सरायकेला में अवैध मिनी शराब फैक्ट्री का प्रशासन ने किया पर्दाफाश।
सरायकेला
जिले से अवैध शराब के काले कारोबार के खिलाफ एक बड़ी सफलता हाथ लगी है. जिले के चांडिल अनुमंडल अंतर्गत चौका थाना क्षेत्र के मिरुडीह गांव में उत्पाद विभाग और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त छापेमारी कर एक अवैध अंग्रेजी शराब फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है. इस कार्रवाई से इलाके के अवैध शराब माफियाओं में हड़कंप मच गया है.
प्रशासन को लंबे समय से मिरुडीह गांव में चोरी-छिपे नकली अंग्रेजी शराब बनाए जाने और उसकी तस्करी की गुप्त सूचना मिल रही थी. इस सूचना की सटीकता की पुष्टि के बाद, उत्पाद विभाग सरायकेला की टीम और चौका पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया.
छापेमारी अभियान रविवार की रात को शुरू किया गया, जो अगले दिन सोमवार की सुबह करीब आठ बजे तक जारी रहा. पुलिस ने फैक्ट्री के ठिकाने को चारों तरफ से घेरकर यह बड़ी कार्रवाई अंजाम दी. मौके से पुलिस ने भारी मात्रा में नकली शराब और उसे तैयार करने वाले उपकरण जब्त किए हैं.
रघुनाथपुर वन विश्रामागार के समीप शराब दुकान खोलने का महिलाओं ने किया जोरदार विरोध।
सरायकेला/ईचागढ़
नीमडीह थाना क्षेत्र के रघुनाथपुर – नीमडीह सड़क पर वन विश्रामागार के पास अनुज्ञप्ति प्रदत्त शराब की कमपोजिट दुकान खोलने का स्थानीय महिलाओं ने जोरदार विरोध किया। महिलाओं ने आरोप लगाया कि शराब दुकान पर शराब खरीद कर बस्ती के आसपास पीने के बाद शराबियों द्वारा अश्लील भाषा का प्रयोग किया जाता है। जिससे बच्चों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
महिलाओं ने कहा कि तीन महीने पहले जनबहुल क्षेत्र से शराब दुकान को स्थानांतरण के लिए उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग सरायकेला-खरसावां ,नीमडीह के अंचल अधिकारी और थाना प्रभारी को लिखित आवेदन दिया गया था। अंचल अधिकारी ने स्थल जांच के बाद आश्वासन दिया था कि तीन महीने के बाद शराब दुकान को अन्य जगह पर स्थानांतरण कराया जायेगा। लेकिन तीन महीने बाद फिर से दुकान खोला जा रहा है।
महिलाओं ने कहा कि अन्य दुकान खोला जाय हमें कोई विरोध नहीं है। इस मौके पर नीमडीह पुलिस आकर महिलाओं को समझाने का प्रयास किया। लेकिन वे लोग शराब दुकान खोलने के विरोध में डटे रहें।
शराब बेचने वाले मालामाल शराब पीने वाले बेहाल,, शराब की दुकान पर नहीं मिलता रसीद।
पूरे कोल्हान के 99.99 प्रतिशत सरकारी शराब दुकान पर अंकित मूल्य से अधिक मूल्य पर बेचा जा रहा शराब और रसीद देने से करते हैं इनकार।
पूर्वी सिंहभूम
( भरत सिंह की रिपोर्ट )
सरकारी शराब की दुकानों पर शराब की बोतल पर अंकित मूल्य से 10,20,30 रुपए अधिक लेना है यह कोई नई बात नहीं है। विगत कुछ दिनों से लगातार झारखंड क्राईम रिपोर्टर हिंदी दैनिक अखबार में सरकारी शराब की दुकानों पर अंकित मूल्य से अधिक रुपए लेकर शराब बेचे जाने की खबर को जनहित में प्रमुखता से प्रकाशित किया जा रहा है। लेकिन विभाग की ओर से कोई भी कार्यवाही या कोई सुनवाई होते दिखाई नहीं दे रही है। अब आलम यह है कि कोल्हान के 99.9% सरकारी शराब की दुकानों में शराब की बोतल पर अंकित मूल्य से अधिक रुपए लेकर शराब बेचा जा रहा है जिसका रसीद भी ग्राहक को मुहैया नहीं कराया जा रहा। जिसकी वजह से ग्राहक काफी परेशान दिखाई दे रहे हैं और शराब बेचने वाले मालामाल होते दिखाई दे रहे हैं।
ताजा मामला पूर्वी सिंहभूम जिले का है जहां पर जादूगोड़ा थाना क्षेत्र के माटीगोड़ा स्थित सरकारी शराब दुकान पर शराब की बोतल पर अंकित मूल्य से अधिक मूल पर शराब बेचा जा रहा है साथ ही शराब लेने के बाद पैसा देने के बाद उनसे रसीद मांगा जाता है तो उनका कहना है कि हमारे पास रसीद नहीं है और हम रसीद नहीं देंगे । आपको सरकारी रसीद की जगह सदा कागज मे लिखकर दुकान के मोहर के साथ दे देंगे। वो भी आपके लिए ।
अब सवाल यहां पर या उठना है कि आखिर सरकारी शराब की दुकानों पर रसीद क्यों नहीं मुहैया कराया जा रहा है। जबकि ग्राहक को रसीद देना यह दुकानदार की जिम्मेदारी है और रसीद लेना यह ग्राहक का अधिकार है अगर कोई शराब दुकानदार शराब बेचने के बाद रसीद नहीं दे रहा है तो कहीं ना कहीं वह दुकानदार राजस्व का नुकसान कर रहा है और राजस्व का नुकसान करना यह कहीं ना कहीं बड़े अपराध की श्रेणी में आता है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पुरे कोल्हान में जितने भी सरकारी शराब दुकान है लगभग सभी दुकानों का यही आलम है।
वहीं पूर्वी सिंघम जिले के अधीक्षक उत्पाद विमला लकड़ा काफी अनुभवी है उसके बावजूद भी इस तरह से छोटी-छोटी गलतियां हो रही हैं। जिससे जनता का जेब खाली हो रहा है और ठेकेदार या सरकारी महकमें के अधिकारी मालामाल हो रहे हैं ।
आपको बताते चलें कि झारखंड क्राईम रिपोर्टर हिंदी दैनिक अखबार की एक टीम ने एक सर्वे के दौरान जादूगोड़ा स्थित एक शराब की दुकान में एक शराब लिया तो पता चला कि वहां की स्थिति क्या है। यह जांच का विषय है। शराब सरकार का बेचना उचित है लेकिन शराब लेने वाले को रसीद भी देना उचित है। अगर रसीद नहीं दिया जाता है तो कहीं ना कहीं सरकारी राजस्व का हेरा फेरी साफ झलक रहा है आर्य गंभीर जांच का विषय है अगर इस पर समय रहते अंकुश ना लगाया गया तो यह कहीं ना कहीं एक बड़े अपराध का रूप धारण कर सकती है।