सरायकेला-खरसावां
वर्षों से निष्क्रिय पड़े राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र को पुनर्जीवित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने पहल तेज कर दी है। गुरुवार को अनुमंडल कार्यालय सभागार में कला केंद्र के सचिव सह अनुमंडल पदाधिकारी अभिनव प्रकाश की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में केंद्र के संचालन, संस्थागत विकास एवं प्रशिक्षण व्यवस्था को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में नगर पंचायत अध्यक्ष एवं सरायकेला छऊ आर्टिस्ट एसोसिएशन के संरक्षक मनोज कुमार चौधरी, वरिष्ठ छऊ गुरु, कलाकार तथा कला प्रेमी शामिल हुए।

बैठक में निर्णय लिया गया कि केंद्र में आवश्यक पदों को चरणबद्ध तरीके से भरते हुए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम पुनः प्रारंभ किया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी को सरायकेला की विश्वविख्यात छऊ शैली का व्यवस्थित प्रशिक्षण मिल सके। साथ ही कला केंद्र के दीर्घकालीन एवं सुव्यवस्थित संचालन के लिए आवश्यक संस्थागत व्यवस्था विकसित की जाएगी।
अनुमंडल पदाधिकारी अभिनव प्रकाश ने बैठक में कलाकारों को फेलोशिप चयन समिति के गठन, सोसाइटी निबंधन अधिनियम के तहत संस्था का पंजीकरण, गवर्निंग बॉडी के गठन तथा विभिन्न सरकारी एवं अन्य स्रोतों से अनुदान एवं वित्तीय सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद कला केंद्र के संचालन, विकास एवं वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने में सुविधा होगी।
बैठक में कलाकारों ने नियमित प्रशिक्षण, प्रशिक्षकों की नियुक्ति, आधारभूत संरचना के विकास, कलाकार कल्याण योजनाओं तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरायकेला छऊ के प्रचार-प्रसार से जुड़े कई सुझाव दिए। अनुमंडल पदाधिकारी ने सभी सुझावों पर गंभीरता से कार्य करने का आश्वासन दिया।
नगर पंचायत अध्यक्ष एवं सरायकेला छऊ आर्टिस्ट एसोसिएशन के संरक्षक मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि सरायकेला की सांस्कृतिक पहचान एवं विश्वविख्यात छऊ परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के लिए कलाकारों द्वारा लगभग 20 वर्षों से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अब राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन की सकारात्मक पहल से राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के पुनर्जीवन का मार्ग प्रशस्त हुआ है। उन्होंने कहा कि बैठक में प्रस्तुत विस्तृत कार्ययोजना आने वाले दिनों में कला केंद्र के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगी तथा कलाकारों और नई पीढ़ी को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
बैठक में उपस्थित कलाकारों ने उम्मीद जताई कि केंद्र में शीघ्र नियमित प्रशिक्षण शुरू होने से सरायकेला छऊ की गौरवशाली परंपरा को नई ऊर्जा मिलेगी तथा इसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूती मिलेगी।












