंद करनी शुरू की तो लोग जुड़ने लगे. इसी दौरान शिबू सोरेन ने शराब और हड़िया के सेवन के खिलाफ ग्रामीणों को जागरूक करना शुरु किया.
टुंडी के आंदोलन से मिली पहचान
अपनी जन्म भूमि गोला के बाद उनको पेटरवार, जैनामोड़, बोकारो और धनबाद में लोग जानने लगे थे. इनके समाज सुधार आंदोलन और महाजनी प्रथा के खिलाफ उलगुलान को बड़ी पहचान मिली धनबाद के टुंडी में. यहां 1972 से 1976 के बीच उनका आंदोलन जबरदस्त रुप से प्रभावी रहा. वह महाजनों द्वारा हड़पी गई जमीन आदिवासियों को वापस कराने में सफलता हासिल करने लगे थे.
शिबू सोरेन की एक आवाज पर हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग तीर-धनुष के साथ जुट जाते थे. एक आह्वान पर हड़पी गई खेतों में लगी फसल काट ली जाती थी. टुंडी के पोखरिया में उन्होंने एक आश्रम बनाया था, जिसे लोग शिबू आश्रम कहते थे. इसी दौरान लोग प्यार और सम्मान से उनको गुरुजी कहने लगे. लेकिन गुरुजी को राजनीतिक पहचान मिली संथाल की धरती पर से उनको दिशोम गुरु यानी देश का गुरु कहलाए.
विश्व हिंदू रक्षा परिषद के प्रदेश प्रभारी भरत सिंह एवं प्रदेश अध्यक्ष हरचरण सिंह उर्फ राजा ने की सूर्य मंदिर में पूजा अर्चना
झारखंड/रांची
( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )
विश्व हिंदू रक्षा परिषद के झारखंड प्रदेश प्रभारी भरत सिंह एवं प्रदेश अध्यक्ष हरचरण सिंह (राजा) एवं उनकी टीम द्वारा रांची के बुंडू थाना अंतर्गत स्थित हिंदू मंदिर सूर्य मंदिर में ईश्वर से धर्मांतर के रोकथाम के लिए प्रार्थना की।
विश्व हिंदू रक्षा परिषद झारखंड प्रदेश अध्यक्ष ने हिंदू मंदिर में की प्रार्थना, धर्मांतरण रोकने की लगाई गुहार
विश्व हिंदू रक्षा परिषद के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष ने आज एक हिंदू मंदिर में ईश्वर से प्रार्थना की, जिसमें उन्होंने धर्मांतरण के रोकथाम के लिए गुहार लगाई। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि धर्मांतरण एक गंभीर समस्या है, जिसे रोकने के लिए हमें एकजुट होकर प्रयास करना होगा।
विश्व हिंदू रक्षा परिषद की पहल:
विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने धर्मांतरण के रोकथाम के लिए कई पहल की हैं, जिनमें से एक है सनातन हेल्पलाइन सेवा, जो 24×7 सक्रिय रहती है। इस सेवा के माध्यम से लोग धर्मांतरण के मामलों की जानकारी दे सकते हैं और मदद प्राप्त कर सकते हैं। जो कि विश्व हिंदू रक्षा परिषद के वेबसाइट पर उपलब्ध है।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने भगवान बिरसा मुंडा के वंशज दिवंगत मंगल मुंडा को दी भावभीनी श्रद्धांजलि।
रांची
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के वंशज मंगल मुंडा जी के असामयिक निधन पर गहरा दु:ख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन रिम्स पहुंचकर दिवंगत मंगल मुंडा के पार्थिव शरीर पर पुष्प-चक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान एवं शोकाकुल परिजनों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर गहरी संवेदना प्रकट करते हुए उन्हें सांत्वना दी। मुख्यमंत्री ने दिवंगत मंगल मुंडा के परिजनों को राज्य सरकार के स्तर से हर संभव मदद का भरोसा दिया।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन झारखंड कृषि ऋण माफी योजना कार्यक्रम में हुए सम्मिलित
रांची
◆ मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन झारखंड कृषि ऋण माफी योजना कार्यक्रम में हुए सम्मिलित, 1 लाख 76 हज़ार 977 किसानों के 400 करोड़ 66 लाख रुपए के ऋण अदायगी राशि का डीबीटी के माध्यम से किया हस्तांतरण
◆ मुख्यमंत्री ने बिरसा किसान इंटीग्रेटेड पोर्टल का किया अनावरण, किसानों को एक ही पोर्टल पर कृषि विभाग से जुड़ी सभी योजनाओं की मिलेगी पूरी जानकारी
मुख्यमंत्री की उपस्थिति में कृषि विभाग और एनडीडीबी के बीच डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए हुआ एमओयू , दुग्ध उत्पादकों को अब दुग्ध के उचित मूल्य के अलावा मिलेगी 5 रुपए प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि
◆ मुख्यमंत्री ने कहा- किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार लिए जा रहे ठोस निर्णय
● किसानों की समृद्धि एवं खुशहाली से ही राज्य बनेगा मजबूत
● किसानों का खेत उनका बैंक है और खलिहान एटीएम
● _लड़कर लिया झारखंड, लड़कर लेंगे अपना हक- अधिकार
● हमारी सरकार में आदिवासी- मूलवासी ,दलित महिला, नौजवान, बुजुर्ग , पिछड़े और अल्पसंख्यक समेत हर किसी को आगे बढ़ने के लिए मिल रहा अवसर
● पूरी संवेदनशीलता, निष्ठा और समर्पित भाव से 24 घंटे जनता की सेवा में कार्य कर रही सरकार
गांव -देहात से होकर विकास का दरवाजा खुलता है। ऐसे में किसानों की खुशहाली से ही राज्य मजबूत बनेगा। हमारी सरकार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार ठोस निर्णय ले रही है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन आज राजधानी रांची के धुर्वा स्थित प्रभात तारा मैदान में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग द्वारा आयोजित झारखंड कृषि ऋण माफी योजना कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह ऋण माफी योजना कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह किसानों के सम्मान में महाजुटान कार्यक्रम है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य के 1,76,977 लाख किसानों के दो लाख रुपए तक का कर्ज माफ कर उन्हें बड़ी सौगात दी। इन सभी किसानों के लगभग 400.66 करोड़ रुपए के कर्ज की अदायगी राज्य सरकार द्वारा की गई। मुख्यमंत्री ने इस कार्यक्रम में कृषि विभाग के बिरसा किसान इंटीग्रेटेड पोर्टल का भी अनावरण किया।
किसानों को राहत देने का प्रयास लगाकर जारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज किसानों के समक्ष तरह- तरह की चुनौतियां आ रही है। किसानों की गरीबी और पूंजी के अभाव में कृषि कार्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे में किसानों को राहत देने के मकसद से उनके दो लाख रुपए तक के कृषि ऋण माफ करने का निर्णय हमारी सरकार ने लिया है,ताकि उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर उन्हें उन्हें कृषि के क्षेत्र में नई शुरुआत करने का मौका मिल सके।
किसानों का खेत उनका बैंक है और खलिहान एटीएम
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की 80 प्रतिशत आबादी ग्रामीण परिवेश में रहती है ।यहां के किसान- मजदूर जीविकोपार्जन के लिए खेती-बाड़ी पर निर्भर हैं । ऐसे में उनका खेत उनका बैंक है तो खलिहान एटीएम। लेकिन, आज किसानों की स्थिति से छिपी नहीं है। वे विपरीत परिस्थितियों के बीच कृषि कार्य कर रहे हैं। कई बार मौसम की मार की वजह से फसलों को काफी नुकसान पहुंचता है, जिसका खामियाजा उन्हें लंबे समय तक भुगतना पड़ता है। हमारी सरकार किसानों को इन विपरीत परिस्थितियों से निकलने के लिए लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में कृषि कार्य के लिए जिन किसानों ने दो लाख रुपये तक का लोन लिया है उसे माफ करने का हमारी सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लिया, ताकि किसानों को आर्थिक सुरक्षा कवच प्रदान कर सकें।
लड़कर लिया झारखंड, लड़कर लेंगे अपना हक-अधिकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि तमाम खनिज और वन संसाधनों से धनी होने के बाद भी झारखंड एक पिछड़ा राज्य है। यहां के लोग आज भी गरीबों की जिंदगी जी रहे हैं। ऐसे में हमने जिस तरह लड़ कर झारखंड लिया है उसी तरह लड़कर अपना हक और अधिकार लेंगे ताकि यह राज्य आगे बढ़ सके।
किसानों को अपनी ताकत पहचाना होगा
मुख्यमंत्री ने कहा की किसान इस देश और राज्य की रीढ़ हैं। जब तक किसान आत्मनिर्भर नहीं बनेंगे, तब तक यह राज्य आगे नहीं बढ़ेगा। आज किसानों को अपनी ताकत पहचानने की जरूरत है। जिस तरह हमारे किसान खेतों में कड़ी मेहनत करते हैं, उसी तरह उन्हें अपने मान- सम्मान एवं हक- अधिकार की खातिर एकजुट होकर कदम बढ़ाना होगा।
झारखंड की मिट्टी हर तरह की खेती के लिए अनुकूल है
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड का जो भौगोलिक परिवेश है, वह काफी अनूठा है। यहां की मिट्टी में हर तरह की फसल उपजाई जा सकती है । लेकिन, इसके लिए बेहतर नीति बनाने की जरूरत है। किसानों को विभिन्न तरीकों के फसलों के उत्पादन को लेकर प्रशिक्षण देने की पहल होनी चाहिए। अगर उस दिशा में कदम बढ़ाते हैं तो निश्चित तौर पर इसके सुखद परिणाम हमको देखने को मिलेंगे।
वैकल्पिक कृषि से जुड़ें हमारे किसान
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जिस तरह मौसम में अनिश्चित बनी हुई है, उसमें किसानों को परंपरागत खेती के साथ वैकल्पिक खेती के लिए भी आगे होगा। इसके लिए हमारी सरकार की ओर से बिरसा हरित ग्राम योजना, दीदी बाड़ी योजना, मुख्यमंत्री पशुधन योजना, नीलांबर- पीतांबर जल समृद्धि योजना और दीदी बगिया योजना जैसी कई योजनाएं संचालित है। हमारी सरकार ने पहली बार कृषि पदाधिकारियों की नियुक्ति की है, ताकि वे किसानों को फसल उत्पादन की नवीन और आधुनिक तकनीक से अवगत करा सकें। किसान पाठशाला के जरिए किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़ी जानकारी देने के साथ कृषि कार्य के लिए प्रशिक्षण भी मिल रहा है। इतना ही नहीं, किसानों को अंडा, दुग्ध और मछली उत्पादन के लिए लगाकर प्रेरित और प्रोत्साहित किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि हमारे किसानों की आय में बढ़ोतरी हो, ताकि वे राज्य को मजबूत बनाने में अपनी भागीदारी निभा सकें।
हर वर्ग का कर रहे हैं सम्मान, दे रहे हैं हक -अधिकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार हर वर्ग और तबके के विकास और कल्याण के लिए कार्य कर रही है। हमने बुजुर्गों को पेंशन दिया है तो महिलाओं को सम्मान राशि दे रहे हैं । नौजवानों को रोजगार देने का सिलसिला बड़े पैमाने पर चल रहा है। बच्चियों को पढ़ाई के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए सावित्रीबाई फुले किशोरी योजना चल रही है। यहां के होनहार विद्यार्थियों को पैसे की तंगी की वजह से इंजीनियर डॉक्टर और अफसर बनने का सपना अधूरा ना रहे, इसके लिए उन्हें गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 15 लाख रुपए तक का शिक्षा लोन सरकार अपनी गारंटी पर दे रही है। हमारी सरकार ने किसानों के दो लाख रुपए तक के लोन माफ कर दिए गए हैं । बकाया बिजली बिल माफ करने के साथ 200 यूनिट बिजली मुफ्त में दे रहे हैं। हमारी सरकार में आदिवासी- मूलवासी, दलित, महिला, नौजवान बुजुर्ग, पिछड़े और अल्पसंख्यक समेत हर किसी को आगे बढ़ने के लिए अवसर मिल रहा है।
लोगों की मूलभूत आवश्यकताओं को कर रहे हैं पूरा
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार पूरी संवेदनशीलता, निष्ठा, ईमानदारी और समर्पित भाव से 24 घंटे जनता की सेवा में कार्य कर रही है। आज सरकार आपके दरवाजे पर पहुंचकर आपकी समस्याओं का समाधान कर रही है । हम लोगों के रोटी, कपड़ा और मकान जैसे मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। इस कड़ी में 20 लाख अतिरिक्त राशन कार्ड जारी कर मुफ्त अनाज दे रहे हैं। 20 लाख गरीबों को अबुआ आवास देने की योजना शुरू की है। सोना- सोबरन धोती साड़ी योजना के तहत गरीबों को धोती साड़ी और लूंगी दे रहे हैं। हमारी कोशिश ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है ताकि यहां के गरीब किसान मजदूर सशक्त और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें।
डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए हुआ एमओयू
मुख्यमंत्री की उपस्थिति में डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने हेतु कृषि विभाग के सचिव अबु बकर सिद्दीक तथा एनडीडीबी, आनंद , गुजरात के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर श्री एस रघुपति के बीच 5 वर्षों के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर संपन्न हुआ। इसके तहत लगभग 68 हज़ार दुग्ध उत्पादकों को जोड़ा जाएगा। इसके अलावा दुग्ध उत्पादकों को दूध उत्पादन के उचित मूल्य के अलावा 5 रुपये प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।
इस कार्यक्रम में मंत्री रामेश्वर उरांव, मंत्री सत्यानंद भोक्ता, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, राज्य सभा सांसद महुआ माजी, विधायक राजेश कच्छप, केशव महतो कमलेश, राजेश ठाकुर, विकास आयुक्त अविनाश कुमार, कृषि सचिव अबु बकर सिद्दीक, निदेशक कृषि ताराचंद, निदेशक उद्यान श्री फैज अक अहमद , निदेशक पशुपालन किरण पासी एवं एनडीडीबी, आनंद, गुजरात के एक्सक्यूटिव डायरेक्टर रघुपति उपस्थित रहे।
रांची लोकसभा चुनाव में तीन दमदार पार्टी आमने-सामने,,किसकी होगी नैया पार,,कौन बनेगा जनता का हिमायती
Loksabha election:-रांची
पंचायत, विधानसभा , लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी को जीतने के लिए बूथ कमिटी का अहम रोल होता है, प्रत्याशी को पहले की बूथ जीता होता है, इसके चुनाव जीत सकता। चुनावी बहुत कुछ खेल होता है। जिसमें,भवाना,जाती,घर्म, अफवाह का बाजार होता है.लोकसभा चुनाव का दौर चल रहा है, और रांची लोकसभा में 25 मई 2024, शनिवार को चुनाव होना है… और रांची लोकसभा में कुल 27 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं…. रांची लोकसभा में कुल 21,62,169 मतदाता अपना मताधिकार का प्रयोग करेंगे.
रांची लोकसभा में 27 प्रत्याशी तो मैदान में हैं… लेकिन क्रमशः BJP, CONGRESS और JBKSS 03 पार्टी के प्रत्याशी ही मैदान में दमखम दिखा रहें हैं, इन तीन पार्टी को लेकर मेरा एक छोटा सा समीक्षा है.
BJP: बीजेपी के प्रत्याशी संजय सेठ हैं, और बीजेपी का गठबंधन AJSU के साथ है, बीजेपी बूथ स्तर पर काफ़ी मजबूत है, बीजेपी का बूथ से लेकर, मण्डल, प्रखंड, विधानसभा, जिला कमिटी का संगठन है, यानी की हर स्तर पर कार्यकर्ताओ का भरमार है, इन सभी कमिटी से जुड़े लोग प्रत्याशी कौन है ये चीज नहीं देखते है.. इनके लिए संगठन और पार्टी का नीति सिद्धांत ही सर्वपरी है, बीजेपी के सभी कार्यकर्त्ता बिना किसी नुक्स निकाले पार्टी हित में दिन रात मेहनत कर रहें है… साथ ही बीजेपी का AJSU के साथ गठबंधन है, AJSU का भी बूथ से लेकर कमिटी काफ़ी मजबूत है, पंचायत से लेकर जिला तक कमिटी है… लेकिन AJSU में संगठन से जुड़े कुछ लोगों का सिद्धांत नहीं है… कुछ लोग मुद्रा मोचन के चक्कर में हैं… यानी की लोकल भाषा में इसे – कोथा पाबो, के दिबेक, कोथा जाबो के चक्कर में रहते हैं, ऐसे लोगों का पार्टी के विचारों से कोई मतलब नहीं है, जो बात इस पार्टी के सुप्रीमो भी कई स्थानों पर बोलते हुए नजर आतें है, लेकिन ऐसे लोगों को पार्टी हित में कार्य करना चाहिए, पार्टी सर्वपरी होता है। फिर भी AJSU के ऐसे लोगों को छोड़कर ज्यादातर लोग इस लोकसभा में जीतोड़ मेहनत कर रहें है.
CONGRESS : कांग्रेस की प्रत्याशी यशस्वनी सहाय है, जो की पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय की बेटी हैं.. हर स्टेज में इन्हे पिता के नाम से परिचय दिया जा रहा है… कांग्रेस का गठबंधन JMM, RJD, LEFT के साथ हैं… कांग्रेस का बूथ कमिटी नहीं के बराबर हैं, यहाँ तक की प्रखंड अध्यक्ष कौन हैं, सचिव कौन हैं, ये भी पता नहीं चल रहा हैं…पार्टी के लोग खुद कमिटी को लेकर असमंजस में हैं… बूथ कमिटी नहीं होने का मुख्य कारण चुनाव हारने के बाद प्रत्याशी या पार्टी कार्यकर्त्ताओ को करीब साढ़े चार साल बेसहारा छोड़ दिया जाता हैं… जिसके कारण इन कार्यकर्त्ताओ के पास – “इधर चला मैं, उधर चला, जाने कहाँ मैं किधर चला.. ” वाला सीन है. बेचारे साढ़े चार साल अपने नेताओं के आने के उम्मीद में रहते हैं, लेकिन इनका कोई नहीं सुनता… वहीं JMM का जहाँ तक सवाल है, बूथ कमिटी हैं, पंचायत से लेकर जिला तक कमिटी है, JMM अपने जगह पर मजबूत है, इनके कार्यकर्त्ता मेहनती हैं, लेकिन खुद के पार्टी के सिद्धांतो पर चलते हैं… बाकी कांग्रेस के लिए JMM खुद का पॉकेट से खर्चा क्यों करें, यही वाला सीन हैं.. कांग्रेस के साढ़े चार साल गायब रहने का फायदा JMM को मिला भी है… और इसका रिजल्ट समय में लोगों को देखने को मिलेगा… बाकी RJD, LEFT का क्या बात करें… इन्हे तो झारखंड में दूसरे के नाव में सवारी करने में इनको मजा आता हैं.
JBKSS_JLKM : ये नई नवेली पार्टी हैं, इस पार्टी के प्रत्याशी देवेंद्रनाथ महतो हैं, जो वर्तमान में खुद जेल में हैं… इस पार्टी में ज्यादातर युवा जुड़े हुए हैं, हर प्रखंड में लोग हैं, लेकिन बूथ कमिटी का पता नहीं हैं…युवाओं में जोश भरपूर हैं, गुटबाजी चरम सीमा पर हैं… लोकसभा चुनाव से ही इस पार्टी से जुड़े लोग खुद को विधायक प्रत्याशी घोषित करने से बाज नहीं आ रहें हैं, अनुभव की काफ़ी कमी हैं… किसी का ये लोग राय लेते नहीं हैं… साथ ही एक विशेष समुदाय(जात) से जुड़े ही ज्यादातर लोग हैं, इस पार्टी का प्रचार-प्रचार भी उक्त जाति विशेष गांव में ही ज्यादा हो रहा है, ये देखने को मिल भी रहा है… जो की चुनाव जीतने के लिए नाकाफी है… बाकी युवा हैं, तो जोश भी है, जोश है तो, होश भी गवां बैठ रहें हैं… बिना वजह केस भी खा रहें हैं… बाकी इस पार्टी के लोग एकजुट होकर चुनाव प्रचार करें और एक विशेष जाति के टैग से बहार आकार मेहनत करें तो सकारात्मक फायदा मिल सकता हैं.