तू मैं और करप्शन- जमकर खाओ- फाइल दबाओ नोटों की गड्डियां पाओ
गोंदिया
लोकसभा चुनाव 2024 की अधिसूचना जारी होने के पूर्व ही शाब्दिक बाणों का खेला
चुनावी मौसम आया-शाब्दिक बाणों से माहौल गरमाया – जनता जनार्दन को चौंकाया-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया
साथियों बात कर हम कई राज्यों में व्याप्त भ्रष्टाचार की करें तो, पीएम ने कहा था तीन बुराइयों से लड़ना समय की मांग है, भ्रष्टाचार परिवारवाद और तुष्टीकरण। भ्रष्टाचार ने दीमक की तरह अर्थव्यवस्था को नोच लिया है। भ्रष्टाचार मुक्ति इसके खिलाफ जंग पीएम के जीवन का कमिटमेंट है। उन्होंने कहा मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ता रहूंगा। इसपर मेरा मानना है कि तीन बुराइयों में सबसे खतरनाक बुराई भ्रष्टाचार है, क्योंकि यह देश के राजनीतिक, आर्थिक सामाजिक, पर्यावरण की लागत और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर प्रभाव डालती है। मेरा मानना है कि उच्च स्तरपर भ्रष्टाचार पर आम जनता पर डायरेक्ट प्रभाव नहीं पड़ता। वह बड़े लोगों, रसूख रखने वाले नेताओं, उद्योगपतियों ब्यूरोक्रेसी के लेवल पर फर्क पड़ता है,जैसे महाराष्ट्र में 100 करोड़ वसूली मुद्दा, एमपी में अनेक ब्यूरोक्रेसी के घर पर छापा चपरासी से लेकर आईएएस तक करोड़ों की तादाद में बरामदगी, नियुक्तियों में भ्रष्टाचार मुद्दा, शिक्षक भर्ती घोटाला,एक राज्य में 40 परसेंट तो अभी दूसरे राज्य में 50 पर्सेंट ठेकेदारी मुद्दे का मामला इत्यादि अनेक ऐसे मामले देश के सामने हैं। परंतु आम जनता जनार्दन का काम पटवारी से लेकर वाया तहसील कार्यालय तक और एसडीओ से लेकर कलेक्टर ऑफिस तक यही उनका जीवन का अधिकतम हिस्सा निपट जाता है और इन्हीं चार पहियों पर आम आदमी का सामर्थ्य दीमक की तरह नोच लिया जाता है जिसका अनुभव मैंने अपने जीवन में कई बार किया है और मेरे पेशे के अनुसार कई बार आम जनता को पीड़ित होते हुए देखा है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि तू मैं और करप्शन- जमकर खाओ- फाइल दबाओ नोटों की गड्डियां पाओ।लोकसभा चुनाव 2024 की अधिसूचना जारी होने के पूर्व ही शाब्दिक बाणों का खेला!चुनावी मौसम आया-शाब्दिक बाणों से माहौल गरमाया – जनता जनार्दन को चौंकाया।
तू मैं और करप्शन- जमकर खाओ- फाइल दबाओ नोटों की गड्डियां पाओ
गोंदिया
लोकसभा चुनाव 2024 की अधिसूचना जारी होने के पूर्व ही शाब्दिक बाणों का खेला
चुनावी मौसम आया-शाब्दिक बाणों से माहौल गरमाया – जनता जनार्दन को चौंकाया-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया
विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में अनुमानतः अप्रैल से मई 2024 तक 7-9 चरणों में लोकसभा चुनाव होने की संभावना व्यक्त की जा रही है, मेरा ऐसा मानना इसलिए भी है कि अभी माननीय पीएम 9 दिनों में 12 राज्यों की करीब 341 सीटों पर अपने संबोधन के दौरे पर हैं, वैसे भी पिछले दिनों से उन सीटों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जो हाथ से फिसल गई थी। स्वाभाविक है कि लोकसभा चुनाव की अधिसूचना उसके बाद ही जारी की जाएगी परंतु जिस तरह से पिछले दो दिनों से पक्ष विपक्ष में जोरदार शाब्दिक बाणों का प्रहार हो रहा है उससे सटीक अंदाजा लगाया जा सकता है कि चुनावी मौसम आ गया है और अपने ऊंचाई वाले स्तर पर जा रहा है। चुंकि विपक्ष ने पक्ष के नेता पर परिवार को लेकर तंज कसा है, सो उन्होंने लपक लिया और पूरे भारत को अपना परिवार बता दिया और फिर भ्रष्टाचार को लेकर भी शाब्दिक बाचा-बाची शुरू हो गई है।अभी 2 दिन पहले ही माननीय पीएम ने तो तू मैं और करप्शन एक राज्य के लिए, तो दूसरे के लिए जमकर खाओ की बातें कहीं, तो, 04 मार्च 2024 को एक राज्य में फाइल दबाव नोटों की गड्डियां पांओ की बात कही तो दूसरे दूसरी ओर 4 मार्च 2024 को ही देर शाम जानकारी आई के सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों की संवैधानिक बेंच ने सर्वसम्मति से वोट फॉर नोट और सांसद व विधायकों नेताओं को इस मामले में छूट से इनकार करने का ऐतिहासिक फैसला दिया तो, उधर स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ने अपने इलेक्ट्रॉन बॉन्ड की जानकारी सुप्रीम कोर्ट में देने की अंतिम तिथि 6 मार्च से बढ़कर 30 जून 2024 की अपील दाखिल की है जिसे विपक्ष ने लपक लिया है और विपक्ष नेता ने कहा दाल में कुछ काला ही नहीं पूरी दाल ही काली है। बता दें कि इस डिजिटल युग में एक क्लिक पर बैंक की सारी जानकारी खाताधारकों व सरकारी एजेंसियों को मिल जाती है तो एसबीआई द्वारा इलेक्ट्रोल बॉन्ड की जानकारी में इतना समय क्यों मांग लिया है, यह बात मेरे खुद की समझ से भी परे है क्योंकि तब तक तो इलेक्शन भी निपट जाएंगे तो जनता को कैसे पता चलेगा कि किस पार्टी ने कितना पैसा एसबीआई इलेक्ट्रॉन बॉन्ड के तहत उठाया है। चूंकि आज दिनांक 5 मार्च 2024 को परिवार, भ्रष्टाचार, इलेक्ट्रॉन बॉन्ड और सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों की बेंच का फैसला यह मुद्दे काफी चर्चित रहे,इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, चुनावी मौसम आया, शाब्दिक बाणों से माहौल गरमाया जनता जनार्दन को चौंकाया।
साथियों बात अगर हम भ्रष्टाचार पर शाब्दिक बाणों की करें तो, पीएम ने बंगाल में भ्रष्टाचार की बात करते हुए कहा कि यहां नेताओं के घर से नोटों की गड्डियां मिल रही थींनेताओं ने जनता का पैसा लूटा है।अगर अपराध व भ्रष्टाचार की बात कहें तो इन्होंने इसमें नया मॉडल स्थापित किया है। कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है, जहां ना हुआ हो। उन्होने कहा, मेरी गारंटी है. मैं बंगाल के लोगों से वादा करता हूं कि लूटने वालों को लौटाना ही पड़ेगा, ये छोड़ने वाला नहीं है। इनकी गालियों और हमले से डरने वाला नहीं है, झुकने वाला नहीं है।जिसने गरीब को लूटा है,उसको लौटाना ही पड़ेगा उन्होंने इस दौरान जनता को उस पार्टी के नाम का असली मतलब बताया। उन्होंने कहा कि अब इसका मतलब तू, मैं और करप्शन है। उन्होंने कहा कि इनकी सरकार ने राज्य के नाम को खराब किया है। हर तरह की योजना में यहां घोटाले देखने को मिलते हैं। येजनाएं हमारी होती हैं लेकिन वो उनपर अपना स्टीकर लगा देते हैं। गरीबों का हक छीनने से भी वो नहीं हिचकिचाते।
साथियों बात कर हम इसी से सहलग्न नोट फॉर वोट भ्रष्टाचार के संबंध में 4 मार्च 2024 को देर शाम 7 सदस्यों की बेंच की संवैधानिक पीठ के फैसले की करें तो, सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की संविधान पीठ ने 1998 के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें सांसद/विधायक को संसद या राज्य विधानसभा में वोट करने या भाषण देने के लिए रिश्वत लेने पर आपराधिक मुकदमे से छूट दी गई थी। मीडिया के अनुसार , सुप्रीम कोर्ट ने जेएमएम विधायक सीता सोरेन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि संसद सदस्य (सांसद) और विधानसभा सदस्य (विधायक) रिश्वत लेने का आरोप लगने पर संविधान के अनुच्छेद 105 और 194 के तहत अभियोजन से किसी छूट का दावा नहीं कर सकते हैं। बेंच की अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश ने की। पीठ ने पिछले साल अक्टूबर में इसपर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (4 मार्च) को 1998 के पीवी नरसिम्हा राव के फैसले को पलट दिया, जिसमें कहा गया था कि संसद और विधानसभा के सदस्य विधायिका में वोट या भाषण के लिएसंविधान के अनुच्छेद 105(2) और 194(2) के तहत छूट का दावा कर सकते हैं। 1998 के अपने फैसले में पी.वी. नरसिम्हा राव बनाम सीबीआई मामले में शीर्ष अदालत ने कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 105 की पृष्ठभूमि में सांसदों को संसद में कही गई किसी भी बात या दिए गए वोट के संबंध में आपराधिक मुकदमा चलाने से छूट प्राप्त है। इसी तरह की छूट राज्य विधानमंडल के सदस्यों को अनुच्छेद 194(2) द्वारा मिली हुई है। एससी के फैसले को पीएम ने कहा- स्वागतम् पीएम ने ट्वीट किया, सुप्रीम कोर्ट का एक महान निर्णय जो स्वच्छ राजनीति सुनिश्चित करेगा और सिस्टम में लोगों का विश्वास गहरा करेगा।
साथियों बात अगर हम परिवार पर शाब्दिक बाणों की करें तो, पीएम ने सोमवार कोएक राज्य में एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान पीएम नेविपक्ष के एक नेता के एक बयान पर जोरदार पलटवार किया ह। उन्होने कहा कि मुझपर परिवार को लेकर निशाना साधा गया है। पीएम ने कहा कि पूरा देश मेरा परिवार है। वहीं पीएम के इस बयान के बाद कई पार्टी नेताओं ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स (ट्विटर) पर अपने नाम के साथउनका परिवार लिख दिया है। इसी कड़ी में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री ने भी अपने नाम के आगे उनका का परिवार लिख दिया है। बता दे विपक्ष के एक बड़े नेता ने कहा था, ये वो क्या है।कोई चीज़ है क्या वो, ये आजकल परिवारवाद पर हमला कर रहे हैं।अरे भाई, तुम बताओ न कि तुमकोपरिवार में कोई संतान क्यों नहीं हुआ? ज़्यादा संतान होने वाले लोगों को बोलता है कि तुम परिवारवाद है, परिवारवाद के लिए लोग लड़ रहे हैं। तुम्हारे पास परिवार नहीं है।तुम हिंदू भी नहीं हो। जब तुम्हारी माता जी का देहावसान हुआ, हर हिंदू शोक में केश बनवाता है। दाढ़ी छिलवाता है, क्यों नहीं छिलवाया बताओ।
साथियों बात अगर हमएसबीआई इलेक्ट्रोल बॉन्ड पर शाब्दिक बाणों की करें तो, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट से चुनावी बॉन्ड की जानकारी देने के लिए 30 जून तक का समय मांगा है सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों चुनावी बॉन्ड स्कीम को रद्द कर दिया था। साथ ही कोर्ट ने एसबीआई को चुनावी बॉन्ड की जानकारी चुनाव आयोग को देने को कहा था। दरअसल, एसबीआई ही चुनावी बॉन्ड जारी करता था।सीजेआई की बेंच ने 15 फरवरी 2024 को चुनावी बॉन्ड स्कीम को असंवैधानिक और आरटीआई का उल्लंघन करार देते हुए तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। सीजेआई की अध्यक्षता वाली 5 जजों की बेंच ने एसबीआई को अप्रैल 2019 से अब तक मिले चंदे की जानकारी 6 मार्च तक चुनाव आयोग को देने के लिए कहा था। कोर्ट ने चुनाव आयोग से 13 मार्च तक यह जानकारी अपनी वेबसाइट पर अपलोड करने के लिए कहा था।
साथियों बात कर हम कई राज्यों में व्याप्त भ्रष्टाचार की करें तो, पीएम ने कहा था तीन बुराइयों से लड़ना समय की मांग है, भ्रष्टाचार परिवारवाद और तुष्टीकरण। भ्रष्टाचार ने दीमक की तरह अर्थव्यवस्था को नोच लिया है। भ्रष्टाचार मुक्ति इसके खिलाफ जंग पीएम के जीवन का कमिटमेंट है। उन्होंने कहा मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ता रहूंगा। इसपर मेरा मानना है कि तीन बुराइयों में सबसे खतरनाक बुराई भ्रष्टाचार है, क्योंकि यह देश के राजनीतिक, आर्थिक सामाजिक, पर्यावरण की लागत और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर प्रभाव डालती है। मेरा मानना है कि उच्च स्तरपर भ्रष्टाचार पर आम जनता पर डायरेक्ट प्रभाव नहीं पड़ता। वह बड़े लोगों, रसूख रखने वाले नेताओं, उद्योगपतियों ब्यूरोक्रेसी के लेवल पर फर्क पड़ता है,जैसे महाराष्ट्र में 100 करोड़ वसूली मुद्दा, एमपी में अनेक ब्यूरोक्रेसी के घर पर छापा चपरासी से लेकर आईएएस तक करोड़ों की तादाद में बरामदगी, नियुक्तियों में भ्रष्टाचार मुद्दा, शिक्षक भर्ती घोटाला,एक राज्य में 40 परसेंट तो अभी दूसरे राज्य में 50 पर्सेंट ठेकेदारी मुद्दे का मामला इत्यादि अनेक ऐसे मामले देश के सामने हैं। परंतु आम जनता जनार्दन का काम पटवारी से लेकर वाया तहसील कार्यालय तक और एसडीओ से लेकर कलेक्टर ऑफिस तक यही उनका जीवन का अधिकतम हिस्सा निपट जाता है और इन्हीं चार पहियों पर आम आदमी का सामर्थ्य दीमक की तरह नोच लिया जाता है जिसका अनुभव मैंने अपने जीवन में कई बार किया है और मेरे पेशे के अनुसार कई बार आम जनता को पीड़ित होते हुए देखा है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि तू मैं और करप्शन- जमकर खाओ- फाइल दबाओ नोटों की गड्डियां पाओ।लोकसभा चुनाव 2024 की अधिसूचना जारी होने के पूर्व ही शाब्दिक बाणों का खेला!चुनावी मौसम आया-शाब्दिक बाणों से माहौल गरमाया – जनता जनार्दन को चौंकाया।
संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
दुनियां जीडीपी के दृष्टिकोण से हटकर अब मानव केंद्रित दृष्टिकोण की ओर बढ़ चली है
गोंदिया
आओ मजबूत मानव श्रृंखला बनाकर मानव कल्याण कर मानवता का परिचय दें
अंतरराष्ट्रीय मंचों रूपी प्लेटफार्म से सशक्त कल्याणकारी मानवीय श्रृंखला बनाकर मानव केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना समय की मांग है – एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने 29 फरवरी 2024 को जारी आंकड़ों के मुताबिक अपने पहले अग्रिम पूर्वानुमान में,वित्त वर्ष 2024 के लिए भारत की वृद्धि 7.6 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया है, जिसका अर्थ होगा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में अपनी स्थिति बरकरार रखेगा। दिसंबर तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में बड़ा उछाल देखा गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत की जीडीपी दिसंबर तिमाही में 8.4 प्रतिशत बढ़ी। पीटीआई ने सरकारी आंकड़ों का हवाला दिया। भारत की जीडीपी में आया यह उछाल उम्मीद से कहींअधिक है।17 अर्थशास्त्रियों के मिंट पोल के अनुसार, एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था दिसंबर तक तीन महीनों के दौरान 6.6 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद थी, जो पिछली जुलाई-सितंबर तिमाही की 7.6 प्रतिशत गति से धीमी थी। नवीनतम तीसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था की वृद्धि वित्त वर्ष 23 की इसी अवधि में दर्ज 4.4 प्रतिशत से एक बड़ा कदम है।
साथियों हम अगर इसके पहले देखे तो वैश्विक स्तरपर कोरोना महामारी के दौरान करीब करीब हर देश के स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी, विज्ञान सहित अनेक तकनीकें भी पीड़ितों और मृतकों की संख्या कम नहीं कर पाई। याने सभी तथाकथित सुदृढ़ संसाधन इस महामारी के सामने पंगु नज़र आए। परंतु इसमें हमने एक बात नोट किए कि लगभग सभी देशों नें मिलकर दवाइयां, मेडिकल, मेडिकल इंस्ट्रूमेंट, खाद्य सहित अनेक क्षेत्रों की सहायता कुछल कल्याणकारी मानवीय चैन बनाकर मानव केंद्रित दृष्टिकोण अपनाकर, एक दूसरे की मदद कर रहे थे। भारत में भी करीब 150 देशों को वैक्सीन की आपूर्ति की तो भारत को भी भारी विपत्ति के समय विकसित और विकासशील देशों द्वारा मेडिकल इंस्ट्रूमेंट की मदद की गई थी। यह बात हम आज इसलिए उठा रहे हैं क्योंकि भारत में 9-10 सितंबर जी-20 शिखर सम्मेलन वसुधैव कुटुम्बकम हुआ। इसके पहले 5-7 सितंबर 2023 को आसियान शिखर सम्मेलन, 9 वा रायसीना डायलॉग 21-24 फरवरी 2024 इसके पहले जी-10, शंघाई इत्यादि शिखर सम्मेलनों सहित अनेक वैश्विक शिखर सम्मेलनों में एक बात उभर कर आई है कि मानवीय मूल्यों पर अधिक महत्व दिया जा रहा है। चूंकि भारत आदि अनादि काल से मानवीय मूल्यों की तरफदारी करता रहा है, अब इसमें चार कदम आगे बढ़कर जी-20 शिखर सम्मेलन को वसुधैव कुटुम्बकम यानें पूरा विश्व एक परिवार है की थीम बनाकर अब जीडीपी केंद्रित दृष्टिकोण से मानव केंद्रित दृष्टिकोण की ओर बढ़ने का काम जोरों पर किया जा रहा है। इसपर पूरी दुनियां को साझा दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है,जिससे वैश्विक मानव निर्मित व प्राकृतिक विपरीताओं से निपटने के लिए मजबूत मानव श्रृंखला उपाय की सटीकता को रेखांकित किया जाना चाहिए। चूंकि अब पूरी दुनियां का अब वसुधैव कुटुम्बकम पर ध्यान है इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, अंतरराष्ट्रीय मंचों रूपी प्लेटफार्मस से सशक्त कल्याणकारी मानवीय श्रृंखला बनाकर मानव केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना समय की मांग है।
साथियों बात अगर हम भारत की आदि अनादि काल से सोच और जलवायु परिवर्तन के संबंध में दृष्टिकोण की करें तो, वसुधैव कुटुम्बकम, हमारी भारतीय संस्कृति के इन दो शब्दों में एक गहरा दार्शनिक विचार समाहित है। इसका अर्थ है, पूरी दुनिया एक परिवार है।यह एक ऐसा सर्वव्यापी दृष्टिकोण है जो हमें एक सार्वभौमिक परिवार के रूप में प्रगति करने के लिए प्रोत्साहित करता है। एक ऐसा परिवार जिसमें सीमा, भाषा और विचारधारा का कोई बंधन ना हो।
साथियों बात अगर हम माननीय पीएम व्यक्त किए गए अपने विचारोंकी करें तोजलवायु परिवर्तन के कारण, खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती होगी। इससे निपटने में मोटा अनाज या श्रीअन्न से बड़ी मदद मिल सकती है। श्रीअन्न क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर को भी बढ़ावा दे रहा है। इंटरनेशनल इयर ऑफ मिलेट्स के दौरान हमने श्रीअन्न को वैश्विक स्तरपर पहुंचाया है। द डेक्कन हाई लेवल प्रिंसिपल्स ऑन फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन से भी इस दिशा में सहायता मिल सकती है।टेक्नॉलजी परिवर्तनकारी है लेकिन इसे समावेशी भी बनाने की जरूरत है। अतीत में, तकनीकी प्रगति का लाभ समाज के सभी वर्गों को समान रूप से नहीं मिला। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने दिखाया है कि कैसे टेक्नॉलजी का लाभ उठाकर असमानताओं को कम किया जा सकता है।उदाहरण के लिए, दुनियां भर में अरबों लोग जिनके पास बैंकिंग सुविधा नहीं है, या जिनके पास डिजिटल पहचान नहीं है, उन्हें डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) के माध्यम से साथ लिया जा सकता है।डीपीआई का उपयोग करके हमने जो परिणाम प्राप्त किए हैं, उन्हें पूरी दुनियां देख रही है, उसके महत्व को स्वीकार कर रही है। अब, जी-20 के माध्यम से हम विकासशील देशों को डीपीआई अपनाने, तैयार करने और उसका विस्तार करने में मदद करेंगे, ताकि वो समावेशी विकास की ताकत हासिल कर सकें। भारत में, प्राचीन काल से प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर आगे बढ़ना हमारा एक आदर्श रहा है और हम आधुनिक समय में भी क्लाइमेट एक्शन में अपना योगदान दे रहे हैं। ग्लोबल साउथ के कई देश विकास के विभिन्न चरणों में हैं और इस दौरान क्लाइमेट एक्शन का ध्यान रखा जाना चाहिए। क्लाइमेट एक्शन की आकांक्षा के साथ हमें ये भी देखना होगा कि क्लाइमेट फाइनेंस और ट्रांसफर ऑफ टेक्नॉलजी का भी ख्याल रखा जाए। हमारा मानना है कि जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए पाबंदियों वाले रवैये को बदलना चाहिए। क्या नहीं किया जाना चाहिए से हटकर ‘क्या किया जा सकता है वाली सोच के साथ आगे बढ़ना होगा। हमें एक रचनात्मक कार्यसंस्कृति पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।एक टिकाऊ और सुदृढ़ ब्लू इकॉनमी के लिए चेन्नई एचएलपी हमारे महासागरों को स्वस्थ रखने में जुटी है।
साथियों बात अगर हम माननीय पीएम के अर्थव्यवस्था और जी-20 के संबंध में विचारों की करें तो, भारत की डेमोग्राफी, डेमोक्रेसी, डाइवर्सिटी और डेवलपमेंट के बारे में किसी और से सुनना एक बात है और उसे प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करना बिल्कुल अलग है। मुझे विश्वास है कि हमारे जी-20 प्रतिनिधि इसे स्वयं महसूस करेंगे। हमारी जी-20 अध्यक्षता विभाजन को पाटने, बाधाओं को दूर करने और सहयोग को गहरा करने का प्रयास करती है। हमारी भावना एक ऐसी दुनिया के निर्माण की है, जहां एकता हर मतभेद से ऊपर हो, जहां साझा लक्ष्य अलगाव की सोच को खत्म कर दे। जी-20 अध्यक्ष के रूप में, हमने वैश्विक पटल को बड़ा बनाने का संकल्प लिया था, जिसमें यह सुनिश्चित किया गया कि हर आवाज सुनी जाए और हर देश अपना योगदान दे। मुझे विश्वास है कि हमने कार्यों और स्पष्ट परिणामों के साथ अपने संकल्प पूरे किये है। जी-20 की भारत की अध्यक्षता के दौरान, यह विचार मानव केंद्रित प्रगति के आह्वान के रूप में प्रकट हुआ है। हम वन अर्थ के रूप में, मानव जीवन को बेहतर बनाने के लिए एक साथ आ रहे हैं। हम वन फ़ैमिली के रूप में विकास के लिए एक-दूसरे के सहयोगी बन रहे हैं। और वन फ्यूचर के लिए हम एक साझा उज्जवल भविष्य की ओर एक साथ आगे बढ़ रहे हैं। भारत के लिए, जी-20 की अध्यक्षता केवल एक उच्च स्तरीय कूटनीतिक प्रयास नहीं है। मदर ऑफ डेमोक्रेसी और मॉडल ऑफ डाइवर्सिटी के रूप में हमने इस अनुभव के दरवाजे दुनिया के लिए खोल दिये हैं।आज किसी काम को बड़े स्तर पर करने की बात आती है तो सहज ही भारत का नाम आ जाता है। जी-20 की अध्यक्षता भी इसका अपवाद नहीं है। यह भारत में एक जन आंदोलन बन गया है।जी-20 प्रेसीडेंसी का हमारा कार्यकाल खत्म हुआ भारत के 60 शहरों में 200 से अधिक बैठकें आयोजित की जा चुकी है। इस दौरान हम 125 देशों के लगभग एक लाख प्रतिनिधियों की मेजबानी कर चुके है। किसी भी प्रेसीडेंसी ने कभी भी इतने विशाल और विविध भौगोलिक विस्तार को इस तरह से शामिल नहीं किया है।भारत का सबसे तेज गति से बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाना कोई आकस्मिक घटना नहीं है। हमारे सरल, व्यावहारिक और सस्टेनेबल तरीकों ने कमजोर और वंचित लोगों को हमारी विकास यात्रा का नेतृत्व करने के लिए सशक्त बनाया है। अंतरिक्ष से लेकर खेल, अर्थव्यवस्था से लेकर उद्यमिता तक, भारतीय महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं। आज महिलाओं के विकास से आगे बढ़कर महिलाओं के नेतृत्व में विकास के मंत्र पर भारत आगे बढ़ रहा है। हमारी जी-20 प्रेसीडेंसी जेंडर डिजिटल डिवाइड को पाटने, लेबर फोर्स में भागीदारी के अंतर को कम करने और निर्णय लेने में महिलाओं की एक बड़ी भूमिका को सक्षम बनाने पर काम कर रही है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरी विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि दुनियां जीडीपी के दृष्टिकोण से हटकर अब मानव केंद्रित दृष्टिकोण की ओर बढ़ चली है।आओ मजबूत मानव श्रृंखला बनाकर मानव कल्याण कर मानवता का परिचय दें।अंतरराष्ट्रीय मंचों रूपी प्लेटफार्म से सशक्त कल्याणकारी मानवीय श्रृंखला बनाकर मानव केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना समय की मांग है:-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
दुनियां ने देखा भारत का आध्यात्मिक भाव-प्रभु श्री राम को 500 वर्षों बाद मिली मंदिर की छांव
गोंदिया
प्रभु श्री राम की वनवास से अयोध्या वापसी-वक्त ने अपने आप को दोहराया
प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा से प्रभु के जीवंत स्वरूप में आने के आभास से भक्तगण सराबोर हुए – एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया
वैश्विक स्तरपर 22 जनवरी 2024 सोमवार के दिन का इंतजार करते भारत ही नहीं पूरी दुनियां के भक्तों की आंखें तरस गई थी कि कब प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा मंदिर में सुखकारी रूप से होवे और हम प्रभु के जीवंत स्वरूप का दर्शन करें। बता दें कि हमारे बड़े बुजुर्गों ने ऐसा बताया है कि जब किसी भी व्यक्ति गुरु प्रभु महात्मा महामानव महापुरुष इत्यादि के स्वरूप में पूर्ण रूपेण पद्धति प्रक्रिया व धार्मिक अनुष्ठान प्राण प्रतिष्ठा की जाती है तो इसका मतलब यह माना गया है कि, उसमें उस प्राणी में प्राणों का संचार किया गया है, याने दूसरे शब्दों में अनुष्ठान कर उस स्वरूप को जीवित कर दिया जाता है जो अदृश्य रूप में होता है,मानवीय आंखों से दिख नहीं पता परंतु भक्त अगर हृदय की आंखों से देखे तो हाजरा हजूर प्रभु जरूर नजर आएंगे, बस इसी संज्ञान में प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान कर उनमें प्राणों का संचार किया गया है अब भक्तों के देखने का नजरिया है, अगर हृदय की आंखों से हम देखेंगे तो हम हाजरा हजूर प्रभु श्री राम के जीवंत दर्शन होंगे नहीं तो फिर वही कहावत कि,मानो तो मैं गंगा मां हूं ना मानो तो बहता पानी। अगर हृदय में विश्वास है तो हमें पत्थर में भी भगवान दिख जाते हैं, यदि हृदय में आस्थापूर्ण विश्वास नहीं है तो जीवंत प्रभु में भी पत्थर ही नजर आएगा ऐसी चर्चा मेरे दादाजी अक्सर अनेक मौका पर किया करते थे। जो बातें बचपनकी मैने सुनी वह आज जीवंत रूप में देख रहा हूं।पिछले कई दिनों से जिस तरह जोरदार भावपूर्ण तैयारीयों का नजारा हम मीडिया में देख रहे हैं, घर-घर व गांव, मेट्रो सिटी शहर को सजा हुआ, मैंने देखा तो रामायण में लिखी प्रभु श्री राम की वनवास से वापसी का मंजर मैं जीवंत देखने लगा, ऐसा लगा शायद हम हजारों वर्ष पूर्व की स्थिति त्रेतायुग में आ गए हैं। तब प्रभु श्री राम की 14 वर्षों के वनवास से वापसी हुई थी और संपूर्ण अयोध्या में दीपावली से भी बढ़कर माहौल था। हर व्यक्ति खुश था बस!! वही मंजर 22 जनवरी 2024 को देखा जब प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा हुई तो विश्व का हर राम भक्त खुशी से सराबोर होकर झूम उठा, मानो बस!! अब हमें प्रभु श्री राम मिल गए हैं, अब और कुछ नहींचाहिए। प्रभु दर्शन से ही हमारी सारी इच्छाएं पूर्ण हो गई है,यहभारतीयों का भाव पूरी दुनियां ने देख के कहा प्रभु श्री राम की वास्तव में वनवास से वापसी हुई है, जो 500 साल वनवास था जिसे वक्त को फिर दोहरा दिया है, चूंकि प्राण प्रतिष्ठा से पूरा विश्व सराबोर हुआ है, इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा से प्रभु के जीवंत स्वरूप में आने के आभास से भक्तगण सराबोर हुए हैं।
साथियों बात अगर हम 22 जनवरी 2024 को जोरदार ढंग से भावपूर्ण मन से मनाने की करें तो, प्राण प्रतिष्ठा में तैयारी ऐसी थी कि मानो असल दीपावली अबकी बार मनाई जाएगी। गली-चौराहों से लेकर टैक्सी, पेट्रोल पंपों और यहां तक कि घरों में भी राम धुन बज रहा है। पूजित अक्षत व निमंत्रण पत्र घर-घर पहुंचाने का असर ऐसा हो रहा है कि हर कोई खुद को इसआयोजन से सीधा जुड़ा हुआ महसूस करने लगा है। बृहस्पतिवार को शहर में प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व निकाली गई शोभा यात्रा में भारी संख्या में लोग शामिल हुए थे। भगवान राम की मनमोहक झांकी की अगुवाई में निकली यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के चलते करीब एक किमी तक केवल भगवामय राम भक्तों की टोली ही नजर आ रही थी। अयोध्या धाम में 22 जनवरी, 2024 को आयोजित श्री राम मंदिर के प्रतिष्ठापन समारोह के सुचारू और सफल संचालन के लिए अत्यधिक सावधानी के साथ व्यवस्था की गई थीं। पीएम निर्धारित अनुष्ठानों के अनुसार प्राण प्रतिष्ठा किए। इस दिनकरीब 8, हज़ार से अधिक अतिथि मंदिर मेंआए, इसके बाद 23 जनवरी से लाखों भक्त आएंगे।
साथियों बात अगर हम माता सीता के मायके जनकपुर मिथिला गांव नेपाल के खुशियों में सराबोर होने की करें तो, देवी सीता का मायका खुशी और उत्साह से भरा हुआ है। नेपाल में जनकपुरधाम में धूमधाम और उल्लास के साथ कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। जनकपुर निवासियों का कहना है कि प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन हमारे लिए भी खुशी की लहर लेकर आया है। हमने उस दिन घटनाओं की एक श्रृंखला की योजना बनाई थीं, जो सुबह शुरू हुई और दिन के अंत तक चली। सिंदूर के चूर्ण से रंगोली और फूलों से भगवान राम की तस्वीर बनाए। हम अपने घर में दीपावली भी मनाए। अयोध्या में मंदिर निर्माण से हम सभी खुश हैं। पूरा जनकपुर इससे खुश है। दीपावली मनाने के लिए तैयार लोग जनकपुर के एक सजन ने कहा, मैं व्यक्तिगत रूप से इससे काफी खुश और उत्साहित हूं।मैंनें 22 जनवरी को दीपावली मनाया और मंदिर में दीपक भी जलाए। मैं अपने दोस्तों और अन्य लोगों से 22 जनवरी को दीपावली मनाने के लिए कह कहा था। बता दें, जनकपुर धाम एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है यह भगवान राम की पत्नी देवी सीता के जन्मस्थान के रूप में प्रसिद्ध है। धार्मिक ग्रन्थों और पौराणिक कथाओं के अनुसार यह स्थान राजा जनक जो की माता सीता के पिता थे उनके राज्य मिथिला कीराजधानी हुआ करता था। यह वहीं स्थान है जहां से माता सीता प्रकट हुई थीं। इसी जगह पर जब राजा जनक खेत में हल चला रहे थे, तब उन्हें धरती से सोने का एक सुंदर संदूक या कलश मिला जिसमें देवी सीता थी। देवी सीता के मायके में उत्सव के बीच, शहर भर के लाउड स्पीकर जय श्री राम के नारे के साथ-साथ राम लला को समर्पित गीतों की सार्वजनिक स्क्रीनिंग के साथ गूंज रहे हैं। जनकपुर में रेलवे स्टेशन के बगल में स्थित महाबीर मंदिर मेंशनिवार को अस्ताजाम शुरू हुआ, जिसमें चौबीसों घंटे राम भजनों का जाप किया गया। भक्तों ने राम के नारे लिखे स्कार्फ को पहना। जनकपुर में अस्तजाम के भक्तों और आयोजकों में से एक कमल हाथी ने कहा, भगवान हनुमान के बिना, भगवान राम कहीं नहीं जाएंगे, इसलिए हमने अष्टजाम का तीन दिवसीय कार्यक्रम शुरू किया है, जो चौबीसों घंटे चलता है। 22 जनवरी को हम हनुमान आराधना किए। इस दौरान 12 बार हनुमान चालीसा का पाठ किए और बाद में शाम को हम तेल से भरे मिट्टी के दीपक जलाएंगे।
साथियों बात अगर हम 23 जनवरी 2024 से आम भक्तों के अयोध्या यात्रा के लिए गाइडेंस की करें तो, बता दें किदर्शनार्थियों के लिए अयोध्या में पूरी व्यवस्था की गई है। 22 जनवरी के बाद आने वाले दिनों में दर्शनार्थियों के लिए व्यवस्थाएं हैं। अगर आप लखनऊ-गोरखपुर हाइवे के रास्ते अयोध्या में प्रवेश करेंगे तो सरयू पुल से पहले आपको जो मार्ग मिलेगा, उसका नाम धर्मपथ है। इसी रास्ते से अयोध्या में एंट्री होगी। इसके बाद लगभग 2 किलोमीटर सफर करने पर लता मंगेशकर चौक मिलेगा, जिसे नया घाट भी कहते हैं. इसके ठीक सामने राम की पैड़ी है और इसके किनारे मंदिरों की लंबी खूबसूरत श्रृंखला है।राम की पैड़ी के किनारे ही अति प्राचीन और प्रतिष्ठित मंदिर नागेश्वर नाथ भी है। अयोध्या पहुंचने वाले लोग यहां भोलेनाथ के दर्शन जरूर करते हैं। सरयू की जलधारा राम की पैड़ी से होकर वापस सरयू में मिल जाती है. इसके किनारे सरयू का तट दिखाई देगा, जहां आप नौकायन और मोटर बोट का आनंद उठा सकते हैं। राम की पैड़ी का लुत्फ लेने के बाद जब आप वापस लता मंगेशकर चौक पहुंचेंगे तो अयोध्या की राजकुमारी का पार्क देख सकते हैं, जिन्हें दक्षिण कोरिया में रानी के नाम से जाना जाता है। राजकुमारी का पार्क इसी नाम से है। दक्षिण कोरिया में उनकी शादी कर्क वंश के राजकुमार से हुई थी। आज दक्षिण कोरिया की बड़ी आबादी इसी वंश की है। हनुमानगढ़ी के बगल में ही दशरथ महल और कनक भवन मंदिर है। कनक भवन मंदिर के बारे में मान्यता है कि माता सीता को कैकई ने मुंह दिखाई में यह सोने का महल दिया था। श्री राम जन्मभूमि मंदिर जाने के लिए दशरथ महल के पास से भी रास्ता है और हनुमानगढ़ी के रास्ते बाहर निकलकर राम पथ के जरिए भी आप श्री राम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य मार्ग पर पहुंच सकते हैं। जन्मभूमि पथ से प्रवेश करते ही बाएं तरफ आपको ट्रस्ट सुविधा केंद्र मिलेगा, जहां सामान रखने के लिए मुफ्त लॉकर , स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। अगर किसी को चलने में असुविधा है तो सहायक के साथ उसे पहुंचाने की भी व्यवस्था है। यहीं पर मंदिर में दोपहर और सायंकाल आरती का पास भी मिल जाता है। साथियों बात अगर हम दूरदर्शन मीडिया से सीधा प्रसारण करने की करें तो, सीधा प्रसारण समारोह के सीधे प्रसारण के लिए व्यापक व्यवस्था की गई । दूरदर्शन पूरे कार्यक्रम का डीडी न्यूज और डीडी नेशनल चैनलों पर 4के गुणवत्ता में सीधा प्रसारण किया। 23 जनवरी, 2024 को दूरदर्शन आरती और जनता के लिए श्री राम मंदिर खुलने का सीधा प्रसारण करेगा। दूरदर्शन 22.01.24 को एएनआई टीवी और पीटीआई वीडियो के साथ अयोध्या में कार्यक्रम की क्लीन फ़ीड साझा किया। सभी टीवी चैनल जो एजेंसी के ग्राहक हैं वे वहां से फ़ीड प्राप्त कर सकते हैं।अन्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रसारकों के लिए, क्लीन फ़ीड की कुंजी के साथ एक यूट्यूब लिंक तैयार किया गया है। यह लिंक संबंधित प्रसारकों के अनुरोध पर उनके साथ साझा किया जाएगा। यूट्यूब लिंक प्राप्त करने के लिए, घरेलू प्रसारक पत्र सूचना कार्यालय के पास अपना अनुरोध भेज सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय टीवी चैनलों को अपना अनुरोध सीधे प्रसार भारती से करना होगा। संपर्क विवरण पीआईबी मीडिया एडवाइजरी में उपलब्ध हैं, जिसे यहां देखा जा सकता है।यदि क्लीन फ़ीड की आवश्यकता नहीं है, तो चैनलों के पास डीडी न्यूज़ से पैचिंग का भी विकल्प होगा। इस मामले में सौजन्य : दूरदर्शन दिया जा सकता है।
साथियों बात अगर हम दिए सहित खुशियां मनाने की करें तो, 22 जनवरी को अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के बाद शाम को पूरा शहर 10 लाख दीयों की चमक से जगमगाएगा। सरकार की अपील पर घरों, दुकानों, धार्मिक स्थलों से है। दीपों से रौशन होंगे निजी संस्थान सरकार ने पूरे प्रदेश से इस ऐतिहासिक अवसर को उत्सव के रूप में मनाने की अपील की है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि दुनियां ने देखा भारत का आध्यात्मिक भाव-प्रभु श्री राम को 500 वर्षों बाद मिली मंदिर की छांव।प्रभु श्री राम की वनवास से अयोध्या वापसी-वक्त ने अपने आप को दोहराया।प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा से प्रभु के जीवंत स्वरूप में आने के आभास से भक्तगण सराबोर हुए।
संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
दुनियां भर में पहली बार अभूतपूर्व ऐतिहासिक राम नाम की गूंज-आध्यात्मिक अस्था बढ़ी
गोंदिया
श्री राम जय राम जय जय राम
वैश्विक स्तरपर दुनियां के अधिकतम देश राम नाम के घोष से सराबोर हुए – एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया
वैश्विक स्तरपर पिछले 500 वर्षों से शायद ही ऐसा कभी कोई पल आया होगा जिसका आज भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनियां के करीब करीब हर देश में ऐसा अलौकिक उत्साह का माहौल प्रतीत हुआ है। आज भारत का शायद ही कोई नगर शहर ऐसा होगा जहां राम नाम का नगाड़ा ना बजा हो, प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा से सराबोर होकर चारों तरफ श्री राम जय राम जय जय राम की भाव भक्ति से आराधना की जा रही है। बता दें ध्यान 20 और 21 जनवरी 2024 को दर्शन के लिए मंदिर परिसर में आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। 22 जनवरी से यह सब खुल जाएंगे। मैंने अपनी चावल नगरी गोंदिया में एक ग्राउंड रिपोर्टिंग कर 85 प्लस बुजुर्गों से बात की तो उन्होंने बताया हमने इन 85 वर्षों में कभी भी ऐसा माहौल नहीं देखा मेरा मानना है की पूरी दुनियां में ऐसा कोई भी क्षण नहीं आया होगा जितना उत्साह आज दुनियां में अधिकतम देशों में दिख रहा है। हर देश में मूल भारतीयों द्वारा जश्न मनाया जा रहा है। हमारी छोटी सी राइससिटी गोंदिया नगरी में भी पूरा नगर राम नाम के गूंज से सराबोर हो उठा है।चारों तरफ राम नाम के बैनर झंडा फूलों के हर गली चौराहे पर प्रभु श्री राम के स्वागत में गेट रंग-बिरंगे पोस्टर से लबालब दिख रहा है और प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा से हर देशवासी का सीना गर्व से ऊंचा हो गया है, चूंकि पूरे देश में श्री राम जय राम जय जय राम की गूंज हो रही है इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, वैश्विक स्तरपर दुनियां में अधिकतम देश राम नाम की गूंज से सराबोर हुए।
साथियों बात अगर हम प्राण प्रतिष्ठा पर हर देशवासी के गौरवन्वित होने की करें तो, अयोध्या में भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर हर नागरिक गौरवान्वित है। इसके लिए कई साधु-संतों ने वर्षों से मौन व्रत रखकर तपस्या की तो कइयों ने अपने प्राणों की आहुति दी। मंदिर निर्माण और मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा पर कोई अपना मौन व्रत खोलेगा तो कोई प्रभु श्रीराम का जयघोष करेगा। धर्म गुरु बोले कि यह दिन भारत और दुनिया भर के लिए ऐतिहासिक है। पूरा देश राममय हो गया है। भगवान श्रीराम हर व्यक्ति के प्रेरणा स्रोत हैं। श्री राम भारत के प्रभात का प्रथम स्वर हैं। देश की उच्चता व दिव्यता देखनी हो तो प्रभु श्री राम में वह दृष्टिगोचर होती है। भारत के लिए ऐतिहासिक दिन है। इस दिन के लिए संतों और आम जनमानस ने अपने प्राणों की आहुति दी है। देश में स्वर्णिम इतिहास लिखा जा रहा है। यह दिन महादीपावली का है। हिंदू समाज खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
साथियों बात अगर हम अयोध्या सहित पूरा देश राम नाम राम में सराबोर होने की करें तो भगवान राम के विग्रह के प्राण प्रतिष्ठा हैं, लेकिन अयोध्या समेत पूरा देश राममय है। यूपी ही नहीं दूसरे प्रांतों से आने वाले लोगों के परिधान भी राममय हो गया है। आलम यह है कि हर शहर में प्राण प्रतिष्ठा आस्था और संस्कृति के प्रतीक बन गया है। राम लला की प्राण प्रतिष्ठा की गूंज अयोण्या में भव्य रूप से हो रही है वहीं दूसरे शहरों के मंदिरों में भी पूजा अर्चना का दौर शुरू हो गया है। बाजार भी लोगों के उत्साह और उल्लास को कैश करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। बाजार में रामनामी वस्त्रों की भरमार है। श्री राम लिखे कुर्ते-गमछे से लेकर राम मंदिर प्रिंट वाली साड़ियों की जमकर बिक्री हो रही है। लोग 22 जनवरी को होने वाले आयोजनों में पहनने के लिए इन रामनामी वस्त्रों को खरीद रहे हैं।अयोध्या में भव्य राम मंदिर में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के दिन 22 जनवरी को आस्था में सराबोर लोग दिवाली से बड़ी दीपावली मनाई जा रही है। यूपी का माहौल कुछ इस तरह है कि हर गली और नुक्कड़ राममय हो चुका है। घरों मोहल्लों और आसपास के मंदिरों को सजाने के साथ ही परिवार भर के लिए नए कपड़े खरीदे जा रहे हैं। पुरुष और महिलाएं सभी उल्लास के साथ रामलला के स्वागत कार्यक्रमों की तैयारियों में जुटे हैं। पुरुषों के साथ महिलाओं ने भी बहुत खुशी और उमंग हैं। उनकी खास डिमांड पर बाजार में रामनामी सिल्क की साड़ियां भी आ गईं हैं। इस पर राम मंदिर की आकृति उकेरी गई है। वहीं पुरुष भी भगवा रंग के पोशाक में दिखने को तैयार हैं।उधर जानकी की जन्मस्थली सीतामगढ़ी में भी धूम मची हुई है। अयोध्या में 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दिन जानकी जन्मस्थली सीतामढ़ी में भी रामोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। जिले के मठ मंदिरों, नदी तट, सीताकुण्ड में महाआरती, अलौकिक दीपावली व धार्मिक स्थलों को सजाने की तैयारी चल रही है। धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थलों पर विशेष साफ-सफाई की जा रही है। पुनौराधाम, जानकी स्थान, हलेश्वर स्थान, पंथपाखर आदि तीर्थ क्षेत्रों में उत्सव की तैयारी है। नगर निगम ने भी सात दिवसीय स्वच्छ तीर्थ कैंपेन चला कर धर्म स्थलों के आसपास साफ-सफाई करवा रहा है। श्री जानकी प्राकट्य स्थली तीर्थ क्षेत्र के बैनर तले होनेवाले कार्यक्रम में शहर की साफ-सफाई के बाद रंग अबीर से रंगोली व मार्गों की सजावट की जाएगी। जानकी स्थान के उर्विजा कुण्ड को फूलों से सजाया जाएगा। पूरे शहर को सजाने की योजना है। शहर की साफ-सफाई व सजाने के साथ प्रवचन व संगीत के लिए साउंड व अयोध्या से सीधा प्रसारण के लिए जगह-जगह बड़ी स्क्रीन लगाई है। शहर में रामोत्सव को आयोजन होगा। पूजा-अर्चना के साथ उस दिन अलौकिक दीपावली मनायी जाएगी। भजन-कीर्तन का भी आयोजन होगा। पुनौराधाम में प्रभु की प्राण-प्रतिष्ठा के दिन सीता कुंड पर महाआरती होगी। पूरे तीर्थ क्षेत्र को 51 हजार दीपों से सजाकर दीपोत्सव मनाया जाएगा। महंत कौशल किशोर दास के नेतृत्व में कार्यक्रम की तैयारी जोरों पर चल रही है। श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण से हर जगह खुशी का माहौल है। 22 जनवरी को अयोध्या में आयोजित समारोह को देखने के लिए सभी धर्म स्थलों व सार्वजनिक स्थलों पर बड़ी स्क्रीन लगायी है। इसके लिए रजत द्वार जानकी मंदिर, पुनौराधाम, महावीर स्थान व देवी मंदिरों में जगह चिह्नित की गई है। जिले के लोगों को रामजन्म भूमि के विकास के बाद जानकी जन्म स्थली के विकास की आस जगी है। लोग कहते हैं बिन सिया बिन राम भी अधूरे हैं। अयोध्या से मिथिला के लिए आनंद विहार दरभंगा वाया अयोध्या वसीतामढ़ी ट्रेन के उद्घाटन के मौके पर जिस तरह प्रधानमंत्री सीतामढ़ी के साधु-संतों से रू-ब-रू हुए थे।
साथियों बात अगर हम 5 अगस्त 2020 को प्रभु श्री राम मंदिर के भूमि की पूजन के अवसर पर माननीय पीएम के संबोधन की आज के परिपेक्ष में हकीकत को देखें तो उन्होंने उसे समय कहा था, राम काजु कीन्हे बिनु मोहि कहाँ बिश्राम॥भारत,आज भगवान भास्कर के सानिध्य में सरयू के किनारे एक स्वर्णिम अध्याय रच रहा है। कन्याकुमारी से क्षीरभवानी तक, कोटेश्वर से कामाख्या तक, जगन्नाथ से केदारनाथ तक, सोमनाथ से काशी विश्वनाथ तक, सम्मेद शिखर से श्रवणबेलगोला तक, बोधगया से सारनाथ तक, अमृतसर से पटना साहिब तक, अंडमान से अजमेर तक, लक्ष्यद्वीप से लेह तक, आज पूरा भारत,राममय है। पूरा देश रोमांचित है, हर मन दीपमय है। आज पूरा भारत भावुक भी है। सदियों का इंतजार आज समाप्त हो रहा है। करोड़ों लोगों को आज ये विश्वास ही नहीं हो रहा कि वो अपने जीते-जी इस पावन दिन को देख पा रहे हैं। जैसे पत्थरों पर श्रीराम लिखकर रामसेतु बनाया गया, वैसे ही घर-घर से, गांव-गांव से श्रद्धापूर्वक पूजी शिलाएं, यहां ऊर्जा का स्रोत बन गई हैं। देश भर के धामों और मंदिरों से लाई गई मिट्टी और नदियों का जल, वहां के लोगों, वहां की संस्कृति और वहां की भावनाएं, आज यहां की शक्ति बन गई हैं। वाकई, ये न भूतो न भविष्यति है। भारत की आस्था, भारत के लोगों की सामूहिकता की ये अमोघ शक्ति, पूरी दुनिया के लिए अध्ययन का विषय है,शोध का विषय है। दीन दयाल बिरिदु संभारी’।यानि जो दीन है, जो दुखी हैं, उनकी बिगड़ी बनाने वाले श्रीराम हैं।जीवन का ऐसा कोई पहलू नहीं है, जहां हमारे राम प्रेरणा न देते हों। भारत की ऐसी कोई भावना नहीं है जिसमें प्रभु राम झलकते न हों। भारत की आस्था में राम हैं, भारत के आदर्शों में राम हैं! भारत की दिव्यता में राम हैं, भारत के दर्शन में राम हैं! हजारों साल पहले वाल्मीकि की रामायण में जो राम प्राचीन भारत का पथ प्रदर्शन कर रहे थे, जो राम मध्ययुग में तुलसी, कबीर और नानक के जरिए भारत को बल दे रहे थे, वही राम आज़ादी की लड़ाई के समय बापू के भजनों में अहिंसा और सत्याग्रह की शक्ति बनकर मौजूद थे! तुलसी के राम सगुण राम हैं, तो नानक और कबीर के राम निर्गुण राम हैं! हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है-न्राम सदृशो राजा, प्रथिव्याम् नीतिवान् अभूत॥ यानि कि, पूरी पृथ्वी पर श्रीराम के जैसा नीतिवान शासक कभी हुआ ही नहीं! श्रीराम की शिक्षा है- नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना॥ कोई भी दुखी न हो, गरीब न हो। श्रीराम का सामाजिक संदेश है- प्रहृष्ट नर नारीकः,समाज उत्सव शोभितः॥ नर-नारी सभी समान रूप से सुखी हों। श्रीराम का निर्देश है- कच्चित् ते दयितः सर्वे, कृषि गोरक्ष जीविनः। किसान, पशुपालक सभी हमेशा खुश रहें। श्रीराम का आदेश है कश्चिद्वृद्धान्चबालान्च, वैद्यान् मुख्यान् राघव। त्रिभि: एतै: वुभूषसे॥ बुजुर्गों की,बच्चों की, चिकित्सकों की सदैव रक्षा होनी चाहिए। श्रीराम का आह्वान है- जौंसभीत आवासरनाई रखिहं उताहिप्रानकीनाई॥ जो शरण में आए ,उसकी रक्षा करना सभी का कर्तव्य है। श्रीराम का सूत्र है- जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी॥ अपनी मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर होती है। और भाइयों और बहनों, ये भी श्रीराम की ही नीति है- भयबिनुहोइन प्रीति॥ इसलिए हमारा देश जितना ताकतवर होगा, उतनी ही प्रीति और शांति भी बनी रहेगी।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि श्री राम जय राम जय जय राम।दुनियां भर में पहली बार अभूतपूर्व ऐतिहासिक राम नाम की गूंज-आध्यात्मिक अस्था बढ़ी।वैश्विक स्तरपर दुनियां के अधिकतम देश राम नाम के घोष से सराबोर हुए।
संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र