सरायकेला/ईचागढ़
वर्षों की प्रतीक्षा और समाज की सामूहिक भावना से तैयार विवेकानंद केंद्र सेवा एवं प्रशिक्षण प्रकल्प, चांडिल के नवनिर्मित भवन का बुधवार को प्रातः 10 बजे भव्य लोकार्पण हुआ। झारखंड के महामहिम राज्यपाल ने दीप प्रज्वलित कर भवन का उद्घाटन किया और इसे समाज को समर्पित किया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, समाजसेवी, कार्यकर्ता और केंद्र से जुड़े पदाधिकारी उपस्थित रहे। आयोजकों ने बताया कि आज का दिन स्मरणीय दिन है क्योंकि यह विवेकानंद केंद्र के मार्गदर्शक स्व. एकनाथ रानाडे जी का जन्म-उत्सव दिवस है। इसी शुभ तिथि पर भवन के लोकार्पण का निर्णय लिया गया था।
नया भवन—‘मानव निर्माण से राष्ट्र निर्माण’ की दिशा में बड़ा कदम
केंद्र का बीज 1977-78 में नौरंगराम स्व. देवी ट्रस्ट में बोया था, जिसे एकनाथ रानाडे जी और स्व. भगवती प्रसाद खेतान जी ने आगे बढ़ाया। वर्षों से संस्कार वर्ग, योग शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे क्षेत्रों में केंद्र की अथक गतिविधियाँ चलती रही हैं।
अब नए भवन के तैयार होने के बाद इन सेवाओं के विस्तार को नई गति मिलेगी।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में स्वामी विवेकानंद के विचार—“उठो, जागो और स्वयं को जानो”—का उल्लेख करते हुए कहा कि चांडिल का यह केंद्र आने वाले वर्षों में राष्ट्रसेवा और युवा निर्माण का सशक्त केंद्र बनेगा।ईचागढ़ की विधायिका सविता महतो, विवेकानंद केंद्र के अखिल भारतीय कोषाध्यक्ष प्रवीण देवलोकर तथा अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
उद्घाटन कार्यक्रम में नगर संपर्क प्रमुख अनाथ मिश्रा, जीवनव्रती एवं विभाग संगठक रांची चिराग परमार, नगर कार्यालय प्रमुख सुशील कुमार लाल शाहदेव, निधि संकलन प्रमुख आशीष कुंडू, वानप्रस्थ कार्यकर्ता कालीचरण गुप्ता, कार्यपद्धति प्रमुख गुलशन कुमार और प्रचार प्रमुख मनोज सिंह सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
स्थानीय लोगों में उत्साह
कार्यक्रम के दौरान माहौल उत्साहपूर्ण रहा और स्थानीय नागरिकों ने इसे क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक-सामाजिक उपलब्धि बताया।


























