धनतेरस 18 अक्टूबर 2025- समृद्धि, स्वास्थ्य, आस्था और वैश्विक सांस्कृतिक एकता का प्रतीक पर्व

धनतेरस 18 अक्टूबर 2025- समृद्धि, स्वास्थ्य, आस्था और वैश्विक सांस्कृतिक एकता का प्रतीक पर्व

भारत में धनतेरस के दिन सोना, चांदी, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ, वाहन और गहने खरीदने की परंपरा है

आधुनिक युग में धनतेरस ने अपने धार्मिक स्वरूप से आगे बढ़कर वैश्विक आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयामों को भी अपने साथ जोड़ा है -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

गोंदिया/महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर भारत की संस्कृति में दीपावली केवल एक दिन का उत्सव नहीं,बल्कि पाँच दिवसीय आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक यात्रा है। इस यात्रा की शुरुआत जिस दिन से होती है,वह दिन है धनतेरस,समृद्धि, आरोग्य और शुभारंभ का पर्व। वर्ष 2025 में धनतेरस 18 अक्टूबर, शनिवार को मनाया जा रहा है। यह दिन न केवल भारत में बल्कि विश्वभर में बसे करोड़ों भारतीयों के लिए दिवाली की शुरुआत का प्रतीक है। आधुनिक युग में धनतेरस ने अपने धार्मिक स्वरूप से आगे बढ़कर वैश्विक आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयामों को भी अपने साथ जोड़ा है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि धनतेरस का उद्भव वैदिक परंपरा से जुड़ा हुआ है। पुराणों में उल्लेख है कि समुद्र मंथन के समय, देवताओं और असुरों के बीच जब अमृत कलश प्राप्त हुआ,उसी समय धन्वंतरि भगवान,जो आयुर्वेद के देवता माने जाते हैं,अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे।यही दिन त्रयोदशी तिथि का था, जो कार्तिक कृष्ण पक्ष की होती है। इसी कारण इसे धन्वंतरि त्रयोदशी कहा गया,जो आगे चलकर“धनतेरस”के नाम से प्रसिद्ध हुआ।धन्वंतरि देव का आगमन जीवन में स्वास्थ्य, दीर्घायु और संतुलन का प्रतीक है। भारत में प्राचीन काल से ही स्वास्थ्य को धन के समान माना गया है “आरोग्यं परमं भाग्यं, स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्।” अर्थात् आरोग्य ही सबसे बड़ा धन है। इसीलिए धनतेरस पर लोग न केवल सोना-चांदी या बर्तन खरीदते हैं,बल्कि आरोग्य, स्वच्छता और संतुलित जीवन के संकल्प भी लेते हैं।


साथियों बात अगर हम धनतेरस: शुभ क्रय और आर्थिकप्रतीकवाद को समझने की करें तो, भारत में धनतेरस के दिन सोना, चांदी, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ, वाहन और गहने खरीदने की परंपरा है। इसे शुभ मुहूर्त का प्रतीक माना जाता है। यह दिन वर्ष का वह क्षण होता है जब अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता भावनाओं का चरमोत्कर्ष देखा जाता है। 2025 के लिए अनुमान है कि भारतीय बाजार में धनतेरस पर लगभग 65,000 करोड़ रूपए से अधिक का कारोबार होगा,जिसमें आभूषण उद्योग,वाहन,मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण,गृह सज्जा और स्टील-बर्तन उद्योग अग्रणी होंगे।इस दिन का आर्थिक महत्व केवल भारत तक सीमित नहीं है। दुबई, लंदन, न्यूयॉर्क, सिंगापुर, मेलबर्न, टोरंटो और नैरोबी जैसे महानगरों में बसे प्रवासी भारतीय समुदाय भी इस दिन ‘धनतेरस शॉपिंग फेस्टिवल’आयोजित करते हैं। यह दर्शाता है कि भारतीय परंपरा अब एक वैश्विक ब्रांड पहचान में परिवर्तित हो चुकी है।


साथियों बात अगर हम आयुर्वेद और स्वास्थ्य का दिवस:धन्वंतरि पूजा का गूढ़ अर्थ, पर्यावरणीय दृष्टिकोण व सामाजिक एकजुट को समझने की करें तो धनतेरस केवल धन-संपदा का नहीं,बल्कि स्वास्थ्य-संपदा का पर्व हैभगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का जनक माना जाता है। इस दिन चिकित्सक, वैद्य, फार्मासिस्ट, योग प्रशिक्षक और स्वास्थ्य संस्थान विशेष पूजन-अर्चन करते हैं।2025 में विश्व स्वास्थ्य संगठन और आयुष मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से “ग्लोबल आयुर्वेदा वैलनेस डे” के रूप में धनतेरस को मान्यता देने की पहल भी चल रही है। यह एक ऐसी ऐतिहासिक दिशा होगी जिसमें भारतीय चिकित्सा ज्ञान को वैश्विक आयुर्विज्ञान के मानचित्र पर स्थान मिलेगा।धनतेरस और पर्यावरणीय दृष्टिकोण-धनतेरस का एक गहरा संदेश“संपन्नता के साथ स्थिरता”का भी है। वर्तमान समय में जब उपभोक्तावाद चरम पर है, यह पर्व हमें याद दिलाता है कि वास्तविक समृद्धि वही है जो प्रकृति के संतुलन को बनाए रखे।मिट्टी के दीपक जलाना, तांबे- पीतल के बर्तन खरीदना, और स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देना पर्यावरणीय दृष्टि से भी सार्थक कदम हैं।


वर्ष 2025 में पर्यावरणविदों ने यह आह्वान किया है कि धनतेरस पर इको-फ्रेंडली खरीदारी की जाए,जैसे ऊर्जा-संवर्धन करने वाले उपकरण, सौर लैंप, या स्थायी धातु से बने उत्पाद। यह कदम “ग्रीन धनतेरस” की अवधारणा को आगे बढ़ा रहा है।धनतेरस और सामाजिक एकजुटता-धनतेरस का एक बड़ा पक्ष सामाजिक समरसता और सहानुभूति का है। परंपरागत रूप से इस दिन घर में दीप जलाए जाते हैं ताकि अंधकार, गरीबी और दुख को दूर किया जा सके। आधुनिक संदर्भ में इसका अर्थ है,समाज के वंचित वर्ग तक प्रकाश पहुँचाना।अनेक सामाजिक संगठन और एनजीओ धनतेरस के दिन गरीबों को वस्त्र, बर्तन और मिठाइयाँ वितरित करते हैं।कटनी, वाराणसी, दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, दुबई और न्यूयॉर्क जैसे शहरों में प्रवासी भारतीय संगठन इस दिन “शेयर द लाइट मूवमेंट”नामक कार्यक्रम चलाते हैं,जिसमें जरूरतमंद परिवारों के घर रोशनी और मुस्कान पहुँचाई जाती है।


साथियों बात अगर हम विश्व पटल पर धनतेरस का विस्तार को समझने की करें तो, आज धनतेरस केवल भारतीयों का त्योहार नहीं रह गया है। यह एक ग्लोबल सांस्कृतिक इवेंट बन चुका है।लंदन में “दिवाली ऑन द स्क्वायर ” नाम से जो आयोजन होता है,वहाँ हर वर्ष लाखों लोग भाग लेते हैं। इस आयोजन की शुरुआत धनतेरस के दिन होती है।सिंगापुर, मलेशिया, फिजी, मॉरीशस, ट्रिनिडाड, और कनाडा जैसे देशों में धनतेरस के अवसर पर “फेस्टिवल ऑफ़ वेल्थ एंड हेल्थ”नाम से सार्वजनिक समारोह आयोजित किए जाते हैं।2025 में अमेरिका के न्यू जर्सी, डलास, और कैलिफोर्निया के भारतीय संघों ने भी धनतेरस पर “ग्लोबल धन्वन्तरि कांफ्रेंस 2025” आयोजित करने की घोषणा की है। इस सम्मेलन में स्वास्थ्य, योग, आयुर्वेद और वित्तीय जागरूकता पर चर्चा होगी,जो दिखाता है कि यह पर्व कितनी बहुआयामी प्रासंगिकता रखता है।
साथियों बात अगर हम धनतेरस और डिजिटल युग कीकांबिनेशन को समझने की करें तो ,वर्तमान डिजिटल युग में धनतेरस ने नई पहचान प्राप्त की है। ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म्स जैसे अमेज़ॉन, फ्लिपकार्ट टाटा क्लिक, और रिलायंस डिजिटल इस दिन विशेष “धनतेरस फेस्टिव सेल ” लॉन्च करते हैं।2025 में इन ऑनलाइन बिक्री से भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में लगभग 25,000 करोड़ रूपए का अतिरिक्त प्रवाह होने का अनुमान है।डिजिटल पेमेंट्स, यूपीआई और रुपे कार्ड जैसी तकनीकें इस दिन के आर्थिक व्यवहार को पारदर्शिता और गति देती हैं।


धनतेरस अब केवल बाजारों की चमक तक सीमित नहीं, बल्कि यह डिजिटल समृद्धि का प्रतीक भी बन चुका है,जो “नए भारत” की पहचान को दर्शाता है।
साथियों बात अगर हम परिवार और परंपरा,घर की लक्ष्मी का स्वागत व धनतेरस और आधुनिक युवा पीढ़ी को समझने की करें तो,धनतेरस के दिन भारतीय घरों में सुबह से ही सजावट शुरू हो जाती है। लोग अपने घरों को साफ-सुथरा करते हैं, नए वस्त्र पहनते हैं और द्वार पर स्वस्तिक और शुभ-लाभ के चिन्ह बनाते हैं। सायंकाल के समय दीपदान किया जाता है,विशेषकर तुलसी और मुख्य द्वार पर दीप जलाने का विधान है।गृहस्थ इस दिन “यम दीपदान” भी करते हैं,मान्यता है कि इस दीपक की ज्योति से मृत्यु और भय का निवारण होता है। यह प्रतीकात्मक रूप से “प्रकाश से अंधकार पर विजय” का संदेश देता है। घर की स्त्रियाँ इस दिन “लक्ष्मी आराधना” का प्रारंभ करती हैं, जिससे दीपावली की मुख्य पूजा का मंगल आरंभ माना जाता है।धनतेरस और आधुनिक युवा पीढ़ी-नई पीढ़ी के लिए धनतेरस केवल पूजा का दिन नहीं,बल्कि स्व-विकास और वित्तीय अनुशासन की प्रेरणा भी है।भारत के शहरी युवाओं में धनतेरस पर म्यूचुअल फंड, सोने के बॉन्ड, या डिजिटल गोल्ड में निवेश करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।2025 में वित्त विशेषज्ञों ने इसे “फाइनेंसियल वैलनेस फेस्टिवल” का नाम दिया है,जो दर्शाता है कि आज की पीढ़ी इस परंपरा को आर्थिक साक्षरता के माध्यम से पुनःपरिभाषित कर रही है।


साथियों बात अगर हम धनतेरस और भारतीय अर्थव्यवस्था का मनोवैज्ञानिक पहलू व धनतेरस और महिला सशक्तिकरण को समझने की करें तो भारतीय अर्थव्यवस्था में त्योहारों का प्रभाव गहरा होता है।धनतेरस वह क्षण है जब करोड़ों उपभोक्ता नई खरीदारी के लिएसकारात्मक मानसिकता में होते हैं। इसउत्साह से मांग बढ़ती है,उत्पादन को गति मिलती है,और रोज़गार सृजन को बल मिलता है। अर्थशास्त्रियों का मत है कि भारत की जीडीपी में त्योहारों के सीज़न के दौरान लगभग 2पेर्सेंट तक का उछाल देखा जा सकता है।इस प्रकार धनतेरस केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि आर्थिक इंजन का उत्प्रेरक भी है।धनतेरस और महिला सशक्तिकरण -धनतेरस के दिन घर की “गृहलक्ष्मी” को केंद्र में रखा जाता है। यह सांस्कृतिक रूप से नारी शक्ति का सम्मान है।आज के युग में महिलाएँ न केवल परिवार की रक्षक हैं, बल्कि वित्तीय निर्णयों में समान भागीदारी निभा रही हैं। इस दिन कई बैंक और फिनटेक संस्थान महिलाओं के लिए “स्वर्ण निवेश योजना” या “धन लक्ष्मी सेविंग प्रोग्राम” जैसी योजनाएँ लॉन्च करते हैं।यह दिखाता है कि परंपरा और आधुनिकता का संगम किस प्रकार महिला सशक्तिकरण के माध्यम से सामाजिक समृद्धि में परिवर्तित हो रहा है।


अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि धनतेरस समृद्धि का नया अर्थ, धनतेरस 2025 केवल तिथि नहीं, बल्कि एक विचार हैँ कि सच्चा धन वह है जो बाँटने से बढ़ता है, और सच्ची समृद्धि वह है जो सबके जीवन में प्रकाश लाए। चाहे वह आर्थिक हो, सामाजिक हो या आध्यात्मिक धनतेरस हमें यह सिखाता है कि हर उपलब्धि का अर्थ तभी है जब वह साझी खुशी में परिवर्तित हो। इसलिए जब 18 अक्टूबर 2025 की संध्या में दीपक जलें, तो वे केवल घरों में नहीं, मानवता के हृदयों में भी उजियारा करें।यह धनतेरस नई चेतना,नईजिम्मेदारी और नई वैश्विक संस्कृति का उद्घोष बने,जहाँ आरोग्य, समृद्धि और सद्भाव एक साथ दीपित हों।

संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतर्राष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि सीए(एटीसी) संगीत माध्यमा एडवोकेट किशन सनमुखदास भावानानी गोंदिया महाराष्ट्र

छठ पर्व को लेकर क्षेत्र का मुसाबनी कम्पनी तालाब छठ घाट की साफ सफाई का कार्य प्रारंभ

छठ पर्व को लेकर क्षेत्र का मुसाबनी कम्पनी तालाब छठ घाट की साफ सफाई का कार्य प्रारंभ

मुसाबनी

आस्था का पर्व छठ 24 अक्टूबर से प्रारंभ होना है। जहां नेता घाटशिला विधानसभा उपचुनाव की तैयारी में लगे हैं, वहीं छठ घाट कमिटी छठ की तैयारी में लग गई है। मुसाबनी नंबर तीन स्थित कंपनी तालाब छठ घाट की साफ सफाई का काम प्रारंभ हो गया है, इसको लेकर एक सप्ताह से तालाब में उग आई जलकुंभी एवं आसपास की झाड़ियां को साफ करने का कार्य मजदूरों द्वारा किया जा रहा है। इस बारे में छठ कमिटी के संस्थापक गणेश प्रसाद ने जानकारी देते हुए बताया कि छठ मैया की आराधना का पर्व पूरी आस्था के साथ हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी मनाया जाना है। छठ कमेटी इसको लेकर बृहद तैयारी कर रही है, जिसमें सबसे पहले घाट की साफ सफाई का काम रंग रोगन का काम प्रारंभ कर दिया गया है।

उसके साथ ही 25 एकड़ में फैले इस तालाब में उग आई जलकुंभी की सफाई का काम किया जा रहा है, जिसके लिए मजदूर लगाए गए हैं, समय से पूर्ण यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा।।

इसके अलावा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लाइट की व्यवस्था, आसपास की नालियों की साफ सफाई के साथ ही श्रद्धालुओं के घाट पर सुविधा के साथ बैठने की व्यवस्था की जा रही है। 24 अक्टूबर को नहाए खाए के साथ महिलाएं घरों में प्रसाद के लिए आटा तैयार करने हेतु गेहूं की साफ सफाई धुलाई का काम करेगी, घरों की सफाई करेंगे एवं शुद्ध मन से इस तैयारी में लगेगी। इस वर्ष भी हर वर्ष की भांति बृहद रूप से ठेकुआ के प्रसाद का निर्माण छठ घाट पर ही कराया जाएगा, जिसके लिए भी तैयारी की जा रही है।

नंबर वन बना प्रवीण सेवा संस्थान का पूजा पंडाल बना , ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया दुर्गे देवी नमस्तुते अवार्ड 2025’ से किए गए सम्मानित

नंबर वन बना प्रवीण सेवा संस्थान का पूजा पंडाल बना , ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया दुर्गे देवी नमस्तुते अवार्ड 2025’ से किए गए सम्मानित

सरायकेला/आदित्यपुर

जमशेदपुर : इस वर्ष की दुर्गा पूजा में प्रवीण सेवा संस्थान का पूजा पंडाल बना नंबर वन, ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया दुर्गे देवी नमस्तुते अवार्ड 2025’ से किया गया सम्मानित।

प्रवीण सेवा संस्थान, श्री श्री दुर्गा पूजा समिति आदित्यपुर ने अपने भव्य एवं अद्वितीय पंडाल से शहरवासियों का दिल जीत लिया। द टाइम्स ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित ‘दुर्गे देवी नमस्तुते अवार्ड 2025’ में इस पूजा पंडाल को नंबर वन का स्थान प्राप्त हुआ।

पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन बिष्टूपुर स्थित श्रीलेदर्स में किया गया, जहां द टाइम्स ऑफ इंडिया के संपादक बप्पा मजूमदार ने पूजा समिति के प्रेस प्रभारी सह ईचागढ़ के पूर्व विधायक अरविंद कुमार सिंह के आप्त सचिव सुनील गुप्ता को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान किया।
संस्थान को दो श्रेणियों में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ — ऑनलाइन पसंद श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ पूजा पंडाल, और जजों की थीम श्रेणी में प्रथम स्थान।

इस वर्ष प्रवीण सेवा संस्थान की ओर से तैयार पंडाल की थीम “राजस्थान के उदयपुर का महल” रही। यह पंडाल न केवल भव्यता में अद्वितीय था, बल्कि सांस्कृतिक सौंदर्य का उत्कृष्ट उदाहरण भी बना। पंडाल की थीम ने विशेष रूप से मारवाड़ी समाज को गौरवान्वित किया।
इस अवसर पर समिति के संरक्षक एवं ईचागढ़ के पूर्व विधायक अरविंद सिंह उर्फ मलखान सिंह को विशेष रूप से प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष विजय आनंद मूनका ने भी समारोह में भाग लिया और समिति की इस रचनात्मक पहल की सराहना करते हुए कहा कि “इस तरह का प्रयास पहली बार देखा गया है, जिससे मारवाड़ी समाज को गौरव की अनुभूति हुई है।”

पंडाल चयन समिति में चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. जय भादुड़ी, केपीएस स्कूल के डायरेक्टर श्रीकांत नायक और प्रसिद्ध कलाकार सुमन प्रसाद शामिल थे, जिन्होंने विभिन्न मापदंडों पर पंडालों का मूल्यांकन किया।

द टाइम्स ऑफ इंडिया न्यूज के माध्यम से जमशेदपुर में दुर्गा पूजा पंडालों को लेकर एक विशेष अभियान चलाया गया, जिसमें पंडालों के मैनेजमेंट, थीम, सजावट और जनसहभागिता के आधार पर चयन किया गया। इस प्रक्रिया में प्रवीण सेवा संस्थान, आदित्यपुर का पंडाल सभी मानदंडों पर खरा उतरा और सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया।

समिति के प्रमुख और टीम का सम्मान

पूजा कमेटी के प्रेस प्रभारी सह ईचागढ़ के पूर्व विधायक अरविंद कुमार सिंह के आप्त सचिव सुनील गुप्ता ने इस पूरी टीम को सफलता को आस्था और टीमवर्क का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि “यह सम्मान हमारी पूरी समिति और भक्तों के समर्पण का प्रतीक है।”

महालिमोरूप में लक्ष्मी पूजा के अवसर पर हुई संगीत संध्या, झूमे लोग

महालिमोरूप में लक्ष्मी पूजा के अवसर पर हुई संगीत संध्या, झूमे लोग

सरायकेला

(पारस कुमार होता)

प्रखण्ड सरायकेला अन्तर्गत महालिमोरूप गाँव के श्री श्री सार्वजनिक लक्ष्मी पूजा कमिटी की ओर से सोमवार को बड़े ही श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मां लक्ष्मी पूजा का आयोजन धूमधाम से किया गया. सुबह से ही श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंचने लगे और पूरे वातावरण में मां लक्ष्मी के जयकारे एवं मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई देने लगी. कमिटी के सदस्यों ने विधि-विधान के साथ मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर क्षेत्र में सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की का मना की।

पूजा के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक परिधान धारण कर भक्ति भाव से पूजा में भाग लिया. कई श्रद्धालुओं ने परिवार सहित मां लक्ष्मी के समक्ष दीप जलाकर आशीर्वाद प्राप्त किया. इस अवसर पर भक्तों के बीच भोग एवं प्रसाद का वितरण किया गया. मंदिर परिसर को फूलों, झालरों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया था, जिससे पूरे वातावरण में आध्यात्मिक आभा छा गई थी.

वहीं पूजा आयोजन कमिटी द्वारा शाम को संगीत संध्या कार्यक्रम रखा गया था। इसका लुफ्त उठाने के लिए महालिमोरूप व आस पास गाँव के लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। जमशेदपुर के कलाकारों ने ऐसी मधुर नृत्य गीत संगीत की प्रस्तुति दी जिसे देखकर व सुनकर श्रोता मंत्र मुग्ध हो गए। यही नहीं बल्कि लोगों को झूमते हुए भी देखा गया।

मौके पर महालिमोरूप के ग्राम प्रधान श्यामसिंह मुंडरी, वार्ड सदस्य दुर्गा मुंडरी, शैलेंद्र हेम्ब्रम, शंभु महली, अनिरुद्ध प्रमाणिक, हेमसागर प्रधान साहिल मुंडरी, कृष्णा मुंडरी समेत पूजा कमेटी सदस्य व अन्य लोग उपस्थित थे।

जगन्नाथपुर में भक्ति भाव से हुई माता मनसा की पूजा

जगन्नाथपुर में भक्ति भाव से हुई माता मनसा की पूजा

प्रतिमा विसर्जन के साथ पांच दिवसीय मनसा पूजा का हुआ समापन

सरायकेला

(पारस कुमार होता)

प्रखंड सरायकेला के जगन्नाथपुर गावं में पांच दिवसीय माता मनसा पूजा का प्रतिमा विसर्जन के साथ समापन हो गया. इससे पूर्व माता मनसा की विधिपूर्वक पूजा अर्चना कर मंदिर परिसर से भव्य शोभा यात्रा निकाली गयी जो पूरे गावं का भ्रमण कर जलाशय तक पहुंची जहां माता का प्रतिमा का विधिवत विसर्जन किया गया. इस दौरान आसछे बोछोर आबार एशो मां… व माता मनसा के जयकारे से पूरा क्षेत्र गूंज उठा.

साथ ही कई भक्त माता की भक्ति में झूमते हुए माता के जयकारे लगाए. जानकारी हो वर्ष 1954 से जगन्नाथपुर में भव्य रुप से माता मनसा देवी की पूजा अर्चना हो रही है. यहां माता मनसा की ख्याति आसपास व दूरदराज क्षेत्र में विख्यात है जिसे लेकर विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालु प्रतिवर्ष पूजा अर्चना को पहुंचते हैं. यहां प्रतिवर्ष एकादशी से 5 दिनों तक भव्य रुप से माता मनसा की पूजा अर्चना की जाती है. मान्यता है कि यहां भक्त श्रद्धालुओं द्वारा माता की सच्चे मन से पूजा अर्चना कर मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है. इस वर्ष दो अक्तूबर को घटबारी कार्यक्रम के साथ माता का आह्वान करते हुए पूजा शुरु हुई थी.

दूसरे दिन तीन अक्टूबर को विधिपूर्वक माता की पूजा अर्चना करते हुए मन्नत अनुसार बलि पूजन किया गया जिसमे सैकड़ो भक्त श्रद्धालुओं ने माता मनसा का भक्ति भाव से पूजा की. सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत ओड़िशा के प्रसिद्ध नाट्य मंडली पंचशखा गणनाट्य द्वारा ओड़िया नाटक का रंगारंग मंचन किया गया. जिसमे कलाकारों ने मो कहाणी रे तोहरी ना एवं तो बिना मो सपनो ओधा नामक ओड़िया सामाजिक नाटक प्रस्तुत किया. कलाकारों ने समाज की वर्तमान स्थिति व आधुनिकता पर आधारित भावपूर्ण नाटक का मंचन कर दर्शकों को खूब हंसाया व रुलाया. कलाकारों ने नाटक के माध्यम से जीवंत प्रदर्शन कर दर्शकों को अंत तक बांधे रखा.

पूजा कार्यक्रम के सफल आयोजन में पूजा समिति के जहरलाल प्रधान,राजेन्द्र प्रधान,सत्यवान प्रधान,रघुनाथ प्रधान,विष्णु प्रधान,मुकेश प्रधान,ओमप्रकाश प्रधान,उमाकांत प्रधान,शेखर प्रधान,राजीव प्रधान,पंचम प्रधान,शत्रुघ्न प्रधान,तरुण प्रधान,राहुल प्रधान समेत समस्त ग्रामीणों का सराहनीय योगदान रहा.

दोला में ढोकर जमीन पर लेटकर नव पत्रिका को नम आंखों से किया विदा

दोला में ढोकर जमीन पर लेटकर नव पत्रिका को नम आंखों से किया विदा

सरायकेला/ईचागढ़

(मालखान महतो)
ईचागढ़-सरायकेला-खरसावां जिला के ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के दूर्गा मंदिर व पंडालों में गुरुवार को मां दुर्गा की नव पत्रिका व शाम को दर्जनों प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।

डुमरा,सितु,पिलीद, टीकर,चीपड़ी ,लावा ,आदारडीह सहित सभी दुर्गा मंदिरों में स्थापित नव पत्रिका का विसर्जन किया गया। डुमरा गांव में मां दुर्गा की नव पत्रिका को डोली में ढोकर नदी में विसर्जित किया गया। डोली में ले जाते समय श्रद्धालुओं ने जमीन पर लेटकर नमः आंखों से नव पत्रिका को विदा किया। श्रद्धालु जमीन पर ऐसे लेटे थे कि डोली को कंधे देने वाले आदमीयों पर से चलकर विसर्जन करने जाना पड़ा। वहीं महिलाओं ने आपस में सिंदूर खेला और एक दुसरे को सिंदूर लगाकर सदा सुहागिन रहने का माता रानी से कामना किया। महिलाओं ने अश्रु नयन से आबार एसो मां कहकर विदा किया। वहीं शाम से देर रात तक दर्जनों प्रतिमाओं को विसर्जित भी किया गया। सितु सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति द्वारा 40 फीट ऊंचा रावण का दहन किया गया। रावण दहन में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा।

पूरे धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ की गई विघ्नहर्ता श्री गणेश की पूजा।

पूरे धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ की गई विघ्नहर्ता श्री गणेश की पूजा।

सरायकेला/आदित्यपुर

( सोनू कुमार सिंह )

गणपति बप्पा मोरिया के जयकारों से गूंज उठा पूरा आदित्यपुर क्षेत्र।

विघ्नहर्ता श्री गणेश के जयकारों से भक्तिमय हुआ पूरा आदित्यपुर नगर

पूरे भारत में इस वक्त विघ्नहर्ता श्री गणेश जी की पूजा की धूम मची हुई है। यह त्योहार आमतौर पर 10 दिनों तक चलता है, जिसकी शुरुआत गणेश की मिट्टी की मूर्तियों को घरों और सार्वजनिक पंडालों में स्थापित करने से होती है। इन मूर्तियों को विभिन्न प्रकार के फूलों और सजावट से सजाया जाता है।

इन 10 दिनों के दौरान, भक्त पूजा करते हैं और भगवान गणेश को मोदक (एक प्रकार का मीठा पकवान जिसे भगवान गणेश को बहुत पसंद है), लड्डू और अन्य व्यंजन चढ़ाते हैं। गणेश जी के मंत्रों का जाप किया जाता है और भजन गाए जाते हैं।

ठीक इसी तरह सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत सतबहिनी के एसडीएस टावर में पूरे फ्लैट वासियों ने मिलकर विघ्नहर्ता श्री गणेश की पूजा बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ संपन्न किया।

पूजा में विश्व हिंदू रक्षा परिषद के झारखंड प्रदेश प्रभारी भरत सिंह अपने पूरे परिवार के साथ सम्मिलित हुए और पंडित के मंत्रों के साथ एवं विधि विधान के साथ गणेश जी की पूजा अर्चना किए।

उक्त गणेश जी की पूजा में पूरे फ्लैट वैसी ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र वासियों ने मिलकर भाग लिया एवं पूजा संपन्न होने के पश्चात सभी लोगों के बीच भोग का वितरण भी किया गया एवं सभी लोगों ने अपने परिवार की सुख शांति की कामना की।

    

विश्व हिंदू रक्षा परिषद के प्रदेश प्रभारी भरत सिंह एवं प्रदेश अध्यक्ष हरचरण सिंह उर्फ राजा ने की सूर्य मंदिर में पूजा अर्चना

विश्व हिंदू रक्षा परिषद के प्रदेश प्रभारी भरत सिंह एवं प्रदेश अध्यक्ष हरचरण सिंह उर्फ राजा ने की सूर्य मंदिर में पूजा अर्चना

झारखंड/रांची

( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )

विश्व हिंदू रक्षा परिषद के झारखंड प्रदेश प्रभारी भरत सिंह एवं प्रदेश अध्यक्ष हरचरण सिंह (राजा) एवं उनकी टीम द्वारा रांची के बुंडू थाना अंतर्गत स्थित हिंदू मंदिर सूर्य मंदिर में ईश्वर से धर्मांतर के रोकथाम के लिए प्रार्थना की।

विश्व हिंदू रक्षा परिषद झारखंड प्रदेश अध्यक्ष ने हिंदू मंदिर में की प्रार्थना, धर्मांतरण रोकने की लगाई गुहार

विश्व हिंदू रक्षा परिषद के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष ने आज एक हिंदू मंदिर में ईश्वर से प्रार्थना की, जिसमें उन्होंने धर्मांतरण के रोकथाम के लिए गुहार लगाई। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि धर्मांतरण एक गंभीर समस्या है, जिसे रोकने के लिए हमें एकजुट होकर प्रयास करना होगा।

विश्व हिंदू रक्षा परिषद की पहल:

    विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने धर्मांतरण के रोकथाम के लिए कई पहल की हैं, जिनमें से एक है सनातन हेल्पलाइन सेवा, जो 24×7 सक्रिय रहती है। इस सेवा के माध्यम से लोग धर्मांतरण के मामलों की जानकारी दे सकते हैं और मदद प्राप्त कर सकते हैं। जो कि विश्व हिंदू रक्षा परिषद के वेबसाइट पर उपलब्ध है

    अब प्रवीण सेवा संस्थान के नाम से जाना जाएगा आदित्यपुर एमआरडब्ल्यू टाईप दुर्गा पूजा पंडाल

    अब प्रवीण सेवा संस्थान के नाम से जाना जाएगा आदित्यपुर एमआरडब्ल्यू टाईप दुर्गा पूजा पंडाल

    पूर्व विधायक अरविंद सिंह उर्फ मलखान सिंह बने संरक्षक, अध्यक्ष पद की जिम्मेवारी अंकुर सिंह को

    सरायकेला/आदित्यपुर

    ईचागढ़ के पूर्व विधायक अरविंद सिंह उर्फ मलखान सिंह की अगुवाई वाला दुर्गापूजा पंडाल अब प्रवीण सेवा संस्थान के नाम से जाना जाएगा. इस पूजा को आदित्यपुर एमआरडब्ल्यू टाईप के लोग मिल-जुलकर करते हैं. स्थानीय लोगों की हुई बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि इस पूजा महोत्सव का आयोजन प्रवीण सेवा संस्थान के नाम से किया जाएगा. इसको लेकर बकायदा सरायकेला निबंधन कार्यालय में संस्था की रजिस्ट्री करायी जा चुकी हैं. मौके पर कमिटी के सभी पदाधिकारी उपस्थित थे.

    नई कमेटी एक नजर में

    प्रवीण सेवा संस्थान का संरक्षक पूर्व विधायक अरविंद सिंह उर्फ मलखान सिंह को बनाया गया है. इसी तरह से अध्यक्ष अंकुर सिंह को बनाया गया है. उपाध्यक्ष इंद्रजीत पांडेय और सचिव विनायक सिंह को बनाया गया है. इसके अलावा संयुक्त सचिव पंकज प्रसाद,, कोषाध्यक्ष संजय कुमार सिंह और संयुक्त कोषाध्यक्ष रत्नेश प्रियदर्शनी को बनाया गया है. आगे कमेटी का विस्तार भी किया जाएगा.

    अंकुर सिंह

    1973 से हो रही है पूजा

    आदित्यपुर एमआरडब्ल्यू टाईप में 1973 से ही दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है. तब जयराम यूथ स्पोर्टिंग क्लब की ओर से पूजा का आयोजन होता था. पहले छोटे आकार का पूजा होता था, लेकिन अब लोगों के सहयोग से यह पूजा भव्य रूप ले चुका है.

    नि:शुल्क कांवर यात्रा में शामिल होने वाले सोनारी के शिवभक्तों के बीच बंटा पहचान पत्र ।

    नि:शुल्क कांवर यात्रा में शामिल होने वाले सोनारी के शिवभक्तों के बीच बंटा पहचान पत्र ।

    यात्रा में जाने वाले शिवभक्त मेरे ऊपर कर रहे एहसान: विकास सिंह

    पूर्वी सिंहभूम/जमशेदपुर

    आगामी 25 जुलाई को बाबा बैद्यनाथ सेवा संघ की ओर से आयोजित होने वाली निःशुल्क कांवर यात्रा में सोनारी से शामिल होने वाले शिवभक्तों के बीच पहचान पत्र बाबा भूतनाथ मंदिर के प्रांगण में वितरण किया गया । सोनारी से नि:शुल्क कांवर यात्रा में शामिल होकर सुल्तानगंज जाने हेतु पुरूषों की तुलना महिलाओं की संख्या कहीं अधिक देखने को मिली ।

    सोनारी के बाबा भूतनाथ मंदिर प्रांगण में पहचान पत्र वितरण के कार्यक्रम में पहुंचे संघ के संस्थापक सदस्य विकास सिंह ने कहा की यात्रा में शामिल होने वाले सभी शिवभक्तों ने मेरे ऐसे अदने व्यक्ति के ऊपर भरोसा करके अपने परिवार को छोड़कर आठ दिन के लिए कईएक किलोमीटर दूर घर से जा रहे हैं ऐसे सभी शिवभक्तों ने एक बहुत बड़ा एहसान मेरे ऊपर करने का कार्य किया है विकास सिंह ने पंजीयन कराए सभी लोगों को पहचान पत्र देते हुए सुझाव देते हुए कहा की सभी लोग अपने घर से बैटरी वाली टॉर्च, और एक प्लॉस्टिक अवश्य लेकर जाए जिससे उन्हें बारिश और अंधेरे में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी ।

    विकास सिंह ने सभी यात्रा में शामिल हो रहे कांवरियों को समय की पाबंदी का हवाला देते हुए कहा कि पूरा कार्यक्रम समय से तय किया गया है अगर तय समय में हम लोग गंतव्य स्थान तक नहीं पहुंच पाएंगे तो आरक्षित किया हुआ ठहराव में रहने में तकलीफ होगी इसलिए सभी को समय से ही सब काम करने हैं । विकास सिंह ने बताया कि सोनारी के सभी कांवरिया बाबा भूतनाथ मंदिर में 25 तारीख को एकत्रित होकर एक साथ बस के माध्यम से मानगो पहुंचेंगे फिर मानगों से सभी लोग एक साथ सुल्तानगंज के लिए रवाना होंगे । विकास सिंह ने बताया कि रात्रि के समय पश्चिम बंगाल के पुरलिया जिले में स्थित गौशाला के प्रांगण में कांवरियों का रात्रि के अल्पाहार होगा । पहचान पत्र वितरण कार्यक्रम में मुख्य रूप से विकास सिंह, आशुतोष सिंह, अरविंद महतो, किशोर बर्मन, सुनील कुमार सिंह , अजय लोहार मुख्यरूप से शमिल हुए।

    शौर्य और पराक्रम का प्रतीक है रामनवमी : अजय कुमार साहू

    शौर्य और पराक्रम का प्रतीक है रामनवमी : अजय कुमार साहू

    सरायकेला/ईचागढ़

    ( मालखान महतो)

    प्रखंड अंतर्गत टीकर ग्राम में महावीर मंदिर पूजा समिति की ओर से आयोजित रामनवमी जुलूस निकाला गया। जुलूस में युवा समाजसेवी अजय कुमार साहू भी शामिल हुए। हजारों की संख्या में जुलूस में शामिल रामभक्तों ने जुलूस में एक से बढ़कर एक कलाबाजियां,करतब और अस्त्र-शस्त्र चालन का प्रदर्शन किया।

    इस दौरान समाजसेवी श्री साहू ने कहा कि रामनवमी का पर्व शौर्य और पराक्रम का प्रतीक है। एक सौम्य व्यक्तित्व के धनी भगवान श्रीराम के सुशासन और उनके पराक्रम को याद कर रामभक्त एक सूत्र में आते हुए इस पर्व को मनाते हैं। श्रीराम भारतीय जनमानस के राजा थे। उन्होंने इस अवसर पर क्षेत्र के लोगों को बधाई देते हुए भगवान श्रीराम से क्षेत्र के खुशहाली की भी कामना की।

    रामनवमी के पावन अवसर पर प्रवीण सिंह सेवा संस्था की ओर से हॉलिडे इन में लगा सेवा शिविर

    रामनवमी के पावन अवसर पर प्रवीण सिंह सेवा संस्था की ओर से हॉलिडे इन में लगा सेवा शिविर

    सरायकेला/आदित्यपुर

    प्रवीण सिंह सेवा संस्था की ओर से रामनवमी के अवसर पर सोमवार को आदित्यपुर हॉलिडे इन में श्रद्धालुओं के लिए सेवा शिविर लगाया गया. शिविर में लड्डू, चना, गुड़ और मीठे शर्बत का वितरण किया गया. शिविर का लाभ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उठाया

    रामनवमी पर विर्सजन जुलूस देखने निकले श्रद्धालु सेवा शिविर में थोड़ी देर तक ठहरकर लड्डू, चना, गुड़ और शर्बत का सेवन कर तरोताजा होकर आगे की तरफ बढ़ रहे थे. मौके पर संस्था के संरक्षक अरविंद सिंह उर्फ मलखान सिंह और संस्था के अध्यक्ष विनायक सिंह, उनके भतीजे अंकुर सिंह भी पहुंचे हुए थे.

    हॉलिडे इन में पिछले कई सालों से सेवा शिविर लगाया जा रहा है. शिविर में बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्गों की भीड़ उमड़ पड़ी थी. सेवा शिविर में पहुंचे लोग शिविर लगाए जाने की सराहना भी कर रहे थे.

    सेवा शिविर में ईचागढ़ के पूर्व विधायक सह प्रवीण सिंह सेवा संस्था के संरक्षक अरविंद सिंह उर्फ मलखान सिंह, संस्था के अध्यक्ष विनायक सिंह और उनके भतीजे अंकुर सिंह भी पहुंचे हुए थे. इस बीच सेवा शिविर का जायजा लिया और व्यवस्था की जानकारी ली. पूर्व विधायक अरविंद सिंह ने कहा कि प्रवीण सिंह सेवा संस्था की ओर से आगे से भी इस तरह के शिविर का आयोजन किया जाएगा.

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