ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए रफ्तार को आगे बढ़ाने के लिए एन.डी.ए प्रत्याशी को जीताने का काम करें: बुद्धेश्वर मुर्मू

ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए रफ्तार को आगे बढ़ाने के लिए एन.डी.ए प्रत्याशी को जीताने का काम करें: बुद्धेश्वर मुर्मू

मुसाबनी

आजसू पार्टी में बुधवार को जिला प्रधान सचिव बुद्धेश्वर मुर्मू के नेतृत्व में आगामी घाटशिला विधानसभा उपचुनाव को लेकर एन डी ए के पक्ष में गोहला पंचायत के विक्रमपुर गांव का दौरा किया गया।

इस दौरान विक्रमपुर गांव में ग्राम प्रधान मानसिंह सोरेन के अध्यक्षता में ग्रामीणों के साथ बैठक किया गया और आगामी घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में एन डी ए प्रत्याशी के पक्ष में वोट देने की अपील कि गई । उन्होंने ग्रामीणों के समक्ष वर्तमान हेमंत सरकार द्वारा गांव के विकास में शिथिलता का आरोप लगाते हुए क्षेत्र का विकास रफ्तार को आगे बढ़ाने के लिए एन डी ए प्रत्याशी को जीताने के लिए अपील की गई। उन्होंने वर्तमान सरकार पर बोलते हुए कहा की गांव की विकास को हेमंत सरकार द्वारा ठप्प करके रख दिया है । वर्तमान पंचायत जो गांव के विकास का पैमाना माना जाता है पूरे झारखंड में मईया योजना के नाम से विकास ठप्प पड़ा हुआ है । घाटशिला विधानसभा विकास का रफ्तार को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने एन डी ए प्रत्याशी को जीताने की अपील की है । जिला प्रधान सचिव बुद्धेश्वर मुर्मू ने ग्रामीणों को बताया की आगामी 16 अक्टूबर को आजसू पार्टी के सुप्रीमो का घाटशिला आगमन होने जा रहा है।

उन्होंने उपस्थित ग्रामीणों को कहा कि आजसू पार्टी के सुप्रीमो सुदेश कुमार महतो का आगमन आगामी 16 अक्टूबर को घाटशिला में होने जा रहा है । इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक ग्रामीणों को उपस्थित होने की अपील की गई।

इस अवसर पर आजसू के जिला प्रधान सचिव बुद्धेश्वर मुर्मू,निशित पातर,विक्रमपुर ग्राम प्रधान मानसिंह सोरेन, पांडु मुर्मू,नूरी हो, बुधराई सोरेन, राकेश मुर्मू,, मोनिन पातर, शक्ति पदों राउत आदि उपस्थित थे।

भारत-ब्रिटेन नई आर्थिक साझेदारी की दास्तान -प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की ऐतिहासिक सफ़ल भारत यात्रा 2025- व्यापार निवेश, तकनीक और विश्वास की नई परिभाषा

भारत-ब्रिटेन नई आर्थिक साझेदारी की दास्तान -प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की ऐतिहासिक सफ़ल भारत यात्रा 2025- व्यापार निवेश, तकनीक और विश्वास की नई परिभाषा

“डेड इकोनॉमी”कहने वालों को करारा जवाब

उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में 125 से अधिक शीर्ष सीईओ, अग्रणी उद्यमी, विश्वविद्यालयों के कुलपति और सांस्कृतिक संस्थानों के प्रमुख शामिल हैं,जो यात्रा के महत्व को रेखांकित करता है- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

गोंदिया/महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर ब्रिटिश प्रधानमंत्री सर कीर स्टार्मर की 9-10 अक्टूबर 2025 की भारत यात्रा ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। यह यात्रा केवल दो दिनों की औपचारिक मुलाक़ात नहीं, बल्कि 21वीं सदी के वैश्विक व्यापारिक समीकरणों में भारत की निर्णायक भूमिका को स्वीकार करने की ठोस अभिव्यक्ति है।भारतीय पीएम के निमंत्रण पर भारत पहुंचे स्टार्मर का मुंबई एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत हुआ, जहां से इस यात्रा की शुरुआत ने एक ऐसा संदेश दिया “भारत अब वैश्विक शक्ति संतुलन का निर्णायक केंद्र है”।

पीएम ने ब्रिटेन पीएम के साथ मुलाकात की एक तस्वीर साझा करते हुए कहा कि भारत और ब्रिटेन के रिश्ते तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और”नई ऊर्जा से भरे हुए हैं”एक तस्वीर में पीएम मोदी ब्रिटिश पीएम के साथ एक ही कार में नजर आए मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यहमानता हूं कि अमेरिका द्वारा भारत को डेड इकोनामी कहे जाने व 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने के बाद भारत-यूके रिश्तों का नया दौर शुरू हो गया है, व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी पर केंद्रित कूटनीति ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत डेट इकोनामी नहीं है,आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी क़े सहयोग से आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, भारत-ब्रिटेन नई आर्थिक साझेदारी की दास्तान,प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की ऐतिहासिक सफ़ल भारत यात्रा 2025- व्यापार,निवेश, तकनीक और विश्वास की नई परिभाषा।

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

साथियों बात अगर हम ब्रिटेन पीएम की दो दिवसीय यात्रा की करें तो, यह ऐसे समय में हो रही है जब भारत और ब्रिटेन दोनों ही अपने-अपने आर्थिक और रणनीतिक भविष्य के पुनर्संरचना के दौर से गुजर रहे हैं। यात्रा का प्रमुख उद्देश्य व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग को सुदृढ़ करना है। ब्रिटिश पीएम के साथ आए उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में 125 से अधिक शीर्ष सीईओ, अग्रणी उद्यमी, विश्वविद्यालयों के कुलपति और सांस्कृतिक संस्थानों के प्रमुख शामिल हैं, यह अपने आप में इस यात्रा के महत्व को रेखांकित करता है।यह केवल एक राजनयिक यात्रा नहीं, बल्कि ब्रिटिश व्यापारिक समुदाय का भारत के प्रति बदलता नजरिया दर्शाने वाली ऐतिहासिक घटना है। ब्रिटेन के कई औद्योगिक घराने अब भारत को मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी हब के रूप में देख रहे हैं, न कि केवल एक उपभोक्ता बाज़ार के रूप में।“डेड इकोनॉमी” कहने वालों को करारा जवाब हैँ।


साथियों बात अगर हम अमेरिकी राष्ट्रपति द्वाराकुछ समय पहले भारत की अर्थव्यवस्था को “डेड इकोनामी” कहकर प्रश्न उठाए गए थे। वहीं भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद, वैश्विक व्यापार जगत में भारत की नीतियों को लेकर बहस तेज़ हो गई थी।लेकिन ब्रिटिश प्रधानमंत्री की यह यात्रा उस सोच को सीधा जवाब देती है। ब्रिटिश पीएम ने मुंबई में उतरते ही कहा कि “भारत 2028 तक दुनियाँ की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है, और ब्रिटेन उस यात्रा का मजबूत भागीदार बनेगा।”यह बयान न केवल आर्थिक विश्वास का प्रतीक है, बल्कि यह उन तमाम संशयवादियों के लिए एक संदेश है जो भारत की विकास गाथा पर सवाल उठाते रहे हैं।


साथियों बातें कर हम ब्रिटेन के जेम्बो डेलिगेशन की करें तो यह विश्वास की कूटनीतिक मिसाल हैँ, इतिहास में शायद ही ऐसा हुआ हो जब ब्रिटेन का इतना बड़ा प्रतिनिधिमंडल किसी देश की यात्रा पर आया हो। यह “जेम्बो डेलिगेशन”भारत-ब्रिटेन संबंधों की गहराई और गंभीरता दोनों को दर्शाता है। 125 से अधिक शीर्ष सीईओ और शिक्षाविदों के साथ प्रधानमंत्री स्टार्मर का आना इस बात की पुष्टि करता है कि ब्रिटेन भारत को एक ऐसे रणनीतिक सहयोगी के रूप में देख रहा है, जो उसके पोस्ट-ब्रेक्सिट युग में वैश्विक प्रभाव को बनाए रख सकता है।इस प्रतिनिधिमंडल में ऑक्सफोर्ड कैम्ब्रिज और लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स जैसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के कुलपति शामिल हैं, जो शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भारत के साथ साझेदारी की नई संभावनाओं पर विचार करेंगे। वहीं, तकनीकी कंपनियों के प्रमुख भारत में एआई, ग्रीन एनर्जी,साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में निवेश की नई संभावनाओं को तलाश रहे हैं।


साथियों बात अगर हम मोदी- स्टार्मर शिखर वार्ता साझेदारी की नई परिभाषा की करें तो नई दिल्ली में मोदी और कीर स्टार्मर के बीच हुई शिखर बैठक में व्यापार, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और संस्कृति को केंद्र में रखकर गहन चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने यह स्पष्ट किया कि भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाएगा।बैठक में भारत ने ब्रिटेन को रक्षा उत्पादन, अंतरिक्ष तकनीक और ग्रीन एनर्जी मिशनों में साझेदारी के लिए आमंत्रित किया। वहीं ब्रिटेन ने भारत में अपने निवेश को तीन गुना बढ़ाने का आश्वासन दिया।“इनोवेशन पार्टनरशिप”के तहत दोनों देशों के बीच स्टार्टअप्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्रों में संयुक्त रिसर्च पर सहमति बनी।


साथियों बात अगर हम भारत की ओर झुकता ब्रिटेन, वैश्विक शक्ति समीकरण में बदलाव कोसमझने की करें तो, ब्रिटेन पीएम की यात्रा ब्रिटिश विदेश नीति में एक मौलिक परिवर्तन का प्रतीक है। यह वही ब्रिटेन है जिसने दशकों तक भारत को “डेवलपिंग नेशन” की दृष्टि से देखा था। लेकिन अब यह मान्यता बदल चुकी है। भारत को ब्रिटेन अब एक इक्वल पार्टनर, एक टेक्नोलॉजिकल पॉवरहाउस और एक वैश्विक निवेश गंतव्य के रूप में स्वीकार कर रहा है।ब्रेक्सिट के बाद ब्रिटेन को यूरोपीय संघ के बाहर नए आर्थिक साझेदारों की तलाश थी। ऐसे में भारत उसकी पहली प्राथमिकता बनकर उभरा है। ब्रिटिश मीडिया इसे“यूकेस पीवोट टू इंडिया ”कह रहा है।


साथियों बात अगर हम भारत के लिए अवसर और जिम्मेदारी दोनों को समझने की करें तो,यह यात्रा भारत के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आई है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी है। भारत को अब यह साबित करना होगा कि वह केवल निवेश आकर्षित करने वाला देश नहीं, बल्कि विनिर्माण, नवाचार और नीति स्थिरता के लिहाज से विश्वसनीय साझेदार भी है।भारत के लिए यह समय है कि वह अपने मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, और स्टार्टअप इंडिया जैसे कार्यक्रमों को ब्रिटिश सहयोग के साथ वैश्विक स्तर पर पहुंचाए। विशेष रूप से एआई, सेमीकंडक्टर, और क्लाइमेट टेक्नोलॉजी में भारत की भूमिका निर्णायक बन सकती है।


साथियों बात अगर हम संस्कृति और शिक्षा,साझेदारी के मानवीय आयाम को समझने की करें तो,भारत-ब्रिटेन संबंध केवल अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच संस्कृति, शिक्षा और सामाजिक मूल्य का भी गहरा जुड़ाव है। इस यात्रा में “कल्चरल एक्सचेंज मिशन” पर भी सहमति बनी, जिसके तहत ब्रिटेन और भारत के बीच कलाकारों, फिल्म निर्माताओं और विद्यार्थियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।ब्रिटिश विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों की संख्या पहले ही रिकॉर्ड स्तर पर है। अब ब्रिटेन ने भारत को “प्राथमिक शिक्षा भागीदार” के रूप में मान्यता देने का निर्णय लिया है। इसके तहत उच्च शिक्षा में द्विपक्षीय डिग्री कार्यक्रम, स्कॉलरशिप्स और कोर्स एक्सचेंज की शुरुआत होगी।


साथियों बात अगर हम यात्रा का ऐतिहासिक महत्व भविष्य के वैश्विक समीकरणों की झलक, यह यात्रा केवल भारत और ब्रिटेन के संबंधों की मजबूती का प्रतीक नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति समीकरणों में एशिया की केंद्रीय भूमिका को भी स्थापित करती है।जब दुनियाँ अमेरिका- चीन प्रतिस्पर्धा में उलझी हुई है, तब ब्रिटेन का भारत की ओर झुकाव इस बात का संकेत है कि 21वीं सदी का आर्थिक केंद्र अबएशिया की धरती पर स्थित है।

भारत इस साझेदारी से न केवल व्यापारिक लाभ प्राप्त करेगा, बल्कि वह पश्चिमी देशों के साथ अपने कूटनीतिक संतुलन को भी और मजबूत करेगा।


अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि विश्वास, साझेदारी और भविष्य की एक नई कहानी,ब्रिटिश पीएम की भारत यात्रा 2025 इतिहास में “इकोनॉमिक डिप्लोमेसी के पुनर्जागरण” के रूप में दर्ज होगी। इस यात्रा ने दिखा दिया कि भारत अब किसी के समर्थन का आकांक्षी नहीं, बल्कि साझेदारी का निर्णायक केंद्र बन चुका है।ब्रिटेन के लिए यह यात्रा भारत के प्रति विश्वास की पुनर्स्थापना है, वहीं भारत के लिए यह अपनी वैश्विक स्थिति को और ऊंचा उठाने का अवसर। व्यापार, शिक्षा, तकनीक और संस्कृति,इन चारों स्तंभों पर खड़ी यह नई साझेदारी आने वाले दशक में विश्व की आर्थिक दिशा तय कर सकती है।भारत और ब्रिटेन अब केवल साझेदार नहीं, बल्कि वैश्विक पुनरुत्थान के सह-निर्माता हैं, एक ऐसा अध्याय जो आने वाली पीढ़ियाँ “न्यू ऐज ऑफ़ इंडो – ब्रिटिश पार्टनरशिप ” के नाम से याद करेंगी।

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9359653465

बागबेड़ा कॉलोनी में जल्द शुरू होगी जलापूर्ति योजना, एक महीने में मिलेगा शुद्ध पानी, विभाग ने दिया आश्वासन

बागबेड़ा कॉलोनी में जल्द शुरू होगी जलापूर्ति योजना, एक महीने में मिलेगा शुद्ध पानी, विभाग ने दिया आश्वासन

जमशेदपुर

बागबेड़ा हाउसिंग कॉलोनी के हजारों निवासियों के लिए खुशखबरी है। लंबे इंतजार के बाद अब जल्द ही कॉलोनीवासियों को शुद्ध पेयजल की सुविधा मिलने जा रही है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के एसडीओ महेंद्र बैठा और जेई आशुतोष ने जानकारी दी कि एक महीने के अंदर बागबेड़ा हाउसिंग कॉलोनी जलापूर्ति योजना शुरू कर दी जाएगी, जिसके बाद लोगों को नियमित रूप से स्वच्छ पानी की आपूर्ति की जाएगी।

पंचायत प्रतिनिधियों ने सौंपा छह सूत्री मांग पत्र

इस संबंध में बागबेड़ा कॉलोनी पंचायत प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने विभाग को छह सूत्री मांग पत्र सौंपा, जिसे कार्यपालक अभियंता सुमित कुमार के निर्देश पर एसडीओ महेंद्र बैठा और जेई आशुतोष को सौंपा गया। तत्पश्चात सकारात्मक वार्ता भी हुई।

माॅग पत्र में प्रमुख रूप से यह बिंदु शामिल

बागबेड़ा हाउसिंग कॉलोनी जलापूर्ति योजना को शीघ्र शुरू किया जाए।कुंवर सिंह मैदान रोड नंबर 3 के 50 घरों में तत्काल जलापूर्ति बहाल की जाए। रोड नंबर 1 स्थित फिल्टर पंप हाउस के मोटर कक्ष की मरम्मत शीघ्र कराई जाए। विभागीय कार्यों में पारदर्शिता हेतु समीति की मासिक बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएं। विभाग के द्वारा समिति को आय-व्यय का विवरण सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया जाए।

विभाग ने दिया सकारात्मक आश्वासन

सभी बिंदुओं पर चर्चा के बाद एसडीओ महेंद्र बैठा और जेई आशुतोष ने संयुक्त रूप से आश्वासन दिया कि एक महीने के भीतर जलापूर्ति योजना चालू कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि आय-व्यय का ब्योरा जारी करने के लिए एक सप्ताह के भीतर पत्र निर्गत किया जाएगा, वहीं कुंवर सिंह मैदान रोड नंबर 3 में जल्द ही जलापूर्ति बहाल की जाएगी।

बैठक में शामिल रहे स्थानीय प्रतिनिधि

इस मौके पर पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता, उप मुखिया संतोष ठाकुर, बागबेड़ा मध्य पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि के.डी. मुंडा सहित कई स्थानीय लोग उपस्थित थे।

उपायुक्त की अध्यक्षता में कौशल विकास, आजीविका संवर्धन, रोजगार सृजन एवं औद्योगिक समन्वय से संबंधित समीक्षा बैठक संपन्न

उपायुक्त की अध्यक्षता में कौशल विकास, आजीविका संवर्धन, रोजगार सृजन एवं औद्योगिक समन्वय से संबंधित समीक्षा बैठक संपन्न

सरायकेला-खरसावाँ

10 अक्टूबर, 2025 को समाहरणालय सभागार, सरायकेला-खरसावाँ में उपायुक्त नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में कौशल विकास, आजीविका मिशन, रोजगार सृजन, नाबार्ड योजनाओं एवं औद्योगिक संस्थानों के साथ समन्वय से संबंधित समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक के दौरान उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जिले के विभिन्न औद्योगिक संस्थानों से समन्वय स्थापित करते हुए रोजगार हेतु उपलब्ध रिक्त पदों के अनुरूप स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जाए, जिससे उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि सभी प्रशिक्षण संचालित करने वाले संस्थान एवं विभाग निर्धारित समय सीमा में प्रशिक्षण सत्र पूर्ण करें तथा इसके लिए व्यवस्थित एक्शन प्लान तैयार कर जिला कार्यालय को उपलब्ध कराएं।

उपायुक्त ने यह भी निर्देश दिया कि ऐसे प्रशिक्षण प्राप्त युवक-युवतियों को चिन्हित किया जाए जो किसी कारणवश अब तक रोजगार से नहीं जुड़े हैं, और उनकी अभिरुचि के अनुरूप क्षेत्र में रोजगार या स्वरोजगार से जोड़ने हेतु ठोस एवं सकारात्मक पहल की जाए। उन्होंने RSETI के अंतर्गत मोबाइल रिपेयरिंग, सोलर इंस्टालेशन, सीसीटीवी इंस्टालेशन, ड्रोन टेक्निशियन जैसे तकनीकी क्षेत्रों में इच्छुक अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण प्रदान करने तथा सरकारी योजनाओं से जोड़ते हुए रोजगार एवं स्वरोजगार सृजन की दिशा में कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

इसके अतिरिक्त, उपायुक्त ने सभी विभागीय पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि कौशल विकास के विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके विद्यार्थियों के साथ औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधियों की संयुक्त कार्यशाला आयोजित की जाए, ताकि युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में मार्गदर्शन और प्रेरणा प्राप्त हो सके।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके लाभुकों को उनके अनुकूल संचालित सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाए तथा उन्हें संबंधित योजनाओं से जोड़ने में विभागीय स्तर पर सहयोग सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि योजना अंतर्गत प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके अभ्यर्थियों को चिन्हित कर लाभान्वित किया जाए तथा लंबित आवेदनों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।

इसके साथ ही प्लास मार्ट के संचालन से संबंधित विषयों पर चर्चा की गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि प्लास मार्ट के संचालन हेतु योग्य स्वयं सहायता समूहों (SHG) का चयन किया जाए, जिनमें विभिन्न समूहों को उत्पाद निर्माण एवं संचालन की जिम्मेदारी सौंपी जाए। उन्होंने कहा कि प्लास मार्ट को जिले के मुख्य बाजारों एवं सभी प्रखंड मुख्यालयों में संचालित करने की दिशा में कार्ययोजना तैयार की जाए, साथ ही इसमें स्थानीय क्षेत्र में उत्पादित सामग्रियों को प्राथमिकता के साथ प्रदर्शित एवं विक्रय के लिए रखा जाए, जिससे स्थानीय उत्पादों को उचित मूल्य एवं आमजन को सुलभ उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने अंत में कहा कि कौशल विकास, औद्योगिक समन्वय एवं आजीविका मिशन का मूल उद्देश्य युवाओं एवं महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि आगामी समीक्षा बैठक से पूर्व योजनाओं की अद्यतन प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें, ताकि रोजगार सृजन की दिशा में ठोस एवं परिणामोन्मुखी प्रगति सुनिश्चित की जा सके।

बैठक में श्रम अधीक्षक अविनाश ठाकुर, नियोजन पदाधिकारी आदित्यपुर, जिला कार्यक्रम प्रबंधक JSLPS तथा अन्य सम्बन्धित विभागीय पदाधिकारी एवं विभिन्न संस्थानों (प्रशिक्षण केंद्र) के प्रतिनिधि उपस्थित रहें।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर सदर अस्पताल,, सरायकेला-खरसावाँ में जागरूकता कार्यक्रम का हुआ आयोजन

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर सदर अस्पताल,, सरायकेला-खरसावाँ में जागरूकता कार्यक्रम का हुआ आयोजन

सरायकेला-खरसावाँ

10 अक्टूबर, 2025 को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर सदर अस्पताल, सरायकेला-खरसावाँ के परिसर में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ सिविल सर्जन, सरायकेला-खरसावाँ, डॉ. सरयू प्रसाद सिंह द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया।

इस अवसर पर ए.सी.एम.ओ. डॉ. जुझार मांझी, मनोचिकित्सक डॉ. शालिनी कुमारी, एन.सी.डी. क्लिनिक के चिकित्सक डॉ. अनिर्बान महतो, डी.ए.एल.एस.ए. सरायकेला-खरसावाँ के सचिव श्री तौसीफ मेराज, डी.पी.एम., डी.पी.सी. (एन.सी.डी.), डी.पी.सी. (सहिया) तथा एन.टी.सी.पी. कंसल्टेंट सहित अन्य चिकित्सक एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।

इस वर्ष विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस का विषय (थीम) था — “सेवाओं तक पहुंच: आपदाओं और आपात स्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य”।

कार्यक्रम के दौरान मनोचिकित्सक सुश्री शालिनी कुमारी, श्री पुष्कर भूषण एवं श्री तौसीफ मेराज द्वारा मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए गए। वक्ताओं ने अपने संबोधन में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक आम लोगों की पहुंच बढ़ाने, गंभीर मानसिक रोगों की अवस्था में योग्य मनोचिकित्सक की देखरेख में उपचार एवं दवाओं के सेवन की आवश्यकता, तथा डिप्रेशन, चिंता एवं नकारात्मक भावनात्मक अवस्थाओं में योग एवं ध्यान के महत्व पर बल दिया।

साथ ही, मानसिक रोगियों, विकलांगों एवं आर्थिक रूप से वंचित वर्गों के लिए सुलभ कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई। उपस्थित जनों को यह भी बताया गया कि मानसिक रोगियों के लिए परामर्श एवं सहायता हेतु TELE-MANAS का निःशुल्क टोल-फ्री नंबर — 14416 / 1800-89-14416 पर संपर्क किया जा सकता है।

यह जागरूकता कार्यक्रम 10 अक्टूबर से 16 अक्टूबर, 2025 तक संचालित किया जाएगा, जिसके अंतर्गत स्कूलों, कॉलेजों एवं सामुदायिक स्थलों पर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

उत्पाद विभाग की कार्रवाई ,,अवैध महुआ शराब बरामद, जावा महुआ किया गया विनष्ट

उत्पाद विभाग की कार्रवाई ,,अवैध महुआ शराब बरामद, जावा महुआ किया गया विनष्ट

सरायकेला/कांड्रा

उपायुक्त, सरायकेला के निर्देशानुसार अधीक्षक, उत्पाद सरायकेला सौरभ तिवारी के पर्यवेक्षण में प्राप्त गुप्त सूचना के आलोक में आज दिनांक 09 अक्टूबर, 2025 को कांड्रा थाना अंतर्गत मोहनपुर जंगल एवं रायपुर गाँव स्थित अवैध शराब अड्डों पर उत्पाद विभाग की टीम द्वारा छापेमारी की गई।

छापेमारी के क्रम में 80.00 लीटर अवैध महुआ शराब बरामद कर विधिवत जब्त किया गया तथा 1100.00 किलोग्राम जावा महुआ को नष्ट (विनष्ट) किया गया।
अड्डा संचालकों की पहचान मोटू टुडू एवं जयपाल हांसदा के रूप में की गई है। दोनों अभियुक्तों के विरुद्ध उत्पाद अधिनियम की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत अभियोग दर्ज कर गिरफ्तारी हेतु आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।

अधीक्षक, उत्पाद सरायकेला ने बताया कि जिले में अवैध शराब निर्माण, परिवहन एवं बिक्री पर रोक लगाने हेतु विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस क्रम में सभी प्रखंडों एवं थाना क्षेत्रों में सतत गश्ती एवं छापेमारी अभियान संचालित किए जा रहे हैं।

उन्होंने आमजन से अपील की है कि यदि किसी क्षेत्र में अवैध शराब निर्माण अथवा बिक्री की गतिविधि की जानकारी हो तो संबंधित सूचना उत्पाद विभाग या नजदीकी थाना को तुरंत उपलब्ध कराएँ, ताकि त्वरित कार्रवाई की जा सके।

साथ ही, उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि आगामी दिनों में त्योहारों के दृष्टिगत अवैध शराब की बिक्री एवं परिवहन पर विशेष निगरानी रखी जाए तथा दोषियों के विरुद्ध शून्य सहनशीलता नीति के तहत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

आगामी पर्व-त्योहारों को देखते हुए खाद्य प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण,,गुणवत्ता एवं स्वच्छता सुनिश्चित करने हेतु दिए गए निर्देश

आगामी पर्व-त्योहारों को देखते हुए खाद्य प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण,,गुणवत्ता एवं स्वच्छता सुनिश्चित करने हेतु दिए गए निर्देश

सरायकेला-खरसावाँ

आगामी त्योहारों को ध्यान में रखते हुए अभिहित अधिकारी-सह-अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, सरायकेला के मार्गदर्शन में खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी श्री सुबीर रंजन द्वारा आज कांड्रा क्षेत्र अंतर्गत विभिन्न मिठाई दुकानों, होटल एवं रेस्टोरेंटों का औचक निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के क्रम में प्रतिष्ठानों की स्वच्छता व्यवस्था, उपयोग की जा रही खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, भंडारण की स्थिति एवं खाद्य उत्पादों के लेबलिंग मानकों की जांच की गई। निरीक्षण के दौरान विभिन्न दुकानों से खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्र किए गए, जिन्हें जांच हेतु राज्य खाद्य प्रयोगशाला, नामकुम भेजा जा रहा है। जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने के उपरांत खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के अंतर्गत विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान खाद्य व्यवसाय संचालकों को निर्देश दिया गया कि वे सभी अनिवार्य रूप से फूड लाइसेंस प्राप्त कर ही व्यवसाय संचालित करें, अपने प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई, स्वच्छता एवं हाइजीन मानकों का पालन सुनिश्चित करें और केवल गुणवत्ता युक्त एवं ताजा खाद्य सामग्री का ही उपयोग एवं विक्रय करें।


उन्हें यह भी निर्देशित किया गया कि बासी, एक्सपायर अथवा सड़ी-गली खाद्य सामग्री को तुरंत नष्ट करें तथा निर्माण कार्य में केवल गुणवत्ता युक्त सामग्री एवं FSSAI प्रमाणित फूड कलर का ही निर्धारित मात्रा में उपयोग करें। सभी पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर FSSAI लाइसेंस नंबर, निर्माण तिथि, एक्सपायरी तिथि एवं निर्माता का पूरा पता स्पष्ट रूप से अंकित होना अनिवार्य है, ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं मानक अनुसार खाद्य सामग्री प्राप्त हो सके।

खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी ने बताया कि आगामी पर्व-त्योहारों के मद्देनज़र औचक निरीक्षण की कार्रवाई नियमित रूप से जारी रहेगी। उन्होंने सभी खाद्य प्रतिष्ठान संचालकों से अपील की कि वे खाद्य सुरक्षा अधिनियम के नियमों का पालन करते हुए स्वच्छ एवं स्वास्थ्यकर वातावरण में व्यवसाय संचालन सुनिश्चित करें, जिससे आमजन को सुरक्षित, गुणवत्ता युक्त एवं मानक अनुरूप खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके।

बालिकाओं में आज की सशक्त लड़की के साथ कल की कार्यकर्ता,उद्यमी,घर का मुखिया, संरक्षक,राजनीतिक नेता दोनों होने की क्षमता है।

बालिकाओं में आज की सशक्त लड़की के साथ कल की कार्यकर्ता,उद्यमी,घर का मुखिया, संरक्षक,राजनीतिक नेता दोनों होने की क्षमता है।

दुनियाँ को बदलने के लिए सही साधनों के साथ बालिकाओं को सुरक्षित शिक्षित सशक्त और स्वस्थ जीवन शैली सुनिश्चित करना समय की मांग।

गोंदिया/महाराष्ट्र

भारत में आदिअनादि काल से भारतीय संस्कृति में महिलाओं का बहुत सम्मान किया जाता रहा है। उन्हें देवियों का अवतार माना जाता रहा है, परंतु बड़े बुजुर्गों की कहावत सत्य ही है कि, समय कभी एक सा नहीं रहता परंतु उनकी वह भी शिक्षा है कि वह अपनी सकारात्मक सोच सच्चाई नारी सम्मान परमार्थ बुरी नजर से बचना सहित अनेक गुणों को समय के साथ न बदलते हुए स्थाई रखना मानवीय स्वभाव में समाहित करना जरूरी है। परन्तु जैसे-जैसे समय बीतता गया इनकी स्थिति में काफी बदलाव आया,लड़कियों के प्रति लोगों की सोच बदलने लगी, बालविवाह प्रथा, सती प्रथा, दहेज़ प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या इत्यादि रुढ़िवादी प्रथायें काफी प्रचलित हुआ करती थी, इसी कारण लड़कियों को शिक्षा, पोषण, कानूनी अधिकार और चिकित्सा जैसे अधिकारों से वंचित रखा जाने लगा था, मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र मानता हूं कि अब इस आधुनिक युग में लड़कियों को उनके अधिकार देने और उनके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कई प्रयास किये जा रहे हैं। भारतीय सरकार भी इस दिशा में काम कर रही है और कई योजनायें लागू कर रही है। इसलिए आज हम मीडिया के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से दुनिया को बदलने के लिए सही साधनों के साथ बालिकाओं को सुरक्षित शिक्षित सशक्त और स्वस्थ जीवन शैली सुनिश्चित करना समय की मांग है इसपर चर्चा करेंगे

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र


साथियों बात अगर हम बालिकाओं की शक्ति को साकार करने में निवेश की करें तो, ये एक असाधारण रूप से महत्वपूर्ण चरण से गुजरती हैं जहां उन्हें एक सुरक्षित, शिक्षित और स्वस्थ जीवन शैली सुनिश्चित करके दुनिया को बदलने के लिए सही साधनों के साथ सशक्त बनाया जा सकता है। उनमें आज की सशक्त लड़की के साथ-साथ कल की कार्यकर्ता, मां, उद्यमी, संरक्षक, घर का मुखिया या राजनीतिक नेता दोनों होने की क्षमता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, किशोरियों की शक्ति को साकार करने में निवेश आज उनके अधिकारों को कायम रखता है और एक अधिक न्यायसंगत और समृद्ध भविष्य का वादा करता है, जिसमें जलवायु परिवर्तन, राजनीतिक संघर्ष की समस्याओं को हल करने में आधी मानवता एक समान भागीदार है, आर्थिक विकास, बीमारी की रोकथाम और वैश्विक स्थिरता।


साथियों बात अगर हम भारत की करें तो,भारतीय समाज में सदियों से बेटियों को कई प्राचीन कुप्रथाओ, रीति-रिवाजों, के चलते प्रताड़ित होना पड़ा है। आज भी निर्भया जैसा कांड शर्मनाक है। कहने को हम आधुनिक हो चले हैं पर आज भी बहुत सारी ऐसी घटनाएं होती है जिन्हें सुनकर समाज का असभ्य चेहरा सामने आता है। आज भी भारतीय समाज में भ्रूण हत्या, दहेज़ प्रथा, यौन शोषण, बलात्कार जैसे अनैतिक कृत्य नहीं रुक रहे हैं। प्रशासन के साथ-साथ हर निजी व्यक्ति की भी एक सामाजिक जिम्मेदारी होती है। बेटियों को अच्छे संस्कार,नैतिक मूल्यों का महत्तव,महान महिलाओं की गाथाओं और धार्मिक संस्कारों से परिचित कराना अभिभावकों का कर्तव्य है।बाहर ही नहीं बल्कि घर में भी वह भेदभाव, घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न का शिकार हो रही हैं। इसलिए लड़कियों को शिक्षित करना हमारा पहला दायित्व है और नैतिक अनिवार्यता भी। शिक्षा से लड़कियां न सिर्फ शिक्षित होती हैं बल्कि उनके अंदर आत्मविश्वास भी पैदा होता है। वह अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होती हैं साथ ही यह गरीबी दूर करने में भी सहायक होती है।


साथियों हालांकि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ भारत सरकार ने 2015 में योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य देश में हर बालिका को शिक्षा प्रदान करना है। यह बाल लिंग अनुपात में गिरावट के मुद्दे को भी संबोधित करता है। योजना का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी सुरक्षा करना है। यह योजना त्रि-मंत्रालयी प्रयास है। इसे महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, मानव संसाधन विकास और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जाता है। सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा और 2015 में विश्व नेताओं द्वारा अपनाए गए इसके 17 सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) में प्रगति के लिए एक रोडमैप शामिल है जो टिकाऊ है और किसी को पीछे नहीं छोड़ता है। 17 लक्ष्यों में से प्रत्येक लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को प्राप्त करने का अभिन्न अंग है।
साथियों बात अगर हम बदलते परिपेक्ष की करें तो, वक़्त के साथ समाज की प्राथमिकताएं बदलती है सोच औऱ आदतें बदलती है निरंतर विकास की ओर कदमों की छाप बढ़ती जाती है इसी तरह ग्रामीण लोगों के नज़रिये में बदलाव आने लगा है। अब वह न केवल लड़कियों को क्रिकेट – फुटबॉल खेलने के लिए प्रोत्साहित करने लगे हैं बल्कि इससे जुड़ी हर गतिविधियों में सहयोग भी करते हैं। लेकिन ये भी सच है लैंगिकता के मायने लड़कियों और लड़कों, महिलाओं और पुरुषों में महिलाओं ने समानता सदैव चुनौतियों का सामना किया चाहे ग्रामीण इलाकों रहे हो या शहरी। ग्रामीण क्षेत्र अब भी महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर चाहे पहनावे से लेकर हो या नौकरी करने तक इक़ संकुचित सोच के दायरे में सिमटा हुआ है।


साथियों बात अगर हम महिलाओं के हक में कानून व्यवस्थाएं बनाने की करें तो इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके अधिकारों के संरक्षण क़ा करना है,क्योंकि लिंगआधारित चुनौतियों को समाप्त करता है, जिसका सामना दुनिया भर में लड़कियां करती हैं, जिसमें बाल विवाह, उनके प्रति भेदभाव और हिंसा शामिल है। महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है।

खिलती हुई कलियाँ हैं बेटियाँ,
माँ-बाप का दर्द समझती हैं बेटियाँ,
घर को रोशन करती हैं बेटियाँ,
लड़के आज हैं तो आने वाला कल हैं बेटियाँ।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि दुनिया को बदलने के लिए सही साधनों के साथ बालिकाओं में आज की सशक्त लड़की के साथ कलकी कार्यकर्ता मां उद्यमी संरक्षक घर का मुखिया राजनीतिक नेता दोनों होने की क्षमता है इसलिए उन्हें सुरक्षित शिक्षित सशक्त और स्वस्थ जीवन शैली सुनिश्चित करना समय की मांग है।

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9359653465

सच्चाई की राह, सुखद जीवन के लिए विनियोग

सच्चाई की राह, सुखद जीवन के लिए विनियोग

झूठ का गंतव्य दुखी जीवन की चरम सीमा

सत्य वह दौलत है जिसे पहले खर्च करो- जिंदगी भर आनंद पाओ, झूठ वह कर्ज़ है- क्षणिक सुख पाओ जिंदगी भर चुकाते रहो- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

महाराष्ट्र/गोंदिया

भारत अपनी संस्कृति, आध्यात्मिकता, अहिंसा धर्मनिरपेक्षता, परमो धर्मा और सच्चाई की मूरत राजा हरिश्चंद्र इत्यादि अनेकों विशेषताओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र से यह मानता हूं कि एक झूठ के पीछे सव झूठ बोलना पड़ता है और झूठ के दलदल में मनुष्य घुसता चला जाता है।जिससे उसकी वर्तमान पीढ़ी तो ध्वस्त होती ही है पर आने वाली पीढ़ियों में भी यह दोष समाया रहता है।
साथियों बात अगर हम सच्चाई की साक्षात मूरत राजा हरिश्चंद्र की करें तो,सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र सदैव सत्य बोलते थे। वह अपने सत्य और न्याय के लिए जाने जाते थे। इसलिए आज भी उनकी कहानियां बड़े सम्मान के साथ सुनाई जाती हैं।हमने अपने बड़े बुजुर्गों से अनेक कई किस्से सुने हैं।हम,आज की जनरेशन करीब-करीब हर सच्चाई वाली बात में इस महान मूरत का नाम ज़रूर जोड़तेहैं।हमारे बड़े बुजुर्गों से हमने कई वाक्य सुने हैं, जैसे सच्चाई छुप नहीं सकती बनावट के उसूलों से, सत्य की हार नहीं होती,सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं,सत्यमेव जयते।
साथियों बात अगर हम सत्यमेव जयते इसकी करें तो हम अनेक शासकीय,अशासकीय स्थानों पर इसका उल्लेख ज़रूर देखते हैं।यही सत्य है कि हमेशा सत्य की विजय होती है।

साथियों बात अगर हम भारतीय आध्यात्मिकता की करें तो हमें यही ज्ञान मिलता है कि सत्य व दौलत है जैसे पहले खर्च करो फिर जिंदगी भर आनंद पाओ और झूठ वह कर्ज है जिससे क्षणिक सुख पाओ और जिंदगी भर उसे चुकाते रहो बिल्कुल सत्य वचन!साथियों यह बात अगर मानव के हृदय में बस जाए तो वाह क्या बात है! हम पृथ्वी लोक में ही स्वर्ग के दर्शन कर सकेंगे।अगर हर भारतीय व्यक्ति चाहे वह सरकारी हो या शासकीय कर्मचारी, मंत्री हो या नेता, कार्यकर्ता हो या मालिक,सभी अगर सत्यता रूपी दौलत को पूरी निष्ठा से खर्च करें अर्थात ईमानदारी से अपनी अफसर शाही ड्यूटी, व्यापार-व्यवसायज दिनचर्या अर्थात जीवन के हर काम हर मोड़ पर सत्यता बरसाएगें तो वह खुद तो जीवन का आनंद जरूर पाएंगें परंतु उससे अधिक भारत को स्वर्ग जैसा सुंदर रचना बनाने में अहम रोल अदा करेगें। भारत एक अपराध मुक्त भारत की परिकल्पना में साकार होगा।कोई अदालत, पुलिस स्टेशन,जांच एजेंसियां नहीं होगी क्योंकि यह सब झूठ और अपराध को काटने के लिए ही बनाई गई हैं।
साथियों बात अगर हम झूठ की करें तो हमने अपने व्यवहारिक जीवन में देखा होगा कि बेईमान, रिश्वतखोर, झूठा, भ्रष्टाचारी, धोखेबाज इत्यादि तरह के मानव कभी अपने जीवन में सुखी नहीं होते। चाहे कितना भी अवैध धन कमा लें,उनके पीछे परिवार का, उनके स्वास्थ्य का, मानसिक हालत हमेशा दुखों में बनी रहती हैउनके शरीर के नसों में झूठ रूपी खून दौड़ता है और इन नकारात्मक झूठे व्यवहारों से उनका क्षणिक आर्थिक सुख मिलता है परंतु उसके लिए उनको जीवन भर कष्टों में गुजारना पड़ता है। जितना क्षणिक सुख प्राप्त होता है वह ब्याज सहित याने अतिरिक्त दुख सहित यहीं इस जीवन में भोगना पड़ता है और फिर अंत में पछताते हैं के ऐसा क्यों हुआ,ऊपर वाले से क्षमा याचना करते हैं।पर कहते हैं ना कि जब चिड़ियां चुग गई खेत,अब पछतावे क्या होए??
साथियों बात अगर हम सत्य की गहराई की करें तो,सत्य दो प्रकार का होता है- एक व्यवहारिक सत्य और दूसरा वास्तविक। व्यवहारिक सत्य का अर्थ है जैसा देखा, जैसा सुना और जैसा अनुभव किया, उसको वैसा ही बोलना सत्य कहलाता है।व्यवहारिक सत्य में हो सकता है, जो एक के लिए सत्य है, वो दूसरे के लिए असत्य हो। वैसे तो हर व्यक्ति अपने मुताबिक अपना सत्य बना लेता है। यह व्यवहारिक सत्य, अनुभव, नजरिए और देश, काल के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। इसलिए इसमें मतभेद की संभावना बनी रहती है।ईमानदार और न्यायवादी व्यक्ति ही सत्य का पालन करता है।यह देखा गया है कि जो लोग ईमानदार होते हैं वह सदैव सच बोलते हैं। झूठे बेईमान और मक्कार लोग सदैव असत्य का फायदा लेकर अपना काम बनाते हैं। हम ऐसे लोगों से बचना चाहिए जो अपने फायदे के लिए (झूठ) असत्य बोलते हैं।सत्य का अर्थ है ‘सते हितम्’ अर्थात् जिसमें हित या कल्याण निहित हो। सत्य भूत, भविष्य एवं वर्तमान तीनों काल में एक सा रहता है तथा इससे यथार्थ का ज्ञान होता है। साधारण बातचीत में जो सच है, यथार्थ है उसे जानना, समझना, मानना, कहना एवं उसके अनुसार ही व्यवहार करना सत्य है। मानव बोध में सत्य के प्रति श्रद्धा एवं असत्य के प्रति घृणा स्वाभाविक रूप से पाई जाती है।मनुष्य जीवन के लिए सत्य सबसे बड़ी शक्ति हैं।जीवन तथा संसार के सत्य की तलाश कर उसे जीवन में अपनाना मानव मात्र का मूल उद्देश्य हैं।हमारी संस्कृति में सत्य को बड़ा महत्व दिया गया हैं।इस सम्बन्ध में एक महापुरुष ने ठीक ही कहा कि सत्य परेशान हो सकता है मगर पराजित नहीं. भारत की भूमि पर हरिश्चन्द्र जैसे राजा हुए जिनकी सत्यनिष्ठा के चलते वे सत्यवादी कहलाए।सत्य के रास्ते पर चलकर व्यक्ति बड़ी-बड़ी समस्या का समाधान आसानी से कर सकता है।सत्य के मार्ग पर चलकर कई लोगों ने सफलता प्राप्त कर अपना और अपने परिवार का भला किया है।सत्य के मार्ग पर चलकर कई लोगों ने सफलता प्राप्त कर दुनिया को बदला है । सत्य बोलने से व्यक्ति को सभी सम्मान देते हैं।ऐसा कहा जाता है कि तीन चीजें छुपाए नहीं छुपती- सूरज, चंद्रमा और सत्य। जो लोग सत्य का, न्याय का पक्ष लेते हैं उनकी प्रशंसा सभी लोग करते हैं।सत्य का साथ देने वालों को इतिहास स्वर्णिम पन्नों पर दर्ज करता है। परंतु जो लोग झूठ,असत्य का साथ देते हैं उनकी चारों ओर आलोचना होती है।किसी ने खूब ही कहा है कि
चन्द्र टरै, सूरज टरै, टरै जगत व्यवहार।’
पै दृढ़ हरिश्चन्द्र को टरै न सत्य विचार।..
सांच बराबर तप नहीं, झूंठ बराबर पाप।
जाके हृदय सांच है, ताके हृदय आप

किसी ने धर्म के दस लक्षण बताए हैं, जिनमें सत्य भी प्रमुख स्थान रखता है।
‘धृतिः क्षमा दमोऽस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रहः। धीविद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्।।’
अर्थात् धैर्य, क्षमा, संयम, अस्तेय (चोरी न करना ), शौच ( अंतर्मन और शरीर की पवित्रता ), इन्द्रिय निग्रह (इन्द्रियों से धर्म सम्मन आचरण), धी ( सत् बुद्धि), विद्या, सत्य एवं अक्रोध यानी हमेशा शांत रहना।
अतः अगर हम पूरे उपरोक्त विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करेंगे तो हम पाएंगे के सत्य व दौलत है जिसे पहले खर्च करो फिर जिंदगी भर आनंद पाओ और झूठ वह कर्ज है जिसमें सैनिक सुख पाओ फिर जिंदगी भर जो करते रहो और सच्चाई की राह सुखद जीवन के लिए एक विनियोग है तथा झूठ का गंतव्य दुखी जीवन की चरम सीमा है

-संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9359653465

आदिवासी कुड़मि समाज ने रेल टेका आंदोलन की समीक्षा बैठक में सरकार से एसटी की मांग पुनः दोहराई

आदिवासी कुड़मि समाज ने रेल टेका आंदोलन की समीक्षा बैठक में सरकार से एसटी की मांग पुनः दोहराई

जमशेदपुर

दिनांक 3 अक्टूबर 2025 को आदिवासी कुड़मि समाज के केंद्रीय अध्यक्ष शशांक शेखर महतो की अध्यक्षता में तीनों राज्यों के 100 जगहों पर हुए रेल टेका व डहर छेंका आंदोलन की समीक्षा बैठक देवेंद्र सेवा सदन, कागलनगर, सोनारी में आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में समाज के बुद्धिजीवी, युवा एवं महिला प्रतिनिधि उपस्थित थे।
आज की समीक्षा बैठक में झारखंड, ओडिशा और बंगाल—तीनों राज्यों से समाज के लोग उपस्थित थे।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता समाज के मूलखूंटी मूलमानता अजीत प्रसाद महतो ने समाज को संबोधित करते हुए कहा कि
कुड़मी समाज का अनुसूचित जनजाति (एसटी ) दर्जा ऐतिहासिक रूप से सिद्ध है, लेकिन सरकार द्वारा लंबे समय से इसे नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। रेल टेका आंदोलन में समाज के लाखों लोग, महिला , बच्चें, बुजुर्ग, नौजवान आदि रेलवे ट्रैक पर ढोल नगाढ़ा के साथ बैठकर अपनी आवाज़ उठाए, लेकिन सरकार ने अभी तक ठोस कदम नहीं उठाया है। आंदोलन के दौरान समाज को अनेक कठिनाइयों, आर्थिक संकट और प्रशासनिक दमन का सामना करना पड़ा है। कई युवाओं और बुजुर्गों पर केस दर्ज हुए, जो हमारे शांतिपूर्ण आंदोलन को बदनाम करने की साज़िश है।

श्री मूलमानता ने जोर देकर कहा कि कुड़मी समाज का यह संघर्ष केवल संवैधानिक अधिकार और ऐतिहासिक न्याय की लड़ाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुड़मी का इतिहास, परंपरा, संस्कृति और जनजीवन आदिवासी समाज से गहरे रूप से जुड़े हुए हैं, जिसे अब नकारा नहीं जा सकता।
बैठक में यह भी कहा गया कि
कई लोगों द्वारा अनजाने या राजनीतिक महाकावे में एसटी दर्जा बहाल करने का विरोध किया जा रहा है, किंतु यही विरोध हमारे रेल टेका आंदोलन की सफलता का उदाहरण है।
बंगाल सरकार द्वारा कुड़मी गांवों में पुलिस भेजकर घर से पुरुषों को उठाकर जेल भेजना, सरकार का डर और हमारी जीत का प्रतीक है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि
आंदोलन को और अधिक संगठित किया जाएगा।
झूठे केस वापस लेने की मांग की जाएगी। समाज के सभी वर्गों से एकता बनाए रखने का आह्वान किया गया।
केंद्र और राज्य सरकार को याद दिलाया गया कि अब कुड़मी समाज का एसटी दर्जा बहाल करना ही एकमात्र न्यायपूर्ण कदम है। अंत में समाज के नेताओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि अगर सरकार जल्द ही सकारात्मक पहल नहीं करती है, तो रेल टेका आंदोलन और उग्र रूप लेगा। आदिवासी कुड़मि समाज की आह्वान पर आगामी 8 और 9 नवंबर को रांची स्थित रीता देवी वैंकट हॉल में तीनों राज्यों की ओर से दो दिवसीय महासम्मेलन में तीनों राज्यों की प्रदेश कमेटी की पुनर्गठन की जाएगी।
इस अवसर पर केंद्रीय उपाध्यक्ष शशधर काड़ुआर, केंद्रीय महासचिव अधिवक्ता सुनील कुमार गुलिआर, केंद्रीय सहसचिव जयराम हिंदइआर, झारखंड प्रदेश अध्यक्ष पद्मलोचन काड़ुआर, उपाध्यक्ष तालेश्वर पुनअरिआर, मणिलाल महतो, राकेश रंजन महतो, योगेश्वर नागवंशी, दिव्यसिंह मोहंता, मंटू महतो, हलधर, परशुराम, दिनेश, मनोज, काकोली काड़ुआर, माणिक , रासबिहारी, साधन महतो, पार्वती चरण, लक्ष्मण, गोपाल, शत्रुघ्न, सुभाष, अरुण, कुमुद, गंगाधर महतो आदि समाज के अनेक वरिष्ठजन, युवा नेता एवं महिला प्रतिनिधि उपस्थित थे।

प्रज्ञा केंद्र की आड़ में चल रहा गरीब जनता को लूटने का कार्य,,प्रशासन है बेखबर।

प्रज्ञा केंद्र की आड़ में चल रहा गरीब जनता को लूटने का कार्य,,प्रशासन है बेखबर।

सरायकेला/आदित्यपुर

सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना अंतर्गत शर्मा मार्केट में कॉमन सर्विस सेंटर जो प्रज्ञा केंद्र चल रहे हैं आवासीय, जाति, आय प्रमाण पत्र एवं आयुष्मान कार्ड का सर्विस करते हैं जो जनता को डेढ़ सौ 200 रुपया करके ले रहे हैं और हर दिन के इतना रुपया ले करके किसी अधिकारी के पास इनको देना रहता है क्या प्रज्ञा केंद्र इसीलिए सरकार ने खोला है कि प्रज्ञा केंद्र के नाम पर जनता को लूटने का काम प्रज्ञा केंद्र चलाने वाले लोग करें।


आखिर यह लाखों रुपया महीने की कमाई कौन सी सरकारी अधिकारी के पास जाता है।
कॉमन सर्विस सेंटर शर्मा मार्केट जिसके प्रोपराइटर है चीनू जो प्रज्ञा केंद्र के नाम पर जनता को लूटने का काम कर रहे हैं।
जनहित में इस तरह की प्रज्ञा केंद्र को बंद कर देना चाहिए।
सरकार की गाइडलाइंस और प्रज्ञा केंद्र के नियम निम्न है जो नीचे दिए गए हैं आम जनता उसे ध्यान से पढ़े।

झारखंड में प्रज्ञा केंद्र (जिसे कॉमन सर्विस सेंटर या सीएससी भी कहते हैं) के संचालन के लिए कुछ नियम और दिशानिर्देश हैं, जो सरकार की ओर से समय-समय पर जारी किए जाते हैं। ये नियम केंद्रों के सुचारु संचालन और नागरिकों को बेहतर सेवाएँ प्रदान करने के लिए बनाए गए हैं। 

मुख्य नियम और दिशानिर्देश:

सेवाओं से संबंधित नियम

  • प्रमाण पत्र जारी करना: प्रज्ञा केंद्रों को आय, जाति, निवास और अन्य सरकारी प्रमाण पत्रों के आवेदनों को ई-नागरिक सेवा सॉफ्टवेयर के माध्यम से स्वीकार करना होता है।
  • आवेदन की अस्वीकृति: यदि किसी आवेदन में कोई गलती या विसंगति पाई जाती है, तो उसे अस्वीकृत (reject) किया जा सकता है। अस्वीकृति का कारण पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य है।
  • समय-सीमा का पालन: आवेदनों को आठ कार्य दिवसों के भीतर निष्पादित करना अनिवार्य है।
  • सेवा शुल्क: प्रज्ञा केंद्र संचालकों को सेवा के लिए निर्धारित शुल्क ही लेना होता है। उदाहरण के लिए, प्रमाण पत्र प्रिंट करने के लिए प्रति प्रमाण पत्र 1 रुपया लिया जा सकता है।
  • आवेदनों की निगरानी: उपायुक्त समय-समय पर आवेदनों की स्थिति की निगरानी करते हैं।
  • सेवाओं की सूची: प्रज्ञा केंद्र कई तरह की सेवाएँ प्रदान करते हैं, जैसे आधार नामांकन और अपडेट, पैन कार्ड सेवाएँ, बैंकिंग और मनी ट्रांसफर, सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन और बीमा सेवाएँ। 

संचालन से संबंधित नियम

  • बुनियादी ढाँचा: केंद्र में आवश्यक बुनियादी सुविधाएँ होनी चाहिए, जैसे कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर और इंटरनेट कनेक्टिविटी।
  • कर्मचारी और प्रशिक्षण: प्रज्ञा केंद्रों के संचालकों (वीएलई) को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है। सॉफ्टवेयर या प्रक्रियाओं में बदलाव की जानकारी सभी हितधारकों को दी जानी चाहिए।
  • समन्वय: केंद्र संचालकों को जिला प्रशासन और संबंधित सेवा प्रदाता एजेंसी (एससीए) के साथ समन्वय बनाए रखना होता है।
  • शिकायत निवारण: नागरिकों की शिकायतों के निवारण में सहायता करना भी केंद्र की जिम्मेदारी है। 

जवाबदेही और पारदर्शिता

  • सामाजिक ऑडिट: प्रज्ञा केंद्रों का नियमित सामाजिक ऑडिट किया जाना चाहिए। इससे काम के घंटों और रसीद जारी करने जैसे नियमों का पालन सुनिश्चित होता है।
  • डेटा सार्वजनिक करना: केंद्रों द्वारा प्रदान की गई सेवाओं का डेटा सार्वजनिक किया जाना चाहिए, जिसमें आवेदनों की संख्या और अर्जित कमीशन जैसी जानकारी शामिल है। 

पंजीकरण और पात्रता

  • ऑनलाइन आवेदन: झारखंड में कोई भी भारतीय नागरिक ऑनलाइन आवेदन करके प्रज्ञा केंद्र खोल सकता है।
  • आवश्यक दस्तावेज़: पंजीकरण के लिए कुछ दस्तावेज़ों की आवश्यकता होती है, जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और बैंक पासबुक।
  • निवेश: केंद्र खोलने के लिए लगभग ₹10,000 के शुरुआती निवेश की आवश्यकता हो सकती है। 

अस्वीकरण: ये नियम समय के साथ बदल सकते हैं। सबसे सटीक और अद्यतन जानकारी के लिए, आवेदकों और संचालकों को झारखंड सरकार के आधिकारिक पोर्टल (जैसे https://jharsewa.jharkhand.gov.in/) और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की वेबसाइट पर जारी दिशा-निर्देशों की जाँच करनी चाहिए। 

सरायकेला जिले में चोरों का आतंक चरम पर पहुंचा, चोरों के आतंक से  आम जनता परेशान

सरायकेला जिले में चोरों का आतंक चरम पर पहुंचा, चोरों के आतंक से  आम जनता परेशान

सरायकेला खरसावां

सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर,आर आई टी, गम्हरिया एवं कांड्रा थाना अंतर्गत इन दीनों चोरों ने आतंक मचाया हुआ है जिससे कि जानता काफी परेशान है और प्रशासन की खामोशी ने चोरों का मनोबल और भी बढ़ा दिया है।

पूजा का माहौल चल रहा है और भिन्न-भिन्न क्षेत्रों से आए हुए चोरों के ग्रुप इन दीनों खूब अपनी हाथ की सफाई कर रहे हैं और वहीं जनता की मेहनत की कमाई सरेआम चोरी कर भाग जा रहे हैं। वहीं प्रशासन के हाथ कोई सुराग न मिलने से जनता में आक्रोश फैलता जा रहा है।

प्रशासन के इस नाकामयाबी पर जनता में फैला आक्रोश निश्चित ही कहीं ना कहीं सही भी है।
अपनी दैनिक जीवन में मेहनत मजदूरी कर खरीदी हुई मोबाइल चोरी हो जा रही है किसी की चैन चिंताई हो जा रही है। कंही खुलेआम नशाखोरी चल रहा है तो कहीं जुआ सट्टा मटका लॉटरी खुलेआम चल रही है प्रशासन के हाथ बिल्कुल खाली नजर आ रहा है।

आए दिन देखा जा रहा है कि प्रतिबंध चीजों का खरीद करने वालों का थानों में विशेष करके स्वागत हो रहा है। वहीं आम जनता को एक मामले की एप्लीकेशन देने में भी घंटा घंटा बैठक बेवजह इंतजार कराया जाता है।
क्या यही है आजादी क्या यही है प्रशासन अगर ऐसा है तो आम जनता ने दबे जुबान में यह भी कहा है इससे तो अच्छा हम अंग्रेजों के गुलाम ही थे।
वहीं कुछ लोगों ने जमशेदपुर के पूर्व में रह चुके पुलिस कप्तान डॉक्टर अजय कुमार की भी तारीफ करते हुए सराहना की।
16 सितंबर को पत्रकार भारत सिंह की भी मोबाइल किसी चोर ने पाकिट मार ली शिकायत आदित्यपुर थाना में दर्ज हुआ है या नहीं लेकिन लिखित शिकायत पत्रकार ने आदित्यपुर थाना को दी है।

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