बादिया से बागजाता माइंस गेट तक सड़क निर्माण की मांग को लेकर प्रखंड कार्यालय पर ग्रामीणों ने 5 घंटे तक किया धरना प्रदर्शन
मुसाबनी
त्रिपक्षीय वार्ता के बाद धरना प्रदर्शन समाप्त
डुंगरीडीह से बागजाता माइंस गेट तक की बदहाल सड़क निर्माण की मांग को लेकर सैकड़ो ग्रामीण मुसाबनी प्रखंड कार्यालय के बाहर टेंट लगाकर धरना प्रदर्शन किया। मांगे नहीं माने जाने पर 25 फरवरी से आमरण अनशन की लिखित चेतावनी दी गयी थी। इस धरना प्रदर्शन में प्रखंड प्रमुख रामदेव हेंब्रम,हरिपद भगत सहित पंचायत के मुखिया पारबत हांसदा, पंचायत समिति सदस्य, कई गांव के ग्राम प्रधान सहित सैकड़ों महिला पुरुष ग्रामीण शामिल थे।
धरना प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारी से वार्ता में घाटशिला अनुमंडल पदाधिकारी सुनील चंद्र, मुसाबनी डीएसपी संदीप भगत, मुसाबनी सीओ हृषिकेश मरांडी, बीडीओ अदिति गुप्ता सहित यूसीआईएल के डीजीएम जादूगोड़ा ग्रुप का माइंस मनोरंजन महाली, माइंस मैनेजर बागजाता रोहित कुमार ,अपर प्रबंधक कार्मिक टी भट्टाचार्यधरना प्रदर्शन कर रहे हैं आंदोलन कर रहे ग्रामीणों की ओर से प्रखंड प्रमुख रामदेव हेंब्रम, पूर्व पार्षद बुद्धेश्वर मुर्मू,मुखिया पारबात हांसदा, पंसस बंदना पाल,राजेश कैवर्त,ग्राम प्रधान सहित कई लोग शामिल थे।
एसडीओ सुनील चंद्र की अध्यक्षता में आयोजित त्रिपक्षीयवार्ता में सहमति बनी की जल्द ही यूसिल प्रबंधन जर्जर सड़क की मरम्मती कार्य शुरू करेगा । सड़क निर्माण को लेकर यूसीआईएल अधिकारी जल्द उपायुक्त से मुलाकात कर इस समस्या का स्थाई समाधान को लेकर बात करेंगे। यूसीआईएल प्रबंधन चाहता है कि सड़क निर्माण कार्य में होने वाले खर्च को जिला प्रशासन को देकर प्रशासन से निर्माण कार्य करवाया जाए। सड़क निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूरा करने को लेकर यूसीआईएल प्रबंधन पर प्रशासनिक अधिकारियों ने दबाव बनाया और ग्रामीणों की समस्या को नजरअंदाज नहीं करने की चेतावनी दी। शांतिपूर्ण वार्ता होने के कारण आमरण अनशन कार्यक्रम को ग्रामीणों ने तत्काल स्थगित करने का निर्णय लिया है। धरना प्रदर्शन में मुख्य रूप से ग्राम प्रधान शिबू रंजन हांसदा, श्रीराम मुर्मु,शोले हांसदा, मानसिंह सोरेन, सोनाराम सोरेन सहित सैकड़ों ग्रामीण शामिल थे।
रोज़गार नहीं मिलने पर बागजाता माइंस के रेंज मज़दूर 2 दिसंबर से करेंगे आंदोलन
मुसाबनी
मुसाबनी संवाददाता: बागजाता माइंस के रेंज समूह के मजदूरों की बैठक गोहला पंचायत के मुखिया परबत हांसदा की अध्यक्षता में बाकड़ा पुल के समीप हुई। जिसमें जिप प्रतिनिधि व पूर्व पार्षद बुद्धेश्वर मुर्मू उपस्थित थे। बैठक में मजदूरों ने 8 महीनों से भी ज्यादा समय से बेरोजगार रहने की स्थिति पर चर्चा की गई। इसके बाद बताया गया कि विगत दिनों रोजगार की मांग को लेकर यूसिल प्रबंधक को लिखित आवेदन देकर 30 नवंबर तक कार्य पर बहाल करने की मांग की गई थी ल। जिसके बाद यूसिल के अपर प्रबंधक कार्मिक द्वारा शनिवार को मजदूरों के नाम एक चिट्ठी जारी किया था, जिसमें आगामी 9 दिसम्बर से रेंज समूह के मजदूरों के कार्य चालू होने का उल्लेख पर विचार किया गया। मजदूरों ने एक स्वर में यूसिल द्वारा निर्गत चिट्ठी को यह कहकर खारिज कर दिया कि प्रबंधक द्वारा इस तरह बार – बार आश्वासन देकर हमें ठगा गया है, मजदूरों ने मांग किया कि रेंज समूह के कार्य प्रारंभ होने की तिथि यूसिल के सक्षम अधिकारी हमें बताएं। इसके बाद ही हम मजदूर अपना पूर्व निर्धारित कार्यक्रम 02/12/2024 को चक्का जाम और 03/12/2024 से अनिश्चितकालीन बंदी के आंदोलन पर पुनर्विचार करेंगे, अन्यथा मज़दूरों का आंदोलन पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार होगा, जिसकी सूचना यूसिल प्रबंधक और स्थानीय प्रशासन को लिखित रूप से दी गई।
बैठक में उपस्थित पूर्व पार्षद बुद्धेश्वर मुर्मू ने मजदूरों को संबोधित करते हुए कहा की बागजाता माइंस के मजदूरों को हर बार अपने अधिकार के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है, इससे प्रतीत होता है कि यूसिल प्रबंधक को क्षेत्र के लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने की आदत सी हो गई है। बुद्धेश्वर मुर्मू ने कहा की बागजाता माइंस में ठेका मजदूरों को मृत्यु के उपरांत या कार्य के दौरान रिटायरमेंट कर्मचारियों के आश्रितों को रोजगार से जोड़ने के लिए बहुत जल्द यूसिल प्रबंधक से पत्राचार किया जाएगा।
इस अवसर पर परबत हांसदा (मुखिया), सुभाष महली, सूजन मार्डी, प्रभात हांसदा, कृष्णा हांसदा, रविन्द्र नाथ हेंब्रम, लादू सोरेन, मूची राम भकत, जगन्नाथ भकत, मनोहर कैबर्ता सहदेव महली, श्याम चरण हांसदा, कृष्णा सोरेन, कुंवर हांसदा, श्याम हांसदा, दुर्योधन कैबर्ता, दीपक कैबर्ता, प्रकाश कैबर्ता, भादो राम हांसदा, राम राय हांसदा आदि उपस्थित थे।
एससी एसटी आरक्षण के भीतर उप वर्गीकरण की अनुमति देने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ 21 अगस्त को देशव्यापी भारत बंद का आवाहन किया गया था जिसको लेकर बुधवार को सरायकेला के आदित्यपुर में झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति के सदस्यों ने (जेबीकेएसएस) केंद्रीय नेतृत्व के आह्वान पर टोल ब्रिज के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया. इस दौरान उक्त मार्ग पर वाहनों का परिचालन ठप कर दिया गया है.
बता दें कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने का फैसला दिया था। कई दलित और आदिवासी संगठनों ने इस फैसले को कमजोर और असंवैधानिक बताया है।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित संगठनों के इस बंद को जेबीकेएसएस और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी समर्थन कर रही है. आवश्यक सेवाओं को छोड़कर बाकी सब कुछ बंद है. जेबीकेएसएस नेताओं ने कहा कि आरक्षण में वर्गीकरण करके अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों में फूट डालने की कोशिश की जा रही है. इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
आदित्यपुर मुख्य मार्ग जाम के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा. जहां कंपनी जा रही बस भी जाम में फंसीं रही.
वहीं दूसरी ओर मनजीत होटल सड़क को जाम कर दिया गया है. टायर जलाकर पेड़ रखकर प्रदर्शन किया जा रहा है. मौके पर चांडिल थाना प्रभारी और कपाली के पुलिस पहुंचे हुए हैं. सिर्फ एंबुलेंस को जाने दिया जा रहा है.
बिहार
पटना पुलिस ने किया लाठीचार्ज
पटना में प्रदर्शकारियों डाकबंगला चौराहा से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। पटना पुलिस ने समझाने की कोशिश की लेकिन वह नहीं मानें। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर इन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी। प्रदर्शन उम्र होते देखे पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस अब वाटर कैनन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इधर, आरा, दरभंगा और मधुबनी में ट्रेन रोक दी गई है। दरभंगा में प्रदर्शनकरियों ने संपर्कक्रांति ट्रेन को रोक दिया और हंगामा कर रहे हैं।
नवादा में बंद से परीक्षार्थी परेशान
भारत बंद को लेकर नवादा बाजार को बंद कराया गया। शहर मुख्यालय के प्रजातंत्र चौक पर बंद समर्थकों द्वारा टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। सिपाही भर्ती की परीक्षा में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों को सेंटर पर पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अनुसूचित जाति, जनजाति मोर्चा के कार्यकर्ता पूरे शहर में घूम घूमकर दुकानों बंद करा रहे हैं। अनुसूचित जाति जनजाति संघर्ष मोर्चा के जिलाध्यक्ष संजय पासवान उर्फ डी सी ने बताया कि 1 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के द्वारा एस सी एस टी वर्गों के आरक्षण में क्रिमिलेयर लागू किया गया जिसको लेकर भारत बंद किया गया है।आरक्षण से छेड़छाड़ बर्दास्त नहीं किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों ने जमकर बवाल किया
भारत बंद का मोतिहारी में असर दिखने लगा है। छतौनी थाना क्षेत्र के दुर्गा चौक पर प्रदर्शनकारियों ने जमकर बवाल किया। इनलोगों ने नेशनल हाईवे को जाम कर दिया और सरकार के विरोध में प्रदर्शन करने लगे। इतना ही नहीं टायर जलाकर आगजनी भी की। वहीं रक्सौल और बापूधाम स्टेशन पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है।
भोजपुर में भी बंद का असर
आरा में भी भारत बंद का मिला जुला असर दिख रहा है। प्रदर्शनकारियों ने ट्रेनों की रफ्तार रोक दी है। इतना ही नहीं आगजनी कर चक्का जाम कर दिए हैं। विभिन्न दलों के नेताओं ने आरा रेलवे स्टेशन पर चक्का जाम कर दिया है। मैसूर रानी कमलापति सहरसा ट्रेन को रोककर प्रदर्शन किया जा रहा है। इस मौके पर आरपीएफ और जीआरपी पुलिस मौजूद है। मौके पर डीएम और एसपी पहुंच प्रर्दशनकारियों को समझा कर ट्रैक खाली करवाये। उसके बाद प्रदर्शनकारियों ने समाहरणालय के समीप पहुंच कर अम्बेडकर चौक को जाम कर दिया। जाम कर रहे प्रदर्शनकारी में भाकपा-माले, बासपा,आरजेडी और लोजपा रामविलास की पार्टी मौजूद रही।
मुजफ्फरपुर भी बंद का असर
मुजफ्फरपुर में भारत बंद को सफल बनाने के लिए भीम आर्मी के सदस्यों ने 57 को जाम कर दिया है। जिले के अहियापुर थाना क्षेत्र इलाके के शाहबाजपुर के पास जाम से लोक परेशान हैं। वहीं मुजफ्फरपुर छपरा न 102 को भी जाम करवा दिया गया है। इस कारण सड़क के दोनों ओर से ट्रक और अन्य वाहनों की लंबी कतार लग गई है। इतना ही नहीं दुकानों को भी बंद करवा दिया गया है।
नालंदा में बिंद चौराहा के पास जाम कर विरोध-प्रदर्शन
नालंदा में अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण समिति द्वारा बिहटा-सरमेरा मुख्य मार्ग को बिंद चौराहा के पास जाम कर दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण समाप्त करने की कथित साजिश का विरोध किया और बाबा साहब के सपनों को चकनाचूर करने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा आरक्षण समाप्त करने को लेकर साजिश रची जा रही है, जिसे वे बर्दाश्त नहीं करेंगे।
समाहरणालय कर्मियों की हड़ताल लगातार जारी, काम प्रभावित
सरायकेला
सरायकेला क्षेत्र में दिखा हड़ताल का असर
झारखंड अनुसचिवीय कर्मचारी संघ (समाहरणालय) के बैनर तले राज्य भर के समाहरणालय कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल 22 जुलाई से लगातार जारी है. राज्यभर के कर्मचारियों ने अपने-अपने जिला मुख्यालय के पास धरना-प्रदर्शन कर रही है. कर्मचारियों के काम नहीं करने से अधिकांश काम ठप है. दूरदराज से आये लोग जब अपना काम कराने के लिए जिला मुख्यालय पहुंचते हैं पर उन्हें काम नहीं होने से वापस लौटना पड़ता है.
सरायकेला: झारखंड अनुसचिवीय कर्मचारी संघ के बैनर तले अपनी नौ सूत्री मांगों को लेकर समाहरणालय के लिपिक छठे दिन भी अनिश्चितकालीन धरना पर रहे. समाहरणालय भवन के बाहर संघ की जिला इकाई के सदस्य अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे रहे. ज्ञात हो कि समाहरणालय संवर्ग का झारखंड अनुसचिवीय कर्मचारी संघ अपनी नौ सूत्री मांगों को लेकर हड़ताल पर है. मांगों में उच्च स्तरीय समिति की अनुशंसा के आलोक में ग्रेड पे में संशोधन, पदसृजन, प्रोन्नति की कालावधि चार वर्ष करना, एमएसीपी की कालावधि में कमी, पदनाम में संशोधन, प्रशासनिक सेवा नियुक्ति में 50 फीसदी पद सुरक्षित करना, सेवानिवृति की उम्र में संशोधन, चतुर्थवर्गियों की प्रोन्नति और संविदाकर्मी-आउटसोर्सिंग कर्मी का नियमितीकरण शामिल है. संघ के ने सचिव बताया गया कि संघ ने सरकार के समक्ष नौ सूत्री मांगों को रखा है. ये सभी मांगें पूरी होने तक सभी कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बने रहेंगे. ये सभी मांग जल्द से जल्द पूरी हो, हम सरकार से यह आशा करते हैं.
मुसाबनी के वित्त रहित संस्थाओं में रहा शैक्षणिक हड़ताल
पुर्वी सिंहभूम/मुसाबनी
मुसाबनी-वित्त रहित स्कूल -कॉलेजों का अधिग्रहण/ घाटा- अनुदान, अनुदान की राशि सीधे शिक्षक- कर्मचारियों के खाते में भेजने, सेवानिवृत्ति की आयु 62 वर्ष करने, महंगाई को देखते हुए उच्च विद्यालय के अनुदान स्लैब में संशोधन करने के साथ साथ शिक्षक कर्मी को राज्य कर्मी का दर्जा दिए जाने, अनुदान की राशि चौगुना किये जाने की मांग को लेकर वित रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आवाहन पर बुधवार को राज्य के 1250 इंटर कॉलेज, उच्च विद्यालयों, संस्कृत विद्यालयों एवं मदरसा विद्यालयों में शैक्षणिक हड़ताल पर रहे। शिक्षक कर्मी स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के पदाधिकारी के खिलाफ स्कूल कॉलेज में मुख्य द्वार नारेबाजी किया। शैक्षणिक हड़ताल का असर घाटशिला अनुमंडल के वित्त रहित शिक्षण संस्थानों में भी देखने को मिला। मुसाबनी प्रखंड के जीसीजेडी हाई स्कूल एवं मुसाबनी माइंस इंटर कॉलेज व सरस्वती विद्या मंदिर में शैक्षणिक हड़ताल रहा।
जीसीजेडी हाई स्कूल में शैक्षणिक हड़ताल में शामिल शिक्षककर्मीविद्या मंदिर में हड़ताल में शामिल शिक्षक शिक्षिकाएं
हड़ताल का असर घाटशिला ,चाकुलिया, बहारागोड़ा, पोटका आदि प्रखंड में संचालित वित्त रहित स्कूल कॉलेजों में भी रहा। शिक्षकों की हड़ताल से संस्थानों में पठन-पाठन कार्य पूरी तरह बाधित रहा।मोर्चा के नेताओं ने शिक्षा विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सरकार से मांग किया है कि अनुदान की राशि चौगुनी की जाय । हड़ताल में मुख्य रूप से मोर्चा के संयोजक कुंदन कुमार सिंह, शिवपूजन सिंह,प्रो. सीमा कल्याणी , प्रो. संतोष दास, रूमी सरकार, मिथलेश पांडेय सहित सभी शिक्षक शिक्षकेतर कर्मचारी शामिल थे।
सरायकेला जिले में ट्रक चालकों ने किया जोरदार धरना प्रदर्शन।
सरायकेला/आदित्यपुर
( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )
ट्रक चालकों के प्रदर्शन से सड़क पर लगी वाहनों की लंबी कतार
ट्रक चालकों के धरना प्रदर्शन के कारण सड़क पर आवाजाही घंटो रही ठप
ट्रक चालकों के धरना प्रदर्शन के कारण कंपनियों को भी भारी नुकसान का सामना करना पड़ा
केंद्र सरकार के नए कानून से नाराजट्रक चालकों के द्वारा तीन दिवसीय धरना प्रदर्शन के दूसरे दिन सरायकेला जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत घोड़ा बाबा मंदिर के समीप ट्रक चालकों ने जोरदार धरना प्रदर्शन किया वहीं धरना प्रदर्शन के कारण गाड़ियों की लंबी कतार लग गई एवं सड़कों पर आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई।
वहीं ट्रक चालकों के अलग-अलग धरना प्रदर्शन के कारण एक तरफ सड़क पर आवाजाही बाधित हो गई वहीं दूसरी तरफ ट्रक चालकों की धरना प्रदर्शन के कारण कंपनियों में समय पर माल नहीं पहुंचने से कंपनियों को भी भारी नुकसान का सामना करना पड़ा।
वहीं इस धरना प्रदर्शन के कारण सड़क पर सैकड़ो लोगों का जमावड़ा हो गया जिसके कारण टाटा कांड्रा मुख्य मार्ग पर आवाजाही पूरी तरह से बाधित हो गई वहीं सूचना पाकर आदित्यपुर थाना प्रभारी राजन कुमार दलबल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और मोर्चा को संभालऔर सभी लोगों को समझा बुझा कर सड़क को पुनः सुचारु रूप से चालू किया।
वहीं मौके पर मौजूद थाना प्रभारी राजन कुमार ने बताया कि सरकार के नए नियम से असंतुष्ट होकर के सभी तरह के वाहनों के चालक ने सड़क पर धरना प्रदर्शन किया एवं रोड पर आवाजाही को पूरी तरह से बाधित कर दिया था जिसे आदित्यपुर थाना की पुलिस ने आकर समझा बूझकर धरना प्रदर्शन को बंद करवाया एवं धरना पर बैठे सभी लोगों को समझाया कि एक लिखित तौर पर अपनी मांगों को सरायकेला खरसावां के उपायुक्त महोदय के माध्यम से सरकार तक पहुंचाएं इस तरह सड़क पर धरना प्रदर्शन करने से कोई फायदा नहीं अपनी मांगों को नियमानुसार लिखित तौर पर सरकार के समक्ष रखें जिससे किसी को भी किसी तरह की परेशानी ना हो।
वहीं डरना प्रदर्शन में मौजूद अनिल कुमार ठाकुर ने कहा कि संसद में गृह मंत्री अमित शाह जी ने कहा है कि वाहन चालकों के लिए नया नियम लाया जाएगा जिसमें की दुर्घटना होने पर 10 साल की सजा और 5 से 7 लख रुपए तक का मुआवजा देना होगा अब ऐसे में जो वाहन चालक 5 से 7 हजार रुपए की नौकरी करता है वाहन चालक इतने पैसे कहां से लाकर के देगा. उन्होंने कहा कि ऐसा कोई कानून लागू नहीं होना चाहिए यह कानून को वापस ले भाजपा सरकार और जो पुराने कानून है उसी कानून को पुनः सुचारु रूप से चलने दिया जाए अन्यथा अगर हमारी मांग पूरी नहीं की गई तो पुनः मार्च के महीने में जोरदार धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
आदिवासी सेंगल अभियान के आहुत बंद से रेल सेवा प्रभावित हुआ।
सरायकेला–खरसावां
( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )
आदिवासी सेंगल अभियान के कार्यकर्ताओं ने भारत बंद को सफल करने हेतु चांडिल रेलवे पटरी पर उतरे।
नीमडीह स्टेशन पर रेल सुरक्षा कर्मी और नीमडीह पुलिस कर्मियों चुस्त दुरुस्त लेकिन आन्दोलानकारी सुस्त देखा गया।
चांडिल आदिवासी सेंगल अभियान के आहुत बंद के दौरान दक्षिण पुर्वी जोन के आद्रा डीविजन अधीन कांटाडिह रेलवे स्टेशन के समीप आदिवासी सेंगल अभियान के कार्यकर्ताओं ने लगभग तीन घंटे रेल पथ को जाम की।फलत काई ट्रेन की मार्ग को परिवर्तन किया गया।
वहीं नीमडीह रेलवे स्टेशन पर प्रशासन चुस्त दुरुस्त और आंदोलनकारी सुस्त नजर आए। आदिवासी सेंगल अभियान के कार्यकर्ताओं ने नीमडीह स्टेशन में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं की। नीमडीह स्टेशन पर दो माल वाहन रेल गाड़ी रूकी थी। नीमडीह स्टेशन डेली पैसेंजर सब्जी व्यवसायिक परेशान थे। निजी वाहन कर सब्जी व्यवसायिक जमशेदपुर और आदित्यपुर गए। नीमडीह स्टेशन पर सुबह से आर पी एफ प्रभारी अजित कुमार,जी आर पी प्रभारी रमेश कुमार, नीमडीह थाना प्रभारी मो . तंज़िल खान अपने अपने दल बल के साथ उपस्थित थे। चांडिल स्टेशन पर आदिवासी सेंगल अभियान कार्यकर्ताओं न उतरे।
घाटशिला अनुमंडल के दर्जनों वित्त रहित शिक्षकों ने विधानसभा के समक्ष दिया धरना।
पुर्वी सिंहभूम/मुसाबनी
( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )
वित्त रहित स्कूल -कॉलेजों के अधिग्रहण एवं तत्काल घाटा अनुदान देने,महंगाई को देखते हुए अनुदान की राशि चौगुना करने, वित्तीय वर्ष 2020-21 के बचे हुए स्कूल- कॉलेजों को अनुदान की राशि अविलंब निर्गत करने की मुख्य मांग को लेकर राज्य भर के हजारों वित्त रहित शिक्षक कर्मियों ने मंगलवार को मोर्चा के आवाहन पर विधानसभा के सामने महाधरना दिया।
इस महाधरना कार्यक्रम में मोर्चा के संयोजक कुंदन कुमार सिंह, रघुनाथ सिंह, देवनाथ सिंह, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, अरविंद सिंह ,नरोत्तम सिंह, मनीष कुमार ,अनिल तिवारी, दिलीप घोष ने संबोधित किया।
संघ के शिवपूजन सिंह चौहान,निमाई मार्डी,सीमा कल्याणी, सन्तोष दास आदि के नेतृत्व में पूर्वी सिंहभूम जिले के कई वित्त रहित शैक्षणिक संस्थान के शिक्षकों ने भाग लेकर अपनी मांगों के समर्थन में चट्टानी एकता प्रदर्शित करते हुए महाधरना कार्यक्रम को सफल बनाया।
शिक्षक कर्मी नारा लगा रहे थे कि बिहार के तर्ज पर वित रहित स्कूल कॉलेज के शिक्षक कर्मियों को राज्य कर्मी का दर्जा दिया जाए।महंगाई को देखते हुए विभागीय प्रस्ताव पर मंत्री के अनुमोदन के पश्चात संलेख बनाकर अभिलंब मंत्री परिषद को सहमति के लिए भेजी जाए। शिक्षको के सेवानिवृत्ति की आयु छत्तीसगढ़ के तर्ज पर 62 वर्ष की जाए ।
वहीं धरना मे संस्कृत शिक्षक पीला वस्त्र पहन कर आए थे। और मदरसा शिक्षक टोपी पहने हुए थे।धरना स्थल पर विधायक विनोद सिंह, अमित कुमार यादव और मनीष जायसवाल पहुंचकर वित्त रहित शिक्षकों की मांग जायज बताते हुए कहा कि जब सरकार सदन में आश्वासन दी है तो उसे पूरा करें ।तीनों विधायकों ने बुधवार को शून्य काल में इस मामले को जोरदार ढंग से उठाने का आश्वासन दिए।
मुसाबनी के वित्त रहित संस्थाओं में रहा शैक्षणिक हड़ताल।
पुर्वी सिंहभूम/मुसाबनी
( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )
मुसाबनी-वित्त रहित स्कूल -कॉलेजों का अधिग्रहण/ घाटा- अनुदान, अनुदान की राशि सीधे शिक्षक- कर्मचारियों के खाते में भेजने, सेवानिवृत्ति की आयु 62 वर्ष करने, महंगाई को देखते हुए उच्च विद्यालय के अनुदान स्लैब में संशोधन करने के साथ साथ शिक्षक कर्मी को राज्य कर्मी का दर्जा दिए जाने, अनुदान की राशि चौगुना किये जाने की मांग को लेकर वित रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आवाहन पर बुधवार को राज्य के 1250 इंटर कॉलेज, उच्च विद्यालयों, संस्कृत विद्यालयों एवं मदरसा विद्यालयों में शैक्षणिक हड़ताल पर रहे। शिक्षक कर्मी स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के पदाधिकारी के खिलाफ स्कूल कॉलेज में मुख्य द्वार नारेबाजी किया। शैक्षणिक हड़ताल का असर घाटशिला अनुमंडल के वित्त रहित शिक्षण संस्थानों में भी देखने को मिला।
मुसाबनी प्रखंड के जीसीजेडी हाई स्कूल एवं मुसाबनी माइंस इंटर कॉलेज व सरस्वती विद्या मंदिर में शैक्षणिक हड़ताल रहा। हड़ताल का असर घाटशिला ,चाकुलिया, बहारागोड़ा, पोटका आदि प्रखंड में संचालित वित्त रहित स्कूल कॉलेजों में भी रहा।शिक्षकों की हड़ताल से संस्थानों में पठन-पाठन कार्य पूरी तरह बाधित रहा।मोर्चा के नेताओं ने शिक्षा विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सरकार से मांग किया है कि जब तक उनकी मांगों को नहीं माना जाता तब तक झारखंड के कोई भी वित्त रहित अनुदानित इंटर कॉलेज, उच्च विद्यालय, संस्कृत विद्यालय एवं मदरसा विद्यालय वित्तीय वर्ष 2023-24 में अनुदान के लिए ऑनलाइन आवेदन नहीं भरेंगे।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया की 19 दिसंबर को मंगलवार को हजारों शिक्षककर्मी विधानसभ पर धरना देंगे । हड़ताल में मुख्य रूप से मोर्चा के संयोजक कुंदन कुमार सिंह, शिवपूजन सिंह,प्रो. सीमा कल्याणी , प्रो. संतोष दास, रूमी सरकार, मिथलेश पांडेय सहित सभी शिक्षक शिक्षकेतर कर्मचारी शामिल थे।
वित्तरहित शिक्षक शिक्षकेतर कर्मी अपनी मांगों के लेकर उपवास पर रहे।
पुर्वी सिंहभूम/मुसाबनी
( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )
18 दिसंबर को पूरे राज्य में शैक्षणिक हड़ताल की घोषणा, स्कूल कॉलेज बंद रहेंगे।
घाटशिला अनुमंडल के सभी वित्तरहित इंटरमीडिएट कॉलेज, उच्च विद्यालयो के लगभग 150 से अधिक शिक्षक शिक्षकेतर कर्मी अनुदान की राशि चार गुणा करने एवं राजकर्मी का दर्जा देने के साथ इन संस्थानों में अधिग्रहण की मांग को लेकर उपवास पर रहे। स्कूल में वर्ग व्यवस्था जारी रहा। मुसाबनी के गिरीश चंद्र झुरो देवी उच्च विद्यालय मुसाबनी ,माइंस इंटर कॉलेज, सरस्वती विद्या मंदिर घाटशिला के जामनी कांत महतो उच्च विद्यालय सहित चाकुलिया एवं बहरागोड़ा के वित्त रहित स्कूल, कॉलेज में भी शिक्षकों ने उपवास रखा। मोर्चा के नेताओं ने कहा कि शिक्षकों के वेतन में कहीं 4 लाख तो कहीं 7-8 हजार कोई तुलना नहीं है। मोर्चा की बैठक मोर्चा के राज्य संयोजक कुंदन कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई ।जिसमें विधानसभा सत्र के समय आंदोलन को सफल बनाने पर गहन विचार विमर्श हुआ। और सभी शिक्षक कर्मियों को 19 दिसंबर के विशाल धरना में विधानसभा पहुंचने का आवाहन किया गया। 18 दिसंबर को राज्य में वित्त रहित संस्थान में शैक्षणिक हड़ताल का निर्णय लिया गया। और कहा गया कि पूर्व में पुतला दहन हो चुका है ।अब 18 दिसंबर को शैक्षणिक हड़ताल रहेगा ।स्कूल कॉलेज बंद रहेंगे और ताला लगा रहेगा।
बैठक में सर्वसम्मत से सभी शिक्षक कर्मियों को 20 और 21 दिसंबर को रांची में अपने-अपने विधायकों की आवास घेरने का आवाहन किया गया। शिक्षक कर्मियों से कहा गया कि यह ज्यादा से ज्यादा विधायकों के आवास घेरने में उपस्थित रहे ।और दो दिन ठहरने के लिए रांची चलें।इस बीच 5 विधायकों से शिक्षा सचिव के. रवि कुमार को पत्र लिखा है कि जब महंगाई को देखते हुए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने अनुदान चौगुना कर प्रस्ताव तत्कालीन विभागीय मंत्री को भेजा था और विभागीय मंत्री ने 5 माह पहले विभागीय प्रस्ताव पर अनुमोदन कर संचिका लौटा दिए थे ।तो आज तक सन्लेख विधि, वित्त और मंत्री परिषद के अनुमोदन के लिए क्यों नहीं भेजा गया।
अनुदान में बढ़ोतरी नहीं की गई तो विगत 25-30 वर्षों से कार्य कर रहे शिक्षक कर्मचारियों के सामने भुखमरी की स्थिति आ जाएगी।इस मौके पर कुन्दन कुमार सिंह, शिवपूजन सिंह, नयन तारा राय, सोमेश्वर झा, कृष्णा कुमार, किरण कुमारी, अल्पना सिंह, सुशील सोरेन, निमाई मार्डी, बिष्णु पातर, राहुल लामा, मदन बेलदार आदि उपस्थित थे।
आदित्यपुर के हत्याडीह में चल रहे जमीनी विवाद को सरायकेला एसडीएम पारु सिंह ने कराया शांत
सरायकेला/आदित्यपुर
( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )
कंपनी के विरोध में ग्रामीणों की बैठक। रास्ते को लेकर ग्रामीणों और प्रशासन के बीच बातचीत हुई
कंपनी प्रतिनिधि ने कहा ग्राम सभा औरप्रशासन दोनों ही हमारे साथ में है
सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र के हथियाडीह में चल रहे जमीनी विवाद को सरायकेला एसडीएम पारुल सिंह ने तत्काल प्रभाव से शांत कर दिया है।
आपको बताते चलें कि जियाडा द्वारा उद्योग स्थापित करने को लेकर जमना ऑटो को आवंटित जमीन पर दोबारा विवाद उत्पन्न करते हुए हथियाडीह के सैकड़ों महिला व पुरुषों ने बुधवार को दिनभर धरना दिया। इस दौरान उन्होंने कंपनी के कामगारों को जमीन की चहारदीवारी नहीं करने दी।
हथियाडीह के ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए वहां सरायकेला एसडीएम पारुल सिंह द्वारा दंडाधिकारी और पर्याप्त मात्रा में पुलिस बल की तैनाती की गई थी, लेकिन इसके बावजूद ग्रामीणों ने निर्माण कार्य नहीं होने दी। गौरतलब है कि जमना ऑटो की चहारदीवारी निर्माण को लेकर बुधवार को पुलिस बल के साथ दंडाधिकारी के रूप में जियाडा के अधिकारी अश्विनी कुमार को प्रतिनियुक्त किया गया था जो दिनभर वहां डटे रहे। वहीं,आदित्यपुर थाना प्रभारी राजन कुमार और गम्हरिया थाना प्रभारी आलोक दूबे भी दल बल के साथ तैनात रहे।
वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए बृहस्पतिवार को सरायकेला एसडीएम पारुल सिंह ने खुद घटना स्थल पर पहुंच कर मोर्चा संभाला और ग्रामीणों एवं कंपनी प्रतिनिधि से बातचीत कर मामले को शांत कराया। वहीं मंत्री चम्पई सोरेन के समर्थकों ने भी इस मामले को शांत करने में प्रशासन का साथ दिया।
रास्ता के लिए 5 दिनों से धरना पर बैठे ग्रामीणों का रमेश हांसदा ने पहुंच कर दिया समर्थन।
सरायकेला/आदित्यपुर
सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र के हथियाडीह के ग्रामीण रास्ता के लिए 5 दिन से धरना पर बैठे हुए हैं। वहीं ग्रामीणों द्वारा कहा गया कि झारखंड सरकार गरीबों की बात करती है ,उन्हें न्याय दिलाने की बात करती है। परंतु हम सभी ग्रामीण रास्ते के लिए 5 दिनों से धरना पर बैठे हुए हैं लेकिन कोई भी आकर हमारी समस्या सुनने को तैयार नहीं है।
वहीं 29 नवंबर को भारतीय जनता पार्टी एस टी मोर्चा राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य रमेश हांसदा ने हथियाडीह गांव बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले 5 दिनों से बैठे हुए धरना में लोगों को समर्थन देने पहुंचे। रमेश हांसदा ने कहा कि जल जंगल के नाम पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने राज्य में सत्ता काबिज किया और आज आदिवासी जल जंगल जमीन बचाने के लिए 5 दिन से धरने में बैठे हैं। लेकिन अभी तक किसी ने शुद्ध तक नहीं ली बात तक करना प्रशासन ने उचित नहीं समझा। यहां का विधायक सह मंत्री चंपई सोरेन इन्हीं आदिवासियों मूलवासी का वोट लेकर के आज मंत्री बना है । लेकिन आज कंपनी के दलाली करने से लोग बाज नहीं आ रहे हैं। वैसे लोगों को इनका राजनीतिक हकीकत बताना चाहिए।
आगे रमेश हांसदा ने कहा कि हेमंत सोरेन हर मंच में डींग हांकते फिर रहे है. झारखंड की जमीन में आदिवासी मूलवासी का अधिकार है.लेकिन यहां पर तो ठीक इसका उल्टा हो रहा है. झारखंड बनने से पहले यहां के लोगों ने सोचा था कि, हम लोग का आदिवासी मुख्यमंत्री माटी का पुत्र यदि बनेगा तो उनका हर सुख-दुख में भागीदारी निभाएगा, लेकिन झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता केवल मंच में ही बड़े-बड़े डींग हांकते फिरते हैं. जमीन में आम आदिवासी मरे कोई मतलब नहीं है. इन ग्रामीण लोगों का केवल एक ही मांग है की जो खतियान के नक्शे में जो रास्ता है। वह रास्ता उन लोगों को दे दिया जाए और जो यहां के अधिकारी गलत तरीके से नक्शा का रास्ता हटा करके अधिकरण कराया है ऐसे अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
रमेश हांसदा ने आंदोलन में बैठे ग्रामीणों को कहा की इस लड़ाई में हम ग्रामीणों के साथ लक्ष्य की प्राप्ति तक साथ रहेंगे और आश्वासन दिया कि उनकी इस लड़ाई को राज्य सरकार तक, विपक्ष के नेता अमर बावरी के मार्फत और जिला अध्यक्ष विजय महतो के मार्फत पहुंचाएगा।