पत्रकार हितों पर चोट नहीं सहेगा देश
चाटुकार पत्रकारों से रहे सावधान, चाटुकार पत्रकारों के झांसी में ना आए।
सरायकेला/इचागढ़
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा 10 जून से 15 अक्टूबर तक सभी नदियों और घाटों से बालू उठाव पर रोक लगाई गई है, ताकि बरसात के मौसम में पर्यावरण को हो रहे नुकसान को रोका जा सके। बावजूद इसके ईचागढ़ प्रखंड के जार्गोडीह घाट, तिरुलडीह घाट समेत कई अन्य स्थानों से अवैध रूप से बालू का उठाव लगातार जारी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की निष्क्रियता के कारण बालू माफिया बेखौफ होकर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। रात के अंधेरे में ट्रैक्टरों और हाइवा से बालू ढोया जा रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि सरकारी राजस्व की भी हानि हो रही है।
आपको बताते चलें कि केवल झारखंड क्राईम रिपोर्टर अखबार ही नहीं बल्कि जिले के प्रमुख अखबारों ने भी ( दैनिक भास्कर ) इस मुद्दे को जनहित में उजागर करने का कार्य किया। इसके अलावा 13 जून 2025 को कुकड़ू प्रखंड में आयोजित जनता दरबार कार्यक्रम में भी इस गंभीर मुद्दे को जनहित में उठाया गया जहां पर इचागढ़ की विधायिका सविता महतो एवं सरायकेला खरसावां के उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह एवं कई जनप्रतिनिधि साथ ही सैकड़ो की संख्या में सरायकेला-खरसावां जिले की जनता कार्यक्रम में मौजूद थी। इन सभी की मौजूदगी में अवैध बालू खनन को लेकर यक्ष प्रश्न जनहित में उठाया गया जिसमें विधायक एवं उपायुक्त महोदय ने जांचोउपरांत उचित कार्यवाही करने का आश्वासन दिया।

वहीं आपको बताते चले की 11 जून 2025 को झारखंड क्राइम रिपोर्टर अखबार द्वारा जनहित में उठाए गए मुद्दे पर जिले के खनन पदाधिकारी ने चाटुकार पत्रकारों के मार्गदर्शन पर वकील द्वारा लीगल नोटिस भेज कर पत्रकार को डराने धमकाने एवं उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया जबकि खनन पदाधिकारी के दामन में ही 72 छेद है इसके बावजूद भी पदाधिकारी ने पत्रकार को वकील के माध्यम से लीगल नोटिस भेज कर डराने धमकाने का कार्य किया एवं पत्रकार के दमन को धूमिल करने का साथ ही समाज में पत्रकार की छवि को खराब करने का कार्य किया है।

अखबार के माध्यम से पत्रकार द्वारा जनता को बालू के अवैध कारोबार से अवगत कराने पर एवं राज्य के मुख्यमंत्री एवं झारखंड हाई कोर्ट को जिले में हो रहे बालू के अवैध कारोबार से अवगत कराने पर विभाग द्वारा पत्रकार को वकील के माध्यम से लीगल नोटिस भेज कर प्रताड़ित किया जाता है, एवं डरा धमकाकर पत्रकार की आवाज को दबाया जाता है और इसके साथ ही राजस्व का भी काफी नुकसान किया जाता है।
पत्रकारिता समझौते की मोहताज नहीं रही यह एक संघर्ष का बीज बन चुका है चटूकारो को बेनकाब करेंगे सत्ता को जगाएंगे और पत्रकारों की हक के लिए हर प्लेटफार्म पर लड़ाई लड़ेंगे,, जहां यूनियनों के नाम पर पत्रकारों की बोली लगती है। जो यूनियन के नाम पर कुछ पत्रकार जो सत्ता के चहीते हैं बाकी पत्रकारों को बेचने का काम कर रहे हैं यह वो लोग हैं जो सरकार से पैसा पद प्रमोशन लेकर पत्रकारों के अधिकारों की बोली लगाते हैं ऐसे चाटुकार अब पत्रकार का चेहरा नहीं बन सकते अब उन्हें बेनकाब करना होगा

पत्रकार हित की हुंकार अब डरेंगे नहीं
पत्रकार अब झुकेंगे नहीं सत्ता अगर नहीं सुधरी तो एक-एक सवाल पत्थर बनकर गिरेगी और सत्ता की दीवारें हिला देगी, आंदोलन होगा
झारखंड क्राईम रिपोर्टर समूह की आवाज अब सिर्फ खबर नहीं एक क्रांति का ऐलान है आब पत्रकारिता को झुकाना आसान नहीं अब ना कोई चुप रहेगा ना कोई बिकेगा अब सवाल पूछे जाएंगे और जवाब जरूरी होंगे।
अबकी बार अगर सरकार ने पत्रकारों को दबाने की कोशिश की तो प्रदेश स्तरीय आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
अगर सड़कों पर उतरना पड़े तो झारखंड क्राईम रिपोर्टर पीछे नहीं हटेगी सरकार को पता है किस पत्रकार के घर में कितना आंटा बचा है इस चर्चा में पत्रकारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति का भी कड़वा सच सामने आएगा
सरकार को सब पता है कि पत्रकार के घर में कितने दिनों का राशन बच्चा है। कौन पत्रकार मोटरसाइकिल में पेट्रोल नहीं डलवा पा रहा है वे इसी कमजोरी का फायदा उठाकर पत्रकारों की रीढ़ तोड़ना चाहते हैं।
पत्रकारों को जानबूझकर अनदेखी और डर के जाल में फसाया जा रहा है ताकि वह सत्ता के खिलाफ कुछ बोल ना सके। लेकिन पत्रकार समझौते की मोहताज नहीं सच्च का साथी है।




















