फ़िर पेपर लीक: अंदरूनी विश्वासघात- घर का भेदी लंका ढाए -युवाओं के भविष्य की चोरी या व्यवस्था की सबसे बड़ी विफ़लता व कमजोरी?

फ़िर पेपर लीक: अंदरूनी विश्वासघात- घर का भेदी लंका ढाए -युवाओं के भविष्य की चोरी या व्यवस्था की सबसे बड़ी विफ़लता व कमजोरी?

लाखों अभ्यर्थियों की तैयारी, यात्रा, मानसिक तनाव और भविष्य एक झटके में अधर में लटक जाना,पूरे देश की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।

प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों, मॉडरेटरों और संबंधित अधिकारियों क़ो भी केंद्रीय बजट तैयार करने वाली टीम की तरह एग्जाम होने तक पूर्ण गोपनीय वातावरण में रखने की तात्कालिक आवश्यकता।

गोंदिया/महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर घर का भेदी लंका ढाए,यह कहावत आज भारत की परीक्षा प्रणाली पर पहले से कहीं अधिक सटीक बैठती दिखाई देती है। कभी पानी की पाइपलाइन,गैस लाइन या टैंकर लीक होने की खबरें चर्चा का विषय होती थीं, लेकिन आज लीक शब्द सुनते ही लोगों के मन में पहला प्रश्न आता है, आज किस परीक्षा का पेपर लीक हुआ? यह स्थिति किसी भी लोकतांत्रिक और ज्ञान- आधारित समाज के लिए अत्यंत चिंताजनक है। किसी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होना केवल एक प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के वर्षों के परिश्रम, सपनों और भविष्य की खुली चोरी है। जब एक विद्यार्थी दिन-रात मेहनत करके परीक्षा केंद्र तक पहुंचता है और अंतिम क्षणों में परीक्षा रद्द या स्थगित कर दी जाती है, तो उसका केवल समय और धन ही नहीं, बल्कि व्यवस्था पर विश्वास भी टूटता है। महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (महा टेट 2026) का परीक्षा से ठीक पहले स्थगित होना इसी गहरी बीमारी का सटीक ताजा उदाहरण है।महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा रविवार 28 जून 2026 को आयोजित थी, किंतु एक दिन पहले ठाणे के भिवंडी क्षेत्र में पुलिस द्वारा पेपर लीक रैकेट का भंडाफोड़ किए जाने के बाद सरकार को परीक्षा तत्काल स्थगित करनी पड़ी। प्रारंभिक जांच में वास्तविक प्रश्नपत्र आरोपियों के पास मिलने की पुष्टि ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह कोई अफवाह नहीं, बल्कि संगठित अपराध था। लाखों अभ्यर्थियों की तैयारी,यात्रा, मानसिक तनाव और भविष्य एक झटके में अधर में लटक गया। यह घटना केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब राष्ट्रीय स्तर पर पेपर लीक की घटनाओं के बाद परीक्षा प्रणाली को लीक-प्रूफ बनाने के दावे किए गए थे,तब फिर ऐसी घटनाएं कैसे हो रही हैं? यदि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो चुकी है,तो प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले अपराधियों तक कैसे पहुंच गया?इसका उत्तर केवल तकनीकी कमजोरी में नहीं, बल्कि व्यवस्था के भीतर मौजूद मानवीय भ्रष्टाचार और संस्थागत मिलीभगत में छिपा है। पेपर लीक की लगभग हर बड़ी घटना यह संकेत देती है कि यह केवल बाहरी अपराधियों का काम नहीं होता। प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर मुद्रण, पैकेजिंग, परिवहन, सुरक्षित भंडारण और वितरण तक अनेक चरण होते हैं। इनमें किसी भी स्तर पर यदि कोई व्यक्ति धन, प्रभाव या लालच के कारण गोपनीयता तोड़ देता है, तो पूरी सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो जाती है। इसलिए यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि अधिकांश पेपर लीक बाहरी हमला नहीं, बल्कि अंदरूनी विश्वासघात होते हैं। वास्तव में घर का भेदी लंका ढाए वाली स्थिति ही इस समस्या का मूल है।

साथियों, महाराष्ट्र मामले की जांच में सामने आए तथ्यों ने भी इसी ओर संकेत किया। पुलिस को गुप्त सूचना मिलने के बाद अंडरकवर ऑपरेशन चलाया गया। अधिकारियों ने स्वयं को पेपर खरीदने वाला ग्राहक बताकर आरोपियों से संपर्क किया और दो दिनों तक उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखी। बड़ी धनराशि का लालच देकर सौदे के लिए बुलाया गया और जैसे ही प्रश्नपत्र सौंपा गया, तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच में दिल्ली सहित कई राज्यों तक फैले अंतरराज्यीय नेटवर्क के संकेत मिले, जिसके बाद विशेष जांच दल ने विभिन्न राज्यों में जांच शुरू की। इससे स्पष्ट है कि पेपर लीक अब छोटे स्तर का अपराध नहीं रहा, बल्कि यह करोड़ों रुपये के संगठित आपराधिक नेटवर्क का रूप ले चुका है।आज डिजिटलतकनीक ने जहां सुविधाएं बढ़ाई हैं, वहीं अपराधियों को भी नए माध्यम उपलब्ध करा दिए हैं। व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और अन्य एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म पर कुछ ही मिनटों में प्रश्नपत्र हजारों लोगों तक पहुंच सकता है। इसलिए केवल प्रिंटिंग प्रेस की सुरक्षा पर्याप्त नहीं है। साइबर सुरक्षा, डिजिटल निगरानी और डेटा सुरक्षा को भी समान महत्व देना होगा। यदि डिजिटल चैनल सुरक्षित नहीं होंगे, तो कोई भी गोपनीय दस्तावेज सुरक्षित नहीं रह सकता।
साथियों, पेपर लीक का सबसे बड़ा नुकसान केवल परीक्षा स्थगित होना नहीं है। इसका सबसे गंभीर प्रभाव युवाओं के मनोविज्ञान पर पड़ता है। वर्षों की मेहनत करने वाला छात्र स्वयं को ठगा हुआ महसूस करता है। वह सोचने लगता है कि मेहनत से अधिक महत्व पैसे, पहुंच और भ्रष्ट नेटवर्क का है। यह भावना प्रतिभाशाली युवाओं में निराशा, अविश्वास और मानसिक तनाव को जन्म देती है। यदि यह स्थिति लगातार बनी रही,तोइसका प्रभाव केवल शिक्षा पर नहीं, बल्कि देश की प्रशासनिक गुणवत्ता,सामाजिक विश्वास और आर्थिक विकास पर भी पड़ेगा।भारत के लिए यह समय केवल अपराधियों की गिरफ्तारी तक सीमित रहने का नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली के पुनर्गठन का है। केवल पेपर लीक होने के बाद एसआईटी बनाना और कुछ गिरफ्तारियां करना पर्याप्त समाधान नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिसमें पेपर लीक होना तकनीकी और प्रशासनिक रूप से लगभग सटीकता से असंभव हो जाए।
साथियों, इस संदर्भ में विश्व के अनेक देशों ने अत्यंत प्रभावी मॉडल विकसित किए हैं, जिनसे भारत महत्वपूर्ण सीख ले सकता है। चीन की राष्ट्रीय विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा “गाओकाओ” को दुनिया की सबसे सुरक्षित परीक्षाओं में माना जाता है। वहां प्रश्नपत्रों को राष्ट्रीय गोपनीय दस्तावेज का दर्जा प्राप्त है। प्रश्नपत्रों की छपाई अत्यधिक सुरक्षित परिसरों में होती है और उनका परिवहन बख्तरबंद वाहनों, जीपीएस ट्रैकिंग, वीडियो निगरानी तथा सशस्त्र सुरक्षा के बीच किया जाता है। परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन, फेस रिकग्निशन, एआई कैमरे, रेडियो जैमर और इलेक्ट्रॉनिक डिटेक्शन सिस्टम का उपयोग किया जाता है। वहां पेपर लीक केवल अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के विरुद्ध गंभीर अपराध माना जाता है।अमेरिका ने एक अलग रास्ता अपनाया है। वहां विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षाओं में तेजी से डिजिटल प्रणाली लागू की गई है। प्रश्नपत्रों की लंबी अवधि तक भौतिक रूप में उपलब्धता समाप्त कर दी गई है। परीक्षा शुरू होने के ठीक पहले एन्क्रिप्टेड माध्यम से प्रश्न उपलब्ध कराए जाते हैं। विशेष लॉकडाउन सॉफ्टवेयर के कारण परीक्षार्थी अन्यवेबसाइट स्क्रीनशॉट या बाहरी एप्लिकेशन का उपयोग नहीं कर सकता।इससे पारंपरिक पेपर लीक की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है।ऑस्ट्रेलिया ने भी ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली को वैज्ञानिक तरीके से विकसित किया है। वहां लॉकडाउन ब्राउज़र, प्रश्नों का अलग-अलग क्रम, एआई आधारित निगरानी तथा अधिकृत अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही सुनिश्चित की गई है। यदि कोई अधिकारी सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन करता है, तो उसके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई होती है।दक्षिण कोरिया का मॉडल विशेष रूप से उल्लेखनीय है। वहां राष्ट्रीय परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करने वाले शिक्षकों और विशेषज्ञों को परीक्षा समाप्त होने तक बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग रखा जाता है। उनके मोबाइल, इंटरनेट और बाहरी संपर्क बंद कर दिए जाते हैं। यह व्यवस्था कठोर अवश्य है, किंतु प्रश्नपत्र की गोपनीयता सुनिश्चित करने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुई है।

साथियों, यहीं पर भारत के लिए एक व्यावहारिक सुझाव भी सामने आता है। जिस प्रकार केंद्रीय बजट तैयार करने वाली टीम को बजट प्रस्तुत होने तक पूर्ण गोपनीय वातावरण में रखा जाता है, उसी प्रकार प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों, मॉडरेटरों और संबंधित अधिकारियों के लिए भी सीमित अवधि का नियंत्रित एवं सुरक्षित वातावरण बनाया जा सकता है।यह व्यवस्था केवल उच्च जोखिम वाली राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय परीक्षाओं के लिए लागू की जा सकती है। इससे प्रश्नपत्र निर्माण के दौरान बाहरी संपर्क और संभावित लीक की संभावना काफी कम हो सकती है। हालांकि केवल मानव नियंत्रण पर्याप्त नहीं होगा। अब समय आ गया है कि प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर परीक्षा केंद्र तक प्रत्येक चरण का पूर्ण डिजिटलीकरण किया जाए। ब्लॉकचेन जैसी तकनीक दस्तावेजों की सुरक्षा और प्रत्येक गतिविधि का अपरिवर्तनीय रिकॉर्ड रखने में सहायक हो सकती है। यदि प्रत्येक एक्सेस, डाउनलोड, प्रिंट और ट्रांसफर का डिजिटल लॉग सुरक्षित रहेगा, तो किसी भी स्तर पर जिम्मेदारी तय करना आसान होगा।
साथियों, इसके साथ ही परीक्षा प्रक्रिया में जीरो ट्रस्ट सिक्योरिटी मॉडल अपनाने की आवश्यकता है।अर्थात कोई भी व्यक्ति केवल पद के आधार पर पूर्ण विश्वास का पात्र न माना जाए।प्रत्येक चरण में बहुस्तरीय प्रमाणीकरण डिजिटल ऑडिट और स्वतंत्र निगरानी अनिवार्य होनी चाहिए। संवेदनशील कार्यों में एकल व्यक्ति के बजाय बहु-अधिकारी प्रणाली अपनाई जानी चाहिए ताकि कोई अकेला व्यक्ति पूरीe प्रक्रिया से समझौता न कर सके।कानूनी स्तर पर भी व्यापक सुधार आवश्यक हैं। वर्तमान व्यवस्था में कई मामलों में जांच लंबी चलती है और दोषियों को वर्षों तक सजा नहीं मिलती। इससे अपराधियों में भय पूरी तरह से समाप्त हो जाता है।

साथियों, पेपर लीक को केवल सामान्य आपराधिक कृत्य नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और राष्ट्रीय संसाधनों के विरुद्ध संगठित आर्थिक अपराध के रूप में देखा जाना चाहिए। इसके लिए विशेष कानून, अनिवार्य संपत्ति जब्ती आजीवन परीक्षा प्रतिबंध, सरकारी सेवा से स्थायी निष्कासन और फास्ट-ट्रैक न्यायालयों में समयबद्ध सुनवाई जैसी व्यवस्थाएं लागू की जानी चाहिए।परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही भी स्पष्ट होनी चाहिए।यदिकिसी एजेंसी की लापरवाही सिद्ध होती है,तो केवल निचलेस्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों की भी व्यक्तिगत जवाबदेही तय करनी होगी।जब तक जवाबदेही ऊपर तक नहीं पहुंचेगी, तब तक सुधार केवल कागजों तक सीमित रहेगा।

साथियों, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि देश को अपने युवाओं का विश्वास वापस जीतना होगा।प्रत्येक पेपर लीक केवल एक परीक्षा रद्द नहीं करता, बल्कि यह संदेश देता है कि व्यवस्था अभी भी ईमानदार प्रतिभा की पूरी तरह रक्षा नहीं कर पा रही है। यदि यह विश्वास टूट गया, तो इसका प्रभाव आने वाले दशकों तक सटीकता से दिखाई देगा।आज आवश्यकता केवल नई घोषणाओं की नहीं, बल्कि कठोर क्रियान्वयन की है। भारत के पास तकनीक भी है, प्रशासनिक क्षमता भी और वैश्विक उदाहरण भी। अब आवश्यकता राजनीतिक इच्छाशक्ति,संस्थागत ईमानदारी और शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाने की है। यदि प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर परिणाम घोषित होने तक प्रत्येक चरण को वैज्ञानिक, पारदर्शी, डिजिटल और जवाबदेह बनाया जाए, तो पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि यह समझना होगा कि परीक्षा केवल अंक प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य का चयन तंत्र है। यदि यही व्यवस्था भ्रष्ट हो जाएगी, तो प्रशासन, शिक्षा, न्याय और विकास की पूरी नींव कमजोर पड़ जाएगी। इसलिए पेपर लीक के विरुद्ध संघर्ष केवल परीक्षा बचाने का अभियान नहीं, बल्कि युवा प्रतिभा, सामाजिक न्याय और भारत के भविष्य की रक्षा का राष्ट्रीय संकल्प होना चाहिए। तभी प्रत्येक विद्यार्थी यह विश्वास कर सकेगा कि उसकी सफलता का आधार केवल उसकी मेहनत होगी, किसी लीक हुए प्रश्नपत्र या भ्रष्ट नेटवर्क का प्रभाव नहीं।

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

दो दिनों से लापता 21 वर्षीय युवक सूरज मार्डी का शव गांव के डैम से बरामद क्षेत्र में फैली सनसनी।

दो दिनों से लापता 21 वर्षीय युवक सूरज मार्डी का शव गांव के डैम से बरामद क्षेत्र में फैली सनसनी।

मृतक की मां ने हत्या की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

सरायकेला-खरसावां

( सोनू कुमार सिंह )

सरायकेला खरसावां जिले में हुए एक और मौत ने पूरे गांव वालों को झंकझोर कर रख दिया है। जिस बेटे को मां दो दिनों से ढूंढ रही थी उसी बेटे की लाश डैम से बरामद होने पर उस मां के दिल पर क्या गुजरी है उस मां के दिल में कितनी पिड़ा है इस बात का अंदाजा आप और हम नहीं लगा सकते।

जि हां साथियों ऐसा ही एक मामला सरायकेला खरसावां जिले के सरायकेला थाना क्षेत्र के दावना गांव से सामने आई है जहां पर दो दिनों से लापता 21 वर्षीय युवक सूरज मार्डी का शव शुक्रवार को गांव के डैम से बरामद किया गया है। वहीं नौजवान युवक के 2 दिनों से लापता होने के बाद उसके शव का गांव के ही डैम से बरामद होने पर पूरे इलाके में सनसनी फैल गयी है एक नौजवान की मौत ने पूरे गांव वालों के दिलों को झंकझोर कर रख दिया है

वहीं इस पूरे मामले की सूचना स्थानीय थाना को दी गई इसके बाद सूचना मिलते ही सरायकेला थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और करीब 1 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद दोपहर लगभग 12:30 बजे सूरज मार्डी के शव को डैम से बाहर निकल गया और आगे की कार्रवाई के लिए शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया।

मृतक की मां ने बेटे की मौत को संदिग्ध बताते हुए हत्या की आशंका जताई है. उनका कहना है कि यह सामान्य डूबने की घटना नहीं है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. घटना के बाद गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है. थाना प्रभारी विनय कुमार ने बताया कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. प्रथम दृष्टया मामला डूबने से मौत का प्रतीत होता है, हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट पता चल सकेगा. फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.

घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार सूरज मार्डी 24 जून को गांव के ही डैम में मछली पकड़ने गया था. और उस वक्त सूरज मार्डी के साथ कुछ अन्य युवक भी मौजूद थे. लेकिन डैम से सभी अन्य युवक वापस अपने घर को लौट आए लेकिन सूरज मार्डी वापस अपने घर को नहीं लौटा, जिससे परिजनों ने उसकी तलाश शुरू कर दी. शुक्रवार सुबह ग्रामीणों ने डैम में शव तैरता देखा। इसके बाद से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ पड़ी है।

जिले में फैलता जा रहा अवैध कमाई का धंधा, मिठाइयों के साथ डिब्बे को भी वजन कर पैसे वसूल रहे मिठाई दुकानदार।

जिले में फैलता जा रहा अवैध कमाई का धंधा, मिठाइयों के साथ डिब्बे को भी वजन कर पैसे वसूल रहे मिठाई दुकानदार।

सरायकेला/खरसावां

भरत सिंह की रिपोर्ट

साथियों हम भारतीय लोग प्रत्येक पर्व त्योहार खुशियां मिठाइयां खाकर एवं मुंह मीठा करके ही मानते हैं पर्व त्यौहार हर एक खुशियां मिठाई खाकर मानते हैं एवं बधाई के रूप में भी हम उपहार स्वरूप मिठाई भेंट करते हैं। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि आप जो मिठाइयां दुकान से खरीद रहे हैं या होटल से खरीद रहे हैं क्या वह वजन में पूरा-पूरा मिठाई आपको दे रहा है अथवा आपके साथ धोखाधड़ी कर रहा है।

संबंधित फोटो

जी हां साथियों यह एक गंभीर मुद्दा है और यह मुद्दा खास कर ग्राहकों के हित के लिए है साथियों हमने अक्सर देखा है कि जब हम मिठाइयों की खरीदारी करते हैं तो दुकानदार की ओर से हमें मिठाई डब्बे में तौल कर दी जाती है या फिर यूं कहें कि डब्बे के साथ ही मिठाइयों का वजन किया जाता है। जिससे कि हमें दुकानदार द्वारा मिठाई कम दी जाती है साथ ही मिठाई और डिब्बे दोनों के वजन का पैसा हमारे जेब से लिया जाता है। लेकिन इस पर किसी की नजर नहीं पड़ती या फिर यूं कहें कि इन पर कोई ध्यान नहीं देता ना तो ग्राहक और ना ही जिले में मौजूद फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर।

आपको बताते चलें कि लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट 2009 व पैकेज्ड कमोडिटी रूल्स 2011 के तहत खाद्य पदार्थ का “शुद्ध वजन” ही ग्राहक को देना अनिवार्य है। डिब्बे/पैकिंग मटेरियल का वजन अलग से घटाना होगा। दोषी पाए जाने पर पहली बार ₹25,000 व दूसरी बार ₹50,000 तक जुर्माना का प्रावधान है।

लेकिन इन सभी प्रावधानों के बावजूद धड़ल्ले से झारखंड के सरायकेला खरसावां जिले में डिब्बे के साथ मिठाइयों का वजन कर ग्राहकों से डिब्बे तक के पैसे की वसूली की जा रही है जिसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। ग्राहक हताश एवं परेशान होकर अपने खून पसीने से कमाई हुई पैसे को इन मिठाई दुकानदारों को देने के लिए मजबूर हैं।

साथियों सरायकेला खरसावां जिले में इन दिनों एक अलग ही खेल चल रहा है जहां एक तरफ जिले में लोग हर एक पर्व त्यौहार हर एक खुशियां मिठाई खाकर मानते हैं एवं बधाई के रूप में भी उपहार स्वरूप मिठाई भेंट करते हैं वहीं दूसरी ओर जिले में मौजूद तमाम मिठाइयों के दुकानदार ग्राहकों से अवैध पैसे की वसूली कर अपनी जेब गर्म करने का काम कर रहे हैं। जिससे कि सरायकेला खरसावां जिले वासियों में काफी आक्रोश है जिले वासियों में इस वक्त इस मुद्दे को लेकर प्रशासन के खिलाफ काफी आक्रोश में है।

जिले वासियों का कहना है कि प्रत्येक मिठाइयों के दुकानदार डिब्बे के साथ मिठाइयों का वजन कर हमें बेचकर अवैध पैसे की कमाई कर रहे हैं जो कि टेक अवैध कमाई का जरिया बना हुआ है जिसकी रोकथाम अत्यंत आवश्यक है।

वहीं इस मामले पर सूत्रों का कहना है कि शहर की कई नामी-गिरामी मिठाई दुकानों पर डिब्बे सहित मिठाई तौली जा रही है, जिससे ग्राहकों को प्रति किलो 80 से 200 ग्राम तक मिठाई कम मिल रही है।

स्थानीय ग्राहक रमेश कुमार ने बताया कि उन्होंने 1 किलो काजू बर्फी खरीदी। घर जाकर खाली डिब्बा तौला तो वजन 160 ग्राम निकला। यानी ₹1200/किलो के हिसाब से ₹192 का सीधा नुकसान। इसी तरह कई ग्राहकों ने शिकायत की है। किया अवैध कमाई कजरिया बंद किया जाए जिससे कि ग्राहकों को सही मुनाफा एवं राहत मिल सके।

वहीं इस पूरे मामले पूरे विश्व हिंदू रक्षा परिषद के राष्ट्रीय सह-प्रभारी (संपूर्ण भारत )भरत सिंह ने कहा, शादी विवाह या”त्योहार पर लोग खुशी से मिठाई खरीदते हैं और दुकानदार डिब्बे का पैसा मिठाई के रेट से वसूल रहे हैं। यह सीधे-सीधे ठगी है। जिला प्रशासन तुरंत छापेमारी कर कार्रवाई करे।”

इस मामले पर झारखंड क्राइम रिपोर्टर हिंदी दैनिक अखबार के संपादक भरत सिंह द्वारा जिला माप-तौल निरीक्षक से बात करने पर उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर जाँच कर कार्रवाई की जाएगी। ग्राहक बिल जरूर लें और 1915 पर शिकायत दर्ज करें।

सरायकेला खरसावां जिले में अवैध स्क्रैप टाल के बढ़ते जाल ने बढा़ई सरायकेला पुलिस प्रशासन की चिंता।

सरायकेला खरसावां जिले में अवैध स्क्रैप टाल के बढ़ते जाल ने बढा़ई सरायकेला पुलिस प्रशासन की चिंता।

सरायकेला-खरसावां

अवैध स्क्रैप कारोबारी को पुलिस प्रशासन का खौफ नहीं:-सूत्र

सड़क किनारे हो रहा अवैध स्क्रैप टाल का संचालन सरायकेला पुलिस प्रशासन मौन।

सरायकेला खरसावां जिले में अपराधी अपराध का ऐसा जाल फैला रहे हैं जिससे कि सरायकेला खरसावां जिले की पुलिस की चुनौतियां बढ़ती हुई दिखाई दे रही है। मौजूदा समय में सरायकेला खरसावां जिले की हालत ऐसी है कि कहीं नाबालिक आदिवासी युवती के साथ थाने में बर्बरता दिखाई जाती है जिसको लेकर पुलिस अधीक्षक द्वारा थाना प्रभारी समेत तीन लोगों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया जाता है। और कहीं सड़क किनारे अवैध महुआ शराब की बिक्री तो कहीं बिना नंबर प्लेट के दो पहिए वाहन का साइलेंसर मॉडिफाई करवा कर गलियों में घूमना अथवा क्षेत्र वासियों को ध्वनि प्रदूषण कर परेशान करना। यह सभी मामले सरायकेला खरसावां जिले के लिए आम बात हो गई है।

ताजा मामला सरायकेला खरसावां जिले के सरायकेला थाना क्षेत्र का है जहां पर मुख्यालय थाना में पड़ने वाले निश्चिंतपुरन क्षेत्र के सड़क किनारे अवैध स्क्रैप टाल का धंधा खूब फल फूल रहा है और लाखों की अवैध कमाई की जा रही है। दुर्भाग्य की बात यह है कि सड़क के किनारे होते हुए भी इस अवैध टाल पर अब तक किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई।

आपको बताते चलें कि यह सड़क आदित्यपुर को सरायकेला से जोड़ता है जिस कारण उक्त रास्ते से लगभग-लगभग तमाम अधिकारियों का गुजरना आए दिन लग ही रहता है फिर भी अब तक उक्त अवैध स्क्रैप टाल पर कानूनी डंडा नहीं चलना कहीं ना कहीं कानून व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करता है।

सूत्रों ने जानकारी दी है कि उक्त अवैध स्क्रैप टाल पर कई असामाजिक तत्वों का भी आना-जाना लगा ही रहता है और इसके साथ-साथ जिले में तांडव मचा रहे हैं चोरों का भी उक्त टाल पर आना-जाना लगा ही रहता है अथवा कई ऐसे अपराधिक इतिहास के लोग हैं जिनका आना-जाना लगातार उक्त टाल पर बना रहता है जो कि आने वाले समय में किसी बड़ी घटना को आमंत्रण दे सकता है।

वहीं सूत्रों द्वारा मामले की जानकारी पत्रकार भरत सिंह को दी गई जिस पर झारखंड क्राईम रिपोर्टर हिंदी दैनिक अखबार के संपादक भरत सिंह जब समाचार संकलन करने के लिए उक्त टाल पर पहुंचे तब टाल संचालक द्वारा पत्रकार भरत सिंह को भी जान से मार देने की धमकी दे दी गई। और साथ ही टाल संचालक द्वारा पत्रकार भरत सिंह को धमकी देते हुए कहा गया है कि जो करना है कर लो पुलिस या प्रशासन कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। सूत्रों ने यह भी जानकारी दी है कि अवैध टाल संचालक मुर्शिदाबाद का रहने वाला है

वहीं सरायकेला खरसावां जिले की मौजूदा हालात का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि एक अवैध टाल संचालक द्वारा अखबार के संपादक को जान से मार देने की धमकी दी जाती है।

वहीं इस मामले पर भरत सिंह द्वारा उक्त मामले की पूरी जानकारी सरायकेला थाने के थाना प्रभारी को दूरभाष के माध्यम से दी गई है जिस पर थाना प्रभारी विनय कुमार सिंह ने उक्त मामले पर निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर टाल संचालक के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया है।

पत्रकार पर जानलेवा हमला, 24 घंटे के बाद भी दोसी पुलिस की गिरफ्त से बाहर, कानून व्यवस्था पर उठ रहे हैं सवार।

पत्रकार पर जानलेवा हमला, 24 घंटे के बाद भी दोसी पुलिस की गिरफ्त से बाहर, कानून व्यवस्था पर उठ रहे हैं सवार।

सरायकेला/आदित्यपुर

सोनू कुमार सिंह

सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत मोतीनगर में पत्रकार सुनील गुप्ता एवं उनके पुत्र अनुराग कुमार गुप्ता पर हुए कथित हमले के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इसका कारण यह रहा कि पत्रकार सुनील गुप्ता पर हुए जानलेवा हमले के 24 घंटे बीत जाने के बावजूद भी अभी तक दोषियों के खिलाफ किसी तरह की कोई कार्रवाई होती दिखाई नहीं दे रही है और दोषी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। इसे लेकर आदित्यपुर क्षेत्र में कानून व्यवस्था पर भी कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं एवं क्षेत्र वासियों में एक डर का माहौल बना हुआ है क्षेत्र वासियों का कहना है कि जब क्षेत्र में पत्रकार ही सुरक्षित नहीं तो आम जनमानस की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार रविवार शाम बाजार से घर लौट रहे पत्रकार सुनील कुमार गुप्ता पर कुछ लोगों ने कथित तौर पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। बीच-बचाव के लिए पहुंचे उनके पुत्र अनुराग कुमार गुप्ता को भी हमलावरों ने नहीं छोड़ा। स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप के बाद दोनों को बचाया गया और पुलिस की सहायता से इलाज के लिए गम्हरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया।

वहीं इस मामले में पत्रकार सुनील गुप्ता द्वारा आदित्यपुर थाने में प्रकाश कुमार यादव, दिनेश कुमार यादव, नीरज कुमार यादव समेत अन्य लोगों पर हमला करने का आरोप लगाया गया है। हालांकि आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

उक्त मामले पर यक्ष प्रश्न सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह महज मारपीट का मामला है या फिर इसके पीछे कथित अवैध खटाल और सरकारी जमीन से जुड़ा कोई बड़ा विवाद छिपा हुआ है। बताया जा रहा है कि घटना से कुछ समय पहले वन विभाग की टीम इलाके में संचालित एक कथित अवैध खटाल को लेकर पूछताछ करने पहुंची थी। इसके बाद सामने आए घटनाक्रम ने कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

सूत्रों ने दावा किया है कि वन विभाग की जमीन पर वर्षों से खटाल संचालित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। यदि यह दावा सही है तो आखिर अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यदि जमीन पर अवैध कब्जा था तो उसे हटाने में देरी किस वजह से हुई, और यदि कब्जा वैध था तो बार-बार नोटिस जारी होने की बातें क्यों सामने आती रहीं? यह ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब प्रशासन को देना होगा।

आपको बताते चलें कि 2 दिन पूर्व ही आदित्यपुर थाने में नए थाने प्रभारी ने पदभार ग्रहण किया है जिसके स्वागत अभिनंदन करने वालों का तांता लगा हुआ है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि नए थाना प्रभारी अंजनी कुमार सिंह इस मामले पर क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल उक्त मामले में 24 घंटे से ऊपर हो चुके हैं लेकिन फिलहाल इस मामले में कथित तौर पर सभी आरोपी पुलिस के गिरफ्त से बाहर है और क्षेत्रवासियों की नजर एवं पीड़ित की नजर नए थाना प्रभारी पर टिकी हुई है।

चांडिल में आदिवासी महिला से पुलिस की बदसलूकी का आरोप।

चांडिल में आदिवासी महिला से पुलिस की बदसलूकी का आरोप।

एसआई यमुना राम पर महिला के साथ मारपीट व कपड़े फाड़ने का आरोप।

सरायकेला/चांडिल

सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल थाना क्षेत्र में एक आदिवासी महिला के साथ कथित पुलिसिया दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। चांडिल थाना में पदस्थापित एसआई यमुना राम पर आरोप है कि उन्होंने एक आदिवासी महिला के साथ मारपीट की, उसके कपड़े फाड़ दिए तथा गाली-गलौज की। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को एसआई यमुना राम एक नाबालिग युवक बलराम सिंह मुंडा की तलाश में रुचाप बस्ती स्थित उसके घर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि बलराम घर पर नहीं मिलने के बाद पुलिसकर्मी उसकी मामी से उलझ गए। वायरल वीडियो में महिला के साथ कथित रूप से गाली-गलौज और धक्का-मुक्की होती दिखाई दे रही है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि महिला को डंडे से पीटा गया तथा उसके साथ अमर्यादित व्यवहार किया गया।

परिजनों के अनुसार, बलराम मुंडा (जन्म तिथि 07 जनवरी 2010) नाबालिग है। बताया जाता है कि 10 जून की रात वह स्नान कर घर लौट रहा था। इसी दौरान उसने रास्ते में गणेश सिंह सरदार और रोहित आदित्यदेव को आपस में विवाद करते देखा। आरोप है कि वहां पहुंचते ही रोहित आदित्यदेव ने उसे गणेश का सहयोगी समझकर धक्का-मुक्की की। बाद में रोहित की शिकायत पर पुलिस बलराम को पकड़ने उसके घर पहुंची थी।

पीड़ित परिवार का कहना है कि बलराम के माता-पिता दिहाड़ी मजदूर हैं और परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। घटना के बाद घायल महिला का चांडिल अस्पताल में प्राथमिक उपचार कराया गया। मामले को लेकर पीड़ित परिवार ने एसआई यमुना राम के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। परिजनों ने कहा है कि वे न्याय की मांग को लेकर जिले के पुलिस अधीक्षक से भी मुलाकात करेंगे।

लगभग डेढ़ महीने बीत जाने के बाद भी पीड़िता को नहीं मिला न्याय, सरायकेला खरसावां की कानून व्यवस्था पर उठ रहे सवाल।

लगभग डेढ़ महीने बीत जाने के बाद भी पीड़िता को नहीं मिला न्याय, सरायकेला खरसावां की कानून व्यवस्था पर उठ रहे सवाल।

सरायकेला/आदित्यपुर

लगभग डेढ़ महीने बीत जाने के बावजूद भी पीड़िता को नहीं मिला न्याय कानून व्यवस्था पर उठ रहे कई सवाल पीड़िता की निगाहें अब उपयुक्त पर टिकी।

ज्ञात हो कि 25/04/2026 को सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र के महिंद्रा शोरूम स्थित SDS TOWER के निवासी झारखंड क्राईम रिपोर्टर ( हिंदी दैनिक अखबार ) के संपादक भरत सिंह की पत्नी रेणु देवी ने अपनी एवं अपने परिवार की जान की सुरक्षा की गुहार लगाते हुए आदित्यपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।

लिखित शिकायत के मुताबिक SDS TOWER के निवासी अनुज श्रीवास्तव नमक व्यक्ति द्वारा लगातार रेणु देवी एवं उनके पति भरत सिंह को जान से मार देने की धमकी दी जा रही थी एवं घर खाली करवा देने की भी धमकियां लगातार मिल रही थी जिस पर रेनू देवी ने अपनी जान माल की सुरक्षा के लिए आदित्यपुर थाना की पुलिस से सुरक्षा एवं न्याय की गुहार लगाई थी।

लिखित शिकायत में रेणु देवी ने बताया है कि अनुज श्रीवास्तव नामक व्यक्ति द्वारा तीसरी बार उनके साथ गाली गलौज एवं मारपीट कर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया साथ ही जान से मार देने की धमकी दी गई।

लिखित शिकायत में रेणु देवी द्वारा यह भी कहा गया था कि लगातार इस तरह अनुज श्रीवास्तव द्वारा मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है अगर आगे चलकर किसी तरह की जान माल की क्षति पहुंचती है तो इसका जिम्मेदार सीधी रूप से अनुज श्रीवास्तव होगा आगे उन्होंने इस मामले पर आदित्यपुर थाना से सुरक्षा एवं न्याय की गुहार लगाई है

वहीं आदित्यपुर थाना पुलिस द्वारा मामले की जांच शुरू की गई। और आदित्यपुर थाना पुलिस द्वारा भारत सिंह को कहा गया कि मामले की जांच की गई है अथवा जांच की रिपोर्ट सरायकेला खरसावां के अनुमंडल पदाधिकारी को दे दी गई है लेकिन लगभग डेढ़ महीने बीत जाने के बावजूद भी जांच का कोई परिणाम सामने आता हुआ नहीं दिखाई दे रहा।

वहीं इस मामले पर पीड़िता रेणु देवी के पति भरत सिंह ने कहा कि आदित्यपुर थाना में शिकायत किए हुए लगभग डेढ़ महीने बीत चुके हैं लेकिन इस पर किसी तरह की कोई कार्यवाही होती दिखाई नहीं दे रही है साथ ही उन्होंने कहा कि इस मामले पर सरायकेला के अनुमंडल पदाधिकारी से भी जानकारी लेने की कोशिश की गई लेकिन सरायकेला के अनुमंडल पदाधिकारी करने कहा कि ऐसे किसी मामले की कोई जांच रिपोर्ट उन तक नहीं पहुंची है और ना ही ऐसे किसी मामले की उन्हें सूचना मिली है।

वहीं भारत सिंह ने आगे कहा कि कहीं ना कहीं आदित्यपुर थाना एवं एसडीएस टावर के निवासी अनुज श्रीवास्तव के मिली भगत के कारण यह मामला अब तक अटका हुआ है साथ उन्होंने कहा कि वे पीछे नहीं हटेंगे न्याय के लिए उच्च अधिकारी तक पहुंचेंगे एवं अपने न्याय की गुहार लगाएंगे। आगे उन्होंने कहा कि अब इस मामले को लेकर उपायुक्त के समक्ष न्याय की गुहार लगाएंगे अब न्याय की उम्मीद उपयुक्त से की जाएगी।

अखबार में खाना परोसने वालों की अब खैर नहीं।

अखबार में खाना परोसने वालों की अब खैर नहीं।

फूड सेफ्टी एंड स्टैण्डर्ड्स (पैकेजिंग) रेगुलेशन 2018 (सुरक्षा मानक खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम,2006) – अखबार में भोजन या खाद्य सामग्री परोसी तो कार्रवाई होगी -एफएसएसएआई की चेतावनी का समग्र व्यापक विश्लेषण

अखबार में भोजन या खाद्य सामग्री परोसने का खतरा: एफएसएसएआई की चेतावनी, सार्वजनिक स्वास्थ्य की चुनौती और सुरक्षित खाद्य संस्कृति की आवश्यकता

खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग) नियम, 2018 के अंतर्गत अखबारों अथवा अन्य अनधिकृत सामग्रियों का उपयोग भोजन रखने,लपेटने या परोसने के लिए नहीं किया जा सकता

गोंदिया/महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर खाद्य सुरक्षा आज केवल एक स्वास्थ्य संबंधी विषय नहीं रह गई है,बल्कि यह मानव जीवन, आर्थिक विकास,सामाजिक स्थिरता और सतत विकास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुकी है। जिस प्रकार स्वच्छ जल, स्वच्छ वायु और सुरक्षित आवास मनुष्य के जीवन के लिए आवश्यक हैं, उसी प्रकार सुरक्षित भोजन भी स्वस्थ जीवन की आधारशिला है। यदि भोजन ही दूषित हो जाए तो वह पोषण का स्रोत बनने के बजाय बीमारी का कारण बन जाता है। हाल ही में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा जारी की गई चेतावनी ने खाद्य सुरक्षा के एक ऐसे पहलू को उजागर किया है जिसे आमतौर पर लोग सामान्य और हानिरहित मान लेते हैं। एफएसएसएआई ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अखबार में भोजन पैक करना या परोसना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।

मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र गोंदिया सिटी सहित भारत के हर शहर में यह देखते आ रहा हूं क़ि दशकों से भारत के अनेक हिस्सों में समोसा,पकौड़े, वड़ा- पाव, जलेबी, पराठा और अन्य खाद्य पदार्थों को अखबार में लपेटकर देने की परंपरा रही है। कई लोगों को यह सामान्य और सुविधाजनक लग सकता है, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम है। एफएसएसएआई की चेतावनी केवल एकप्रशासनिक निर्देश नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।यह सलाह उस समय जारी की गई जब मुंबई में एक वड़ा-पाव विक्रेता द्वारा भोजन को अखबार में पैक और परोसने का मामला सामने आया। घटना के बाद एफएसएसएआई के पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय और ग्रेटर मुंबई नगर निगम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए खाद्य विक्रेताओं को निर्देश जारी किए। यह घटना केवल मुंबई तक सीमित नहीं है। भारत के लगभग सभी राज्यों में छोटी- बड़ी खाद्य दुकानों पर आज भी अखबारों का उपयोग भोजन लपेटने के लिए किया जाता है। कई बार ग्राहक भी इसे सामान्य मानकर स्वीकार कर लेते हैं, जबकि इसके पीछे छिपे स्वास्थ्य जोखिमों से अनजान रहते हैं।यही कारण है कि हर वर्ष विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस मनाकर सरकारों, नियामक संस्थाओं, उद्योगों और नागरिकों को खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार दूषित भोजन के कारण दुनिया भर में करोड़ों लोग बीमार पड़ते हैं और लाखों लोगों की मृत्यु तक हो जाती है।बैक्टीरिया, वायरस,परजीवी,रसायन और भारी धातुएं खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करके गंभीर स्वास्थ्य संकट उत्पन्न कर सकती हैं। भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में यह चुनौती और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, जहां सड़क किनारे खाद्य विक्रेताओं से लेकर बड़े रेस्तरां और खाद्य उद्योग तक करोड़ों लोगों को प्रतिदिन भोजन उपलब्ध कराते हैं।

साथियों, वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो अखबारों में उपयोग की जाने वाली मुद्रण स्याही भोजन के संपर्क में आने के लिए नहीं बनाई जाती। समाचार पत्रों को छापने में विभिन्न प्रकार के रसायनों, पिगमेंट, सॉल्वेंट, बाइंडर और भारी धातुओं का उपयोग किया जाता है। इनमें सीसा (लेड), कैडमियम और अन्य रासायनिक तत्व शामिल हो सकते हैं। जब गर्म, तेलीय या नमी युक्त खाद्य पदार्थ सीधे अखबार के संपर्क में आते हैं, तो इन रसायनों के भोजन में स्थानांतरित होने की संभावना बढ़ जाती है। यही कारण है कि खाद्य वैज्ञानिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से अखबार में भोजन परोसने का विरोध करते रहे हैं।सीसा जैसे भारी धातु मानव शरीर के लिए अत्यंत हानिकारक माने जाते हैं। इनके लंबे समय तक सेवन से तंत्रिका तंत्र, मस्तिष्क, यकृत, गुर्दे और रक्त निर्माण प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। बच्चों में सीसा विषाक्तता का प्रभाव और भी गंभीर होता है क्योंकि इससे उनकी मानसिक एवं शारीरिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है।गर्भवती महिलाओं में भी ऐसे रसायनों का प्रभाव भ्रूण के विकास पर पड़ सकता है। इसलिए खाद्य सुरक्षा केवल तत्काल बीमारी से बचाव का विषय नहीं है बल्कि दीर्घकालिक स्वास्थ्य संरक्षण का भी मुद्दा है।

साथियों, अखबार से जुड़ा दूसरा बड़ा खतरा स्वच्छता का है। अखबार छपाई के बाद विभिन्न स्थानों से होकर गुजरते हैं। उन्हें गोदामों में रखा जाता है, परिवहन के दौरान अनेक लोगों द्वारा छुआ जाता है और वितरण के दौरान विभिन्न प्रकार की धूल, गंदगी तथा रोगाणुओं के संपर्क में आते हैं। कई बार अखबार जमीन पर रखे जाते हैं या अस्वच्छ वातावरण में संग्रहित होते हैं। ऐसे में उन पर बैक्टीरिया, वायरस और अन्य सूक्ष्मजीव मौजूद हो सकते हैं। यदि इन्हीं अखबारों में भोजन लपेटा जाता है तो रोगाणु भोजन तक पहुंच सकते हैं और उपभोक्ताओं को बीमार कर सकते हैं।

साथियों, विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े बताते हैं कि खाद्य जनित रोग विश्व स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक हैं।साल्मोनेला, ई- कोलाई, लिस्टेरिया और नोरोवायरस जैसे रोगजनक सूक्ष्मजीव दूषित भोजन के माध्यम से फैल सकते हैं। इनके कारण दस्त, उल्टी, पेट दर्द, बुखार और गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती होने तक की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों, बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह खतरा और अधिक बढ़ जाता है। इसलिए भोजन की तैयारी, भंडारण, परिवहन और परोसने की प्रत्येक प्रक्रिया में सुरक्षा मानकों का पालन आवश्यक है।एफएसएसएआई ने अपनी चेतावनी में यह भी स्पष्ट किया है कि खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग) नियम, 2018 के अंतर्गत अखबार या अन्य गैर- अनुमोदित सामग्री में भोजन रखने,लपेटने या परोसने की अनुमति नहीं है। यह नियम केवल औपचारिकता नहीं बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान और स्वास्थ्य सुरक्षा के सिद्धांतों पर आधारित है। पैकेजिंग सामग्री को खाद्य-ग्रेड होना चाहिए ताकि वह भोजन के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया न करे और उसमें कोई हानिकारक तत्व न छोड़े। यही कारण है कि विकसित देशों में खाद्य पैकेजिंग के लिए अत्यंत कठोर मानक लागू किए जाते हैं।

साथियों, भारत में खाद्य व्यवसायों का दायरा अत्यंत व्यापक है। इसमें सड़क किनारे के विक्रेता, छोटे रेस्तरां, होटल, कैटरिंग सेवाएं, क्लाउड किचन, क्विक सर्विस रेस्तरां, हॉकर और मोबाइल फूड वेंडर शामिल हैं। एफएसएसएआई की सलाह इन सभी पर समान रूप से लागू होती है। यह संदेश स्पष्ट है कि चाहे व्यवसाय छोटा हो या बड़ा, उपभोक्ताओं को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना उसकी जिम्मेदारी है। आर्थिक सुविधा या पारंपरिक आदतों के नाम पर स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जा सकता।खाद्य सुरक्षा का विषय केवल नियामक संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है उपभोक्ताओं की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि ग्राहक स्वयं अखबार में पैक भोजन लेने से इंकार करें और सुरक्षित पैकेजिंग की मांग करें, तो बाजार में सकारात्मक परिवर्तन तेजी से आ सकता है। उपभोक्ता जागरूकता अक्सर कानूनों से अधिक प्रभावी साबित होती है क्योंकि बाजार अंततः उपभोक्ता की मांग के अनुसार स्वयं को ढालता है।बता दें,आज विश्व भर में टिकाऊ और सुरक्षित पैकेजिंगसमाधानों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या को देखते हुए जैव-अवक्रमणीय पर्यावरण-अनुकूल और खाद्य- ग्रेड पैकेजिंग सामग्री विकसित की जा रही है। भारत भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। बायो-बेस्ड पैकेजिंग, खाद्य- ग्रेड पेपर,बांस आधारित सामग्री और अन्य नवीन विकल्प खाद्य उद्योग में लोकप्रिय हो रहे हैं। इनका उद्देश्य केवल पर्यावरण संरक्षण ही नहीं बल्कि उपभोक्ताओं की स्वास्थ्य सुरक्षा भी है।

साथियों, हाल के वर्षों में खाद्य सुरक्षा के प्रति भारत का दृष्टिकोण अधिक सख्त और वैज्ञानिक हुआ है।एफएसएसएआई नियमित रूप से निरीक्षण, परीक्षण और जागरूकता कार्यक्रम संचालित कर रहा है। मई महीने में एक वायरल वीडियो के बाद ट्रेन संख्या 12223 लोकमान्य तिलक टर्मिनस-एर्नाकुलम दुरंतो एक्सप्रेस में बर्तनों की अस्वच्छ हैंडलिंग के आरोपों पर आईआरसीटीसी को कानूनी नोटिस जारी किया जाना इसी दिशा में उठाया गया कदम था। यह दर्शाता है कि नियामक संस्थाएं अब खाद्य सुरक्षा संबंधी शिकायतों को गंभीरता से ले रही हैं और जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही हैं।रेलवे, हवाई अड्डों, स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक आयोजनों में भोजन की सुरक्षा विशेष महत्व रखती है क्योंकि यहां बड़ी संख्या में लोगों को भोजन परोसा जाता है। यदि किसी एक स्थान पर स्वच्छता मानकों की अनदेखी होती है तो उसका प्रभाव हजारों लोगों पर पड़ सकता है। इसलिए खाद्य सुरक्षा का सिद्धांत फार्म टू फोर्क अर्थात खेत से थाली तक प्रत्येक चरण में लागू होना चाहिए।
साथियों, वैश्विक स्तर पर संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों में भी सुरक्षित और पौष्टिक भोजन को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। खाद्य सुरक्षा का संबंध केवल बीमारी रोकने से नहीं बल्कि गरीबी उन्मूलन, बेहतर स्वास्थ्य, गुणवत्तापूर्ण जीवन और आर्थिक उत्पादकता से भी है। बीमारियों के कारण स्वास्थ्य व्यय बढ़ता है, कार्य क्षमता घटती है और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इसलिए सुरक्षित भोजन में निवेश वास्तव में मानव पूंजी में निवेश है।भारत जैसे देश में जहां स्ट्रीट फूड संस्कृति अत्यंत लोकप्रिय है, वहां संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता है। स्ट्रीट फूड भारतीय खानपान की पहचान है और लाखों लोगों की आजीविका का स्रोत भी है। उद्देश्य इसे समाप्त करना नहीं बल्कि इसे अधिक सुरक्षित और स्वच्छ बनाना है। प्रशिक्षण, जागरूकता, सस्ती खाद्य-ग्रेड पैकेजिंग की उपलब्धता और नियमित निगरानी के माध्यम से इस क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि एफएसएसएआई की अखबार में भोजन न परोसने संबंधी चेतावनी हमें एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि खाद्य सुरक्षा छोटे-छोटे व्यवहारों से शुरू होती है। जो चीजें वर्षों से सामान्य लगती रही हों, वे वैज्ञानिक परीक्षणों में असुरक्षित सिद्ध हो सकती हैं। इसलिए परंपरा से अधिक महत्व विज्ञान और स्वास्थ्य को दिया जाना चाहिए। सुरक्षित भोजन प्रत्येक नागरिक का अधिकार और प्रत्येक खाद्य व्यवसाय की जिम्मेदारी है। यदि सरकार, उद्योग, विक्रेता और उपभोक्ता मिलकर खाद्य सुरक्षा के सिद्धांतों का पालन करें, तो न केवल बीमारियों को रोका जा सकता है बल्कि एक स्वस्थ, उत्पादक और सुरक्षित समाज का निर्माण भी किया जा सकता है। विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस का वास्तविक उद्देश्य भी यही है कि भोजन केवल पेट भरने का माध्यम न रहे, बल्कि स्वास्थ्य, सुरक्षा और मानव गरिमा का आधार बने।

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9284141425

कोवाली थाना प्रभारी पर मारपीट व घूस मांगने का लगा आरोप, थाना प्रभारी ने सभी आरोप को बताया बेबुनियाद।

कोवाली थाना प्रभारी पर मारपीट व घूस मांगने का लगा आरोप, थाना प्रभारी ने सभी आरोप को बताया बेबुनियाद।

पूर्वी सिंहभूम/पोटका

पूर्वी सिंहभूम जिले से एक चौंका देने वाली खबर सामने आ रही है और इस खबर ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है क्षेत्रवासी यह सोंच में पड़े हैं कि जब थाना प्रभारी ही घूस लेने लगे और साथ ही आम जनमानस के साथ मारपीट करने लगे अगर अगर थाना प्रभारी का यही रवैया रहा तो क्षेत्र का उद्धार कैसे होगा आम जनमानस की सुरक्षा कौन करेगा।

मामले के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार कोवाली थाना प्रभारी मुकेश कुमार साव पर हेंसडा निवासी श्यामा प्रसाद बेरा के साथ कथित रूप से मारपीट करने और घूस मांगने का आरोप लगाया गया है।

इस संबंध में श्यामा प्रसाद बेरा के पुत्र कर्ण बेरा ने वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच एवं न्याय की मांग की है।

कर्ण बेरा ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि शनिवार रात को कोवाली पुलिस संदेह के आधार पर उनके पिता श्यामा प्रसाद बेरा को घर से उठाकर थाने ले गई। वहां उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई, जिससे उनकी हालत गंभीर हो गई। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पोटका में भर्ती कराया गया।

उन्होंने बताया कि रविवार सुबह सूचना मिलने पर वह अस्पताल पहुंचे, जहां उनके पिता की स्थिति काफी गंभीर थी। आरोप है कि गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के बावजूद पुलिस ने उन्हें जबरन अस्पताल से छुट्टी दिलाकर वापस थाने ले आई। कर्ण बेरा के अनुसार उस समय उनके पिता का शुगर स्तर 400 से अधिक था।

कर्ण बेरा का कहना है कि उनके पिता पर लगाए गए किसी भी आरोप की पुष्टि नहीं हुई है और न ही उनके पास से कोई आपत्तिजनक सामान बरामद हुआ है। इसके बावजूद उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कोवाली पुलिस द्वारा एक लाख रुपये की घूस की मांग भी की गई थी।

मामले को लेकर कर्ण बेरा ने पोटका विधायक संजीव सरदार, वरीय पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अधिकारियों को पत्र सौंपकर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

वहीं, इस संबंध में कोवाली थाना प्रभारी मुकेश कुमार साव ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि श्यामा प्रसाद बेरा के साथ किसी प्रकार की मारपीट नहीं की गई है और न ही किसी तरह के पैसे की मांग की गई है। उनके ऊपर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं।

सरायकेला खरसावां जिले में अपराधियों का बढ़ता मनोबल, अवैध स्क्रैप टाल के पीछे चोरी का खेल।

सरायकेला खरसावां जिले में अपराधियों का बढ़ता मनोबल, अवैध स्क्रैप टाल के पीछे चोरी का खेल।

सरायकेला/कांड्रा


दूसरा नंबर जिले में थाना से ज्यादा अवैध scrap Taal की भरमार मकड़ी की जाल की तरह फैली हुई है।

सरायकेला खरसावां जिले में इन दिनों अपराध चरण सीमा पर है कहीं अवैध महुआ शराब की बिक्री तो कहीं बिना नंबर प्लेट के सड़कों गलियों में दो पहिया वाहनों का चलना, तो कहीं स्क्रैप टाल की आड़ में चोरी की हुई सामान की खरीद बिक्री एवं गैस कटिंग कर बेची जा रही है।

फाईल फोटो

ताजा मामला सरायकेला खरसावां जिले का है जहां पर सूत्रों ने जानकारी दी है कि सरायकेला खरसावां जिले के कांड्रा थाना के महज कुछ ही दूर पर स्क्रैप टाल का संचालन किया जा रहा है सूत्रों ने बताया है कि स्क्रैप टाल संचालक ने अपने स्क्रैप टाल ल का रजिस्ट्रेशन भी करवा लिया है।

लेकिन सूत्रों ने यह भी बताया है कि रजिस्ट्रेशन की आड़ में चोरी की हुई सामानों की गैस कटिंग कर बेची जा रही है। साथ ही कई थाना क्षेत्र में स्क्रैप टाल अवैध होने की सूचना प्राप्त हुई है। जिले में थाने से ज्यादा अवैध स्क्रैप टाल की भरमार है और मकड़ी की जाल की तरह फैली हुई है।  जिसकी सुध लेने वाला कोई भी नही है।

और इसमें मजेदार बात यह है कि यह स्क्रैप टाल कांड्रा थाना से महज कुछ ही दूरी पर संचालित किया जा रहा है। और इतना ही नहीं यह अवैध टाल उस रास्ते के किनारे संचालित किया जा रहा है जिस रास्ते से लगभग लगभग जिले के तमाम अधिकारियों का आना-जाना मानो लगा ही रहता है।

वहीं इस मामले पर सूत्र बताते हैं कि इस स्क्रैप टाल में कार्य करने वाले एक मजदूर को जेल भी भेजा गया था और वह भी रेलवे पटरी चोरी कर बेचने के मामले में।

सूत्रों ने यह भी बताया है कि कहीं ना कहीं यह अवैध स्क्रैप टाल नजदीकी थाना पुलिस की मिली भगत से संचालित किया जा रहा है। सूत्र यह भी बताते हैं कि उक्त स्क्रैप टाल में चोरी की हुई वस्तुओं की खरीद बिक्री की जाती है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार टाल संचालक ज्यादातर फरार ही रहते हैं टाल संचालक ने अपनी गैर मौजूदगी में सारा काम संचालित करने हेतु कुछ मजदूर भी नियुक्त किए हैं जो की सारा कार्यभार संभालते हैं।

सूत्रों का कहना है कि आए दिन चोरी की घटनाओं में बढ़ोतरी होती दिख रही है आए दिन हमें सोशल मीडिया के माध्यम से अखबारों के माध्यम से न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से अथवा टीवी चैनलों के माध्यम से ऐसी चोरी की घटनाएं निकल कर सामने आ रही है। लेकिन प्रशासन की ओर से चोरों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई होती दिखाई नहीं दे रही है।

सवालों के घेरे में स्थानीय थाना

थाना से महज कुछ भी दूरी पर अवैध स्क्रैप टाल का संचालक होना कहीं ना कहीं स्थानीय थाना की मिली भगत दर्शाती है साथ ही सरायकेला खरसावां का मुख्य सड़क के किनारे ही इस तरह का अवैध टाल संचालन होना कहीं ना कहीं पुरी प्रशासन को भी सवाल के घेरे में खड़ा कर रही है।

भविष्य में किसी बड़ी अपराध का संकेत

सूत्र बताते हैं कि यह अवैध टाल में चोरी की गई सामानों की खरीद बिक्री की सूचनाएं लगातार मिल रही है जिससे कि कहीं ना कहीं आगे आने वाले समय में कोई बड़ा अपराध घटित होने की संभावना बढ़ती हुई दिखाई दे रही है।

इतना ही नहीं जिले में ऐसे कई अवैध स्क्रैप टाल संचालित किया जा रहे हैं जिसकी गुप्त सूचना लगातार सूत्रों द्वारा प्राप्त हो रही है लेकिन इन अवैध स्क्रैप टालों पर कानून व प्रशासन का डंडा क्यों नहीं चल रहा आखिर मौन क्यों है प्रशासन क्या कानून व प्रशासन खुद को इन अवैध कारोबारीयों से कमजोर महसूस कर रहे हैं या फिर यह सारा मामला पैसे का है ?

यक्ष प्रश्न

यक्ष प्रश्न यह है कि आखिर इन अपराधियों पर अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा, आखिर पुलिस प्रशासन इन अपराधियों पर कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है, क्या अपराधी पुलिस व प्रशासन से ज्यादा बलशाली हैं या फिर ज्यादा चतुर हैं या फिर ज्यादा पावरफुल है, अब देखना यह दिलचस्प होगा कि पुलिस व प्रशासन जिले में अपराध को बढ़ावा देने वाले अपराधियों पर आखिर कब तक लगाम लगा पाती है।

शेष अगले भाग में….

ईचागढ़ के सितु पंचायत भवन निर्माण कार्य में हो रहा अधजले ईंट का प्रयोग:- सूत्र

ईचागढ़ के सितु पंचायत भवन निर्माण कार्य में हो रहा अधजले ईंट का प्रयोग:- सूत्र

निर्माण कार्य पूर्ण होने से पूर्व ही शुरू हो गया दीवारों का ढहना।

खराब सामग्री का उपयोग कर किया जा रहा सितु पंचायत भवन का निर्माण:-सूत्र

सरायकेला/ईचागढ़

ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के निर्माणाधीन सितु पंचायत भवन निर्माण के गुणवत्ता को लेकर एक बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है के संवेदक द्वारा पंचायत भवन में अधजले इंट का प्रयोग किया गया है। वर्षात से पहले ही गलने लगे दिवारों पर लगे ईंट।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बंगला इंट भट्टा के बाहर वाले अधजले इंट को कम दामों पर खरीदकर संवेदक द्वारा पंचायत भवन के दिवारों का निर्माण किया गया है। वर्तमान समय में स्थिति यह बनी हुई है कि छत की ढलाई और वर्षात के पहले ही इंट गलना शुरू हो चुका है।

ज्ञात हो कि जिला परिषद के 15 वीं वित्त आयोग मद से करीब एक करोड़ की लागत से पंचायत भवन निर्माण कार्य का अक्टूबर 2024 को भूमि पूजन कर कार्य प्रारंभ किया गया था।

वहीं इस मामले की  सूचना जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो को दी गई जिस पर उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निर्माणाधीन पंचायत सचिवालय का निरीक्षण किया। उन्होंने निरीक्षण के दौरान कहा कि इंट की गुणवत्ता काफी खराब है। कुछ दिनों के बाद ही भवन के जर्जर हो जाने की पूरी संभावना है। उन्होंने इस संबंध में कहा कि इसकी शिकायत जीले के उपायुक्त से किया जाएगा। कार्य में गुणवत्ता पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

वहीं इस मामले पर सूत्रों का कहना है कि क्या कनीय अभियंता के बीना देखरेख में ही कार्य किया जा रहा है या फिर विभागीय मिलीभगत से खराब ईंट का प्रयोग कर निर्माण कार्य को गति दी जा रही है। साथ ही सूत्रों ने यह भी जानकारी दी है कि सितु पंचायत सचिवालय भवन निर्माण कार्य का निम्न गुणवत्ता के खिलाफ ग्रामीण उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर उच्च स्तरीय जांच कर संवेदक के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करेंगे।

सूत्रों ने यह भी जानकारी दी है कि पंचायत भवन निर्माण कार्य स्थल पर प्राक्कलन राशि, मजदुरी दर आदि भी कहीं अंकित नही है और न ही शिलापट्ट ही लगाया गया है, जिससे लोगों को पता ही नही चल रहा है कि सरकारी जमीन पर पंचायत भवन निर्माण हो रहा है, या किसी के निजी भवन का निर्माण कराया जा रहा है। शिलापट्ट या किसी भी तरह की जानकारी आदि की सुचना कहीं अंकित नही की गई है। इससे जाहिर होता है कि कहीं न कहीं गुपचुप ढंग से खराब इंट और खराब सामग्री का स्तेमाल कर पंचायत भवन का निर्माण कराया जा रहा है।

सड़क पर आए दिन बन रही जाम की स्थिति, राहगीरों को हो रही परेशानी, लंबी-लंबी गाड़ियों ने किया सर्विस रोड जाम।

सड़क पर आए दिन बन रही जाम की स्थिति, राहगीरों को हो रही परेशानी, लंबी-लंबी गाड़ियों ने किया सर्विस रोड जाम।

मेन रोड पर ठेला-गाड़ी का कब्जा, जाम से बेहाल हुए राहगीर

सरायकेला/आदित्यपुर

सरायकेला खरसावां जाने वाली मुख्य सड़क फर रोजाना ठेला-गाड़ी वालों के अतिक्रमण से जाम की समस्या बनी हुई है। सुबह 9 बजे से रात 8 बजे तक सड़क के आधे हिस्से पर ठेले लग जाते हैं, जिससे वाहनों की कतारें लग जाती हैं।

इस कारण स्कूल जाने वाले बच्चे, ऑफिस जाने वाले कर्मचारी और मरीजों को ले जाने वाली एंबुलेंस को भी जाम में फंसना पड़ रहा है। पैदल राहगीरों को तो सड़क पर चलने की जगह ही नहीं मिल पाती। बुजुर्ग और महिलाओं को दुर्घटना का डर बना रहता है।

वहीं जाम की वजह से सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र स्थित महामाया होटल के एक महिला स्टाफ की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी लेकिन फिर भी स्थानीय पुलिस व प्रशासन की ओर से इस पर किसी तरह का कोई संज्ञान लेती हुए दिखाई नहीं दे रही है।

स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि कई बार नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस से शिकायत की गई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकला। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ठेला गाड़ियों के लिए वैकल्पिक जगह निर्धारित कर मुख्य सड़क को अतिक्रमण मुक्त किया जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

Design a site like this with WordPress.com
Get started