मिर्जाडीह में शिक्षा सशक्तिकरण कार्यक्रम, 250 बच्चों के बीच शैक्षणिक सामग्री का वितरण।

मिर्जाडीह में शिक्षा सशक्तिकरण कार्यक्रम, 250 बच्चों के बीच शैक्षणिक सामग्री का वितरण।

जमशेदपुर/बोड़ाम

एसटीपी (बर्जर ग्रुप ऑफ कंपनीज) की ओर से बोड़ाम प्रखंड के मिर्जाडीह स्थित मध्य विद्यालय में एक शिक्षा सशक्तिकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की गई।

इस दौरान विद्यालय के 250 छात्र-छात्राओं के बीच स्कूल बैग, कॉपी, टिफिन बॉक्स, पेंसिल बॉक्स, वॉटर बोतल, कलर बॉक्स, रबर, शार्पनर, ज्योमेट्री बॉक्स, स्केल समेत कई जरूरी शैक्षणिक सामग्रियां बांटी गईं। नई सामग्री पाकर बच्चों के चेहरों पर खुशी और उत्साह साफ झलक रहा था।

कार्यक्रम में एसटीपी (बर्जर ग्रुप ऑफ कंपनीज) के एचआर हेड प्रणब भूटे, उत्तम कुमार दत्ता तथा ऑप्टिस्टोन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक शुभंकर चक्रवर्ती के साथ अनिमेष, रोबिन, सिला, माधुरी और दूलहन मौजूद रहे।

इस मौके पर अतिथियों ने विद्यार्थियों को शिक्षा के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए मन लगाकर पढ़ने और अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को पढ़ाई के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और शिक्षा के प्रति उनकी रुचि भी मजबूत होती है।

कार्यक्रम का संचालन संस्कृति सोशल वेलफेयर फाउंडेशन की अध्यक्ष मुनमुन चक्रवर्ती ने किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराना उनके उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

टाटा स्टील कर्मचारियों को बोनस: मेहनत की कमाई को भविष्य की मजबूती बनाएं।

टाटा स्टील कर्मचारियों को बोनस: मेहनत की कमाई को भविष्य की मजबूती बनाएं।

जमशेदपुर

टाटा स्टील के कर्मचारियों के लिए इस वर्ष बोनस को लेकर अच्छी खबर सामने आई है। कंपनी प्रबंधन और यूनियन के बीच बोनस समझौते को अंतिम रूप दे दिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस वर्ष कर्मचारियों को कुल लगभग 330 करोड़ रुपये का बोनस मिलेगा।

पिछले वर्ष कर्मचारियों को लगभग 303.13 करोड़ रुपये का बोनस मिला था। इसमें जमशेदपुर के 11,466 कर्मचारियों के बीच 152.44 करोड़ रुपये वितरित किए गए थे। इस वर्ष पुराने फार्मूले के आधार पर बोनस देने पर सहमति बनी है और अंतिम समझौता प्रबंधन एवं यूनियन के बीच सर्वसम्मति से हुआ है।

विगत दो दिन पहले ही टाटा वर्कर्स यूनियन एवं टाटा स्टील प्रबंधन के बीच बोनस के संबंध में अंतिम निर्णय लिया गया है, जो सभी के लिए सर्वमान्य है। समझौते के अनुसार लगभग 330 करोड़ रुपये की बोनस राशि एक सप्ताह के भीतर कर्मचारियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।

इस सफल एवं सौहार्दपूर्ण वार्ता के लिए टाटा वर्कर्स यूनियन और टाटा स्टील प्रबंधन को विशेष रूप से बधाई। साथ ही, टाटा स्टील के प्रबुद्ध निदेशक मंडल एवं नेतृत्व को भी इस सकारात्मक निर्णय के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

अनुमान के अनुसार, इस वर्ष कर्मचारियों को अधिकतम लगभग 4.25 लाख रुपये तथा न्यूनतम करीब 52 हजार रुपये तक बोनस मिल सकता है। हालांकि प्रत्येक कर्मचारी को मिलने वाली वास्तविक राशि उसके वेतन, सेवा अवधि तथा निर्धारित फार्मूले के आधार पर तय होगी।

बोनस कर्मचारियों की वर्षभर की मेहनत और कंपनी की प्रगति में उनके योगदान का सम्मान है। इसलिए मेरा सभी टाटा स्टील कर्मचारियों से विशेष आग्रह है कि बोनस की पूरी राशि को अचानक खरीदारी, दिखावे या गैर-जरूरी खर्चों में समाप्त न करें।

बोनस प्राप्त होने पर सबसे पहले अपने परिवार की आवश्यकताओं और आर्थिक जिम्मेदारियों का आकलन करें। यदि कोई कर्ज या जरूरी भुगतान लंबित है, तो उसे प्राथमिकता दें। इसके बाद बोनस की एक अच्छी राशि को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने अथवा उचित निवेश करने पर विचार करें।

बच्चों की शिक्षा, उनके भविष्य, स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं, घर की जरूरतों तथा आकस्मिक परिस्थितियों के लिए आपातकालीन निधि तैयार करना एक समझदारी भरा कदम होगा। अपनी उम्र, आय, आर्थिक स्थिति और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार सावधि जमा, सार्वजनिक भविष्य निधि, व्यवस्थित निवेश योजना, म्यूचुअल फंड अथवा अन्य उपयुक्त निवेश विकल्पों पर किसी योग्य वित्तीय विशेषज्ञ से सलाह लेकर विचार किया जा सकता है।

बोनस का कुछ हिस्सा परिवार के साथ खुशी मनाने में खर्च करना स्वाभाविक और उचित है। आखिर यह वर्षभर की मेहनत का फल है। लेकिन पूरी राशि को तुरंत खर्च कर देना आर्थिक दृष्टि से समझदारी नहीं होगी। बोनस की वास्तविक सफलता तभी है, जब इससे आज की खुशी के साथ-साथ आने वाले कल की आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित हो।

टाटा स्टील के कर्मचारियों ने अपनी मेहनत, अनुशासन और समर्पण से कंपनी की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अब इस मेहनत से प्राप्त बोनस को सही तरीके से बचत, निवेश और भविष्य की सुरक्षा में लगाकर अपने परिवार को आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है।

“बोनस आज मिला है, लेकिन इसका लाभ आने वाले कई वर्षों तक मिले यही सही आर्थिक सोच है।”

ए. के. श्रीवास्तव
अध्यक्ष, जमशेदपुर सिटीजन फोरम
उद्यमी एवं परामर्शी

जिले की पुलिसिंग को मिली रफ्तार, बेड़े में शामिल हुईं 19 नई बोलेरो।

जिले की पुलिसिंग को मिली रफ्तार, बेड़े में शामिल हुईं 19 नई बोलेरो।

अब 38 बोलेरो और 26 बाइक से होगी पेट्रोलिंग, एसपी ने खुद स्टेयरिंग संभालकर किया गश्त का निरीक्षण

सरायकेला

(मालखान महतो)
     
सरायकेला-खरसावां जिले में अपराध नियंत्रण, त्वरित पुलिस रिस्पॉन्स और पेट्रोलिंग व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए जिला पुलिस के बेड़े में गुरुवार को 19 नई बोलेरो शामिल की गईं। नए वाहनों के शामिल होने के बाद जिले में पुलिस के पास कुल 38 बोलेरो और 26 बाइक उपलब्ध हो गई हैं। इन वाहनों को विभिन्न थाना क्षेत्रों में पेट्रोलिंग, रात्रि गश्ती, हाईवे निगरानी और विधि-व्यवस्था से जुड़े कार्यों में लगाया जाएगा।

सरायकेला पुलिस केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर नए पेट्रोलिंग वाहनों को रवाना किया। इस दौरान अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, मुख्यालय डीएसपी, पुलिस मेंस एसोसिएशन एवं पुलिस एसोसिएशन के पदाधिकारी समेत पुलिस अधिकारी और जवान मौजूद रहे।

एसपी ने खुद संभाली स्टेयरिंग, क्षेत्र में निकले पेट्रोलिंग पर
नए वाहनों को रवाना करने के बाद एसपी मनोज स्वर्गियारी ने खुद एक पेट्रोलिंग वाहन की स्टेयरिंग संभाली और क्षेत्र में गश्त के लिए निकले। उनके साथ एसडीपीओ एवं मुख्यालय डीएसपी भी रहे। एसपी ने वाहन चलाते हुए कोलेबिरा तक पेट्रोलिंग की और रास्ते में पुलिस की गश्ती व्यवस्था का जायजा लिया।

एसपी ने कहा कि नए वाहनों के मिलने से जिला पुलिस की गतिशीलता और त्वरित कार्रवाई की क्षमता बढ़ेगी। किसी आपराधिक घटना या विधि-व्यवस्था से संबंधित सूचना मिलने पर पुलिस टीम कम समय में घटनास्थल तक पहुंच सकेगी। नियमित और प्रभावी पेट्रोलिंग से संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने के साथ अपराधियों पर भी दबाव बनाया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि जिले में बेहतर पुलिसिंग के लिए संसाधनों को मजबूत किया जा रहा है। उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हुए आम लोगों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करना जिला पुलिस की प्राथमिकता है।

दूरदराज और संवेदनशील क्षेत्रों में बढ़ेगी पुलिस की पहुंच
सरायकेला-खरसावां का भौगोलिक क्षेत्र विस्तृत है। जिले में शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं दूरदराज के इलाके भी हैं। ऐसे क्षेत्रों में पुलिस की नियमित मौजूदगी और त्वरित रिस्पॉन्स सुनिश्चित करने में नए वाहन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
नई बोलेरो का उपयोग रात्रि गश्ती, हाईवे पेट्रोलिंग, अपराधियों की धर-पकड़, आपातकालीन घटनाओं में त्वरित कार्रवाई और विधि-व्यवस्था बनाए रखने में किया जाएगा। इससे पुलिस की क्षेत्र में दृश्यता बढ़ने और रिस्पॉन्स टाइम कम होने की उम्मीद है।
पुलिस को मिले 40 फर्स्ट एड मेडिकल किट

कार्यक्रम से पहले ब्रह्मानंद नारायणा अस्पताल, तमोलिया की ओर से जिला पुलिस को 40 फर्स्ट एड मेडिकल किट उपलब्ध कराए गए। इन किटों को पुलिस वाहनों और जरूरत वाले स्थानों पर रखा जाएगा। सड़क दुर्घटना अथवा अन्य आपात स्थिति में पुलिस के घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने की स्थिति में घायल व्यक्ति को अस्पताल ले जाने से पहले प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।

एसपी ने कहा कि पेट्रोलिंग के दौरान पुलिसकर्मी अक्सर दुर्घटना और अन्य आपात परिस्थितियों में सबसे पहले मौके पर पहुंचते हैं। ऐसे में वाहनों में प्राथमिक चिकित्सा सामग्री उपलब्ध रहने से जरूरतमंदों को तत्काल सहायता देने में काफी सुविधा होगी।
नई बोलेरो और मेडिकल किट के साथ जिला पुलिस की संसाधन क्षमता बढ़ी है। अब इन संसाधनों के जरिए जिले में पुलिस की सक्रियता बढ़ाने, त्वरित रिस्पॉन्स सुनिश्चित करने और अपराध नियंत्रण को और प्रभावी बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।

श्री राम पब्लिक स्कूल और प्रभावती स्कूल ऑफ नर्सिंग का 27वां वार्षिकोत्सव धूमधाम से संपन्न, प्रतिभाशाली छात्रों को किया गया सम्मानित।

श्री राम पब्लिक स्कूल और प्रभावती स्कूल ऑफ नर्सिंग का 27वां वार्षिकोत्सव धूमधाम से संपन्न, प्रतिभाशाली छात्रों को किया गया सम्मानित।

सरायकेला/आदित्यपुर

भाटिया बस्ती स्थित श्री राम पब्लिक स्कूल एवं प्रभावती स्कूल ऑफ नर्सिंग का 27वां वार्षिक उत्सव सह प्राइज नाइट समारोह आदित्यपुर के ऑटो क्लस्टर सभागार में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि आदित्यपुर के उप महापौर अंकुर सिंह, विशिष्ट अतिथि पार्षद मंजू देवी तथा गंगोत्री नर्सिंग होम के निदेशक और विहिप जिलाध्यक्ष डॉ. जे.एन. दास ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान उप महापौर अंकुर सिंह ने छात्रों को संबोधित करते हुए जीवन में आगे बढ़ने और सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।

संस्थान के निदेशक पंकज प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि यह समारोह संघर्ष, सेवा और सफलता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि संस्था 1999 से शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत है। वर्ष 2012 में एनआईटी के पूर्व प्राचार्य स्व. डॉ. श्री राम प्रसाद की स्मृति में श्री राम पब्लिक स्कूल की स्थापना की गई, वहीं 2021 में शुरू हुआ प्रभावती स्कूल ऑफ नर्सिंग महिला सशक्तिकरण की दिशा में सराहनीय कार्य कर रहा है।

समारोह के दौरान शैक्षणिक सत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। प्री-प्राइमरी वर्ग में प्रदीप, आरव महतो और कृतिका, प्राइमरी वर्ग में अनु घोष, रिजवाना आरा और दिव्यांशु तथा हाई स्कूल वर्ग में साहिल, लक्ष्मी, पवन और अंबिका सहित अन्य छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। नर्सिंग संकाय में सानिया गोप, पिंकी पत्रा, रेशमी कुमारी और जाबा रानी महतो को पुरस्कार प्रदान किया गया।

इस मौके पर छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। उनके मनमोहक नृत्य और गीतों ने सामाजिक संदेश देते हुए सभी का मन मोह लिया।

अंत में प्राचार्या सुषमा कुमारी ने सभी अतिथियों, अभिभावकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में सचिव रिंकी प्रसाद, नर्सिंग प्राचार्या श्रेया झा, मो. समशेर समेत सभी शिक्षकों और कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित थे।

झामुमो का 7 सितंबर को प्रस्तावित आंदोलन की तैयारियाँ तेज़।

झामुमो का 7 सितंबर को प्रस्तावित आंदोलन की तैयारियाँ तेज़।

सरायकेला/आदित्यपुर

खनिज संशोधन विधेयक के खिलाफ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) द्वारा 7 सितंबर को प्रस्तावित आंदोलन की तैयारियाँ तेज़ हो गई हैं। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव जाकर विधेयक के प्रावधानों व संभावित प्रभावों से जनता को अवगत कराया और आंदोलन को व्यापक जनाधार देने के लिये रणनीतियाँ बनाईं।

झामुमो के वरिष्ठ नेता और शिक्षाविद केपी सोरेन ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यह विधेयक झारखंड सरकार को कमजोर करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। सोरेन ने कहा कि केंद्र पर राज्य का लगभग ₹1,36,000 करोड़ बकाया है और उस राशि का भुगतान टालने के लिए केंद्र विभिन्न तरीकों का सहारा ले रहा है। उन्होंने कहा कि इसी कारण जल्दबाज़ी में यह कानून लाया जा रहा है।

सोरेन ने कड़ा रूख अपनाते हुए कहा कि झामुमो किसी भी स्थिति में इस विधेयक को कानून नहीं बनने देगा और इसके खिलाफ “अंतिम और निर्णायक” लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे जनजागरण अभियान को और तेज़ करें, लोगों तक विधेयक की जानकारी पहुँचाएँ और अधिक से अधिक लोगों को आंदोलन से जोड़ें।

पार्टी ने बताया कि इस आंदोलन की पहली झलक 7 सितंबर को दिखाई देगी और उसके बाद प्रदेश स्तर पर बड़े पैमाने पर आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर आगे बढ़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सरायकेला-खरसावां जिला में ऐतिहासिक आंदोलन होगा। बैठकों में जनसंपर्क अभियान, संगठनात्मक रणनीति और स्थानीय स्तर पर लोगों को शामिल करने के तरीकों पर चर्चा जारी है। स्थानीय पदाधिकारियों ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में बैठकें और खोज-खबर अभियान सक्रिय हैं ताकि आम जनता को विधेयक के संभावित लाभ-हानि की स्पष्ट जानकारी मिल सके। पुलिस और प्रशासन द्वारा सुरक्षा व जन-व्यवस्था के दृष्टिकोण से क्या कदम उठाए जाएंगे, इस पर अभी वृहद स्तर पर कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं हुई है।

झामुमो के प्रस्तावित आंदोलन को लेकर क्षेत्रीय राजनीतिक व सामाजिक प्रतिक्रिया और सरकारी रुख पर अगले कुछ दिनों में निगाहें टिकी रहेंगी। जनता के साथ होने वाली बैठकों और 7 सितंबर के आयोजन के बाद ही आंदोलन की दिशा स्पष्ट रूप से सामने आएगी।

सीएसआईआर-जिज्ञासा: एनएमएल के भ्रमण पर पहुंचे लोयोला स्कूल के 83 विद्यार्थी, वैज्ञानिकों से किया संवाद।

सीएसआईआर-जिज्ञासा: एनएमएल के भ्रमण पर पहुंचे लोयोला स्कूल के 83 विद्यार्थी, वैज्ञानिकों से किया संवाद।

जमशेदपुर

सीएसआईआर–राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएमएल), जमशेदपुर द्वारा सीएसआईआर-जिज्ञासा पहल के अंतर्गत लोयोला स्कूल, बिष्टुपुर के विद्यार्थियों के लिए एक दिवसीय छात्र भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना तथा अनुसंधान एवं नवाचार के प्रति रुचि जागृत करना था।

इस कार्यक्रम में 83 विद्यार्थियों (49 लड़के एवं 34 लड़कियाँ) तथा 3 शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. एस. शिवप्रसाद, वरिष्ठतम मुख्य वैज्ञानिक एवं प्रमुख, एमटीई प्रभाग के संबोधन से हुआ। उन्होंने विद्यार्थियों को सीएसआईआर-एनएमएल की विभिन्न गतिविधियों से परिचित कराया तथा प्रयोगशाला में अनुसंधान से लेकर प्रौद्योगिकी विकास तक की संपूर्ण प्रक्रिया को सरल ढंग से समझाया। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक अनुसंधान किस प्रकार उद्योगों एवं समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप नई सामग्रियों और प्रौद्योगिकियों के विकास में योगदान देता है।

प्रतिभागियों का स्वागत डॉ. के. गोपाला कृष्णा, वैज्ञानिक-जी एवं प्रमुख, आईएमडीसी प्रभाग ने किया। उन्होंने विभिन्न प्रकार के इस्पात एवं मिश्रधातुओं तथा उनके दैनिक जीवन में उपयोगों पर प्रकाश डाला। उन्होंने दैनिक जीवन के उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि किसी विशेष उपयोग के लिए सामग्री का चयन उसके गुणों के आधार पर किया जाता है। साथ ही, उन्होंने राइट बंधुओं के नवाचार का उल्लेख करते हुए बताया कि वैज्ञानिक सिद्धांतों एवं उपयुक्त सामग्रियों की भूमिका तकनीकी प्रगति में कितनी महत्वपूर्ण होती है।

इसके पश्चात डॉ. अनिमेष जना, वैज्ञानिक-ई एवं जिज्ञासा कार्यक्रम प्रमुख ने एक इंटरैक्टिव प्रस्तुति के माध्यम से सीएसआईआर-जिज्ञासा कार्यक्रम का परिचय दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को स्टेम क्लब सहित सीएसआईआर द्वारा संचालित विभिन्न छात्र-केंद्रित पहलों एवं अवसरों की जानकारी दी, जिनका लाभ उठाकर विद्यार्थी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी रुचि को और विकसित कर सकते हैं।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण प्रयोगशालाओं का भ्रमण था, जहाँ विद्यार्थियों ने सिगरइइपि, एएसी, ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग, एनडीटी तथा मेल्टिंग डेमोंस्ट्रेशन सुविधाओं का अवलोकन किया। विद्यार्थियों को डीआईविई किट तथा जल-विभाजन प्रयोग का भी प्रदर्शन दिखाया गया। कार्यक्रम का समापन एक रोचक प्रश्नोत्तरी (क्विज़) के साथ हुआ। विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने वैज्ञानिकों के साथ संवाद तथा प्रयोगशाला गतिविधियों को प्रत्यक्ष रूप से देखने के अवसर की सराहना की।

केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन, उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन।

केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन, उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन।

सरायकेला-खरसावां

सरायकेला-खरसावां उपायुक्त कार्यालय के समक्ष कांग्रेस जिला कमेटी की ओर से केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ एक दिवसीय सांकेतिक धरना-प्रदर्शन किया गया। जिला अध्यक्ष राज बागची के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने MMDR कानून, महंगाई, पेपर लीक और राम मंदिर में चोरी सहित कई मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। धरना समाप्त होने के बाद कांग्रेस नेताओं ने उपायुक्त को ज्ञापन भी सौंपा।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष राज बागची ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों का सीधा असर आम जनता के साथ-साथ राज्यों के अधिकारों पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि झारखंड में गठबंधन सरकार आवास, पेंशन और मंईयां सम्मान योजना समेत कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही है, जिससे आम लोगों को लाभ मिल रहा है।

राज बागची ने आरोप लगाया कि इन योजनाओं से भाजपा को परेशानी हो रही है और इसी वजह से केंद्र सरकार कानूनों के जरिए झारखंड के हिस्से के पैसे पर नियंत्रण करना चाहती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

महंगाई के मुद्दे पर भी राज बागची ने केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह सरकार के समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल थी, इसके बावजूद सब्सिडी के जरिए जनता को कम कीमत पर पेट्रोल उपलब्ध कराया जाता था। उन्होंने दावा किया कि आज भी कच्चे तेल की कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास होने के बावजूद जनता को पेट्रोल के लिए करीब 105 रुपये प्रति लीटर तक चुकाना पड़ रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि 2014 में महंगाई को बड़ा मुद्दा बनाकर सत्ता में आने वाली केंद्र सरकार आज बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण करने में विफल रही है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र की नीतियों से आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि एमएमडीआर कानून के खिलाफ गठबंधन के घटक दल मिलकर आंदोलन को और तेज करेंगे। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो देशव्यापी आंदोलन, सड़क जाम और अन्य लोकतांत्रिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

धरना-प्रदर्शन में जिला अध्यक्ष राज बागची, सरायकेला विधानसभा प्रभारी प्रिंस सिंह, प्रदेश प्रवक्ता देबू छत्तर्जी, वरिष्ठ नेता फूलकांत झा, वरिष्ठ जिला कोषाध्यक्ष जगदीश नारायण चौबे, इंटक प्रभारी राणा सिंह, सुरेश धारी, जिला उपाध्यक्ष डोमन महतो, लाल बाबू सिंहदेव, खिरोद सरदार, महासचिव राजू रजक, कृष्णा टुडू, मानसिंह मुंडा, मिस्र बांसुरिया, कमलनयन, रिजवान खान, मुकेश कुमार, शंकर रोड़ा, सूरज महतो, राहुल मोदी, के.एल. सम्माड, राजनगर प्रखंड अध्यक्ष प्रकाश महतो, गम्हरिया प्रखंड अध्यक्ष अनिल ठाकुर, गम्हरिया प्रखंड उपाध्यक्ष इंद्रकांत झा, सरायकेला प्रखंड अध्यक्ष सचिन हेंब्रम समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता मौजूद रहे।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार की ओर से उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

रक्षाबंधन से पहले झारखंड सरकार का बहनों को उपहार।

रक्षाबंधन से पहले झारखंड सरकार का बहनों को उपहार।

रांची

झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना अंतर्गत रांची जिला के लाभुकों को अगस्त महीने की सम्मान राशि का भुगतान

रांची जिला में 03 लाख 95 हजार 692 लाभुकों के बैंक खाते में आधार बेस्ड भुगतान

लाभुकों के मध्य ₹98 करोड़ 92 लाख 30 हजार की सम्मान राशि का भुगतान

रक्षाबंधन से पहले झारखंड सरकार द्वारा बहनों को उपहार दिया गया है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना (JMMSY) अंतर्गत रांची जिले की 03 लाख 95 हज़ार 692 लाभुकों के बैंक खातों में माह अगस्त 2026 की सम्मान राशि (₹2,500 प्रत्येक लाभुक) का आधार बेस्ड डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सफलतापूर्वक भुगतान कर दिया गया है।

योजना के तहत लाभुकों के खातों में कुल ₹98 करोड़  92 लाख 30 हजार की राशि हस्तांतरित की गई है।

प्रखंड एवं शहरी क्षेत्रवार लाभुकों की संख्या निम्न प्रकार है :

1. अनगड़ा – 16,796
2. अरगोड़ा शहरी क्षेत्र -13,406
3. बेड़ो – 20,620
4. बुंडू – 8,591
5. बुंडू नगर पंचायत – 3,566
6. बुढ़मू – 17,841
7. चान्हो – 19,374
8. हेहल शहरी क्षेत्र – 16,376
9. कांके – 31,620
10. कांके शहरी क्षेत्र – 1,290
11. खलारी – 9,632
12. लापुंग – 11,866
13. मांडर – 23,008
14. नगड़ी – 18,345
15. नगड़ी शहरी क्षेत्र – 8,244
16. नामकुम – 18,071
17. नामकुम शहरी क्षेत्र – 9,571
18. ओरमांझी – 17,898
19. राहे – 9,551
20. रातू – 20,427
21. सिल्ली – 21,335
22. सोनाहातू – 13,114
23. तमाड़ – 18,832
24. टाउन अर्बन – 26,042
25. इटकी – 10152
26. बड़गाईं शहरी क्षेत्र – 10124

जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। रांची जिले में योजना का लाभ पात्र लाभुकों तक पारदर्शी, सुगम और समयबद्ध तरीके से पहुंचाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि किसी भी पात्र महिला को योजना के लाभ से वंचित न रहना पड़े। लाभुकों के भुगतान की प्रक्रिया की नियमित समीक्षा की जा रही है तथा संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। यह योजना केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान, स्वावलंबन और सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम है।
अबुआ साथी–9430328080
जन शिकायत हेतु रांची जिला प्रशासन का आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर

नेपाल में बाढ़ का कहर, तिब्बत से शुरू हुई आपदा ने मचाई तबाही।

नेपाल में बाढ़ का कहर, तिब्बत से शुरू हुई आपदा ने मचाई तबाही।

नेपाल

नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। बताया जा रहा है कि बाढ़ की शुरुआत तिब्बत से सटे इलाके से हुई और देखते ही देखते इसका तेज बहाव नेपाल के कई शहरों, गांवों और मुख्य हाईवे तक पहुंच गया। इस आपदा में अब तक 22 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। चिंता की बात ये है कि लापता लोगों में 105 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।

इस बाढ़ की भयावहता का अंदाजा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो से लगाया जा सकता है। तिब्बत-नेपाल सीमा के पास का एक वीडियो चीन के इमिग्रेशन सेंटर का बताया जा रहा है। वीडियो में पहले सब कुछ सामान्य दिखता है, लेकिन कुछ ही सेकंड में पहाड़ों की ओर से पानी की ऊंची-ऊंची लहरें आती हैं और पूरे इलाके को निगल लेती हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पानी का वेग इतना तेज था कि उसने चंद सेकंड में लगभग पांच मंजिला ऊंची इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। वीडियो में लोग जान बचाने के लिए सड़कों पर भागते और चीखते-चिल्लाते हुए दिखाई दे रहे हैं। पानी के साथ कई ढांचे और सामान बहते हुए नजर आ रहे हैं। इमारत के अंदर उस वक्त कितने लोग थे, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी नहीं मिल पाई है।

बाढ़ के कारण नेपाल में कई पुल, सड़कें और बुनियादी ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। कई इलाकों का संपर्क पूरी तरह कट गया है, जिससे राहत और बचाव कार्य में भी काफी दिक्कतें आ रही हैं।

हालात को देखते हुए नेपाल प्रशासन ने कई प्रमुख हाईवे पर आवाजाही पर रोक लगा दी है। सुरक्षा के मद्देनजर काठमांडू-नागढुंगा, नागढुंगा-धादिंग, गल्छी-त्रिशूली, धादिंग-मुग्लिन और मुग्लिन-नारायणघाट रूट को बंद कर दिया गया है। इसके साथ ही नारायणी ब्रिज पर भी अगले आदेश तक यातायात बंद रहेगा।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बेवजह यात्रा न करें और सुरक्षित जगहों पर ही रहें। फिलहाल सेना और बचाव दल फंसे हुए लोगों को निकालने और लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटकों के फंसे होने से उनके परिजनों में भी दहशत का माहौल है।

जिला आयुष समिति द्वारा विद्यालय एवं अर्जुन स्टेडियम में स्वास्थ्य शिविर आयोजित, विद्यार्थियों एवं प्रशिक्षुओं की स्वास्थ्य जांच कर वितरित की गई निःशुल्क होम्योपैथी दवाएं।

जिला आयुष समिति द्वारा विद्यालय एवं अर्जुन स्टेडियम में स्वास्थ्य शिविर आयोजित, विद्यार्थियों एवं प्रशिक्षुओं की स्वास्थ्य जांच कर वितरित की गई निःशुल्क होम्योपैथी दवाएं।

सरायकेला-खरसावां

जिला आयुष समिति, सरायकेला द्वारा जिले में स्वास्थ्य जांच एवं आयुष चिकित्सा सेवाओं को सुलभ बनाने के उद्देश्य से विभिन्न स्थलों पर स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया।

इसी क्रम में मध्य विद्यालय, ब्रह्मकुटुंब में आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी डॉ. सैफी ज़ोहेब के द्वारा स्कूल हेल्थ कैंप आयोजित किया गया। शिविर में विद्यालय में अध्ययनरत 32 विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की जांच की गई तथा आवश्यकतानुसार उन्हें निःशुल्क होम्योपैथी दवाओं का वितरण किया गया।

वहीं, अर्जुन स्टेडियम, सरायकेला में आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी डॉ. आशा कुमारी द्वारा मासिक स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में स्टेडियम में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रशिक्षुओं के स्वास्थ्य की जांच की गई तथा आवश्यकतानुसार उन्हें निःशुल्क होम्योपैथी दवाएं उपलब्ध कराई गईं।

स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से विद्यार्थियों एवं प्रशिक्षुओं को नियमित स्वास्थ्य जांच के साथ आयुष चिकित्सा पद्धति के माध्यम से आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

अंचल अधिकारी, कुकड़ू एवं थाना प्रभारी, तिरुलडीह के संयुक्त नेतृत्व में अवैध बालू उत्खनन एवं परिवहन के विरुद्ध कार्रवाई, 5,000 CFT बालू जब्त।

अंचल अधिकारी, कुकड़ू एवं थाना प्रभारी, तिरुलडीह के संयुक्त नेतृत्व में अवैध बालू उत्खनन एवं परिवहन के विरुद्ध कार्रवाई, 5,000 CFT बालू जब्त।

सरायकेला/खरसावां

उपायुक्त, सरायकेला-खरसावां के निर्देशानुसार जिले में अवैध बालू उत्खनन एवं परिवहन के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में आज दिनांक 21 अगस्त, 2026 को अंचल अधिकारी, कुकड़ू श्री अभय कुमार दिर्वेदी एवं थाना प्रभारी, तिरुलडीह द्वारा संयुक्त रूप से कार्रवाई की गई।

संयुक्त कार्रवाई के दौरान तिरुलडीह थाना अंतर्गत डांटम जंगल क्षेत्र से लगभग 5,000 CFT (पांच हजार घन फीट) बालू जब्त किया गया।

जिला प्रशासन द्वारा अवैध बालू उत्खनन, भंडारण एवं परिवहन के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है। संबंधित पदाधिकारियों को अवैध खनन एवं परिवहन की गतिविधियों पर सतत निगरानी रखते हुए नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

80 साल का भारत,2047 की आर्थिक उड़ान: सप्त धारा से वैश्विक महाशक्ति तक-तेल रुपया, शेयर बाजार औरनिवेश की नई परीक्षा -समग्र व्यापक विश्लेषण।

80 साल का भारत,2047 की आर्थिक उड़ान: सप्त धारा से वैश्विक महाशक्ति तक-तेल रुपया, शेयर बाजार औरनिवेश की नई परीक्षा -समग्र व्यापक विश्लेषण।

लाल किले से दुनियाँ के बाजारों तक: मोदी-मुर्मु के आर्थिक संदेश ने दिखाई 2047 के भारत की वैश्विक तस्वीर

सप्त धारा बनाम कच्चे तेल का झटका: विकास की रफ्तार,कमजोर रुपया,व्यापार घाटा और भारत की आर्थिक अग्निपरीक्षा -क्या 2047 का भारत बदलेगा वैश्विक अर्थव्यवस्था का संतुलन?

वैश्विक स्तरपर किसी राष्ट्र के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर दिए गए संबोधन केवल औपचारिक भाषण नहीं होते। विशेषकर भारत जैसे लोकतांत्रिक,विशाल उपभोक्ता बाजार और तेजी से उभरते वैश्विक आर्थिक केंद्र के मामले में शीर्ष संवैधानिक पदों से निकला प्रत्येक बड़ा आर्थिक संकेत घरेलू उद्योग,शेयर बाजार,विदेशी निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय नीति-निर्माताओं के लिए दिशा-सूचक बन जाता है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि,लाल किले से निकली घोषणा अब बाजार, उद्योग और निवेशकों के लिए अवसर का संकेत है;लेकिन उस अवसर को वास्तविक संपत्ति में बदलने की निर्णायक कुंजी अब नीति के क्रियान्वयन, उत्पादक निवेश और आर्थिक अनुशासन के हाथ में है।15 अगस्त 2026 को भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से विकसित भारत @2047, शक्ति की सप्त धारा, आत्मनिर्भरता,कृत्रिम बुद्धिमत्ता,सेमीकंडक्टर,परमाणु ऊर्जा,रक्षा विनिर्माण और युवाओं को केंद्र में रखा।पीएम ने अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रशिक्षण देने,सात-आठ सेमीकंडक्टर संयंत्रों को अगले एक-दो वर्षों में परिचालन में लाने और 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावॉट तक पहुंचाने जैसे बड़े लक्ष्य रखे।स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी भारत की आर्थिक मजबूती, डिजिटल अर्थव्यवस्था, युवा शक्ति, समावेशी विकास, किसानों श्रमिकों,वैज्ञानिकों और उद्यमियों की भूमिका को रेखांकित किया। राष्ट्रपति के संदेश में भारत की आर्थिक लचीलापन और दुनियाँ के वास्तविक समय के डिजिटल लेनदेन में भारत की बड़ी हिस्सेदारी को विशेष महत्व मिला। इन दोनों संबोधनों को साथ रखकर देखें तो भारत का आर्थिक संदेश बिल्कुल स्पष्ट दिखाई देता है,अगले दो दशकों में भारत को केवल बड़ी अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि उत्पादन, तकनीक, ऊर्जा, रक्षा, डिजिटल व्यवस्था और वैश्विक आपूर्ति शृंखला की सटीकता से निर्णायक शक्ति बनाना है।

साथियों, शक्ति की सप्त धारा, भारत के अगले आर्थिक चक्र का खाका इसको समझने की करें तो पीएम की शक्ति की सप्त धारा में विनिर्माण,कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार, गति शक्ति, रक्षा शक्ति, हरित-नीली अर्थव्यवस्था और सॉफ्ट पावर को विकास के सात प्रमुख आधार के रूप में सामने रखा गया। यह महज सात क्षेत्रों की सूची नहीं है,बल्कि यदि इसे नीतिगत और वित्तीय संसाधनों से जोड़ा जाता है तो यह भारत के अगले औद्योगिक चक्र की आधारभूमि बन सकती है।विनिर्माण भारत को रोजगार और निर्यात देगा, कृषि- प्रसंस्करण ग्रामीण आय तथा खाद्य निर्यात बढ़ा सकता है, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नवाचार उत्पादकता को बदल सकते हैं,गति शक्ति लॉजिस्टिक लागत घटा सकती है, रक्षा विनिर्माण आयात निर्भरता कम करते हुए निर्यात का नया बाजार खोल सकता है और हरित-नीली अर्थव्यवस्था ऊर्जा तथा समुद्री संसाधनों को विकास के नए केंद्र में ला सकती है। इसलिए इसका प्रभाव केवल सकल घरेलू उत्पाद पर नहीं,बल्कि रोजगार चालू खाते, विनिर्माण, पूंजी निवेश और निर्यात प्रतिस्पर्धा पर भी पड़ सकता है।

साथियों बात अगर हम  एक करोड़ एआई-कुशल युवा: जनसंख्या से उत्पादक पूंजी की ओर इसको समझने की करें तो एक करोड़ युवाओं को अगले एक वर्ष में कृत्रिम बुद्धिमत्ता कौशल देने की घोषणा भारत की सबसे महत्वपूर्ण दीर्घकालीन आर्थिक घोषणाओं में से एक है। इसका वास्तविक महत्व इस बात में होगा कि प्रशिक्षण कितनी गुणवत्ता का है और कितने प्रशिक्षित युवाओं को वास्तविक रोजगार, उद्यमिता और उद्योग से जोड़ा जाता है।यदि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता को केवल सूचना- प्रौद्योगिकी क्षेत्र तक सीमित न रखकर कृषि, स्वास्थ्य, विनिर्माण, बैंकिंग, शिक्षा, रक्षा और सरकारी सेवाओं में लागू करता है,तो उत्पादकता में बड़ा परिवर्तन संभव है। यही वह क्षेत्र है जहां भारत की विशाल युवा आबादी आर्थिक बोझ के बजाय वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ बन सकती है।मुफ्त ऑनलाइन प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग की घोषणा भी इसी व्यापक सामाजिक-आर्थिक दृष्टिकोण से जुड़ती है। इसका उद्देश्य गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के शिक्षा एवं कोचिंग खर्च को कम करना है।  यदि इससे प्रतिभा और अवसर के बीच की दूरी घटती है, तो इसका दीर्घकालीन प्रभाव सटिका से मानव पूंजी पर पड़ेगा।
साथियों बात कर हम  सेमीकंडक्टर और परमाणु ऊर्जा: आत्मनिर्भरता से रणनीतिक स्वतंत्रता तक को समझने की करें तो, भारत की अर्थव्यवस्था के सामने सबसे बड़ी संरचनात्मक चुनौतियों में ऊर्जा और उच्च-प्रौद्योगिकी आयात निर्भरता शामिल है। ऐसे में सेमीकंडक्टर उत्पादन और 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य केवल औद्योगिक नीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा की रणनीति है। प्रधानमंत्री ने सात-आठ नए सेमीकंडक्टर संयंत्रों को अगले एक-दो वर्षों में परिचालन में लाने की बात कही है। यदि भारत चिप निर्माण, महत्वपूर्ण खनिज, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत विनिर्माण का विश्वसनीय केंद्र बनता है, तो चीन प्लस वन रणनीति भारत के पक्ष में और मजबूत हो सकती है। वहीं परमाणु ऊर्जा का विस्तार आयातित जीवाश्म ईंधन पर दीर्घकालीन निर्भरता कम करने में सहायक हो सकता है। इसका अर्थ है कि ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी सुरक्षा को आर्थिक विकास की मुख्यधारा में सटीकता से शामिल किया जा रहा है।

साथियों लेकिन दूसरी तरफ कच्चे तेल का दबाव,भारत की सबसे बड़ी बाहरी आर्थिक कमजोरी को समझने की करें तो,यहीं भारत की आर्थिक कहानी का दूसरा पक्ष सामने आता है। जुलाई 2026 में भारत का वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 31.98 अरब डॉलर हो गया, जो छह महीने का उच्च स्तर था। आयात 76.22 अरब डॉलर रहा, जबकि वस्तु निर्यात 44.24 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। पश्चिम एशिया के तनाव, महंगे कच्चे तेल और ऊंची माल ढुलाई लागत ने आयात बिल पर दबाव डाला। हालांकि सेवाओं में 16.95 अरब डॉलर का अधिशेष एक महत्वपूर्ण सहारा बना हुआ है।इससे स्पष्ट है कि भारत की विकास कहानी मजबूत होते हुए भी ऊर्जा कीमतों से पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। भारत अपनी तेल आवश्यकता का 90 प्रतिशत से अधिक आयात करता है। जुलाई में रूस की हिस्सेदारी भारत के कच्चे तेल आयात में रिकॉर्ड 50.83 प्रतिशत, अर्थात लगभग 24.7 लाख बैरल प्रतिदिन, रहीयह स्थिति भारत को सस्ता और अपेक्षाकृत सुरक्षित ऊर्जा स्रोत देती है, लेकिन इसके साथ भू- राजनीतिक और प्रतिबंध संबंधी जोखिम भी जुड़े हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें लगातार ऊंची रहती हैं, तो इसका प्रभाव महंगाई, चालू खाते, रुपये, परिवहन लागत, पेट्रोल-डीजल कीमतों और कंपनियों के लाभ मार्जिन तक पहुंच सकता है।

साथियों,तेल और कमजोर रुपया,विकास की राह की अग्निपरीक्षा इसको समझने की करें तो,यदि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत भारतीय मुद्रा में लगभग 90 रुपये प्रति लीटर के आसपास प्रभाव डालने वाली स्थिति तक पहुंचती है, तो उसका प्रभाव केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहेगा। परिवहन महंगा होगा, लॉजिस्टिक लागत बढ़ेगी और कृषि से लेकर विनिर्माण तक लगभग प्रत्येक क्षेत्र पर लागत का दबाव आ सकता है।ऊंचे तेल आयात बिल से डॉलर की मांग बढ़ती है, जिससे रुपये पर दबाव पड़ सकता है। कमजोर रुपया निर्यातकों के लिए कुछ हद तक लाभकारी हो सकता है, लेकिन तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और अन्य आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ाकर आयातित महंगाई को जन्म दे सकता है। इसलिए भारत के लिए तेल कीमत और रुपया दोनों एक साथ आर्थिक परीक्षा बन सकते हैं।

साथियों,भारतीय शेयर बाजार: घोषणा से अवसर लेकिन मूल्यांकन में सावधानी,को समझने की करें तो राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की घोषणाओं से शेयर बाजार में सबसे अधिक रुचि उन्हीं क्षेत्रों में पैदा होगी जिन्हें दीर्घकालीन सरकारी प्राथमिकता मिल रही है,रक्षा, पूंजीगत वस्तुएं, बुनियादी ढांचा, विद्युत, परमाणु ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल सेवाएं, विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स।लेकिन निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है,नीति घोषणा और कंपनी के वास्तविक मुनाफे के बीच कई वर्ष का अंतर हो सकता है।किसी क्षेत्र को सरकारी प्राथमिकता मिलने का अर्थ यह नहीं कि उस क्षेत्र की हर कंपनी का शेयर स्वतः बढ़ेगा। शेयर कीमत में पहले से भविष्य की उम्मीदें शामिल हो सकती हैं। इसलिए आदेश -पुस्तिका,लाभ,ऋण,नकदी प्रवाह, मूल्यांकन और वास्तविक परियोजना क्रियान्वयन को सटीकता से देखना अधिक महत्वपूर्ण होगा।

साथियों, अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजार और वैश्विक निवेशक: भारत अब वैकल्पिक बाजार नहीं इसको समझने की करें तो, भारत की यह रणनीति अंतरराष्ट्रीय पूंजी के लिए भी महत्वपूर्ण है। यदि वैश्विक कंपनियां चीन से उत्पादन का कुछ हिस्सा स्थानांतरित करना चाहती हैं, तो भारत का बड़ा घरेलू बाजार, युवा कार्यबल,डिजिटल आधारभूत ढांचा और लोकतांत्रिक व्यवस्था उसे आकर्षक विकल्प बनाते हैंसेमीकंडक्टर रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हरित ऊर्जा में विदेशी कंपनियों कीभागीदारी बढ़ती है तो उसका लाभ केवल भारत को नहीं, बल्कि वैश्विक कंपनियों को भी मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय निवेशक भारतीय कंपनियों के साथ-साथ उन वैश्विक कंपनियों को भी देख सकते हैं जिनकी भारत में आपूर्ति शृंखला, संयुक्त उद्यम या पूंजी निवेश की रणनीति है।लेकिन विदेशी निवेशक भारत की वृद्धि दर के साथ राजकोषीय अनुशासन, रुपये की स्थिरता, कर व्यवस्था, व्यापार नीति, अमेरिकी शुल्क, भू- राजनीतिक जोखिम और तेल कीमतों को भी सटीकता से बराबर देखेंगे।

साथियों बातें कर हम  सरकार की विनिवेश नीति औरबाजार में पूंजी की नई कहानी को समझने की करें तो आंकड़े के अनुसार 2026 में दस सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से अल्पांश हिस्सेदारी बिक्री के जरिए 62,000 करोड़ रुपये से अधिक जुटाने की बात सामने आई है। इस आंकड़े को अंतिम रूप से प्रकाशित सरकारी आंकड़ों से मिलान करना आवश्यक है;इसलिए इसे यहां उपलब्ध रिपोर्टेड आंकड़े के रूप में देखना उचित होगा। अल्पांश हिस्सेदारी बिक्री का व्यापक आर्थिक महत्व यह है कि इससे सरकार को राजस्व मिलता है और बाजार में सार्वजनिक उपक्रमों की हिस्सेदारी का व्यापक स्वामित्व बढ़ सकता है।यदि विनिवेश से प्राप्त राशि को केवल राजस्व व्यय में लगाने के बजाय बुनियादी ढांचे, पूंजीगत व्यय और उत्पादक परिसंपत्तियों में लगाया जाता है, तो इसका गुणक प्रभाव अर्थव्यवस्था पर अधिक हो सकता है। दूसरी ओर, लगातार सरकारी हिस्सेदारी बिक्री से संबंधित कंपनियों के शेयरों में अल्पकालीन आपूर्ति दबाव भी आ सकता है। इसलिए बाजार इसे अवसर और जोखिम, दोनों रूपों में देखेगा।

साथियों, रक्षा अर्थव्यवस्था: खर्च से निर्यात तक को समझने की करें तो, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की घोषणा का आर्थिक महत्व भी बहुत बड़ा है। भारत यदि ड्रोन, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, विमान, इंजन और उन्नत रक्षा तकनीक का घरेलू उत्पादन बढ़ाता है, तो रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा देश के भीतर उद्योग, अनुसंधान और रोजगार पैदा कर सकता है।यहीं से ‘मेक इन इंडिया’ की अवधारणा ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ में बदल सकती है। इससे भारतीय रक्षा कंपनियों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों तथा प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए नए निर्यात बाजार खुल सकते हैं।निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल, घोषणा नहीं, क्रियान्वयन है,भारत की आर्थिक कहानी के सामने आज सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह नहीं है कि लक्ष्य कितने बड़े हैं, बल्कि यह है कि इन लक्ष्यों को कितनी तेजी और दक्षता से जमीन पर उतारा जाएगा। सेमीकंडक्टर संयंत्र, परमाणु परियोजनाएं, रक्षा उत्पादन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचा सभी में बड़ी पूंजी, कुशल मानव संसाधन, नियामकीय स्थिरता और समयबद्ध क्रियान्वयन की आवश्यकता होगी।यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय निवेशक भारत को लेकर उत्साहित होने के साथ-साथ सावधान भी रहेंगे। यदि भारत व्यापार सुगमता, भूमि,श्रम,कर,लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा संबंधी बाधाओं को कम करता है,तो घोषित लक्ष्य निवेश में परिवर्तित हो सकते हैं। यदि क्रियान्वयन धीमा रहा तो घोषणाओं और वास्तविक आर्थिक परिणामों के बीच अंतर बढ़ सकता है।

क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318
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