मुसाबनी
सीआरपीएफ के ट्रेनरों ने एस्कॉर्ट एंड गाइड को हर आपदा में लड़ने को किया प्रशिक्षित
भारत स्काउट एंड गाइड पूर्वी सिंहभूम जिला का एकदिवसीय सीआरपीएफ बेस एडवेंचर प्रशिक्षण रविवार को मुसाबनी रीक्रिएशन क्लब मैदान में आयोजित हुआ ।इस प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ सीआरपीएफ 193 बटालियन के उप कमांडेंट प्रदीप कुमार घोष ने फ्लैग होस्टिंग कर किया। इस मौके पर भारत स्काउट गाइड के जिला संगठन आयुक्त नरेश कुमार, जिला प्रशिक्षण आयुक्त नीरज शुक्ला, एस्कॉर्ट मास्टर पीके मोहंती, जितेंद्र शर्मा आदि मौजूद थे। इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण शिविर में लगभग 10 विद्यालय के 300 से अधिक स्काउट गाइड ने बढ़ चढकर भाग लिया। सीआरपीएफ वेस एडवेन्चर जो आर्मीस्तरीय प्रशिक्षण माना जाता है। सीआरपीएफ के कई प्रशिक्षित ट्रेनर द्वारा सभी स्काउट गाइड को विभिन्न तरह का प्रशिक्षण दिया गया जो आपदा में लड़ने के लिए महत्वपूर्ण था।

प्रशिक्षण में बच्चों को कई महत्वपूर्ण कौशल सिखाए गए। इनमें बिना बर्तन के भोजन बनाना, टेंट लगाना और विभिन्न प्रकार की गांठें बनाना शामिल था। साथ ही स्काउट नियम, प्रतिज्ञा, इतिहास, सलामी और स्काउटिंग वर्दी की जानकारी भी दी गई। नरेश कुमार ने स्काउटिंग शिक्षा को सभी के लिए उपयोगी बताया। जिला संगठन आयुक्त नरेश कुमार के नेतृत्व में समय समय पर आयोजित सहासिक गतिविधियां, आपदा प्रबंधन, पर्वतारोहण जैसे आयोजित कार्यक्रमों में स्काउट गाइड को भाग लेने हेतु प्राथमिक प्रशिक्षण दिया जाता रहा है। स्काउट एन्ड गाइड को विकासात्मक प्रशिक्षण सैलियुट बायां हाथ मिलाना आदि के बारे में प्रशिक्षको द्वारा बारीकी पूर्ण जानकारी देते हुए अभ्यास कराया गया। इन्हें भोजन बनाना आग से सुरक्षा, जलाना, बुझाना, जैसे तरिकों से स्काउटर गाइडर को अवगत कराया गया। कम्पास की सहायता से दिशा का ज्ञान केम्पिंग, हईकिंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी प्रदान की गई।

इस एडवेंचर प्रशिक्षण में रामकृष्ण मिशन इंटरनेशनल स्कूल चाकुलिया के 60, सरस्वती शिशु विद्या मंदिर मुसाबनी के 75, बेथल मॉडल स्कूल के 33 ,मध्य विद्यालय जामशॉल के 3, कार्मेल जूनियर स्कूल सोनारी के 45, सीक्रेट हार्ट कॉन्वेंट के 16, डीबीएमएस कदमा के 6 एवं राजेंद्र विद्यालय के दो एस्कॉर्ट एंड गाइड ने भाग लिया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में जिला संगठन आयुक्त नरेश कुमार, नीरज शुक्ला, एस्कॉर्ट मास्टर पीके मोहंती ,जितेंद्र शर्मा, विशाल रजक, धीरज रंजन, ममतेश्वरी, भवानी, ज्ञानचंद आदि का अहम योगदान रहा।












