टाटानगर–सहरसा रेल सेवा को लेकर सांसद जोबा मांझी को सौंपा ज्ञापन, शीघ्र पहल का मिला आश्वासन।

टाटानगर–सहरसा रेल सेवा को लेकर सांसद जोबा मांझी को सौंपा ज्ञापन, शीघ्र पहल का मिला आश्वासन।

सरायकेला/आदित्यपुर

टाटानगर–सहरसा रेल सेवा समिति की ओर से सिंहभूम की सांसद श्रीमती जोबा मांझी को टाटानगर से सहरसा–मधेपुरा–पूर्णिया होते हुए कटिहार तक दैनिक एक्सप्रेस ट्रेन सेवा प्रारंभ करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा गया। *यह ज्ञापन सिंहभूम की सांसद श्रीमती जोबा मांझी के सांसद प्रतिनिधि सह सरायकेला-खरसावां जिले के शिक्षाविद् प्रोफेसर कालीपद सोरेन (के.पी. सोरेन) के माध्यम से सांसद महोदया तक पहुंचाया गया।

ज्ञापन में ट्रेन संख्या 28181/28182 के आंशिक मार्ग परिवर्तन के माध्यम से टाटानगर–सहरसा–मधेपुरा–पूर्णिया –कटिहार के बीच सीधा रेल संपर्क उपलब्ध कराने तथा टाटानगर से सहरसा–मधेपुरा–पूर्णिया होते हुए कटिहार तक दैनिक एक्सप्रेस रेल सेवा प्रारंभ करने की मांग प्रमुखता से रखी गई।
समिति के सदस्यों ने बताया कि कोसी एवं सीमांचल क्षेत्र के लाखों लोगों का टाटानगर एवं आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों से प्रत्यक्ष जुड़ाव है। वर्तमान में सीधी रेल सेवा उपलब्ध नहीं होने के कारण यात्रियों को काफी परेशानी होती है। नई रेल सेवा शुरू होने से झारखंड, बिहार के कोसी-सीमांचल क्षेत्र तथा औद्योगिक क्षेत्रों के बीच आवागमन को काफी सुविधा मिलेगी।

इस अवसर पर सांसद जोबा मांझी ने समिति के प्रतिनिधियों को आश्वासन देते हुए कहा कि वे इस महत्वपूर्ण मांग को लेकर शीघ्र ही रेल मंत्रालय एवं रेल मंत्री से बातचीत करेंगी और रेल परिचालन शुरू कराने की दिशा में विशेष आग्रह करेंगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता की सुविधा से जुड़े इस विषय को उचित स्तर पर उठाया जाएगा।

बोल बम कीर्तन समारोह के लिए सांसद को आमंत्रण

इसी क्रम में मिथिला संकीर्तन मंडली, आदित्यपुर की ओर से आगामी बोल बम कीर्तन समारोह के उद्घाटन हेतु सिंहभूम की सांसद श्रीमती जोबा मांझी को मुख्य अतिथि के रूप में सादर आमंत्रित किया गया। मंडली की ओर से उन्हें कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण पत्र सौंपा गया। मंडली द्वारा आयोजित होने वाला यह धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम 19 सितंबर 2026 को शाम 6:30 बजे आदित्यपुर स्थित वीर कुंवर सिंह मैदान, पथ संख्या 7-8, आदित्यपुर-2 में आयोजित किया जाएगा।

इस दौरान मुख्य रूप से निरंजन मिश्रा, अजय कुमार झा, अजय ठाकुर, ओम प्रकाश ठाकुर, आदित्य नारायण मिश्रा एवं इंद्रकांत झा सहित अन्य लोग उपस्थित थे। उपस्थित सदस्यों ने सांसद महोदया से कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर समारोह का उद्घाटन करने का आग्रह किया।

खरसावां में वीर शहीद निर्मल महतो का शहादत दिवस मनाई गई।

खरसावां में वीर शहीद निर्मल महतो का शहादत दिवस मनाई गई।

सरायकेला-खरसावां

खरसावां चांदनी चौक स्थित वीर शहीद निर्मल महतो भवन में आज 8 अगस्त को शहीद निर्मल महतो की शहादत दिवस अत्यंत श्रद्धा, सम्मान और सामाजिक चेतना के साथ मनाई गई। इस अवसर पर किसान, बुद्धिजीवी, छात्र-छात्राएं, युवा वर्ग तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम का उद्देश्य शहीद निर्मल महतो के विचारों, संघर्ष और बलिदान को स्मरण करते हुए नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से जोड़ना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत शहीद निर्मल के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। उपस्थित लोगों ने 2 मिनट का मौन रखकर वीर शहीद को नमन किया।

इस अवसर पर शिक्षक गुणधाम मुतरुआर ने अपने संबोधन में कहा कि आज 8 अगस्त झाड़खंड मसीहा शहीद निर्मल महतो का 39 वें शहादत दिवस है। शहीद निर्मल महतो का सपना केवल झाड़खंड का नक्शा बदलना नहीं था। वह झाड़खंड के भीतर सत्ता और विकास की दिशा बदलने का सपना था।  आज जब हम उनकी शहादत को याद कर रहे हैं, तो हमें यह तय करना होगा कि हम उन्हें इतिहास के एक अध्याय के रूप में याद करना चाहते हैं या उनके विचारों को वर्तमान की राजनीति का हिस्सा बनाना चाहते हैं। शहादत दिवस का अर्थ सिर्फ अतीत को याद करना नहीं होता। यह वर्तमान से सवाल करने और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर भी होता है। शहीद निर्मल महतो का नाम केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि यह बृहद झाड़खंड अलग राज्य आंदोलन का प्रतीक भी है। झाड़खंडी जनमानस की पहचान जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा झाड़खंडी मूल्यों के संरक्षण के लिए संघर्ष करना ही उनकी पहचान थी। 25 दिसंबर 1950 को जमशेदपुर के कदमा स्थित उलियान गांव में जन्मे निर्मल महतो एक तेजस्वी और संघर्षशील व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने हमेशा गरीब, शोषित पीड़ित और वंचित समाज के हक के लिए आवाज उठाई।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि शहीद निर्मल महतो ने अपने जीवन को झारखंडी जनमानस के स्वाभिमान और अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया। उनका संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं था, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और आत्मसम्मान की स्थापना का आंदोलन था। आज आवश्यकता है कि हम उनके विचारों को केवल स्मरण तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने व्यवहार और सामाजिक कार्यों में उतारें।

इस कार्यक्रम के दौरान कुड़माली विषय लेकर मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट में पास करने वाले विद्यार्थियों को कुड़मालि कैलेंडर, कुड़मालि पत्रिका “नउआ बिहान” और स्टीलपात्र देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में पंकज कुमार महतो, महेश्वर महतो, गदाधर महतो, शिक्षक सुनील कुमार जुरुआर, दुर्गा चरण महतो, संतोष महतो, बबलू महतो, दीपक कुमार महतो, राजाराम महतो, महावीर महतो, विक्रम महतो, शिवानंद महतो सहित अन्य छात्र-छात्राओं और युवाओं की सक्रिय भूमिका रही। सभी ने एक स्वर में शहीद निर्मल महतो के सपनों के झारखंड के निर्माण का संकल्प लिया।

अंत में उपस्थित जनसमूह ने शहीद निर्मल महतो अमर रहें के नारों के साथ कार्यक्रम का समापन किया तथा उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प व्यक्त किया।

कुड़मि समाज की पहचान, धर्म एवं कुड़मालि भाषा की राष्ट्रीय मान्यता की मांग।

कुड़मि समाज की पहचान, धर्म एवं कुड़मालि भाषा की राष्ट्रीय मान्यता की मांग।

जमशेदपुर

आदिवासी कुड़मि समाज के मूलखूॅंटी मूलमानता (संरक्षक) अजीत प्रसाद महतो के नेतृत्व में कुड़मि समाज के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी जातीय पहचान, पारंपरिक धर्म एवं कुड़मालि भाषा को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने की मांग को लेकर 6 अगस्त 2026 को भारत सरकार, नई दिल्ली में रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त के समक्ष मांग-पत्र सौंपा।

प्रतिनिधिमंडल में जमशेदपुर सांसद विद्युत वरण महतो, गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी, पुरुलिया सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो, आदिवासी कुड़मि समाज के अध्यक्ष शशांक शेखर महतो सहित समाज के अनेक प्रतिनिधि मंडल उपस्थित रहे।

मांग पत्र में आगामी जनगणना में कुड़मि समाज की जातीय पहचान एवं मातृभाषा का स्पष्ट एवं पृथक अंकन, पारंपरिक “प्रकृति धर्म अर्थात सारना कुड़मि धर्म” की मान्यता तथा कुड़मालि भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की दिशा में आवश्यक पहल करने की मांग की गई।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि कुड़मि समाज की मांग केवल पहचान का प्रश्न नहीं, बल्कि उसकी भाषा, संस्कृति, धार्मिक परंपरा और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण से जुड़ा विषय है। समाज ने केंद्र सरकार से इन मांगों पर संवेदनशीलता पूर्वक विचार करते हुए शीघ्र सकारात्मक पहल की अपेक्षा व्यक्ति की।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 7 अगस्त को गृह मंत्रालय की ओर से आश्वासन दिया गया कि वर्तमान संसद सत्र की व्यस्तताओं के कारण गृह मंत्री अमित शाह शीघ्र ही आदिवासी कुड़मि समाज के मुलखूॅंटी मूलमानता (संरक्षक) अजीत प्रसाद महतो तथा सांसद विद्युत वरण महतो, चंद्र प्रकाश चौधरी, ज्योतिर्मय सिंह महतो एवं खीरू महतो सहित अन्य प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक में कुड़मि समाज की मांगों पर विचार कर आवश्यक निर्णय लिए जाने की बात कही गई है। इस बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री भी शामिल होने की संभावना व्यक्त की है।
इस आश्वासन से कुड़मि समाज में अपनी भाषा, धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक अधिकारों को लेकर सकारात्मक उम्मीद जगी है।

इस अवसर पर  कृष्ण पद महतो, प्रेमचॉंद महतो, कमलेश महतो, अनंत महतो, वनमाली महतो एवं राधानाथ महतो सहित अनेक सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित थे।

एसिया ने किया एसपी मनोज स्वर्गियारी का अभिनंदन, उद्योगों में चोरी और नशे के कारोबार पर लगेगी लगाम – नए एसपी ने उद्यमियों को दिया भरोसा।

एसिया ने किया एसपी मनोज स्वर्गियारी का अभिनंदन, उद्योगों में चोरी और नशे के कारोबार पर लगेगी लगाम – नए एसपी ने उद्यमियों को दिया भरोसा।

सरायकेला/आदित्यपुर

आदित्यपुर स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (एसिया) की ओर से ऑटो क्लस्टर के सभागार में सरायकेला-खरसावां के नवनियुक्त पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी के सम्मान में एक स्वागत समारोह का आयोजन किया गया।

इस दौरान औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। उद्यमियों ने मुख्य रूप से क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने, फैक्ट्रियों में लगातार हो रही चोरी की वारदातों पर रोक लगाने, बस्ती इलाकों में बढ़ते नशा कारोबार पर कार्रवाई और आदित्यपुर में ट्रैफिक जाम व बेतरतीब पार्किंग की समस्या का मुद्दा उठाया।

समारोह में स्वागत भाषण देते हुए एसिया के अध्यक्ष इंदर अग्रवाल ने कहा कि औद्योगिक विकास के लिए सुरक्षित माहौल सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि नए पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में औद्योगिक क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सशक्त होगी, ऐसी उम्मीद है।

उद्यमियों की बात सुनने के बाद एसपी मनोज स्वर्गियारी ने कहा कि पुलिस और उद्यमी एक टीम की तरह मिलकर काम करेंगे तो बेहतर परिणाम आएंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि चोरी और आपराधिक घटनाओं पर नियंत्रण उनकी पहली प्राथमिकता रहेगी। साथ ही ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या के स्थायी समाधान के लिए संबंधित विभागों से बातचीत कर ठोस पहल की जाएगी।

मौके पर आदित्यपुर थाना प्रभारी अंजनी कुमार, गम्हरिया थाना प्रभारी संजय कुमार, आरआईटी थाना प्रभारी रविकांत पराशर, ट्रैफिक प्रभारी राजू सहित कई पुलिस अधिकारी मौजूद थे। वहीं एसिया के उपाध्यक्ष राजीव रंजन मुन्ना, महासचिव प्रवीण गुटगुटिया, पूर्व महासचिव दशरथ उपाध्याय, विनोद सिंह, चतुर्भुज केडिया, देवांग गांधी, संजय सिंह, रतन लाल अग्रवाल समेत आदित्यपुर के कई प्रमुख उद्यमी उपस्थित रहे।

वायरल इंफेक्शन के बाद अब बेहतर महसूस कर रहे हैं विधायक सरयू राय, समर्थकों से अस्पताल न आने की अपील।

वायरल इंफेक्शन के बाद अब बेहतर महसूस कर रहे हैं विधायक सरयू राय, समर्थकों से अस्पताल न आने की अपील।

रांची

वायरल इंफेक्शन के बाद अब बेहतर महसूस कर रहे हैं विधायक सरयू राय, समर्थकों से अस्पताल न आने की अपील
जमशेदपुर के विधायक सरयू राय ने अपनी सेहत को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लगाते हुए कहा है कि वे अब पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रहे हैं।

दरअसल, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के रांची के एक निजी अस्पताल में उनसे मिलने पहुंचने के बाद यह अफवाह उड़ गई थी कि विधायक गंभीर रूप से बीमार हैं और भर्ती हैं। इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए सरयू राय ने बताया है।

उन्होंने बताया कि 1 और 2 अगस्त को जमशेदपुर में लगातार कार्यक्रमों में शामिल होने के कारण काफी थकान हो गई थी। इसके बावजूद 3 अगस्त को वे टेल्को और गोविंदपुर में लगे कांवरिया सेवा शिविर के साथ ही तारापुर और डुमा में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल हुए।

इसके अगले दिन यानी 4 अगस्त को वे विधानसभा की समिति की बैठक में भाग लेने के लिए रांची रवाना हुए। रांची पहुंचने पर उन्हें बहुत ज्यादा थकावट महसूस हुई। इस पर उन्होंने डॉ. निशीथ कुमार और डॉ. संजय कुमार से संपर्क किया।

डॉक्टरों की सलाह पर वे रांची के क्योरेस्टा अस्पताल पहुंचे, जहां डॉ. संजय कुमार ने उन्हें कुछ दिनों तक निगरानी में रहने की सलाह देते हुए भर्ती कर लिया।

सरयू राय ने बताया कि दो दिन तक अस्पताल में रहने के दौरान उनकी कई तरह की मेडिकल जांचें की गईं। अब उन्हें अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। चिकित्सकों ने उम्मीद जताई है कि एक-दो दिन में उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जांच में वायरल संक्रमण की पुष्टि हुई थी और लगातार भागदौड़ व थकान की वजह से उन्हें डॉक्टरों की देखरेख में रहना पड़ा। दो दिन के इलाज के बाद अब उनकी तबीयत में काफी सुधार है।

महापौर संजय सरदार ने तनुश्री बोस को शॉल और मोमेंटो देकर सम्मानित किया।

महापौर संजय सरदार ने तनुश्री बोस को शॉल और मोमेंटो देकर सम्मानित किया।

सरायकेला/आदित्यपुर

आदित्यपुर नगर निगम की ब्रांड एंबेसडर और जानी-मानी शिक्षाविद् डॉ. तनुश्री बोस को मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किए जाने पर नगर निगम परिसर में एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में महापौर संजय सरदार ने डॉ. बोस को शॉल और मोमेंटो देकर सम्मानित किया। इस दौरान महापौर ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र के साथ-साथ समाज सेवा, महिला सशक्तिकरण और जन-जागरूकता के लिए किया जा रहा उनका कार्य पूरे समाज के लिए प्रेरणा स्रोत है। यह उपलब्धि सिर्फ आदित्यपुर ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के लिए गर्व का विषय है।

सम्मान के लिए आभार जताते हुए डॉ. तनुश्री बोस ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए एक बड़ी जिम्मेदारी है। इससे उन्हें भविष्य में शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में और अधिक लगन से काम करने की प्रेरणा मिली है। उन्होंने इस सम्मान के लिए महापौर और नगर निगम परिवार का धन्यवाद किया।

बता दें कि डॉ. तनुश्री बोस वर्तमान में गम्हरिया स्थित केरल पब्लिक स्कूल में शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं। शिक्षण के साथ-साथ वह सामाजिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं। उन्हें मिसेज इंडिया आईएमपी झारखंड 2025, सुपर मॉम झारखंड 2025 और मिसेज इंडिया नेशनल ग्लैम प्राइड 2025 जैसे प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। हाल ही में उन्हें विश्व संस्कृति एवं पर्यावरण संरक्षण आयोग के अंतरराष्ट्रीय सदस्य के रूप में भी चुना गया है।

इमली चौक के फल विक्रेता पर आपत्तिजनक आरोप, विश्व हिंदू परिषद ने थाने में की कार्रवाई की मांग।

इमली चौक के फल विक्रेता पर आपत्तिजनक आरोप, विश्व हिंदू परिषद ने थाने में की कार्रवाई की मांग।

सरायकेला/आदित्यपुर

सोनू कुमार सिंह

सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र स्थित इमली चौक इलाके से एक मामला प्रकाश में आया है, जहां एक फल विक्रेता पर दुकान परिसर में प्रतिबंधित मांस का सेवन करने का आरोप लगा है।


मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं में रोष देखा गया। संगठन के जिला अध्यक्ष डॉ. जे.एन. दास के नेतृत्व में विहिप कार्यकर्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल आदित्यपुर थाना पहुंचा और थाना प्रभारी को एक लिखित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पर त्वरित कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

विश्व हिंदू परिषद के नगर अध्यक्ष रोशन खां ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि इमली चौक स्थित फल की दुकान में फल विक्रेता द्वारा प्रतिबंधित मांस का सेवन किया जा रहा है। सूचना पर कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और घटना का वीडियो रिकॉर्ड किया। बताया गया कि उक्त वीडियो को साक्ष्य के रूप में पुलिस को सौंप दिया गया है।

उन्होंने कहा कि सावन का पवित्र महीना चल रहा है, इस दौरान बड़ी संख्या में लोग व्रत रखते हैं और फलाहार करते हैं। ऐसी स्थिति में फल की दुकान पर इस प्रकार की गतिविधि से लोगों की धार्मिक भावना आहत हुई है और क्षेत्र के सामाजिक माहौल पर भी असर पड़ सकता है।

संगठन ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए शांतिपूर्ण तरीके से इस मामले में न्याय सुनिश्चित करना है।

वहीं, इस संबंध में आदित्यपुर थाना प्रभारी ने आश्वासन दिया है कि प्राप्त शिकायत और साक्ष्यों के आधार पर मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी और नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।

संयुक्त राष्ट्र का एसडीज़ी 10 लक्ष्य अगस्त 2026 और भारत में आरक्षण नीति का समकालीन विमर्श -वैश्विक आह्वान और भारतीय यथार्थ का अंतर्संबंध -समग्र व्यापक विश्लेषण।

संयुक्त राष्ट्र का एसडीज़ी 10 लक्ष्य अगस्त 2026 और भारत में आरक्षण नीति का समकालीन विमर्श -वैश्विक आह्वान और भारतीय यथार्थ का अंतर्संबंध -समग्र व्यापक विश्लेषण।

संयुक्त राष्ट्र ने अगस्त 2026 के लिए सतत विकास लक्ष्य  10 के तहत असमानताओं में कमी,को महीने का लक्ष्य (गोल ऑफ़ द मंथ) घोषित किया

जब तक हम आरक्षित वर्ग के भीतर छुपे हुए सबसे गरीब और हाशिए के व्यक्ति को सीधे तौर पर लक्षित करके लाभ नहीं पहुंचाएंगे, तब तक वैश्विक मंच पर असमानता कम करने का भारत का दावा अधूरा रहेगा -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर हर देश आज आर्थिक प्रगति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता,डिजिटल क्रांति और वैज्ञानिक उपलब्धियों के नए दौर में प्रवेश कर चुका है,लेकिन विकास की इस चमक के पीछे असमानता की कई नई परतें उभर रही हैं। संयुक्त राष्ट्र ने अगस्त 2026 के लिए सतत विकास लक्ष्य  (एसडीज़ी)10 के तहत रिड्यूस्ड इनेक्वालिटीज को महीने का लक्ष्य (गोल ऑफ़ द मंथ) घोषित करनेकी आधिकारिक जानकारी 3 अगस्त 2026 को अपनी आधिकारिक संयुक्त राष्ट्र सतत विकास वेबसाइट (यू एन गोल ऑफ़ द मंथ) पर अपडेट की है संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-10, रिड्यूस्ड इनेक्वालिटीज अर्थात असमानताओं में कमी, का उद्देश्य केवल आय का अंतर घटाना नहीं, बल्कि सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक समावेशन को मजबूत करना तथा सभी लोगों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है।संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि असमानता दीर्घकालीन सामाजिक एवं आर्थिक विकास को कमजोर कर सकती है,गरीबी उन्मूलन की गति को प्रभावित कर सकती है और लोगों में अवसरों तथा संस्थाओं के प्रति विश्वास को कम कर सकती है। यह घोषणा एक ऐसे मोड़ पर हुई है जब संपूर्ण विश्व आर्थिक विषमता, सामाजिक ध्रुवीकरण और संसाधनों के असमान वितरण जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। संयुक्त राष्ट्र का यह विज़न स्पष्ट रूप से मांग करता है कि दुनियाँ का प्रत्येक राष्ट्र अपनी आंतरिक नीतियों की समीक्षा करे,ताकि समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े अंतिम व्यक्ति (वंचित वर्ग) को विकास की मुख्यधारा में शामिल किया जासके। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह बताना चाहूंगा कि  संयुक्त राष्ट्र आमतौर पर प्रत्येक नए महीने के पहले या शुरुआती दिनों (जैसे 1 से 3 तारीख के बीच) में उस महीने के विशेष वैश्विक अभियान या गोल ऑफ़ द मंथ की विस्तृत रिपोर्ट और घोषणा जारी करता है, इस बार अगस्त 2026 के इस विशेष अभियान को 3 अगस्त 2026 को पूर्ण विवरण (आंकड़ों और वैश्विक प्राथमिकताओं) के साथ सार्वजनिक किया गया है,जब हम इस अंतर्राष्ट्रीय प्रतिमान को भारतीय धरातल पर क्रियान्वित होते देखते हैं, तो हमारा ध्यान सीधे तौर पर भारत की सबसे संवेदनशील और ऐतिहासिक नीति आरक्षण प्रणाली (रिजर्वेशन सिस्टम) की ओर जाता है। वर्तमान में,वैश्विक समानता के इस आह्वान के समानांतर, भारत के डिजिटल और सामाजिक पटल पर आरक्षण हटाओ आंदोलन जैसी मुहिम अत्यधिक तीव्रता से उभर रही हैं। यह अंतर्विरोध इस बात का जीवंत प्रमाण है कि देश में सामाजिक न्याय के पारंपरिक औजारों और आधुनिक आर्थिक वास्तविकताओं के बीच एक गहरी वैचारिक खाई उत्पन्न हो चुकी है।

साथियों, आरक्षण की संवैधानिक अवधारणा को समझे बिना इस प्रश्न का संतुलित उत्तर संभव नहीं है। भारत में आरक्षण का उद्देश्य किसी वर्ग को विशेषाधिकार देना नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सामाजिक बहिष्कार,भेदभाव और अवसरों की असमानता से प्रभावित समुदायों को शिक्षा, सरकारी रोजगार और प्रतिनिधित्व में आगे बढ़ने का अवसर देना था।भारतीय संविधान की समानता संबंधी व्यवस्था केवल औपचारिक समानता तक सीमित नहीं है; वह वास्तविक और सार्थक समानता की दिशा में भी विशेष प्रावधानों की अनुमति देती है।अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए विशेष उपायों का उद्देश्य उन बाधाओं को कम करना था, जिनके कारण अनेक समुदाय लंबे समय तक शिक्षा, प्रशासन और सामाजिक प्रतिष्ठा से दूर रहे।

साथियों, सत्तर वर्षों की यात्रा और आरक्षण की वर्तमान प्रासंगिकता भारतीय स्वतंत्रता के सात दशकों से अधिक समय बीत जाने के बाद, यह प्रश्न पूरी तरह से अपरिहार्य हो चुका है कि क्या आज भी आरक्षण की वास्तविक रूप में आवश्यकता है? इस विमर्श को समझने के लिए भारतीय समाज की ऐतिहासिक संरचना औरसमकालीन प्रगति दोनों का निष्पक्ष मूल्यांकन करना अनिवार्य है। आरक्षण नीति को भारतीय संविधान में एक निश्चित अवधि के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व के रूप में और सामाजिक- शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए एक ‘सकारात्मक कार्रवाई के तौर पर शामिल किया गया था। इस व्यवस्था ने निश्चित रूप से पिछले 70 वर्षों में देश के एक बहुत बड़े शोषित, वंचित और हाशिए पर पड़े समाज  को प्रशासनिक, शैक्षणिक और राजनैतिक व्यवस्था में अपनी आवाज उठाने की शक्ति प्रदान की है। इस नीति के बिना भारतीय लोकतंत्र शायद इतना समावेशी नहीं हो पाता। परंतु, समस्या तब उत्पन्न होती है जब सत्तर वर्षों के बाद भी समाज का एक बहुत बड़ा हिस्सा आज भी उसी आदिम पिछड़ेपन, निरक्षरता और घोर सामाजिक अभाव में जीने के लिए विवश है। यह जमीनी हकीकत इस बात की ओर इशारा करती है कि आरक्षण नीति अपने मूल उद्देश्यों को पूर्ण रूप से प्राप्त करने में कहीं न कहीं आंशिक रूप से ही सफल रही है। यही कारण है कि आज की युवा पीढ़ी और आधुनिक विचारक इस नीति की निरंतरता औरइसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।

साथियों, प्रशासनिक अभिजात्य वर्ग  और पीढ़ी-दर- पीढ़ी लाभ का संकट इस संपूर्ण विमर्श के केंद्र में सबसे ज्वलंत और तीखा प्रश्न यह है कि क्या जो लोग आरक्षण के बल पर समाज के शीर्ष पायदान पर पहुंच चुके हैं,जैसे कि आईएएस आईपीएस, केंद्रीय सेवाओं के उच्च अधिकारी, बड़े राजनेता और आर्थिक रूप से अत्यधिक संपन्न हो चुके उद्योगपति,क्या उनकी अगली पीढ़ियों को भी इस सुरक्षा कवच की आवश्यकता है? सोशल मीडिया और वर्तमान बौद्धिक विमर्शों में इस बात को लेकर तीव्र आक्रोश है कि आरक्षण का लाभ एक ही परिवार में पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित हो रहा है। जब अनुसूचित जाति या जनजाति का कोई व्यक्ति सिविल सेवा के सर्वोच्च पद पर पहुंच जाता है, तो उसकी आने वाली संतति को देश के सबसे महंगे कॉन्वेंट स्कूलों, महानगरों के उच्च बुनियादी ढांचों और समस्त आर्थिक सुख-सुविधाओं का स्वतः लाभ मिल जाता है। ऐसे में,उस संपन्न बच्चे की तुलना उसी की श्रेणी के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले किसी खेतिहर मजदूर,हाथ से मैला उठाने वाले या किसी सुदूर आदिवासी अंचल के बच्चे से करना पूर्णतः अतार्किक और अन्यायपूर्ण प्रतीत होता है। वास्तव में, इस नीतिगत विसंगति के कारण आरक्षित श्रेणियों के भीतर ही एक अभिजात्य वर्ग या क्रीमी लेयर का निर्माण हो गया है, जो अपनी ही जाति के सबसे गरीब, शोषित और अत्यंत पिछड़े लोगों के अधिकारों पर सटिकता से एकाधिकार जमाए बैठा है?

साथियों, सामाजिक,आर्थिक और नैतिक विषमता को बढ़ावा वर्तमान आरक्षण प्रणाली के इस रूप से समाज में एक नए प्रकार की सामाजिक, आर्थिक और नैतिक विषमता को बढ़ावा मिल रहा है, जो कि संयुक्त राष्ट्र के एसडीज़ी 10 के सिद्धांतों के सर्वथा विपरीत है। सामाजिक स्तर पर, यह व्यवस्था जातियों के बीच सद्भाव पैदा करने के बजाय वैमनस्य और विभाजन को गहरा कर रही है। जब योग्यता रखने वाले सामान्य वर्ग के युवाओं को अत्यधिक उच्च अंक प्राप्त करने के बाद भी रोजगार या शिक्षा से वंचित होना पड़ता है, और उनकी तुलना में अत्यधिक संपन्न पृष्ठभूमि वाले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों का चयन बहुत कम अंकों पर हो जाता है, तो समाज में असंतोष और मानसिक कुंठा का जन्म होता है। आर्थिक स्तर पर, यह विषमता इसलिए बढ़ रही है क्योंकि आरक्षण का आधार आज भी मुख्य रूप से केवल जन्मगत जाति बना हुआ है, न कि व्यक्ति की वर्तमान आर्थिक विपन्नता। नैतिक दृष्टिकोण से भी यह एक गंभीर संकट है। नीतिपरकता यह मांग करती है कि समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति को पहले सहारा दिया जाए। परंतु, वर्तमान व्यवस्था में नैतिक रूप से संपन्न हो चुके परिवारों द्वारा स्वेच्छा से इस लाभ का परित्याग न करना और राज्य द्वारा इस पर कोई कठोर सीमा न लगाना, उस अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के प्रति घोर नैतिक अन्याय है, जो आज भी प्राथमिक शिक्षा और दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहा है।

साथियों, अंतर्राष्ट्रीय प्रतिमान और सकारात्मक नीतिगत सुधारों की आवश्यकता अंतर्राष्ट्रीय स्तरपर जब हम सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का अध्ययन करते हैं, तो संयुक्त राष्ट्र का स्पष्ट मत है कि कोई भी सकारात्मक कार्रवाई शाश्वत या अपरिवर्तनीय नहीं हो सकती। उसे समय-समय पर व्यावहारिक डेटा, समकालीन सामाजिक विकास और आर्थिक पैमानों पर कसा जाना चाहिए।भारत के संदर्भ में भी, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने हालिया ऐतिहासिक निर्णयों में बार-बार इस बात पर बल दिया है कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के भीतर भी क्रीमी लेयर के सिद्धांत को कड़ाई से लागू किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, जातियों के उप-वर्गीकरण  की प्रक्रिया को अपनाना अत्यंत अनिवार्य हो चुका है। उप- वर्गीकरण का तात्पर्य यह है कि आरक्षित श्रेणियों के भीतर जो जातियां पिछले 70 वर्षों में पूरी तरह अछूती रह गईं और जिन्हें आरक्षण का 1 प्रतिशत लाभ भी नहीं मिल सका,उन्हें प्राथमिकता दी जाए,तथा जो जातियां इसका अधिकतम लाभ उठाकर पूरी तरह सशक्त हो चुकी हैं,उन्हें इस सुरक्षा चक्र से बाहर निकाला जाए।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि न्यायसंगत भविष्य की राह संयुक्त राष्ट्र का सतत विकास लक्ष्य (एसडीज़ी)10 हमें यह याद दिलाता है कि किसी भी प्रगतिशील राष्ट्र का मूल मंत्र लीव नों वन बिहाइंड (किसी को भी पीछे न छोड़ना) होना चाहिए। भारत में चल रहा आरक्षण हटाओ अभियान शायद वर्तमान व्यवस्था की अकर्मण्यता, विसंगतियों और अपारदर्शिता के विरुद्ध उपजा एक तीखा सुधारवादी स्वर है। 70 वर्षों के बाद आज देश को आरक्षण को पूरी तरह समाप्त करने की नहीं, बल्कि इसे अत्यंत सूक्ष्मता से पुनर्गठित और युक्तिसंगत करने की आवश्यकता है। आरक्षण का लाभ केवल एक पीढ़ी तक सीमित करने,संपन्न हो चुके प्रशासनिक व आर्थिक परिवारों को इस कोटे से बाहर करने और संपूर्ण बल देश की प्राथमिक शिक्षा व कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) पर देने से ही वास्तविक समानता स्थापित होगी। जब तक हम आरक्षित वर्ग के भीतर छुपे हुए सबसे गरीब और हाशिए के व्यक्ति को सीधे तौर पर लक्षित करके लाभ नहीं पहुंचाएंगे,तब तक वैश्विक मंच पर असमानता कम करने का भारत का दावा अधूरा रहेगा। एक न्यायसंगत, समतावादी और नैतिक राष्ट्र का निर्माण तभी संभव है जब सामाजिक न्याय का आधार केवल जातिगत राजनीति न होकर वास्तविक मानवीय आवश्यकता और राष्ट्रीय एकता बने।

क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

खबर का दिखा असर: आदित्यपुर में पुलिस का सघन जांच अभियान, गली-मोहल्ले और पार्क से भागते नजर आए अड्डेबाज और असामाजिक तत्व।

खबर का दिखा असर: आदित्यपुर में पुलिस का सघन जांच अभियान, गली-मोहल्ले और पार्क से भागते नजर आए अड्डेबाज और असामाजिक तत्व।

सरायकेला/आदित्यपुर

सड़क किनारे शराब पीने वालों को कड़ी चेतावनी, SP के निर्देश पर देर शाम तक चला विशेष अभियान।

असामाजिक गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए आदित्यपुर पुलिस पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है। पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी के निर्देश पर आदित्यपुर थाना पुलिस ने सोमवार देर शाम एक बड़ा सघन जांच अभियान चलाया।

आपको बताते चले कि झारखंड क्राइम रिपोर्टर हिंदी दैनिक अखबार के पोर्टल द्वारा दो दिन पहले ही सड़क किनारे शराब पीते हुए सामाजिक तत्वों पर न्यूज़ प्रकाशित की गई थी जिसे संज्ञान में लेते हुए पुलिस द्वारा यह सघन जांच अभियान चलाया गया।

पुलिस की टीमों ने थाना क्षेत्र के गली-मोहल्ले, चौक-चौराहों, पार्कों और सभी सार्वजनिक स्थानों पर एक साथ छापेमारी और गश्त की। पुलिस को देखते ही बिना वजह अड्डेबाजी कर रहे युवकों और असामाजिक तत्वों में हड़कंप मच गया और कई लोग इधर-उधर भागते नजर आए।

बिना काम घूमने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

अभियान के दौरान पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि आदित्यपुर में अब अड्डेबाजी और हुड़दंग बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कोई भी व्यक्ति बिना किसी ठोस कारण के गली-मोहल्ले, चौक-चौराहे या पार्कों में बैठकर अड्डेबाजी करता हुआ या माहौल खराब करता हुआ पाया गया, तो उसे किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सड़क किनारे शराब पीने वालों पर पुलिस की पैनी नजर

इस अभियान में विशेष रूप से सड़क किनारे बैठकर शराब पीने वालों को निशाना बनाया गया। पुलिस अधिकारियों ने कड़े लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि सार्वजनिक स्थल पर या सड़क किनारे शराब पीना कानूनन अपराध है।

आगे से कोई भी व्यक्ति सड़क किनारे शराब पीते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ उत्पाद अधिनियम के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई कर जेल भेजा जाएगा।

पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि अपने आसपास ऐसी किसी भी असामाजिक गतिविधि की सूचना तुरंत थाना को दें। पुलिस का यह विशेष अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

आदित्यपुर वार्ड 23 में विकास की नई पहल – पार्षद अवधेश सिंह की सराहनीय कोशिश

आदित्यपुर वार्ड 23 में विकास की नई पहल – पार्षद अवधेश सिंह की सराहनीय कोशिश

सरायकेला/आदित्यपुर

सोनू कुमार सिंह

आदित्यपुर नगर निगम के वार्ड नंबर 23 के लिए एक बड़ी और खुशखबरी सामने आई है। वार्ड के लोकप्रिय और कर्मठ पार्षद श्री अवधेश सिंह ने वार्ड की सबसे पुरानी और गंभीर समस्या – जर्जर नाले की समस्या के स्थायी समाधान के लिए बड़ा कदम उठाया है।

पार्षद अवधेश सिंह ने अपने प्रयास से रांची से विशेष सर्वेयर टीम को बुलवाकर वार्ड नंबर 23 के पूरे नाले का गहन सर्वेक्षण कराया। मौके पर मौजूद रहकर उन्होंने पूरी टीम को नाले की स्थिति दिखाई और अपनी योजना साझा की।

उनका विजन है कि वार्ड में पुराने खुले नाले की जगह ऊपर से स्लैब वाला आधुनिक कैनाल मॉडल का नया नाला बनाया जाए। इससे ना सिर्फ जलजमाव और गंदगी की समस्या खत्म होगी, बल्कि बदबू और मच्छरों से भी वार्ड वासियों को हमेशा के लिए निजात मिलेगी और ऊपर की जमीन का भी उपयोग हो सकेगा।

सर्वेयर टीम ने आश्वासन दिया है कि जल्द से जल्द इस प्रोजेक्ट का ड्रॉइंग मैप और एस्टीमेट तैयार कर विभाग को सौंपा जाएगा। पार्षद अवधेश सिंह ने इसे जल्द पास कराकर काम धरातल पर शुरू कराने की मांग की है।

उम्मीद जताई जा रही है कि अगले 2 से 3 महीनों में इस बड़े प्रोजेक्ट का काम धरातल पर दिखने लगेगा। अगर यह योजना पूरी होती है, तो यह वार्ड नंबर 23 के इतिहास का सबसे बड़ा विकास कार्य साबित होगा।

वार्ड वासियों ने की सराहना

पार्षद की इस सक्रियता को देख वार्ड की जनता में खुशी की लहर है। वार्ड वासियों का कहना है कि “अवधेश सिंह जी ही ऐसे पार्षद हैं जो सिर्फ कहते नहीं, करके दिखाते हैं। वर्षों से हम इस नाले की समस्या से जूझ रहे थे, आज पहली बार किसी ने इसके स्थायी समाधान के लिए इतनी गंभीरता से पहल की है।” लोगों ने उनकी कार्यशैली और विकास के प्रति समर्पण की दिल खोलकर सराहना की।

निश्चित तौर पर पार्षद अवधेश सिंह का यह कदम वार्ड 23 को स्वच्छ, सुंदर और विकसित बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

गरीब परिवार का जर्जर मकान देख विचलित हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी; दबंगों को चेतावनी देते हुए दिए तत्काल आवास निर्माण के निर्देश, राशन कम बांटने पर डीलर को लगाई सख्त फटकार।

गरीब परिवार का जर्जर मकान देख विचलित हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी; दबंगों को चेतावनी देते हुए दिए तत्काल आवास निर्माण के निर्देश, राशन कम बांटने पर डीलर को लगाई सख्त फटकार।

बरडीहा/गढ़वा

प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह ने आज प्रातः 6:00 बजे से बरडीहा प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों का सघन स्थल निरीक्षण किया। निरीक्षण की शुरुआत उन्होंने सर्वप्रथम ब्लॉक कॉलोनी से की, जहाँ उन्होंने आवासों एवं आवागमन के रास्तों का जायजा लिया। कर्मियों द्वारा मार्ग न होने की समस्या बताए जाने पर बीडीओ ने जल्द से जल्द पक्की सड़क निर्माण का भरोसा दिलाया।

नाद-खूंटा हटवाकर आम रास्ता कराया मुक्त

इसके पश्चात कुन्दरहे मोड़ से पहले मुखिया उमेश प्रजापति के नेतृत्व में एकत्रित 50-60 ग्रामीणों के आग्रह पर बीडीओ कुन्दरहे गांव पहुँचे। गांव के मुख्य रास्ते पर मवेशियों को बांधकर एवं नाद-खूंटा लगाकर किए गए अतिक्रमण को बीडीओ ने मौके पर ही हटवाया और आम रास्ते को सुचारू रूप से बहाल कराया।

हृदय विदारक दृश्य: जर्जर मकान और दबंगों की साजिश उजागर

निरीक्षण के दौरान बीडीओ प्रवीण कुमार सिंह की नजर एक अत्यंत जर्जर मकान पर पड़ी, जो बरसात में कभी भी धराशायी हो सकता था। पूछने पर कुछ असमाजिक तत्वों ने भ्रमित करने का प्रयास किया कि घर खाली है। परंतु सच्चाई सामने आते ही बीडीओ परिवार की अनुमति से घर के आंगन में दाखिल हुए।

पूछताछ में गृहस्वामी राजेंद्र सिंह के परिजनों ने बताया कि उन्हें आवास स्वीकृत हुआ है, लेकिन कुछ दबंगों द्वारा धोखे से जमीन की फर्जी रजिस्ट्री का दावा कर निर्माण कार्य रोका जा रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बीडीओ ने कड़ा रुख अपनाया।
“मानवता के खिलाफ है काम रोकना, हर हाल में बनेगा गरीब का घर”

मौके से ही बीडीओ ने आवास कोऑर्डिनेटर रवि रंजन को अविलंब निर्माण कार्य शुरू कराने का कड़ा निर्देश दिया। बीडीओ प्रवीण कुमार सिंह ने कड़े शब्दों में कहा:

“ज़मीन विवाद का बहाना बनाकर किसी गरीब को बेघर नहीं रखा जा सकता। यह मानवता के खिलाफ है। अगर यह जर्जर घर गिर गया तो बड़ा हादसा हो सकता है। कोई भी ताकत इस गरीब का घर बनने से नहीं रोक सकती। ज़मीन विवाद का निष्पादन मैं स्वयं (अंचल अधिकारी के रूप में) करूँगा, लेकिन निर्माण कार्य तुरंत शुरू होना चाहिए।”

बीडीओ के इस कड़े व मानवीय रुख से प्रभावित होकर ग्रामीणों में भी एकजुटता दिखी। मौके पर ही ग्रामीणों ने स्वतः आगे आकर मदद की घोषणा की—किसी ने एक ट्रैक्टर छरी, किसी ने बालू तो किसी ने सीमेंट देने का संकल्प लिया।

स्कूल, आंगनबाड़ी और खेल मैदान का निरीक्षण

आगे बढ़ते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी ने गांव के बच्चों के खेल मैदान एवं स्थानीय विद्यालय का जायजा लिया, जहाँ साफ-सफाई की व्यवस्था संतोषजनक पाई गई। आंगनबाड़ी केंद्र के निरीक्षण के दौरान बीडीओ ने उपस्थित बच्चों से आत्मीय संवाद कर उनकी पढ़ाई-लिखाई की जानकारी ली।

राशन में कटौती पर डीलर को कड़ी हिदायत

निरीक्षण के अंतिम चरण में बीडीओ ‘अनीता स्वयं सहायता समूह’ द्वारा संचालित जन वितरण प्रणाली (डीलर) की दुकान पर पहुँचे। वहाँ लाभुकों से राशन में कटौती (कम तोलने) की शिकायत मिलने पर बीडीओ ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने डीलर को सख्त निर्देश दिए कि:
गोदाम से पूरा राशन तौल कर प्राप्त करें।
लाभुकों को निर्धारित मात्रा में पूरा राशन वितरित करें।
भविष्य में राशन कटौती की शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।

आज होगी सभी मतदान केंद्रों पर मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशन।

आज होगी सभी मतदान केंद्रों पर मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशन।

बरडीहा/गढ़वा

मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण 2026: प्रारूप प्रकाशन, नोटिस तामिला एवं BLO के दायित्वों को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, झारखण्ड के पत्रांक 1605 (दिनांक 31.07.2026) के आलोक में आज दिनांक 04 अगस्त 2026 को प्रखंड सभागार, बरडीहा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखंड विकास पदाधिकारी  प्रवीण कुमार सिंह ने की, जिसमें क्षेत्र के सभी बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) , सुपरवाईजर एवं निर्वाचन कर्मी उपस्थित रहे।
प्रमुख बिंदु एवं आवश्यक दिशा-निर्देश:
आज होगा मतदाता सूची एवं ASDDF सूची का प्रारूप प्रकाशन:
प्रखंड विकास पदाधिकारी ने जानकारी दी कि कल सभी मतदान केंद्रों (बूथों) पर मतदाता सूची के प्रारूप (Draft Publication) का प्रकाशन किया जाएगा। इसके साथ ही ASDDF (Absent, Shifted, Dead, Duplicate, False) सूची का भी प्रकाशन होगा।

प्रारूप प्रकाशन के साथ ही नए मतदाताओं को जोड़ने एवं संशोधन की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू होगी।

दावा एवं आपत्ति (Claim & Objection):
प्रारूप प्रकाशन के बाद प्राप्त होने वाले आवेदनों—जैसे नया नाम जोड़ने (प्रपत्र 6), नाम हटाने/आपत्ति (प्रपत्र 7) और प्रविष्टियों में सुधार या स्थान परिवर्तन (प्रपत्र 8)—का ससमय एवं पारदर्शी निष्पादन किया जाएगा।

बीएलओ (BLO) द्वारा ही कराया जाएगा नोटिस तामिला:
दावा एवं आपत्तियों की सुनवाई के दौरान जो भी नोटिस जनरेट किए जाएँगे, उनका स्थलीय तामिला कराने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित BLO की ही होगी।

बीएलओ घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन सुनिश्चित करेंगी।
अभियान की महत्वपूर्ण तिथियाँ एवं कार्य योजना:
पात्रता/कट-ऑफ तिथि: 01 अक्टूबर 2026 को 18 वर्ष पूर्ण करने वाले सभी युवा अपना नाम जुड़वाने हेतु पात्र होंगे।

अभियान की अवधि: फॉर्म 6, 7 और 8 स्वीकार करने का कार्य 05 अगस्त से 04 सितंबर 2026 तक चलेगा।

विशेष बूथ कैंप तिथियाँ (शनिवार-रविवार):
   पहला कैंप: 09 एवं 10 अगस्त 2026
   दूसरा कैंप: 22 एवं 23 अगस्त 2026
   (इन तिथियों पर सभी बीएलओ अपने-अपने बूथों पर बैठकर आवेदन प्राप्त करेंगी।)

विशेष ग्राम सभा: 15 अगस्त 2026 को मतदाता सूची के संबंध में विशेष ग्राम सभा का आयोजन होगा।

ऑनलाइन/ऑफलाइन आवेदन: आम नागरिक अपना आवेदन ऑफलाइन (BLO के माध्यम से) या ऑनलाइन (Voter Helpline App / ECINET) भी कर सकते हैं।

सार्वजनिक अपील:

BDO प्रवीण कुमार सिंह ने बरडीहा के आम नागरिकों से अपील की है कि कल बूथों पर प्रकाशित होने वाली प्रारूप मतदाता सूची में अपना नाम अवश्य जाँच लें  किसी भी तरह की शिकायत /समस्या होने पर तुरंत अपनी दर्ज करें l
अभियान अवधि (05 अगस्त से 04 सितंबर) के दौरान अपनी पात्रता के अनुसार फॉर्म भरकर मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने में सहयोग करें l

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