गम्हरिया में नशे का काला साम्राज्य, पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल – थाना प्रभारी की नाकामी या मिलीभगत?
सरायकेला/गम्हरिया
सरायकेला जिले के गम्हरिया थाना क्षेत्र इन दिनों प्रतिबंधित नशे का गढ़ बनता जा रहा है। चौक-चौराहों से लेकर सुनसान ठिकानों तक, दिन-दहाड़े शराब, गांजा और अन्य प्रतिबंधित नशीले पदार्थों की खुलेआम खरीद-बिक्री हो रही है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह सब पुलिस की नाक के नीचे हो रहा है और गम्हरिया पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है।
सुत्रों से मिली के अनुसार, नशे के सौदागरों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें पुलिस का कोई खौफ ही नहीं रहा। शाम ढलते ही सरकारी शराब दुकानों के आस-पास नशेड़ियों का जमावड़ा लग जाता है। वहीं सड़क पर खुलेआम शराब पीना, गाली-गलौज और हंगामा आम बात हो गई है। इन्हीं शराब दुकानों और नशे के अड्डों के बगल से दिन के उजाले में स्कूली बच्चे, महिलाएं और फैक्ट्री जाने वाले मजदूरों का रोजाना आना-जाना होता है। नशे में धुत लोगों की अश्लील हरकतों और अभद्रता से छात्राओं और महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह जनहित और सामाजिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। युवा पीढ़ी तेजी से इस जहर की गिरफ्त में आ रही है।
गम्हरिया थाना प्रभारी
सूत्र यह भी बताते हैं कि इस अवैध कारोबार की शिकायत कई बार गम्हरिया थाना में की जा चुकी है। लगातार सूचना देने के बावजूद थाना प्रभारी द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। छापेमारी के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है, जबकि असली तस्कर खुलेआम घूम रहे हैं।
वहीं इस मामले पर स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर गम्हरिया पुलिस इसी तरह सोती रही, तो आने वाले समय में गम्हरिया अपराध का अड्डा बन जाएगा। थाना प्रभारी की यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? कंही यह मामला अगर नशे के कारोबारी और थाना प्रभारी की मिलीभगत तो नहीं?” साथ इस मांगने पर स्थानीय लोगों ने पुलिस अधीक्षक से हस्तक्षेप की मांग की है।
गम्हरिया की आम जनता ने जिले के पुलिस अधीक्षक, सरायकेला और आबकारी विभाग से जोरदार मांग की है कि –
1. गम्हरिया थाना क्षेत्र में अविलंब विशेष छापेमारी अभियान चलाया जाए।
2. नशे के अवैध कारोबार में लिप्त तस्करों और उन्हें संरक्षण देने वालों पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
3. सरकारी शराब दुकानों के 100 मीटर के दायरे में खुलेआम शराब पीने वालों पर तुरंत कार्रवाई हो और वहां पुलिस की नियमित गश्ती सुनिश्चित की जाए।
4. गम्हरिया थाना प्रभारी की इस लापरवाही और शिकायतों की अनदेखी पर उच्चस्तरीय जांच हो।
जनता ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि जिले के आला अधिकारी इस गंभीर मामले पर कब तक संज्ञान लेते हैं और गम्हरिया को नशे के इस दलदल से कब मुक्त कराते हैं।
आदित्यपुर नगर निगम में बिना सड़क बने भुगतान का आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग।
सरायकेला/आदित्यपुर
आदित्यपुर नगर निगम के वार्ड संख्या-20 में सड़क निर्माण कार्य में गंभीर वित्तीय अनियमितता का आरोप सामने आया है। आरोप है कि सड़क का निर्माण कराए बिना ही संवेदक को लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया।
इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता बैध संजय कुमार ने राज्य के मुख्य सचिव के नाम संबोधित शिकायत पत्र सरायकेला-खरसावां के जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त को सौंपा है और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
क्या है पूरा मामला? शिकायत पत्र के अनुसार, वार्ड-20 में तीन हिस्सों में पीसीसी सड़क निर्माण की योजना स्वीकृत की गई थी – 1. इमली चौक स्थित सर्विस रोड से शिव मंदिर तक – लगभग 300 फीट 2. शिव मंदिर से बजरंग मंदिर तक – लगभग 250 फीट 3. स्पार्क ऑटोमोबाइल दुकान से सर्विस रोड तक – लगभग 250 फीट इस कुल लगभग 800 फीट सड़क निर्माण के लिए 12,24,843 रुपये की योजना स्वीकृत हुई थी और इसके लिए मेसर्स आर.एस. इंटरप्राइजेज के साथ एकरारनामा भी किया गया था।
आरोप है कि निर्धारित स्थल पर पीसीसी सड़क का निर्माण कार्य हुआ ही नहीं, फिर भी संवेदक को भुगतान कर दिया गया।
कांग्रेस नेता संजय कुमार का आरोप है कि इस कथित अनियमितता को छिपाने के लिए बाद में उसी स्थल पर योजना का नाम बदलकर फेवर ब्लॉक (पेवर ब्लॉक) सड़क का निर्माण करा दिया गया। उनका कहना है कि एक ही कार्यस्थल पर एक ही अवधि में दो अलग-अलग सड़क योजनाओं का क्रियान्वयन संभव नहीं है, जिससे वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार की आशंका गहरी हो जाती है।
शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने इस संबंध में कई बार संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायत दी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने उपायुक्त से मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और सरकारी राशि के दुरुपयोग की जांच की मांग की है।
वहीं, इस पूरे मामले पर आदित्यपुर नगर निगम प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जांच के बाद ही आरोपों की सत्यता स्पष्ट हो पाएगी।
सरायकेला-खरसावां में बेलगाम शराबखोरी: सरकारी दुकान के बाहर ही छलकते जाम, प्रशासन मौन, जनता परेशान।
सरायकेला-खरसावां
सरायकेला खरसावां , आदित्यपुर, गम्हरिया कांड्रा थाना क्षेत्र/ मुख्य सड़क पर स्थित सरकारी शराब दुकान से शराब खरीदकर लोग सर्विस रोड पर ही बैठकर पीने लगे हैं। दिनभर शराबियों का जमावड़ा लगा रहता है जिससे राहगीरों, स्कूली बच्चों और आसपास रहने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रात्रि में शराब पीकर लोग गाली-गलौज और झगड़ा करते हैं। शाम होते ही सर्विस रोड पर चलना मुश्किल हो जाता है। महिलाओं का अकेले निकलना भी असुरक्षित हो गया है। ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन और आबकारी विभाग से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
आम जनमानस ने जिला प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि शराब दुकान के 500 मीटर के दायरे में शराब पीने पर सख्त रोक लगे, सीसीटीवी कैमरा लगाया जाए और नियमित गश्ती की जाए।
ब्रेकिंग न्यूज: MVI कार्यालय बना भ्रष्टाचार का अड्डा, बिना पैसे के नहीं होता एक भी काम।
पश्चिम सिंहभूम/चाईबासा
परिवहन विभाग का वो कार्यालय जहां आम जनता को ईमानदारी से सेवा मिलनी चाहिए, वहीं आज भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा अड्डा बन चुका है। MVI कार्यालय में हालात ये हैं कि बिना पैसे दिए आपकी फाइल को कोई हाथ तक नहीं लगाता।
जनता की जेब पर खुलेआम डाका
सूत्रों और पीड़ित लोगों से मिली जानकारी के अनुसार MVI ऑफिस में हर काम का रेट फिक्स है – • लाइसेंस बनवाना हो तो 1500 से 3000 रुपये अलग से • फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए 2000 रुपये • गाड़ी का परमिट और कागजों में मामूली सुधार के लिए भी 500 से 1000 रुपये की वसूली अगर आप ईमानदारी से लाइन में लगकर अपना काम कराना चाहते हैं, तो आपको महीनों तक दौड़ाया जाएगा। कभी सर्वर डाउन का बहाना, कभी साहब नहीं हैं, तो कभी कागज अधूरा है।
दलालों का राज, अफसर मौन
साथ ही सूत्र यह भी बताते हैं कि MVI कार्यालय के बाहर दलालों की फौज खड़ी रहती है। बिना दलाल के आप अंदर घुस भी नहीं सकते। आम आदमी का आरोप है कि ये दलाल सीधे अंदर के बाबुओं और अधिकारियों से मिले हुए हैं। जनता से लूटा गया पैसा नीचे से ऊपर तक बंटता है, इसलिए कोई सुनने वाला नहीं है।
एक पीड़ित ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “मैं 15 दिन से चक्कर लगा रहा हूं। काउंटर पर बैठा बाबू सीधे मुंह बात नहीं करता। बगल वाले ने इशारा किया कि 2000 रुपये दो तो 10 मिनट में काम हो जाएगा। ये कैसी व्यवस्था है?”
सवाल ये उठता है कि जब सरकार डिजिटल इंडिया और भ्रष्टाचार मुक्त शासन का दावा करती है, तो MVI जैसे सरकारी दफ्तरों में ये खुली लूट कैसे चल रही है? क्या जिला परिवहन पदाधिकारी और सरकार के आला अधिकारी इस भ्रष्टाचार से अनजान हैं? या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?
नहीं थम रहा चापड़ से हमला, आर.आइ.टी मोड़ के समीप युवक पर जानलेवा हमला।
सरायकेला/आदित्यपुर
नहीं थम रहा चापड़ से हमला आए दिन चापड़ की घटनाएं निकल कर सामने आ रही है ताजा मामला सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र का है जहां पर आरआइटी मोड़ के पास रविवार शाम बेखौफ अपराधियों ने एक युवक पर धारदार हथियार से ताबड़तोड़ हमला कर दिया. जिसमें युवक गंभीर रूप से घायल हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आरआइटी मोड़ के समीप दो युवकों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया। इसी दौरान एक युवक ने धारदार हथियार निकालकर दूसरे पर हमला कर दिया।
वहीं घटना के बाद स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए गंभीर रूप से घायल युवक को गंगोत्री अस्पताल पहुंचाया. वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत नाजुक होने पर चिकित्सकों ने उसे बेहतर इलाज के लिए टाटा मुख्य अस्पताल (TMH) रेफर कर दिया.
दिनदहाड़े निहत्थे पर वार कर एक ही पल में उतारा मौत के घाट।
निहत्थे पर वार कर एक ही पल में उतारा मौत के घाट।
चार-पांच लोग अचानक सामने आए और बिना किसी वार्ता के किया हमला।
हमला इतना तेज कि संभलने तक का मौका नहीं मिला।
सरायकेला/आदित्यपुर
सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना अंतर्गत बोलायडीह स्थित शीतला मंदिर के सामने शनिवार दोपहर लगभग एक बजे एक भयानक वारदात ने पूरे मोहल्ले को हिला कर रख दिया। गोप पाड़ा के रहने वाले जगन्नाथ गोप उर्फ काड़ा (27) को चार-पांच अज्ञात हमलावरों ने धारदार हथियार से ताबड़तोड़ हमला कर मौत के घाट उतार दिया। इससे आसपास के लोगों में अफरा तफरी मच गया। इसी चीख-पुकार के बीच आरोपी घटनास्थल से भाग निकले। बीच सड़क पर दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने पूरे इलाके को दहला दिया और लोगों में दहशत का माहौल बन गया।
कथित तौर पर हमला अचानक और निहत्थे पल में हुआ। चार-पांच लोग अचानक सामने आए और बिना किसी वार्ता के हमला कर दिया। हमला इतना तेज कि काड़ा को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
सूचना पाते ही आदित्यपुर व गम्हरिया थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा दी। साथ ही घटना स्थल को सील कर दिया गया। पुलिस सीसीटीवी की फुटेज खंगाली जा रही है और कई लोगों से पूछताछ की जा रही है। एसपी के निर्देश पर एसडीपीओ भी घटनास्थल पर रवाना हुए हैं और फरार आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज कर दी गई है।
पुलिस ने अभी तक हत्या के कारण का खुलासा नहीं किया है। पुलिस जाँच में हर सम्भव पहलू—रंजिश, आपराधिक संगठनों की एंट्री या कोई अन्य विवाद की जांच शुरू कर दी है। वहीं ग्रामीणों में रोष और डर दोनों दिखाई दे रहे हैं; कई लोग सुरक्षा की मांग कर रहे हैं और आरोपियों को कड़ी सजा की माँग बार-बार कर रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।
अपराधियों ने कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दी, अपराधियों ने फिर ले ली एक व्यक्ति की जान।
सरायकेला/आदित्यपुर
सरायकेला जिले में नहीं थम रहा अपराध का तांडव आए दिन अपराधी नए-नए अपराध को अंजाम देने में कामयाब हो रहे हैं और स्थानीय पुलिस की कार्रवाई पर जिले की कानून व्यवस्था पर एक गहरा सवालिया निशान छोड़ रहे हैं। कहीं चपड़ से हमला कहीं गले से चैन की चिंताई कहीं मारपीट कहीं जानलेवा हमला कहीं चोरी, कहीं अवैध शराब की बिक्री कहीं अवैध स्क्रैप टाल का संचालित होना यह सभी अपराधीक घटनाएं सरायकेला खरसावां जिले के लिए आम बात हो गई है। सरायकेला खरसावां जिले में मानो अपराधियों ने कानून को एक खेल समझ लिया है।
ज्ञात हो सरायकेला खरसावां जिले में भावी कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जिले में नए पुलिस अधीक्षक का पदस्थापन किया गया लेकिन बरहाल स्थिति ज्यों कि त्यों बनी हुई है लोग आज भी जमशेदपुर के पूर्व पुलिस अधीक्षक डॉ अजय कुमार की मिसाल दे रहे हैं चौक चौराहे पर उन्हीं के कार्यों की चर्चा हो रही है।
साथियों ताजा मामला सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र का है जहां पर शिवनारायणपुर मैदान में देर रात एक युवक की हत्या से इलाके में सनसनी फैल गई। और यह घटना इस वक्त आदित्यपुर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
घटना के संबंध में मिली जानकारी शिवनारायणपुर मैदान में रविवार देर रात किसी बात को लेकर दो गुटों में हुए मामले विवाद ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया जिसके बाद मारपीट शुरू हो गई। मारपीट ने ऐसा रूप ले लिया जिसमें की एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। गंभीर रूप से घायल युवक की मौके पर ही मौत हो गई।
वहीं मृतक की पहचान शिवनारायणपुर, निवासी गौतम मुंडा के रूप में हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शव की स्थिति देखकर प्रतीत होता है कि हमलावरों ने धारदार हथियार एवं पत्थरों से सिर पर वार कर हत्या की है। इस पूरे मामले की सूचना स्थानीय थाना को दी गई। घटना की सूचना मिलते ही आदित्यपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
फिलहाल पुलिस मामले के हर पहलुओं की जांच कर रही है पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही हत्या के कारणों का पता चल पाएगा।
जनहित मेंयक्ष प्रश्न इस वक्त सरायकेला खरसावां जिले के लिए यह है कि क्या आए दिन नए-नए अपराधी जन्म ले रहे हैं या फिर पुराने अपराधी नए अपराध को अंजाम दे रहे हैं?अपराध नियंत्रित करने में कहां चूक हो रही है जनता भय के माहौल से कब तक बाहर आएगी?
वहीं इस मामले पर पूर्व पार्षद अभिजीत महतो ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कानून को अपने हाथ में लेने का अधिकार किसी को भी नहीं है साथ ही उन्होंने स्थानीय थाना को उक्त मामले पर उचित जांच करने की बात कही।
गम्हरिया के सरकारी गोदाम में गरीबों को मिलने वाला कई क्विंटल चना दाल सड़ कर हुआ बर्वाद।
सरायकेला/आदित्यपुर
सरायकेला खरसावां, गम्हरिया के सरकारी गोदाम में गरीबों को मिलने वाला कई क्विंटल चना दाल सड़ कर बर्वाद हो गया है लेकिन बांटा नहीं गया है.
इसमें अधिकारियों की लापरवाही उजागर हुई है. वहीं इस मामले में (एमओ) प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी ने चुप्पी साध ली है. बता दें कि इस प्रखंड में पिछले 8 माह से गरीबों को राशन में दाल कहकर नहीं दिया जा रहा था कि आपूर्ति शून्य है और बैक लॉग चल रहा है. इस बात की पुष्टि जिला आपूर्ति पुष्कर सिंह मुंडा ने भी पत्रकारों के समक्ष किया था.
लेकिन दूसरे ही दिन यह मामला उजागर हो गया कि जन वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीबों के लिए आवंटित कई क्विंटल चना दाल गोदाम में सड़ कर बर्वाद हो गया है. बता दें कि राशन का समय पर वितरण न होने के कारण गोदामों में दाल और अनाज के सड़ने की घटनाएं सामने आती हैं. ऐसी घटनाओं में, जिम्मेदार अधिकारियों और राशन डीलरों की लापरवाही उजागर होती है, जिससे जरूरतमंद परिवारों को उनके हक का निवाला नहीं मिल पाता है. गोदामों में अनाज सड़ने के मामले और लापरवाही सरकारी गोदामों में रखरखाव की कमी और वितरण में देरी के कारण गरीबों तक पहुंचने वाला अनाज कई बार गोदामों में ही खराब हो जाता रहा है.
पिछले दिनों सरायकेला के ग्रामीण इलाकों में जन वितरण प्रणाली (PDS) के तहत कीड़े लगी और एक्सपायरी डेट वाली चना दाल बांटे जाने का गंभीर मामला सामने आया था, जिससे लोगों में भारी आक्रोश देखा गया था. अक्सर ऐसे मामलों में देखने को मिलता है कि वितरण में देरी, समय पर राशन न बंटने से अनाज गोदामों में ही सड़ने लगता है. कई बार तो गरीबों को खराब, घुन लगे (कीड़े लगे) या एक्सपायर हो चुके पैकेट दिए जाते है. उचित निगरानी और वितरण व्यवस्था में खामियों के चलते जिम्मेदार लोगों की लापरवाही सामने आती है. इस संबंध में जब गम्हरिया की प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो वो ऑफिस में नहीं मिली साथ ही उन्होंने फोन भी रिसीव नहीं की हैं. आखिर इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन है. वहीं आपको बताते चले की डीएसओ पुष्कर सिंह मुंडा को गम्हरिया अनाज गोदान में चल रही गड़बड़ी के बारे में फोनो द्वारा सूचित भी किया गया था। लेकिन ना ही कोई जवाब और ना ही कोई समाधान बस लूट मचा लो लूट मचा लो सीधे लफ्जों में कहा जाए तो धूम मचा लो धूम मचा लो। अभी तक गम्हरिया अनाज गोदान के जलने की अनुसंधान की कोई रिपोर्ट भी नहीं आई है। आखिर हो क्या रहा है गरीब जनता के पेट पर कौन सफेद पोश लात मार रहा है। किन-किन तक बंदर बांट हो रही है ?
सूत्र बताते हैं कि आपूर्ति विभाग पदाधिकारी पुष्कर सिंह मुंडा के पदस्थापना के बाद से ही जिले में अनाज को लेकर कई तरह की परेशानियां सामने आ रही हैं जिससे कि लाभुक को नियमानुसार अनाज भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।जिससे कि लाखों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।सूत्र यह भी बताते हैं कि लाभुकों को तक नियमानुसार अनाज न पहुंचना और अनाज के गोदाम के अंदर अनाज का संड़ जाना यह कहीं ना कहीं आपूर्ति विभाग की लापरवाही के नतीजे को दर्शा रही है और यह जांच का विषय है और लाभुकों ने इस मामले पर जिले के उपयुक्त से जांच की गुहार लगाते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की भीमांग की है।
खड़काई पुलिया से लेकर गम्हरिया बाजार तक फल विक्रेताओं ने किया सड़क जाम आवागमन बाधित।
सरायकेला/आदित्यपुर
आदित्यपुर गम्हरिया मुख्य सड़क पर आए दिन लाखों की संख्या में गाड़ियां अथवा लोग सड़क से गुजरते हैं लेकिन यह फल विक्रेता सड़क जाम कर दुर्घटना की स्थिति उत्पन्न कर रहे हैं जिसकी रोकथाम करने वाला कोई नहीं जिसकी शुध लेने वाला कोई नहीं ट्रैफिक पुलिस कर्मी की मौजूदगी में यह फल विक्रेता सड़क को अतिक्रमण करने में सफल हो रहे हैं।
आपको बताते चलें कि आदित्यपुर खड़काई पुलिया से लेकर गम्हरिया बाजार तक की सड़कों पर जगह-जगह पर फल विक्रेताओं द्वारा फल के ठेले खड़े कर सड़क को बाधित कर रहे हैं।
सूत्रों द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार आदित्यपुर ट्रैफिक सिग्नल और गम्हरिया ट्रैफिक सिग्नल के समीप मुख्य सड़क के किनारे फल विक्रेता फल का ठेला लगाकर फल बेचते आए दिन नजर आते हैं जिसकी वजह से सड़क जाम एवं कई बार तो दुर्घटना की स्थिति भी बन जाती है दुर्भाग्य की बात यह है कि आदित्यपुर थाना ट्रैफिक सिग्नल से महज़ कुछ ही दूरी पर स्थित है और साथ ही साथ ट्रैफिक सिग्नल के समीप हर वक्त ट्रैफिक पुलिस की तैनाती रहती है लेकिन फिर भी फल विक्रेता सड़क को जाम करने में सफल हो रहे हैं और ट्रैफिक पुलिस मुख् दर्शक बनी रहती है और यह मामला अपने आप में ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई पर सवालिया निशान छोड़ रही है।
आदित्यपुर ट्रैफिक थाना प्रभारी, राजू कुमार
साथियों आपको बताते चलें कि सड़क दुर्घटना का कारण केवल यह फल विक्रेता नहीं आदित्यपुर सरायकेला खरसावां मुख्य सड़क पर नित्य दिन सैकड़ो तीन पहिया ऑटो दौड़ती रहती है जो कि कहीं भी कभी भी ब्रेक लगा देती है कहीं भी कभी भी टर्न हो जाती है जो कि आए दिन सड़क दुर्घटना का कारण बन रही है।
ज्ञात हो कि आदित्यपुर ट्रैफिक सिग्नल के समीप स्थित महामाया होटल के पास कुछ दिन पहले एक महिला सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई जिसमें कि उक्त महिला की मौत हो गई लेकिन फिर भी इस महामाया होटल के समीप फल विक्रेता सड़क किनारे फल का ठेला लगाकर सड़क जाम कर रहे हैं और यह तीन पहिया वाहन भी लगातार ट्रैफिक सिग्नल के समीप अपनी गाड़ी खड़ी कर पैसेंजर को बिठाते हैं अथवा गाड़ियों से उतारते हैं जिसको लेकर कई बार जाम अथवा दुर्घटना की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। वहीं इस मामले पर सूत्रों का कहना है कि जल्द से जल्द इन फल विक्रेताओं अथवा रैस ड्राइविंग करने वाले तीन पहिया वाहनों पर कार्रवाई नहीं की गई तो वह दिन दूर नहीं जब यह फल विक्रेता अथवा तीन पहिया वाहन किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते है।
मनोज स्वर्गियारी, पुलिस अधीक्षक ,सरायकेला-खरसावां
वहीं इस मामले पर जनहित में सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्थानीय निवासियों ने जिला के पुलिस अधीक्षक से सड़क पर हो रहे दुर्घटनाओं को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए ध्यान आकर्षित करने की बात कही।
जेएसएससी के नाम पर ठगी, दस लाख रुपये एंठने पहुंचे फर्जी अधिकारी को ग्रामीणों ने पकड़ कर किया पुलिस के हवाले।
सरायकेला/चौका
साथियों सरायकेला खरसावां जिले से एक ऐसी ही घटना निकलकर सामने आ रही है जिसमें की ग्रामीणों की बहादुरी के चर्चे सरेआम हो रहे हैं।जिसमें की ग्रामीणों ने 10 लाख की ठगी करने आए एक बहरूपिए को पकड़ कर चौक पुलिस के हवाले किया है।
सूत्रों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार गुरुचरण साव नामक व्यक्ति ने कथित तौर पर बहरूपिया को यह क
जी हां साथियों सरायकेला खरसावां जिले के चौका थाना क्षेत्र के बड़ामटांड़ में जेएसएससी पीजीटी सहायक आचार्य अभ्यार्थी से नौकरी पक्की करने के नाम पर ठगी करने आये एक व्यक्ति को लोगो ने पकड़कर चौका थाना पुलिस को सौंप दिया। घटना गुरुवार सुबह करीब 10 बजे की बताई जा रही है।
सूत्रों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार बीते बुधवार को अभ्यार्थी के पास जेएसएससी कार्यालय के नाम पर फोन आया था। जिसमें बताया गया कि आपकी नौकरी पक्की है। इसके लिए 10 लाख रुपए लगेगा नहीं तो यह नौकरी किसी दुसरे अभ्यार्थी को दे देंगे। उक्त व्यक्ति की बातें सुनकर अभ्यर्थियों ने उसे बहरूपिया समझने में देर नहीं की और तत्परता दिखाते हुए अपनी सूझबूझ से उक्त व्यक्ति को पैसे देकर नौकरी पाने के बहाने चावलीबासा बड़ामटांड़ बुलाया जहां पर कथित तौर पर अभ्यार्थियों अथवा ग्रामीणों ने उक्त व्यक्ति को पकड़कर चौका पुलिस को सौंप दिया।
सूत्रों ने यह भी जानकारी दी है कि चौका पुलिस उक्त व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है पुलिस को उक्त व्यक्ति के बैग से कई जेएसएससी का दस्तावेज एवं कई अभ्यार्थायों के दस्तावेज मिले है। कथित तौर पर उक्त व्यक्ति जेएसएससी ठगी गिरोह का सदस्य बताया जा रहा है।वहीं इस मामले पर समाचार लिखे जाने तक चौक थाना की पुलिस द्वारा कोई भी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
वहीं इस मामले पर चौक थाना प्रभारी से दूरभाष के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन किसी कारणवश संपर्क नहीं हो पाई।
लगातार चर्चाओं में बना रहा हिमांशु सिंह हत्याकांड मामला, परिजनों की आंखें नम, नेताओं का लग रहा तांता।
सरायकेला/खरसावां
साथियों वर्तमान में सरायकेला खरसावां जिले में एक समाचार, एक खबर, एक दुखद खबर, वह खबर जिसने झारखंड के कानून व्यवस्था की पूरी पोल पट्टी खोल कर रख दी, वह खबर जिसने झारखंड की पुलिस की कार्रवाई पर एक प्रश्न चिन्ह छोड़ दी, वह खबर जिसने झारखंड वासियों के दिल को झांकझोर कर रख दिया है, वह खबर जो हर एक समाचार चैनलों हर एक अखबारों हर एक न्यूज़ पोर्टलों की ब्रेकिंग न्यूज़ बन चुका है, वह खबर जिसने राज्य के नेताओं को समाजसेवियों को बुद्धिजीवियों को नींद से जगा दिया है।
और वह खबर है हिमांशु सिंह हत्याकांड।
साथियों आपको बताते चलें कि हिमांशु सिंह हत्याकांड मामला घटनाक्रम से लेकर अब तक चर्चाओं में बना हुआ है। यह मामला एक घटना से लेकर मौत का सफर तय करते हुए सबकी आंखें नम करते हुए राजनीतिक रूप धारण कर लिया।
गौरतलब है कि 27 जून की रात जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित डीडी बार के बाहर पुलिस वैन से निकालकर दो युवकों पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला किया गया था। इस हमले में करणी सेना से जुड़े हिमांशु सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि प्रत्यूष आनंद गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज जारी है।
घटना के बाद हिमांशु सिंह के पिता के बयान पर बिष्टुपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस मामले में कुल 11 लोगों को आरोपी बताया गया है, जिनमें डीडी बार के संचालक नीरज सिंह और बार के मैनेजर का नाम भी शामिल है।
साथियों जहां एक तरफ पुलिस हिमांशु सिंह हत्याकांड मामले को लेकर पूरी तरह सक्रिय बनी हुई है ताबड़तोड़ छापेमारी, गिरफ्तारी की जा रही है हर वो पहलुओं की जांच कि जा रही है जिससे मुख्य आरोपी का सुराग मिल सके और उस तक पहुंचा जा सके। सीधे लफ्जों में कहा जाए तो जमशेदपुर पुलिस इस वक्त पूरी तरह मुस्तैद है। पुलिस हर एक गतिविधियों पर पैनी नजर बनाई हुई है।
वहीं दूसरी तरफ मृतक के परिजन न्याय की गुहार लगा रहे हैं अपने परिजन के खोने के दुख में उनकी आंखों के आंसू रुक नहीं रहे रो-रो कर उनकी आंखें सूज गई। पड़ोसी रिश्तेदार सभी एक-एक कर हिमांशु के घर पहुंच रहे हैं इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़े रहने का एहसास दिला रहे हैं उनके दुख को बांटने का प्रयास कर रहे हैं।
इधर इस मामले पर नेताओं ने भी अपनी कमर कस ली है एक-एक कर नेता हिमांशु सिंह के घर पहुंच रहे हैं और परिजनों से मिलकर ढांढस बंधा रहे हैं और झारखंड में लगातार बिगड़ती कानून व्यवस्था साथ ही अपराधियों के बढ़ते होसलो के खिलाफ मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और विधानसभा नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी आदित्यपुर स्थित मृतक हिमांशु सिंह के घर पहुंचे। नेताओं ने 100 का कुल परिजनों से मिलकर उन्हें ढंढास बंधाया और इस दुख की घड़ी में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। इस मौके पर उनके साथ मुख्य रूप से विधायक भानु प्रताप शाही और भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अभय सिंह समेत कई वरिष्ठ नेता व कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।
वहीं नेताओं ने परिजनों से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने पुलिस प्रशासन की भूमिका पर बेहद गंभीर आरोप लगाया राज की बधाई सुरक्षा व्यवस्था को उजागर करते हुए कहा कि जमशेदपुर के नाक के नीचे पुलिस की मौजूदगी में दो युवकों पर अपराधियों ने चपड़ से जानलेवा हमला कर दिया गया। उन्होंने कहा कि जान बचाने के लिए पीड़ित युवा पुलिस की जिप्सी में भी घुसे लेकिन अपराधियों ने पुलिस के सामने ही उन्हें बाहर घसीट कर उन पर हमला किया गया। पुलिस मुख दर्शक बनी रही ऐसा लगता है कि राज्य में कानून का नहीं बल्कि अपराधियों की समानांतर सरकार चल रही है जिसे पुलिस का संरक्षण प्राप्त है।
भाजपा नेताओं ने इस मामले पर और गंभीरता दिखाते हुए घटना के वक्त मौके पर तैनात लापरवाह पुलिस कर्मियों पर धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें तुरंत जेल भेजने की सरकार से मांग कर रहे हैं, साथ ही नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बावरी और भानु प्रताप शाही ने कहा कि सरकार इस पूरे मामले की लीपा पोती करने और केस को मोड़ने का प्रयास कर रही है जिसे भाजपा सफल नहीं होने देगी।
वहीं भाजपा नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस हत्याकांड के खिलाफ पहले जमशेदपुर बंद किया गया है और यदि पीड़ित परिवार को जल्द ही उचित न्याय नहीं मिला तो पार्टी पूरे झारखंड को ठप और बंद करने का काम करेगी इस विषय को लेकर भाजपा का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल जल्द ही राज्यपाल से भी मुलाकात करेगा।
डीडी बार संचालक एवं भाजपा नेता नीरज सिंह
वहीं इस मामले में आरोपी बनाए गए डीडी बार के संचालक एवं भाजपा नेता नीरज सिंह ने जमशेदपुर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत (एंटिसिपेटरी बेल) की याचिका दायर की है। इसके साथ ही एफआईआर में उन्हें आरोपी बनाए जाने को भी कानूनी चुनौती दी गई है।
जानकारी के अनुसार, इस मामले में नीरज सिंह और उनकी पत्नी संध्या सिंह की ओर से कोर्ट में कुल तीन अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इनमें पहली याचिका नीरज सिंह की अग्रिम जमानत से संबंधित है। दूसरी याचिका में एफआईआर में उनका नाम शामिल किए जाने को चुनौती दी गई है। वहीं, तीसरी याचिका नीरज सिंह की पत्नी संध्या सिंह की ओर से दायर की गई है, जिसमें पुलिस द्वारा जब्त किए गए वाहनों को रिलीज करने की मांग की गई है। फिलहाल इन सभी याचिकाओं पर कोर्ट में सुनवाई लंबित है।
बताया जा रहा है कि इस मामले में नीरज सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश झा कोर्ट में पैरवी कर रहे हैं।
हालांकि, नीरज सिंह का कहना है कि घटना के समय वह मौके पर मौजूद नहीं थे और न ही वारदात डीडी बार के अंदर हुई थी। उनका दावा है कि पूरी घटना बार के बाहर पुलिस की मौजूदगी में हुई, इसलिए उन्हें इस मामले में आरोपी बनाया जाना उचित नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने कोर्ट में एफआईआर को चुनौती देते हुए राहत की मांग की है।
अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में कोर्ट के आगामी फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह फैसला जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
और अगर इस मामले पर जिले वासियों की कहें तो लगभग लगभग तमाम जिलेवासी इस मामले के मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के इंतजार में है हर किसी के जुबान पर बस एक ही सवाल है कि अपराधी आखिर कौन सी ऐसी बिल में छिप गया है जिसे पुलिस ढूंढ नहीं पा रही? या फिर अपराधी को किसी बड़े सफेद पोस् का संरक्षण प्राप्तहै?
फ़िर पेपर लीक: अंदरूनी विश्वासघात- घर का भेदी लंका ढाए -युवाओं के भविष्य की चोरी या व्यवस्था की सबसे बड़ी विफ़लता व कमजोरी?
लाखों अभ्यर्थियों की तैयारी, यात्रा, मानसिक तनाव और भविष्य एक झटके में अधर में लटक जाना,पूरे देश की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों, मॉडरेटरों और संबंधित अधिकारियों क़ो भी केंद्रीय बजट तैयार करने वाली टीम की तरह एग्जाम होने तक पूर्ण गोपनीय वातावरण में रखने की तात्कालिक आवश्यकता।
गोंदिया/महाराष्ट्र
वैश्विक स्तरपर घर का भेदी लंका ढाए,यह कहावत आज भारत की परीक्षा प्रणाली पर पहले से कहीं अधिक सटीक बैठती दिखाई देती है।कभी पानी की पाइपलाइन,गैस लाइन या टैंकर लीक होने की खबरें चर्चा का विषय होती थीं, लेकिन आज लीक शब्द सुनते ही लोगों के मन में पहला प्रश्न आता है, आज किस परीक्षा का पेपर लीक हुआ? यह स्थिति किसी भी लोकतांत्रिक और ज्ञान- आधारित समाज के लिए अत्यंत चिंताजनक है। किसी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होना केवल एक प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के वर्षों के परिश्रम, सपनों और भविष्य की खुली चोरी है। जब एक विद्यार्थी दिन-रात मेहनत करके परीक्षा केंद्र तक पहुंचता है और अंतिम क्षणों में परीक्षा रद्द या स्थगित कर दी जाती है, तो उसका केवल समय और धन ही नहीं, बल्कि व्यवस्था पर विश्वास भी टूटता है। महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (महा टेट 2026) का परीक्षा से ठीक पहले स्थगित होना इसी गहरी बीमारी का सटीक ताजा उदाहरण है।महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा रविवार 28 जून 2026 को आयोजित थी, किंतु एक दिन पहले ठाणे के भिवंडी क्षेत्र में पुलिस द्वारा पेपर लीक रैकेट का भंडाफोड़ किए जाने के बाद सरकार को परीक्षा तत्काल स्थगित करनी पड़ी। प्रारंभिक जांच में वास्तविक प्रश्नपत्र आरोपियों के पास मिलने की पुष्टि ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह कोई अफवाह नहीं, बल्कि संगठित अपराध था। लाखों अभ्यर्थियों की तैयारी,यात्रा, मानसिक तनाव और भविष्य एक झटके में अधर में लटक गया। यह घटना केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब राष्ट्रीय स्तर पर पेपर लीक की घटनाओं के बाद परीक्षा प्रणाली को लीक-प्रूफ बनाने के दावे किए गए थे,तब फिर ऐसी घटनाएं कैसे हो रही हैं? यदि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो चुकी है,तो प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले अपराधियों तक कैसे पहुंच गया?इसका उत्तर केवल तकनीकी कमजोरी में नहीं, बल्कि व्यवस्था के भीतर मौजूद मानवीय भ्रष्टाचार और संस्थागत मिलीभगत में छिपा है। पेपर लीक की लगभग हर बड़ी घटना यह संकेत देती है कि यह केवल बाहरी अपराधियों का काम नहीं होता। प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर मुद्रण, पैकेजिंग, परिवहन, सुरक्षित भंडारण और वितरण तक अनेक चरण होते हैं। इनमें किसी भी स्तर पर यदि कोई व्यक्ति धन, प्रभाव या लालच के कारण गोपनीयता तोड़ देता है, तो पूरी सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो जाती है। इसलिए यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि अधिकांश पेपर लीक बाहरी हमला नहीं, बल्कि अंदरूनी विश्वासघात होते हैं। वास्तव में घर का भेदी लंका ढाए वाली स्थिति ही इस समस्या का मूल है।
साथियों, महाराष्ट्र मामले की जांच में सामने आए तथ्यों ने भी इसी ओर संकेत किया। पुलिस को गुप्त सूचना मिलने के बाद अंडरकवर ऑपरेशन चलाया गया। अधिकारियों ने स्वयं को पेपर खरीदने वाला ग्राहक बताकर आरोपियों से संपर्क किया और दो दिनों तक उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखी। बड़ी धनराशि का लालच देकर सौदे के लिए बुलाया गया और जैसे ही प्रश्नपत्र सौंपा गया, तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच में दिल्ली सहित कई राज्यों तक फैले अंतरराज्यीय नेटवर्क के संकेत मिले, जिसके बाद विशेष जांच दल ने विभिन्न राज्यों में जांच शुरू की। इससे स्पष्ट है कि पेपर लीक अब छोटे स्तर का अपराध नहीं रहा, बल्कि यह करोड़ों रुपये के संगठित आपराधिक नेटवर्क का रूप ले चुका है।आज डिजिटलतकनीक ने जहां सुविधाएं बढ़ाई हैं, वहीं अपराधियों को भी नए माध्यम उपलब्ध करा दिए हैं। व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और अन्य एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म पर कुछ ही मिनटों में प्रश्नपत्र हजारों लोगों तक पहुंच सकता है। इसलिए केवल प्रिंटिंग प्रेस की सुरक्षा पर्याप्त नहीं है। साइबर सुरक्षा, डिजिटल निगरानी और डेटा सुरक्षा को भी समान महत्व देना होगा। यदि डिजिटल चैनल सुरक्षित नहीं होंगे, तो कोई भी गोपनीय दस्तावेज सुरक्षित नहीं रह सकता। साथियों, पेपर लीक का सबसे बड़ा नुकसान केवल परीक्षा स्थगित होना नहीं है। इसका सबसे गंभीर प्रभाव युवाओं के मनोविज्ञान पर पड़ता है। वर्षों की मेहनत करने वाला छात्र स्वयं को ठगा हुआ महसूस करता है। वह सोचने लगता है कि मेहनत से अधिक महत्व पैसे, पहुंच और भ्रष्ट नेटवर्क का है। यह भावना प्रतिभाशाली युवाओं में निराशा, अविश्वास और मानसिक तनाव को जन्म देती है। यदि यह स्थिति लगातार बनी रही,तोइसका प्रभाव केवल शिक्षा पर नहीं, बल्कि देश की प्रशासनिक गुणवत्ता,सामाजिक विश्वास और आर्थिक विकास पर भी पड़ेगा।भारत के लिए यह समय केवल अपराधियों की गिरफ्तारी तक सीमित रहने का नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली के पुनर्गठन का है। केवल पेपर लीक होने के बाद एसआईटी बनाना और कुछ गिरफ्तारियां करना पर्याप्त समाधान नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिसमें पेपर लीक होना तकनीकी और प्रशासनिक रूप से लगभग सटीकता से असंभव हो जाए। साथियों, इस संदर्भ में विश्व के अनेक देशों ने अत्यंत प्रभावी मॉडल विकसित किए हैं, जिनसे भारत महत्वपूर्ण सीख ले सकता है। चीन की राष्ट्रीय विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा “गाओकाओ” को दुनिया की सबसे सुरक्षित परीक्षाओं में माना जाता है। वहां प्रश्नपत्रों को राष्ट्रीय गोपनीय दस्तावेज का दर्जा प्राप्त है। प्रश्नपत्रों की छपाई अत्यधिक सुरक्षित परिसरों में होती है और उनका परिवहन बख्तरबंद वाहनों, जीपीएस ट्रैकिंग, वीडियो निगरानी तथा सशस्त्र सुरक्षा के बीच किया जाता है। परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन, फेस रिकग्निशन, एआई कैमरे, रेडियो जैमर और इलेक्ट्रॉनिक डिटेक्शन सिस्टम का उपयोग किया जाता है। वहां पेपर लीक केवल अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के विरुद्ध गंभीर अपराध माना जाता है।अमेरिका ने एक अलग रास्ता अपनाया है। वहां विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षाओं में तेजी से डिजिटल प्रणाली लागू की गई है। प्रश्नपत्रों की लंबी अवधि तक भौतिक रूप में उपलब्धता समाप्त कर दी गई है। परीक्षा शुरू होने के ठीक पहले एन्क्रिप्टेड माध्यम से प्रश्न उपलब्ध कराए जाते हैं। विशेष लॉकडाउन सॉफ्टवेयर के कारण परीक्षार्थी अन्यवेबसाइट स्क्रीनशॉट या बाहरी एप्लिकेशन का उपयोग नहीं कर सकता।इससे पारंपरिक पेपर लीक की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है।ऑस्ट्रेलिया ने भी ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली को वैज्ञानिक तरीके से विकसित किया है। वहां लॉकडाउन ब्राउज़र, प्रश्नों का अलग-अलग क्रम, एआई आधारित निगरानी तथा अधिकृत अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही सुनिश्चित की गई है। यदि कोई अधिकारी सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन करता है, तो उसके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई होती है।दक्षिण कोरिया का मॉडल विशेष रूप से उल्लेखनीय है। वहां राष्ट्रीय परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करने वाले शिक्षकों और विशेषज्ञों को परीक्षा समाप्त होने तक बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग रखा जाता है। उनके मोबाइल, इंटरनेट और बाहरी संपर्क बंद कर दिए जाते हैं। यह व्यवस्था कठोर अवश्य है, किंतु प्रश्नपत्र की गोपनीयता सुनिश्चित करने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुई है।
साथियों, यहीं पर भारत के लिए एक व्यावहारिक सुझाव भी सामने आता है। जिस प्रकार केंद्रीय बजट तैयार करने वाली टीम को बजट प्रस्तुत होने तक पूर्ण गोपनीय वातावरण में रखा जाता है, उसी प्रकार प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों, मॉडरेटरों और संबंधित अधिकारियों के लिए भी सीमित अवधि का नियंत्रित एवं सुरक्षित वातावरण बनाया जा सकता है।यह व्यवस्था केवल उच्च जोखिम वाली राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय परीक्षाओं के लिए लागू की जा सकती है। इससे प्रश्नपत्र निर्माण के दौरान बाहरी संपर्क और संभावित लीक की संभावना काफी कम हो सकती है। हालांकि केवल मानव नियंत्रण पर्याप्त नहीं होगा। अब समय आ गया है कि प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर परीक्षा केंद्र तक प्रत्येक चरण का पूर्ण डिजिटलीकरण किया जाए। ब्लॉकचेन जैसी तकनीक दस्तावेजों की सुरक्षा और प्रत्येक गतिविधि का अपरिवर्तनीय रिकॉर्ड रखने में सहायक हो सकती है। यदि प्रत्येक एक्सेस, डाउनलोड, प्रिंट और ट्रांसफर का डिजिटल लॉग सुरक्षित रहेगा, तो किसी भी स्तर पर जिम्मेदारी तय करना आसान होगा। साथियों, इसके साथ ही परीक्षा प्रक्रिया में जीरो ट्रस्ट सिक्योरिटी मॉडल अपनाने की आवश्यकता है।अर्थात कोई भी व्यक्ति केवल पद के आधार पर पूर्ण विश्वास का पात्र न माना जाए।प्रत्येक चरण में बहुस्तरीय प्रमाणीकरण डिजिटल ऑडिट और स्वतंत्र निगरानी अनिवार्य होनी चाहिए। संवेदनशील कार्यों में एकल व्यक्ति के बजाय बहु-अधिकारी प्रणाली अपनाई जानी चाहिए ताकि कोई अकेला व्यक्ति पूरीe प्रक्रिया से समझौता न कर सके।कानूनी स्तर पर भी व्यापक सुधार आवश्यक हैं। वर्तमान व्यवस्था में कई मामलों में जांच लंबी चलती है और दोषियों को वर्षों तक सजा नहीं मिलती। इससे अपराधियों में भय पूरी तरह से समाप्त हो जाता है।
साथियों, पेपर लीक को केवल सामान्य आपराधिक कृत्य नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और राष्ट्रीय संसाधनों के विरुद्ध संगठित आर्थिक अपराध के रूप में देखा जाना चाहिए। इसके लिए विशेष कानून, अनिवार्य संपत्ति जब्ती आजीवन परीक्षा प्रतिबंध, सरकारी सेवा से स्थायी निष्कासन और फास्ट-ट्रैक न्यायालयों में समयबद्ध सुनवाई जैसी व्यवस्थाएं लागू की जानी चाहिए।परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही भी स्पष्ट होनी चाहिए।यदिकिसी एजेंसी की लापरवाही सिद्ध होती है,तो केवल निचलेस्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों की भी व्यक्तिगत जवाबदेही तय करनी होगी।जब तक जवाबदेही ऊपर तक नहीं पहुंचेगी, तब तक सुधार केवल कागजों तक सीमित रहेगा।
साथियों, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि देश को अपने युवाओं का विश्वास वापस जीतना होगा।प्रत्येक पेपर लीक केवल एक परीक्षा रद्द नहीं करता, बल्कि यह संदेश देता है कि व्यवस्था अभी भी ईमानदार प्रतिभा की पूरी तरह रक्षा नहीं कर पा रही है। यदि यह विश्वास टूट गया, तो इसका प्रभाव आने वाले दशकों तक सटीकता से दिखाई देगा।आज आवश्यकता केवल नई घोषणाओं की नहीं, बल्कि कठोर क्रियान्वयन की है। भारत के पास तकनीक भी है, प्रशासनिक क्षमता भी और वैश्विक उदाहरण भी। अब आवश्यकता राजनीतिक इच्छाशक्ति,संस्थागत ईमानदारी और शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाने की है। यदि प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर परिणाम घोषित होने तक प्रत्येक चरण को वैज्ञानिक, पारदर्शी, डिजिटल और जवाबदेह बनाया जाए, तो पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि यह समझना होगा कि परीक्षा केवल अंक प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य का चयन तंत्र है। यदि यही व्यवस्था भ्रष्ट हो जाएगी, तो प्रशासन, शिक्षा, न्याय और विकास की पूरी नींव कमजोर पड़ जाएगी। इसलिए पेपर लीक के विरुद्ध संघर्ष केवल परीक्षा बचाने का अभियान नहीं, बल्कि युवा प्रतिभा, सामाजिक न्याय और भारत के भविष्य की रक्षा का राष्ट्रीय संकल्प होना चाहिए। तभी प्रत्येक विद्यार्थी यह विश्वास कर सकेगा कि उसकी सफलता का आधार केवल उसकी मेहनत होगी, किसी लीक हुए प्रश्नपत्र या भ्रष्ट नेटवर्क का प्रभाव नहीं।
संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318