विश्व विकास विद्यालय मिरुडीह के प्रांगण में मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस।

विश्व विकास विद्यालय मिरुडीह के प्रांगण में मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस।

सरायकेला/आर.आई.टी

योग करें निरोग रहे:-डॉक्टर पी एन मोदी

तनाव व चिंता को कम करता है योगा:- ध्रुव प्रसाद सिंह

तनाव का स्तर कम करता है योगा:- संस्थापक लखीपति महतो

सरायकेला खरसावां जिले के आर.आई.टी थाना क्षेत्र अंतर्गत स्थित विश्व विकास विद्यालय मिरुडीह के प्रांगण में मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस। आपको बताते चलें कि विद्यालय के संस्थापक लखीपति महतो के नेतृत्व में यह योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें की बच्चों को योग के महत्व को समझाया गया एवं इसके साथ ही योग गुरु एवं शिक्षकों द्वारा सभी बच्चों को योग करवाया गया साथ ही योग से होने वाले फायदे एवं बीमारियों से बचाव पर भी प्रकाश डाला।

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉक्टर परमानंद मोदी राष्ट्रीय अध्यक्ष सह संस्थापक भारतीय गैर सरकारी शिक्षक संघ सह समाजसेवी संस्था IPTA द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई।

वहीं उक्त कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद डॉक्टर पी एन मोदी ने कहा कि भारतीय गैर सरकारी शिक्षक समाज सेवी संस्था की ओर से इस विद्यालय में हर महीने रक्त जांच के साथ-साथ स्वास्थ्य जांच की सुविधा सस्ते एवं उचित डॉक्टरों की सलाह से करवाई जाएगी। जिसका प्रस्ताव विश्व विकास विद्यालय के सारे शिक्षकगन के बीच पारित किया गया।

कार्यक्रम में विशिष्ट स्थिति के रूप में उपस्थित समाजसेवी ध्रुव प्रसाद सिंह ने कहा कि योगा करने से संपूर्ण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। योग हमारे शरीर में लचीलापन और ताकत बढ़ाता है, तनाव व चिंता को कम करता है और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है।

उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास से शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और लचीलापन बढ़ता है। साथ ही पीठ के निचले हिस्से के दर्द और गठिया के लक्षणों को कम करने में अत्यधिक प्रभावी है।

वहीं विश्व विकास विद्यालय के संस्थापक लखीपति महतो ने कहा कि योग रक्तचाप को नियंत्रित करने और हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम करने में सहायक है योगा। साथ ही गहरी सांस लेने और ध्यान लगाने से तनाव का स्तर कम होता है।

वहीं उक्त कार्यक्रम में विद्यालय के अध्यक्ष लोकनाथ हेंब्रम शिव कुमार, आरसी मिश्रा, सचिव शिवाजी महतो, सदस्य श्रवण बेसरा साधना, सुशांत सेतु साथी सभी शिक्षक एवं शिक्षिकाएं मौजूद रहें।

इसके साथ ही योगा करने के पश्चात विद्यालय के शिक्षक शिक्षिकाओं द्वारा बच्चों के बीच गुड़ चना एवं शरबत का वितरण किया गया।

कपाली ओपी प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मी को पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी ने किया निलंबित।

कपाली ओपी प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मी को पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी ने किया निलंबित।

सरायकेला/चांडिल

सोनू कुमार सिंह

सरायकेला खरसावां जिले के चांडिल थाना क्षेत्र अंतर्गत कांदरबेड़ा पुनर्वास कॉलोनी की एक आदिवासी युवती से कपाली ओपी के पुलिसकर्मियों द्वारा मारपीट और बल प्रयोग का मामला सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक ने सख्त कार्रवाई करते हुए कपाली ओपी के थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.

घटना के संबंध में मेरी जानकारी के अनुसार 15 जून 2026 को चाण्डिल थाना क्षेत्र अंतर्गत कांदरबेड़ा पुनर्वास कॉलोनी की एक आदिवासी युवती के साथ कपाली ओपी के पुलिस पदाधिकारी/कर्मियों द्वारा हिंसा और बल प्रयोग करने की शिकायत मिली थी. मामला गंभीर होने के कारण पुलिस अधीक्षक ने खुद संज्ञान लेते हुए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी चाण्डिल को जांच का निर्देश दिया.

वहीं इस मामले पर जांच के क्रम में तीन पुलिस कर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई जिस पर तत्काल प्रभाव से कार्यवाई करते हुए, कपाली यूपी के थाना प्रभारी धीरंजन कुमार, समेत मुकलेश्वर रहमान, कपाली ओपी
महिला आरक्षी-981 कंचन, कपाली ओपी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही उनके खिलाफ अग्रेतर अनुशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

वहीं इस मामले पर पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि आम जनता, विशेषकर कमजोर वर्गों के साथ किसी भी तरह की हिंसा या बल प्रयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. विभाग में ऐसी घटनाओं पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है और दोषी पुलिसकर्मियों पर कठोर कार्रवाई तय है. पीड़ित युवती को न्याय दिलाने के लिए आगे की कानूनी प्रक्रिया भी जारी है। पुलिस अधीक्षक के इस कार्यवाही से क्षेत्र वीडियो में एक खुशी की लहर दौड़ पड़ी है

प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला खरसावां के अध्यक्ष भरत सिंह ने की आदित्यपुर थाना प्रभारी का स्वागत अभिनंदन।

प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला खरसावां के अध्यक्ष भरत सिंह ने की आदित्यपुर थाना प्रभारी का स्वागत अभिनंदन।

सरायकेला/आदित्यपुर

प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला खरसावां के अध्यक्ष भरत सिंह ने आदित्यपुर के नए थाना प्रभारी अंजनी कुमार का स्वागत अभिनंदन किया।

आपको बताते चलें कि सरायकेला खरसावां जिले के पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी द्वारा जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था सुदृढ़ करने एवं अपराधों पर नियंत्रण के लिए नए थाना प्रभारी के रूप में अंजनी कुमार सिंह की नियुक्ति की है।

वहीं सरायकेला के पुलिस अधीक्षक के निर्देश जारी करते ही 15 जून यानी कि सोमवार को अंजनी कुमार सिंह ने आदित्यपुर थाने में पदभार ग्रहण कर लिया।

वहीं नए थाना प्रभारी के पदभार ग्रहण करने के पश्चात प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला खरसावां के अध्यक्ष भरत सिंह के नेतृत्व में क्लब के कई पत्रकारों ने आदित्यपुर थाना पहुंचकर क्लब के अध्यक्ष भरत सिंह के साथ-साथ पत्रकारों ने भी आदित्यपुर के नए थाना प्रभारी का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत एवं अभिनंदन किया।

वहीं क्लब के अध्यक्ष ने नए थाना प्रभारी का स्वागत अभिनंदन करने के पश्चात क्षेत्र में नशे के गिरफ्त में आ रहे हैं युवाओं एवं नई पीढ़ियां को नशे की गिरफ्तार से बाहर लाना एवं नशे के खिलाफ जागरूक करना इन सभी मुद्दों पर गहनता से चर्चा की।

वहीं थाना प्रभारी अंजनी कुमार सिंह ने क्लब के अध्यक्ष भरत सिंह को एवं क्लब के तमाम पत्रकारों के माध्यम से क्षेत्र वासियों को यह आश्वासन देते हुए कहा कि नशे को जड़ से उखाड़ना फेंकना उनकी पहली प्राथमिकता होगी।

आपको बताते चलें कि आदित्यपुर क्षेत्र में नए थाना प्रभारी के सामने केवल नशा ही एक चुनौती नहीं और भी कई गंभीर चुनौतियां हैं जिनका सामना नए थाना प्रभारी को करना होगा और उन सभी चुनौतियों का सामना करते हुए क्षेत्र को अपराध मुक्त बनाना होगा।

मजदूर मसीहा स्वर्गीय सूर्य देव सिंह की 35वीं पुण्यतिथि मनाई गई।

मजदूर मसीहा स्वर्गीय सूर्य देव सिंह की 35वीं पुण्यतिथि मनाई गई।

झारखंड/धनबाद

जनता की ताकत जनता का समर्थन ही हमारी शक्ति है:- संजीव सिंह, धनबाद, महापौर

प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी मजदूर मसीहा स्वर्गीय सूर्य देव सिंह की 35वीं पुण्यतिथि मनाई गई।


यह कार्यक्रम झरिया के कतरास मोड़ स्थित कार्यालय में सिंह मेंशन परिवार द्वारा आयोजित की गई। आपको बताते चलें कि उक्त कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, बुद्धिजीवी, विभिन्न श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि, मजदूर भाई-बहन और स्थानीय जनता की उपस्थिति रही।

वहीं उक्त कार्यक्रम पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम से पूर्व ही धनबाद के महापौर संजीव सिंह ने कहा कि मजदूर मसीहा स्वर्गीय सूर्य देव सिंह लगातार चार से पांच बार झरिया के विधायक रहें एवं वे अपने कार्यकाल में मजदूरों के लिए एवं मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ी। और उनके बताए हुए मार्ग पर आज हम चल रहे हैं एवं मजदूरों को एवं जिले वासियों को उनका हक दिलाने का कार्य कर रहे हैं।


वहीं इस श्रद्धांजलि सभा कार्यक्रम के अवसर पर झारखंड क्राईम रिपोर्टर हिंदी दैनिक का अखबार के संपादक और विश्व हिंदू रक्षा परिषद के राष्ट्रीय सह-प्रभारी संपूर्ण भारत भरत सिंह ने भी भी कार्यक्रम में शिरकत की एवं मजदूर मसीह सूर्य देव सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की।

सरायकेला खरसावां जिला महिला कांग्रेस की ओर से एक प्रशिक्षण और संगठन को मजबूत करने के लिए सभा का आयोजन किया गया।

सरायकेला खरसावां जिला महिला कांग्रेस की ओर से एक प्रशिक्षण और संगठन को मजबूत करने के लिए सभा का आयोजन किया गया।

सरायकेला-खरसावां

सरायकेला खरसावां जिला महिला कांग्रेस की ओर से एक प्रशिक्षण और संगठन को मजबूत करने के लिए सभा का आयोजन किया गया।

आदिवासी कल्याण समिति कुपटांगा में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड महिला प्रदेश अध्यक्ष रमा खालको और सुंदरी तिर्की उपस्थित हुई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता और संचालन महिला जिला अध्यक्ष संगीता प्रधान ने कियाकार्यक्रम में झारखंड में चल रहे SIR और बेरोजगारी के मुद्दे पर अपने बातों को रखा गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से जिला के पूर्व महिला अध्यक्ष बेबी सिंह कुरानकोल्हान इंटक के प्रभारी राणा सिंह झारखंड प्रदेश के सचिव सह जिला परिषद लक्ष्मी सरदार आदित्यपुर कांग्रेस के प्रभारी तसलीमा खातून कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिवाकर झा वरिष्ठ महिला नेत्री मिसर बांसारिया जिला महासचिव झरना मानना पूर्व जिला महासचिव सविता साव पूर्व जिला अध्यक्ष देबू चटर्जी जिला उपाध्यक्ष खिरोद सरदार प्रखंड गम्हरिया के अध्यक्ष अनिल ठाकुर गम्हरिया महिला कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष उर्मिला देवी सरायकेला प्रखंड महिला अध्यक्ष सुनीता रजक जिला महासचिव राजू रजक चंद्रकांत झा जिला महिला कांग्रेस उपाध्यक्ष अनीता महतो और सैकड़ो महिला कार्यकर्ता उपस्थित थे।

कांग्रेस अनुसूचित जाति के पूर्व जिला अध्यक्ष समाज सेवी स्वर्गीय बुद्धेश्वर मुखी उर्फ शान बाबू मुखी की दसवीं पुण्यतिथि मनाई गई।

कांग्रेस अनुसूचित जाति के पूर्व जिला अध्यक्ष समाज सेवी स्वर्गीय बुद्धेश्वर मुखी उर्फ शान बाबू मुखी की दसवीं पुण्यतिथि मनाई गई।

सरायकेला-खरसावां

सरायकेला खरसावां जिला कांग्रेस अनुसूचित जाति के पूर्व जिला अध्यक्ष समाज सेवी स्वर्गीय बुद्धेश्वर मुखी उर्फ शान बाबू मुखी की दसवीं पुण्यतिथि जिला उपाध्यक्ष खिरोद सरदार के नेतृत्व में आदिवासी कल्याण समिति कुपटांगा आदित्यपुर टू में उनके चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।

इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से जिला परिषद झारखंड प्रदेश सचिव लक्ष्मी सिंह सरदार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिवाकर झा, पूर्व जिला अध्यक्ष देबू चटर्जी जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष संगीता प्रधान पूर्व जिला अच्छे सदस्य राजमंगल ठाकुर पूर्व पार्षद पांडि मुखी मिसर बांसारिया, झरना मानना सविता साव सुनीता रजक आदि उपस्थित थे

भारत में अनेकों गाँव शहर बन गए,पर सरकारी रिकॉर्ड में गाँव ही हैँ, ऐसा क्यों?

भारत में अनेकों गाँव शहर बन गए,पर सरकारी रिकॉर्ड में गाँव ही हैँ, ऐसा क्यों?

ग्रामीण-शहरी वर्गीकरण की पुरानी व्यवस्था, मानकों पर पुनर्विचार कर संशोधन की तात्कालिक ज़रूरत -समग्र व्यापक विश्लेषण

गावों में बहुमंजिला इमारतें, औद्योगिक प्रतिष्ठान, निजी अस्पताल,शैक्षणिक संस्थान, बाजार, बैंकिंग सुविधाएँ,इंटरनेट कनेक्टिविटी, पक्की सड़कें और लाखों की आबादी मौजूद,इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में ग्राम के रूप में दर्ज?

संविधान के 73वें और 74वें संशोधन, अनुच्छेद 243-क्यू राज्य नगर पालिका अधिनियमों तथा जनगणना मानकों क़े ग्रामीण -शहरी प्रशासन क़े इन पारंपरिक मानकों को तात्कालिक संशोधन की जरूरत -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनी

गोंदिया/महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर भारत आज दुनियाँ के सबसे तेजी से शहरीकरण करने वाले देशों में शामिल है। देश के हजारों गाँव ऐसे हैं जो वास्तविकता में छोटे-बड़े शहरों का स्वरूप ग्रहण कर चुके हैं, वहाँ बहुमंजिला इमारतें, औद्योगिक प्रतिष्ठान, निजी अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, बाजार, बैंकिंग सुविधाएँ, इंटरनेट कनेक्टिविटी, पक्की सड़कें और लाखों की आबादी मौजूद है। इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में वे आज भी ग्राम के रूप में दर्ज हैं। इसके विपरीत कुछ क्षेत्रों में एक ही भौगोलिक क्षेत्र का एक भाग नगर परिषद अथवा नगर निगम में शामिल है जबकि दूसरा भाग ग्राम पंचायत के अधीन है। ऐसी स्थिति में एक ही क्षेत्र के नागरिकों को विकास योजनाओं बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के मामले में अलग-अलग व्यवहार का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति विकास नियोजन की दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है और अब यह मांग जोर पकड़ रही है कि गाँव और शहर निर्धारित करने के मानकों की व्यापक समीक्षा की जाए। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र अधिवक्ता के तौर पर गंभीरता से सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहूंगा क़ि मैंने कई शहरों में कई ऐसे स्थान देखें जहां पर रोड, नदी, नाले के इस तरफ शहर व उस तरफ गांव, जिससे वहां बिजली बिल, मकान टैक्स से लेकर जीवन शैली के हर स्टेज पर भेदभाव हो जाता है, वास्तव में किसी क्षेत्र को गाँव अथवा शहर घोषित करना केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं है,बल्कि इसके दूरगामी प्रभाव होते हैं। किसी क्षेत्र का दर्जा यह तय करता है कि वहाँ विकास योजनाएँ किस प्रकार लागू होंगी, किस प्रकार का स्थानीय प्रशासन कार्य करेगा, नागरिकों को कौन-कौन सी सुविधाएँ उपलब्ध होंगीकिस प्रकार के कर लगाए जाएंगे,भूमि उपयोग की नीति क्या होगी तथा आधारभूत संरचना का विकास किस दिशा में होगा। यदि कोई क्षेत्र ग्राम पंचायत के अंतर्गत है तो उस पर ग्रामीण विकास कार्यक्रमों का प्रभाव अधिक रहता है, जबकि नगर परिषद, नगरपालिका अथवा नगर निगम क्षेत्र में शामिल होने पर शहरी विकास योजनाएँ, सीवरेज व्यवस्था,नगर परिवहन, स्मार्ट अवसंरचना औरनियोजित विकास जैसी सुविधाएँ उपलब्ध होने लगती हैं। इसलिए यदि किसी क्षेत्र की वास्तविक स्थिति और सरकारी वर्गीकरण में अंतर हो तो उसका सीधा प्रभाव नागरिकों के जीवन स्तर और विकास के अवसरों पर पड़ता है।

साथियों, भारत में गाँव की कोई एक समान राष्ट्रीय कानूनी परिभाषा नहीं है। सामान्यतः गाँवों की पहचान राज्यों के राजस्व अभिलेखों और पंचायत कानूनों के आधार पर की जाती है। संविधान के भाग-IX तथा पंचायती राज व्यवस्था के अंतर्गत ग्राम पंचायतों का गठन किया जाता है और राज्य सरकारें अपने-अपने पंचायत अधिनियमों के अनुसार गाँवों का प्रशासन संचालित करती हैं।किसी क्षेत्र को सामान्यतः तब ग्रामीण क्षेत्र माना जाता है जब वह राजस्व अभिलेखों में गाँव के रूप में दर्ज हो, ग्राम पंचायत के प्रशासनिक क्षेत्र में आता हो तथा नगर निकाय की सीमा से बाहर स्थित हो। परंतु पिछले कुछ दशकों में अनेक ऐसे गाँव विकसित हुए हैं जहाँ कृषि गतिविधियों की जगह उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र ने ले ली है, फिर भी उनका प्रशासनिक दर्जा नहीं बदला है।

साथियों, भारत में शहरों का वर्गीकरण मुख्यतःदोश्रेणियों में किया जाता है,वैधानिक शहर (स्टेटुटरी टाउन) और जनगणना शहर (सेंसस टाउन)। वैधानिक शहर वे होते हैं जिन्हें राज्य सरकार किसी कानून के अंतर्गत नगर निगम, नगर परिषद, नगरपालिका अथवा नगर पंचायत के रूप में अधिसूचित करती है। इनकी स्थापना राज्य के नगर पालिका अधिनियमों केee अंतर्गत होती है और इनके गठन का अंतिम अधिकार राज्य सरकार के पास होता है। नगर निगम,नगर परिषद, नगरपालिका तथा नगर पंचायत इसी श्रेणी में आते हैं। किसी क्षेत्र की जनसंख्या, आर्थिक गतिविधियों, राजस्व क्षमता और नगरीय स्वरूप को देखते हुए राज्य सरकारें ऐसे निकायों की स्थापना करती हैं।दूसरी ओर जनगणना शहर की अवधारणा भारत की जनगणना द्वारा विकसित की गई है। जनगणना के अनुसार यदि कोई क्षेत्र तीन निर्धारित मानकों को पूरा करता है तो उसे जनगणना शहर माना जाता है। पहला, उस क्षेत्र की आबादी कम से कम 5000 होनी चाहिए। दूसरा, वहाँ जनसंख्या घनत्व कम से कम 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर होना चाहिए।तीसरा पुरुष मुख्य कार्यबल का कम से कम 75 प्रतिशत भाग कृषि के बजाय गैर-कृषि गतिविधियों में संलग्न होना चाहिए। इन मानकों को 1961 कीजनगणना के दौरान प्रमुख रूप से अपनाया गया था और आज भी काफी हद तक इन्हीं का उपयोग किया जाता है।

साथियों,यहीं से समस्या प्रारंभ होती है।1961 का भारत और 2026 का भारत पूरी तरह भिन्न हैं।छह दशक पहले देश की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि आधारित थी, औद्योगिकीकरण सीमित था,शहर अपेक्षाकृत छोटे थे और ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंख्या का अनुपात बहुत अधिक था।आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। महानगरों का विस्तार कई किलोमीटर दूर तक हो चुका है। अनेक गाँव महानगरों के उपनगर बन चुके हैं। लाखों लोग ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करते हुए प्रतिदिन शहरों में जाकर रोजगार करते हैं। सेवा क्षेत्र,सूचना प्रौद्योगिकी डिजिटल अर्थव्यवस्था और आधुनिक परिवहन ने ग्रामीण एवं शहरीe जीवन के बीच की पारंपरिक दूरी को काफी हद तक समाप्त कर दिया है। ऐसे में केवल जनसंख्या, घनत्व और गैर-कृषि रोजगार के आधार पर किसी क्षेत्र की वास्तविक प्रकृति का निर्धारण करना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।

साथियों, भारत के संविधान में ग्रामीण और शहरीस्थानीय निकायों के लिए महत्वपूर्ण संवैधानिक व्यवस्था की गई है। वर्ष 1992 में लागू 73वें संविधान संशोधन ने पंचायत राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया। इसके माध्यम से ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद जैसी संस्थाओं को सशक्त बनाया गया। इसी प्रकार 74वें संविधान संशोधन द्वारा शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक मान्यता प्रदान की गई, जिसके अंतर्गत नगर पंचायत, नगरपालिका और नगर निगम जैसी संस्थाओं को संवैधानिक आधार मिला। संविधान का अनुच्छेद 243-क्यू नगर पंचायतों, नगरपालिकाओं और नगर निगमों के गठन से संबंधित है। इस अनुच्छेद के अनुसार राज्य सरकारें स्थानीय परिस्थितियों, जनसंख्या, आर्थिक गतिविधियों, राजस्व क्षमता और नगरीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए किसी क्षेत्र को शहरी निकाय के रूप में अधिसूचित कर सकती हैं। यद्यपि संविधान ने व्यापक ढाँचा उपलब्ध कराया है, फिर भी शहर घोषित करने का अंतिम अधिकार राज्यों के पास है। प्रत्येक राज्य के नगर पालिका अधिनियम में नगर पंचायत, नगरपालिका अथवा नगर निगम के गठन के लिए अलग-अलग मानदंड निर्धारित हो सकते हैं।सामान्यतः जनसंख्या जनसंख्या घनत्व, स्थानीय राजस्व, औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियाँ, नगरीय अवसंरचना तथा प्रशासनिक आवश्यकता जैसे तत्वों को ध्यान में रखा जाता है। इसी कारण विभिन्न राज्यों में समान जनसंख्या वाले क्षेत्रों का दर्जा सटीक रूप से अलग- अलग हो सकता है।
साथियों, जब किसी क्षेत्र का प्रशासनिक वर्गीकरण उसकी वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता तो अनेक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। सबसे पहली समस्या विकास निधि के आवंटन की होती है। शहर जैसी आबादी और आवश्यकताओं वाले क्षेत्रों को भी शहरी विकास योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। परिणामस्वरूप वहाँ सड़क, जल निकासी, सीवरेज, सार्वजनिक परिवहन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसी सुविधाओं का पर्याप्त विकास नहीं हो पाता। दूसरी ओर ग्राम पंचायतों की वित्तीय और प्रशासनिक क्षमता इतनी नहीं होती कि वे तेजी से बढ़ते नगरीय क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा कर सकें। इसके अतिरिक्त अनियोजित निर्माण, अवैध कॉलोनियों का विकास और भूमि उपयोग संबंधी अव्यवस्था भी बढ़ जाती है।ऐसे क्षेत्रों में प्रशासनिक भ्रम भी देखने को मिलता है। कई बार एक ही सड़क के दोनों ओर अलग-अलग प्रशासनिक व्यवस्थाएँ लागू होती हैं। एक ओर नगर परिषद की सीमा होती है तो दूसरी ओर ग्राम पंचायत का क्षेत्र। परिणाम स्वरूप नागरिकों को कर व्यवस्था, भवन निर्माण अनुमति, जलापूर्ति, संपत्ति पंजीकरण और अन्य सेवाओं में असमानता का सामना करना पड़ता है। निवेशकों के लिए भी ऐसी स्थिति अनिश्चितता पैदा करती है, क्योंकि भूमि उपयोग और विकास नियम स्पष्ट नहीं होते।

साथियों, इस संदर्भ में यह प्रश्न भी उठता है कि क्या यह स्थिति विकासात्मक भेदभाव का उदाहरण है। कानूनी दृष्टि से इसे प्रत्यक्ष भेदभाव नहीं कहा जा सकता क्योंकि सरकारें वर्तमान कानूनों और अधिसूचनाओं के आधार पर कार्य करती हैं। फिर भी नीति निर्माण की दृष्टि से यह अवश्य कहा जा सकता है कि यदि कोई क्षेत्र वास्तविक रूप से शहरी बन चुका है और फिर भी उसे शहरी विकास योजनाओं तथा अवसंरचना निवेश से वंचित रखा जाता है तो वहाँ के नागरिक विकास के समान अवसरों से वंचित रह जाते हैं। इसलिए यह स्थिति विकासात्मक असमानता का रूप सटीकता से अवश्य धारण कर लेती है।
साथियों, विशेषज्ञों का मानना है कि अब गाँव और शहर के निर्धारण के लिए नए और आधुनिक मानकों की आवश्यकता है। केवल जनसंख्या और रोजगार आधारित मानक आज की जटिल सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं को नहीं दर्शाते। भविष्य में निर्मित क्षेत्र (बिल्ट- अप एरिया), भूमि उपयोग का स्वरूप, आर्थिक एकीकरण, प्रतिदिन शहरों में आने-जाने वाले लोगों की संख्या, परिवहन संपर्क, डिजिटल कनेक्टिविटी, जल एवं सीवरेज सुविधाओं की उपलब्धता तथा पर्यावरणीय वहन क्षमता जैसे मानकों को भी शामिल किया जाना चाहिए। इससे किसी क्षेत्र की वास्तविक प्रकृति का अधिक वैज्ञानिक आकलन संभव होगा।डिजिटल युग में उपग्रह चित्रों, ड्रोन सर्वेक्षण और भू-स्थानिक सूचना प्रणाली के उपयोग से यह कार्य और अधिक सरल हो सकता है। उपग्रह आधारित विश्लेषण से यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि किसी क्षेत्र में निर्माण गतिविधि कितनी बढ़ चुकी है, कृषि भूमि का कितना हिस्सा शहरी उपयोग में परिवर्तित हो चुका है तथा वहाँ की जनसंख्या का घनत्व और आर्थिक गतिविधियाँ किस स्तर तक पहुँच चुकी हैं। यदि प्रत्येक पाँच वर्ष में ऐसे वैज्ञानिक सर्वेक्षण किए जाएँ तो ग्रामीण और शहरी वर्गीकरण को अधिक यथार्थवादी बनाया जा सकता है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह सुधार अत्यंत आवश्यक है। आज भारत के अनेक तथाकथित गाँव आर्थिक दृष्टि से शहर बन चुके हैं,जबकि कई छोटे शहर अब महानगरीय क्षेत्रों का हिस्सा बन गए हैं। ऐसी स्थिति में 1961 के मानकों पर आधारित वर्गीकरण व्यवस्था भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम नहीं दिखाई देती। विकास संसाधनों का न्यायसंगत वितरण, नियोजित शहरीकरण, बेहतर स्थानीय प्रशासन और संतुलित क्षेत्रीय विकास तभी संभव होगा जब ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की परिभाषाओं को आधुनिक वास्तविकताओं के अनुरूप पुनर्परिभाषित किया जाए।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विशेषण करें तो हम पाएंगे क़ि यह कहा जा सकता है कि भारत में गाँव और शहर के निर्धारण की वर्तमान प्रणाली ने दशकों तक प्रशासनिक स्थिरता प्रदान की है, किंतु बदलते समय में इसकी व्यापक समीक्षा अपरिहार्य हो गई है। संविधान के 73 वें और 74 वें संशोधन, अनुच्छेद 243-क्यू , राज्य नगर पालिका अधिनियमों तथा जनगणना मानकों ने अब तक ग्रामीण- शहरी प्रशासन की आधारशिला रखी है, लेकिन आज आवश्यकता इस बात की है कि इन पारंपरिक मानकों के साथ आधुनिक तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक संकेतकों को भी जोड़ा जाए। तभी भारत के वास्तविक शहरीकरण को सही पहचान मिल सकेगी और विकास का लाभ प्रत्येक नागरिक तक समान रूप से पहुँच सकेगा।

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

मादक पदार्थों के दुरुपयोग के विरुद्ध जिला प्रशासन की व्यापक पहल : जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

मादक पदार्थों के दुरुपयोग के विरुद्ध जिला प्रशासन की व्यापक पहल : जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

सरायकेला-खरसावां

निषिद्ध मादक पदार्थों के दुरुपयोग एवं अवैध व्यापार के विरुद्ध संचालित राज्यव्यापी जागरूकता अभियान के तहत जिला प्रशासन, सरायकेला-खरसावां द्वारा सोमवार को समाहरणालय परिसर में जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी नितिश कुमार सिंह, उप विकास आयुक्त रीना हांसदा एवं जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सत्या ठाकुर की उपस्थिति में जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अवसर पर नशामुक्ति संबंधी हस्ताक्षर अभियान में सहभागिता करते हुए उपस्थित अधिकारियों, कर्मियों, आंगनबाड़ी सेविकाओं एवं सहियाओं को नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहने तथा समाज को नशामुक्त बनाने की शपथ दिलाई गई।

जिले में संचालित इस जागरूकता अभियान के सफल क्रियान्वयन हेतु विभिन्न विभागों के समन्वय से लगातार जन-जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य आमजन, विशेषकर युवाओं को मादक पदार्थों के सेवन से होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें नशे की प्रवृत्ति से दूर रहने के लिए प्रेरित करना है। इसके माध्यम से समाज में नशामुक्ति के प्रति सकारात्मक वातावरण का निर्माण करने एवं लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि मादक पदार्थों का बढ़ता दुरुपयोग समाज एवं विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि नशामुक्त समाज का निर्माण केवल प्रशासन के प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने सभी नागरिकों से नशे के विरुद्ध जन-जागरूकता फैलाने तथा युवाओं को सकारात्मक एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

उपायुक्त ने कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति एवं ऊर्जा होते हैं। युवाओं की सकारात्मक भागीदारी से ही नशामुक्त समाज के निर्माण के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने सभी से स्वयं नशे से दूर रहने तथा अपने परिवार, मित्रों एवं समुदाय को भी नशामुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

उप विकास आयुक्त श्रीमती रीना हांसदा ने अपने संबोधन में कहा कि नशे की समस्या केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका दुष्प्रभाव पूरे परिवार एवं समाज पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि जन-जागरूकता ही नशे के विरुद्ध सबसे प्रभावी माध्यम है। आंगनबाड़ी सेविकाएं, सहियाएं एवं सामुदायिक स्तर पर कार्यरत अन्य कर्मी अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए उन्हें नशामुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने नशा मुक्त झारखंड अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप देने तथा जिले को नशामुक्त बनाने में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया।

जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सत्या ठाकुर ने बताया कि राज्यव्यापी अभियान के अंतर्गत संचालित जागरूकता रथ जिले के विभिन्न प्रखंडों, ग्रामीण क्षेत्रों एवं शैक्षणिक संस्थानों का भ्रमण कर लोगों को मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों तथा नशामुक्त जीवन के महत्व के संबंध में जागरूक करेगा। उन्होंने बताया कि अभियान के तहत विभिन्न जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से आमजन, विशेषकर युवाओं को नशे की प्रवृत्ति से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही समाज में नशामुक्ति के प्रति सकारात्मक वातावरण के निर्माण एवं स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

इस अवसर पर डीपीएम, जेएसएलपीएस, विभिन्न विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मी, आंगनबाड़ी सेविकाएं, सहियाएं तथा अन्य संबंधित उपस्थित थे।

तिरुलडीह में नवनिर्मित पेट्रोल पंप का हुआ विधिवत उद्घाटन।

तिरुलडीह में नवनिर्मित पेट्रोल पंप का हुआ विधिवत उद्घाटन।

सरायकेला/तिरुलडीह

लंबे इंतजार के बाद आखिरकार तिरुलडीह में नवनिर्मित पेट्रोल पंप का विधिवत उद्घाटन कार्यक्रम आज 15 जून 2026 (सोमवार) को शहीद चौक के समीप सुसंपन्न हुआ।

पेट्रोल पंप शुरू होने से तिरुलडीह सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को पेट्रोल-डीजल के लिए दूर-दराज इलाकों का रुख करना नहीं पड़ेगा। इससे समय और संसाधनों की बचत होगी तथा स्थानीय व्यापार, परिवहन और क्षेत्रीय विकास को भी नई गति मिलेगी।

तिरुलडीह और आसपास के क्षेत्र के लोगों के लिए खुशी और गर्व का क्षण है। क्षेत्रवासियों को लंबे समय से जिस सुविधा का इंतजार था, वह अब साकार होने जा रही है।

तिरुलडीह के विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि मेसर्स हीरा साव जी के सौजन्य से

मौके पर स्थानीय लोकप्रिय विधायक महोदया सबिता महतो जी, महोदया की आप्त सचिव सह केंद्रीय सदस्य राजीव (काबलू) महतो, जी प्रमुख प्रतिमा वाला सिंह पातर जी, उप प्रमुख मो. एकराम अंसारी जी, प्रखण्ड विकास पदाधिकारी कुकड़ु राजश्री ललिता बाखला जी, थाना प्रभारी श्री कौशल कुमार जी, (मामाजी) संजय महतो जी, इंद्रजीत महतो जी, स्थानीय पत्रकार साथी, मेसर्स के सपरिवार उपस्थित रहे

न्यू श्री सई मोटर्स को पूर्वी भारत का सबसे भरोसेमंद ब्रांड पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

न्यू श्री साइन मोटर को MOST TRUSTED BRAND OF EASTERN INDIA AWARD से सम्मानित किया गया।

बिहार/पटना

रविवार 14 जून को पटना के ताज होटल में पूर्वी भारत के सबसे भरोसेमंद ब्रांड 2025- 2026 का हुआ आयोजन जिसमें की न्यू श्री साईं मोटर्स को भरोसेमंद ब्रांड के रूप में चिन्हित किया गया।

साथ ही न्यू श्री साइन मोटर्स के प्रबंध निदेशक हरचरण सिंह ( राजा ) को MOST TRUSTED BRAND OF EASTERN INDIA AWARD से सम्मानित किया गया।

आपको बताते चलें की यह पुरस्कार बॉलीवुड फिल्म की मशहूर अदाकारा मलाइका अरोड़ा के हाथों हर चरण सिंह उर्फ राजा को दिया गया। इसके बाद से ही न्यू श्री साइन मोटर्स कि नाम बच्चे बच्चे की जुबान तक पहुंच चुका है।

वहीं मलाइका अरोड़ा के हाथों पुरस्कृत होने के बाद हर चरण सिंह उर्फ (राजा) ने कहा कि आज बेहद ही खुशी का दिन है क्योंकि एक वक्त पुरानी दो गाड़ियां की खरीद बिक्री से यह ब्रांड की स्थापना की गई थी और आज यह ब्रांड इस उपलब्धि तक पहुंच चुका है कि मलाइका अरोड़ा जैसे मशहूर अदाकारा के हाथों इस ब्रांड को पुरस्कृत किया गया है और आगे भी इसी तरह से कड़ी मेहनत से उपलब्धियां की नई ऊंचाइयों को हासिल करना है जिससे कि आगे और भी पुरस्कारों से यह ब्रांड को पुरस्कृत किया जाए।

उन्होंने आगे कहा कि हर किसी का सपना होता है कि वह चार पहिया वाहन का आनंद ले और उनके इसी सपने को साकार करने के लिए हमने यह ब्रांड की स्थापना की थी और सैकड़ो लोगों के सपनों को हमने सरकार किया है और आगे भी लोगों के सपनों को साकार करने की इच्छा लेकर और भी कड़ी मेहनत से यह ब्रांड जनहित में कार्य करेगी।

ईचागढ़ थाना क्षेत्र में हाथी के हमले से एक वृद्ध महिला की हुई मौत।

ईचागढ़ थाना क्षेत्र में हाथी के हमले से एक वृद्ध महिला की हुई मौत।

सरायकेला/ईचागढ़

सरायकेला-खरसावां जिला के ईचागढ़ थाना क्षेत्र में हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज दिन हाथियों द्वारा जान माल की क्षति पहुंचाई जा रही है। हाथी ने ईचागढ़ थाना क्षेत्र के लाबा टोला वनडीह में बीते रात को 60 वर्षीय चंपा सिंह मुण्डा को पटक-पटक कर जान से मार दिया। वहीं चंपा सिंह मुण्डा के घर को भी छोड़ दिया।घटना की सुचना मिलते ही वन रक्षी कैलाश महतो एवं ईचागढ़ पुलिस घटनास्थल पर पहुंचे व लाश को कब्जे में लेकर थाना परिसर में सुरक्षित रखा गया।शुक्रवार को लाश का पोस्टमार्टम हेतु सरायकेला सदर अस्पताल भेज दिया गया।

वन विभाग द्वारा तत्काल 50 हजार रुपए मुआवजा राशि मृतक की बेटी मालती सिंह मुण्डा को दिया गया एवं कागजी प्रक्रिया के बाद साढ़े तीन लाख रूपए मुआवजा देने की बात कही गई। मिली जानकारी के अनुसार गुरुवार की रात को चंपा सिंह मुण्डा अपने घर से बाहर निकल रही थी,कि जंगली हाथी के चपेट में आ जाने से मौके पर ही उसकी मौत हो गई। मालूम हो कि ईचागढ़ के हाड़ात गांव में 24 अप्रैल को मां बेटी को हाथी द्वारा जान से मार दिया गया था। वहीं दो महिने के अंदर ईचागढ़ व तिरूलडीह थाना में 5 व्यक्तियों की हाथियों के मुठभेड़ से मौत हो गई है।

फिर सुलग़ रही खाड़ी: होर्मुज जलडमरूमध्य बंद,दुनियाँ में हड़कंप-भारत की ऊर्जा सुरक्षा, महंगाई और अर्थव्यवस्था पर मंडराता संकट? -व्यापक समग्र विश्लेषण

फिर सुलग़ रही खाड़ी: होर्मुज जलडमरूमध्य बंद,दुनियाँ में हड़कंप-भारत की ऊर्जा सुरक्षा, महंगाई और अर्थव्यवस्था पर मंडराता संकट? -व्यापक समग्र विश्लेषण

गोंदिया/महाराष्ट्र

होर्मुज जलडमरूमध्य बंद से केवल क्षेत्रीय नहीं वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटका की संभावना?, इस जलमार्ग में व्यवधान का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर दिखाई देता है

ईरान नें होर्मुज जलडमरूमध्य बंद से ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक व्यापार मुद्रास्फीति और आर्थिक स्थिरता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं

वैश्विक स्तरपर पश्चिम एशिया एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल का केंद्र बन गया है। 11 जून 2026 को स्थिति तब और गंभीर हो गई जब ईरान ने अमेरिका के साथ बढ़ते सैन्य टकराव के बीच दुनियाँ के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य, को सभी वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों के लिए बंद करने की घोषणा कर दी। ईरानी सैन्य नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश करने वाले किसी भी जहाज को निशाना बनाया जाएगा। यह कदम कथित रूप से अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री टकराव तथा अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों के बाद उठाया गया है। इसके साथ ही वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भारी बेचैनी फैल गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 95.40 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई लगभग 92.6 डॉलर प्रतिबैरल तक पहुंच गया है। दुनियाँ की लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस आपूर्ति इसी मार्ग से गुजरती है, इसलिए इस घटनाक्रम ने ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक व्यापार, मुद्रास्फीति और आर्थिक स्थिरता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत ने भी खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर बढ़ते हमलों और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताव्यक्त की है।

वर्तमान घटनाक्रम केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि यह बिल्कुल सही है क़ि होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व ऊर्जा व्यवस्था की धुरी माना जाता है। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह संकरा समुद्री मार्ग सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर, इराक और ईरान जैसे प्रमुख ऊर्जा उत्पादक देशों के निर्यात का मुख्य रास्ता है। सामान्य परिस्थितियों में प्रतिदिन करोड़ों बैरल तेल और विशाल मात्रा में एलएनजी इसी मार्ग से दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचती है। यही कारण है कि जब भी इस जलमार्ग में व्यवधान आता है, उसका असर सीधे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर दिखाई देता है। वर्तमान संकट में भी निवेशकों और ऊर्जा कंपनियों ने आपूर्ति बाधित होने की आशंका को देखते हुए तेल खरीदना शुरू कर दिया,जिसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतों में तत्काल उछाल देखने को मिला।

साथियों, अंतरराष्ट्रीय बाजारों की पहली प्रतिक्रिया तेल कीमतों में तेजी के रूप में सामने आई है। ब्रेंट क्रूड लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया है जबकि डब्ल्यूटीआई भी 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि यदि जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है या सैन्य संघर्ष और बढ़ता है तो तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर भी जा सकती हैं। वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी अस्थिरता बढ़ने की आशंका है क्योंकि ऊर्जा लागत लगभग हर आर्थिक गतिविधि को प्रभावित करती है।

साथियों, भारत के लिए यह संकट विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी आवश्यकता का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से पूरा होता है और उसका एक बड़ा भाग होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। इसलिए इस मार्ग में किसी भी प्रकार की रुकावट का सीधा असर भारतीय ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है। यदि तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है तो भारत का आयात बिल बढ़ेगा,चालू खाता घाटा बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव पड़ सकता है। ऊर्जा आयात पर बढ़ती लागत अंततः उपभोक्ताओं तक पहुंचती है और महंगाई को बढ़ावा देती है।सबसे पहला प्रभाव पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने से भारतीय तेल विपणन कंपनियों की लागत बढ़ जाती है। यदि मौजूदा तनाव कुछ और दिनों या सप्ताहों तक बना रहता है तो पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का अनुमान है कि लंबी अवधि तक ऊंचे तेल मूल्य बने रहने पर ईंधन की कीमतों में कई रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो सकती है। इसका सीधा असर आम नागरिकों, किसानों, उद्योगों और परिवहन क्षेत्र पर पड़ेगा।पेट्रोल और डीजल केवल वाहन चलाने का साधन नहीं हैं बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा हैं। डीजल की कीमत बढ़ने का अर्थ है कि ट्रकों, बसों और मालवाहक वाहनों की परिचालन लागत बढ़ जाएगी। जब परिवहन महंगा होता है तो फल, सब्जियां, दूध, अनाज, दवाइयां और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ने लगती हैं। यही कारण है कि तेल कीमतों में वृद्धि को अक्सर ‘महंगाई की जननी’ कहा जाता है। एक बार यदि ईंधन लागत बढ़ती है तो उसका असर अर्थव्यवस्था के लगभग हर क्षेत्र में सटीकता से दिखाई देता है।

साथियों, 7 जून 2026 से मृग लग गया है व खेती के कार्य शुरू हो चुके हैं,कृषि क्षेत्र भी इस संकट से अछूता नहीं रहेगा। भारत में सिंचाई, कृषि मशीनरी और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला का बड़ा हिस्सा डीजल पर निर्भर है। डीजल महंगा होने से किसानों की लागत बढ़ेगी और इसका असर खाद्यान्न कीमतों पर पड़ सकता है। इसके अलावा उर्वरक उद्योग प्राकृतिक गैस और पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर निर्भर है। यदि ऊर्जा लागत बढ़ती है तो उर्वरकों का उत्पादन भी महंगा हो सकता है।विमानन क्षेत्र पर भी दबाव बढ़ सकता है। विमान ईंधन की लागत एयरलाइंस के कुल खर्च का बड़ा हिस्सा होती है। यदि अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं तो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई किराए में वृद्धि संभव है। इससे पर्यटन उद्योग, व्यापारिक यात्राओं और विमानन क्षेत्र की मांग पर असर पड़ सकता है।

साथियों, भारत के लिए चिंता का एक और बड़ा विषय एलएनजी यानी तरल प्राकृतिक गैस की आपूर्ति है। भारत कतर सहित खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में एलएनजी आयात करता है और उसका महत्वपूर्ण हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है। यदि इस मार्ग में लंबे समय तक व्यवधान रहता है तो सीएनजी और पीएनजी की उपलब्धता तथा कीमतों पर असर पड़ सकता है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं के साथ- साथ बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण और औद्योगिक इकाइयों की लागत भी बढ़ सकती है।हालांकि स्थिति गंभीर है, लेकिन भारत पूरी तरह असहाय नहीं है। पिछले वर्षों में भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। देश के पास रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार मौजूद हैं जिनका उपयोग आपातकालीन परिस्थितियों में किया जा सकता है।विशाखापट्टनम मैंगलोर और पादुर जैसेस्थानों पर स्थापित भूमिगत भंडारण सुविधाएं सीमित अवधि के लिए देश को राहत प्रदान कर सकती हैं। ये भंडार किसी भी अचानक आपूर्ति संकट के दौरान महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच साबित हो सकते हैं।इसके अतिरिक्त भारत नेऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति अपनाई है। रूस से बढ़ते तेल आयात ने भारत को एक वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत उपलब्ध कराया है। रूस से आने वाला तेल सामान्यतः अन्य समुद्री मार्गों से आता है, इसलिए होर्मुज संकट की स्थिति में यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है। यदि आवश्यकता हुई तो भारत रूस तथा अन्य गैर-खाड़ी आपूर्ति कर्ताओं से आयात बढ़ाने की दिशा में सटिका से कदम उठा सकता है।

साथियों, सऊदी अरब,यूएई और अन्य खाड़ी देशों के पास भी कुछ वैकल्पिक पाइपलाइन मार्ग उपलब्ध हैं जिनके माध्यम से सीमित मात्रा में तेल निर्यात किया जा सकता है। हालांकि ये मार्ग होर्मुज के पूर्ण विकल्प नहीं हैं, फिर भी वे वैश्विक बाजार में आपूर्ति के पूर्ण ठहराव को रोकने में मदद कर सकते हैं। इसी कारण ऊर्जा बाजारों में अभी भी आशा बनी हुई है कि राजनयिक प्रयासों के माध्यम से स्थिति को नियंत्रित किया जा सकेगा।भू-राजनीतिक दृष्टि से यह संकट केवल तेल या गैस तक सीमित नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व समुद्री व्यापार के सबसे संवेदनशील मार्गों में से एक है। इसके बंद होने से बीमा लागत, माल ढुलाई शुल्क और शिपिंग समय में वृद्धि होती है। अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक कंपनियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़ते हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। कोविड-19 महामारी और यूक्रेन संकट के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले ही आपूर्ति व्यवधानों का अनुभव कर चुकी है; ऐसे में होर्मुज संकट नई चुनौतियां पैदा कर सकता है।

साथियों, भारत ने संयुक्त राष्ट्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि क्षेत्र में बढ़ते हमले और समुद्री असुरक्षा वैश्विक व्यापार तथा भारतीय नागरिकों दोनों के लिए चिंता का विषय हैं। भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों, व्यापारिक जहाजों और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसलिए नई दिल्ली स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक समाधान का समर्थन कर रही है।वर्तमान परिस्थितियों में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि यह संकट कितने समय तक चलता है। यदि राजनयिक प्रयास सफल होते हैं और जलडमरूमध्य जल्द खुल जाता है तो तेल बाजारों में स्थिरता लौट सकती है। लेकिन यदि सैन्य टकराव बढ़ता है या मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को गंभीर झटका लग सकता है। तेल की कीमतें तीन अंकों तक पहुंच सकती हैं, महंगाई बढ़ सकती है और कई आयात- निर्भर देशों को आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना केवल पश्चिम एशिया का संकट नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है। ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक व्यापार, महंगाई, समुद्री सुरक्षा और भू-राजनीतिक स्थिरता,सभी इस एक समुद्री मार्ग से जुड़े हुए हैं। भारत के लिए यह समय ऊर्जा स्रोतों में विविधता, रणनीतिक भंडारों के विस्तार और दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रयासों को और तेज करने का है।आने वाले दिनों में दुनिया की नजरें पश्चिम एशिया पर टिकी रहेंगी, क्योंकि होर्मुज की स्थिति केवल तेल की कीमतों का नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता का भी निर्धारण करेगी।

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9284141425
Design a site like this with WordPress.com
Get started