झारखंड क्राईम रिपोर्टर ( अखबार ) के संवाददाता अरविंद सिंह पर जानलेवा हमला।

झारखंड क्राईम रिपोर्टर ( अखबार ) के संवाददाता अरविंद सिंह पर जानलेवा हमला।

जमशेदपुर/सीतारामडेरा

जमशेदपुर के सीतारामडेरा थाना अंतर्गत योजनाबद्ध तरीके से किया गया झारखंड क्राईम रिपोर्टर अखबार के संवाददाता अरविंद सिंह पर जानलेवा हमला।

झारखंड क्राईम रिपोर्टर अखबार के संवाददाता सोनारी निवासी अरविंद सिंह पर योजनाबद्ध तरीके से किए गए जानलेवा हमले में बाल बाल बच्चे संवाददाता अरविंद सिंह।

आपको बताते चलें कि सीतारामडेरा थाना के पास ही करीब 100 मीटर की दूरी पर फोनो द्वारा अरविंद सिंह को बुलाकर जानलेवा हमला किया गया। अज्ञात लोगों ने घटना की जानकारी जब थाना को दी कि कुछ लोगों द्वारा किसी सज्जन व्यक्ति को जान से करने का प्रयास किया जा रहा है तो तुरंत कार्रवाई करते हुए थाने की पुलिस ने घटनास्थल पर जाकर संवाददाता अरविंद सिंह की जान बचाई।

मौके पर पुलिस को पहुंचा देख अज्ञात हमलावरों ने घटनास्थल से भागने में सफलता प्राप्त की एवं दो लोगों की घटना स्थल से गिरफ्तारी हुई है घटना बीती रात शाम 7:00 बजे की है अरविंद सिंह अपने भांजे ( बहन का लड़का) से मिलने उनके निवास स्थान पर जा रहे थे तभी कुछ अज्ञात लोगों ने उन पर जानलेवा हमला किया और उनके गले में पड़े सोने की चैन एवं पेंट में रखें पर्स एवं नगदी करीब ₹3000 भी लेकर फरार हो गए।
आपको बताते चले की वरिष्ठ पत्रकार अरविंद सिंह झारखंड क्राईम रिपोर्टर हिंदी दैनिक अखबार में पिछले 10 वर्षों से लगातार कार्यरत है एवं अपनी कार्य निष्ठा का परिचय देते हुए हर समय समाज एवं कानून का सम्मान करते हुए अपना योगदान दिए हैं।
अब सवाल यह उठता है कि अपराधियों का खुलेआम घूमना एवं इस तरह की घटनाओं को अंजाम देना क्या यह उचित है ? जहां पत्रकार ही सुरक्षित नहीं है वहां आम जनता अपने आप को कैसे सुरक्षित महसूस करेगी।
वहीं पत्रकार अरविंद सिंह ने थाने में सनाह भी दर्ज कराई है एवं अपने और अपने परिवार की जान माल की सुरक्षा की गुहार प्रशासन से लगाई है। आपको बताते चले कि इस तरह की घटना आए दिन जमशेदपुर क्षेत्र में देखने को मिल रहा है लोगों का विश्वास कानून पर से उठता नजर आ रहा है।
अगर यही आलम रहा तो वह दिन दूर नहीं की जनता अपनी जान माल की सुरक्षा को लेकर सड़कों पर नजर आएगी।
वहीं विश्व हिंदू रक्षा परिषद के प्रदेश प्रभारी भरत सिंह ने इस घटना की घोर निंदा करते हुए प्रशासन से सख्त से सख्त कार्रवाई करने का आग्रह भी किया है साथ ही घटना के शिकार अरविंद सिंह एवं उनके परिवार जनों की सुरक्षा की भी मांग की है।

पत्रकार बसंत साहू को जान से मारने की धमकी, परिवार में दहशत ।

पत्रकार बसंत साहू को जान से मारने की धमकी, परिवार में दहशत ।

सरायकेला:

सरायकेला-खरसावां जिला के चौका थाना क्षेत्र में पत्रकार बसंत साहू और उनके बेटे अजय कुमार को जान से मारने की धमकी मिली है। धमकी के बाद परिवार के लोग दहशत में हैं।पत्रकार बसंत साहू ने चौका थाना में शिकायत दर्ज कराई है। FIR कांड संख्या 54/2025 दिनांक 04 अगस्त 2025 के अनुसार, 3 अगस्त को गांव कुरली निवासी विकास पाण्डेय (पिता आषुतोष पाण्डेय) ने बिना नंबर की काली स्कॉर्पियो से उनके बेटे अजय कुमार की गाड़ी का पीछा किया और NH-33 खुंटी मोड़ पर पिस्तौल सटाकर हर महीने 50 हजार रुपए रंगदारी मांगी।

बसंत साहू ने बताया कि विकास पाण्डेय का भाई राहुल पाण्डेय शराब के नशे में अक्सर उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी देता है। इस संबंध में उन्होंने 17 अगस्त को चौका थाना में सनहा नंबर 17/25 के तहत लिखित शिकायत भी दी है।मामले के अनुसंधानकर्ता भगवान प्रसाद से जब बसंत साहू ने CDR रिपोर्ट की प्रगति पूछी तो उन्होंने कथित तौर पर कहा कि “मैं निलंबित हो जाऊँगा, इससे ज्यादा क्या करूँ?” थाना प्रभारी बजरंग महतो ने इस मामले की जानकारी पुलिस अधीक्षक को दी, लेकिन कार्रवाई की गति पर सवाल उठ रहे हैं।आरोपी का आपराधिक इतिहास
राहुल पाण्डेय पर पहले भी कई मामले दर्ज हैं —
ईचागढ़ थाना कांड संख्या 28/25 (15 मार्च 2025)
चांडिल थाना कांड संख्या 11/2011 (3 सितंबर 2011, धारा 386/34 भादवि)
इसके बावजूद पत्रकार का आरोप है कि चौका थाना अब तक सख्त कार्रवाई करने में ढिलाई बरत रहा है।बसंत साहू ने कहा कि यदि पत्रकारों के मामले में ही पुलिस इतनी लापरवाही दिखा रही है तो आम जनता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी? फिलहाल परिवार डरा-सहमा है और प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहा है।

अर्ध जली लाश मामले में आया नया मोड़ पुलिस के हाथों लगा सीसीटीवी फुटेज, तीन बच्चों संग फरार होती दिखी महिला

अर्ध जली लाश मामले में आया नया मोड़ पुलिस के हाथों लगा सीसीटीवी फुटेज, तीन बच्चों संग फरार होती दिखी महिला

सरायकेला/आदित्यपुर

क्रुर्ता की सारी हदें पार कर महिला बच्चों संग हुई फरार महिला ने बेरहमी की सारी हदें पार कर क्षेत्र में फैलाई सनसनी पति को उतारा मौत के घाट फिर बच्चों संग हुई फरार।

सरायकेला जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत धिराजगंज, सतबहनी के एक किराए के कमरे से पुलिस ने 29 वर्षीय व्यक्ति का शव लहूलुहान अवस्था में बरामद किया है। व्यक्ति की हत्या चार दिन पूर्व कर दी गई थी। जिसे पुलिस ने शनिवार घर का ताला तोड़ बरामद किया है.

मृतक की पहचान गिरिडीह जिला के उधनाबाद निवासी राजेश कुमार महथा के रूप में की गई है,जो बीते सोमवार सतबहनी हरि मंदिर के सामने गौरांग चंद्र मुखी के किराए के मकान में परिवार के साथ रहने आया था, इस बीच बीते मंगलवार को मृतक का पत्नी के साथ विवाद और मारपीट हुआ था, जिसकी भनक मकान मालिक को भी लगी थी। मारपीट के बाद मृतक की पत्नी ने मकान मालिक को मारपीट कर घायल किए जाने की शिकायत की थी। इसके बाद अगले सुबह कमरे में ताला लगा था, इधर चार दिन बीत जाने के बाद शनिवार को बंद कमरे से तेज बदबू आने लगी जिसके बाद लोगों ने स्थानीय जनप्रतिनिधि पूर्व पार्षद अभिजीत महतो को सूचित किया, अभिजीत महतो द्वारा आदित्यपुर थाना को मामले की जानकारी दी गई जिसके बाद पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे आदित्यपुर थाना प्रभारी विनोद तिर्की ने बंद कमरे का ताला तोड़ कर प्रवेश किया तो पूरा कमरा खून से सना था और मृतक खून से लतपत पड़ा था। पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम में भेज दिया है और गिरिडीह निवासी परिजनों से संपर्क कर हत्या की जानकारी मृतक के परिजनों तक पहुंचा दी गई है.

इस मामले में अब एक नया मोड़ सामने आ चुका है जो कि पुलिस के लिए बेहद ही फायदेमंद साबित होगा। स्थानीय पुलिस इस मामले की हर पहलुओं पर जांच कर रही है। शक के दायरे में आने वाले सभी लोगों से पुलिस पूछताछ कर रही है उसके साथ ही सीसीटीवी फुटेज को भी पुलिस खंगाल रही है।

वहीं इस मामले में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज भी प्राप्त किया है जिसमें महिला अपने तीन बच्चों संग फरार होती दिखाई दे रही है पुलिस ने शक जताया है कि यह वही महिला है जो अपने पति की हत्या कर बाहर से कमरे का दरवाजा बंद कर फरार हो चुकी है।

वहीं पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से महिला को पकड़ने में आसानी होगी और जल्द ही महिला पुलिस की गिरफ्त में होगी।

आदित्यपुर के सतबोहनी में अर्ध जली लास मिलने से फैली सनसनी

आदित्यपुर के सतबोहनी में अर्ध जली लास मिलने से फैली सनसनी

सरायकेला/आदित्यपुर

( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )

सरायकेला जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत धिराजगंज, सतबहनी के एक किराए के कमरे से पुलिस ने 29 वर्षीय व्यक्ति का शव लहूलुहान अवस्था में बरामद किया है। व्यक्ति की हत्या चार दिन पूर्व कर दी गई थी। जिसे पुलिस ने शनिवार घर का ताला तोड़ बरामद किया है.

मृतक की पहचान गिरिडीह जिला के उधनाबाद निवासी राजेश कुमार महथा के रूप में की गई है,जो बीते सोमवार सतबहनी हरि मंदिर के सामने गौरांग चंद्र मुखी के किराए के मकान में परिवार के साथ रहने आया था, इस बीच बीते मंगलवार को मृतक का पत्नी के साथ विवाद और मारपीट हुआ था, जिसकी भनक मकान मालिक को भी लगी थी।

आदित्यपुर थाना प्रभारी

मारपीट के बाद मृतक की पत्नी ने मकान मालिक को मारपीट कर घायल किए जाने की शिकायत की थी। इसके बाद अगले सुबह कमरे में ताला लगा था, इधर चार दिन बीत जाने के बाद शनिवार को बंद कमरे से तेज बदबू आने लगी जिसके बाद लोगों ने स्थानीय जनप्रतिनिधि पूर्व पार्षद अभिजीत महतो को सूचित किया, अभिजीत महतो द्वारा आदित्यपुर थाना को मामले की जानकारी दी गई।

पूर्व पार्षद अभिजीत महतो

वहीं सूचना मिलते ही पुलिस दल बल के साथ मौके पर पहुंची आदित्यपुर थाना प्रभारी विनोद तिर्की ने बंद कमरे का ताला तोड़ कर प्रवेश किया तो पूरा कमरा खून से सना था और मृतक खून से लतपत पड़ा था। पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और गिरिडीह निवासी परिजनों से संपर्क कर हत्या की जानकारी मृतक के परिजनों तक पहुंचा दी गई है.

दुगनी के डीडी स्टील में कार्यरत था मृतक

मृतक राजेश कुमार महथा सरायकेला के दुगनी स्थित डीडी स्टील में कार्यरत था और बीते सोमवार को ही वह अपने पत्नी और बच्चों के साथ सतबहनी स्थित किराए के मकान में रहने पहुंचा था।

जिले में मरीज सुरक्षित नहीं,, रक्षक बने भक्षक,, आदित्यपुर के मेडिट्रिन हॉस्पिटल के डॉक्टर पर थाने में की गई लिखित शिकायत,

जिले में मरीज सुरक्षित नहीं,, रक्षक बने भक्षक,, आदित्यपुर के मेडिट्रिन हॉस्पिटल के डॉक्टर पर थाने में की गई लिखित शिकायत,

सरायकेला/आदित्यपुर

लोग कहते हैं भगवान का दरवाजा भले ही बंद हो जाए लेकिन डॉक्टर का दरवाजा कभी बंद नहीं होता, इंसान अपनी छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी तकलीफ लेकर डॉक्टर के पास ही जाते हैं और डॉक्टर को ही अपना भगवान मानते हैं,, लेकिन जब डॉक्टर ही जान के दुश्मन बन जाए और जान लेने पर उतारू हो जाएं तो फिर इंसान की सारी उम्मीद टूट जाती है।

ऐसा ही एक किस्सा आदित्यपुर के मेडिट्रिना हॉस्पिटल से सामने आया है जहां पर मेडिट्रिना हॉस्पिटल के डॉक्टर पर आदित्यपुर थाने में प्राथमिक दर्ज की गई है।

डॉक्टर पार्थो पी चौधरी

आपको बताते चलें कि रेणु देवी नामक महिला ने आदित्यपुर थाने में आदित्यपुर क्षेत्र स्थित मेडिट्रिनि हॉस्पिटल के एक डॉक्टर के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज की है।

वहीं लिखित शिकायत के मुताबिक रेणु देवी नामक महिला अपने पति भरत सिंह के इलाज हेतु मेडिट्रिना अस्पताल पहुंची तब डॉक्टर द्वारा 600/- फिस के नाम पर लिए गए और साथ ही ECG/ECO करने के नाम पर 1700/-रुपए लिए गए । लेकिन इतने पैसे लेने के बावजूद भी डॉक्टर द्वारा भरत सिंह का सही ढंग से इलाज नहीं किया गया। और सही ढंग से इलाज नहीं होने पर जब महिला द्वारा डॉक्टर से इलाज के संबंध में सवाल पूछा गया तब डॉक्टर पार्थो पी चौधरी द्वारा गाली गलोज किया गया साथ ही अस्पताल से बाहर निकालने के क्रम में जब महिला ने लोगों से डॉक्टर के बारे में पूछा तो डॉक्टर ने पीछे से आकर जानलेवा हमला कर दिया।

वहीं डॉक्टर द्वारा किए गए जानलेवा हमले में भरत सिंह को सीने में काफी पीड़ा दायक दर्द उत्पन्न हो गया और डॉक्टर ने भरत सिंह का डॉक्टर का कागज भी रख लिया डॉक्टर द्वारा कहा गया कि जो करना है कर लो सभी मेरे जेब में रहते हैं मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

वहीं लिखित शिकायत के मुताबिक भरत सिंह ने इस मामले पर त्वरित आदित्यपुर थाने से मदद मांगी वहीं घटना स्थल पर आदित्यपुर थाने के पुलिस पहुंचकर डॉक्टर का कागज भरत सिंह को वापस दिलवाया।

वहीं महिला ने आदित्यपुर थाने में लिखित शिकायत देते हुए अपने पति भरत सिंह के जान माल की सुरक्षा हेतु गुहार लगाई है और उक्त डाक्टर पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही करने का अनुरोध किया है।

अब ठेका मजदूरी करने वाले भी शराब दुकान का ठेका लेने की रेस में

अब ठेका मजदूरी करने वाले भी शराब दुकान का ठेका लेने की रेस में

सरायकेला-खरसावां

इन दिनों सरायकेला खरसावां जिले में अवैध शराब बनाने वाले से लेकर दुकान में काम कर रहे हैं ठेका मजदूर की भी चांदी है। हर कोई लखपति बन बैठा है। हर किसी के पास आए से ज्यादा संपत्ति होने की संभावना है। और इस मामले पर कई बार अख़बारों के माध्यम से खबर प्रकाशित होने के बावजूद भी इन पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।

आदित्यपुर के सरकारी शराब की दुकान में कार्य कर रहे ठेका मजदूर लाखों करोड़ों में खेल रहे हैं।
पिछले 6/7 महीने से पगार नहीं मिलने के बावजूद भी मजदूर लाखों करोड़ों में खेलते नजर आ रहे हैं कोई लग्जरी गाड़ी में घूम रहा है तो कोई शराब की दुकान का ठेका लेने की बात कर रहा है तो कोई आवास बोर्ड से मकान खरीद कर अपना अस्थाई निवास बनाने के फिराक में है।

सौरभ तिवारी ( अधीक्षक उत्पाद सरायकेला खरसावां )

अब सवाल यह उठता है कि समय पर मजदूरी नहीं मिलने के बावजूद भी आखिर इतनी लग्जरी विधि व्यवस्था के साथ दैनिक जीवन का यापन किस आमदनी से कर रहे हैं।
जिले के उत्पाद विभाग में सरकारी दुकानों पर कहीं ना कहीं बहुत बड़ा गड़बड़ घोटाला चल रहा है। तभी तो बातें सामने मार्केट में उछाल-उछलकर आ रही है और दिख रही है।


सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सरायकेला खरसावां जिला के आदित्यपुर क्षेत्र में जितनी भी सरकारी शराब की दुकानें हैं वहां सरकारी शराब की बिक्री पर काफी गड़बड़ घोटाला होने की सूचना प्राप्त हो रही है. शराब बेचने वाले ठेका मजदूरी कर अपना जीवन यापन करने वाले मजदूर आज लग्जरी गाड़ी और ऊंची ऊंची सपने को संजोए मार्केट में नजर आ रहे हैं कोई लग्जरी गाड़ी का आनंद ले रहा है तो कोई आवास बोर्ड के मकान को खरीदने का मार्केट में चर्चा कर रहा है तो कोई सरकारी दुकान के प्राइवेट होने पर ठेका में लेकर चलने की बातें भी कर रहा है।


सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सरकारी शराब की दुकान में ठेका मजदूरी करने वाले रणधीर कुमार और मुन्ना यादव भी इस रेस में अपनी भागीदारी निभाते हुए नजर आ रहे हैं वे दोनों भी अपने निजी हाथों में सरकारी शराब दुकान का ठेका लेने की फिराक में है। वहीं इस मामले पर जनता ने तमाम जांच एजेंसियों से जनहित मेें आग्रह किया है कि उनकी आय से अधिक संपत्तियों का जांच करें। आखिर सरायकेला खरसावां जिला के सुपरिंटेंडेंट खामोश क्यों है कहीं ऐसा तो नहीं कि जिले की तमाम दुकानों से मोटी रकम उन तक भी पहुंच रही हो?
अगर ऐसा सच है तो कहीं ना कहीं यह कहावत चरितार्थ होता नजर आ रहा है कि शराब बेचने वाले मालामाल और शराब पीने वाले बेहाल।
जिले की भोली भाली जनता की आंखो में खुलेआम धूल झोंकते हुए बेवकूफ बना कर दो नंबर शराब का चल रहा है अवैध कारोबार।
शराब बेचने वाले और शराब के सरकारी अधिकारी भी मालामाल नजर आ रहे हैं और जिले में अंकित मूल्य से अधिक पर शराब की बिक्री भी हो रही है. नकली शराब भी बेची जा रही है और जिला सुपरिंटेंडेंट की कानों में जूं तक नहीं रेंग रहा है।
निजीकरण होने पर यदि सरकारी दुकानों पर कार्य कर रहे ठेकेदार मजदूरों के हाथों में शराब की दुकानों की टेंडर जाता है तो यह बात सत्य साबित होगा कि इनके पास अवैध कमाई का कोई ना कोई शराब के माध्यम से जरिया तो है।
सूत्रों ने यह भी जानकारी दी है कि उत्पाद विभाग के दरोगा नीरज कुमार भी अपने क्षेत्राधिकार पर इस खेल में पीछे नहीं है।
झारखंड सरकार द्वारा सरकारी शराब की दुकानों को निजीकरण ठेके पर दिए जाने की खबर आते ही शराब की दुकानों को ठेका में लेने के लिए ठेकेदार के अंदर मजदूरी कर रहे मजदूरो की होड़ लगी है. आखिर इतना पैसा उनके पास कहां से आया। सूत्रों ने यह भी जानकारी दी है कि जिले में सरकारी शराब की दुकानों पर झारखंड सरकार द्वारा फिर से निजी हाथों में देकर दुकान को सुचारू रूप से चलाया जाएगा । इस मामले में भी जिले में बड़े पैमाने पर अवैध लेनदेन होने की संभावना है।
अब देखना यह है कि निजीकरण होने पर सरकारी शराब की दुकानों का ठेका किन-किन ठेकेदार मजदूरों के हाथों में लग रहा है।

गुप्त सूत्रों ने यह भी बताया है कि शराब की बोतल पर अंकित मूल्य से ज्यादा पैसे लेना नकली शराब बेचना इस अवैध कमाई के पुरे प्रकरण में नीचे से लेकर ऊपर तक के अधिकारियों तक पैसा पहुंचाया जाता है।

खरसावां के आमदा ओपी अंतर्गत चल रही है नशे के अवैध कारोबार

खरसावां के आमदा ओपी अंतर्गत चल रही है नशे के अवैध कारोबार

सरायकेला/आमदा

खरसावां के आमदा ओपी अंतर्गत चल रही है नशे का अवैध कारोबार। ग्रामीणों ने सरायकेला खरसावां के पुलिस अधीक्षक से पत्रकार के माध्यम से लगाई गुहार।
वहीं ग्रामीणों ने यह भी बताया है कि आमदा ओपी थाना प्रभारी के संज्ञान में होने के बावजूद भी फल फूल रहा है जिले के आमदा ओपी अंतर्गत नशे का कारोबार।
कारोबारी थाना मैनेज कर बेच रहे हैं जहरीले नशीली शराब।
जहरीली नशीली शराब का अवैध कारोबार इन दिनों आमदा ओपी क्षेत्र में काफी फलता-फूलता नजर आ रहा है।
वहीं क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि हमारी आवाज जिला के पुलिस कप्तान तक पहुंचा दीजिएगा हम तो गरीब हैं थाना प्रभारी सुनते ही नहीं है और हमें डांट कर भगा देते हैं।
सीधे लफ्जों में कहा जाए तो आबकारी विभाग के दरोगा भी कहीं ना कहीं इस अवैध नशीली कारोबार में मिली भगत होने की सूत्रों ने जानकारी दी है।

शराब बेचने और आंख बंद कर बिकवाने वाले मालामाल और शराब पीने वाले गरीब लाचार और परिवार बेहाल।
कई अवैध कारोबारों का अड्डा बनता जा रहा है खरसावां का आमदा ओपी।
आपको बताते चले कि करीब करीब बीता हुआ दो बरसों के आसपास ऐसे ही एक घर का आंगन सुना पड़ गया शराब पिलाकर , जहां शराब पिलाकर नशा में हत्या कर तालाब के पास मिली लाश से क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी। जिसकी एफआईआर आमदा ओपी मे दर्ज है। शराब पिलाकर मर्डर कर दिया जिसका तहकीकात कर 1 साल के बाद पीड़िता को न्याय मिला था। और आरोपी जेल के सलाखों के पीछे गया था।
अब सूत्रों ने यह भी जानकारी दी है कि वही आलम फिर से क्षेत्र में नजर आ रहा है थाना प्रवाही की लापरवाही एवं गैर जिम्मेदाराना हरकतों से नाराज आमदा ओपी के क्षेत्र के वासी ने सरायकेला खरसावां के पुलिस कप्तान से न्याय की गुहार लगाई।

सूत्रों ने यह भी जानकारी दी है कि इस मामले में ग्रामीणों की आवाज को पत्रकार ने पुलिस कप्तान तक पहुंचने में काफी सहायता प्रदान की है जिससे कि पत्रकार के ऊपर भी अब शराब कारोबारीयों द्वारा जान माल का खतरा बना हुआ है।

नीचे भी पढ़ें….

अवैध शराब के कारोबार के मामले में थाना प्रभारी निम्नलिखित धाराओं के तहत कार्रवाई कर सकते हैं:

अवैध शराब के कारोबार से संबंधित धाराएं

  1. उत्पाद शुल्क अधिनियम: यह अधिनियम शराब के उत्पादन, वितरण, और बिक्री को नियंत्रित करता है।
  2. आबकारी अधिनियम: यह अधिनियम शराब के उत्पादन, वितरण, और बिक्री के लिए लाइसेंस और शुल्क का प्रावधान करता है।
  3. धारा 272 आईपीसी: यह धारा खाद्य पदार्थों में मिलावट करने के लिए सजा का प्रावधान करती है, जिसमें शराब भी शामिल हो सकती है।
  4. धारा 273 आईपीसी: यह धारा हानिकारक खाद्य पदार्थों की बिक्री के लिए सजा का प्रावधान करती है।
  5. धारा 328 आईपीसी: यह धारा किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए जहर या हानिकारक पदार्थ देने के लिए सजा का प्रावधान करती है।

अन्य संबंधित धाराएं

  1. धारा 34 आईपीसी: यह धारा साझा इरादे के साथ अपराध करने के लिए सजा का प्रावधान करती है।
  2. धारा 120बी आईपीसी: यह धारा आपराधिक साजिश के लिए सजा का प्रावधान करती है।

इन धाराओं के तहत थाना प्रभारी अवैध शराब के कारोबार में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं और उन्हें सजा दिला सकते हैं।

खबर का दिखा असर,,अवैध बालू लदे तीन ट्रैक्टर जप्त।

खबर का दिखा असर,,अवैध बालू लदे तीन ट्रैक्टर जप्त।

सरायकेला/ईचागढ़

खबर का दिखा असर जंहा पर ईचागढ़ अंचल अधिकारी ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए पातकुम क्षेत्र से अवैध बालू लदे तीन ट्रैक्टर को जप्त किया है।

आपको बताते चलें कि विगत दो दिन पहले झारखंड क्राईम रिपोर्टर हिंदी दैनिक अखबार ने बालू के अवैध कारोबार से संबंधित खबर को जनहित में प्रकाशित किया था। जिसे संज्ञान में लेते हुए ईचागढ़ के अंचल अधिकारी ने अवैध बालू के कारोबार के खिलाफ छापेमारी अभियान चला कर ईचागढ़ के पातकुम से अवैध बालू लदे तीन ट्रैक्टर को जप्त कर लिया। वहीं अवैध बालू के कारोबार के खिलाफ अंचल अधिकारी द्वारा चलाए गए सख्त छापेमारी अभियान से बालू माफिया में हड़कंप का माहौल बना हुआ है।

शराब बेचने वाले मालामाल शराब पीने वाले बेहाल।

शराब बेचने वाले मालामाल शराब पीने वाले बेहाल।

पूरे कोल्हान के 99.99 प्रतिशत सरकारी शराब दुकान पर अंकित मूल्य से अधिक मूल्य पर बेचा जा रहा शराब और रसीद देने से करते हैं इनकार।

पूर्वी सिंहभूम

( भरत सिंह की रिपोर्ट )

सरकारी शराब की दुकानों पर शराब की बोतल पर अंकित मूल्य से 10,20,30 रुपए अधिक लेना यह कोई नई बात नहीं है। विगत कुछ दिनों से लगातार झारखंड क्राईम रिपोर्टर हिंदी दैनिक अखबार में सरकारी शराब की दुकानों पर अंकित मूल्य से अधिक रुपए लेकर शराब बेचे जाने की खबर को जनहित में प्रमुखता से प्रकाशित किया जा रहा है। लेकिन विभाग की ओर से कोई भी कार्रवाई या कोई सुनवाई होता दिखाई नहीं दे रहा है। अब आलम यह है कि कोल्हान के 99.9% सरकारी शराब की दुकानों में शराब की बोतल पर अंकित मूल्य से अधिक रुपए लेकर शराब बेचा जा रहा है जिसका रसीद भी ग्राहक को मुहैया नहीं कराया जा रहा। जिसकी वजह से ग्राहक काफी परेशान दिखाई दे रहे हैं और शराब बेचने वाले मालामाल होते दिखाई दे रहे हैं।

ताजा मामला पूर्वी सिंहभूम जिले का है जहां पर जादूगोड़ा थाना क्षेत्र के माटीगोड़ा स्थित सरकारी शराब दुकान पर शराब की बोतल पर अंकित मूल्य से अधिक मूल्य पर शराब बेचा जा रहा है साथ ही शराब लेने के बाद पैसा देने के बाद उनसे रसीद मांगा जाता है तो उनका कहना है कि हमारे पास रसीद नहीं है और हम रसीद नहीं देंगे । आपको सरकारी रसीद की जगह सदा कागज मे लिखकर दुकान के मोहर के साथ दे देंगे। वो भी आपके लिए ।

अब सवाल यहां पर या उठना है कि आखिर सरकारी शराब की दुकानों पर रसीद क्यों नहीं मुहैया कराया जा रहा है। जबकि ग्राहक को रसीद देना यह दुकानदार की जिम्मेदारी है और रसीद लेना यह ग्राहक का अधिकार है अगर कोई शराब दुकानदार शराब बेचने के बाद रसीद नहीं दे रहा है तो कहीं ना कहीं वह दुकानदार पैसे की हेरा फेरी कर राजस्व का नुकसान कर रहा है और राजस्व का नुकसान करना यह कहीं ना कहीं बड़े अपराध की श्रेणी में आता है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पुरे कोल्हान में जितने भी सरकारी शराब दुकान है लगभग सभी दुकानों का यही आलम है।

वहीं पूर्वी सिंहभूम जिले के अधीक्षक उत्पाद विमला लकड़ा काफी अनुभवी है उसके बावजूद भी इस तरह से छोटी-छोटी गलतियां हो रही हैं। जिससे जनता का जेब खाली हो रहा है और ठेकेदार या सरकारी महकमें के अधिकारी मालामाल हो रहे हैं ।

आपको बताते चलें कि झारखंड क्राईम रिपोर्टर हिंदी दैनिक अखबार की एक टीम ने एक सर्वे के दौरान जादूगोड़ा स्थित एक शराब की दुकान में एक बोतल शराब लिया तो पता चला कि वहां की स्थिति क्या है। यह जांच का विषय है। सरकारी शराब बेचना उचित है लेकिन शराब लेने वाले को रसीद देना भी दुकानदार की जिम्मेदारी है। अगर रसीद नहीं दिया जाता है तो कहीं ना कहीं सरकारी राजस्व का हेरा फेरी साफ झलक रहा है। और यह गंभीर जांच का विषय है अगर इस पर समय रहते अंकुश ना लगाया गया तो यह कहीं ना कहीं एक बड़े अपराध का रूप धारण कर सकती है

वन विभाग की जमीन पर भू माफियाओं का कब्जा।

वन विभाग की जमीन पर भू माफियाओं का कब्जा।

सरायकेला-खरसावां

सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत वन विभाग की जमीन पर अवैध कब्जा कर मकान बनाया जा रहा है।

आपको बताते चलें कि भूमाफियाओं द्वारा आदित्यपुर थाना अंतर्गत एन के एस फील्ड के पीछे मैदान में वन विभाग की जमीन पर अवैध कब्जा कर जोरो पर मकान निर्माण का कार्य चल रहा है वहीं वन विभाग के कर्मचारियों को सूचना देने के बावजूद भी जनहित में विधिवत कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है कहीं ऐसा तो नहीं की वन विभाग के कर्मचारियों की मिली भगत से वन विभाग की जमीन की खरीद बिक्री जारी है। सूत्रों की माने तो तीन से चार लाख रुपया कट्टे पर जमीन की खरीद बिक्री हो रही है।

वहीं सरायकेला खरसावां जिले के वन विभाग कर्मचारी पर यह सवाल उठ रहे हैं कि इसी तरह से वन विभाग की जमीन को बेच बेच कर जमीन माफिया छोटी-छोटी कई बस्तियां बसा ली है । वन विभाग आखिर जमीन खरीद बिक्री करने वालों पर एक्शन क्यों नहीं ले रही मोन क्यों है ?

वहीं सूचना लिखे जाने तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। वहीं वन विभाग के पदाधिकारी आखिर कब तक रहेंगे मौन और कब तक भू माफिया करते रहेंगे अपनी मनमानी पूछता है भारत।

बालू माफिया के तांडव से त्राहिमाम करती सरायकेला की जनता

बालू माफिया के तांडव से त्राहिमाम करती सरायकेला की जनता

बालू की अवैध कारोबार से लाखों करोड़ों  रुपए राजस्व का हो रहा नुकसान।

इचागढ़ थाना अंतर्गत बालू माफिया का तांडव

फिलहाल खनन विभाग ने  कार्रवाई करते हुए दो ओवरलोडेड गाड़ियों को किया जब्त।

सरायकेला खरसावां

जिला खनन पदाधिकारी के लाख प्रयास के बावजूद भी बालू माफिया अपनी हरकतों से बाज आने का का नाम नहीं ले रहे हैं। सीधे लफ्जों में कहा जाए तो जिला खनन पदाधिकारी बालु के अवैध कारोबार को रोकने का जी तोड़ प्रयास कर रहे हैं  लेकिन बालू माफिया रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं यह युद्ध में आम जनता है परेशान। एक तरह से कहा जाए तो जिला खनन पदाधिकारी जिला खनन विभाग और बालू माफिया दोनों के बीच महाभारत छिड़ी हुई है और यह महाभारत काफी लंबे समय से चलती आ रही है लेकिन इसका कोई परिणाम नजर नहीं आ रहा। आखिर यह बालू माफिया और खनन पदाधिकारी दोनों के बीच चल रही महाभारत में आखिर जीत किसकी होगी यह जनता जानना चाहती है। वहीं परेशान आम जनता का कहना है कि आखिर कब मिलेगी निजात और कब मिलेगी सुख चैन की नींद गाड़ियों की आवागम के शोर शराबे से जनता परेशान है

राजस्व का हो रहा है भारी नुकसान।


बालू माफिया और खनन विभाग खनन पदाधिकारी इन दोनों की महाभारत का निष्कर्ष निकाल नहीं रहा लेकिन बालों माफिया के तांडव और अवैध बालू की निकासी से राजस्व का लाखों करोड़ों रुपया का नुकसान होता साफ-साफ दिख रहा है।

सरायकेला खरसावां जिले के खनन विभाग ने  कार्रवाई करते हुए दो ओवरलोडेड गाड़ियों को किया जब्त। यह गाड़िंयाँ ओवरलोड के साथ चल रही थीं, जो परिवहन नियम के विरुद्ध है। कार्रवाई कांड्रा थाना और ईचागढ़ थाना क्षेत्र में जिला खनन पदाधिकारी ज्योति शंकर सतपति के निर्देश पर जिला खनन निरीक्षक समीर ओझा द्वारा की गई, जहां इन गाड़ियों को पकड़ा गया। खनन विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए इन गाड़ियों को जब्त किया और संबंधित थाना के हवाले कर दिया।

विभाग का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से अवैध खनन और ओवरलोडिंग पर रोक लगेंगे। इसके अलावा, यह कार्रवाई उन खनन माफियाओं को चेतावनी देने का काम करेगी जो नियमों का उल्लंघन करते हुए खनन का कारोबार कर रहे हैं।

सरकार की जनकल्याणकारी योजना से आदिवासी महिला वंचित,बैंक मैनेजर कर रहे मनमानी

सरकार की जनकल्याणकारी योजना से आदिवासी महिला वंचित,बैंक मैनेजर कर रहे मनमानी

सरायकेला/कांड्रा

भरत सिंह की रिपोर्ट

लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा चुनाव, चुनाव से पहले हर एक प्रत्याशी ने आदिवासी का मुद्दा उठाया और आदिवासी के हित में कार्य करने की बात कही और आदिवासी के मुद्दे पर वोट वटोरने का काम किया और कहीं ना कहीं झारखंड में प्रत्याशियों ने जीत हासिल करने के लिए आदिवासियों को बड़ा मुद्दा बनाया। लेकिन सरकार द्वारा जनहित में निर्गत की गई पीएमईजीपी ऋण योजना का लाभ एक आदिवासी महिला को नहीं मिल पा रही है और आदिवासी महिला बैंक के चक्कर लगाते हुए काफी परेशान दिखाई दे रही है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बैंक मैनेजर द्वारा एक आदिवासी लाभुक को पीएमईजीपी ऋण देने के नाम पर दिग्भ्रमित कर हरासमेंट किया जा रहा है जो कि कहीं ना कहीं अपराध का ही एक अंग है। और यह किसी भी सूरत में उचित नहीं है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बैंक मैनेजर के खिलाफ कई बातें सामने आ रही है। आपको बताते चले कि बैंक ऑफ़ इंडिया कांड्रा ब्रांच में एक आदिवासी महिला द्वारा सभी उपर्युक्त दस्तावेज  उपलब्ध कराने के बावजूद बैंक मैनेजर द्वारा अपने निजी स्वार्थ के लिए PMEGP लोन को कैंसिल कर दिया जाता हैं।

वहीं आदिवासी महिला ने पत्रकार को बताया कि बैंक मैनेजर  की गाइडलाइंस पर हम पीएमईजीपी लोन ले कर व्यापार कर परिवार का भरण पोषण कर बैंक का ऋण चुकाना चाहते थे और अपने पैर पर खड़ा हो स्वालंबी बनना चाहते थे। बैंक ऑफ़ इंडिया कांड्रा ब्रांच के मैनेजर साहब के गाइडलाइंस पर मैंने प्रोजेक्ट रिपोर्ट बैलेंस शीट एवं इनकम टैक्स रिटर्न भी भरा साथी ही मुझे अन्य कई कागजातों की तैयारी करने में काफी पैसे खर्च हो गए,अंत में बैंक के काफी चक्कर लगाने के पश्चात बैंक मैनेजर द्वारा दो टूक शब्दों में कह दिया जाता है कि बैंक में स्टाफ की कमी होने के कारण हम लोन देने में असमर्थ हैं।

वहीं इस बात की जानकारी जिले के एलडीएम को भी थी ।

सुत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सरायकेला खरसावां के एलडीएम ने भी बैंक मैनेजर से कहा कि अगर प्रपोजल सही है और सभी गाइडलाइंस के अनुकूल है तो लोन देने में कोई खराबी नहीं है। ब्रांच मैनेजर ने एलडीएम की बात को नकारते हुए जनहित में अपनी गैर जिम्मेदाराना हरकतों से असंवैधानिक रूप से लोन को कैंसिल करते हुए आदिवासी महिलाओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हुए अपनी मनमानी कर ब्रांच मैनेजर ने कहा आपका लोन आपको नहीं मिल सकता है।

अब बात जनहित में आती है कि क्या बैंक में स्टाफ की कमी से बैंक का कारोबार नहीं चल पाएगा ? क्या यही नियम सभी बैंकों के लिए लागू है ? क्या आरबीआई का गाइडलाइंस यही है ? क्या सेबी का गाइडलाइंस यही है?
अगर नहीं तो बैंक ऑफ इंडिया कांड्रा ब्रांच मैनेजर की मनमानी जनहित में कहा तक उचित है ? क्या पीएमईजीपी ऋण का लाभ उन्हीं को प्राप्त होगा जिनको मैनेजर चाहते हों ? क्या पीएचपी ऋण का लाभ उन्हीं को प्राप्त होगा जिससे बैंक मैनेजर खुश हो या फिर बैंक मैनेजर के हितैषी हो ?
विशेष अगले अंक में ……

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