सरायकेला/चांडिल
वोट देकर विधायक को गद्दी पर बैठाने वाली जनता बेहाल – जनप्रतिनिधि और प्रशासन मौन।
सड़क पर नहीं, गड्ढों में चल रही है जिंदगी।
हल्की बारिश ने प्रशासन व जनप्रतिनिधि की खोल दी पोल।

तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह बदहाली और लापरवाही की भेंट चढ़ी इस सड़क पर दो बड़ी मालवाहक ट्रकें गहरे गड्ढे और कीचड़ में फंस कर दम तोड़ चुकी हैं। एक ट्रक का आधा हिस्सा धंस गया है तो दूसरी गाड़ी घंटों से उसी जगह खड़ी है, निकलने का कोई रास्ता नहीं।


स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। यह सड़क महीनों से नहीं, सालों से जर्जर है। बरसात में तो हालात नरक से भी बदतर हो जाते हैं। बड़े-बड़े गड्ढे पानी में तालाब बन जाते हैं और रोजाना कोई न कोई वाहन उसमें फंस जाता है।
सबसे बड़ा सवाल – जनप्रतिनिधि कहां हैं?
जिस जनता ने अपने एक-एक वोट से विधायक जी को गद्दी पर बैठाया, आज वही जनता इस टूटी सड़क पर अपनी किस्मत को कोस रही है। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि अब AC कमरों में बैठे हैं और जनता की इस परेशानी को देखने वाला कोई नहीं है।
प्रशासन की अनदेखी भी कम नहीं है। कई बार शिकायत करने के बाद भी न तो सड़क की मरम्मत हुई, न ही गड्ढों को भरने की जहमत उठाई गई। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
यक्ष प्रश्न:
1. आखिर कब तक जनता इस जानलेवा सड़क पर चलने को मजबूर रहेगी?
2. सरकार द्वारा निर्धारित प्रत्येक तरह के टैक्स का पैसा कहां जा रहा है जब सड़क की ये हालत है?
3. क्या जनप्रतिनिधि और प्रशासन की आंखें तब खुलेंगी जब कोई बड़ी जनहानि होगी?
4.कहां है पथ निर्माण विभाग।
5.कहां है परिवहन पदाधिकारी।
जनता नेताओं से पूछ रही है – वोट हमारा, तो सजा भी हमारी ही क्यों?












