सरायकेला/खरसावां

साथियों वर्तमान में सरायकेला खरसावां जिले में एक समाचार, एक खबर, एक दुखद खबर, वह खबर जिसने झारखंड के कानून व्यवस्था की पूरी पोल पट्टी खोल कर रख दी, वह खबर जिसने झारखंड की पुलिस की कार्रवाई पर एक प्रश्न चिन्ह छोड़ दी, वह खबर जिसने झारखंड वासियों के दिल को झांकझोर कर रख दिया है, वह खबर जो हर एक समाचार चैनलों हर एक अखबारों हर एक न्यूज़ पोर्टलों की ब्रेकिंग न्यूज़ बन चुका है, वह खबर जिसने राज्य के नेताओं को समाजसेवियों को बुद्धिजीवियों को नींद से जगा दिया है।
और वह खबर है हिमांशु सिंह हत्याकांड।
साथियों आपको बताते चलें कि हिमांशु सिंह हत्याकांड मामला घटनाक्रम से लेकर अब तक चर्चाओं में बना हुआ है। यह मामला एक घटना से लेकर मौत का सफर तय करते हुए सबकी आंखें नम करते हुए राजनीतिक रूप धारण कर लिया।
गौरतलब है कि 27 जून की रात जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित डीडी बार के बाहर पुलिस वैन से निकालकर दो युवकों पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला किया गया था। इस हमले में करणी सेना से जुड़े हिमांशु सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि प्रत्यूष आनंद गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज जारी है।
घटना के बाद हिमांशु सिंह के पिता के बयान पर बिष्टुपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस मामले में कुल 11 लोगों को आरोपी बताया गया है, जिनमें डीडी बार के संचालक नीरज सिंह और बार के मैनेजर का नाम भी शामिल है।
साथियों जहां एक तरफ पुलिस हिमांशु सिंह हत्याकांड मामले को लेकर पूरी तरह सक्रिय बनी हुई है ताबड़तोड़ छापेमारी, गिरफ्तारी की जा रही है हर वो पहलुओं की जांच कि जा रही है जिससे मुख्य आरोपी का सुराग मिल सके और उस तक पहुंचा जा सके। सीधे लफ्जों में कहा जाए तो जमशेदपुर पुलिस इस वक्त पूरी तरह मुस्तैद है। पुलिस हर एक गतिविधियों पर पैनी नजर बनाई हुई है।
वहीं दूसरी तरफ मृतक के परिजन न्याय की गुहार लगा रहे हैं अपने परिजन के खोने के दुख में उनकी आंखों के आंसू रुक नहीं रहे रो-रो कर उनकी आंखें सूज गई। पड़ोसी रिश्तेदार सभी एक-एक कर हिमांशु के घर पहुंच रहे हैं इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़े रहने का एहसास दिला रहे हैं उनके दुख को बांटने का प्रयास कर रहे हैं।
इधर इस मामले पर नेताओं ने भी अपनी कमर कस ली है एक-एक कर नेता हिमांशु सिंह के घर पहुंच रहे हैं और परिजनों से मिलकर ढांढस बंधा रहे हैं और झारखंड में लगातार बिगड़ती कानून व्यवस्था साथ ही अपराधियों के बढ़ते होसलो के खिलाफ मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और विधानसभा नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी आदित्यपुर स्थित मृतक हिमांशु सिंह के घर पहुंचे। नेताओं ने 100 का कुल परिजनों से मिलकर उन्हें ढंढास बंधाया और इस दुख की घड़ी में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। इस मौके पर उनके साथ मुख्य रूप से विधायक भानु प्रताप शाही और भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अभय सिंह समेत कई वरिष्ठ नेता व कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।
वहीं नेताओं ने परिजनों से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने पुलिस प्रशासन की भूमिका पर बेहद गंभीर आरोप लगाया राज की बधाई सुरक्षा व्यवस्था को उजागर करते हुए कहा कि जमशेदपुर के नाक के नीचे पुलिस की मौजूदगी में दो युवकों पर अपराधियों ने चपड़ से जानलेवा हमला कर दिया गया। उन्होंने कहा कि जान बचाने के लिए पीड़ित युवा पुलिस की जिप्सी में भी घुसे लेकिन अपराधियों ने पुलिस के सामने ही उन्हें बाहर घसीट कर उन पर हमला किया गया। पुलिस मुख दर्शक बनी रही ऐसा लगता है कि राज्य में कानून का नहीं बल्कि अपराधियों की समानांतर सरकार चल रही है जिसे पुलिस का संरक्षण प्राप्त है।
भाजपा नेताओं ने इस मामले पर और गंभीरता दिखाते हुए घटना के वक्त मौके पर तैनात लापरवाह पुलिस कर्मियों पर धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें तुरंत जेल भेजने की सरकार से मांग कर रहे हैं, साथ ही नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बावरी और भानु प्रताप शाही ने कहा कि सरकार इस पूरे मामले की लीपा पोती करने और केस को मोड़ने का प्रयास कर रही है जिसे भाजपा सफल नहीं होने देगी।
वहीं भाजपा नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस हत्याकांड के खिलाफ पहले जमशेदपुर बंद किया गया है और यदि पीड़ित परिवार को जल्द ही उचित न्याय नहीं मिला तो पार्टी पूरे झारखंड को ठप और बंद करने का काम करेगी इस विषय को लेकर भाजपा का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल जल्द ही राज्यपाल से भी मुलाकात करेगा।

वहीं इस मामले में आरोपी बनाए गए डीडी बार के संचालक एवं भाजपा नेता नीरज सिंह ने जमशेदपुर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत (एंटिसिपेटरी बेल) की याचिका दायर की है। इसके साथ ही एफआईआर में उन्हें आरोपी बनाए जाने को भी कानूनी चुनौती दी गई है।
जानकारी के अनुसार, इस मामले में नीरज सिंह और उनकी पत्नी संध्या सिंह की ओर से कोर्ट में कुल तीन अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इनमें पहली याचिका नीरज सिंह की अग्रिम जमानत से संबंधित है। दूसरी याचिका में एफआईआर में उनका नाम शामिल किए जाने को चुनौती दी गई है। वहीं, तीसरी याचिका नीरज सिंह की पत्नी संध्या सिंह की ओर से दायर की गई है, जिसमें पुलिस द्वारा जब्त किए गए वाहनों को रिलीज करने की मांग की गई है। फिलहाल इन सभी याचिकाओं पर कोर्ट में सुनवाई लंबित है।
बताया जा रहा है कि इस मामले में नीरज सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश झा कोर्ट में पैरवी कर रहे हैं।
हालांकि, नीरज सिंह का कहना है कि घटना के समय वह मौके पर मौजूद नहीं थे और न ही वारदात डीडी बार के अंदर हुई थी। उनका दावा है कि पूरी घटना बार के बाहर पुलिस की मौजूदगी में हुई, इसलिए उन्हें इस मामले में आरोपी बनाया जाना उचित नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने कोर्ट में एफआईआर को चुनौती देते हुए राहत की मांग की है।
अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में कोर्ट के आगामी फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह फैसला जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

और अगर इस मामले पर जिले वासियों की कहें तो लगभग लगभग तमाम जिलेवासी इस मामले के मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के इंतजार में है हर किसी के जुबान पर बस एक ही सवाल है कि अपराधी आखिर कौन सी ऐसी बिल में छिप गया है जिसे पुलिस ढूंढ नहीं पा रही? या फिर अपराधी को किसी बड़े सफेद पोस् का संरक्षण प्राप्त है?














