पश्चिम सिंहभूम/चाईबासा

परिवहन विभाग का वो कार्यालय जहां आम जनता को ईमानदारी से सेवा मिलनी चाहिए, वहीं आज भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा अड्डा बन चुका है। MVI कार्यालय में हालात ये हैं कि बिना पैसे दिए आपकी फाइल को कोई हाथ तक नहीं लगाता।
जनता की जेब पर खुलेआम डाका

सूत्रों और पीड़ित लोगों से मिली जानकारी के अनुसार MVI ऑफिस में हर काम का रेट फिक्स है –
• लाइसेंस बनवाना हो तो 1500 से 3000 रुपये अलग से • फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए 2000 रुपये • गाड़ी का परमिट और कागजों में मामूली सुधार के लिए भी 500 से 1000 रुपये की वसूली अगर आप ईमानदारी से लाइन में लगकर अपना काम कराना चाहते हैं, तो आपको महीनों तक दौड़ाया जाएगा। कभी सर्वर डाउन का बहाना, कभी साहब नहीं हैं, तो कभी कागज अधूरा है।
दलालों का राज, अफसर मौन
साथ ही सूत्र यह भी बताते हैं कि MVI कार्यालय के बाहर दलालों की फौज खड़ी रहती है। बिना दलाल के आप अंदर घुस भी नहीं सकते। आम आदमी का आरोप है कि ये दलाल सीधे अंदर के बाबुओं और अधिकारियों से मिले हुए हैं। जनता से लूटा गया पैसा नीचे से ऊपर तक बंटता है, इसलिए कोई सुनने वाला नहीं है।
एक पीड़ित ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “मैं 15 दिन से चक्कर लगा रहा हूं। काउंटर पर बैठा बाबू सीधे मुंह बात नहीं करता। बगल वाले ने इशारा किया कि 2000 रुपये दो तो 10 मिनट में काम हो जाएगा। ये कैसी व्यवस्था है?”
सवाल ये उठता है कि जब सरकार डिजिटल इंडिया और भ्रष्टाचार मुक्त शासन का दावा करती है, तो MVI जैसे सरकारी दफ्तरों में ये खुली लूट कैसे चल रही है? क्या जिला परिवहन पदाधिकारी और सरकार के आला अधिकारी इस भ्रष्टाचार से अनजान हैं? या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?


















