“वोट चोर, गद्दी छोड़” अभियान के तहत आदित्यपुर में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, 8 तारीख को निकलेगी विरोध पदयात्रा और होगा CEC का पुतला दहन।

“वोट चोर, गद्दी छोड़” अभियान के तहत आदित्यपुर में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, 8 तारीख को निकलेगी विरोध पदयात्रा और होगा CEC का पुतला दहन।

AICC के निर्देश पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस के आह्वान पर आयोजन, गम्हरिया लाल बिल्डिंग चौक से महात्मा गांधी की प्रतिमा तक पदयात्रा।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार एवं झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो ‘कमलेश’ के आह्वान पर आदित्यपुर नगर कांग्रेस कमेटी द्वारा आगामी 8 तारीख को विशाल विरोध कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

संतोष सिंह

जिलाध्यक्ष राज बागची के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम के तहत शाम 5:00 बजे गम्हरिया स्थित लाल बिल्डिंग चौक से प्रखंड परिसर में स्थापित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा तक विरोध पदयात्रा निकाली जाएगी।

पदयात्रा के समापन के बाद महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया जाएगा और उनके इस्तीफे की मांग की जाएगी।

कांग्रेस नेताओं ने बताया कि यह आयोजन कांग्रेस के राष्ट्रव्यापी अभियान “वोट चोर, गद्दी छोड़” को गति देने और देश में लोकतंत्र व चुनावी पारदर्शिता की रक्षा के उद्देश्य से किया जा रहा है।

इस विरोध कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने के लिए कांग्रेस पार्टी तथा ‘INDIA’ गठबंधन के सभी घटक दलों के शीर्ष नेताओं, कार्यकर्ताओं से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की गई है। विशेष रूप से आदित्यपुर नगर कांग्रेस कमेटी के सभी पदाधिकारीगण, 35 वार्डों के वार्ड अध्यक्ष, युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस, अल्पसंख्यक विभाग, ओबीसी प्रकोष्ठ, एसटी-एससी मोर्चा, सोशल मीडिया विभाग सहित सभी मंच-मोर्चा-प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य बताई गई है।

कांग्रेस नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हो रहे कुठाराघात के खिलाफ यह आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तक जारी रहेगा।

-: निवेदक :-
संतोष सिंह
अध्यक्ष
आदित्यपुर नगर कांग्रेस कमिटी

विश्व हिंदू रक्षा परिषद का ऐतिहासिक कार्यक्रम संपन्न, 21 देशों के प्रतिनिधि बने आयोजन के साक्षी, उपस्थित लोगों ने सनातन की रक्षा का लिया संकल्प।

विश्व हिंदू रक्षा परिषद का ऐतिहासिक कार्यक्रम संपन्न, 21 देशों के प्रतिनिधि बने आयोजन के साक्षी, उपस्थित लोगों ने सनातन की रक्षा का लिया संकल्प।

लखनऊ

विश्व हिंदू रक्षा परिषद के तत्वावधान में आयोजित द्वितीय अंतरराष्ट्रीय हिंदू प्रतिनिधि महासम्मेलन एवं भारतीय सनातन गौरव सम्मान समारोह ऐतिहासिक रूप से संपन्न हुआ। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर, लखनऊ में आयोजित इस महासम्मेलन में 21 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।

कार्यक्रम में देश-विदेश से आए संत-महात्मा, विद्वतजन, सामाजिक कार्यकर्ता एवं हजारों सनातन प्रेमियों की गरिमामय उपस्थिति रही। उपस्थित सभी लोगों ने एक स्वर में सनातन धर्म, संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा का संकल्प लिया।

समारोह में भारतीय सनातन गौरव सम्मान से विशिष्ट विभूतियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने धर्म और समाज के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। पूरे परिसर में जय श्री राम के जयघोष से वातावरण धर्ममय हो गया।

इस अवसर पर परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय ने कहा कि विश्व भर के हिंदुओं को एक मंच पर लाना ही हमारा लक्ष्य है। अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनीष राय ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम की जानकारी देते हुए परिषद के राष्ट्रीय सह प्रभारी (संपूर्ण भारत) भरत सिंह ने बताया कि यह आयोजन सनातन एकता की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। 21 देशों से आए प्रतिनिधियों ने भारतीय संस्कृति की सराहना की और इसे विश्व में फैलाने का संकल्प लिया।

वहीं राष्ट्रीय संगठन मंत्री हर चरण सिंह उर्फ राजा ने देश के युवाओं को सनातन एवं राष्ट्रीय सुरक्षा करने के लिए की बात कही।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्र रक्षा और धर्म रक्षा के संकल्प के साथ हुआ।

निवेदक –
भरत सिंह
राष्ट्रीय सह प्रभारी (संपूर्ण भारत)
विश्व हिंदू रक्षा परिषद
संपर्क: 8210048890

“सनातनी का बेटा हूं – भीड़ नहीं कलेजा लेकर चलता हूं”

द्वितीय अंतरराष्ट्रीय गौरव सम्मान समारोह में विश्व हिंदू रक्षा परिषद की गरिमामय उपस्थिति, 21 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल।

द्वितीय अंतरराष्ट्रीय गौरव सम्मान समारोह में विश्व हिंदू रक्षा परिषद की गरिमामय उपस्थिति, 21 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल।

लखनऊ/महोबा

विश्व हिंदू रक्षा परिषद के तत्वावधान में द्वितीय अंतरराष्ट्रीय हिंदू प्रतिनिधि महासम्मेलन एवं भारतीय सनातन गौरव सम्मान समारोह का भव्य आयोजन 04 अक्टूबर 2026, रविवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर, लखनऊ में किया जा रहा है।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 9:00 बजे ब्रेकफास्ट के साथ होगा, जबकि दोपहर 2 बजे के बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का सम्मेलन प्रारंभ होगा।

मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित हैं –
माननीय श्री राजनाथ सिंह जी, रक्षा मंत्री भारत सरकार, माननीय योगी आदित्यनाथ जी मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक, केशव प्रसाद मौर्य, डॉ. दिनेश शर्मा, विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह।

इस महासम्मेलन में 21 देशों के हिंदू प्रतिनिधि, संत-महात्मा, विद्वतजन, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विशिष्ट अतिथियों की गरिमामय उपस्थिति रहेगी। इस अवसर पर भारतीय सनातन गौरव सम्मान से विशिष्ट विभूतियों को सम्मानित भी किया जाएगा।

परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय एवं अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनीष राय के नेतृत्व में यह आयोजन हो रहा है।

इस संबंध में जानकारी देते हुए परिषद के राष्ट्रीय सह प्रभारी (संपूर्ण भारत) भरत सिंह ने बताया कि इस ऐतिहासिक सम्मेलन का उद्देश्य विश्व भर के हिंदू समाज को एक मंच पर लाकर सनातन संस्कृति, राष्ट्र रक्षा और हिंदू एकता को सुदृढ़ करना है। देश-विदेश से हजारों प्रतिनिधियों के पहुंचने की संभावना है।

निवेदक –
भरत सिंह
राष्ट्रीय सह प्रभारी (संपूर्ण भारत)
विश्व हिंदू रक्षा परिषद
संपर्क 8210048890

“सनातनी का बेटा हूं – भीड़ नहीं कलेजा लेकर चलता हूं”-भरत सिंह

लेसड़ाही टोले का नाम बदलकर हुआ ‘आदर्श नगर’।

लेसड़ाही टोले का नाम बदलकर हुआ ‘आदर्श नगर’।

बरडीहा

बीडीओ प्रवीण कुमार सिंह ने सुबह लगभग 12 किलोमीटर पैदल भ्रमण कर ग्रामीणों की सहमति से लिया ऐतिहासिक निर्णय, सड़क, जर्जर पुल, खराब चापानल व बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने के दिए निर्देश।

प्रवीण कुमार सिंह बीडीओ सह सीओ बरडीहा ने आज सुबह क्षेत्र में पैदल भ्रमण कर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और विकास कार्यों का जायजा लिया। भ्रमण के दौरान जब उन्हें यह जानकारी मिली कि आदर पंचायत के अंतर्गत एक टोला ‘लेसड़ाही टोला’ के नाम से जाना जाता है, जहां अब तक समुचित रास्ते और बिजली के खंभों का अभाव है, तो उन्होंने त्वरित संज्ञान लिया।

बीडीओ प्रवीण कुमार सिंह ने कहा कि टोला का यह नाम गरिमापूर्ण नहीं है और इसे तत्काल बदला जाना चाहिए। उन्होंने कहा—“नाम व्यक्ति और समाज के जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। किसी भी व्यक्ति, टोले अथवा गांव का नाम ऐसा होना चाहिए जिसे हर नागरिक गर्व और सम्मान के साथ ले सके।”

इसके बाद वे स्वयं भारी जनसमूह के साथ उक्त टोले में पहुंचे और सभी ग्रामीणों की सर्वसम्मति से टोले का नाम बदलकर औपचारिक रूप से ‘आदर्श नगर’ रखा। नामकरण के तुरंत बाद बीडीओ ने मौके से ही संबंधित इंजीनियर से बात कर टोले तक सड़क निर्माण हेतु अविलंब प्राक्कलन (एस्टीमेट) तैयार करने का निर्देश दिया। सड़क निर्माण के मार्ग में पड़ने वाली रैयती भूमि के भू-स्वामियों से भी वार्ता की गई, जिन्होंने सहर्ष अपनी सहमति प्रदान कर दी है। इसके साथ ही टोले में बिजली के खंभे लगाने और तार पहुंचाने को लेकर बिजली विभाग के अधिकारियों से भी बात की गई।

अन्य समस्याओं पर भी त्वरित कार्रवाई:

पेयजल की समस्या: निरीक्षण के दौरान 4 से 5 चापाकल पूरी तरह खराब पाए गए। ग्रामीणों की सुविधा को देखते हुए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को तत्काल सूचित करते हुए सभी खराब चापाकलों को अविलंब दुरुस्त कराने का निर्देश दिया गया।

जर्जर पुल की मरम्मत व चेतावनी: मदरसा चौक, आदर स्थित नहर पर बने पुल—जो सुखनदी पंचायत को जोड़ता है—का जायजा लिया गया। भारी वाहनों के आवागमन के कारण किनारे से लगभग 12 फीट पुल क्षतिग्रस्त हो चुका है।
सुखनदी में सड़क निर्माण कर रहे संवेदक को मौके पर ही पुल की अविलंब मरम्मत करने हेतु निर्देशित किया गया अन्यथा भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगाने की कार्रवाई की जाएगी।

सड़क निर्माण: आगे भ्रमण के दौरान एक-दो अन्य टोले भी मिले जहां रास्ते जर्जर स्थिति में हैं। उन सभी रास्तों पर भी शीघ्र निर्माण कार्य प्रारंभ कराने का निर्देश दिया गया।

इस 12 किलोमीटर के पूरे पैदल भ्रमण व निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान आदर पंचायत के मुखिया गयासुद्दीन अंसारी, लावाचंपा के सुनील चौधरी, राजन चौधरी सहित सैकड़ों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण व प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

सागर लोहार अपने पैतृक गांव पहुंचे, पिता को श्रद्धांशशजलि अर्पित की, गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के बीच खाद्य सामग्री का किया वितरण।

सागर लोहार अपने पैतृक गांव पहुंचे, पिता को श्रद्धांशशजलि अर्पित की, गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के बीच खाद्य सामग्री का किया वितरण।

सरायकेला

सरायकेला: सरायकेला-खरसावां जिले के टिउनिया गांव में शुक्रवार को सामाजिक सरोकार और मानवीय संवेदना की मिसाल देखने को मिली। अपने स्वर्गीय पिता रोसो राज लोहार की पहली पुण्यतिथि पर सागर लोहार अपने पैतृक गांव पहुंचे। यहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर पिता को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके चित्र पर माल्यार्पण कर आशीर्वाद लिया.

पुण्यतिथि के अवसर को उन्होंने महज रस्म तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे सेवा और जनसरोकार से जोड़ते हुए गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के बीच खाद्य सामग्री का वितरण किया। सागर लोहार ने जरूरतमंदों के बीच चावल, आलू, तेल समेत अन्य आवश्यक सामग्री बांटी। इस दौरान उन्होंने गांव के बुजुर्गों और वरिष्ठजनों से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया और उनके प्रति सम्मान प्रकट किया.

इस मौके पर सागर लोहार ने कहा कि पिता की पहली पुण्यतिथि पर पैतृक गांव पहुंचकर पूजा-पाठ करने और उनकी स्मृति में जरूरतमंदों की सेवा करने का अवसर मिला। अपनी सामर्थ्य के अनुसार गरीब परिवारों के बीच आवश्यक सामग्री का वितरण किया है, उन्होंने कहा कि जनसेवा का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा.

उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य अब गरीब, वंचित और जरूरतमंद लोगों के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझना और उनकी आवाज को मजबूती से उठाना है। उन्होंने सामाजिक सेवा को जीवन का उद्देश्य बनाकर समाजहित में लगातार काम करने का संकल्प दोहराया.

पिता की पहली पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि के साथ जरूरतमंदों की सेवा का यह प्रयास सागर लोहार ने अपने पिता रोसो राज लोहार की स्मृति को समर्पित किया। गांव में आयोजित इस कार्यक्रम ने श्रद्धांजलि को सेवा और संवेदना से जोड़ते हुए एक सामाजिक संदेश भी दिया.

कालोनीवासियों की आपत्ति के बाद पैदल मार्ग खोलने का निर्णय, प्रबंधन ने अपनाई लोकतांत्रिक प्रक्रिया।

कालोनीवासियों की आपत्ति के बाद पैदल मार्ग खोलने का निर्णय, प्रबंधन ने अपनाई लोकतांत्रिक प्रक्रिया।

सरायकेला/गम्हरिया

टाटा लॉन्ग प्रोडक्ट्स से संबंधित कालोनी में कर्मचारियों एवं कालोनीवासियों के लिए लंबे समय से उपयोग किए जा रहे पैदल आवागमन मार्ग को बंद किए जाने के प्रस्ताव पर कालोनीवासियों द्वारा दर्ज कराई गई विधिसम्मत आपत्ति के बाद मामले का सकारात्मक समाधान निकल आया है। जिला प्रशासन के हस्तक्षेप और कालोनीवासियों के आग्रह के बाद कंपनी प्रबंधन ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से सर्वे कराकर रास्ते को खुला रखने का निर्णय लिया है।

इस संबंध में 26 सितंबर 2026 को पत्राचार संख्या 59/2026-27 के माध्यम से उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, सरायकेला-खरसावां, झारखंड को पूरे मामले की जानकारी देते हुए कालोनीवासियों की आपत्ति से अवगत कराया गया था। जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद कंपनी प्रबंधन से सर्वे के माध्यम से कालोनीवासियों की राय लेने का अनुरोध किया गया।

प्रबंधन ने इस सुझाव को स्वीकार करते हुए एक निर्धारित प्रारूप पर कालोनीवासियों से राय ली। सर्वे में संबंधित व्यक्ति का नाम, मकान संख्या, कर्मचारी आईडी संख्या एवं मोबाइल नंबर दर्ज कर हस्ताक्षर लिए गए। इसमें कालोनीवासियों से यह राय मांगी गई कि संबंधित पैदल मार्ग को बंद रखा जाए अथवा खुला रखा जाए।

सर्वे में कालोनीवासियों के बहुमत की राय रास्ते को खुला रखने के पक्ष में रही। इसके आधार पर कंपनी प्रबंधन ने पैदल मार्ग को खोलने का निर्णय लिया। इस निर्णय से कर्मचारियों और कालोनीवासियों में खुशी का माहौल है।

हालांकि, प्रबंधन की ओर से सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक पैदल मार्ग पर ताला लगाने का सुझाव दिया गया। इस पर बैठक में कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व कर रहे अजय कुमार शर्मा ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि पूर्व में इस मार्ग को रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक बंद रखने की व्यवस्था थी और उसी व्यवस्था को जारी रखा जाना चाहिए।

उन्होंने प्रबंधन का ध्यान इस ओर भी आकृष्ट कराया कि कर्मचारियों की ड्यूटी समाप्त होने के बाद घर लौटने का सामान्य समय रात लगभग 10:30 से 11 बजे के बीच होता है, जबकि सुबह की ड्यूटी के लिए कर्मचारियों का आवागमन लगभग 5 बजे से 5:30 बजे के बीच शुरू हो जाता है। ऐसे में शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक रास्ता बंद करने से कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

अजय कुमार शर्मा ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर वैकल्पिक सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि यदि सुरक्षा कारणों से रास्ते की निगरानी आवश्यक है, तो वहां एक सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था की जा सकती है। सुरक्षा कर्मी कर्मचारियों के आईडी कार्ड की जांच कर सकते हैं। किसी कर्मचारी के अतिथि के आने की स्थिति में संबंधित मकान मालिक से मोबाइल फोन पर संपर्क कर अनुमति देने की व्यवस्था भी की जा सकती है। इससे सुरक्षा व्यवस्था भी बनी रहेगी और कालोनीवासियों के आवागमन में भी बाधा नहीं आएगी।

विस्तृत विचार-विमर्श के बाद बैठक में सर्वसम्मति से पैदल मार्ग को खोलने का निर्णय लिया गया।

अरुणोदय क्लब का भी किया गया निरीक्षण

इसी बैठक के दौरान अजय कुमार शर्मा ने प्रबंधन के समक्ष अरुणोदय क्लब के संचालन से संबंधित एक विशेष विषय भी रखा। उनके आग्रह पर प्रबंधन के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर अरुणोदय क्लब का निरीक्षण किया। इस दौरान क्लब के मुखिया अखिलेश भी मौके पर उपस्थित थे।

बैठक का नेतृत्व प्लांट हेड श्री प्रमोद जी ने किया। कर्मचारियों की ओर से अजय कुमार शर्मा ने प्रतिनिधित्व किया। प्रबंधन की ओर से एडमिनिस्ट्रेशन हेड श्री महेन्द्र सिंह, सिक्योरिटी हेड श्री आकाश जी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

कर्मचारियों की ओर से शैलेश तिवारी, शैलेन्द्र सिंह, पवन सिंह तथा टाटा मजदूर यूनियन के उपाध्यक्ष श्री दिनेश उपाध्याय जी सहित अन्य कर्मचारी एवं प्रतिनिधि मौजूद थे।

कालोनीवासियों की आपत्ति के बाद पैदल मार्ग खोलने का निर्णय, प्रबंधन ने अपनाई लोकतांत्रिक प्रक्रिया

गम्हरिया/आदित्यपुर, 2 अक्टूबर 2026।
टाटा लॉन्ग प्रोडक्ट्स से संबंधित कालोनी में कर्मचारियों एवं कालोनीवासियों के लिए लंबे समय से उपयोग किए जा रहे पैदल आवागमन मार्ग को बंद किए जाने के प्रस्ताव पर कालोनीवासियों द्वारा दर्ज कराई गई विधिसम्मत आपत्ति के बाद मामले का सकारात्मक समाधान निकल आया है। जिला प्रशासन के हस्तक्षेप और कालोनीवासियों के आग्रह के बाद कंपनी प्रबंधन ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से सर्वे कराकर रास्ते को खुला रखने का निर्णय लिया है।

इस संबंध में 26 सितंबर 2026 को पत्राचार संख्या 59/2026-27 के माध्यम से उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, सरायकेला-खरसावां, झारखंड को पूरे मामले की जानकारी देते हुए कालोनीवासियों की आपत्ति से अवगत कराया गया था। जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद कंपनी प्रबंधन से सर्वे के माध्यम से कालोनीवासियों की राय लेने का अनुरोध किया गया।

प्रबंधन ने इस सुझाव को स्वीकार करते हुए एक निर्धारित प्रारूप पर कालोनीवासियों से राय ली। सर्वे में संबंधित व्यक्ति का नाम, मकान संख्या, कर्मचारी आईडी संख्या एवं मोबाइल नंबर दर्ज कर हस्ताक्षर लिए गए। इसमें कालोनीवासियों से यह राय मांगी गई कि संबंधित पैदल मार्ग को बंद रखा जाए अथवा खुला रखा जाए।

सर्वे में कालोनीवासियों के बहुमत की राय रास्ते को खुला रखने के पक्ष में रही। इसके आधार पर कंपनी प्रबंधन ने पैदल मार्ग को खोलने का निर्णय लिया। इस निर्णय से कर्मचारियों और कालोनीवासियों में खुशी का माहौल है।

हालांकि, प्रबंधन की ओर से सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक पैदल मार्ग पर ताला लगाने का सुझाव दिया गया। इस पर बैठक में कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व कर रहे अजय कुमार शर्मा ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि पूर्व में इस मार्ग को रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक बंद रखने की व्यवस्था थी और उसी व्यवस्था को जारी रखा जाना चाहिए।

उन्होंने प्रबंधन का ध्यान इस ओर भी आकृष्ट कराया कि कर्मचारियों की ड्यूटी समाप्त होने के बाद घर लौटने का सामान्य समय रात लगभग 10:30 से 11 बजे के बीच होता है, जबकि सुबह की ड्यूटी के लिए कर्मचारियों का आवागमन लगभग 5 बजे से 5:30 बजे के बीच शुरू हो जाता है। ऐसे में शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक रास्ता बंद करने से कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

अजय कुमार शर्मा ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर वैकल्पिक सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि यदि सुरक्षा कारणों से रास्ते की निगरानी आवश्यक है, तो वहां एक सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था की जा सकती है। सुरक्षा कर्मी कर्मचारियों के आईडी कार्ड की जांच कर सकते हैं। किसी कर्मचारी के अतिथि के आने की स्थिति में संबंधित मकान मालिक से मोबाइल फोन पर संपर्क कर अनुमति देने की व्यवस्था भी की जा सकती है। इससे सुरक्षा व्यवस्था भी बनी रहेगी और कालोनीवासियों के आवागमन में भी बाधा नहीं आएगी।

विस्तृत विचार-विमर्श के बाद बैठक में सर्वसम्मति से पैदल मार्ग को खोलने का निर्णय लिया गया।

अरुणोदय क्लब का भी किया गया निरीक्षण

इसी बैठक के दौरान अजय कुमार शर्मा ने प्रबंधन के समक्ष अरुणोदय क्लब के संचालन से संबंधित एक विशेष विषय भी रखा। उनके आग्रह पर प्रबंधन के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर अरुणोदय क्लब का निरीक्षण किया। इस दौरान क्लब के मुखिया अखिलेश भी मौके पर उपस्थित थे।

बैठक का नेतृत्व प्लांट हेड श्री प्रमोद जी ने किया। कर्मचारियों की ओर से अजय कुमार शर्मा ने प्रतिनिधित्व किया। प्रबंधन की ओर से एडमिनिस्ट्रेशन हेड श्री महेन्द्र सिंह, सिक्योरिटी हेड श्री आकाश जी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

कर्मचारियों की ओर से शैलेश तिवारी, शैलेन्द्र सिंह, पवन सिंह तथा टाटा मजदूर यूनियन के उपाध्यक्ष श्री दिनेश उपाध्याय जी सहित अन्य कर्मचारी एवं प्रतिनिधि मौजूद थे।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सराहना

पैदल मार्ग खोलने के निर्णय के बाद कर्मचारियों में संतोष और खुशी का माहौल है। अजय कुमार शर्मा ने कर्मचारियों की एकजुटता और शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के लिए सभी का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कंपनी प्रबंधन द्वारा कालोनीवासियों की राय जानने के लिए सर्वे की लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाने की सराहना करते हुए कहा कि कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच संवाद एवं आपसी सहमति से समस्याओं का समाधान निकालना औद्योगिक संबंधों को मजबूत करता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी प्रबंधन इसी प्रकार संवाद, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्राथमिकता देगा।

पैदल मार्ग का खुलना कर्मचारियों के लिए केवल आवागमन की सुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा, सुविधा और प्रबंधन-कर्मचारी संवाद के बीच संतुलन का एक सकारात्मक उदाहरण भी माना जा रहा है।



पैदल मार्ग खोलने के निर्णय के बाद कर्मचारियों में संतोष और खुशी का माहौल है। अजय कुमार शर्मा ने कर्मचारियों की एकजुटता और शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के लिए सभी का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कंपनी प्रबंधन द्वारा कालोनीवासियों की राय जानने के लिए सर्वे की लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाने की सराहना करते हुए कहा कि कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच संवाद एवं आपसी सहमति से समस्याओं का समाधान निकालना औद्योगिक संबंधों को मजबूत करता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी प्रबंधन इसी प्रकार संवाद, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्राथमिकता देगा।

पैदल मार्ग का खुलना कर्मचारियों के लिए केवल आवागमन की सुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा, सुविधा और प्रबंधन-कर्मचारी संवाद के बीच संतुलन का एक सकारात्मक उदाहरण भी माना जा रहा है।

दुर्गा पूजा त्यौहार के मद्देनजर गम्हरिया-आदित्यपुर क्षेत्र में शराब की अड्डेबाजी के विरुद्ध उत्पाद विभाग एवं पुलिस प्रशासन का संयुक्त अभियान।

दुर्गा पूजा त्यौहार के मद्देनजर गम्हरिया-आदित्यपुर क्षेत्र में शराब की अड्डेबाजी के विरुद्ध उत्पाद विभाग एवं पुलिस प्रशासन का संयुक्त अभियान।

सरायकेला-खरसावां

आगामी दुर्गा पूजा के मद्देनजर उपायुक्त, सरायकेला-खरसावां के निर्देशानुसार संध्या उत्पाद विभाग एवं गम्हरिया थाना की संयुक्त टीम द्वारा छोटा गम्हरिया एवं ऊषा मार्टिन क्षेत्र में शराब की अड्डेबाजी के विरुद्ध अभियान चलाया गया।

अभियान के दौरान सड़क किनारे स्थित होटल एवं खाद्य स्टॉल संचालकों को अनावश्यक जमावड़ा को बढ़ावा नहीं देने तथा प्रतिष्ठानों के आसपास शराब का सेवन एवं अड्डेबाजी नहीं होने देने का निर्देश दिया गया। सार्वजनिक स्थलों एवं मैदानों में शराब का सेवन कर रहे लोगों को वहां से हटाया गया। इसके अतिरिक्त आदित्यपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत केडिया लाल बिल्डिंग एवं बिको मोड़ क्षेत्र में भी गश्ती कर स्थिति का जायजा लिया गया।

शराब की अड्डेबाजी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश, नियमित रूप से चलेगा अभियान

उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सार्वजनिक स्थलों, होटल एवं खाद्य प्रतिष्ठानों के आसपास शराब की अड्डेबाजी को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अड्डेबाजी में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा ऐसे स्थलों पर नियमित निगरानी एवं अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है।

उपायुक्त ने आमजनों से दुर्गा पूजा के दौरान शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने तथा विधि-व्यवस्था के संधारण में जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि शराब की अड्डेबाजी एवं अन्य असामाजिक गतिविधियों की सूचना तत्काल संबंधित प्रशासनिक अथवा पुलिस पदाधिकारियों को दें।

वीर बिरसा मुंडा स्टेडियम बचाओ उलगुलान सफल, शिबू सोरेन की प्रतिमा का निर्णय वापस; 29 सितंबर को सरायकेला में होगी समीक्षा बैठक।

वीर बिरसा मुंडा स्टेडियम बचाओ उलगुलान सफल, शिबू सोरेन की प्रतिमा का निर्णय वापस; 29 सितंबर को सरायकेला में होगी समीक्षा बैठक।

सरायकेला-खरसावां

‘वीर बिरसा मुंडा स्टेडियम बचाओ उलगुलान’ को आदिवासी समाज के एकजुट प्रयास से सफलता मिली है। आंदोलन के दबाव में प्रशासन ने स्टेडियम परिसर में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय वापस ले लिया है, जिसका आंदोलनकारियों ने स्वागत किया है।

इस सफलता की समीक्षा और आगे की रणनीति तय करने के लिए मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को सुबह 10:00 बजे, बिरसा मुंडा स्टेडियम, सरायकेला में समीक्षा बैठक बुलाई गई है। बैठक में आंदोलन की समीक्षा के साथ-साथ स्टेडियम से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा होगी।

आयोजकों ने आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाने वाले सभी आंदोलनकारियों की उपस्थिति अनिवार्य बताई है। साथ ही जो साथी अब तक आंदोलन से नहीं जुड़ पाए हैं, उनसे भी बैठक में शामिल होने की अपील की गई है।

बैठक में अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 11 सदस्यीय समन्वय टीम का गठन किया गया है। यह टीम विभिन्न संगठनों, समाज के पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, मीडिया और राजनीतिक दलों से समन्वय कर लोगों को बैठक से जोड़ेगी।

समन्वय की जिम्मेदारी इस प्रकार सौंपी गई है:
• सावित्री कुदादा – AHSMS केंद्रीय अध्यक्ष कृष्णा बोदरा के सभी पदाधिकारियों से समन्वय

• विष्णु बानरा, राष्ट्रीय अध्यक्ष कोल सेना – AHSMS केंद्रीय अध्यक्ष मुकेश बिरुआ एवं AHSYM के पदाधिकारियों से समन्वय

• दिवाकर सरदार – सीनी-उपरदुगनी क्षेत्र के आदिवासी भूमिज/मुंडा समाज से समन्वय

• रहिन्द्र सरदार एवं श्री जगदीश सरदार – चांडिल अनुमंडल/पूर्वी सिंहभूम क्षेत्र से समन्वय

• महेश मिंज – सरायकेला-खरसावां/पश्चिमी सिंहभूम जिला से समन्वय

• साधु बानरा, DESHAULI फाउंडेशन – खूंटी/रांची जिला से समन्वय

• कोल झारखंड बोदरा, अध्यक्ष मानकी मुंडा – कोल्हान के डाकुवा/मुंडा/मानकी से समन्वय

• गणेश गगराई, अध्यक्ष आदिवासी हो समाज महासभा – कोल्हान के मुखिया/पंचायत समिति/जिला परिषद सदस्यों से समन्वय

• वीर सिंह सीजुई – कोल्हान के प्रिंट मीडिया/यूट्यूबर/ब्लॉगर्स से समन्वय

• विष्णु सरदार – सभी राजनीतिक दलों से समन्वय

• सावन सोय, अध्यक्ष ऑल इंडिया हो लैंग्वेज एक्शन कमेटी – 10 सदस्यीय टीम से समन्वय कर 28 सितंबर तक उपस्थिति सूची और मुख्य एजेंडा तैयार करेंगे। एजेंडा मानसिंह मुंडा, सुखराम सोय और रामचंद्र मुंडा के साथ मिलकर तैयार किया जाएगा।

बैंक हड़ताल पर ब्रेक, यूनियनों ने विरोध प्रदर्शन वापस लिया।

बैंक हड़ताल पर ब्रेक, यूनियनों ने विरोध प्रदर्शन वापस लिया।

जमशेदपुर

बैंक कर्मियों और अधिकारियों द्वारा घोषित हड़ताल अभी नहीं होगी। इंडियन बैंक्स एसोसिएशन और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के प्रतिनिधियों के बीच रविवार को हुई वार्ता में कई अहम मुद्दों पर सहमति बन गई, जिसके बाद हड़ताल के साथ-साथ विरोध से जुड़े सभी कार्यक्रमों को रोकने का फैसला लिया गया।

यूएफबीयू की जानकारी के मुताबिक, बैठक में पांच दिन के कार्य सप्ताह की मांग पर गंभीरता से विचार करने हेतु आईबीए और यूएफबीयू की एक संयुक्त उच्चस्तरीय कमेटी तुरंत बनाने पर सहमति हुई है। यह कमेटी सभी संबंधित पक्षों से बातचीत कर इसका हल निकालने की कोशिश करेगी।

वहीं स्केल-4 और उससे वरिष्ठ अधिकारियों के लिए लागू परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम में बदलाव को लेकर आईबीए सरकार के सामने सिफारिश रखेगा। इसके अलावा 8 मार्च 2024 के समझौते में अटके हुए विषयों को जल्द निपटाने पर भी दोनों पक्षों में सहमति बनी।

वार्ता सफल रहने के बाद यूएफबीयू ने प्रस्तावित हड़ताल और आंदोलन संबंधी कार्यक्रमों को फिलहाल टाल दिया है। इस संबंध में 27 सितंबर 2026 को परिपत्र जारी किया गया। इससे बैंक स्टाफ और अधिकारियों में आंदोलन को लेकर बनी असमंजस की स्थिति दूर होने की संभावना है।

90% लाने वाला जमशेदपुर का होनहार छात्र 9वीं मंजिल से कैसे गिरा? शरीर पर चोटें कहानी से अलग, पिता ने लगाई CBI जांच की गुहार।

90% लाने वाला जमशेदपुर का होनहार छात्र 9वीं मंजिल से कैसे गिरा? शरीर पर चोटें कहानी से अलग, पिता ने लगाई CBI जांच की गुहार।

जमशेदपुर

जमशेदपुर के डीबीएमएस स्कूल से लगभग 90% अंक लाकर मणिपाल इंस्टीट्यूट में पढ़ रहे लक्ष्य मिश्रा की 6-7 अप्रैल की रात संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। कॉलेज प्रशासन ने परिजनों को सूचना दी कि छात्र 9वें फ्लोर से गिर गया।

पिता का कहना है कि बेटे के शरीर पर लगी चोटें 9वें फ्लोर से गिरने से मेल नहीं खातीं। घटनास्थल पर खून का कोई निशान नहीं था। आरोप है कि फॉरेंसिक टीम के आने से पहले ही हॉस्टल के फ्लोर को धो दिया गया और शव को चादर-तकिए में लपेट दिया गया।

सबसे बड़ा सवाल – हादसे के बाद बच्चे को 20 किमी दूर सरकारी अस्पताल ले जाने के बजाय कॉलेज के ही निजी अस्पताल में क्यों रखा गया? और हॉस्टल का अटेंडेंस रजिस्टर 5.25 बता रहा है जबकि हॉस्पिटल का रजिस्टर 30 दिन का अटेंडेंस दिखा रहा है।

परिजनों ने कर्नाटक पुलिस से निष्पक्ष जांच और बिसरा को सुरक्षित रख कर दिल्ली AIIMS के डॉक्टरों से दोबारा पोस्टमार्टम जांच की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से भी गुहार लगाई है।

साथ ही इस पुरे मामले पर पिता ने CBI जांच की गुहार लगाई है।

ईचागढ़ के बिस्टाटांड गांव में गरीबों के हक पर डाका: आवास योजना से वंचित हैं धनंजय और भजोहरि, जर्जर छतों के नीचे और हाथियों के खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं परिवार।

ईचागढ़ के बिस्टाटांड गांव में गरीबों के हक पर डाका: आवास योजना से वंचित हैं धनंजय और भजोहरि, जर्जर छतों के नीचे और हाथियों के खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं परिवार।

सरायकेला/ईचागढ़

(मालखान महतो )

प्रखंड अंतर्गत बिस्टाटांड गांव से प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की एक बेहद दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। यहाँ सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ (PMAY) गरीबों के लिए महज़ एक छलावा बनकर रह गई है। कागजों पर विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाले प्रशासन की नाक के नीचे बिस्टाटांड गांव के असली जरूरतमंद आज भी नारकीय जीवन जीने को विवश हैं।
गांव के अत्यंत गरीब और लाचार ग्रामीण धनंजय महतो और भजोहरि महतो का जीवन आज गंभीर संकट में है। दोनों परिवारों के कच्चे मकान पूरी तरह से जर्जर और ढलने की कगार पर पहुंच चुके हैं। स्थिति इतनी दयनीय है कि घरों की छतें पूरी तरह टूट चुकी हैं, जिसके कारण उन्हें बारिश और धूप से बचने के लिए बांस और प्लास्टिक शीट (तिरपाल) का सहारा लेना पड़ रहा है।

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह पूरा इलाका हाथी प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, जहाँ अक्सर जंगली हाथियों का आतंक बना रहता है। ऐसे संवेदनशील और खतरनाक इलाके में जर्जर और कच्चे मकानों में रहना इन गरीब परिवारों के लिए मौत को दावत देने जैसा है। सिर पर पक्की छत न होने और हाथियों के हमले के लगातार बने रहने वाले खौफ के कारण इन परिवारों को हर पल अनहोनी का डर सताता रहता है और उनका हर दिन जान हथेली पर लेकर गुजर रहा है।

स्थानीय ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक गरीबों तक पहुंचने के बजाय, बिचौलियों और स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले अपात्र लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। जरूरतमंदों के हक को ताक पर रखकर उन लोगों को आवास आवंटित किए जा रहे हैं जो आर्थिक रूप से पहले से ही सक्षम हैं, जबकि असली हकदार दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।

इस गंभीर मामले को लेकर बिस्टाटांड गांव के लोगों ने कई बार स्थानीय प्रखंड कार्यालय के चक्कर काटे और अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण अब तक कोई सुध नहीं ली गई है। अधिकारियों की इस गहरी उदासीनता से ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

अब ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च-स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके। इसके साथ ही, हाथी प्रभावित इस संवेदनशील क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए पीड़ित धनंजय महतो और भजोहरि महतो को फौरन प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सुरक्षित पक्का मकान मुहैया कराया जाए, और इस योजना में गड़बड़ी करने वाले तथा अपात्रों को लाभ दिलाने वाले भ्रष्ट तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

ईश्वर चंद्र विद्यासागर : शिक्षा और समाज सुधार के महान पुरोधा।

ईश्वर चंद्र विद्यासागर : शिक्षा और समाज सुधार के महान पुरोधा।

कोलकाता

भारत के सामाजिक और शैक्षिक इतिहास में ईश्वर चंद्र विद्यासागर का नाम उन महान व्यक्तित्वों में लिया जाता है, जिन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया और रूढ़ियों के विरुद्ध तर्क, मानवीयता तथा सुधार का रास्ता अपनाया। उनकी जयंती पर देश उन्हें श्रद्धा और कृतज्ञता के साथ याद करता है। वे केवल महान शिक्षाशास्त्री ही नहीं, बल्कि समाज सुधारक, लेखक, संस्कृत विद्वान और मानवीय मूल्यों के प्रबल समर्थक थे।

ईश्वर चंद्र विद्यासागर का जन्म 26 सितंबर 1820 को पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के वीरसिंह गांव में हुआ था। उनका मूल नाम ईश्वर चंद्र बंद्योपाध्याय था। साधारण आर्थिक परिस्थितियों में पले-बढ़े ईश्वर चंद्र ने अपनी प्रतिभा, परिश्रम और अध्ययन के बल पर शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण प्रतिष्ठा प्राप्त की। संस्कृत के गहन ज्ञान के कारण उन्हें ‘विद्यासागर’ की उपाधि मिली, जिसका अर्थ है—‘विद्या का सागर’।

उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि कठिन परिस्थितियां प्रतिभा और संकल्प के मार्ग में स्थायी बाधा नहीं बन सकतीं। उन्होंने शिक्षा को केवल व्यक्तिगत उन्नति का साधन न मानकर समाज को जागरूक और सशक्त बनाने का माध्यम माना। विशेष रूप से बालिकाओं की शिक्षा के प्रति उनका दृष्टिकोण अपने समय से काफी आगे था। उन्होंने महिला शिक्षा को सामाजिक विकास के लिए आवश्यक माना और बालिकाओं के लिए विद्यालयों की स्थापना तथा उनके विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ईश्वर चंद्र विद्यासागर का सबसे महत्वपूर्ण योगदान सामाजिक सुधार के क्षेत्र में माना जाता है। उस समय हिंदू समाज में विधवा महिलाओं की स्थिति अत्यंत कठिन थी। बाल विवाह और कम उम्र में विधवापन जैसी समस्याओं ने बड़ी संख्या में महिलाओं के जीवन को प्रभावित किया था। विद्यासागर ने विधवा पुनर्विवाह के समर्थन में मजबूत सामाजिक और वैचारिक अभियान चलाया। उन्होंने शास्त्रों के अध्ययन और तर्क के आधार पर यह स्पष्ट करने का प्रयास किया कि विधवा पुनर्विवाह का विरोध धार्मिक रूप से अनिवार्य नहीं है।उनके प्रयासों का प्रभाव व्यापक हुआ और अंततः हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम, 1856 के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह कानून भारतीय सामाजिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। हालांकि कानून बन जाना सामाजिक सोच बदलने के लिए पर्याप्त नहीं था, फिर भी विद्यासागर ने अपने प्रयासों से सुधार की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार किया।

बाल विवाह और महिलाओं की शिक्षा के प्रश्न पर भी उन्होंने समाज को सोचने के लिए प्रेरित किया। उनका मानना था कि किसी समाज की प्रगति का आकलन इस बात से किया जा सकता है कि वहां महिलाओं को कितने अवसर और सम्मान प्राप्त हैं। इसी विचार के अनुरूप उन्होंने शिक्षा के प्रसार को सामाजिक सुधार से जोड़ा।शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। संस्कृत कॉलेज से जुड़े रहते हुए उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में कई सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया। वे ऐसी शिक्षा के पक्षधर थे, जो केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यार्थियों में तर्क, भाषा-बोध और व्यावहारिक समझ विकसित करे। बंगाली भाषा और साहित्य के विकास में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘बर्ण परिचय’ ने बंगाली भाषा सीखने की प्रक्रिया को सरल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और लंबे समय तक बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा का आधार बनी रही।विद्यासागर की सबसे बड़ी विशेषताओं में उनकी सरलता और मानवीय संवेदना शामिल थी। वे जरूरतमंदों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहते थे। गरीब विद्यार्थियों की मदद, शिक्षा के लिए सहयोग और वंचित वर्गों के प्रति सहानुभूति उनके व्यक्तित्व का हिस्सा थी। उनके लिए समाज सुधार केवल भाषण या लेखन का विषय नहीं था, बल्कि जीवन में उतारने वाला संकल्प था।

ईश्वर चंद्र विद्यासागर का व्यक्तित्व भारतीय पुनर्जागरण की उस धारा का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें शिक्षा, तर्क और सामाजिक चेतना के माध्यम से समाज में परिवर्तन लाने का प्रयास किया गया। उन्होंने परंपराओं का अंधानुकरण करने के बजाय उनके सामाजिक प्रभाव पर विचार करने की आवश्यकता बताई। जहां परंपरा मानव कल्याण में सहायक थी, वहां उसका सम्मान किया और जहां सामाजिक कुरीतियां लोगों के जीवन को प्रभावित करती थीं, वहां सुधार की आवाज उठाई।

उनका जीवन आज भी शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी के क्षेत्र में प्रेरणा देता है। आधुनिक भारत में जब शिक्षा को समान अवसर, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक न्याय से जोड़ा जा रहा है, तब विद्यासागर के विचार और कार्य विशेष रूप से प्रासंगिक दिखाई देते हैं। उन्होंने यह संदेश दिया कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति और समाज में विवेक, संवेदना और जिम्मेदारी का विकास करना भी है।

ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि एक व्यक्ति दृढ़ इच्छाशक्ति, ज्ञान और मानवीय संवेदना के बल पर सामाजिक परिवर्तन की मजबूत नींव रख सकता है। उनका योगदान किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। शिक्षा, भाषा, महिला अधिकार, सामाजिक सुधार और मानवीय सेवा—हर क्षेत्र में उन्होंने अपने समय पर गहरी छाप छोड़ी। आज उनकी जयंती पर उन्हें याद करना केवल एक महान व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि उन मूल्यों को स्मरण करना भी है जिनके लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित किया।

शिक्षा का विस्तार, महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा, सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जागरूकता तथा जरूरतमंदों के प्रति संवेदना—ये सभी उनके जीवन से मिलने वाली महत्वपूर्ण सीख हैं। ईश्वर चंद्र विद्यासागर भारतीय समाज सुधार आंदोलन के ऐसे पुरोधा थे, जिनकी विद्या के साथ मानवता भी उतनी ही विशाल थी। उनकी स्मृति आने वाली पीढ़ियों को यह प्रेरणा देती रहेगी कि ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह समाज के कल्याण और मानव जीवन को बेहतर बनाने में योगदान दे।

ईश्वर चंद्र विद्यासागर की जयंती पर उन्हें शत्-शत् नमन।

वरुण कुमार
लेखक एवं कवि
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