मुसाबनी के पूजा पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा बना आकर्षण का केंद्र,पूजा पंडालों में शुरू हुआ माता का जय-जयकार

मुसाबनी के पूजा पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा बना आकर्षण का केंद्र,पूजा पंडालों में शुरू हुआ माता का जय-जयकार

मुसाबनी

शारदीय नवरात्र को लेकर मुसाबनी के विभिन्न पूजा पंडालों में महासप्तमी पूजा को लेकर पंडालों में भक्तों की भीड़ देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से आदि शक्ति की आराधना एवं पूजा अर्चना की।

न्यू कॉलोनी पूजा पंडाल मुसाबनी
मुसाबनी बाबू लाइन में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा


दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की की प्रतिमाएं व झांकी पूजा पंडाल में देखने को मिल रही है। पूजा पंडालो में देवी की प्रतिमाओं को ऐसा आकर्षक रूप दिया गया है।

मुसाबनी नंबर दो गोरखा एसोसिएशन दुर्गा पूजा कमेटी


नवरात्र के पर्व को लेकर माहौल देवीमय हो गया है। एटीएफ़ दुर्गा पूजा पंडाल, न्यू कॉलोनी दुर्गा पूजा पंडाल, यूथ क्लब दुर्गा पूजा पंडाल, रविंद्र संघ पूजा पंडाल,ब्लॉक कॉलोनी पूजा पंडाल,गोरखा एसोसिएशन पूजा पंडाल में मां दुर्गा की आकर्षक प्रतिमाएं श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है। सभी पूजा पंडालो में विद्युत सज्जा की बेहतरीन व्यवस्था पंडालों की खूबसूरती में चार चांद लग रहा है। एटीएफ का पूजा पंडाल व गोरखा एसोसिएशन का पंडाल भी भक्तजनों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

मुसाबनी में सजने लगे पूजा पंडाल

मुसाबनी में सजने लगे पूजा पंडाल

मुसाबनी

शारदीय नवरात्र को लेकर मुसाबनी के विभिन्न पूजा पंडालों को दर्शकोंं के लिए बुधवार षष्टि पूजा से खोल दिया गया है। मांं का दरबार सजने लगा है। पूजा पंडालों में माता का जय जयकार शुरू हो गया। कई पूजा पंडालों का उद्घाटन बुधवार को किया गया कुछ का गुरुवार को किया जाएगा। दुर्गा पूजा को लेकर शहर में उत्सव का माहौल है। बाजार मेंं खरीदारोंं की भीड़ उमड़ पड़ी है।

न्यू कॉलोनी दुर्गा पूजा पंडाल
ब्लॉक कॉलोनी दुर्गा पूजा पंडाल
रविन्द्र संघ पूजा पंडाल

दुर्गा पूजा पंडालों को जगमग करने में भक्तगण जुटे रहे। मां आदि शक्ति के महापर्व की तैयारी को अंतिम रूप देने के लिए देर रात तक शहर से लेकर गांव तक लोग जुटे हैं।नवरात्र के पर्व को लेकर माहौल देवीमय हो गया है। एटीएफ़ दुर्गा पूजा पंडाल, न्यू कॉलोनी दुर्गा पूजा पंडाल, यूथ क्लब दुर्गा पूजा पंडाल, रविंद्र संघ पूजा पंडाल,ब्लॉक कॉलोनी पूजा पंडाल,गोरखा एसोसिएशन पूजा पंडाल आदि को काफी भव्य और आकर्षक बनाया गया है। न्यु कॉलोनी, एटीएफ का पूजा पंडाल व गोरखा एसोसिएशन का पंडाल भी भक्तजनों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

आगामी दुर्गा पूजा को लेकर सनातनी समिति की बैठक हुई संपन्न

आगामी दुर्गा पूजा को लेकर सनातनी समिति की बैठक हुई संपन्न

सरायकेला-खरसावां

आगामी दुर्गा पूजा को लेकर श्री श्री सनातनी समिति ने की भूमि पूजन,भूमि पूजन में समिति के सदस्यों ने समर्पण भावना से जिले वासियों के जीवन में दुर्गुणों का नाश एवं सुख शांति की मां दुर्गा से कामना की

आपको बताते चलें कि गेस्ट हाउस के श्री श्री सनातनी मां दुर्गा पूजा समिति की ओर से पहली बार आयोजित की जा रही मां दुर्गा के वार्षिक पूजनोत्सव को लेकर रविवार को भूमि पूजन किया गया. गेस्ट हाउस ग्राउंड में आयोजित होने वाली उक्त पूजन उत्सव के पंडाल निर्माण को लेकर यजमान के तौर पर समिति के नवीन कुमार सिंह ने भूमि पूजन किया.

वहीं भूमि पूजन के उपरांत श्री श्री सनातनी समिति ने दुर्गा पूजा की व्यवस्था को लेकर बैठक की। बैठक में पूजा की तैयारी को लेकर चर्चा की गई। बैठक में सदस्यों ने प्रतिमा बनाने,किसी भी तरह की दिक्कत होने पर समिति को सूचना देने, मंदिर को रंग-रोगन व पंडाल बनाने संबंधित चर्चा की गई।

इस अवसर पर आयोजक समिति के उपाध्यक्ष नवीन कुमार सिंह ने बताया कि मां दुर्गा की वार्षिक पूजा विशुद्ध सनातनी परंपरा के साथ वैष्णव मत से किए जाने की तैयारी की जा रही है. जिसके तहत भव्य पंडाल में मां दुर्गा के बिराजने को लेकर पंडाल निर्माण के लिए भूमि पूजन किया गया. उन्होंने बताया कि आगामी 8 अक्टूबर को बेलवरण के साथ मां दुर्गा का आह्वान कर महाषष्ठी की पूजा का आयोजन किया जाएगा.

मौके पर आयोजक समिति के सचिव कैलाश पोद्दार, संयुक्त सचिव अवध किशोर सिंह, विनोद बाबू, ललन पांडे, संजय मिश्रा, अजय प्रसाद, सुशील कुमार पोद्दार, सत्येंद्र ठाकुर सहित दर्जनों की संख्या में भक्त एवं समिति के अधिकारी और सदस्य मौजूद रहे.

संतान की लंबी उम्र के लिए बड़े धूमधाम एवं विधि विधान के साथ मनाया गया जितिया पर्व

संतान की लंबी उम्र के लिए बड़े धूमधाम एवं विधि विधान के साथ मनाया गया जितिया पर्व

सरायकेला-खरसावां

संतान की लंबी आयु एवं अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए सरायकेला खरसावां जिला के विभिन्न स्थानों पर महिलाओं ने बड़े ही विधि विधान के साथ जीवित्पुत्रिका का व्रत किया गया। हिंदू धर्म में जितिया व्रत जिसे जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जाना जाता है विशेष रूप से माता द्वारा अपनी संतान की लंबी उम्र अच्छे स्वास्थ्य और अच्छे कल्याण के लिए किया जाता है। यह व्रत आश्विन माह की कृष्ण पक्ष अष्टमी को रखा जाता है। यह व्रत संतान की सुरक्षा और समृद्धि के लिए निर्जला उपवास के रूप में किया जाता है जिसमें महिलाएं पूरे दिन बिना अन जल ग्रहण किए उपवास करती है। जितिया व्रत का धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से अत्यधिक महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से संतान की आयु लंबी होती है और वह जीवन में स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त करते हैं। इसके अलावा इस व्रत के पुण्य प्रभाव से वह महिलाएं भी संतान प्राप्त करती है जिनकी संतान की कामना होती है। संतान की सुरक्षा और उनके बेहतर भविष्य के लिए जितिया व्रत एक महत्वपूर्ण साधन माना जाता है। जितिया व्रत की परंपरा मुख्य रूप से बिहार उत्तर प्रदेश झारखंड और मिथिला क्षेत्र में अधिक प्रचलित है इस व्रत का आरंभ नहाए खाए से होता है जिसमें महिलाएं व्रत से एक दिन पहले पवित्र स्नान करके पूजा पाठ करती हैं और फिर सात्विक भोजन ग्रहण करती है। इस दिन प्याज लहसुन और मांसाहार का सेवन वर्जित होता है। अगले दिन महिलाएं सरगी उटांगन करती है यानी सुबह भोजन ग्रहण करती है ताकि वह पूरे दिन निर्जला व्रत कर सके।

वहीं अष्टमी तिथि को वह निर्जला व्रत रखती है और अष्टमी समाप्त होने के बाद पारण करती हैं। जितिया व्रत का पारण अष्टमी तिथि समाप्त होने के बाद किया जाता है। पारण करते समय महिलाएं सबसे पहले जल ग्रहण करती है और फिर अन्य सात्विक भोजन ग्रहण करती है।

गिरिडीह सांसद एवं एनडीए प्रत्याशी चंद्र प्रकाश चौधरी परिवार संग देवघर में की पूजा अर्चना

गिरिडीह सांसद एवं एनडीए प्रत्याशी चंद्र प्रकाश चौधरी परिवार संग देवघर में की पूजा अर्चना

झारखण्ड/देवघर

चुनाव प्रचार के दौरान गिरिडीह सांसद एवं एनडीए प्रत्याशी चंद्र प्रकाश चौधरी धर्म पत्नी श्रीमती सुनीता चौधरी समाजसेवी पीयूष चौधरी ने देवघर में बाबा बैद्यनाथ एवं बासुकीनाथ में फौजदार बाबा के दर्शन एवं पूजन किया इस अवसर पर उन्होंने झारखंड के विकास की बाबा से कामना की साथ में तिवारी महतो अमृत मुंडा सहित दर्जनों लोग शामिल थे

बोकारो:-खाद्यान्न व्यापारि द्वारिका प्रसाद बंसल के आवास पर श्री श्री श्याम बाबा का दरबार लगा

बोकारो:-खाद्यान्न व्यापारि द्वारिका प्रसाद बंसल के आवास पर श्री श्री श्याम बाबा का दरबार लगा

बोकारो-बोरमो

( झारखंड बेरमो बोकारो से प्रकाश की रिपोर्ट )

दिनांक 20 मार्च बुधवार को बेरमो के फुसरो बाजार में खाद्यान्न व्यापारि द्वारिका प्रसाद बंसल के आवास पर श्री श्री श्याम बाबा का दरबार लगा दरबार में पूजा अर्चना की गई एवं जागरण का आयोजन किया गया

जागरण में धनबाद कोलकाता आदि जगहों से कीर्तन मंडली शामिल हुए जिसमें बिहार के कटिहार से नीरज सिंह राजपूत ने एक से बढ़कर एक भजन प्रस्तुत किया और रात भर लोगों ने भजन का आनंद लिया जागरण में महाप्रसाद का भी आयोजन किया गया था जागरण में पूरे भक्तिमय माहौल हो गया

इस कार्यक्रम में खासकर महिलाएं एवं युवा अति उत्साहित दिखे मौके पर सुरेश बंसल बंसल बीकू बंसल राजकुमार बंसल सहित परिवार के सारे लोग सक्रिय रहे जागरण में बेरमो थाना के अनूप सिंह दिलीप मित्तल स्थानीय व्यापारी मनोज कुमार अग्रवाल मीनू अग्रवाल बंटी मित्तल पंकज मित्तल सुरेंद्र गोयल रविंद्र सिंह दीपक अग्रवाल सहित भारी संख्या में लोग उपस्थित हुए।

पांच तत्वों से मिलकर बना है पंचशुल

पांच तत्वों से मिलकर बना है पंचशुल

देवघर

देवघर बाबा बैद्यनाथ का मंदिर एक ज्योतिर्लिंग है यह विश्व का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां पर त्रिशूल की जगह पंचशूल होता है यही पंचशूल रावण के लंका के महल के ऊपर भी राज्य की सुरक्षा के लिए लगाया गया था देवघर बाबा मंदिर के परिसर में स्थित 22 मंदिर में पंचशूल लगा है आज शिवरात्रि के दो दिन पहले भोलेनाथ के मंदिर के शीर्ष के ऊपर स्थित पंचशूल और माता पार्वती के मंदिर के ऊपर स्थित पंचशूल को उतारा गया और दोनों का मिलान कराया गया इस पंचशूल को स्पर्श करने के लिए भारी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ी जिसके लिए प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी मौके पर देवघर डीसी विशाल सागर और पुलिस पदाधिकारी मौजूद रहे दोनों पंचशूल को उतारने के बाद इस सरदार पंडा के पास ले जाया गया जहां पर इसका स्पर्श कराया गया कल यानी शिवरात्रि के 1 दिन पहले विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करने के बाद इसे पुन: मंदिर के शीर्ष पर स्थापित कर दिया जाएगा।

नीलकंठ दिवस के अवसर पर 3 घंटे का अखंड कीर्तन एवं नारायण सेवा कराया गया।

नीलकंठ दिवस के अवसर पर 3 घंटे का अखंड कीर्तन एवं नारायण सेवा कराया गया।

जमशेदपुर

जमशेदपुर बिरसा नगर स्थित आनंद मार्ग शिशु सदन में नीलकंठ दिवस के अवसर पर 3 घंटे का अखंड कीर्तन एवं नारायण सेवा कराया गया।आनंद मार्ग के संस्थापक श्री श्री आनंदमूर्ति जी को पटना के बांकीपुर जेल 12 फरवरी 1973 इंदिरा सरकार द्वारा साजिश के तहत दवा के नाम पर विष का प्रयोग किया गया। उसके बाद श्री श्री आनंदमूर्ति जी ने मानवता की रक्षा के लिए विषपान किया और नीलकंठ कहलाए। उन्होंने इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के तौर पर नीलकंठ दिवस मनाने का संदेश दिया। 12 फरवरी को आनंद मार्गी पूरे विश्व में नीलकंठ दिवस मनाते हैं।

इस अवसर पर अबधुतिका आनंद अतिशा आचार्या ने कहा कि आनंद मार्ग आत्म मोक्षरथम जगत हिताय च के सिद्धांत पर आध्यात्मिक आधार बनाकर व्यक्ति एवं समाज को विकास के पथ पर आगे की ओर ले जाने वाला एक ऐसा संपूर्ण जीवन पद्धति है जो मानव जीवन के शारीरिक मानसिक आध्यात्मिक सामाजिक आर्थिक सभ्यता एवं संस्कृति आदि सारे विषयों का विषद व्याख्या करते हुए मानवीय विकास को व्यक्तिगत एवं समष्टिगत प्रगति में आने वाले सभी समस्याओं का वैज्ञानिक एवं पारदर्शी समाधान का रास्ता बताता है जिससे समाज के सभी वर्गों के लोगों का भौतिक मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास हो सके।

विवेक विद्यालय में बारहवीं के विद्यार्थियों के लिए आशीर्वचन समारोह का आयोजन किया गया

विवेक विद्यालय में बारहवीं के विद्यार्थियों के लिए आशीर्वचन समारोह का आयोजन किया गया

जमशेदपुर

( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )

दिनांक 06.02.2023 को छोटा गोविंदपुर स्थित विवेक विद्यालय में बारहवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं के लिए आशीर्वाद समारोह एवं भावभीनी विदाई का भव्य आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में सर्वप्रथम पूजा-अर्चना के साथ बारहवीं के सभी छात्र-छात्राओं एवं उनके अभिभावकों ने हवन कार्यक्रम में भाग लिया संपूर्ण कार्यक्रम हमारी भारतीय संस्कृति एवं मूल धरोहर पर आधारित था। इसके बाद कार्यक्रम में ग्यारहवीं के छात्र-छात्राओं ने मंत्रमुग्ध कर देने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत काया। प्राचार्य श्री अवधेश सिंह सहित सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं और अभिभावकों ने पारंपरिक ढंग से अपने आशीर्वचनों के साथ सभी छात्र-छात्राओं के उज्जवल भविष्य की कामना की। पुरस्कार वितरण में ओवरऑल परफॉर्मेंस के लिए बालिका वर्ग में आयुषी रानी और बालक वर्ग में किशन दास, पाठसहगामी क्रियाओं में बेहतर प्रदर्शन के लिए श्रद्धा दास और प्रियजीत घोष को सम्मानित किया गया। विज्ञान वर्ग में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए अंकित कुमार और खुशबू कुमारी, वाणिज्य वर्ग में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए स्वेता कुमारी को सम्मानित किया गया। कला वर्ग में श्रेया सुमन को पुरस्कृत किया गया। इसके अतिरिक्त विभिन्न वर्गों में विषयवार उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया। इस समारोह में बारहवीं कक्षा के सभी छात्र एवं छात्राएँ विद्यालय के प्रति अपनी भावनात्मक श्रद्धा एवं आदर को अपने वक्तव्य के द्वारा व्यक्त किया तथा विद्यालय एवं विद्यालय के शिक्षक तथा शिक्षिकाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम का समापन समूह भजन द्वारा किया गया।

राममय हुआ आदित्यगार्डेन,,जय श्री राम के नारे से गूंज उठा पुरा का क्षेत्र

राममय हुआ आदित्यगार्डेन,,जय श्री राम के नारे से गूंज उठा पुरा का क्षेत्र

सरायकेला/आदित्यपुर

( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट)

राम जन्मभूमि स्थल पर नवनिर्मित मार्यादा पुरूषोत्तम श्री रामचंद्र भगबान जी के राम मंदिर का उद्घाटन एवं रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव 22.01.2024 को आदित्यगार्डेन में आयोजन किया गया।यह दिब्य,अलौकिक पल कीअनुभूति हेतु आदित्यगार्डन के मन्दिर परिसर सुन्दर काण्ड पाठ एबं रात्रि को भजन संध्या का आयोजन किया गया एबं प्रभू श्री रामचंद्र जी की जयकारा लगाते हुए गाजा बाजा के साथ जुलुस निकाला गाया।आदित्य गार्डेन के मन्दिर को दीपो एबं लाईट से सजाया गया।

साथ ही साथ पूरे आदित्य गार्डेन को भी भगबा रंग के झंडा, भगबान श्री राम चन्द्र के बाल-रूप,दिब्य दरबार एवं श्री राम के अन्य स्वरुप से,लाईट से सजाया गया और चिर प्रतिक्षित काल को यादगार बनाने एबं खुशियाँ का इजहार करते हुए लोगो ने पटाखे का भी आनन्द लिये।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शिव मन्दिर परिसर में
पूजा-अर्चना,सुन्दर काण्ड पाठ,हबन के उपरान्त प्रसाद एबं भोग का बितरण सभी लोगो किया गया। रघुकल के स्वामी एबं त्रेता युग राजा गुण गान हेतु आदित्य गार्डेन के क्लब हाउस मे भजन-संध्या के रंगा-रंग कार्यक्रम किया गया ।साथ ही साथ रात्रि सुरुचि भोज का भी आयोजन किया गया।जिसमें काफी संख्या में लोगो ने भाग लिया एबं श्राद्धालुगण इस दिब्य एब आलौकिक पल की परम आनंद का अनुभुति से आनंदित हुए ।

महोत्सब में अध्यक्ष विजय सिंह राणा,सचिब अनील कुमार,निलाम वार्ष्णे उपाध्यक्ष,राकेश सिंह,मुन्ना तिवारी,मनीष पान्डे,आर डी एस मिश्रा,धनेश्वेर सिन्ह,
बि साह, समीर सिंह,जसबीर कौर,अलका झा,रीता कुमारी,मुद्रा जी,सन्तोष खेतान जी,सन्जीब मिश्रा,सुदीप मिश्रा, किशोर जी,प्रकाश झा जी, काफी संख्या में लोग उपस्तिथ हुए।

इस महोत्सब को सफल बनाने में बिशेष रूप से सहयोग करने बाले सभी गणमान्य एबं मुख्य अतिथि गण को अंग बस्त्र से सम्मानित किया गया।

अनील कुमार
सचिब, आदित्य गार्डेन प्रबंध कमिटि

अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा के बीच मुसाबनी के मंदिरों में उमड़ी भीड़

अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा के बीच मुसाबनी के मंदिरों में उमड़ी भीड़

पुर्वी सिंहभूम/मुसाबनी

( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )

अयोध्या में राम मंदिर को लेकर बहुप्रतीक्षित प्राण प्रतिष्ठा समारोह सोमवार को विधि विधान के साथ संपन्न हो गया। वहीं दूसरी तरफ मुसाबनी के मंदिरों में भारी संख्या में लोग प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही पूजा अर्चना करने को पहुंचने लगे थे। शहर से गांव तक के मंदिरों में भारी संख्या में लोगों की भीड़ देखी जुटी रही।

मुसाबनी 3 राम मंदिर, शीतला मन्दिर, श्री जगन्नाथ मंदिर, हनुमान मंदिर, गायत्री मन्दिर, शिव मंदिर, काली मंदिर सहित मुसाबनी के लोकप्रिय विश्वनाथ मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। मंदिरों सहित लोगों ने अपने-अपने घरों में दीपक जलाकर रामलाल के प्राण प्रतिष्ठा का जश्न मनाया विभिन्न मंदिर कर्मियों द्वारा आकर्षक आतिशबाजी कर प्राण प्रतिष्ठा का उत्सव मनाया जा रहा है। श्री राम लला के प्राण प्रतिष्ठा को लेकर पूरे मुसाबनी शहर में दीपावली का माहौल है। लोग अपने-अपने घरों में अपने-अपने अंदाज से इस धार्मिक अनुष्ठान का आनंद ले रहे हैं।

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दुनियां ने देखा भारत का आध्यात्मिक भाव-प्रभु श्री राम को 500 वर्षों बाद मिली मंदिर की छांव

दुनियां ने देखा भारत का आध्यात्मिक भाव-प्रभु श्री राम को 500 वर्षों बाद मिली मंदिर की छांव

गोंदिया

प्रभु श्री राम की वनवास से अयोध्या वापसी-वक्त ने अपने आप को दोहराया

प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा से प्रभु के जीवंत स्वरूप में आने के आभास से भक्तगण सराबोर हुए – एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया

वैश्विक स्तरपर 22 जनवरी 2024 सोमवार के दिन का इंतजार करते भारत ही नहीं पूरी दुनियां के भक्तों की आंखें तरस गई थी कि कब प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा मंदिर में सुखकारी रूप से होवे और हम प्रभु के जीवंत स्वरूप का दर्शन करें। बता दें कि हमारे बड़े बुजुर्गों ने ऐसा बताया है कि जब किसी भी व्यक्ति गुरु प्रभु महात्मा महामानव महापुरुष इत्यादि के स्वरूप में पूर्ण रूपेण पद्धति प्रक्रिया व धार्मिक अनुष्ठान प्राण प्रतिष्ठा की जाती है तो इसका मतलब यह माना गया है कि, उसमें उस प्राणी में प्राणों का संचार किया गया है, याने दूसरे शब्दों में अनुष्ठान कर उस स्वरूप को जीवित कर दिया जाता है जो अदृश्य रूप में होता है,मानवीय आंखों से दिख नहीं पता परंतु भक्त अगर हृदय की आंखों से देखे तो हाजरा हजूर प्रभु जरूर नजर आएंगे, बस इसी संज्ञान में प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान कर उनमें प्राणों का संचार किया गया है अब भक्तों के देखने का नजरिया है, अगर हृदय की आंखों से हम देखेंगे तो हम हाजरा हजूर प्रभु श्री राम के जीवंत दर्शन होंगे नहीं तो फिर वही कहावत कि,मानो तो मैं गंगा मां हूं ना मानो तो बहता पानी। अगर हृदय में विश्वास है तो हमें पत्थर में भी भगवान दिख जाते हैं, यदि हृदय में आस्थापूर्ण विश्वास नहीं है तो जीवंत प्रभु में भी पत्थर ही नजर आएगा ऐसी चर्चा मेरे दादाजी अक्सर अनेक मौका पर किया करते थे। जो बातें बचपनकी मैने सुनी वह आज जीवंत रूप में देख रहा हूं।पिछले कई दिनों से जिस तरह जोरदार भावपूर्ण तैयारीयों का नजारा हम मीडिया में देख रहे हैं, घर-घर व गांव, मेट्रो सिटी शहर को सजा हुआ, मैंने देखा तो रामायण में लिखी प्रभु श्री राम की वनवास से वापसी का मंजर मैं जीवंत देखने लगा, ऐसा लगा शायद हम हजारों वर्ष पूर्व की स्थिति त्रेतायुग में आ गए हैं। तब प्रभु श्री राम की 14 वर्षों के वनवास से वापसी हुई थी और संपूर्ण अयोध्या में दीपावली से भी बढ़कर माहौल था। हर व्यक्ति खुश था बस!! वही मंजर 22 जनवरी 2024 को देखा जब प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा हुई तो विश्व का हर राम भक्त खुशी से सराबोर होकर झूम उठा, मानो बस!! अब हमें प्रभु श्री राम मिल गए हैं, अब और कुछ नहींचाहिए। प्रभु दर्शन से ही हमारी सारी इच्छाएं पूर्ण हो गई है,यहभारतीयों का भाव पूरी दुनियां ने देख के कहा प्रभु श्री राम की वास्तव में वनवास से वापसी हुई है, जो 500 साल वनवास था जिसे वक्त को फिर दोहरा दिया है, चूंकि प्राण प्रतिष्ठा से पूरा विश्व सराबोर हुआ है, इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा से प्रभु के जीवंत स्वरूप में आने के आभास से भक्तगण सराबोर हुए हैं।

साथियों बात अगर हम 22 जनवरी 2024 को जोरदार ढंग से भावपूर्ण मन से मनाने की करें तो, प्राण प्रतिष्ठा में तैयारी ऐसी थी कि मानो असल दीपावली अबकी बार मनाई जाएगी। गली-चौराहों से लेकर टैक्सी, पेट्रोल पंपों और यहां तक कि घरों में भी राम धुन बज रहा है। पूजित अक्षत व निमंत्रण पत्र घर-घर पहुंचाने का असर ऐसा हो रहा है कि हर कोई खुद को इसआयोजन से सीधा जुड़ा हुआ महसूस करने लगा है। बृहस्पतिवार को शहर में प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व निकाली गई शोभा यात्रा में भारी संख्या में लोग शामिल हुए थे। भगवान राम की मनमोहक झांकी की अगुवाई में निकली यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के चलते करीब एक किमी तक केवल भगवामय राम भक्तों की टोली ही नजर आ रही थी। अयोध्या धाम में 22 जनवरी, 2024 को आयोजित श्री राम मंदिर के प्रतिष्ठापन समारोह के सुचारू और सफल संचालन के लिए अत्यधिक सावधानी के साथ व्यवस्था की गई थीं। पीएम निर्धारित अनुष्ठानों के अनुसार प्राण प्रतिष्ठा किए। इस दिनकरीब 8, हज़ार से अधिक अतिथि मंदिर मेंआए, इसके बाद 23 जनवरी से लाखों भक्त आएंगे।

साथियों बात अगर हम माता सीता के मायके जनकपुर मिथिला गांव नेपाल के खुशियों में सराबोर होने की करें तो, देवी सीता का मायका खुशी और उत्साह से भरा हुआ है। नेपाल में जनकपुरधाम में धूमधाम और उल्लास के साथ कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। जनकपुर निवासियों का कहना है कि प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन हमारे लिए भी खुशी की लहर लेकर आया है। हमने उस दिन घटनाओं की एक श्रृंखला की योजना बनाई थीं, जो सुबह शुरू हुई और दिन के अंत तक चली। सिंदूर के चूर्ण से रंगोली और फूलों से भगवान राम की तस्वीर बनाए। हम अपने घर में दीपावली भी मनाए। अयोध्या में मंदिर निर्माण से हम सभी खुश हैं। पूरा जनकपुर इससे खुश है। दीपावली मनाने के लिए तैयार लोग जनकपुर के एक सजन ने कहा, मैं व्यक्तिगत रूप से इससे काफी खुश और उत्साहित हूं।मैंनें 22 जनवरी को दीपावली मनाया और मंदिर में दीपक भी जलाए। मैं अपने दोस्तों और अन्य लोगों से 22 जनवरी को दीपावली मनाने के लिए कह कहा था। बता दें, जनकपुर धाम एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है यह भगवान राम की पत्नी देवी सीता के जन्मस्थान के रूप में प्रसिद्ध है। धार्मिक ग्रन्थों और पौराणिक कथाओं के अनुसार यह स्थान राजा जनक जो की माता सीता के पिता थे उनके राज्य मिथिला कीराजधानी हुआ करता था। यह वहीं स्थान है जहां से माता सीता प्रकट हुई थीं। इसी जगह पर जब राजा जनक खेत में हल चला रहे थे, तब उन्हें धरती से सोने का एक सुंदर संदूक या कलश मिला जिसमें देवी सीता थी। देवी सीता के मायके में उत्सव के बीच, शहर भर के लाउड स्पीकर जय श्री राम के नारे के साथ-साथ राम लला को समर्पित गीतों की सार्वजनिक स्क्रीनिंग के साथ गूंज रहे हैं। जनकपुर में रेलवे स्टेशन के बगल में स्थित महाबीर मंदिर मेंशनिवार को अस्ताजाम शुरू हुआ, जिसमें चौबीसों घंटे राम भजनों का जाप किया गया। भक्तों ने राम के नारे लिखे स्कार्फ को पहना। जनकपुर में अस्तजाम के भक्तों और आयोजकों में से एक कमल हाथी ने कहा, भगवान हनुमान के बिना, भगवान राम कहीं नहीं जाएंगे, इसलिए हमने अष्टजाम का तीन दिवसीय कार्यक्रम शुरू किया है, जो चौबीसों घंटे चलता है। 22 जनवरी को हम हनुमान आराधना किए। इस दौरान 12 बार हनुमान चालीसा का पाठ किए और बाद में शाम को हम तेल से भरे मिट्टी के दीपक जलाएंगे।

साथियों बात अगर हम 23 जनवरी 2024 से आम भक्तों के अयोध्या यात्रा के लिए गाइडेंस की करें तो, बता दें किदर्शनार्थियों के लिए अयोध्या में पूरी व्यवस्था की गई है। 22 जनवरी के बाद आने वाले दिनों में दर्शनार्थियों के लिए व्यवस्थाएं हैं। अगर आप लखनऊ-गोरखपुर हाइवे के रास्ते अयोध्या में प्रवेश करेंगे तो सरयू पुल से पहले आपको जो मार्ग मिलेगा, उसका नाम धर्मपथ है। इसी रास्ते से अयोध्या में एंट्री होगी। इसके बाद लगभग 2 किलोमीटर सफर करने पर लता मंगेशकर चौक मिलेगा, जिसे नया घाट भी कहते हैं. इसके ठीक सामने राम की पैड़ी है और इसके किनारे मंदिरों की लंबी खूबसूरत श्रृंखला है।राम की पैड़ी के किनारे ही अति प्राचीन और प्रतिष्ठित मंदिर नागेश्वर नाथ भी है। अयोध्या पहुंचने वाले लोग यहां भोलेनाथ के दर्शन जरूर करते हैं। सरयू की जलधारा राम की पैड़ी से होकर वापस सरयू में मिल जाती है. इसके किनारे सरयू का तट दिखाई देगा, जहां आप नौकायन और मोटर बोट का आनंद उठा सकते हैं। राम की पैड़ी का लुत्फ लेने के बाद जब आप वापस लता मंगेशकर चौक पहुंचेंगे तो अयोध्या की राजकुमारी का पार्क देख सकते हैं, जिन्हें दक्षिण कोरिया में रानी के नाम से जाना जाता है। राजकुमारी का पार्क इसी नाम से है। दक्षिण कोरिया में उनकी शादी कर्क वंश के राजकुमार से हुई थी। आज दक्षिण कोरिया की बड़ी आबादी इसी वंश की है। हनुमानगढ़ी के बगल में ही दशरथ महल और कनक भवन मंदिर है। कनक भवन मंदिर के बारे में मान्यता है कि माता सीता को कैकई ने मुंह दिखाई में यह सोने का महल दिया था। श्री राम जन्मभूमि मंदिर जाने के लिए दशरथ महल के पास से भी रास्ता है और हनुमानगढ़ी के रास्ते बाहर निकलकर राम पथ के जरिए भी आप श्री राम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य मार्ग पर पहुंच सकते हैं। जन्मभूमि पथ से प्रवेश करते ही बाएं तरफ आपको ट्रस्ट सुविधा केंद्र मिलेगा, जहां सामान रखने के लिए मुफ्त लॉकर , स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। अगर किसी को चलने में असुविधा है तो सहायक के साथ उसे पहुंचाने की भी व्यवस्था है। यहीं पर मंदिर में दोपहर और सायंकाल आरती का पास भी मिल जाता है।
साथियों बात अगर हम दूरदर्शन मीडिया से सीधा प्रसारण करने की करें तो, सीधा प्रसारण समारोह के सीधे प्रसारण के लिए व्यापक व्यवस्था की गई । दूरदर्शन पूरे कार्यक्रम का डीडी न्यूज और डीडी नेशनल चैनलों पर 4के गुणवत्ता में सीधा प्रसारण किया। 23 जनवरी, 2024 को दूरदर्शन आरती और जनता के लिए श्री राम मंदिर खुलने का सीधा प्रसारण करेगा। दूरदर्शन 22.01.24 को एएनआई टीवी और पीटीआई वीडियो के साथ अयोध्या में कार्यक्रम की क्लीन फ़ीड साझा किया। सभी टीवी चैनल जो एजेंसी के ग्राहक हैं वे वहां से फ़ीड प्राप्त कर सकते हैं।अन्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रसारकों के लिए, क्लीन फ़ीड की कुंजी के साथ एक यूट्यूब लिंक तैयार किया गया है। यह लिंक संबंधित प्रसारकों के अनुरोध पर उनके साथ साझा किया जाएगा। यूट्यूब लिंक प्राप्त करने के लिए, घरेलू प्रसारक पत्र सूचना कार्यालय के पास अपना अनुरोध भेज सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय टीवी चैनलों को अपना अनुरोध सीधे प्रसार भारती से करना होगा। संपर्क विवरण पीआईबी मीडिया एडवाइजरी में उपलब्ध हैं, जिसे यहां देखा जा सकता है।यदि क्लीन फ़ीड की आवश्यकता नहीं है, तो चैनलों के पास डीडी न्यूज़ से पैचिंग का भी विकल्प होगा। इस मामले में सौजन्य : दूरदर्शन दिया जा सकता है।

साथियों बात अगर हम दिए सहित खुशियां मनाने की करें तो, 22 जनवरी को अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के बाद शाम को पूरा शहर 10 लाख दीयों की चमक से जगमगाएगा। सरकार की अपील पर घरों, दुकानों, धार्मिक स्थलों से है। दीपों से रौशन होंगे निजी संस्थान सरकार ने पूरे प्रदेश से इस ऐतिहासिक अवसर को उत्सव के रूप में मनाने की अपील की है।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि दुनियां ने देखा भारत का आध्यात्मिक भाव-प्रभु श्री राम को 500 वर्षों बाद मिली मंदिर की छांव।प्रभु श्री राम की वनवास से अयोध्या वापसी-वक्त ने अपने आप को दोहराया।प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा से प्रभु के जीवंत स्वरूप में आने के आभास से भक्तगण सराबोर हुए।

संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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