हरे माधव वर्सी पर्व 2025- आस्था की धरा पर अवतरित दिव्यता का अनुभव-अमृत वर्षा क़ा आभास

हरे माधव वर्सी पर्व 2025- आस्था की धरा पर अवतरित दिव्यता का अनुभव-अमृत वर्षा क़ा आभास

बाबा ईश्वर शाह की असीम अमृत वर्षा से ,भक्तों के हृदयों में उतरी करुणा की ज्योति

हरे माधव सत्संग में श्रद्धा,सेवा, भक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला जो एक आध्यात्मिक क्रांति जैसा था- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

गोंदिया/महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर आध्यात्मिकता रूपी मिठास मेंडूबे भारत के मध्यप्रदेश की पावन धरा कटनी की शांत और पावन भूमि पर 9 और 10 अक्टूबर 2025 को ऐसा दृश्य उपस्थित हुआ जिसे शब्दों में बाँध पाना अपने आप में एक आध्यात्मिक साधना के समान है। हरे माधव सत्संग के वर्सी महोत्सव ने न केवल शहर बल्कि देश और विदेश के लाखों श्रद्धालुओं को एक सूत्र में पिरो दिया।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र व मेरे साथी मनोहर सुगानी सतना ने वहां की ग्राउंड रिपोर्टिंग की तो हमें इस दौरान श्रद्धा,सेवा,भक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला। हमने स्वयंम इन दो दिवसीय सत्संग के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग की,और यह अनुभव किसी साधारण धार्मिकआयोजन से कहीं अधिक एक आध्यात्मिक क्रांति जैसा था।

साथियों बात अगर हम भक्तों के अभूतपूर्व उत्साह की करें तो, हरे माधव दयाल,जिनकी करुणा और दया की गाथाएँ भक्तों के मुख से सहज ही फूट पड़ती हैं, उनके नाम का प्रभाव इस आयोजन में स्पष्ट रूप से झलकता दिखा।हर ओर “हरे माधव” का उच्चारण मानो वातावरण को पवित्र कर रहा था। भक्तों की आँखों में जो चमक थी, वह किसी बाहरी चमत्कार से नहीं बल्कि अंतर्मन में अनुभव की गई शांति और दयालुता की झिलमिल थी।इस सत्संग ने यह सिद्ध कर दियाकिआध्यात्मिकता तब ही सशक्त होती है जब उसमें मानवता की सुगंध हो।कटनी की इस पवित्र भूमि पर जैसे ही 9 अक्टूबर 2025 को सूर्योदय हुआ, हरे माधव दयाल के प्रति भक्ति की तरंगें पूरे शहर में फैल गईं, मानों बच्चे, महिलाएँ, बुजुर्ग और युवा सबकी एक ही चाह थी,”दयाल के दर्शन और सत्संग का श्रवण।”ऐसा लग रहा था मानो पूरा नगर ही भक्ति में रमा हुआ है।यह दृश्य केवल आँखों से नहीं, आत्मा से देखा जा सकता था।
साथियों बात अगर हम देश- विदेश से उमड़ा श्रद्धा का सागर, वैश्विक स्तरपर आध्यात्मिक एकता की करें तो इस वर्सी महोत्सव की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि इसमें भारत के अनेक राज्यों से अनुमानतः हजारों लाखों भक्तों ने इस दो दिवसीय सत्संग का लाभउठाया। भक्तों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण थी कि हरे माधव दयाल की शिक्षाएँ सीमाओं से परे जाकर मानवता को जोड़ रही हैं।जब मैंने ग्राउंड पर भक्तों से बात की, तो उन्होंने कहा“हम यहाँ किसी धर्म के अनुयायी बनकर नहीं, बल्कि प्रेम और शांति की तलाश में आए हैं। यहाँ जो अनुभव मिलता है, वह किसी भी किताब में नहीं।”इससे यह सिद्ध हुआ कि आज के वैश्विक युग में भी सच्ची आध्यात्मिकता वह है जो सभी जाति,भाषा और सीमाओं को मिटाकर मनुष्यता के सूत्र में जोड़ती है।

साथियों बात अगर हम सत्संग के पहले दिन 9 अक्टूबर 2025 अमृत वर्षा क़े प्रारंभ होने की करें तोपहले दिन का आरंभ मंगल वंदना और “ मेरे सतगुरां हम शरण तेरी आए ” के भक्ति स्वर से हुआ। वातावरण में घुली शांति,भजन के मधुर सुर और आरती की लौ ने ऐसा माहौल रचा कि मानो पूरा ब्रह्मांड उसी क्षण स्थिर हो गया हो।मैंने मोबाइल कैमरे की लेंस से जब भक्तों के चेहरों को कैद किया, तो हर चेहरे पर संतोष, श्रद्धा और आनंद की अनोखी अभिव्यक्ति थी। पहले दिन का मुख्य आकर्षण बाबा ईश्वर शाह साहिब जी का“दयाल संदेश”यानें अमृत वर्षा था,जिसमें कलश करुणा, क्षमा और आत्मचिंतन के महत्व पर प्रकाश डाला गया। सत्संग पंडाल में गूँजती मधुर वाणी ने हजारों मनों को छू लिया। ऐसा लगा मानो हृदय के भीतर छिपी सभी थकान, चिंता और अशांति उसी क्षण विलीन हो गई हो।
साथियों बात अगर हम सत्संग के दूसरे व अंतिम दिन 10 अक्टूबर 2025 की करें तो मानो आकाश से उतरती दिव्यता पृथ्वी को नमन कर रही हो,सुबह 10 बजे से ही भक्तों का सत्संग स्थल पर पहुंचना शुरू गया था,यह सामूहिक श्रद्धा और अनुशासन का अनुपम उदाहरण था। बच्चे अपने हाथों में फूल और झंडे लिए, युवा सेवा में तत्पर, बुजुर्गों के चेहरे पर आत्मिक आनंद। यह सब देखकर लगा कि जब आस्था और अनुशासन एक साथ चलें तो समाज में कितनी सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है।बाबाजी का आगमन विशाल जुलूस के साथ हुआ एलईडी स्क्रीन पर बाबा माधव शाह बाबा नारायण शाह की अनेक महिमाओं लीलाओं का वर्णन साक्षात रूप से भक्तों को दिखाया गया जिससे भक्तों के अनेक प्रश्नों की जिज्ञासा दूर हुई उसके पश्चात बाबा जी ने स्वयं अपने मुख से सत्संग की अमृत वर्षा की जिससे भक्तजन भाव विभोर हो उठे।

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

साथियों बात अगर हम सेवा के विविध रूप,व्यवस्थापन का अनुकरणीय उदाहरण की करें तो,यह मेरे लिए इस आयोजन का सबसे प्रेरणादायक पहलू था,इसकी उत्कृष्ट सेवा व्यवस्था। सत्संग परिसर में व्यवस्थापकों और स्वयंसेवकों ने जिस निष्ठा से सेवा दी, वह अपने आप में उदाहरण है, जिसकी मैं पूरी ग्राउंड रिपोर्टिंग कर मोबाइल कैमरे में सेव किया।पंडाल सेवा- विशाल पंडालों में बैठने, धूप से बचाव, वेंटिलेशन, और व्यवस्था इतनी सुचारू थी कि अनुमानतः हजारो लाखों की भीड़ होने के बावजूद कोई अव्यवस्था नहीं दिखी।चरण पादुका सेवा- श्रद्धालुओं के लिए चरण पादुका स्थल पर विनम्र भाव से सेवा करते स्वयंसेवक विनम्रता की प्रतिमूर्ति प्रतीत हो रहे थे।जल सेवा-ठंडा,शुद्ध जल उपलब्ध कराने के लिए अनेक जल स्टॉल लगाए गए थे, जहाँ लगातार सेवा चल रही थी।खोया-पाया सेवा: इतने बड़े आयोजन में कोई वस्तु खो जाए,तो तुरंत सूचना मिल जाए,भंडारा यानी लंगर सेवा तथा बर्तन थालियां धोने की सेवा में मैंने देखा कि बड़े-बड़े अमीरों उच्च स्तरीय लोग, भक्तों द्वारा ग्रहण किए गए भोजन की थालियों को मांझकर फ़िर पानी में फिर धो रहे थे जो मुझे सबसे अनमोल सेवा लगी उनकी यह सेवा रेखांकित करने योग्य है।पुलिस विभाग और सुरक्षा व्यवस्था-कटनी पुलिस और सुरक्षा दल ने अनुकरणीय कार्य किया। भीड़ नियंत्रण से लेकर ट्रैफिक प्रबंधन तक हर पहलू पर बारीकी से ध्यान दिया गया।मेडिकल सेवा-24 घंटे संचालित मेडिकल कैंप में डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ हर समय मौजूद रहे। किसी भी आपात स्थिति के लिए एम्बुलेंस व्यवस्था भी तत्पर थी।स्टालों में एक झाड़ माँ के नाम,पर्यावरणीय पहल- इस आयोजन की विशेषता रही “एक झाड़ माँ के नाम” पहल, जिसके अंतर्गत प्रत्येक भक्त ने एक पौधा रोपने का संकल्प लिया। आध्यात्मिकता को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का यह संदेश अत्यंत प्रेरणादायक था। विशेष रूप से व्यवस्थापकों सेवादारियों की सेवाएं अभूतपूर्व अनुशासन के रूप में दिखाई दी सत्संग स्थल के बाजू में हेड ऑफिस बनी हुई थी जहां से व्यवस्थापकों की हर सेवा पर नजर थी ताकि भक्तों को कोई तकलीफ ना हो,इन सभी व्यवस्थाओं को देखकर लगा कि जब सेवा भावना और संगठन शक्ति साथ मिलती है,तो कोई भी आयोजनकितना अनुशासितऔर प्रेरणादायक बन सकता है।

साथियों बात अगर हम व्यवस्था में अनुशासन और तकनीक का सुंदर संगम की करें तो,मेरी ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान मैंने पाया कि यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि व्यवस्थापन का भी उत्कृष्ट उदाहरण था।आयोजकों ने आधुनिक तकनीक का भी प्रयोग किया था, सीसीटीवी निगरानी,एलईडी लाइव प्रसारण ताकि दूर बैठे भक्तों को भी स्पष्ट नजर आए,जैसी सुविधाएँ मौजूद थीं। इससे यह महोत्सव केवल एक भौतिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि डिजिटल आध्यात्मिकता का भी एक युगीन उदाहरण बन गया।

साथियों बात अगर हम भक्तों के भाव,अनुभवों की झंकार की करें तो,जब मैंने कुछ श्रद्धालुओं से बातचीत की, तो हर किसी की आवाज़ में भक्ति और भावनाओं की गहराई झलक रही थी।दमोह निवासी एक महिला ने कहा,“हम हर वर्ष आते हैं, लेकिन इस बार जो दिव्यता और शांति महसूस हुई, वह पहले कभी नहीं हुई। यह सचमुच अमृत वर्षा थी। ”कोल्हापुर से आए एक युवा भक्त ने कहा,“मैं तकनीकी क्षेत्र से हूँ, पर यहाँ आकर समझा कि असली ‘कनेक्शन’ईश्वर से जुड़ाव है, न कि इंटरनेट से।”इन सरल वाक्यों में वह आध्यात्मिक सत्य छिपा है जो जीवन के हर क्षेत्र में संतुलन और सकारात्मकता का संदेश देता है।आध्यात्मिकता और समाजसेवा का संगम-हरे माधव सत्संग केवल उपदेश देने वाला मंच नहीं है, बल्कि यह एक जीवंत सामाजिक आंदोलन भी है। इस महोत्सव के दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता के क्षेत्र में अनेक जनसेवा अभियानों कि हमें प्रेरणा मिली।हरे माधव परमार्थ सेवा समिति कटनी द्वारा गरीब परिवारों के लिए स्वास्थ्य सेवा बाबा माधव शाह चिकित्सालय मासिक अनाज वितरण साहित्य अनेकयोजनाओं का संचालन किया जाता है।यह देखकर लगा कि सच्ची भक्ति वही है जो समाज में परिवर्तन का माध्यम बने। आध्यात्मिकता तभी सार्थक है जब वह मानवता के कार्यों में उतरकर समाज को उन्नति की दिशा में ले जाए।

साथियों बात अगर हम अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण से हरेमाधव सत्संग की प्रासंगिकता को समझने की करें तो,विश्व स्तर पर आज जब तनाव, हिंसा, युद्ध और आर्थिक प्रतिस्पर्धा का दौर चल रहा है, तब हरे माधव दयाल का संदेश,“दयालता ही मानवता का आधार है”अत्यंत प्रासंगिक हो उठता है। कटनी का यह आयोजन केवल धार्मिक भावनाओं का प्रदर्शन नहीं, बल्कि“वसुधैव कुटुंबकम्” के भारतीय आदर्श का जीवंत प्रमाण था।कोल्हापुर मुंबई सहित अनेक मेट्रो सिटी से आए श्रद्धालुओं ने कहा कि उन्हें यहाँ वह “मेडिटेशनल एनर्जी” मिली जो किसी भी मानसिकचिकित्सा से अधिक प्रभावशाली है।

साथियों बात अगर हम मेरी ग्राउंड रिपोर्टिंग करें तो, मुझे इसके लिए संस्था या व्यवस्थापकों नें कहा नहीं था मैंने स्वतः संज्ञान से ग्राउंड रिपोर्टर की आत्मानुभूति,शब्दों से परे एक साक्षात्कार-जब मैंने इन दो दिनों की रिपोर्टिंग पूरी की,तो महसूस किया कि वकालत क़े पेशे जैसे केवल तथ्य नहीं, बल्कि अनुभूति का भी माध्यम है। कैमरे में कैद दृश्य भले सीमित हों, पर हृदय में जो दृश्य अंकित हुए, वे जीवनभर अमिट रहेंगे।मैंने देखा कि किस प्रकार भक्त भक्ति में डूबकर सेवा करते हैं, किस तरह व्यवस्थापक दिन-रात बिना थके अपने कर्तव्यों में लगे रहे,और कैसे एक संत का सन्देश लाखों के जीवन में प्रकाश बन जाता है।यह रिपोर्ट केवल रिपोर्ट नहीं, एक साक्षात्कार है, आत्मा का, श्रद्धा का,और मानवता का।

ग्राउंड रिपोर्टिंग लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226223918

क्रोध का विकराल रूप जुनून है, जो जीव पर सवार होकर जघन्य से जघन्य अपराध करा देता है।

क्रोध का विकराल रूप जुनून है, जो जीव पर सवार होकर जघन्य से जघन्य अपराध करा देता है।

गोंदिया/महाराष्ट्र

क्रोध में व्यक्ति आपा खो देता है-एक दोष को दूर करने के लिए अनेक कुतर्क पेश करता है।

क्रोध से उत्पन्न हुए अपराधों के औचित्य को सिद्ध करने के लिए क्रोधी व्यक्ति कुतर्क कर दूसरे को ही दोषी सिद्ध करता है – एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

भारतीय संस्कृति, सभ्यता के बारे में हमने साहित्य और इतिहास के माध्यम से और भारत माता की गोद में रहकर पारिवारिक संस्कृति,मान सम्मान,रीति-रिवाजों से इसे प्रत्यक्ष महसूस भी कर रहे हैं। परंतु हमारे बड़े बुजुर्गों के माध्यम से हमने कई बार सतयुग का नाम सुने हैं, जिसका वर्णन वे स्वर्गलोक़ के तुल्य करते हैं। याने इतनी सुखशांति, अपराध मुक्ति, इमानदारी,शांति सरोवर तुल्य, कोई चालाकी चतुराई गलतफहमी या कुटिलता या भ्रष्टाचार नहीं, बस एक ऐसा युग कि कोई अगर कुछ दिन, माह के लिए बाहर गांव जाए तो अपने घरों को ताला तक लगाने की ज़रूरत नहीं!अब कल्पना कीजिए कि अपराध बोध मुक्त युग!मेरा मानना है कि हमारी पूर्व की पीढ़ियों ने ऐसा युग जिए होंगे तब यह बोध आगे की पीढ़ियों में आया,जिसे सतयुग के नाम से जरूर जाना जाता है।


साथियों बात अगर हम वर्तमान युग पर बड़े बुजुर्गों में चर्चा की करें तो इस इसे कलयुग नाम देते हैं, याने सभी प्रकार के अपराध बोध से युक्त संसार। हर तरह की बेईमानी, भ्रष्टाचार कुटिलता से भरा हुआ युग!आज भी बुजुर्गों का मानना है कि वह सतयुग फिर आएगा,याने आज की तकनीकी भाषा में अपराध मुक्त, भ्रष्टाचार बेईमानी कुटिलता मुक्त पारदर्शिता और अनेकता में एकता वाले भारत की परिकल्पना का युग।

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

साथियों बात अगर हम अपराध, भ्रष्टाचार, बेईमानी, कुटिलता से भरे जग की करें तो मेरा मानना है कि इसका मुख्य प्रवेश द्वार क्रोध, उत्तेजित स्वभाव व लालच है जिसमें आपराधिक बोध प्रवृत्ति का जन्म होता है और व्यक्ति क्रोध में हिंसा, अपराध, लालच, भ्रष्टाचार, बेईमानी और कुटिलता के अमानवीय कृति और अन्य गलत कार्यों की ओर मुड़ जाता है और आगे बढ़ते ही चले जाता है जब जीवन के असली महत्व का पता चलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। क्रोध की अभिव्यक्ति हमारे अंदर की कुंठा, हिंसा व द्वेष के कारण भी हो सकती है। वर्तमान काल में अपराधों के बढ़ने का एक प्रमुख कारण भीषण क्रोध ही है। क्रोध से उत्पन्न हुए अपराधों के औचित्य को सिद्ध करने के लिए क्रोधी व्यक्ति कुतर्क कर दूसरे को ही दोषी सिद्ध करता है। एक दोष को दूर करने के लिए अनेक कुतर्क पेश करता है। क्रोध में व्यक्ति आपा खो देता है। क्रोध में अंतत: बुद्धि निस्तेज हो जाती है और विवेक नष्ट हो जाता है। क्रोध का विकराल रूप जुनून है। आदमी पर जुनून सवार होने पर वह जघन्य से जघन्य अपराध कर बैठता है। जुनून की हालत में उसे मानवीय गुणों का न बोध रह पाता है और न ही ज्ञान। क्रोध मानव का सबसे बड़ा शत्रु है, बहुत बड़ा अभिशाप है।

साथियों बात अगर हम शांत, परोपकारी स्वभाव ही जीवन का मूल मंत्र की करें तोअभिभावकों, शिक्षकों को बच्चों को यह शिक्षा देना है और हम बड़ों को यह स्वतः संज्ञान लेना है कि माचिस की तीली बनने की बजाय शांत सरोवर बनना होगा, जिसमें कोई अंगारा भी फेंके तो स्वयं ही बुझ जाए, बस! यह भाव अगर हम मनीषियों के हृदय में समाहित हो जाए तो यह विश्व फिर सतयुग का रूप धारण करेगा जहां किसी तरह का कोई अपराध बोध या गलत काम का भाव नहीं होगा। सभी मनीषी जीव परोपकारी भाव से युक्त होंगे भाईचारा, प्रेम, सद्भाव की बारिश होगी जहां बिना ताले घरबार छोड़ कहीं भी जाने के भाव जागृत होंगे और हमारे बुजुर्गों का सतयुग रूपी सपना साकार होगा।

साथियों बात अगर हम स्वयं को माचिस की तीली याने क्रोधित होने पर विपरीत परिणामों की करें तो, क्रोध मनुष्य को बर्बाद कर देता है और उसे अच्छे बुरे का पता नही चलने देता, जिस कारण मनुष्य का इससे नुक्सान होता है। क्रोध मनुष्य का प्रथम शत्रु होता है। क्रोधी व्यक्ति आवेश में दूसरे का इतना बुरा नहीं जितना स्वयं का करता है। क्रोध व्यक्ति की बुद्धि को समाप्त करके मन को काला बना देता है।

साथियों बात अगर हम क्रोध को नियंत्रित कर समाप्त करने की तकनीकी की करें तोइलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अनुसार क्रोध के नकारात्मक प्रभाव पूरे इतिहास में देखे गए हैं। प्राचीन दार्शनिकों, धर्मपरायण व्यक्तियों और आधुनिक मनोवैज्ञानिकों द्वारा प्रतीत होने वाले अनियंत्रित क्रोध का मुकाबला करने की सलाह दी गई है। आधुनिक समय में, क्रोध को नियंत्रित करने की अवधारणा को मनोवैज्ञानिकों के शोध के आधार पर क्रोध प्रबंधनकार्यक्रमों में अनुवादित किया गया है।क्रोध प्रबंधन क्रोध की रोकथाम और नियंत्रण के लिए एक मनो-चिकित्सीय कार्यक्रम है ।

इसे क्रोध को सफलतापूर्वक तैनात करने के रूप में वर्णित किया गया है। क्रोध अक्सर हताशा का परिणाम होता है,या किसी ऐसी चीज से अवरुद्ध या विफल होने का अनुभव होता है जिसे विषय महत्वपूर्ण लगता है। अपनी भावनाओं को समझना क्रोध से निपटने का तरीका सीखने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। जिन बच्चों ने अपनी नकारात्मक भावनाओं को क्रोध डायरी में लिखा था, उन्होंने वास्तव में अपनी भावनात्मक समझ में सुधार किया, जिससे बदले में कम आक्रामकता हुई। जब अपनी भावनाओं से निपटने की बात आती है, तो बच्चे ऐसे उदाहरणों के प्रत्यक्ष उदाहरण देखकर सबसे अच्छा सीखने की क्षमता दिखाते हैं, जिनके कारण कुछ निश्चित स्तर पर गुस्सा आया। उनके क्रोधित होने के कारणों को देखकर, वे भविष्य में उन कार्यों से बचने की कोशिश कर सकते हैं या उस भावना के लिए तैयार हो सकते हैं जो वे अनुभव करते हैं यदि वे खुद को कुछ ऐसा करते हुए पाते हैं जिसके परिणामस्वरूप आमतौर पर उन्हें गुस्सा आता है, इसके साथ ही एकांत में जाकर ध्यान के माध्यम से क्रोध के विकारों को नष्ट करने का प्रयास करें तो ऋणात्मक ऊर्जा को मोड़कर हम सकारात्मक ऊर्जा से विवेक सम्मत निर्णय लेने में सक्षम हो सकते हैं।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि क्रोध का विकराल रूप जुनून है, जो जीव पर सवार होकर जघन्य से जघन्य अपराध करा देता है।क्रोध में व्यक्ति आपा खो देता है-एक दोष को दूर करने के लिए अनेक कुतर्क पेश करता हैक्रोध से उत्पन्न हुए अपराधों के औचित्य को सिद्ध करने के लिए क्रोधी व्यक्ति कुतर्क कर दूसरे को ही दोषी सिद्ध करता है

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9359653465

भारत-ब्रिटेन नई आर्थिक साझेदारी की दास्तान -प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की ऐतिहासिक सफ़ल भारत यात्रा 2025- व्यापार निवेश, तकनीक और विश्वास की नई परिभाषा

भारत-ब्रिटेन नई आर्थिक साझेदारी की दास्तान -प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की ऐतिहासिक सफ़ल भारत यात्रा 2025- व्यापार निवेश, तकनीक और विश्वास की नई परिभाषा

“डेड इकोनॉमी”कहने वालों को करारा जवाब

उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में 125 से अधिक शीर्ष सीईओ, अग्रणी उद्यमी, विश्वविद्यालयों के कुलपति और सांस्कृतिक संस्थानों के प्रमुख शामिल हैं,जो यात्रा के महत्व को रेखांकित करता है- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

गोंदिया/महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर ब्रिटिश प्रधानमंत्री सर कीर स्टार्मर की 9-10 अक्टूबर 2025 की भारत यात्रा ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। यह यात्रा केवल दो दिनों की औपचारिक मुलाक़ात नहीं, बल्कि 21वीं सदी के वैश्विक व्यापारिक समीकरणों में भारत की निर्णायक भूमिका को स्वीकार करने की ठोस अभिव्यक्ति है।भारतीय पीएम के निमंत्रण पर भारत पहुंचे स्टार्मर का मुंबई एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत हुआ, जहां से इस यात्रा की शुरुआत ने एक ऐसा संदेश दिया “भारत अब वैश्विक शक्ति संतुलन का निर्णायक केंद्र है”।

पीएम ने ब्रिटेन पीएम के साथ मुलाकात की एक तस्वीर साझा करते हुए कहा कि भारत और ब्रिटेन के रिश्ते तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और”नई ऊर्जा से भरे हुए हैं”एक तस्वीर में पीएम मोदी ब्रिटिश पीएम के साथ एक ही कार में नजर आए मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यहमानता हूं कि अमेरिका द्वारा भारत को डेड इकोनामी कहे जाने व 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने के बाद भारत-यूके रिश्तों का नया दौर शुरू हो गया है, व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी पर केंद्रित कूटनीति ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत डेट इकोनामी नहीं है,आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी क़े सहयोग से आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, भारत-ब्रिटेन नई आर्थिक साझेदारी की दास्तान,प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की ऐतिहासिक सफ़ल भारत यात्रा 2025- व्यापार,निवेश, तकनीक और विश्वास की नई परिभाषा।

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

साथियों बात अगर हम ब्रिटेन पीएम की दो दिवसीय यात्रा की करें तो, यह ऐसे समय में हो रही है जब भारत और ब्रिटेन दोनों ही अपने-अपने आर्थिक और रणनीतिक भविष्य के पुनर्संरचना के दौर से गुजर रहे हैं। यात्रा का प्रमुख उद्देश्य व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग को सुदृढ़ करना है। ब्रिटिश पीएम के साथ आए उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में 125 से अधिक शीर्ष सीईओ, अग्रणी उद्यमी, विश्वविद्यालयों के कुलपति और सांस्कृतिक संस्थानों के प्रमुख शामिल हैं, यह अपने आप में इस यात्रा के महत्व को रेखांकित करता है।यह केवल एक राजनयिक यात्रा नहीं, बल्कि ब्रिटिश व्यापारिक समुदाय का भारत के प्रति बदलता नजरिया दर्शाने वाली ऐतिहासिक घटना है। ब्रिटेन के कई औद्योगिक घराने अब भारत को मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी हब के रूप में देख रहे हैं, न कि केवल एक उपभोक्ता बाज़ार के रूप में।“डेड इकोनॉमी” कहने वालों को करारा जवाब हैँ।


साथियों बात अगर हम अमेरिकी राष्ट्रपति द्वाराकुछ समय पहले भारत की अर्थव्यवस्था को “डेड इकोनामी” कहकर प्रश्न उठाए गए थे। वहीं भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद, वैश्विक व्यापार जगत में भारत की नीतियों को लेकर बहस तेज़ हो गई थी।लेकिन ब्रिटिश प्रधानमंत्री की यह यात्रा उस सोच को सीधा जवाब देती है। ब्रिटिश पीएम ने मुंबई में उतरते ही कहा कि “भारत 2028 तक दुनियाँ की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है, और ब्रिटेन उस यात्रा का मजबूत भागीदार बनेगा।”यह बयान न केवल आर्थिक विश्वास का प्रतीक है, बल्कि यह उन तमाम संशयवादियों के लिए एक संदेश है जो भारत की विकास गाथा पर सवाल उठाते रहे हैं।


साथियों बातें कर हम ब्रिटेन के जेम्बो डेलिगेशन की करें तो यह विश्वास की कूटनीतिक मिसाल हैँ, इतिहास में शायद ही ऐसा हुआ हो जब ब्रिटेन का इतना बड़ा प्रतिनिधिमंडल किसी देश की यात्रा पर आया हो। यह “जेम्बो डेलिगेशन”भारत-ब्रिटेन संबंधों की गहराई और गंभीरता दोनों को दर्शाता है। 125 से अधिक शीर्ष सीईओ और शिक्षाविदों के साथ प्रधानमंत्री स्टार्मर का आना इस बात की पुष्टि करता है कि ब्रिटेन भारत को एक ऐसे रणनीतिक सहयोगी के रूप में देख रहा है, जो उसके पोस्ट-ब्रेक्सिट युग में वैश्विक प्रभाव को बनाए रख सकता है।इस प्रतिनिधिमंडल में ऑक्सफोर्ड कैम्ब्रिज और लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स जैसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के कुलपति शामिल हैं, जो शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भारत के साथ साझेदारी की नई संभावनाओं पर विचार करेंगे। वहीं, तकनीकी कंपनियों के प्रमुख भारत में एआई, ग्रीन एनर्जी,साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में निवेश की नई संभावनाओं को तलाश रहे हैं।


साथियों बात अगर हम मोदी- स्टार्मर शिखर वार्ता साझेदारी की नई परिभाषा की करें तो नई दिल्ली में मोदी और कीर स्टार्मर के बीच हुई शिखर बैठक में व्यापार, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और संस्कृति को केंद्र में रखकर गहन चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने यह स्पष्ट किया कि भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाएगा।बैठक में भारत ने ब्रिटेन को रक्षा उत्पादन, अंतरिक्ष तकनीक और ग्रीन एनर्जी मिशनों में साझेदारी के लिए आमंत्रित किया। वहीं ब्रिटेन ने भारत में अपने निवेश को तीन गुना बढ़ाने का आश्वासन दिया।“इनोवेशन पार्टनरशिप”के तहत दोनों देशों के बीच स्टार्टअप्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्रों में संयुक्त रिसर्च पर सहमति बनी।


साथियों बात अगर हम भारत की ओर झुकता ब्रिटेन, वैश्विक शक्ति समीकरण में बदलाव कोसमझने की करें तो, ब्रिटेन पीएम की यात्रा ब्रिटिश विदेश नीति में एक मौलिक परिवर्तन का प्रतीक है। यह वही ब्रिटेन है जिसने दशकों तक भारत को “डेवलपिंग नेशन” की दृष्टि से देखा था। लेकिन अब यह मान्यता बदल चुकी है। भारत को ब्रिटेन अब एक इक्वल पार्टनर, एक टेक्नोलॉजिकल पॉवरहाउस और एक वैश्विक निवेश गंतव्य के रूप में स्वीकार कर रहा है।ब्रेक्सिट के बाद ब्रिटेन को यूरोपीय संघ के बाहर नए आर्थिक साझेदारों की तलाश थी। ऐसे में भारत उसकी पहली प्राथमिकता बनकर उभरा है। ब्रिटिश मीडिया इसे“यूकेस पीवोट टू इंडिया ”कह रहा है।


साथियों बात अगर हम भारत के लिए अवसर और जिम्मेदारी दोनों को समझने की करें तो,यह यात्रा भारत के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आई है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी है। भारत को अब यह साबित करना होगा कि वह केवल निवेश आकर्षित करने वाला देश नहीं, बल्कि विनिर्माण, नवाचार और नीति स्थिरता के लिहाज से विश्वसनीय साझेदार भी है।भारत के लिए यह समय है कि वह अपने मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, और स्टार्टअप इंडिया जैसे कार्यक्रमों को ब्रिटिश सहयोग के साथ वैश्विक स्तर पर पहुंचाए। विशेष रूप से एआई, सेमीकंडक्टर, और क्लाइमेट टेक्नोलॉजी में भारत की भूमिका निर्णायक बन सकती है।


साथियों बात अगर हम संस्कृति और शिक्षा,साझेदारी के मानवीय आयाम को समझने की करें तो,भारत-ब्रिटेन संबंध केवल अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच संस्कृति, शिक्षा और सामाजिक मूल्य का भी गहरा जुड़ाव है। इस यात्रा में “कल्चरल एक्सचेंज मिशन” पर भी सहमति बनी, जिसके तहत ब्रिटेन और भारत के बीच कलाकारों, फिल्म निर्माताओं और विद्यार्थियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।ब्रिटिश विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों की संख्या पहले ही रिकॉर्ड स्तर पर है। अब ब्रिटेन ने भारत को “प्राथमिक शिक्षा भागीदार” के रूप में मान्यता देने का निर्णय लिया है। इसके तहत उच्च शिक्षा में द्विपक्षीय डिग्री कार्यक्रम, स्कॉलरशिप्स और कोर्स एक्सचेंज की शुरुआत होगी।


साथियों बात अगर हम यात्रा का ऐतिहासिक महत्व भविष्य के वैश्विक समीकरणों की झलक, यह यात्रा केवल भारत और ब्रिटेन के संबंधों की मजबूती का प्रतीक नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति समीकरणों में एशिया की केंद्रीय भूमिका को भी स्थापित करती है।जब दुनियाँ अमेरिका- चीन प्रतिस्पर्धा में उलझी हुई है, तब ब्रिटेन का भारत की ओर झुकाव इस बात का संकेत है कि 21वीं सदी का आर्थिक केंद्र अबएशिया की धरती पर स्थित है।

भारत इस साझेदारी से न केवल व्यापारिक लाभ प्राप्त करेगा, बल्कि वह पश्चिमी देशों के साथ अपने कूटनीतिक संतुलन को भी और मजबूत करेगा।


अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि विश्वास, साझेदारी और भविष्य की एक नई कहानी,ब्रिटिश पीएम की भारत यात्रा 2025 इतिहास में “इकोनॉमिक डिप्लोमेसी के पुनर्जागरण” के रूप में दर्ज होगी। इस यात्रा ने दिखा दिया कि भारत अब किसी के समर्थन का आकांक्षी नहीं, बल्कि साझेदारी का निर्णायक केंद्र बन चुका है।ब्रिटेन के लिए यह यात्रा भारत के प्रति विश्वास की पुनर्स्थापना है, वहीं भारत के लिए यह अपनी वैश्विक स्थिति को और ऊंचा उठाने का अवसर। व्यापार, शिक्षा, तकनीक और संस्कृति,इन चारों स्तंभों पर खड़ी यह नई साझेदारी आने वाले दशक में विश्व की आर्थिक दिशा तय कर सकती है।भारत और ब्रिटेन अब केवल साझेदार नहीं, बल्कि वैश्विक पुनरुत्थान के सह-निर्माता हैं, एक ऐसा अध्याय जो आने वाली पीढ़ियाँ “न्यू ऐज ऑफ़ इंडो – ब्रिटिश पार्टनरशिप ” के नाम से याद करेंगी।

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9359653465

बालिकाओं में आज की सशक्त लड़की के साथ कल की कार्यकर्ता,उद्यमी,घर का मुखिया, संरक्षक,राजनीतिक नेता दोनों होने की क्षमता है।

बालिकाओं में आज की सशक्त लड़की के साथ कल की कार्यकर्ता,उद्यमी,घर का मुखिया, संरक्षक,राजनीतिक नेता दोनों होने की क्षमता है।

दुनियाँ को बदलने के लिए सही साधनों के साथ बालिकाओं को सुरक्षित शिक्षित सशक्त और स्वस्थ जीवन शैली सुनिश्चित करना समय की मांग।

गोंदिया/महाराष्ट्र

भारत में आदिअनादि काल से भारतीय संस्कृति में महिलाओं का बहुत सम्मान किया जाता रहा है। उन्हें देवियों का अवतार माना जाता रहा है, परंतु बड़े बुजुर्गों की कहावत सत्य ही है कि, समय कभी एक सा नहीं रहता परंतु उनकी वह भी शिक्षा है कि वह अपनी सकारात्मक सोच सच्चाई नारी सम्मान परमार्थ बुरी नजर से बचना सहित अनेक गुणों को समय के साथ न बदलते हुए स्थाई रखना मानवीय स्वभाव में समाहित करना जरूरी है। परन्तु जैसे-जैसे समय बीतता गया इनकी स्थिति में काफी बदलाव आया,लड़कियों के प्रति लोगों की सोच बदलने लगी, बालविवाह प्रथा, सती प्रथा, दहेज़ प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या इत्यादि रुढ़िवादी प्रथायें काफी प्रचलित हुआ करती थी, इसी कारण लड़कियों को शिक्षा, पोषण, कानूनी अधिकार और चिकित्सा जैसे अधिकारों से वंचित रखा जाने लगा था, मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र मानता हूं कि अब इस आधुनिक युग में लड़कियों को उनके अधिकार देने और उनके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कई प्रयास किये जा रहे हैं। भारतीय सरकार भी इस दिशा में काम कर रही है और कई योजनायें लागू कर रही है। इसलिए आज हम मीडिया के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से दुनिया को बदलने के लिए सही साधनों के साथ बालिकाओं को सुरक्षित शिक्षित सशक्त और स्वस्थ जीवन शैली सुनिश्चित करना समय की मांग है इसपर चर्चा करेंगे

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र


साथियों बात अगर हम बालिकाओं की शक्ति को साकार करने में निवेश की करें तो, ये एक असाधारण रूप से महत्वपूर्ण चरण से गुजरती हैं जहां उन्हें एक सुरक्षित, शिक्षित और स्वस्थ जीवन शैली सुनिश्चित करके दुनिया को बदलने के लिए सही साधनों के साथ सशक्त बनाया जा सकता है। उनमें आज की सशक्त लड़की के साथ-साथ कल की कार्यकर्ता, मां, उद्यमी, संरक्षक, घर का मुखिया या राजनीतिक नेता दोनों होने की क्षमता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, किशोरियों की शक्ति को साकार करने में निवेश आज उनके अधिकारों को कायम रखता है और एक अधिक न्यायसंगत और समृद्ध भविष्य का वादा करता है, जिसमें जलवायु परिवर्तन, राजनीतिक संघर्ष की समस्याओं को हल करने में आधी मानवता एक समान भागीदार है, आर्थिक विकास, बीमारी की रोकथाम और वैश्विक स्थिरता।


साथियों बात अगर हम भारत की करें तो,भारतीय समाज में सदियों से बेटियों को कई प्राचीन कुप्रथाओ, रीति-रिवाजों, के चलते प्रताड़ित होना पड़ा है। आज भी निर्भया जैसा कांड शर्मनाक है। कहने को हम आधुनिक हो चले हैं पर आज भी बहुत सारी ऐसी घटनाएं होती है जिन्हें सुनकर समाज का असभ्य चेहरा सामने आता है। आज भी भारतीय समाज में भ्रूण हत्या, दहेज़ प्रथा, यौन शोषण, बलात्कार जैसे अनैतिक कृत्य नहीं रुक रहे हैं। प्रशासन के साथ-साथ हर निजी व्यक्ति की भी एक सामाजिक जिम्मेदारी होती है। बेटियों को अच्छे संस्कार,नैतिक मूल्यों का महत्तव,महान महिलाओं की गाथाओं और धार्मिक संस्कारों से परिचित कराना अभिभावकों का कर्तव्य है।बाहर ही नहीं बल्कि घर में भी वह भेदभाव, घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न का शिकार हो रही हैं। इसलिए लड़कियों को शिक्षित करना हमारा पहला दायित्व है और नैतिक अनिवार्यता भी। शिक्षा से लड़कियां न सिर्फ शिक्षित होती हैं बल्कि उनके अंदर आत्मविश्वास भी पैदा होता है। वह अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होती हैं साथ ही यह गरीबी दूर करने में भी सहायक होती है।


साथियों हालांकि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ भारत सरकार ने 2015 में योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य देश में हर बालिका को शिक्षा प्रदान करना है। यह बाल लिंग अनुपात में गिरावट के मुद्दे को भी संबोधित करता है। योजना का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी सुरक्षा करना है। यह योजना त्रि-मंत्रालयी प्रयास है। इसे महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, मानव संसाधन विकास और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जाता है। सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा और 2015 में विश्व नेताओं द्वारा अपनाए गए इसके 17 सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) में प्रगति के लिए एक रोडमैप शामिल है जो टिकाऊ है और किसी को पीछे नहीं छोड़ता है। 17 लक्ष्यों में से प्रत्येक लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को प्राप्त करने का अभिन्न अंग है।
साथियों बात अगर हम बदलते परिपेक्ष की करें तो, वक़्त के साथ समाज की प्राथमिकताएं बदलती है सोच औऱ आदतें बदलती है निरंतर विकास की ओर कदमों की छाप बढ़ती जाती है इसी तरह ग्रामीण लोगों के नज़रिये में बदलाव आने लगा है। अब वह न केवल लड़कियों को क्रिकेट – फुटबॉल खेलने के लिए प्रोत्साहित करने लगे हैं बल्कि इससे जुड़ी हर गतिविधियों में सहयोग भी करते हैं। लेकिन ये भी सच है लैंगिकता के मायने लड़कियों और लड़कों, महिलाओं और पुरुषों में महिलाओं ने समानता सदैव चुनौतियों का सामना किया चाहे ग्रामीण इलाकों रहे हो या शहरी। ग्रामीण क्षेत्र अब भी महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर चाहे पहनावे से लेकर हो या नौकरी करने तक इक़ संकुचित सोच के दायरे में सिमटा हुआ है।


साथियों बात अगर हम महिलाओं के हक में कानून व्यवस्थाएं बनाने की करें तो इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके अधिकारों के संरक्षण क़ा करना है,क्योंकि लिंगआधारित चुनौतियों को समाप्त करता है, जिसका सामना दुनिया भर में लड़कियां करती हैं, जिसमें बाल विवाह, उनके प्रति भेदभाव और हिंसा शामिल है। महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है।

खिलती हुई कलियाँ हैं बेटियाँ,
माँ-बाप का दर्द समझती हैं बेटियाँ,
घर को रोशन करती हैं बेटियाँ,
लड़के आज हैं तो आने वाला कल हैं बेटियाँ।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि दुनिया को बदलने के लिए सही साधनों के साथ बालिकाओं में आज की सशक्त लड़की के साथ कलकी कार्यकर्ता मां उद्यमी संरक्षक घर का मुखिया राजनीतिक नेता दोनों होने की क्षमता है इसलिए उन्हें सुरक्षित शिक्षित सशक्त और स्वस्थ जीवन शैली सुनिश्चित करना समय की मांग है।

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9359653465

बिहार राज्य विधानसभा चुनाव 2025 -आचारसंहिता प्रशासनिक शक्ति और लोकतांत्रिक शुचिता का इम्तिहान

बिहार राज्य विधानसभा चुनाव 2025 -आचारसंहिता प्रशासनिक शक्ति और लोकतांत्रिक शुचिता का इम्तिहान

चुनावी परिदृश्य में दुनियाँ देखेगी कि सबसे बड़े लोकतंत्र में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनावों की प्रक्रिया कैसे सुदृढ़ होती है।

चुनावी आचार संहिता भारतीय लोकतंत्र की वह नैतिक मर्यादा है, जो राजनीतिक दलों,नेताओं और सरकार को सत्ता के दुरुपयोग से रोकती है- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

महाराष्ट्र/गोंदिया

वैश्विक स्तरपर भारत एक ऐसा देश है, जहां लोकतंत्र सिर्फ एक राजनीतिक व्यवस्था नहीं, बल्कि एक सामाजिक आस्था है। हर चुनाव इस आस्था की परीक्षा भी होता है और लोकतंत्र की आत्मा की पुनर्पुष्टि भी। वर्ष 2025 के राज्य बिहार विधानसभा चुनाव सहित कुछ राज्यों की विधानसभाओं का उपचुनाव इस दृष्टि से बेहद अहम माने जा रहे हैं। आगामी 6 नवंबर और 11 नवंबर को दो चरणों में बिहार में मतदान होने जा रहा है, जबकि मतगणना 14 नवंबर को होगी। चुनाव आयोग ने तारीखों की घोषणा करते ही आचार संहिता लागू कर दी है, और इसके साथ ही पूरा प्रशासन सक्रिय मोड में आ गया है। इस चुनावी परिदृश्य में भारत न केवल अपने भीतर लोकतांत्रिक शुचिता की परीक्षा दे रहा है, बल्कि यह भी दिखा रहा है कि दुनियाँ के सबसे बड़े लोकतंत्र में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनावों की प्रक्रिया कैसे सुदृढ़ होती है।साथियों बात अगर हम बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की करें तो,प्रथम चरण में कुल सीट:121 नोटिफिकेशन की तारीख:10 अक्टूबर 2025 नामांकन की आखिरी तारीख: 17अक्टूबर 2025 नामांकन जांच की आखिरी तारीख:18 अक्टूबर 2025 नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख:20 अक्टूबर 2025 मतदान:6 नवंबर 2025 चुनाव रिजल्ट:14 नवंबर 2025 चरण में बिहार विधानसभा चुनाव 2025 फेज- 2 शेड्यूलकुल सीट:122 नोटिफिकेशन की तारीख:13 अक्टूबर 2025 नामांकन की आखिरी तारीख:20 अक्टूबर 2025 नामांकन जांच की आखिरी तारीख:21 अक्टूबर 2025 नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख:23 अक्टूबर 2025 मतदान:11 नवंबर 2025 चुनाव रिजल्ट:14 नवंबर 2025


साथियों बात अगर हम चुनाव आचार संहिता क़े अर्थ और महत्व की करें तो,चुनावी आचार संहिता भारतीय लोकतंत्र की वह नैतिक मर्यादा है, जो राजनीतिक दलों, नेताओं और सरकार को सत्ता के दुरुपयोग से रोकती है। इसे चुनाव आयोग द्वारा संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत लागू किया जाता है।इसका मूल उद्देश्य है कि सत्तारूढ़ दल चुनावी प्रक्रिया के दौरान सरकारी संसाधनों का राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग न करे,तथा विपक्षी दलों को समान अवसर मिले। यह संहिता न केवल प्रशासनिक निष्पक्षता सुनिश्चित करती है बल्कि जनविश्वास को भी बनाए रखती है। लोकतंत्र में यह “आचार” ही वह संतुलन है जो“सत्ता” को “सेवा”में परिवर्तित करता है।2025 के विधानसभा चुनावों में यह आचार संहिता पहले से अधिक सख्ती से लागू की गई है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट कहा है कि यदि कोई मंत्री या जनप्रतिनिधि सरकारी गाड़ी, बंगला, हेलीकॉप्टर या कोई भी सरकारी संसाधन चुनाव प्रचार में इस्तेमाल करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।सरकारी वेबसाइटों से नेताओं की तस्वीरें हटाई जा रही हैं, नई योजनाओं की घोषणाओं पर रोक लगा दी गई है और सरकारी धन का किसी भी प्रकार से राजनीतिक प्रचार में उपयोग वर्जित कर दिया गया है। यह व्यवस्था प्रशासनिक निष्पक्षता की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
साथियों बात अगर हम प्रशासनिक सक्रियता और अनुशासन की परीक्षाकी करें तो,आचार संहिता लागू होते ही राज्य का प्रशासन भी युद्धस्तर पर सक्रिय हो गया है।जिलाधिकारियों से लेकर थानेदार तक को यह हिदायत दी गई है कि किसी भी तरह की राजनीतिक पक्षधरता न दिखे। पुलिस, आयकर विभाग,और निर्वाचन विभाग की संयुक्त टीमें गठित की गई हैं ताकि अवैध धन, शराब, उपहार या अन्य प्रलोभनों के वितरण पर रोक लगाई जा सके। यह भी सुनिश्चित किया गया है कि सोशल मीडिया के माध्यम से भड़काऊ या झूठे प्रचार को नियंत्रित किया जाए। “ये किए तो जाना पड़ेगा जेल”- यह चेतावनी प्रशासन ने खुले रूप में दी है। इसका सीधा अर्थ यह है कि किसी भी प्रकार के आचार संहिता उल्लंघन को अब केवल चेतावनी या जुर्माने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि कठोर दंडात्मक कार्रवाई होगी।यह कठोरता लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा के लिए आवश्यक है। बीते वर्षों में सोशल मीडिया के ज़रिए झूठे प्रचार, वोटरों को प्रभावित करने वाली गलत सूचनाएं और नफरत फैलाने वाले बयानों की बाढ़ देखने को मिली है। ऐसे में प्रशासनिक सख्ती लोकतांत्रिक स्वास्थ्य के लिए एक आवश्यक “टीका” की तरह है।
साथियों बात अगर हम सरकारी सुविधाओं पर रोक, सत्ता और चुनाव के बीच की दीवार की करें तो, आचार संहिता के तहत एक प्रमुख निर्णय यह लिया गया है कि मंत्री अब सरकारी सुविधाओं का उपयोग नहीं कर पाएंगे। इसका अर्थ यह है कि चुनाव अवधि में सरकारी गाड़ी,सरकारी आवास,सुरक्षा व्यवस्था,या सरकारी कर्मचारियों की सेवाएं निजी प्रचार में इस्तेमाल नहीं की जा सकतीं। यह प्रावधान सत्ता और चुनाव के बीच एक स्पष्ट दीवार खड़ी करता है।इतिहास साक्षी है कि जब-जब सत्ता में बैठे नेताओं ने सरकारी संसाधनों का उपयोग चुनावी लाभ के लिए किया,तब-तब लोकतंत्र की साख को चोट पहुंची। इसलिए भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में इस प्रकार की रोक लोकतांत्रिक संतुलन बनाए रखने का आवश्यक औजार है।इसके साथ ही सरकार की वेबसाइटों, विज्ञापनों और प्रचार माध्यमों से नेताओं की तस्वीरें हटाई जा रही हैं। नई योजनाओं, नीतियों या घोषणाओं पर भी रोक रहेगी ताकि जनता के बीच कोई भ्रम या अनुचित लाभ का संदेश न जाए। यही आचार संहिता का सार है -कि सरकार जनता की होती है, किसी एक दल की नहीं।
सभाओं और जुलूसों पर नियंत्रण स्वतंत्रता और अनुशासन का
संगम – लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सर्वोपरि है, परंतु जब यह स्वतंत्रता दूसरों के अधिकारों का उल्लंघन करने लगे, तो इसे नियंत्रित करना आवश्यक हो जाता है। इसी कारण से चुनाव आयोग ने यह नियम स्पष्ट किया है कि सभा और जुलूस के लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।यह व्यवस्था न केवल कानून- व्यवस्था बनाए रखने के लिए है, बल्कि हिंसा, अव्यवस्था और भीड़-प्रबंधन के दृष्टिकोण से भी आवश्यकअति है। मतदान केंद्रों के आसपास प्रचार पर रोक लगाना भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य मतदाताओं को भय, प्रलोभन या दबाव से मुक्त वातावरण प्रदान करना है ताकि वे स्वतंत्र रूप से मतदान कर सकें। यह केवल चुनावी नियम नहीं बल्कि मतदाता की गरिमा और निजता की सुरक्षा है-जो किसी भी लोकतंत्र का मूल तत्व है।
साथियों बात अगर हम लोकतांत्रिक शुचिता का अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण को समझने की करें तो,भारत की आचार संहिता की व्यवस्था को दुनिया के कई लोकतांत्रिक देशों में एक आदर्श के रूप में देखा जाता है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस या जापान जैसे देशों में भी चुनावों के दौरान कुछ सीमित प्रतिबंध लागू किए जाते हैं, परंतु भारत की तरह व्यापक और संगठित आचार संहिता शायद ही कहीं हो।संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम और कॉमनवेल्थ ऑब्जर्वर ग्रुप ने कई बार कहा है कि भारत की चुनावी व्यवस्था “विकासशील लोकतंत्रों के लिए मॉडल” है। चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और उसके आदेशों की बाध्यता अंतरराष्ट्रीय मानकों पर भी अत्यंत उच्च मानी जाती है।भारत में एक ही चुनाव में लाखों अधिकारी, सैकड़ों एजेंसियाँ और करोड़ों मतदाता शामिल होते हैं -इस स्तर की पारदर्शिता और संगठन क्षमता किसी भी राष्ट्र के लिए प्रशंसनीय है। यही कारण है कि भारत की चुनावी प्रक्रिया वैश्विक लोकतंत्रों के लिए अध्ययन का विषय बनी रहती है।
साथियों बात अगर हम राजनीतिक मर्यादा और भाषण की सीमाओं को समझने की करें तो, 2025 के चुनावों में एक और बड़ा मुद्दा है,भड़काऊ बयानों और नफरत फैलाने वाले भाषणों पर रोक। चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अपने प्रचार में धर्म, जाति, भाषा या क्षेत्र के आधार पर विभाजनकारी टिप्पणियाँ न करें।यह दिशा-निर्देश सिर्फ चुनावी शालीनता के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द की रक्षा के लिए हैं। हाल के वर्षों में सोशल मीडिया ने बयानबाजी को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। एक ट्वीट या वीडियो लाखों लोगों तक तुरंत पहुँच जाता है, जिससे चुनावी माहौल बुरी तरह भड़क सकता है। इसलिए इस बार आयोग ने साइबर मॉनिटरिंग टीमों की संख्या दोगुनी कर दी है। हर जिला स्तर पर एक “सोशल मीडिया ऑब्जर्वर”नियुक्त किया गया है,जो ऑनलाइन प्रचार पर नज़र रखेगा। इस कदम से लोकतांत्रिक संवाद में संयम और मर्यादा सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।
साथियों बात अगर हम मतदाता जागरूकता और जिम्मेदारी को समझने की करें तो,लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति मतदाता के हाथ में होती है। प्रशासन और आचार संहिता के सभी नियम तभी प्रभावी हो सकते हैं जब मतदाता भी अपनी जिम्मेदारी समझे। 2025 के चुनावों में “मेरा वोट, मेरा अधिकार” अभियान को फिर से सशक्त रूप में लागू किया गया है। सोशल मीडिया, मोबाइल ऐप, और डिजिटल माध्यमों के जरिए मतदाताओं को मतदान केंद्रों की जानकारी, उम्मीदवारों के विवरण और शिकायत निवारण की सुविधा दी गई है।इसके साथ ही मतदान दर बढ़ाने के लिए कई नवाचार किए जा रहे हैं,जैसे कि दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष वाहन,वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर पर मतदान की सुविधा, और महिलाओं के लिए “पिंक बूथ”। यह सभी प्रयास लोकतंत्र की भागीदारी को और अधिक समावेशी बनाते हैं।आचार संहिता और राजनीति की नई परिभाषा-भारत में चुनाव अब केवल सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया नहीं रह गए हैं, बल्कि यह लोकतांत्रिक परिपक्वता का पैमाना बन गए हैं। आचार संहिता इस प्रक्रिया में नैतिक संतुलन का प्रतीक है। यह राजनेताओं को याद दिलाती है कि सत्ता जनता की सेवा का माध्यम है,न कि निजी अधिकार।2025 का चुनाव इस लिहाज से अलग है कि जनता पहले से अधिक जागरूक है, मीडिया की पहुँच अधिक गहरी है, और चुनाव आयोग की तकनीकी क्षमताएँ भी कई गुना बढ़ी हैं। अब चुनाव का हर चरण नामांकन से लेकर मतगणना तक,डिजिटली मॉनिटर किया जा रहा है।इस पारदर्शिता ने न केवल चुनावों की विश्वसनीयता बढ़ाई है बल्कि भ्रष्टाचार और अनैतिक आचरण की संभावनाएँ भी घटाई हैं।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि,बिहार राज्य विधानसभा चुनाव 2025-आचार संहिता, प्रशासनिक शक्ति और लोकतांत्रिक शुचिता का इम्तिहान”चुनावी आचार संहिता भारतीय लोकतंत्र की वह नैतिक मर्यादा है,जो राजनीतिक दलों,नेताओं और सरकार को सत्ता के दुरुपयोग से रोकती है

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

सच्चाई की राह, सुखद जीवन के लिए विनियोग

सच्चाई की राह, सुखद जीवन के लिए विनियोग

झूठ का गंतव्य दुखी जीवन की चरम सीमा

सत्य वह दौलत है जिसे पहले खर्च करो- जिंदगी भर आनंद पाओ, झूठ वह कर्ज़ है- क्षणिक सुख पाओ जिंदगी भर चुकाते रहो- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

महाराष्ट्र/गोंदिया

भारत अपनी संस्कृति, आध्यात्मिकता, अहिंसा धर्मनिरपेक्षता, परमो धर्मा और सच्चाई की मूरत राजा हरिश्चंद्र इत्यादि अनेकों विशेषताओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र से यह मानता हूं कि एक झूठ के पीछे सव झूठ बोलना पड़ता है और झूठ के दलदल में मनुष्य घुसता चला जाता है।जिससे उसकी वर्तमान पीढ़ी तो ध्वस्त होती ही है पर आने वाली पीढ़ियों में भी यह दोष समाया रहता है।
साथियों बात अगर हम सच्चाई की साक्षात मूरत राजा हरिश्चंद्र की करें तो,सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र सदैव सत्य बोलते थे। वह अपने सत्य और न्याय के लिए जाने जाते थे। इसलिए आज भी उनकी कहानियां बड़े सम्मान के साथ सुनाई जाती हैं।हमने अपने बड़े बुजुर्गों से अनेक कई किस्से सुने हैं।हम,आज की जनरेशन करीब-करीब हर सच्चाई वाली बात में इस महान मूरत का नाम ज़रूर जोड़तेहैं।हमारे बड़े बुजुर्गों से हमने कई वाक्य सुने हैं, जैसे सच्चाई छुप नहीं सकती बनावट के उसूलों से, सत्य की हार नहीं होती,सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं,सत्यमेव जयते।
साथियों बात अगर हम सत्यमेव जयते इसकी करें तो हम अनेक शासकीय,अशासकीय स्थानों पर इसका उल्लेख ज़रूर देखते हैं।यही सत्य है कि हमेशा सत्य की विजय होती है।

साथियों बात अगर हम भारतीय आध्यात्मिकता की करें तो हमें यही ज्ञान मिलता है कि सत्य व दौलत है जैसे पहले खर्च करो फिर जिंदगी भर आनंद पाओ और झूठ वह कर्ज है जिससे क्षणिक सुख पाओ और जिंदगी भर उसे चुकाते रहो बिल्कुल सत्य वचन!साथियों यह बात अगर मानव के हृदय में बस जाए तो वाह क्या बात है! हम पृथ्वी लोक में ही स्वर्ग के दर्शन कर सकेंगे।अगर हर भारतीय व्यक्ति चाहे वह सरकारी हो या शासकीय कर्मचारी, मंत्री हो या नेता, कार्यकर्ता हो या मालिक,सभी अगर सत्यता रूपी दौलत को पूरी निष्ठा से खर्च करें अर्थात ईमानदारी से अपनी अफसर शाही ड्यूटी, व्यापार-व्यवसायज दिनचर्या अर्थात जीवन के हर काम हर मोड़ पर सत्यता बरसाएगें तो वह खुद तो जीवन का आनंद जरूर पाएंगें परंतु उससे अधिक भारत को स्वर्ग जैसा सुंदर रचना बनाने में अहम रोल अदा करेगें। भारत एक अपराध मुक्त भारत की परिकल्पना में साकार होगा।कोई अदालत, पुलिस स्टेशन,जांच एजेंसियां नहीं होगी क्योंकि यह सब झूठ और अपराध को काटने के लिए ही बनाई गई हैं।
साथियों बात अगर हम झूठ की करें तो हमने अपने व्यवहारिक जीवन में देखा होगा कि बेईमान, रिश्वतखोर, झूठा, भ्रष्टाचारी, धोखेबाज इत्यादि तरह के मानव कभी अपने जीवन में सुखी नहीं होते। चाहे कितना भी अवैध धन कमा लें,उनके पीछे परिवार का, उनके स्वास्थ्य का, मानसिक हालत हमेशा दुखों में बनी रहती हैउनके शरीर के नसों में झूठ रूपी खून दौड़ता है और इन नकारात्मक झूठे व्यवहारों से उनका क्षणिक आर्थिक सुख मिलता है परंतु उसके लिए उनको जीवन भर कष्टों में गुजारना पड़ता है। जितना क्षणिक सुख प्राप्त होता है वह ब्याज सहित याने अतिरिक्त दुख सहित यहीं इस जीवन में भोगना पड़ता है और फिर अंत में पछताते हैं के ऐसा क्यों हुआ,ऊपर वाले से क्षमा याचना करते हैं।पर कहते हैं ना कि जब चिड़ियां चुग गई खेत,अब पछतावे क्या होए??
साथियों बात अगर हम सत्य की गहराई की करें तो,सत्य दो प्रकार का होता है- एक व्यवहारिक सत्य और दूसरा वास्तविक। व्यवहारिक सत्य का अर्थ है जैसा देखा, जैसा सुना और जैसा अनुभव किया, उसको वैसा ही बोलना सत्य कहलाता है।व्यवहारिक सत्य में हो सकता है, जो एक के लिए सत्य है, वो दूसरे के लिए असत्य हो। वैसे तो हर व्यक्ति अपने मुताबिक अपना सत्य बना लेता है। यह व्यवहारिक सत्य, अनुभव, नजरिए और देश, काल के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। इसलिए इसमें मतभेद की संभावना बनी रहती है।ईमानदार और न्यायवादी व्यक्ति ही सत्य का पालन करता है।यह देखा गया है कि जो लोग ईमानदार होते हैं वह सदैव सच बोलते हैं। झूठे बेईमान और मक्कार लोग सदैव असत्य का फायदा लेकर अपना काम बनाते हैं। हम ऐसे लोगों से बचना चाहिए जो अपने फायदे के लिए (झूठ) असत्य बोलते हैं।सत्य का अर्थ है ‘सते हितम्’ अर्थात् जिसमें हित या कल्याण निहित हो। सत्य भूत, भविष्य एवं वर्तमान तीनों काल में एक सा रहता है तथा इससे यथार्थ का ज्ञान होता है। साधारण बातचीत में जो सच है, यथार्थ है उसे जानना, समझना, मानना, कहना एवं उसके अनुसार ही व्यवहार करना सत्य है। मानव बोध में सत्य के प्रति श्रद्धा एवं असत्य के प्रति घृणा स्वाभाविक रूप से पाई जाती है।मनुष्य जीवन के लिए सत्य सबसे बड़ी शक्ति हैं।जीवन तथा संसार के सत्य की तलाश कर उसे जीवन में अपनाना मानव मात्र का मूल उद्देश्य हैं।हमारी संस्कृति में सत्य को बड़ा महत्व दिया गया हैं।इस सम्बन्ध में एक महापुरुष ने ठीक ही कहा कि सत्य परेशान हो सकता है मगर पराजित नहीं. भारत की भूमि पर हरिश्चन्द्र जैसे राजा हुए जिनकी सत्यनिष्ठा के चलते वे सत्यवादी कहलाए।सत्य के रास्ते पर चलकर व्यक्ति बड़ी-बड़ी समस्या का समाधान आसानी से कर सकता है।सत्य के मार्ग पर चलकर कई लोगों ने सफलता प्राप्त कर अपना और अपने परिवार का भला किया है।सत्य के मार्ग पर चलकर कई लोगों ने सफलता प्राप्त कर दुनिया को बदला है । सत्य बोलने से व्यक्ति को सभी सम्मान देते हैं।ऐसा कहा जाता है कि तीन चीजें छुपाए नहीं छुपती- सूरज, चंद्रमा और सत्य। जो लोग सत्य का, न्याय का पक्ष लेते हैं उनकी प्रशंसा सभी लोग करते हैं।सत्य का साथ देने वालों को इतिहास स्वर्णिम पन्नों पर दर्ज करता है। परंतु जो लोग झूठ,असत्य का साथ देते हैं उनकी चारों ओर आलोचना होती है।किसी ने खूब ही कहा है कि
चन्द्र टरै, सूरज टरै, टरै जगत व्यवहार।’
पै दृढ़ हरिश्चन्द्र को टरै न सत्य विचार।..
सांच बराबर तप नहीं, झूंठ बराबर पाप।
जाके हृदय सांच है, ताके हृदय आप

किसी ने धर्म के दस लक्षण बताए हैं, जिनमें सत्य भी प्रमुख स्थान रखता है।
‘धृतिः क्षमा दमोऽस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रहः। धीविद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्।।’
अर्थात् धैर्य, क्षमा, संयम, अस्तेय (चोरी न करना ), शौच ( अंतर्मन और शरीर की पवित्रता ), इन्द्रिय निग्रह (इन्द्रियों से धर्म सम्मन आचरण), धी ( सत् बुद्धि), विद्या, सत्य एवं अक्रोध यानी हमेशा शांत रहना।
अतः अगर हम पूरे उपरोक्त विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करेंगे तो हम पाएंगे के सत्य व दौलत है जिसे पहले खर्च करो फिर जिंदगी भर आनंद पाओ और झूठ वह कर्ज है जिसमें सैनिक सुख पाओ फिर जिंदगी भर जो करते रहो और सच्चाई की राह सुखद जीवन के लिए एक विनियोग है तथा झूठ का गंतव्य दुखी जीवन की चरम सीमा है

-संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9359653465

तू मैं और करप्शन- जमकर खाओ- फाइल दबाओ नोटों की गड्डियां पाओ

तू मैं और करप्शन- जमकर खाओ- फाइल दबाओ नोटों की गड्डियां पाओ

गोंदिया

लोकसभा चुनाव 2024 की अधिसूचना जारी होने के पूर्व ही शाब्दिक बाणों का खेला

चुनावी मौसम आया-शाब्दिक बाणों से माहौल गरमाया – जनता जनार्दन को चौंकाया-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया

साथियों बात कर हम कई राज्यों में व्याप्त भ्रष्टाचार की करें तो, पीएम ने कहा था तीन बुराइयों से लड़ना समय की मांग है, भ्रष्टाचार परिवारवाद और तुष्टीकरण। भ्रष्टाचार ने दीमक की तरह अर्थव्यवस्था को नोच लिया है। भ्रष्टाचार मुक्ति इसके खिलाफ जंग पीएम के जीवन का कमिटमेंट है। उन्होंने कहा मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ता रहूंगा। इसपर मेरा मानना है कि तीन बुराइयों में सबसे खतरनाक बुराई भ्रष्टाचार है, क्योंकि यह देश के राजनीतिक, आर्थिक सामाजिक, पर्यावरण की लागत और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर प्रभाव डालती है। मेरा मानना है कि उच्च स्तरपर भ्रष्टाचार पर आम जनता पर डायरेक्ट प्रभाव नहीं पड़ता। वह बड़े लोगों, रसूख रखने वाले नेताओं, उद्योगपतियों ब्यूरोक्रेसी के लेवल पर फर्क पड़ता है,जैसे महाराष्ट्र में 100 करोड़ वसूली मुद्दा, एमपी में अनेक ब्यूरोक्रेसी के घर पर छापा चपरासी से लेकर आईएएस तक करोड़ों की तादाद में बरामदगी, नियुक्तियों में भ्रष्टाचार मुद्दा, शिक्षक भर्ती घोटाला,एक राज्य में 40 परसेंट तो अभी दूसरे राज्य में 50 पर्सेंट ठेकेदारी मुद्दे का मामला इत्यादि अनेक ऐसे मामले देश के सामने हैं। परंतु आम जनता जनार्दन का काम पटवारी से लेकर वाया तहसील कार्यालय तक और एसडीओ से लेकर कलेक्टर ऑफिस तक यही उनका जीवन का अधिकतम हिस्सा निपट जाता है और इन्हीं चार पहियों पर आम आदमी का सामर्थ्य दीमक की तरह नोच लिया जाता है जिसका अनुभव मैंने अपने जीवन में कई बार किया है और मेरे पेशे के अनुसार कई बार आम जनता को पीड़ित होते हुए देखा है।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि तू मैं और करप्शन- जमकर खाओ- फाइल दबाओ नोटों की गड्डियां पाओ।लोकसभा चुनाव 2024 की अधिसूचना जारी होने के पूर्व ही शाब्दिक बाणों का खेला!चुनावी मौसम आया-शाब्दिक बाणों से माहौल गरमाया – जनता जनार्दन को चौंकाया।

तू मैं और करप्शन- जमकर खाओ- फाइल दबाओ नोटों की गड्डियां पाओ

तू मैं और करप्शन- जमकर खाओ- फाइल दबाओ नोटों की गड्डियां पाओ

गोंदिया

लोकसभा चुनाव 2024 की अधिसूचना जारी होने के पूर्व ही शाब्दिक बाणों का खेला

चुनावी मौसम आया-शाब्दिक बाणों से माहौल गरमाया – जनता जनार्दन को चौंकाया-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया

विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में अनुमानतः अप्रैल से मई 2024 तक 7-9 चरणों में लोकसभा चुनाव होने की संभावना व्यक्त की जा रही है, मेरा ऐसा मानना इसलिए भी है कि अभी माननीय पीएम 9 दिनों में 12 राज्यों की करीब 341 सीटों पर अपने संबोधन के दौरे पर हैं, वैसे भी पिछले दिनों से उन सीटों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जो हाथ से फिसल गई थी। स्वाभाविक है कि लोकसभा चुनाव की अधिसूचना उसके बाद ही जारी की जाएगी परंतु जिस तरह से पिछले दो दिनों से पक्ष विपक्ष में जोरदार शाब्दिक बाणों का प्रहार हो रहा है उससे सटीक अंदाजा लगाया जा सकता है कि चुनावी मौसम आ गया है और अपने ऊंचाई वाले स्तर पर जा रहा है। चुंकि विपक्ष ने पक्ष के नेता पर परिवार को लेकर तंज कसा है, सो उन्होंने लपक लिया और पूरे भारत को अपना परिवार बता दिया और फिर भ्रष्टाचार को लेकर भी शाब्दिक बाचा-बाची शुरू हो गई है।अभी 2 दिन पहले ही माननीय पीएम ने तो तू मैं और करप्शन एक राज्य के लिए, तो दूसरे के लिए जमकर खाओ की बातें कहीं, तो, 04 मार्च 2024 को एक राज्य में फाइल दबाव नोटों की गड्डियां पांओ की बात कही तो दूसरे दूसरी ओर 4 मार्च 2024 को ही देर शाम जानकारी आई के सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों की संवैधानिक बेंच ने सर्वसम्मति से वोट फॉर नोट और सांसद व विधायकों नेताओं को इस मामले में छूट से इनकार करने का ऐतिहासिक फैसला दिया तो, उधर स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ने अपने इलेक्ट्रॉन बॉन्ड की जानकारी सुप्रीम कोर्ट में देने की अंतिम तिथि 6 मार्च से बढ़कर 30 जून 2024 की अपील दाखिल की है जिसे विपक्ष ने लपक लिया है और विपक्ष नेता ने कहा दाल में कुछ काला ही नहीं पूरी दाल ही काली है। बता दें कि इस डिजिटल युग में एक क्लिक पर बैंक की सारी जानकारी खाताधारकों व सरकारी एजेंसियों को मिल जाती है तो एसबीआई द्वारा इलेक्ट्रोल बॉन्ड की जानकारी में इतना समय क्यों मांग लिया है, यह बात मेरे खुद की समझ से भी परे है क्योंकि तब तक तो इलेक्शन भी निपट जाएंगे तो जनता को कैसे पता चलेगा कि किस पार्टी ने कितना पैसा एसबीआई इलेक्ट्रॉन बॉन्ड के तहत उठाया है। चूंकि आज दिनांक 5 मार्च 2024 को परिवार, भ्रष्टाचार, इलेक्ट्रॉन बॉन्ड और सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों की बेंच का फैसला यह मुद्दे काफी चर्चित रहे,इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, चुनावी मौसम आया, शाब्दिक बाणों से माहौल गरमाया जनता जनार्दन को चौंकाया।

साथियों बात अगर हम भ्रष्टाचार पर शाब्दिक बाणों की करें तो, पीएम ने बंगाल में भ्रष्टाचार की बात करते हुए कहा कि यहां नेताओं के घर से नोटों की गड्डियां मिल रही थींनेताओं ने जनता का पैसा लूटा है।अगर अपराध व भ्रष्टाचार की बात कहें तो इन्होंने इसमें नया मॉडल स्थापित किया है। कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है, जहां ना हुआ हो। उन्होने कहा, मेरी गारंटी है. मैं बंगाल के लोगों से वादा करता हूं कि लूटने वालों को लौटाना ही पड़ेगा, ये छोड़ने वाला नहीं है। इनकी गालियों और हमले से डरने वाला नहीं है, झुकने वाला नहीं है।जिसने गरीब को लूटा है,उसको लौटाना ही पड़ेगा उन्होंने इस दौरान जनता को उस पार्टी के नाम का असली मतलब बताया। उन्होंने कहा कि अब इसका मतलब तू, मैं और करप्शन है। उन्होंने कहा कि इनकी सरकार ने राज्य के नाम को खराब किया है। हर तरह की योजना में यहां घोटाले देखने को मिलते हैं। येजनाएं हमारी होती हैं लेकिन वो उनपर अपना स्टीकर लगा देते हैं। गरीबों का हक छीनने से भी वो नहीं हिचकिचाते।

साथियों बात कर हम इसी से सहलग्न नोट फॉर वोट भ्रष्टाचार के संबंध में 4 मार्च 2024 को देर शाम 7 सदस्यों की बेंच की संवैधानिक पीठ के फैसले की करें तो, सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की संविधान पीठ ने 1998 के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें सांसद/विधायक को संसद या राज्य विधानसभा में वोट करने या भाषण देने के लिए रिश्वत लेने पर आपराधिक मुकदमे से छूट दी गई थी। मीडिया के अनुसार , सुप्रीम कोर्ट ने जेएमएम विधायक सीता सोरेन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि संसद सदस्य (सांसद) और विधानसभा सदस्य (विधायक) रिश्वत लेने का आरोप लगने पर संविधान के अनुच्छेद 105 और 194 के तहत अभियोजन से किसी छूट का दावा नहीं कर सकते हैं। बेंच की अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश ने की। पीठ ने पिछले साल अक्टूबर में इसपर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (4 मार्च) को 1998 के पीवी नरसिम्हा राव के फैसले को पलट दिया, जिसमें कहा गया था कि संसद और विधानसभा के सदस्य विधायिका में वोट या भाषण के लिएसंविधान के अनुच्छेद 105(2) और 194(2) के तहत छूट का दावा कर सकते हैं। 1998 के अपने फैसले में पी.वी. नरसिम्हा राव बनाम सीबीआई मामले में शीर्ष अदालत ने कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 105 की पृष्ठभूमि में सांसदों को संसद में कही गई किसी भी बात या दिए गए वोट के संबंध में आपराधिक मुकदमा चलाने से छूट प्राप्त है। इसी तरह की छूट राज्य विधानमंडल के सदस्यों को अनुच्छेद 194(2) द्वारा मिली हुई है। एससी के फैसले को पीएम ने कहा- स्वागतम् पीएम ने ट्वीट किया, सुप्रीम कोर्ट का एक महान निर्णय जो स्वच्छ राजनीति सुनिश्चित करेगा और सिस्टम में लोगों का विश्वास गहरा करेगा।

साथियों बात अगर हम परिवार पर शाब्दिक बाणों की करें तो, पीएम ने सोमवार कोएक राज्य में एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान पीएम नेविपक्ष के एक नेता के एक बयान पर जोरदार पलटवार किया ह। उन्होने कहा कि मुझपर परिवार को लेकर निशाना साधा गया है। पीएम ने कहा कि पूरा देश मेरा परिवार है। वहीं पीएम के इस बयान के बाद कई पार्टी नेताओं ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स (ट्विटर) पर अपने नाम के साथउनका परिवार लिख दिया है। इसी कड़ी में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री ने भी अपने नाम के आगे उनका का परिवार लिख दिया है। बता दे विपक्ष के एक बड़े नेता ने कहा था, ये वो क्या है।कोई चीज़ है क्या वो, ये आजकल परिवारवाद पर हमला कर रहे हैं।अरे भाई, तुम बताओ न कि तुमकोपरिवार में कोई संतान क्यों नहीं हुआ? ज़्यादा संतान होने वाले लोगों को बोलता है कि तुम परिवारवाद है, परिवारवाद के लिए लोग लड़ रहे हैं। तुम्हारे पास परिवार नहीं है।तुम हिंदू भी नहीं हो। जब तुम्हारी माता जी का देहावसान हुआ, हर हिंदू शोक में केश बनवाता है। दाढ़ी छिलवाता है, क्यों नहीं छिलवाया बताओ।

साथियों बात अगर हमएसबीआई इलेक्ट्रोल बॉन्ड पर शाब्दिक बाणों की करें तो, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट से चुनावी बॉन्ड की जानकारी देने के लिए 30 जून तक का समय मांगा है सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों चुनावी बॉन्ड स्कीम को रद्द कर दिया था। साथ ही कोर्ट ने एसबीआई को चुनावी बॉन्ड की जानकारी चुनाव आयोग को देने को कहा था। दरअसल, एसबीआई ही चुनावी बॉन्ड जारी करता था।सीजेआई की बेंच ने 15 फरवरी 2024 को चुनावी बॉन्ड स्कीम को असंवैधानिक और आरटीआई का उल्लंघन करार देते हुए तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। सीजेआई की अध्यक्षता वाली 5 जजों की बेंच ने एसबीआई को अप्रैल 2019 से अब तक मिले चंदे की जानकारी 6 मार्च तक चुनाव आयोग को देने के लिए कहा था। कोर्ट ने चुनाव आयोग से 13 मार्च तक यह जानकारी अपनी वेबसाइट पर अपलोड करने के लिए कहा था।

साथियों बात कर हम कई राज्यों में व्याप्त भ्रष्टाचार की करें तो, पीएम ने कहा था तीन बुराइयों से लड़ना समय की मांग है, भ्रष्टाचार परिवारवाद और तुष्टीकरण। भ्रष्टाचार ने दीमक की तरह अर्थव्यवस्था को नोच लिया है। भ्रष्टाचार मुक्ति इसके खिलाफ जंग पीएम के जीवन का कमिटमेंट है। उन्होंने कहा मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ता रहूंगा। इसपर मेरा मानना है कि तीन बुराइयों में सबसे खतरनाक बुराई भ्रष्टाचार है, क्योंकि यह देश के राजनीतिक, आर्थिक सामाजिक, पर्यावरण की लागत और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर प्रभाव डालती है। मेरा मानना है कि उच्च स्तरपर भ्रष्टाचार पर आम जनता पर डायरेक्ट प्रभाव नहीं पड़ता। वह बड़े लोगों, रसूख रखने वाले नेताओं, उद्योगपतियों ब्यूरोक्रेसी के लेवल पर फर्क पड़ता है,जैसे महाराष्ट्र में 100 करोड़ वसूली मुद्दा, एमपी में अनेक ब्यूरोक्रेसी के घर पर छापा चपरासी से लेकर आईएएस तक करोड़ों की तादाद में बरामदगी, नियुक्तियों में भ्रष्टाचार मुद्दा, शिक्षक भर्ती घोटाला,एक राज्य में 40 परसेंट तो अभी दूसरे राज्य में 50 पर्सेंट ठेकेदारी मुद्दे का मामला इत्यादि अनेक ऐसे मामले देश के सामने हैं। परंतु आम जनता जनार्दन का काम पटवारी से लेकर वाया तहसील कार्यालय तक और एसडीओ से लेकर कलेक्टर ऑफिस तक यही उनका जीवन का अधिकतम हिस्सा निपट जाता है और इन्हीं चार पहियों पर आम आदमी का सामर्थ्य दीमक की तरह नोच लिया जाता है जिसका अनुभव मैंने अपने जीवन में कई बार किया है और मेरे पेशे के अनुसार कई बार आम जनता को पीड़ित होते हुए देखा है।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि तू मैं और करप्शन- जमकर खाओ- फाइल दबाओ नोटों की गड्डियां पाओ।लोकसभा चुनाव 2024 की अधिसूचना जारी होने के पूर्व ही शाब्दिक बाणों का खेला!चुनावी मौसम आया-शाब्दिक बाणों से माहौल गरमाया – जनता जनार्दन को चौंकाया।

संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

दुनियां जीडीपी के दृष्टिकोण से हटकर अब मानव केंद्रित दृष्टिकोण की ओर बढ़ चली है

दुनियां जीडीपी के दृष्टिकोण से हटकर अब मानव केंद्रित दृष्टिकोण की ओर बढ़ चली है

गोंदिया

आओ मजबूत मानव श्रृंखला बनाकर मानव कल्याण कर मानवता का परिचय दें

अंतरराष्ट्रीय मंचों रूपी प्लेटफार्म से सशक्त कल्याणकारी मानवीय श्रृंखला बनाकर मानव केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना समय की मांग है – एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने 29 फरवरी 2024 को जारी आंकड़ों के मुताबिक अपने पहले अग्रिम पूर्वानुमान में,वित्त वर्ष 2024 के लिए भारत की वृद्धि 7.6 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया है, जिसका अर्थ होगा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में अपनी स्थिति बरकरार रखेगा। दिसंबर तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में बड़ा उछाल देखा गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत की जीडीपी दिसंबर तिमाही में 8.4 प्रतिशत बढ़ी। पीटीआई ने सरकारी आंकड़ों का हवाला दिया। भारत की जीडीपी में आया यह उछाल उम्मीद से कहींअधिक है।17 अर्थशास्त्रियों के मिंट पोल के अनुसार, एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था दिसंबर तक तीन महीनों के दौरान 6.6 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद थी, जो पिछली जुलाई-सितंबर तिमाही की 7.6 प्रतिशत गति से धीमी थी। नवीनतम तीसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था की वृद्धि वित्त वर्ष 23 की इसी अवधि में दर्ज 4.4 प्रतिशत से एक बड़ा कदम है।

साथियों हम अगर इसके पहले देखे तो वैश्विक स्तरपर कोरोना महामारी के दौरान करीब करीब हर देश के स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी, विज्ञान सहित अनेक तकनीकें भी पीड़ितों और मृतकों की संख्या कम नहीं कर पाई। याने सभी तथाकथित सुदृढ़ संसाधन इस महामारी के सामने पंगु नज़र आए। परंतु इसमें हमने एक बात नोट किए कि लगभग सभी देशों नें मिलकर दवाइयां, मेडिकल, मेडिकल इंस्ट्रूमेंट, खाद्य सहित अनेक क्षेत्रों की सहायता कुछल कल्याणकारी मानवीय चैन बनाकर मानव केंद्रित दृष्टिकोण अपनाकर, एक दूसरे की मदद कर रहे थे। भारत में भी करीब 150 देशों को वैक्सीन की आपूर्ति की तो भारत को भी भारी विपत्ति के समय विकसित और विकासशील देशों द्वारा मेडिकल इंस्ट्रूमेंट की मदद की गई थी। यह बात हम आज इसलिए उठा रहे हैं क्योंकि भारत में 9-10 सितंबर जी-20 शिखर सम्मेलन वसुधैव कुटुम्बकम हुआ। इसके पहले 5-7 सितंबर 2023 को आसियान शिखर सम्मेलन, 9 वा रायसीना डायलॉग 21-24 फरवरी 2024 इसके पहले जी-10, शंघाई इत्यादि शिखर सम्मेलनों सहित अनेक वैश्विक शिखर सम्मेलनों में एक बात उभर कर आई है कि मानवीय मूल्यों पर अधिक महत्व दिया जा रहा है। चूंकि भारत आदि अनादि काल से मानवीय मूल्यों की तरफदारी करता रहा है, अब इसमें चार कदम आगे बढ़कर जी-20 शिखर सम्मेलन को वसुधैव कुटुम्बकम यानें पूरा विश्व एक परिवार है की थीम बनाकर अब जीडीपी केंद्रित दृष्टिकोण से मानव केंद्रित दृष्टिकोण की ओर बढ़ने का काम जोरों पर किया जा रहा है। इसपर पूरी दुनियां को साझा दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है,जिससे वैश्विक मानव निर्मित व प्राकृतिक विपरीताओं से निपटने के लिए मजबूत मानव श्रृंखला उपाय की सटीकता को रेखांकित किया जाना चाहिए। चूंकि अब पूरी दुनियां का अब वसुधैव कुटुम्बकम पर ध्यान है इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, अंतरराष्ट्रीय मंचों रूपी प्लेटफार्मस से सशक्त कल्याणकारी मानवीय श्रृंखला बनाकर मानव केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना समय की मांग है।

साथियों बात अगर हम भारत की आदि अनादि काल से सोच और जलवायु परिवर्तन के संबंध में दृष्टिकोण की करें तो, वसुधैव कुटुम्बकम, हमारी भारतीय संस्कृति के इन दो शब्दों में एक गहरा दार्शनिक विचार समाहित है। इसका अर्थ है, पूरी दुनिया एक परिवार है।यह एक ऐसा सर्वव्यापी दृष्टिकोण है जो हमें एक सार्वभौमिक परिवार के रूप में प्रगति करने के लिए प्रोत्साहित करता है। एक ऐसा परिवार जिसमें सीमा, भाषा और विचारधारा का कोई बंधन ना हो।

साथियों बात अगर हम माननीय पीएम व्यक्त किए गए अपने विचारोंकी करें तोजलवायु परिवर्तन के कारण, खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती होगी। इससे निपटने में मोटा अनाज या श्रीअन्न से बड़ी मदद मिल सकती है। श्रीअन्न क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर को भी बढ़ावा दे रहा है। इंटरनेशनल इयर ऑफ मिलेट्स के दौरान हमने श्रीअन्न को वैश्विक स्तरपर पहुंचाया है। द डेक्कन हाई लेवल प्रिंसिपल्स ऑन फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन से भी इस दिशा में सहायता मिल सकती है।टेक्नॉलजी परिवर्तनकारी है लेकिन इसे समावेशी भी बनाने की जरूरत है। अतीत में, तकनीकी प्रगति का लाभ समाज के सभी वर्गों को समान रूप से नहीं मिला। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने दिखाया है कि कैसे टेक्नॉलजी का लाभ उठाकर असमानताओं को कम किया जा सकता है।उदाहरण के लिए, दुनियां भर में अरबों लोग जिनके पास बैंकिंग सुविधा नहीं है, या जिनके पास डिजिटल पहचान नहीं है, उन्हें डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) के माध्यम से साथ लिया जा सकता है।डीपीआई का उपयोग करके हमने जो परिणाम प्राप्त किए हैं, उन्हें पूरी दुनियां देख रही है, उसके महत्व को स्वीकार कर रही है। अब, जी-20 के माध्यम से हम विकासशील देशों को डीपीआई अपनाने, तैयार करने और उसका विस्तार करने में मदद करेंगे, ताकि वो समावेशी विकास की ताकत हासिल कर सकें। भारत में, प्राचीन काल से प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर आगे बढ़ना हमारा एक आदर्श रहा है और हम आधुनिक समय में भी क्लाइमेट एक्शन में अपना योगदान दे रहे हैं। ग्लोबल साउथ के कई देश विकास के विभिन्न चरणों में हैं और इस दौरान क्लाइमेट एक्शन का ध्यान रखा जाना चाहिए। क्लाइमेट एक्शन की आकांक्षा के साथ हमें ये भी देखना होगा कि क्लाइमेट फाइनेंस और ट्रांसफर ऑफ टेक्नॉलजी का भी ख्याल रखा जाए। हमारा मानना है कि जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए पाबंदियों वाले रवैये को बदलना चाहिए। क्या नहीं किया जाना चाहिए से हटकर ‘क्या किया जा सकता है वाली सोच के साथ आगे बढ़ना होगा। हमें एक रचनात्मक कार्यसंस्कृति पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।एक टिकाऊ और सुदृढ़ ब्लू इकॉनमी के लिए चेन्नई एचएलपी हमारे महासागरों को स्वस्थ रखने में जुटी है।

साथियों बात अगर हम माननीय पीएम के अर्थव्यवस्था और जी-20 के संबंध में विचारों की करें तो, भारत की डेमोग्राफी, डेमोक्रेसी, डाइवर्सिटी और डेवलपमेंट के बारे में किसी और से सुनना एक बात है और उसे प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करना बिल्कुल अलग है। मुझे विश्वास है कि हमारे जी-20 प्रतिनिधि इसे स्वयं महसूस करेंगे। हमारी जी-20 अध्यक्षता विभाजन को पाटने, बाधाओं को दूर करने और सहयोग को गहरा करने का प्रयास करती है। हमारी भावना एक ऐसी दुनिया के निर्माण की है, जहां एकता हर मतभेद से ऊपर हो, जहां साझा लक्ष्य अलगाव की सोच को खत्म कर दे। जी-20 अध्यक्ष के रूप में, हमने वैश्विक पटल को बड़ा बनाने का संकल्प लिया था, जिसमें यह सुनिश्चित किया गया कि हर आवाज सुनी जाए और हर देश अपना योगदान दे। मुझे विश्वास है कि हमने कार्यों और स्पष्ट परिणामों के साथ अपने संकल्प पूरे किये है। जी-20 की भारत की अध्यक्षता के दौरान, यह विचार मानव केंद्रित प्रगति के आह्वान के रूप में प्रकट हुआ है। हम वन अर्थ के रूप में, मानव जीवन को बेहतर बनाने के लिए एक साथ आ रहे हैं। हम वन फ़ैमिली के रूप में विकास के लिए एक-दूसरे के सहयोगी बन रहे हैं। और वन फ्यूचर के लिए हम एक साझा उज्जवल भविष्य की ओर एक साथ आगे बढ़ रहे हैं। भारत के लिए, जी-20 की अध्यक्षता केवल एक उच्च स्तरीय कूटनीतिक प्रयास नहीं है। मदर ऑफ डेमोक्रेसी और मॉडल ऑफ डाइवर्सिटी के रूप में हमने इस अनुभव के दरवाजे दुनिया के लिए खोल दिये हैं।आज किसी काम को बड़े स्तर पर करने की बात आती है तो सहज ही भारत का नाम आ जाता है। जी-20 की अध्यक्षता भी इसका अपवाद नहीं है। यह भारत में एक जन आंदोलन बन गया है।जी-20 प्रेसीडेंसी का हमारा कार्यकाल खत्म हुआ भारत के 60 शहरों में 200 से अधिक बैठकें आयोजित की जा चुकी है। इस दौरान हम 125 देशों के लगभग एक लाख प्रतिनिधियों की मेजबानी कर चुके है। किसी भी प्रेसीडेंसी ने कभी भी इतने विशाल और विविध भौगोलिक विस्तार को इस तरह से शामिल नहीं किया है।भारत का सबसे तेज गति से बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाना कोई आकस्मिक घटना नहीं है। हमारे सरल, व्यावहारिक और सस्टेनेबल तरीकों ने कमजोर और वंचित लोगों को हमारी विकास यात्रा का नेतृत्व करने के लिए सशक्त बनाया है। अंतरिक्ष से लेकर खेल, अर्थव्यवस्था से लेकर उद्यमिता तक, भारतीय महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं। आज महिलाओं के विकास से आगे बढ़कर महिलाओं के नेतृत्व में विकास के मंत्र पर भारत आगे बढ़ रहा है। हमारी जी-20 प्रेसीडेंसी जेंडर डिजिटल डिवाइड को पाटने, लेबर फोर्स में भागीदारी के अंतर को कम करने और निर्णय लेने में महिलाओं की एक बड़ी भूमिका को सक्षम बनाने पर काम कर रही है।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरी विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि दुनियां जीडीपी के दृष्टिकोण से हटकर अब मानव केंद्रित दृष्टिकोण की ओर बढ़ चली है।आओ मजबूत मानव श्रृंखला बनाकर मानव कल्याण कर मानवता का परिचय दें।अंतरराष्ट्रीय मंचों रूपी प्लेटफार्म से सशक्त कल्याणकारी मानवीय श्रृंखला बनाकर मानव केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना समय की मांग है:-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

दुनियां ने देखा भारत का आध्यात्मिक भाव-प्रभु श्री राम को 500 वर्षों बाद मिली मंदिर की छांव

दुनियां ने देखा भारत का आध्यात्मिक भाव-प्रभु श्री राम को 500 वर्षों बाद मिली मंदिर की छांव

गोंदिया

प्रभु श्री राम की वनवास से अयोध्या वापसी-वक्त ने अपने आप को दोहराया

प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा से प्रभु के जीवंत स्वरूप में आने के आभास से भक्तगण सराबोर हुए – एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया

वैश्विक स्तरपर 22 जनवरी 2024 सोमवार के दिन का इंतजार करते भारत ही नहीं पूरी दुनियां के भक्तों की आंखें तरस गई थी कि कब प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा मंदिर में सुखकारी रूप से होवे और हम प्रभु के जीवंत स्वरूप का दर्शन करें। बता दें कि हमारे बड़े बुजुर्गों ने ऐसा बताया है कि जब किसी भी व्यक्ति गुरु प्रभु महात्मा महामानव महापुरुष इत्यादि के स्वरूप में पूर्ण रूपेण पद्धति प्रक्रिया व धार्मिक अनुष्ठान प्राण प्रतिष्ठा की जाती है तो इसका मतलब यह माना गया है कि, उसमें उस प्राणी में प्राणों का संचार किया गया है, याने दूसरे शब्दों में अनुष्ठान कर उस स्वरूप को जीवित कर दिया जाता है जो अदृश्य रूप में होता है,मानवीय आंखों से दिख नहीं पता परंतु भक्त अगर हृदय की आंखों से देखे तो हाजरा हजूर प्रभु जरूर नजर आएंगे, बस इसी संज्ञान में प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान कर उनमें प्राणों का संचार किया गया है अब भक्तों के देखने का नजरिया है, अगर हृदय की आंखों से हम देखेंगे तो हम हाजरा हजूर प्रभु श्री राम के जीवंत दर्शन होंगे नहीं तो फिर वही कहावत कि,मानो तो मैं गंगा मां हूं ना मानो तो बहता पानी। अगर हृदय में विश्वास है तो हमें पत्थर में भी भगवान दिख जाते हैं, यदि हृदय में आस्थापूर्ण विश्वास नहीं है तो जीवंत प्रभु में भी पत्थर ही नजर आएगा ऐसी चर्चा मेरे दादाजी अक्सर अनेक मौका पर किया करते थे। जो बातें बचपनकी मैने सुनी वह आज जीवंत रूप में देख रहा हूं।पिछले कई दिनों से जिस तरह जोरदार भावपूर्ण तैयारीयों का नजारा हम मीडिया में देख रहे हैं, घर-घर व गांव, मेट्रो सिटी शहर को सजा हुआ, मैंने देखा तो रामायण में लिखी प्रभु श्री राम की वनवास से वापसी का मंजर मैं जीवंत देखने लगा, ऐसा लगा शायद हम हजारों वर्ष पूर्व की स्थिति त्रेतायुग में आ गए हैं। तब प्रभु श्री राम की 14 वर्षों के वनवास से वापसी हुई थी और संपूर्ण अयोध्या में दीपावली से भी बढ़कर माहौल था। हर व्यक्ति खुश था बस!! वही मंजर 22 जनवरी 2024 को देखा जब प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा हुई तो विश्व का हर राम भक्त खुशी से सराबोर होकर झूम उठा, मानो बस!! अब हमें प्रभु श्री राम मिल गए हैं, अब और कुछ नहींचाहिए। प्रभु दर्शन से ही हमारी सारी इच्छाएं पूर्ण हो गई है,यहभारतीयों का भाव पूरी दुनियां ने देख के कहा प्रभु श्री राम की वास्तव में वनवास से वापसी हुई है, जो 500 साल वनवास था जिसे वक्त को फिर दोहरा दिया है, चूंकि प्राण प्रतिष्ठा से पूरा विश्व सराबोर हुआ है, इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा से प्रभु के जीवंत स्वरूप में आने के आभास से भक्तगण सराबोर हुए हैं।

साथियों बात अगर हम 22 जनवरी 2024 को जोरदार ढंग से भावपूर्ण मन से मनाने की करें तो, प्राण प्रतिष्ठा में तैयारी ऐसी थी कि मानो असल दीपावली अबकी बार मनाई जाएगी। गली-चौराहों से लेकर टैक्सी, पेट्रोल पंपों और यहां तक कि घरों में भी राम धुन बज रहा है। पूजित अक्षत व निमंत्रण पत्र घर-घर पहुंचाने का असर ऐसा हो रहा है कि हर कोई खुद को इसआयोजन से सीधा जुड़ा हुआ महसूस करने लगा है। बृहस्पतिवार को शहर में प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व निकाली गई शोभा यात्रा में भारी संख्या में लोग शामिल हुए थे। भगवान राम की मनमोहक झांकी की अगुवाई में निकली यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के चलते करीब एक किमी तक केवल भगवामय राम भक्तों की टोली ही नजर आ रही थी। अयोध्या धाम में 22 जनवरी, 2024 को आयोजित श्री राम मंदिर के प्रतिष्ठापन समारोह के सुचारू और सफल संचालन के लिए अत्यधिक सावधानी के साथ व्यवस्था की गई थीं। पीएम निर्धारित अनुष्ठानों के अनुसार प्राण प्रतिष्ठा किए। इस दिनकरीब 8, हज़ार से अधिक अतिथि मंदिर मेंआए, इसके बाद 23 जनवरी से लाखों भक्त आएंगे।

साथियों बात अगर हम माता सीता के मायके जनकपुर मिथिला गांव नेपाल के खुशियों में सराबोर होने की करें तो, देवी सीता का मायका खुशी और उत्साह से भरा हुआ है। नेपाल में जनकपुरधाम में धूमधाम और उल्लास के साथ कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। जनकपुर निवासियों का कहना है कि प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन हमारे लिए भी खुशी की लहर लेकर आया है। हमने उस दिन घटनाओं की एक श्रृंखला की योजना बनाई थीं, जो सुबह शुरू हुई और दिन के अंत तक चली। सिंदूर के चूर्ण से रंगोली और फूलों से भगवान राम की तस्वीर बनाए। हम अपने घर में दीपावली भी मनाए। अयोध्या में मंदिर निर्माण से हम सभी खुश हैं। पूरा जनकपुर इससे खुश है। दीपावली मनाने के लिए तैयार लोग जनकपुर के एक सजन ने कहा, मैं व्यक्तिगत रूप से इससे काफी खुश और उत्साहित हूं।मैंनें 22 जनवरी को दीपावली मनाया और मंदिर में दीपक भी जलाए। मैं अपने दोस्तों और अन्य लोगों से 22 जनवरी को दीपावली मनाने के लिए कह कहा था। बता दें, जनकपुर धाम एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है यह भगवान राम की पत्नी देवी सीता के जन्मस्थान के रूप में प्रसिद्ध है। धार्मिक ग्रन्थों और पौराणिक कथाओं के अनुसार यह स्थान राजा जनक जो की माता सीता के पिता थे उनके राज्य मिथिला कीराजधानी हुआ करता था। यह वहीं स्थान है जहां से माता सीता प्रकट हुई थीं। इसी जगह पर जब राजा जनक खेत में हल चला रहे थे, तब उन्हें धरती से सोने का एक सुंदर संदूक या कलश मिला जिसमें देवी सीता थी। देवी सीता के मायके में उत्सव के बीच, शहर भर के लाउड स्पीकर जय श्री राम के नारे के साथ-साथ राम लला को समर्पित गीतों की सार्वजनिक स्क्रीनिंग के साथ गूंज रहे हैं। जनकपुर में रेलवे स्टेशन के बगल में स्थित महाबीर मंदिर मेंशनिवार को अस्ताजाम शुरू हुआ, जिसमें चौबीसों घंटे राम भजनों का जाप किया गया। भक्तों ने राम के नारे लिखे स्कार्फ को पहना। जनकपुर में अस्तजाम के भक्तों और आयोजकों में से एक कमल हाथी ने कहा, भगवान हनुमान के बिना, भगवान राम कहीं नहीं जाएंगे, इसलिए हमने अष्टजाम का तीन दिवसीय कार्यक्रम शुरू किया है, जो चौबीसों घंटे चलता है। 22 जनवरी को हम हनुमान आराधना किए। इस दौरान 12 बार हनुमान चालीसा का पाठ किए और बाद में शाम को हम तेल से भरे मिट्टी के दीपक जलाएंगे।

साथियों बात अगर हम 23 जनवरी 2024 से आम भक्तों के अयोध्या यात्रा के लिए गाइडेंस की करें तो, बता दें किदर्शनार्थियों के लिए अयोध्या में पूरी व्यवस्था की गई है। 22 जनवरी के बाद आने वाले दिनों में दर्शनार्थियों के लिए व्यवस्थाएं हैं। अगर आप लखनऊ-गोरखपुर हाइवे के रास्ते अयोध्या में प्रवेश करेंगे तो सरयू पुल से पहले आपको जो मार्ग मिलेगा, उसका नाम धर्मपथ है। इसी रास्ते से अयोध्या में एंट्री होगी। इसके बाद लगभग 2 किलोमीटर सफर करने पर लता मंगेशकर चौक मिलेगा, जिसे नया घाट भी कहते हैं. इसके ठीक सामने राम की पैड़ी है और इसके किनारे मंदिरों की लंबी खूबसूरत श्रृंखला है।राम की पैड़ी के किनारे ही अति प्राचीन और प्रतिष्ठित मंदिर नागेश्वर नाथ भी है। अयोध्या पहुंचने वाले लोग यहां भोलेनाथ के दर्शन जरूर करते हैं। सरयू की जलधारा राम की पैड़ी से होकर वापस सरयू में मिल जाती है. इसके किनारे सरयू का तट दिखाई देगा, जहां आप नौकायन और मोटर बोट का आनंद उठा सकते हैं। राम की पैड़ी का लुत्फ लेने के बाद जब आप वापस लता मंगेशकर चौक पहुंचेंगे तो अयोध्या की राजकुमारी का पार्क देख सकते हैं, जिन्हें दक्षिण कोरिया में रानी के नाम से जाना जाता है। राजकुमारी का पार्क इसी नाम से है। दक्षिण कोरिया में उनकी शादी कर्क वंश के राजकुमार से हुई थी। आज दक्षिण कोरिया की बड़ी आबादी इसी वंश की है। हनुमानगढ़ी के बगल में ही दशरथ महल और कनक भवन मंदिर है। कनक भवन मंदिर के बारे में मान्यता है कि माता सीता को कैकई ने मुंह दिखाई में यह सोने का महल दिया था। श्री राम जन्मभूमि मंदिर जाने के लिए दशरथ महल के पास से भी रास्ता है और हनुमानगढ़ी के रास्ते बाहर निकलकर राम पथ के जरिए भी आप श्री राम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य मार्ग पर पहुंच सकते हैं। जन्मभूमि पथ से प्रवेश करते ही बाएं तरफ आपको ट्रस्ट सुविधा केंद्र मिलेगा, जहां सामान रखने के लिए मुफ्त लॉकर , स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। अगर किसी को चलने में असुविधा है तो सहायक के साथ उसे पहुंचाने की भी व्यवस्था है। यहीं पर मंदिर में दोपहर और सायंकाल आरती का पास भी मिल जाता है।
साथियों बात अगर हम दूरदर्शन मीडिया से सीधा प्रसारण करने की करें तो, सीधा प्रसारण समारोह के सीधे प्रसारण के लिए व्यापक व्यवस्था की गई । दूरदर्शन पूरे कार्यक्रम का डीडी न्यूज और डीडी नेशनल चैनलों पर 4के गुणवत्ता में सीधा प्रसारण किया। 23 जनवरी, 2024 को दूरदर्शन आरती और जनता के लिए श्री राम मंदिर खुलने का सीधा प्रसारण करेगा। दूरदर्शन 22.01.24 को एएनआई टीवी और पीटीआई वीडियो के साथ अयोध्या में कार्यक्रम की क्लीन फ़ीड साझा किया। सभी टीवी चैनल जो एजेंसी के ग्राहक हैं वे वहां से फ़ीड प्राप्त कर सकते हैं।अन्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रसारकों के लिए, क्लीन फ़ीड की कुंजी के साथ एक यूट्यूब लिंक तैयार किया गया है। यह लिंक संबंधित प्रसारकों के अनुरोध पर उनके साथ साझा किया जाएगा। यूट्यूब लिंक प्राप्त करने के लिए, घरेलू प्रसारक पत्र सूचना कार्यालय के पास अपना अनुरोध भेज सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय टीवी चैनलों को अपना अनुरोध सीधे प्रसार भारती से करना होगा। संपर्क विवरण पीआईबी मीडिया एडवाइजरी में उपलब्ध हैं, जिसे यहां देखा जा सकता है।यदि क्लीन फ़ीड की आवश्यकता नहीं है, तो चैनलों के पास डीडी न्यूज़ से पैचिंग का भी विकल्प होगा। इस मामले में सौजन्य : दूरदर्शन दिया जा सकता है।

साथियों बात अगर हम दिए सहित खुशियां मनाने की करें तो, 22 जनवरी को अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के बाद शाम को पूरा शहर 10 लाख दीयों की चमक से जगमगाएगा। सरकार की अपील पर घरों, दुकानों, धार्मिक स्थलों से है। दीपों से रौशन होंगे निजी संस्थान सरकार ने पूरे प्रदेश से इस ऐतिहासिक अवसर को उत्सव के रूप में मनाने की अपील की है।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि दुनियां ने देखा भारत का आध्यात्मिक भाव-प्रभु श्री राम को 500 वर्षों बाद मिली मंदिर की छांव।प्रभु श्री राम की वनवास से अयोध्या वापसी-वक्त ने अपने आप को दोहराया।प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा से प्रभु के जीवंत स्वरूप में आने के आभास से भक्तगण सराबोर हुए।

संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

दुनियां भर में पहली बार अभूतपूर्व ऐतिहासिक राम नाम की गूंज-आध्यात्मिक अस्था बढ़ी

दुनियां भर में पहली बार अभूतपूर्व ऐतिहासिक राम नाम की गूंज-आध्यात्मिक अस्था बढ़ी

गोंदिया

श्री राम जय राम जय जय राम

वैश्विक स्तरपर दुनियां के अधिकतम देश राम नाम के घोष से सराबोर हुए – एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया

वैश्विक स्तरपर पिछले 500 वर्षों से शायद ही ऐसा कभी कोई पल आया होगा जिसका आज भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनियां के करीब करीब हर देश में ऐसा अलौकिक उत्साह का माहौल प्रतीत हुआ है। आज भारत का शायद ही कोई नगर शहर ऐसा होगा जहां राम नाम का नगाड़ा ना बजा हो, प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा से सराबोर होकर चारों तरफ श्री राम जय राम जय जय राम की भाव भक्ति से आराधना की जा रही है। बता दें ध्यान 20 और 21 जनवरी 2024 को दर्शन के लिए मंदिर परिसर में आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। 22 जनवरी से यह सब खुल जाएंगे। मैंने अपनी चावल नगरी गोंदिया में एक ग्राउंड रिपोर्टिंग कर 85 प्लस बुजुर्गों से बात की तो उन्होंने बताया हमने इन 85 वर्षों में कभी भी ऐसा माहौल नहीं देखा मेरा मानना है की पूरी दुनियां में ऐसा कोई भी क्षण नहीं आया होगा जितना उत्साह आज दुनियां में अधिकतम देशों में दिख रहा है। हर देश में मूल भारतीयों द्वारा जश्न मनाया जा रहा है। हमारी छोटी सी राइससिटी गोंदिया नगरी में भी पूरा नगर राम नाम के गूंज से सराबोर हो उठा है।चारों तरफ राम नाम के बैनर झंडा फूलों के हर गली चौराहे पर प्रभु श्री राम के स्वागत में गेट रंग-बिरंगे पोस्टर से लबालब दिख रहा है और प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा से हर देशवासी का सीना गर्व से ऊंचा हो गया है, चूंकि पूरे देश में श्री राम जय राम जय जय राम की गूंज हो रही है इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, वैश्विक स्तरपर दुनियां में अधिकतम देश राम नाम की गूंज से सराबोर हुए।

साथियों बात अगर हम प्राण प्रतिष्ठा पर हर देशवासी के गौरवन्वित होने की करें तो, अयोध्या में भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर हर नागरिक गौरवान्वित है। इसके लिए कई साधु-संतों ने वर्षों से मौन व्रत रखकर तपस्या की तो कइयों ने अपने प्राणों की आहुति दी। मंदिर निर्माण और मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा पर कोई अपना मौन व्रत खोलेगा तो कोई प्रभु श्रीराम का जयघोष करेगा। धर्म गुरु बोले कि यह दिन भारत और दुनिया भर के लिए ऐतिहासिक है। पूरा देश राममय हो गया है। भगवान श्रीराम हर व्यक्ति के प्रेरणा स्रोत हैं। श्री राम भारत के प्रभात का प्रथम स्वर हैं। देश की उच्चता व दिव्यता देखनी हो तो प्रभु श्री राम में वह दृष्टिगोचर होती है। भारत के लिए ऐतिहासिक दिन है। इस दिन के लिए संतों और आम जनमानस ने अपने प्राणों की आहुति दी है। देश में स्वर्णिम इतिहास लिखा जा रहा है। यह दिन महादीपावली का है। हिंदू समाज खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है।

साथियों बात अगर हम अयोध्या सहित पूरा देश राम नाम राम में सराबोर होने की करें तो भगवान राम के विग्रह के प्राण प्रतिष्ठा हैं, लेकिन अयोध्या समेत पूरा देश राममय है। यूपी ही नहीं दूसरे प्रांतों से आने वाले लोगों के परिधान भी राममय हो गया है। आलम यह है कि हर शहर में प्राण प्रतिष्ठा आस्था और संस्कृति के प्रतीक बन गया है। राम लला की प्राण प्रतिष्ठा की गूंज अयोण्या में भव्य रूप से हो रही है वहीं दूसरे शहरों के मंदिरों में भी पूजा अर्चना का दौर शुरू हो गया है। बाजार भी लोगों के उत्साह और उल्लास को कैश करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। बाजार में रामनामी वस्त्रों की भरमार है। श्री राम लिखे कुर्ते-गमछे से लेकर राम मंदिर प्रिंट वाली साड़ियों की जमकर बिक्री हो रही है। लोग 22 जनवरी को होने वाले आयोजनों में पहनने के लिए इन रामनामी वस्त्रों को खरीद रहे हैं।अयोध्या में भव्य राम मंदिर में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के दिन 22 जनवरी को आस्था में सराबोर लोग दिवाली से बड़ी दीपावली मनाई जा रही है। यूपी का माहौल कुछ इस तरह है कि हर गली और नुक्कड़ राममय हो चुका है। घरों मोहल्लों और आसपास के मंदिरों को सजाने के साथ ही परिवार भर के लिए नए कपड़े खरीदे जा रहे हैं। पुरुष और महिलाएं सभी उल्लास के साथ रामलला के स्वागत कार्यक्रमों की तैयारियों में जुटे हैं। पुरुषों के साथ महिलाओं ने भी बहुत खुशी और उमंग हैं। उनकी खास डिमांड पर बाजार में रामनामी सिल्क की साड़ियां भी आ गईं हैं। इस पर राम मंदिर की आकृति उकेरी गई है। वहीं पुरुष भी भगवा रंग के पोशाक में दिखने को तैयार हैं।उधर जानकी की जन्मस्थली सीतामगढ़ी में भी धूम मची हुई है। अयोध्या में 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दिन जानकी जन्मस्थली सीतामढ़ी में भी रामोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। जिले के मठ मंदिरों, नदी तट, सीताकुण्ड में महाआरती, अलौकिक दीपावली व धार्मिक स्थलों को सजाने की तैयारी चल रही है। धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थलों पर विशेष साफ-सफाई की जा रही है। पुनौराधाम, जानकी स्थान, हलेश्वर स्थान, पंथपाखर आदि तीर्थ क्षेत्रों में उत्सव की तैयारी है। नगर निगम ने भी सात दिवसीय स्वच्छ तीर्थ कैंपेन चला कर धर्म स्थलों के आसपास साफ-सफाई करवा रहा है। श्री जानकी प्राकट्य स्थली तीर्थ क्षेत्र के बैनर तले होनेवाले कार्यक्रम में शहर की साफ-सफाई के बाद रंग अबीर से रंगोली व मार्गों की सजावट की जाएगी। जानकी स्थान के उर्विजा कुण्ड को फूलों से सजाया जाएगा। पूरे शहर को सजाने की योजना है। शहर की साफ-सफाई व सजाने के साथ प्रवचन व संगीत के लिए साउंड व अयोध्या से सीधा प्रसारण के लिए जगह-जगह बड़ी स्क्रीन लगाई है। शहर में रामोत्सव को आयोजन होगा। पूजा-अर्चना के साथ उस दिन अलौकिक दीपावली मनायी जाएगी। भजन-कीर्तन का भी आयोजन होगा। पुनौराधाम में प्रभु की प्राण-प्रतिष्ठा के दिन सीता कुंड पर महाआरती होगी। पूरे तीर्थ क्षेत्र को 51 हजार दीपों से सजाकर दीपोत्सव मनाया जाएगा। महंत कौशल किशोर दास के नेतृत्व में कार्यक्रम की तैयारी जोरों पर चल रही है। श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण से हर जगह खुशी का माहौल है। 22 जनवरी को अयोध्या में आयोजित समारोह को देखने के लिए सभी धर्म स्थलों व सार्वजनिक स्थलों पर बड़ी स्क्रीन लगायी है। इसके लिए रजत द्वार जानकी मंदिर, पुनौराधाम, महावीर स्थान व देवी मंदिरों में जगह चिह्नित की गई है। जिले के लोगों को रामजन्म भूमि के विकास के बाद जानकी जन्म स्थली के विकास की आस जगी है। लोग कहते हैं बिन सिया बिन राम भी अधूरे हैं। अयोध्या से मिथिला के लिए आनंद विहार दरभंगा वाया अयोध्या वसीतामढ़ी ट्रेन के उद्घाटन के मौके पर जिस तरह प्रधानमंत्री सीतामढ़ी के साधु-संतों से रू-ब-रू हुए थे।

साथियों बात अगर हम 5 अगस्त 2020 को प्रभु श्री राम मंदिर के भूमि की पूजन के अवसर पर माननीय पीएम के संबोधन की आज के परिपेक्ष में हकीकत को देखें तो उन्होंने उसे समय कहा था, राम काजु कीन्हे बिनु मोहि कहाँ बिश्राम॥भारत,आज भगवान भास्कर के सानिध्य में सरयू के किनारे एक स्वर्णिम अध्याय रच रहा है। कन्याकुमारी से क्षीरभवानी तक, कोटेश्वर से कामाख्या तक, जगन्नाथ से केदारनाथ तक, सोमनाथ से काशी विश्वनाथ तक, सम्मेद शिखर से श्रवणबेलगोला तक, बोधगया से सारनाथ तक, अमृतसर से पटना साहिब तक, अंडमान से अजमेर तक, लक्ष्यद्वीप से लेह तक, आज पूरा भारत,राममय है। पूरा देश रोमांचित है, हर मन दीपमय है। आज पूरा भारत भावुक भी है। सदियों का इंतजार आज समाप्त हो रहा है। करोड़ों लोगों को आज ये विश्वास ही नहीं हो रहा कि वो अपने जीते-जी इस पावन दिन को देख पा रहे हैं। जैसे पत्थरों पर श्रीराम लिखकर रामसेतु बनाया गया, वैसे ही घर-घर से, गांव-गांव से श्रद्धापूर्वक पूजी शिलाएं, यहां ऊर्जा का स्रोत बन गई हैं। देश भर के धामों और मंदिरों से लाई गई मिट्टी और नदियों का जल, वहां के लोगों, वहां की संस्कृति और वहां की भावनाएं, आज यहां की शक्ति बन गई हैं। वाकई, ये न भूतो न भविष्यति है। भारत की आस्था, भारत के लोगों की सामूहिकता की ये अमोघ शक्ति, पूरी दुनिया के लिए अध्ययन का विषय है,शोध का विषय है। दीन दयाल बिरिदु संभारी’।यानि जो दीन है, जो दुखी हैं, उनकी बिगड़ी बनाने वाले श्रीराम हैं।जीवन का ऐसा कोई पहलू नहीं है, जहां हमारे राम प्रेरणा न देते हों। भारत की ऐसी कोई भावना नहीं है जिसमें प्रभु राम झलकते न हों। भारत की आस्था में राम हैं, भारत के आदर्शों में राम हैं! भारत की दिव्यता में राम हैं, भारत के दर्शन में राम हैं! हजारों साल पहले वाल्मीकि की रामायण में जो राम प्राचीन भारत का पथ प्रदर्शन कर रहे थे, जो राम मध्ययुग में तुलसी, कबीर और नानक के जरिए भारत को बल दे रहे थे, वही राम आज़ादी की लड़ाई के समय बापू के भजनों में अहिंसा और सत्याग्रह की शक्ति बनकर मौजूद थे! तुलसी के राम सगुण राम हैं, तो नानक और कबीर के राम निर्गुण राम हैं! हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है-न्राम सदृशो राजा, प्रथिव्याम् नीतिवान् अभूत॥ यानि कि, पूरी पृथ्वी पर श्रीराम के जैसा नीतिवान शासक कभी हुआ ही नहीं! श्रीराम की शिक्षा है- नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना॥ कोई भी दुखी न हो, गरीब न हो। श्रीराम का सामाजिक संदेश है- प्रहृष्ट नर नारीकः,समाज उत्सव शोभितः॥ नर-नारी सभी समान रूप से सुखी हों। श्रीराम का निर्देश है- कच्चित् ते दयितः सर्वे, कृषि गोरक्ष जीविनः। किसान, पशुपालक सभी हमेशा खुश रहें। श्रीराम का आदेश है कश्चिद्वृद्धान्चबालान्च, वैद्यान् मुख्यान् राघव। त्रिभि: एतै: वुभूषसे॥ बुजुर्गों की,बच्चों की, चिकित्सकों की सदैव रक्षा होनी चाहिए। श्रीराम का आह्वान है- जौंसभीत आवासरनाई रखिहं उताहिप्रानकीनाई॥ जो शरण में आए ,उसकी रक्षा करना सभी का कर्तव्य है। श्रीराम का सूत्र है- जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी॥ अपनी मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर होती है। और भाइयों और बहनों, ये भी श्रीराम की ही नीति है- भयबिनुहोइन प्रीति॥ इसलिए हमारा देश जितना ताकतवर होगा, उतनी ही प्रीति और शांति भी बनी रहेगी।


अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि श्री राम जय राम जय जय राम।दुनियां भर में पहली बार अभूतपूर्व ऐतिहासिक राम नाम की गूंज-आध्यात्मिक अस्था बढ़ी।वैश्विक स्तरपर दुनियां के अधिकतम देश राम नाम के घोष से सराबोर हुए।

संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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