कुकड़ू में हाथियों का कहर, एक दर्जन हाथियों का झुंड सीरूम जंगल में डाला डेरा
सरायकेला/ईचागढ़
सरायकेला-खरसावां जिला कुकड़ू प्रखंड क्षेत्र के सीरूम जंगल में एक दर्जन हाथियों ने डेरा जमाए हुए हैं। अलग-अलग झुंड में बंटकर हाथियों का झुंड शाम ढलते ही गांवों के खेतों की ओर कुच कर जाते हैं और खड़ी धान की फसलों को अपना निवाला बनाते हैं, जिससे तैयार धानों को बचाने का किसान जद्दोजहद में रात गुजारने को मजबुर है। सुबह को भी सीरूम तिरूलडीह सड़क पर एक हाथी को बिचरण करते देखे गए। कुछ देर के लिए सड़क पर आवागमन भी बाधित रहा।
ग्रामीणों का कहना है कि तैयार धानों को हाथियों का झुंड निवाला बना रहे हैं। दिन को भी सड़क पर आ जाते हैं, जिससे भय का माहौल उत्पन्न हो गया है। ग्रामीणों का वन विभाग से मांग है कि हाथियों को सुरक्षित स्थानों पर भगाया जाय और ग्रामीणों को राहत दिलाया जाय । खेतों में धान तैयार होने के बाद लोग हाथियों से खासे परेशान हैं। हाथियों से परेशान किसान वन विभाग के उदासीन रवैया से आक्रोशित हैं।
ईचागढ़ में प्रखंड स्तरीय कुकिंग प्रतियोगिता का हुआ आयोजन।
सरायकेला/ईचागढ़
(मालखान माहतो)
शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार बीआरसी ईचागढ़ में शनिवार को प्रखंड स्तरीय कुकिंग कंपटीशन का आयोजन किया गया। जिसमें प्रखंड के 6 संकुल के रसोईया एवं सहायिका भाग लिए।जिसमें प्रथम स्थान तथा द्वितीय स्थान संकुल चिपड़ी को मिला। चिपड़ी संकुल अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय बारुणा के गीता देवी को प्रथम स्थान तथा प्राथमिक विद्यालय रुगरी बाजार के समना मिश्रा को द्वितीय स्थान मिला। विजेता और उपविजेता रसोईया को प्रमाण पत्र दे कर सम्मानित किया गया।
मौके पर प्रखंड विकास पदाधिकारी सह प्रभारी सीडीपीओ एकता वर्मा, बीपीएम चंदन कुमार सिंह, शिक्षक संतोष कुमार महतो,हेमंत कुमार महतो,कृष्णा दास महतो,सीआरपी शक्ति पद महतो, कम्प्यूटर ऑपरेटर शाहिद अंसारी आदि उपस्थित थे।
नृपराज राजकीय जमा दो उच्च विद्यालय सरायकेला में डिजिटल लिटरेसी पर प्रशिक्षण आयोजित
सरायकेला
(पारस कुमार होता)
नृपराज राजकीय जमा दो उच्च विद्यालय सरायकेला में टाटा स्टील फाउंडेशन के सौजन्य से डिजिटल लिटरेसी प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। जिसमें कक्षा दसवीं, ग्यारहवीं एवं बारहवीं के 250 + छात्र छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उक्त शिविर में टाटा स्टील के प्रशिक्षक आर्यन सर अमन सर मुकुंद महतो जयंती महतो ने उपस्थित होकर किशोर किशोरियों के बीच डिजिटल लिटरेसी विषय पर विभिन्न प्रसंग पर विस्तार पूर्वक जानकारी दी। जिसमें वर्तमान युग में डिजिटल के महत्व एवं डिजिटल बनने की प्रक्रिया, उनका उपयोग हम कैसे बेहतर ढंग से कर सकते हैं।
टाटा स्टील फाउंडेशन के प्रशिक्षकों ने काफी सरल व सुगमतापूर्वक प्रोजेक्टर के माध्यम से बच्चों को डिजिटल विषयों पर अपना फोकस बनाने पर बल दिया। वर्तमान समय में स्मार्टफोन का सही उपयोग करना। स्मार्टफोन के माध्यम से घर बैठे विभिन्न तरह के कार्य जैसे राशन कार्ड में नाम जोड़ना- हटाना ,राशन कार्ड बनवाना, आयुष्मान कार्ड, आधार कार्ड , प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना समेत सभी तरह के ऑनलाइन कार्यों को कैसे कर सकते हैं इसकी जानकारी से अवगत कराया ।
कार्यशाला में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने काफी रुझान देखने को मिला। कार्यक्रम के समापन में विद्यालय की ओर से बच्चों के लिए जलपान की व्यवस्था की गई थी कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय परिवार के सभी शिक्षक शिक्षिकाओं ने अपनी अहम भूमिका अदा किए।
बजाज फाइनेंस ने फेस्टिव लोन वॉल्युम में 27% की वृद्धि दर्ज की।
वित्तीय समावेशन को मिला बढ़ावा, बजाज फाइनेंस के 52% नए ग्राहकों ने पहली बार ही लिया कर्ज
जीएसटी सुधारों और आयकर की दरों में बदलावों के सकारात्मक असर से बढ़ी कर्ज की मांग
कंज्यूमर गुड्स की कीमतों में कमी से दिखा प्रीमियमाइजेशन ट्रेंड — टीवी और एसी की बिक्री में उछाल
भारत की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की नॉन-बैंकिंग वित्तीय संस्था और बजाज फिनसर्व समूह का हिस्सा, बजाज फाइनेंस लिमिटेड ने कहा कि इस फेस्टिव सीजन में उपभोक्ता कर्ज की मांग में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। कंपनी ने पिछले वर्ष की तुलना में 27% अधिक संख्या में और 29% अधिक मूल्य के उपभोक्ता कर्ज वितरित किए हैं।
उपभोक्ता वस्तुओं के लिए लिए गए इन कर्ज में बढ़ोतरी सरकार के अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों और व्यक्तिगत आयकर दरों में किए गए बदलावों का सकारात्मक परिणाम है, जिनका उद्देश्य उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति बढ़ाना रहा है।
बजाज फाइनेंस ने 22 सितंबर से 26 अक्टूबर 2025 के बीच लगभग 63 लाख कर्ज वितरित किए। इस अवधि में कंपनी ने 23 लाख नए ग्राहक जोड़े, जिनमें से 52% न्यू-टू-क्रेडिट (पहली बार कर्ज लेने वाले) थे, जिससे वित्तीय समावेशन को व्यापकता मिली। बजाज फाइनेंस के चेयरमैन संजीव बजाज ने कहा, “सरकार के नेक्स्ट जनरेशन जीएसटी सुधारों और आयकर की दरों में बदलावों ने भारत की उपभोग-आधारित विकास कहानी को नई ऊर्जा दी है। इन कदमों से रोजमर्रा की वस्तुएं अधिक सुलभ हुई हैं, जिससे लाखों मध्यम और निम्न आय वर्गीय परिवार आत्मविश्वास के साथ त्योहारी खरीदारी कर सके हैं। यह असर केवल 27% अधिक उपभोक्ता कर्ज वितरण में ही नहीं दिखा, बल्कि उपभोक्ताओं के बेहतर जीवनशैली के लिए उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की ओर झुकाव में भी देखा गया।”
उन्होंने आगे कहा, “इस त्योहारी सीजन में हमारे आधे से अधिक नए ग्राहक न्यू-टू-क्रेडिट हैं, जिन्होंने पहली बार औपचारिक वित्तीय प्रणाली से कर्ज लिया है। बजाज फाइनेंस की डिजिटल सेवाओं और पूरे भारत में 4,200 स्थानों पर फैले 2.39 लाख वितरण केंद्रों के माध्यम से हम वित्तीय समावेशन को और गहराई दे रहे हैं और भारतीय उपभोक्ता की प्रगति को आगे बढ़ा रहे हैं।”
टीवी और एयर-कंडीशनर पर कम जीएसटी दरों ने उपभोक्ताओं को औसत कर्ज टिकट साइज में 6% की कमी के साथ उच्च श्रेणी के उत्पादों में अपग्रेड करने में सक्षम बनाया है। टीवी फाइनेंसिंग में प्रीमियमाइजेशन ट्रेंड स्पष्ट रूप से दिखाई दिया — जहाँ 40 इंच या उससे अधिक स्क्रीन वाले टीवी अब कंपनी के कुल फंडेड टीवी में 71% हिस्सेदारी रखते हैं, जो पिछले वर्ष 67% थी। एक विविध और तकनीक-प्रधान नॉन-बैंकिंग संस्था के रूप में, बजाज फाइनेंस निरंतर नवाचार के माध्यम से उपभोक्ताओं और व्यवसायों के लिए कर्ज की पहुँच को बढ़ाने और अनुभवों को रूपांतरित करने पर केंद्रित है। कंपनी मोबाइल फोन, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, होम अप्लायंसेज़, फर्नीचर, रूफटॉप सोलर पैनल्स और अन्य उपभोग-आधारित श्रेणियों में वित्तपोषण की अग्रणी प्रदाता है।
बजाज फाइनेंस वर्तमान में अपने 11 करोड़ ग्राहकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑन-ग्राउंड वितरण नेटवर्क के माध्यम से सेवा प्रदान करती है। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कंपनी 19 भाषाओं में ‘की फैक्ट स्टेटमेंट्स’ उपलब्ध कराती है। बजाज फिनसर्व ऐप, जिसके 75.1 मिलियन नेट इंस्टॉल्स (30 जून 2025 तक) हैं, ग्राहकों को क्रेडिट, डिपॉजिट, बीमा और निवेश की सुविधाएं तेजी से और सुगमता से प्रदान करता है।
अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा सितंबर में शुरू किए गए ‘जीएसटी बचत उत्सव’ का हिस्सा हैं और इन्होंने कर संरचना को सरल बनाते हुए घरेलू उपभोक्ताओं पर बोझ घटाया है। इसने लोगों की आकांक्षाओं को पूरा किया है और व्यापारियों, उद्यमियों व एमएसएमई के लिए कारोबार करने की सुगमता बढ़ाई है। इन सुधारों को 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद के सबसे बड़े सुधारों में से एक माना जा रहा है। पुनर्गठित जीएसटी दरों और 2025 की आयकर की दरों में कटौती ने भारतीय परिवारों की क्रय शक्ति को मजबूत किया है और समावेशी विकास के भारत के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
परिवहन विभाग कि ओर से रफ्तार घटाओं सुरक्षा बढ़ाओ पर हुआ नीबंध व चित्रकला प्रतियोगिता
सरायकेला/ईचागढ़
(मालखान महतो) सरायकेला-खरसावां जिला के ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के अनुग्रह नारायण प्लस टू उच्च विद्यालय पिलीद में गुरुवार को जिला परिवहन विभाग कि ओर से सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता कार्यक्रम को लेकर बच्चों के बीच नीबंध व चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कृत किया गया। वहीं जिला परिवहन पदाधिकारी गिरजा शंकर महतो ने बच्चों को जागरूक करते हुए सड़क सुरक्षा के नियमों, दंडात्मक कार्रवाई आदि के संबंध में जानकारी दिया।
उन्होंने रफ्तार घटाओं सुरक्षा बढ़ाओ नारे को आत्मसात कर अपने और अन्य को सुरक्षित करने का सुझाव दिया। जिला परिवहन पदाधिकारी ने नाबालिग बच्चों को वाहन नहीं चलाने का अपील किया। उन्होंने लाइसेंस और आवश्यक कागजात के साथ वाहन चलाने, हेलमेट पहनकर बाइक चलाने व चार पहिया वाहनों में सीट बैल्ट पहनकर चलाने का अपील किया। उन्होंने बच्चों को सड़क सुरक्षा अधिनियम के संबंध में भी जागरूक किया।
मौके पर प्राचार्य मीताली, सड़क सुरक्षा से कुंदन कुमार, आषुतोष कुमार, मानवाधिकार परिषद के जिला अध्यक्ष अरुण कुमार माझी,शिक्षक राहुल देव महतो, चन्द्र प्रकाश यादव, राकेश भरद्वाज, श्वेता खलको, संस्कृति कुमारी लज्या, किशोर कुमार आदि उपस्थित थे।
पारगामा में राशन डीलर पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा — तीन महीने से नहीं मिला राशन, ग्रामीणों ने किया विरोध
सरायकेला/ईचागढ़
दोषी डीलर पर हो कड़ी कार्रवाई – पूर्व जिप उपाध्यक्ष
सरायकेला-खरसावां जिला के कुकड़ू प्रखंड के पारगामा के ग्रामीणों का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब तीन महीने से सरकारी राशन डीलर राशन देने से इंकार कर दिया।लोगों ने राशन डीलर के खिलाफ जमकर विरोध जताया। ग्रामीण ने बैठक कर विरोध जताया।ग्रामीणों ने पहले प्रखंड विकास पदाधिकारी सह खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी से भी मिलकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बावजूद अब तक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने बताया कि किशुनडीह के डीलर बलभद्र मुर्मू रात के समय चोरी-छिपे राशन वितरण करता है। इंटा,पत्थर रखकर तराजू पर वजन कर अंगुठे लगवाते हैं और 15 -20 दिन बाद अनाज दिया जाता है। हद तब हो गई जब तीन महीने का अनाज कुछ कार्ड धारियों को देकर अनाज खत्म होने का बहाना बनाया एवं सितम्बर का अंगूठा लगाकर राशन देने से इंकार कर दिया। ग्रामीणों ने पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष अशोक कुमार साहू को भी इस संबंध में अवगत कराते हुए न्याय दिलाने में सहयोग करने का गुहार लगाई। कार्डधारियों ने हस्ताक्षरित आवेदन उपायुक्त को देकर राशन दिलाने एवं डीलर पर कार्रवाई कराने का निर्णय लिया। वहीं पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष अशोक कुमार साहू ने कहा कि गरीबों का हक मारने वाले पर कार्रवाई कराने में हर तरह से सहयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि डीलर हर बार इस तरह का रवैया अपना कर 3-4 महिने का अनाज डकार जाते हैं। श्री साहू ने कहा कि उच्च पदाधिकारीयों से गरीबों को न्याय देने एवं दोषी डीलर पर कार्रवाई करने का मांग किया जाएगा।मौके पर मनोरंजन सिंह मुण्डा,बादल पाल, उमाशंकर पोद्दार,डोलू मांझी, शंभू पोद्दार आदि सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे।
एलसीडीसी के तहत एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का हुआ आयोजन
सरायकेला/ईचागढ़
( मालखान महतो) सरायकेला-खरसावां जिला के ईचागढ़ प्रखंड मुख्यालय के आइसीडीएस सभागार में कुष्ठ रोगी खोजो अभियान के तहत एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। सेविकाओं को प्रशिक्षण के माध्यम से चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अनुपम घोषाल ने बताया कि 10 नवंबर से 25 नवंबर तक कुष्ठ रोगी खोजो अभियान चलाया जाएगा। सेविका एवं सहयोगी द्वारा घर घर जाकर संदेहास्पद कुष्ठ रोगी का पहचान करना है और पहचान के उपरांत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ईचागढ भेजना है, ताकि समय पर जांच कर दवा का वितरण किया जायेगा। डाक्टर घोषाल ने बताया कि सेविकाओं को कुष्ठ रोगी की पहचान के लक्षण , शारीरिक परिवर्तन, सुनापन स्थान,चकते के संबंध में जानकारी दिया गया।
उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोग उन्मूलन हेतु सरकार द्वारा कुष्ठ रोगी खोजो अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि अभियान को सफल बनाने के लिए सेविकाओं को प्रशिक्षण दिया गया। मौके पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ हरेन्द्र सिंह मुण्डा, एमपीडब्ल्यू राजीव कैवर्त, बुधराम बेसरा, महिला पर्यवेक्षिका ममता बिन्हा, कृष्णा देवी आदि उपस्थित थे।
यह कैसी विडंबना, ईचागढ़ विश का नाम भी डुबे क्षेत्र से आता है, दंश झेलने को विवश, ईचागढ़ वासी : निपेन महतो
सरायकेला/ईचागढ़/चांडिल
ईचागढ़ विधानसभा का नाम भी डुबे क्षेत्र से आता है । प्रमाण पत्र व सुविधाओ से वंचित है । निपेन महतो ने बताया कि जनप्रतिनिधि, प्रशासन की विडंबना के दंश झेलने को विवश हैं ईचागढ़ वासी ।
चांडिल बांध विस्थापित मत्स्य जीवी स्वावलंबी सहकारी समिति का बैठक नौका विहार स्थल पर हुआ। जिसमें चांडिल जलाशय के मत्स्य पालन समिति व अन्य संग विस्थापित के रोजगार पर विचार-विमर्श किया गया है । जलाशय के पुनर्वास निति 2003, 2012 में यह प्रावधान है कि विस्थापित लोगों को रोजगार मुहैया कराया जाए ।
इतना हीं नहीं, वहां का पर्यटन और मत्स्य विभाग में जलाशय पर, पहला अधिकार जलाशय के विस्थापित लोग का है। लेकिन इन अधिकार एवं प्रावधान में भी विस्थापित लोग राजनीति का शिकार बन रहे हैं। इस संबंध में विस्थापित लोगों का कहना है कि पर्यटन विभाग में पुर्नवास निति का उल्लंघन कर रहे हैं। मत्स्य विभाग के पुर्नवास निति के संबंध में भी उल्लेख किया गया। जिला मत्स्य विभाग के मनमानी रवैया के कारण विस्थापित लोग का रोजगार छीन गया है। विस्थापित लोगों का कहना है कि हमारे पुर्वज से जमीन जलाशय में लिया गया। अब विस्थापित परिवार के रोजगार के विभिन्न स्रोत पर्यटन, नौका विहार , मत्स्य योजना के रोजगार को राजनीति के तहत छीन लिया है।
इसलिए विस्थापित लोग चरण बद्ध आंदोलन करने को विवश हैं। बैठक में लोग ने यहां तक कहा कि ईचागढ़ गांव जलाशय में प्रभावित हुए, लेकिन विस्थापित गांव के सूची में विधानसभा अभी भी है। जो लोगों के लिए विडंबना बनी हुई है। ईचागढ़ गांववासी का स्थानीय प्रमाण पत्र नहीं बनता है, लेकिन विधानसभा सीट आज भी बरकरार है। जिला मत्स्य पदाधिकारी के मनमानी ढंग से मत्स्य योजना कार्य गैर विस्थापित कर रहे हैं। जो कि प्रावधान का उल्लघंन हो रहा है । विस्थापित दर दर के ठोकर खा रहे हैं। विरोध में समिति की प्रतिनिधि उपायुक्त सरायकेला खरसावां से मिलेंगे और विस्थापित की स्थिति से अवगत कराया जाएगा। बैठक में , अम्बिका यादव, नारायण गोप , श्यामल मार्डी, किरण हेम्ब्रम, अकलु धीवर, विवेक गोप, पंचानन महतो, कंचन सिंह, देवेंद्र महतो, लखन महतो आदि उपस्थित थे। यही वजह है, ईचागढ़ गांव जलाशय से प्रभावित हैं और हर चुनाव में नेताओं व प्रत्याशियों द्वारा विस्थापितों का मुद्दा उठाया जाता है।
गुरु नानक जयंती महोत्सव 5 नवंबर 2025, एक दिव्य चेतना का अवतरण-सतगुरु नानक प्रगटिया मिटी धुंध जग चानण होआ।
पूरी दुनियां में गूंजा,धन गुरु नानक सारा जग तारिया – प्रकाशोत्सव की पावन बेला से जग पवित्र हुआ
गुरु नानक देव जी केवल सिख धर्म के प्रथम गुरु ही नहीं थे, बल्कि समूची मानवता के लिए एक विश्वगुरु, एक आध्यात्मिक क्रांति के प्रणेता थे- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
वैश्विक स्तरपर पूरी दुनियां में सतगुरु नानक प्रगटिया मिट्टी धुंध जग चानण होआ, हुकमे अंदर सभ क़ो,बाहर हुकम ना कोए,सिमर सिमर सुख पावहुँ सिमरन कर मन मेरे, सबना ज़ियादा इक दाता, सो मैं विसर ना जाई, वाहेगुरु जी का खालसा वाहेगुरु जी की फतेह-श्रद्धा भाव से आंखें बिछाए भक्तगण केनयन तृप्त हुए,नानक नाम चढ़दी कला तेरे भाणे सरबत दा भला के संदेश के साथ पूरे विश्व में स्थित सभी गुरुद्वारे सिख धर्म के पहले गुरु और संस्थापक श्री गुरुनानक देव जी महाराज का 556 वाँ प्रकाशोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है।उनका जन्म पंजाब के तलवंडी (ननकाना साहिब) में कार्तिक पूर्णिमा के दिन हुआ था, जो 2025 में 5 नवंबर को पड़ रहा है। यह दिन “गुरु नानक प्रकाश उत्सव” के नाम से मनाया जाता है, जब सिख और अन्य धर्मावलंबी गुरु नानक की शिक्षाओं को स्मरण करते हुए नाम जप, कीर्तन, लंगर और सेवा करते हैं।
इस पावन मौके पर सिख, सिंधी समुदाय के अलावा अन्य समुदाय के लोग भी माथा टेकने गुरुद्वारा पहुंच रहे है। गुरु नानक देव जी (1469-1539) केवल सिख धर्म के प्रथम गुरु ही नहीं थे, बल्कि समूची मानवता के लिए एक विश्वगुरु, एक आध्यात्मिक क्रांति के प्रणेता थे।हालांकि प्रकाशपर्व को लेकर अनेक दिनों से चल रहे प्रभातफेरी उपरांत जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल के जयकारे लगाते हुए गुरु नानक देव जी महाराज के प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में हर नगर कीर्तन की तरह प्रभात फेरी निकाली गई है। सिखों के पहले पातशाह श्री गुरु नानक देव जी महाराज, जिनका नाम लेने मात्र से मानो आत्मिक शांति का अहसास होने लगता है। श्री गुरु नानक देव जी सिखों के ही नहीं, अपितु समस्त मानव जाति के लिए आदर्श हैं। उनकी शिक्षाएं, उनके विचार और उनके कर्म आज हर मनुष्य को प्रकाश के मार्ग पर ले जाते हैं। गुरु साहब ने अपना पूरा जीवन लोक भलाई के लिए समर्पित कर दिया। चूंकि दिनांक 5 नवंबर 2025 को हम वैश्विक स्तरपर बाबा गुरु नानक देवजी का प्रकाशोत्सव मना रहे हैं, इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, पूरी दुनियाँ में गूंजा धन गुरु नानक सारा जग तारिया – सतगुरु नानक प्रगटिया मिटी धुंध जग चानण होआ,पावन बेला से जग पवित्र हुआ।
साथियों बात कर हम बाबा गुरु नानक देव के पावन जन्म की करें तो, बाबाजी का जन्म एक खत्रीकुल में रावी नदी के किनारे स्थित तलवंडी नामक गाँव (अभी पाकिस्तान में पंजाब प्रान्त में जिसका नाम आगे चलकर ननकाना पड़ गया) में कार्तिकी पूर्णिमा को हुआ था।कुछ विद्वान इनकी जन्मतिथि 15 अप्रैल 1469 मानते हैं, किंतु प्रचलित तिथि कार्तिक पूर्णिमा ही है, जो अक्टूबर-नवंबर में दीवाली के 15 दिन बाद पड़ती है। उनके पिता का नाम मेहता कालू और माता का नाम तृप्ता देवी था, जबकि बहन बेबे नानकी थीं।गुरु साहिब बचपन से ही प्रखर बुद्धि के स्वामी थे। लड़कपन से वे सांसारिक मोहमाया के प्रति काफी उदासीन रहा करते थे। पढ़ने-लिखने में बिल्कुल भी रुचि नहीं थी, लेकिन उनका सारा समय आध्यात्मिक चिंतन और सत्संग में व्यतीत होता था। उनके बाल्यकाल में कई ऐसी चमत्कारी घटनाएं हुई, जिसके बाद लोग उन्हे दिव्य शख्सियत मानने लगे।
साथियों बात अगर हम बाबा गुरु नानक देव के बाल्यापन से युवापन की करें तो, बाबाजी का मन पढ़ने में नही लगता था, हालाँकि वे तेज बुद्धि के थे। उन्होंने 7-8 साल की उम्र में ही स्कूल छोड़ दिया था। उनका ध्यान शुरुआत से ही आध्यात्म की तरफ था,तत्पश्चात् सारा समय वे आध्यात्मिक चिंतन और सत्संग में व्यतीत करने लगे। आगे चलकर इनका विवाह सोलह वर्ष की आयु में गुरदासपुर जिले में लाखौकी नामक स्थान की कन्या सुलक्खनी से हुआ था। 32 वर्ष की अवस्था में इनके प्रथम पुत्र श्रीचंद का जन्म हुआ था और चार वर्ष पश्चात् दूसरे पुत्र लखमीदास का जन्म हुआ था। नानक का मन गृहस्थी में नही लगा इसलिए उन्होंने 1507 में अपने दोनों पुत्रों और पत्नी को अपने श्वसुर के घर छोड़ दिया और अपने चार साथियों रामदास,मरदाना, लहना, बाला के साथ तीर्थ यात्रा पर निकल पड़े।
साथियों बात अगर हम बाबा गुरु नानक देव के दर्शन आधारशिला की करें तो, नानक देव जी के दर्शन की आधारशिला यह है कि वे सर्वेश्वरवादी थे।जिसका मतलब होता है कि ईश्वर सब जगह है अर्थात संसार के सभी तत्त्वों, पदार्थों और प्राणियों में ईश्वर विद्यमान है एवं ईश्वर ही सब कुछ है।नानक जी मूर्ती पूजा के विरोधी थे इसके अलावा उन्होंने हिंदू धर्म में फैली कुरीतिओं का सदैव विरोध किया था। उन्होंने एक परमात्मा की उपासना के मार्ग को बताया था, यही कारण है कि उनके विचारों को हिंदु और मुसलमान दोनों धर्मों के लोगों ने पसंद किया जाता है।संत साहित्य में नानक उन संतों की श्रेणी में हैं। हिंदी साहित्य में गुरुनानक भक्तिकाल के अतंर्गत आते हैं और वे भक्तिकाल में निर्गुण धारा की ज्ञानाश्रयी शाखा से संबंध रखते हैं।
साथियों बात अगर हम सतगुरु नानक प्रगटिया मिटी धुंध की करें तो, सतगुरु नानक प्रगट्या, मिटी धुंध जग चानन होया, कलतारण गुरु नानक आया, ज्यों कर सूरज निकलया तारे छपे अंधेरपोलावा। गुरु नानक देव के प्रकाश पर्व पर यह शबद गुरुद्वारों में गूंजायमान हो रहे हैं। कथा वाचक अपनी वाणी व रागी ढाडी जत्थे अपने कीर्तन से गुरु की महिमा का जो बखान कर रहे हैं, उसे गुरु घर में पहुंची संगत आस्था के समंदर में गोते लगा रही है। पूरे विश्व के गुरुद्वारों में जहां हजारों की तादाद में संगत माथा टेकने को उमड़ रही है। संगत ने जोड़ा घर, लंगर व बर्तन की सेवा कर रही है। पवित्र सरोवर के पानी से खुद को पवित्र कर रही है। बता दें श्री गुरुनानक देव जी का जीवन सदैव समाज के उत्थान में बीता। उस समय का समाज अंध विश्वासों और कर्मकांडों के मकड़जाल में फंसा हुआ था।ऐसे जटिल दौर में गुरुनानक देवजी ने प्रकट होकर समाज में आध्यात्मिक चेतना जगाने का जो काम किया, उसे कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है। श्री गुरुनानक देव जी ने अपने उपदेशों में निरंकार पर जोर दिया। उन्होंने कहा धार्मिक ग्रंथ का ज्ञान ऐसी नैया है, जो अंधविश्वास के भवसागर से पार उतारती है। ये ज्ञान हमें निरंकार के देश की तरफ लेकर जाता है, जिसके समक्ष सिख आज भी नतमस्तक होते हैं।सिखमत का आगाज़ ही एक से होता है। सिखों के धर्म ग्रंथ में एक की ही व्याख्या है। एक को निरंकार, पारब्रह्म आदि नामों से जाना जाता है। निरंकार का स्वरूप श्रीगुरुग्रंथ साहिब की शुरुआत में बताया है जिसे आम भाषा में गुरु साहिब के उपदेशों का मूल मन्त्र भी कहते हैं। यह ग्रंथ पंजाबी भाषा और गुरुमुखी लिपि में है। इसमें मुख्यत:कबीर, रैदास और मलूकदास जैसे भक्त कवियों की वाणियाँ सम्मिलित हैं। साथियों बात अगर हम बाबा जी की चार उदासियों की करें तो, गुरु साहिब चारों दिशाओं में घूम-घूम कर लोगों को उपदेश देने लगे। 1521 ईस्वी तक उन्होंने चार यात्रा चक्र पूरे किए, जिनमें भारत, अफगानिस्तान, फारस और अरब के मुख्य स्थान शामिल थे। इन यात्राओं को पंजाबी में उदासियाँ के नाम से जाना जाता है। गुरु नानक देव जी मूर्तिपूजा में विश्वास नहीं रखते थे। नानक जी के अनुसार ईश्वर कहीं बाहर नहीं, बल्कि हमारे अंदर ही है। उन्होंने हमेशा ही रुढ़ियों और कुरीतियों का विरोध किया। उनके विचारों से नाराज तत्कालीन शासक इब्राहिम लोदी ने उन्हें कैद तक कर लिया था। पानीपत की लड़ाई में इब्राहिम लोदी हार गया और राज्य बाबर के हाथों में आ गया, तो उन्हें कैद से मुक्ति मिली।
साथियों बात अगर हम बाबा जी के जीवन की आखिरी सांस तक लोग भलाई के काम करने की करेंतो,जीवन के अंतिम दिनों में गुरु साहिब के लोकहित में किए गए कामों की प्रसिद्धि हवा में घुलती फूलों की महक की तरह हर तरफ फैल चुकी थी। अपने परिवार के साथ मिलकर वे मानवता की सेवा में पूरा समय व्यतीत करने लगे।
उन्होंने करतारपुर नाम से एक नगर बसाया, जो अब पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित है।अपनी चार उदासियों के बाद गुरुनानक देव जी 1522 में करतारपुर साहिब में बस गए। उनके माता-पिता का परलोक गमन भी इसी जगह पर हुआ था।करतारपुर साहिब में ही गुरुनानक साहिब ने सिख धर्म की स्थापना की थी। उन्होंने रावी नदी के किनारे सिखों के लिए एक नगर बसाया और यहां खेती कर नाम जपो, किरत करो और वंड छको का उपदेश दिया। करतारपुर साहिब में उन्होंने अपने जीवन के आखिरी 17 साल बिताए। यहीं पर 22 सितंबर 1539 ईस्वी को उन्होंने समाधि ले ली। ज्योति ज्योत समाने से पहले गुरु साहिब ने शिष्य भाई लहना को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया जो बाद में गुरु अंगद देव जी के नाम से जाने गए। साथियों बात अगर हम बाबा जी के चार मित्रों की करें तो, सिख धर्म के प्रथम गुरु गुरुनानक देवी जी के चार शिष्य थे। यह चारों ही हमेशा बाबाजी के साथ रहा करते थे। बाबाजी ने अपनी लगभग सभी उदासियां अपने इन चार साथियों के साथ पूरी की थी। इन चारों के नाम हैं-मरदाना लहणा , बाला और रामदास के साथ पुरी की थी।
कहते हैं कि 1499 में उनकी सुल्तानपुर में मुस्लिम कवि मरदाना के साथ मित्रता हो गई। मरदाना तलवंड से आकर यहीं गुरु नानक का सेवक बन गया था और अन्त तक उनके साथ रहा। गुरु नानक देव अपने पद गाते थे और मरदाना रवाब बजाताथा,मरदाना ने गुरुजीकी चार प्रमुख उदासियों में उनके साथ यात्रा की। मरदाना ने गुरुजी के साथ 28 साल में लगभग दो उपमहाद्वीपों की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने तकरीबन 60 से ज्यादा प्रमुख शहरों का भ्रमण किया। जब गुरुजी मक्का की यात्रा पर थे तब मरदाना उनके साथ थे।गुरुजी के दो और शिष्य थेजिसका नाम बाला और रामदास था। मरदाना, बाला और रामदास तीनों ने ही गुरुजी की उदासियों में उनका साथ दिया और वे हरदम उनकी सेवा में लगे रहे।लहना नाम के भी गुरुजी के एक प्रसिद्ध शिष्य थे। कहते हैं कि लहना जी माता रानी ज्वालादेवी के परमभक्त थे। एक दिन उन्होंने गुरुनानक के एक अनुयायी भाई जोधा सिंह खडूर निवासी से उन्होंने गुरुनानक के शबद सुने और वे उससे बहुत ही प्रभावित हुए और वे बाबाजी से मिलने जा पहुंचे। भाई मरदाना वो मुस्लिम घर में पैदा हुए थे बाबा नानक जहां भी कहीं बाहर यात्राओं पर गए, भाई मरदाना हमेशा उनके साथ रहे। गुरबाणी के संगीत में उनकी गहरी छाप है। कहा जाता है कि जब तक भारत का बंटवारा नहीं हुआ था, तब तक पाकिस्तान के ननकाना साहिब और करतारपुर के गुरु ग्रंथ दरबार साहिब गुरुद्वारे में गुरबाणी पर संगीत की थाप उनके वंशज ही करते थे। नानक और मरदाना एक ही गांव में पैदा हुए। ये तलवंडी में हुआ, जो अब पाकिस्तान के ननकाना साहिब में है। तब गांवों में आमतौर पर हिंदू-मुसलमानों के बीच कोई खाई नहीं थी। सब मिलजुलकर रहते थे करीब 300 -400 साल पहले हमारी सामाजिक संरचना यूं भी खासी अलग और भाईचारे वाली होती थी।नानक और मरदाना दोनों बचपन के दोस्त थे। हालांकि मरदाना बड़े थे। ऐसे भी बचपन की दोस्ती ना तो धर्म की दीवारों को मानती है और ना ही ऊंच-नीच को नानक बड़े और अमीर खानदान से वास्ता रखते थे तो मरदाना उस मुस्लिम मरासी परिवार से ताल्लुक रखते थे, जो गरीब थे और जिनका ताल्लुक संगीत के साजों से था।राम दी चिड़िया, राम दा खेत चुग लो चिड़ियो, भर-भर पेट।। यह लिखी गयी दो लाइन्स गुरुनानक जी की जिंदगी भर की फिलोसोफी को बयां कर देतीं हैं।
अतः अगर हम पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि गुरु नानक जयंती महोत्सव 5 नवंबर 2025 पर विशेष-सतगुरु नानकप्रगटिया मिटी धुंध जग चानण होआ।वाहेगुरु जी का खालसा वाहेगुरु जी की फतेह-श्रद्धा भाव से आंखेंबिछाए भक्तगण के नयन तृप्त हुए.पूरी दुनियां में गूंजा,धन गुरु नानक सारा जग तारिया – प्रकाशोत्सव की पावन बेला से जग पवित्र हुआ।
संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
( मालखान महतो) सरायकेला-खरसावां जिला के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में मंगलवार शाम से हो रही आंधी तुफान और रुक रुक कर हो रही बारिश से किसानों के मेहनत पर पानी फेर दिया है। मोंथा चक्रवर्ती तुफान का ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र में काफी असर देखने को मिला। खेत में खड़ी और तैयार धान की फसलों को आंधी तूफान से गीला दिया, जिससे अधिकांश खेतों में खड़ी धान नष्ट हो गया। इस वर्ष लगातार भारी बारिश से जहां धान बीचड़ा नष्ट होने से किसानों को दुबारा बीज डालने से क्षति हुई, वहीं पके और अधपके धानों पर चक्रवर्ती तुफान ने अपना रौद्र रूप से फसलों को नष्ट कर दिया, जिससे किसान काफी चिंतित हैं। तालापीढ़ी निवासी किसान निमाई चंद्र महतो ने बताया कि बेमौसम बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान धान की खेती पर हुआ है।
उन्होंने बताया कि धान की बाली हवा और पानी से अपने आप गिर रही है जिससे खराब होने की संभवाना है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अत्यधिक बारिश होने के कारण धान की फसल पर विभिन्न प्रकार की बीमारी भी हुआ है। उन्होंने आपदा प्रबंधन विभाग से तत्काल किसानों के लिए मुआवजा देने का मांग किया है। उन्होंने कहा कि किसान बार बार की आपदा से काफी तनाव महसूस कर रहे हैं और सारी मेहनत पर पानी फेर दिया।
तंबाकू मुक्त युवा अभियान 3.0 के तहत जिले में चलाया गया छापामारी अभियान।
सरायकेला-खरसावां
दुकानों एवं व्यक्तियों पर की गई कार्रवाई, ₹1400 अर्थदंड वसूला गया।
31 अक्टूबर, 2025 को तंबाकू मुक्त युवा अभियान 3.0 के तहत जनजागरूकता एवं प्रवर्तन अभियान चलाया गया। इस क्रम में सरायकेला-खरसावाँ जिले के नगर पंचायत क्षेत्र अंतर्गत संजय चौक एवं कालूराम चौक स्थित विभिन्न दुकानों में निषिद्ध तंबाकू उत्पादों की बिक्री तथा सार्वजनिक स्थलों पर उपभोग के विरुद्ध छापामारी अभियान संचालित किया गया।
यह अभियान राज्य नोडल पदाधिकारी (NTCP) डॉ. अश्विनी कुमार एवं सिविल सर्जन सरायकेला-खरसावाँ डॉ. सरयू प्रसाद सिंह के नेतृत्व में संपन्न हुआ। अभियान के दौरान सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA) की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत दुकानों एवं व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए ₹1400 का अर्थदंड वसूला गया।
इस अभियान में खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी श्री सुबीर रंजन, डॉ. चंदन पासवान, NTCP स्टेट कोऑर्डिनेटर श्री धीरज कुमार, सिटी मैनेजर नगर पंचायत श्री महेश जरिका, NTCP कंसल्टेंट श्री अशोक यादव, जिला कार्यक्रम समन्वयक (NCD) श्री पुष्कर भूषण, तथा सरायकेला थाना के पदाधिकारी एवं पुलिस बल शामिल रहे।
सिविल सर्जन ने बताया कि तंबाकू सेवन जनस्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है तथा इसे रोकने के लिए जिले में सतत प्रवर्तन एवं जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू सेवन करने वाले एवं निषिद्ध उत्पाद बेचने वाले दुकानदारों के विरुद्ध आगे भी इसी प्रकार की नियमित कार्रवाई की जाएगी।
ट्रंप-ज़िनपिंग के बीच समझौता वास्तव में अमेरिका की रणनीतिक सफ़लता है, या चीन की शतरंजी चाल का एक हिस्सा -एक सटीक विश्लेषण
दक्षिण कोरिया बुसान बैठक- संवाद या शक्ति प्रदर्शन?“छह साल बाद एक फ्रेम में दिखे डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग- वैश्विक शक्ति संतुलन की नई परिभाषा”
दक्षिण कोरिया बुसान ट्रंप- ज़िनपिंग मुलाक़ात -दुनियाँ के लिए एक प्रतीकात्मक संदेश है,कि वैश्विक शांति का रास्ता संवाद से गुजरता है, जिसमें विश्वास और समानता की भावना हो, ज़ो नहीं दिखा-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र
गोंदिया/महाराष्ट्र
वैश्विक स्तरपर दुनियाँ की निगाहें आज दक्षिण कोरिया के बुसान शहर पर टिकी थीं, जहाँ लगभग छह वर्षों केअंतराल के बाद अमेरिकी राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में से एक डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक ही फ्रेम में नजर आए। यह दृश्य प्रतीकात्मक रूप से जितना साधारण दिखा,उतना ही भू-राजनीतिक दृष्टि से गूढ़ था। दोनों नेता विश्व राजनीति की दो ऐसी ध्रुवीय शक्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो पिछले एक दशक से अधिक समय से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से वैश्विक आर्थिक, सैन्य और वैचारिक प्रतिस्पर्धा में लिप्त हैं। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि यद्यपि मंच साझा करने का दृश्य शांति और संवाद का संदेश देता है, किंतु दोनों के बीच उपस्थित कूटनीतिक दूरी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी। यह दूरी मात्र शारीरिक नहीं, बल्कि नीतिगत, विचारधारात्मक और शक्ति-प्रदर्शन की गहराइयों में निहित है।साउथ कोरिया के बुसान में हुई यह बैठक औपचारिक रूप से एशिया- पैसिफिक क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा मुद्दों पर केंद्रित थी। लेकिन इसके पीछे वास्तविक उद्देश्य था,वैश्विक शक्ति समीकरणों को पुनः परिभाषित करना। ट्रंप, जो दोबारा अमेरिकी राजनीति के केंद्र में लौट आए हैं, अपनी पूर्ववर्ती नीतियों के समान ही इस बार भी “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडा लेकर आए हैं। दूसरी ओर, शी जिनपिंग, जो अपनी तीसरी कार्यावधि में चीन को एक आर्थिक और सैन्य सुपरपावर के रूप में स्थापित करने की दिशा में अग्रसर हैं, इस बैठक को एक मंच के रूप में देख रहे थे,जहाँ चीन अपनी रणनीतिक आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन कर सके।
एडवोकेट किशन सनमुखदास
हालांकि, इन दोनों के बीच हुए संवाद की प्रकृति में ठंडापन झलक रहा था।ऐसा प्रतीत हुआ मानो दोनों नेता एक औपचारिक कूटनीतिक आवश्यकता के तहत एक साथ बैठे हों, न कि आपसी विश्वास या सामरिक साझेदारी के उद्देश्य से बैठक की।
साथियों बात अगर हम दक्षिण कोरिया बुसान बैठक चीन-रूस ऊर्जा गठबंधन और अमेरिकी मौन को समझने की करें तो, वर्तमान वैश्विक ऊर्जा समीकरण में चीन और रूस के बीच का गठबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण है। रूस- यूक्रेन युद्ध के बाद, जब पश्चिमी देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए, तब चीन ने रूस से कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि की।आज चीन रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बन चुका है।लेकिन बुसान की बैठक में, जहाँ ट्रंप ने भारत पर रुस से तेल खरीदने पर 50 पर्सेंट टैरिफ लगाने जैसे कठोर आर्थिक कदमों की घोषणा की थीं, वहीं उन्होंने चीन-रूस ऊर्जा गठबंधन के मुद्दे पर आश्चर्यजनक मौन बनाए रखा। ताइवान चीन संबंधों पर भी यह मौन तथा 10 पर्सेंट टैरिफ कम करना अमेरिका की रणनीतिक विवशता को दर्शाता है,क्योंकि ट्रंप भली-भांति जानते हैं कि रूस के तेल व्यापार में चीन की भागीदारी पर सीधा प्रश्न उठाना एक व्यापक जियो- इकोनॉमिक टकराव को जन्म दे सकता है।दूसरी ओर, ट्रंप भारत के उभरते व्यापारिक प्रभाव और डॉलर-मुक्त ऊर्जा सौदों से असहज हैं। इसलिए उन्होंने भारत पर टैरिफ बढ़ाकर आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति अपनाई ,यह चीन के बजाय एक सॉफ्ट टारगेट पॉलिसी की झलक है।अमेरिका और चीन की प्रतिद्वंद्विता अब केवल आर्थिक नहीं रही,यह अब सॉफ्ट पावर बनाम हार्ड पॉलिटिक्स की लड़ाई बन चुकी है। चीन अपनी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव,टेक्नोलॉजी हब्स और डिजिटल युआन के माध्यम से एक वैकल्पिक वैश्विक आर्थिक व्यवस्था तैयार कर रहा है। वहीं अमेरिका अपने पुराने सहयोगियों जापान, दक्षिण कोरिया,ऑस्ट्रेलिया और भारत (क्वाड के ज़रिए) के साथ सामरिक संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है।बुसान बैठक इस व्यापक संघर्ष का एक कूटनीतिक मंच बनकर उभरी। ट्रंप और शी जिनपिंग दोनों ने अपने-अपने राजनीतिक हितों को साधने की कोशिश की,परंतु विश्वास की पुनर्स्थापना अभी बहुत दूर दिख रही है।
साथियों बात अगर हम ट्रंप की गर्मजोशी और शी जिनपिंग की भावहीनता-दो व्यक्तित्व, दो रणनीतियाँ मंत्र को समझने की करें तो,जब बैठक की शुरुआत हुई, ट्रंप पूरे उत्साह और आत्मविश्वास में दिखाई दिए। उन्होंने शी जिनपिंग की ओर बढ़ते हुए अत्यंत गर्मजोशी से हाथ मिलाया। यह वही ट्रंप हैं,जिन्होंने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान “ट्रेड वॉर” के जरिए चीन की अर्थव्यवस्था को चुनौती दी थी,लेकिन साथ ही समय- समय पर व्यक्तिगत संबंधों की राजनीति का भी प्रयोग किया। उनके चेहरे पर मुस्कुराहट,आत्मीयता और कैमरों की ओर देखने का आत्मविश्वास था,यह ट्रंप की विशिष्ट शैली है, जो वे अक्सर कूटनीतिक मंचों पर दिखाते हैं।इसके विपरीत,शी जिनपिंग का चेहरा लगभग भावहीन था, न मुस्कुराहट,न तनाव,न ही कोई प्रतिक्रिया। यह चीन की कूटनीतिक परंपरा का हिस्सा है,जहाँ “संयम”और “भावनाओं का नियंत्रण” नेतृत्व की परिपक्वता का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इस बार उनकी शांति एक गहरी असहमति या असंतोष का संकेत भी दे रही थी। यह संकेत उस अविश्वास का था,जो अमेरिका और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों में और गहराता गया है,विशेषकर ट्रेड वॉर, टेक्नोलॉजी कंट्रोल्स, साउथ चाइना सी विवाद, और ताइवान के मुद्दों के कारण।
साथियों बात अगर हम ट्रंप का “अकेले चलना”,शक्ति प्रदर्शन या संदेश? कुछ समझने की करें तो,बैठक के समापन पर जब सभी नेता अपने-अपने मार्ग की ओर बढ़े, तो ट्रंप ने शी जिनपिंग के साथ कुछ औपचारिक शब्दों का आदान-प्रदान करने के बाद उन्हें उनकी गाड़ी तक छोड़ा फिर वहां से अकेले प्रस्थान किया। यह दृश्य मीडिया के कैमरों में कैद हुआ और तुरंत अंतरराष्ट्रीय सुर्खियाँ बन गया। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का “अकेले चलना” किसी अनायास घटना का परिणाम नहीं था, बल्कि एक सामरिक संकेत था,यह दिखाने के लिए कि अमेरिका किसी पर निर्भर नहीं है और वह विश्व मंच पर एकाकी नेतृत्व करने में सक्षम है। इसके विपरीत, शी जिनपिंग ने इस दृश्य को पूरी तरह नज़र अंदाज़ किया। उनका शांत और संयमित व्यवहार यह दर्शा रहा था कि चीन भावनात्मक प्रतिक्रियाओं से ऊपर उठकर रणनीतिक स्तर पर सोच रहा है। यह उनके “सॉफ्ट पॉवर” और “कूटनीतिक मौन”की नीति का प्रतीक है,जहाँ प्रतिक्रियाएँ शब्दों से नहीं, बल्कि नीतियों से दी जाती हैं।
साथियों बात अगर हम ट्रंप की मीडिया रणनीति और “10 में से 12” अंक देने को समझने की करें तो,मीटिंग के बाद अमेरिकी मीडिया में ट्रंप ने बयान दिया कि वे इस बैठक को “सफल” मानते हैं और उसे 10 में से 12 अंक देते हैं। यह बयान उनके विशिष्ट अंदाज़ का हिस्सा था अतिशयोक्ति पूर्ण, आत्मविश्वासी और मीडिया आकर्षण केंद्रित। ट्रंप जानते हैं कि उनकी राजनीतिक पहचान केवल नीतियों से नहीं, बल्कि नैरेटिव कंट्रोल से बनती है।उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि वे एक ऐसे नेता हैं,जो हरपरिस्थिति में विजयी दिखाई देते हैं।यह अमेरिकी मतदाताओं के लिए एक मनोवैज्ञानिक संकेत था कि ट्रंप वैश्विक कूटनीति में फिर से सक्रिय हैं और “अमेरिका की प्रतिष्ठा” को पुनः स्थापित कर रहे हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीयविश्लेषकों का मत इससे भिन्न है। उनका कहना है कि ट्रंप की यह सफलता घोषणा अधिकतर प्रचारात्मक थी, क्योंकि बैठक में किसी ठोस नीति या समझौते की घोषणा नहीं हुई।
साथियों बातअगर हम ट्रंप व ज़िनपिंग क़ी बुसान बैठक के भू-राजनीतिक निहितार्थ को समझने की करें तो, बुसान की बैठक केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी,यह आने वाले दशक की अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने वाला संकेत थी। अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा अब भू-अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल प्रभुत्व और कूटनीतिक गठबंधनों में परिलक्षित होगी।ट्रंप और शी जिनपिंग के चेहरे के भाव, उनकी शारीरिक भाषा, और उनके मौन तक ने इस बात को स्पष्ट कर दिया कि यह शीत युद्ध का नया संस्करण शुरू हो चुका है,एक ऐसा युद्ध, जिसमें हथियार नहीं बल्कि टैरिफ, टेक्नोलॉजी और ट्रेड ब्लॉक इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
साथियों बात अगर हम भारत की भूमिका, संतुलनकारी शक्ति को समझने की करें तो,इस पूरी परिदृश्य में भारत की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जहाँ ट्रंप भारत पर टैरिफ बढ़ाकर आर्थिक दबाव बना रहे हैं, वहीं भारत अब वैश्विक मंचों पर रणनीतिक आत्मनिर्भरता और मल्टी- अलाइनमेंट की नीति अपना रहा है। भारत न तो अमेरिका की कठपुतली है,न चीन का समर्थक ,बल्कि वह दोनों के बीच एक तटस्थ शक्ति संतुलनकारी देश के रूप में उभर रहा है। ट्रंप का भारत पर टैरिफ लगाना यह भी दर्शाता है कि अमेरिका अब भारत को केवल सहयोगी नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था के रूप में देखने लगा है। वहीं चीन भारत को एशिया में अमेरिका की कूटनीति का विस्तार मानता है। इस जटिल त्रिकोणीय संबंध में, भारत का हर कदम अब वैश्विक शक्ति समीकरणों को प्रभावित करता है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि एक फ्रेम में दो विपरीत ध्रुव,छह वर्षों बाद एक ही मंच पर दिखाई दिए ट्रंप और शी जिनपिंग,परंतु उनके बीच की मानसिक दूरी शायद पहले से भी अधिक बढ़ चुकी है। ट्रंप की राजनीति “सीधे टकराव और मीडिया प्रभुत्व” पर आधारित है, जबकि शी जिनपिंग “रणनीतिक संयम और दीर्घकालिक योजनाओं” के प्रतीक हैं।यह मुलाकात दुनियाँ के लिए एक प्रतीकात्मक संदेश है, कि वैश्विक शांति का रास्ता संवाद से गुजरता है,लेकिन संवाद तभी फलदायी होता है जब उसमें विश्वास और समानता की भावना हो। बुसान की यह मुलाकात फिलहाल विश्वास नहीं,बल्कि अविश्वास का संकेत बनकर उभरी है।ट्रंप और शी जिनपिंग भले ही एक फ्रेम में कैद हुए हों,लेकिन उनके बीच की विचारधारात्मक और नीतिगत दूरी आज भी उतनी ही गहरी है,जितनी प्रशांत महासागर के दोनों किनारों के बीच की दूरी।
संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9359653465