सादगी, ईमानदारी और दृढ़ नेतृत्व की ऐसी मिसाल, जिसे देश आज भी श्रद्धा से याद करता है।

सादगी, ईमानदारी और दृढ़ नेतृत्व की ऐसी मिसाल, जिसे देश आज भी श्रद्धा से याद करता है।

भारत के राजनीतिक इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे हैं, जिनकी पहचान उनके पद से अधिक उनके आचरण से बनी। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री उन्हीं महान व्यक्तित्वों में शामिल हैं। अत्यंत साधारण जीवन, विनम्र स्वभाव, दृढ़ इच्छाशक्ति और सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी के कारण उन्होंने देशवासियों के मन में विशेष स्थान बनाया। 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में जन्मे शास्त्रीजी का जीवन संघर्ष, राष्ट्रसेवा और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरक गाथा है।लाल बहादुर शास्त्री के पिता शारदा प्रसाद एक शिक्षक थे। जब लाल बहादुर मात्र डेढ़ वर्ष के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया। उनकी माता रामदुलारी ने कठिन परिस्थितियों में अपने बच्चों का पालन-पोषण किया। परिवार में उन्हें प्यार से ‘नन्हे’ कहा जाता था। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने शिक्षा प्राप्त की और आगे चलकर राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ गए। प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक जीवनी के अनुसार, वाराणसी में शिक्षा के दौरान वे स्वतंत्रता आंदोलन के विचारों से प्रभावित हुए और महात्मा गांधी के आह्वान पर असहयोग आंदोलन में शामिल होने के लिए अपनी पढ़ाई तक छोड़ दी थी।

वरुण कुमार
लेखक एवं कवि

बाद में उन्होंने काशी विद्यापीठ में अध्ययन किया। वहां से उन्हें ‘शास्त्री’ की उपाधि मिली, जो आगे चलकर उनके नाम का स्थायी हिस्सा बन गई। शास्त्रीजी ने जातिसूचक ‘श्रीवास्तव’ शब्द का प्रयोग छोड़कर केवल ‘लाल बहादुर शास्त्री’ नाम अपनाया। उनका जीवन इस बात का उदाहरण बना कि व्यक्ति की पहचान उसके कर्मों से बनती है।स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध आंदोलनों में भाग लेने के कारण कई बार जेल गए। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, उन्होंने स्वतंत्रता संघर्ष में कुल लगभग सात वर्ष ब्रिटिश जेलों में बिताए। आजादी के बाद भी उनकी सार्वजनिक जीवन की यात्रा लगातार आगे बढ़ती रही। उत्तर प्रदेश में संसदीय सचिव और मंत्री के रूप में काम करने के बाद वे राष्ट्रीय राजनीति में आए और केंद्र सरकार में रेल, परिवहन एवं संचार, वाणिज्य एवं उद्योग तथा गृह जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली।उनके राजनीतिक जीवन का एक उल्लेखनीय प्रसंग रेल मंत्री के रूप में उनका इस्तीफा है। एक गंभीर रेल दुर्घटना के बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए पद से इस्तीफा दिया। यह घटना सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही और नैतिकता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के उदाहरण के रूप में अक्सर याद की जाती है। प्रधानमंत्री कार्यालय के आधिकारिक विवरण में भी इस प्रसंग का उल्लेख मिलता है।

27 मई 1964 को जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद कुछ समय के लिए गुलजारीलाल नंदा ने कार्यवाहक प्रधानमंत्री का दायित्व संभाला। इसके बाद 9 जून 1964 को लाल बहादुर शास्त्री ने देश के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। उनका प्रधानमंत्री कार्यकाल भले ही छोटा रहा, लेकिन इस अवधि में देश को कई महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ा।1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान शास्त्रीजी ने देश का नेतृत्व किया। उन्होंने सैनिकों के मनोबल को मजबूत किया और किसानों की भूमिका को भी राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा। इसी दौर में उनका प्रसिद्ध आह्वान “जय जवान, जय किसान” देश की सामूहिक चेतना का हिस्सा बना। यह नारा सैनिक और किसान—दोनों के योगदान के महत्व को रेखांकित करता था।शास्त्रीजी का व्यक्तित्व केवल युद्धकालीन नेतृत्व तक सीमित नहीं था। वे खाद्य संकट और कृषि उत्पादन जैसी चुनौतियों को भी गंभीरता से देखते थे। उनके कार्यकाल में कृषि उत्पादन बढ़ाने और देश को खाद्य आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे ले जाने के प्रयासों को गति मिली। बाद के वर्षों में हरित क्रांति के लिए तैयार हुई परिस्थितियों में उनके समय की नीतिगत दिशा का भी उल्लेख किया जाता है।

11 जनवरी 1966 को ताशकंद में उनका निधन हुआ। इससे एक दिन पहले उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम के बाद हुए ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। उनकी मृत्यु आज भी भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में गिनी जाती है। 2026 में उनके निधन की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर ताशकंद स्थित उनके स्मारक पर भी श्रद्धांजलि दी गई।लाल बहादुर शास्त्री को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उनका जीवन बताता है कि बड़े पद के लिए केवल राजनीतिक शक्ति नहीं, बल्कि चरित्र, अनुशासन, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी भी आवश्यक है। वे ऐसे प्रधानमंत्री के रूप में याद किए जाते हैं, जिनकी सादगी उनके व्यक्तित्व की कमजोरी नहीं, बल्कि उनकी शक्ति थी।

आज जब सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिकता पर चर्चा होती है, तब लाल बहादुर शास्त्री का जीवन एक ऐतिहासिक संदर्भ के रूप में सामने आता है। उनका जन्मदिन केवल एक महान नेता को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि यह सोचने का भी दिन है कि राष्ट्रसेवा का अर्थ पद और प्रतिष्ठा से कहीं आगे जाकर कर्तव्य, ईमानदारी और त्याग से जुड़ा है।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर जिला प्रशासन ने अर्पित की श्रद्धांजलि।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर जिला प्रशासन ने अर्पित की श्रद्धांजलि।

सरायकेला-खरसावां

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती के अवसर पर आज दिनांक 02 अक्टूबर 2026 को जिला प्रशासन द्वारा श्रद्धांजलि एवं माल्यार्पण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस अवसर पर महात्मा गांधी की गुदड़ी बाजार, सरायकेला स्थित प्रतिमा एवं समाहरणालय परिसर में स्थापित तैलचित्र तथा भारत रत्न श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की कोर्ट मोड़ स्थित प्रतिमा एवं समाहरणालय में स्थापित तैलचित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

कार्यक्रम में उपायुक्त नितिश कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक मनोज सर्वगिंयारी, उप विकास आयुक्त रीना हांसदा, अनुमंडल पदाधिकारी सरायकेला अभिनव प्रकाश सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

उपायुक्त ने सत्य, अहिंसा एवं स्वच्छता के आदर्शों को अपनाने का किया आह्वान

उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने अपने संबोधन में महात्मा गांधी के सत्य एवं अहिंसा के सिद्धांतों को जीवन एवं कार्य व्यवहार में अपनाने पर बल दिया। उन्होंने स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ते हुए स्वच्छ एवं स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गांधी जी के विचार आज भी समाज एवं प्रशासन के लिए मार्गदर्शक हैं।

पुलिस अधीक्षक मनोज सर्वगिंयारी ने अपने संबोधन में भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री जी की सादगी, कर्तव्यनिष्ठा एवं देशसेवा के आदर्शों को स्मरण करते हुए सार्वजनिक दायित्वों के निर्वहन में ईमानदारी, अनुशासन एवं जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने दोनों महान विभूतियों के आदर्शों को आत्मसात करते हुए समाज एवं राष्ट्रहित में योगदान देने का संदेश दिया।

गम्हरिया प्रखंड परिसर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री जी जयंती पर श्रद्धांजलि. फूलकांत झा ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया नमन।

गम्हरिया प्रखंड परिसर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री जी जयंती पर श्रद्धांजलि. फूलकांत झा ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया नमन।

सरायकेला/गम्हरिया

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की जयंती के अवसर पर गम्हरिया प्रखंड परिसर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता फूलकांत झा ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी बापू जी की प्रतिमा पर फूल माला पहनाकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन. सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के मार्ग पर चलकर उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी और मानवता के लिए शांति, समानता एवं भाईचारे का संदेश दिया. गांधी जी के विचार आज भी हमें अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, समाज में सद्भाव बनाए रखने और राष्ट्रहित में मिलकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं.

वहीं इस मौके पर, पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री जी की भी जयंती पर सच्ची श्रद्धांजलि दी गई.

पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न, सादगी और ईमानदारी की मिसाल श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन. स्वतंत्रता संग्राम से लेकर देश के प्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्रसेवा तक, शास्त्री जी का जीवन त्याग, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक रहा.
‘जय जवान, जय किसान’ का उनका संदेश देश के अन्नदाताओं और वीर जवानों के प्रति सम्मान तथा राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को रेखांकित करता है. शास्त्री जी के सादगीपूर्ण जीवन और राष्ट्रसेवा की विरासत को सदैव स्मरण किया जाएगा.
इस मौके पर मुख्य रूप से गम्हरिया प्रखंड उपाध्यक्ष इंद्रकांत झा, प्रखंड महासचिव सचिव धनंजय गोप, प्रकाश झा, सूरज महतो और अन्य लोग उपस्थित थे.

चित्रगुप्त महासमिति ने जयंती पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को दी श्रद्धांजलि।

चित्रगुप्त महासमिति ने जयंती पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को दी श्रद्धांजलि।

सरायकेला/गम्हरिया

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और देश के पूर्व प्रधानमंत्री की जयंती के अवसर पर चित्रगुप्त महासमिति की ओर से कार्यक्रम का आयोजन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। गम्हरिया के चित्रगुप्त भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में सर्वप्रथम उपस्थित सदस्यों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और शास्त्री जी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए समिति के अध्यक्ष कृष्ण मुरारी श्रीवास्तव ने लोगों से गांधी और शास्त्री के आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के बल पर देश को आजादी की राह दिखाई। उनके विचार आज भी दुनिया को शांति, सद्भाव और मानवता का संदेश देते हैं। वहीं, लाल बहादुर शास्त्री सादगी, ईमानदारी, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण के प्रतीक थे। उनका ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा देश की सुरक्षा और समृद्धि में जवानों तथा किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। कार्यक्रम को समिति के महासचिव संजय कुमार वर्मा, उपाध्यक्ष महेंद्र प्रसाद कर्ण आदि ने भी संबोधित किया।

इस मौके पर कोषाध्यक्ष अभय लाभ, भूदेव वर्मा, आशीष कुमार श्रीवास्तव, केपी श्रीवास्तव, अमित कुमार, योगेश्वर कुमार सिन्हा, सुभाष चंद्र दास, प्रभाष चंद्र श्रीवास्तव, मुकेश कुमार समेत कई सदस्य उपस्थित थे।

2 अक्टूबर पर झारखंड क्राइम रिपोर्टर परिवार की ओर से गांधी-शास्त्री जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।

2 अक्टूबर पर झारखंड क्राइम रिपोर्टर परिवार की ओर से गांधी-शास्त्री जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।

सरायकेला-खरसावां

सत्य, अहिंसा और जय जवान जय किसान के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प

2 अक्टूबर को पूरे देश के साथ कोल्हान भी दो महान विभूतियों को याद कर रहा है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (जन्म 2 अक्टूबर 1869) और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री (जन्म 2 अक्टूबर 1904) की जयंती पर झारखंड क्राइम रिपोर्टर परिवार की ओर से सभी पाठकों, मजदूरों, किसानों और जनहित से जुड़े लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं।

महात्मा गांधी ने हमें “सत्य और अहिंसा” का रास्ता दिखाया। वहीं लाल बहादुर शास्त्री जी ने “जय जवान जय किसान” का नारा देकर देश के जवान और किसान दोनों का सम्मान बढ़ाया।

झारखंड क्राइम रिपोर्टर परिवार ने इस अवसर पर संकल्प लिया है कि:
1.  सत्य की पत्रकारिता जारी रहेगी
2.  मजदूर-किसान हित की खबरें प्राथमिकता पर रहेंगी
3.  भ्रष्टाचार के खिलाफ निडर होकर आवाज उठाई जाएगी

कोल्हान मजदूर यूनियन और किसान संगठनों ने भी इस दिन पर अपने कार्यक्रम आयोजित किए हैं। कई जगह स्वच्छता अभियान और किसान सम्मान समारोह हो रहे हैं।

जनहित में संदेश: आइए, गांधी जी के सत्य और शास्त्री जी के सेवा भाव को अपने जीवन में अपनाएं।

स्वदेशी जागरण मंच के द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती मनाई गई।

स्वदेशी जागरण मंच के द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती मनाई गई।

सरायकेला-खरसावां

स्वदेशी जागरण मंच के द्वारा प्रत्येक वर्ष स्वदेशी सप्ताह 25 सितम्बर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के जयंती से लेकर 2 अक्टूबर गांधी जयंती तक मनाई जाती है। जिसमें स्वदेशी के विषय में जन जागरण अभियान चलाया जाता है। इस क्रम में छोटा गम्हरिया में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती मनाई गई।

इसकी अध्यक्षता स्वदेशी जागरण मंच के सरायकेला खरसावां जिला के संयोजक अजीत कुमार सिंह ने की।कार्यक्रम का शुभारंभ पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए श्रद्धांजलि देकर किया गया।

कार्यक्रम में पर्यावरण प्रमुख रश्मि साहू संबोधित करते हुए कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी एकात्म मानववाद के प्रणेता थे। उनके संकल्प ने समाज में सबसे आखिरी व्यक्ति के उत्थान और उनके विकास को बढ़ावा देने का काम किया। आत्मनिर्भर भारत के लिए पारंपरिक हुनर से स्वरोजगार को बढ़ावा देना है। घरेलू उपयोग के लिए अपने मोहल्ले,शहर,राज्य फिर देशवासियों द्वारा निर्मित वस्तुओं का ही खरीद बिक्री करें।

इस मौके पर कोष प्रमुख प्रमोद अग्रवाल,पत्रिका प्रमुख हरिशंकर शाह,नंद किशोर चौधरी, प्रकाश कुंवर, विकास रॉय,प्रमोद पांडेय,राजन साह,आशुतोष पांडेय, आदर्श दुबे, पवन यादव, रोहित दुबे, अभिजीत नंदी,शुभम गोप,सुब्रत मंडल, राकेश मंडल, आशीष मंडल, विशाल प्रमाणिक समेत सम्मानित कई कार्यकर्ता सम्मिलित हुए।

नन्ही परी अंशिका का जन्मदिन, घर में खुशी का माहौल।

नन्ही परी अंशिका का जन्मदिन, घर में खुशी का माहौल।

सरायकेला/आदित्यपुर

रेनू इंटरप्राइजेज परिवार की नन्ही लाडली अंशिका का आज जन्मदिन है। इस खास मौके पर पूरे परिवार में हर्ष और उल्लास का माहौल बना हुआ है।

नन्ही अंशिका अपनी मासूम मुस्कान और चंचल अदा से सभी का मन मोह लेती है। आज उसके जन्मदिन पर परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों ने उसे ढेर सारी बधाई और आशीर्वाद दिया।

अंशिका के बुआ-फूफा सहित पूरे रेनू इंटरप्राइजेज परिवार की ओर से कामना की गई है कि बिटिया खूब पढ़े-लिखे, हमेशा स्वस्थ रहे और जीवन में खूब तरक्की करे। सभी ने भगवान से उसकी लंबी उम्र और उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना की।

परिजनों ने बताया कि शाम को समारोह में केक काटकर जन्मदिन धूमधाम से मनाया जाएगा।

जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं, प्यारी अंशिका! ईश्वर तुम्हें हमेशा खुश रखे।

स्वर सम्राट किशोर कुमार की 97वीं जयंती पर गम्हरिया में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम, अनिल ठाकुर बने मुख्य अतिथि।

स्वर सम्राट किशोर कुमार की 97वीं जयंती पर गम्हरिया में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम, अनिल ठाकुर बने मुख्य अतिथि।

सरायकेला/गम्हरिया

स्वर सम्राट एवं महान पार्श्वगायक किशोर कुमार की 97वीं जयंती के अवसर पर भारती विविध कला मंदिर, गम्हरिया द्वारा एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में इंटक जिला अध्यक्ष एवं गम्हरिया प्रखंड अध्यक्ष अनिल ठाकुर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इसके बाद मुख्य अतिथि अनिल ठाकुर का पुष्पगुच्छ भेंट कर गर्मजोशी से स्वागत एवं सम्मान किया गया। वहीं इंटक जिला महासचिव राजू रजक को भी बुके देकर सम्मानित किया गया।
अपने संबोधन में मुख्य अतिथि अनिल ठाकुर ने कहा कि किशोर कुमार केवल एक महान पार्श्वगायक ही नहीं, बल्कि भारतीय संगीत जगत की अमूल्य धरोहर हैं। उनकी मधुर आवाज और सदाबहार गीत आज भी हर पीढ़ी के लोगों के दिलों में जीवंत हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे महान कलाकारों की जयंती मनाना नई पीढ़ी को उनकी कला और योगदान से परिचित कराने का एक सार्थक प्रयास है। इस अवसर पर इंटक महिला जिला अध्यक्ष रानी शर्मा, उर्मिला देवी मंडल, अध्यक्ष संजीव कुमार दास, अध्यक्ष अर्जुन दास, कोसा अध्यक्ष अर्जुन दास तथा छोटा गम्हरिया वार्ड पार्षद अजीत सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग एवं संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने किशोर कुमार के सदाबहार गीतों की मनमोहक प्रस्तुति देकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। पूरा वातावरण उनके अमर गीतों से गूंज उठा और उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम का समापन महान पार्श्वगायक किशोर कुमार को सामूहिक श्रद्धांजलि एवं उनके अमूल्य योगदान को नमन करते हुए किया गया।

अंग्रेजी शासन के विरुद्ध चले लम्बे संग्राम का बिगुल बजाने वाले पहले क्रान्तिवीर मंगल पांडे।

अंग्रेजी शासन के विरुद्ध चले लम्बे संग्राम का बिगुल बजाने वाले पहले क्रान्तिवीर मंगल पांडे।

🌹 क्रान्तिवीर मंगल पांडे // जयंती 🌹

जन्म : 19 जुलाई 1827
मृत्यु : 08 अप्रैल 1857
                  
देश को अंग्रेजों की परतंत्रता से मुक्त करवाने के लिये 1857 में ज्वाला को धधकाने वाले क्रांतिवीर थे मंगल पांडे. अंग्रेजी शासन के विरुद्ध चले लम्बे संग्राम का बिगुल बजाने वाले पहले क्रान्तिवीर मंगल पांडे का जन्म 30 जनवरी, 1831 को ग्राम नगवा (बलिया, उत्तर प्रदेश) में हुआ था. कुछ लोग इनका जन्म ग्राम सहरपुर (जिला साकेत, उत्तर प्रदेश) तथा जन्मतिथि 19 जुलाई, 1827 भी मानते हैं.

युवावस्था में ही वे सेना में भर्ती हो गये थे. उन दिनों सैनिक छावनियों में गुलामी के विरुद्ध आग सुलग रही थी. अंग्रेज जानते थे कि हिन्दू गाय को पवित्र मानते हैं, जबकि मुसलमान सूअर से घृणा करते हैं. फिर भी वे सैनिकों को जो कारतूस देते थे, उनमें गाय और सूअर की चर्बी मिली होती थी. इन्हें सैनिक अपने मुंह से खोलते थे. ऐसा बहुत समय से चल रहा था, पर सैनिकों को इनका सच मालूम नहीं था.
                   
मंगल पांडे उस समय बैरकपुर में 34वीं हिन्दुस्तानी बटालियन में तैनात थे. वहां पानी पिलाने वाले एक हिन्दू ने इसकी जानकारी सैनिकों को दी. इससे सैनिकों में आक्रोश फैल गया. मंगल पांडे से रहा नहीं गया. 29 मार्च,1857 को उन्होंने विद्रोह कर दिया.
                 
एक भारतीय हवलदार मेजर ने जाकर सार्जेण्ट मेजर ह्यूसन को यह सब बताया. इस पर मेजर घोड़े पर बैठकर छावनी की ओर चल दिया. वहां मंगल पांडे सैनिकों से कह रहे थे कि अंग्रेज हमारे धर्म को भ्रष्ट कर रहे हैं. हमें उसकी नौकरी छोड़ देनी चाहिए. मैंने प्रतिज्ञा की है कि जो भी अंग्रेज मेरे सामने आएगा, मैं उसे मार दूंगा.
                 
सार्जेण्ट मेजर ह्यूसन ने सैनिकों को मंगल पांडे को पकड़ने को कहा, पर तब तक मंगल पांडे की गोली ने उसका सीना छलनी कर दिया. उस की लाश घोड़े से नीचे आ गिरी. गोली की आवाज सुनकर एक अंग्रेज लेफ्टिनेंट वहां आ पहुंचा.
                 
मंगल पांडे ने उस पर भी गोली चलाई, पर वह बचकर घोड़े से कूद गया. इस पर मंगल पांडे उस पर झपट पड़े और तलवार से उसका काम तमाम कर दिया. लेफ्टिनेंट की सहायता के लिए एक अन्य सार्जेण्ट मेजर आया, पर वह भी मंगल पांडे के हाथों मारा गया.
               
तब तक चारों ओर शोर मच गया. 34वीं पल्टन के कर्नल हीलट ने भारतीय सैनिकों को मंगल पांडे को पकड़ने का आदेश दिया, पर वे इसके लिए तैयार नहीं हुए. इस पर अंग्रेज सैनिकों को बुलाया गया. मंगल पांडे चारों ओर से घिर गये.
                  
वे समझ गये कि अब बचना असम्भव है. अतः उन्होंने अपनी बन्दूक से स्वयं को ही गोली मार ली, पर उससे वे मरे नहीं, अपितु घायल होकर गिर पड़े. इस पर अंग्रेज सैनिकों ने उन्हें पकड़ लिया. जिसके बाद मंगल पांडे पर सैनिक न्यायालय में मुकदमा चलाया गया.
                  
उन्होंने कहा, ‘‘मैं अंग्रेजों को अपने देश का भाग्य विधाता नहीं मानता. देश को आजाद कराना यदि अपराध है, तो मैं हर दण्ड भुगतने को तैयार हूं.’’
               
न्यायाधीश ने उन्हें फांसी की सजा दी और इसके लिए 18 अप्रैल का दिन निर्धारित किया, पर अंग्रेजों ने देश भर में विद्रोह फैलने के डर से घायल अवस्था में ही 8 अप्रैल,1857 को उन्हें फांसी दे दी.
                  
बैरकपुर छावनी में कोई उन्हें फांसी देने को तैयार नहीं हुआ. अतः कोलकाता से चार जल्लाद जबरन बुलाने पड़े. मंगल पांडे ने क्रांति की जो मशाल जलाई, उसने आगे चलकर 1857 के व्यापक स्वाधीनता संग्राम का रूप लिया.
                  
ऐसे महान क्रांतिकारी देश भक्त मंगल पाण्डे को उनके जन्मदिवस पर कोटि-कोटि प्रणाम. 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

इंटक के पूर्व कोषाध्यक्ष स्वर्गीय शिबू प्रधान की 49वीं जयंती मनाई गई।

इंटक के पूर्व कोषाध्यक्ष स्वर्गीय शिबू प्रधान की 49वीं जयंती मनाई गई।

सरायकेला/आदित्यपुर

सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर-2 क्षेत्र स्थित  19नंबर रोड के कुलुपटांगा कांग्रेस कार्यालय में जिला उपाध्यक्ष खिरोद सरदार के नेतृत्व में सरायकेला खरसावां जिला इंटक के पूर्व कोषाध्यक्ष स्वर्गीय शिबू प्रधान जी की 49 वी जयंती मनाई गई।

कार्यक्रम में सर्वप्रथम उनके चित्र पर  पुष्प अर्पित और माला पहनकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई कांग्रेस नेता राज मंगल ठाकुर ने अपने वक्तव्य पर शिबू प्रधान के जीवनी पर प्रकाश डालें और उनके जैसे कांग्रेसी कार्यकर्ता बनने का विचार रखें इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से गम्हरिया प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष अनिल ठाकुर जिला महासचिव राजू रजक पूर्व पार्षद पांडिमुखी पूर्व नगर सचिव अर्जुन प्रधान डॉ जे के गांगुली विमल कुमार शैलेश सिंह उपेंद्र सिंह अमित रावत कृष्णा तिवारी संतोष ठाकुर अमित सिंह अमित रावत अमित शर्मा लोग उपस्थित थे।

नारायण प्राइवेट आईटीआई, लुपंगडीह में श्रद्धा पूर्वक मनाई गई डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती।

नारायण प्राइवेट आईटीआई, लुपंगडीह में श्रद्धा पूर्वक मनाई गई डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती।

शिक्षा, राष्ट्रवाद और सेवा के प्रतीक थे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी :- डॉ. जटाशंकर पांडे।

सरायकेला/चांडिल

नारायण प्राइवेट आईटीआई, लुपंगडीह चांडिल में भारत के महान शिक्षाविद्, प्रखर राष्ट्रवादी विचारक, भारतीय जनसंघ के संस्थापक एवं स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में संस्थान के संस्थापक डॉ. जटाशंकर पांडे ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। अपने संबोधन में उन्होंने डॉ. मुखर्जी के जीवन, व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्र की एकता, अखंडता, शिक्षा, औद्योगिक विकास तथा जनसेवा के लिए समर्पित रहा।

उन्होंने बताया कि डॉ. मुखर्जी कम आयु में ही कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बने तथा स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। बाद में उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना कर राष्ट्रवादी विचारधारा को नई दिशा प्रदान की। डॉ॰ श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने स्वेच्छा से अलख जगाने के उद्देश्य से राजनीति में प्रवेश किया। डॉ॰ मुखर्जी सच्चे अर्थों में मानवता के उपासक और सिद्धान्तवादी थे। उन्होने बहुत से गैर कांग्रेसी हिन्दुओं की मदद से कृषक प्रजा पार्टी से मिलकर प्रगतिशील गठबन्धन का निर्माण किया। इस सरकार में वे वित्तमन्त्री बने। इसी समय वे सावरकर के राष्ट्रवाद के प्रति आकर्षित हुए और हिन्दू महासभा में सम्मिलित हुए।

डॉ. जटाशंकर पांडे ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण, अनुशासन, शिक्षा और सामाजिक सेवा के मार्ग पर अग्रसर हों। उन्होंने कहा कि ऐसे महापुरुषों का जीवन युवाओं के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। इस मौके पर एडवोकेट निखिल कुमार, प्राचार्य जयदीप पांडे जी, शांति राम महतो, भगत लाल तेली,प्रकाश महतो, शुभम साहू, देवाशीष मंडल, शशि भूषण महतो, पवन महतो, कृष्णा पद महतो, अजय मंडल,गौरव महतो आदि उपस्थित थे।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती स्मरण-पर्व के तहत विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती स्मरण-पर्व के तहत विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित।

सरायकेला/ईचागढ़

ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के गौरांगकोचा में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी द्वारा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती स्मरण-पक्ष के अवसर  पर डीएवी पब्लिक स्कूल के सभागार में ईचागढ़ विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया।
सम्मेलन में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रनिर्माण, शिक्षा, राष्ट्रवाद तथा भारत की एकता एवं अखंडता के लिए उनके अमूल्य योगदान को स्मरण किया गया। वक्ताओं ने उनके विचारों और आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने तथा उनके बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में भाजपा के जिला अध्यक्ष हरेकृष्ण प्रधान, जिला महामंत्री राकेश मिश्रा , जिला महामंत्री डॉ भूषण चन्द्र मुर्मू, जिला उपाध्यक्ष रितिका मुखी , अमितेश अमर, जिला मंत्री पप्पू वर्मा , सतीश शर्मा रितिका मुखी, जिला मीडिया प्रभारी मनोहर दास एवं गुरजीत मेहरा, युवा मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य विनय कृष्णा राजू, किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष महेश कुंडू, ओबीसी मोर्चा के जिला अध्यक्ष कृष्णा प्रधान, महिला मोर्चा जिला महामंत्री  मोनिका घोष,मन की बात के जिला संयोजक दिवाकर सिंह, भाजपा नेत्री अनीता पारित, मंडल अध्यक्ष शिशिर प्रमाणिक, कामदेव नायक एवं सुमन मुखर्जी,मनोरंजन महतो, युधिष्ठिर महतो, अनिल सिन्हा मोनिका घोष सुनीता पासवान सहित सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

सम्मेलन के दौरान उपस्थित कार्यकर्ताओं ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों को आत्मसात करते हुए संगठन को और अधिक मजबूत बनाने तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए जनसेवा के कार्यों को गति देने का संकल्प लिया।

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