मुसाबनी संवाददाता
मुसाबनी गुरुद्वारा में सोमवार को गुरू गोविंद सिंह जी की जयंती को प्रकाश उत्सव पर्व के रूप में धूमधाम से मनाया गया। गुरुद्वारा में संगत द्वारा श्री गुरु ग्रंथ साहिब के अखंड सहज पाठ की गयी। इसके बाद गुरुद्वारा के ग्रंथि ने गुरू गोविंद सिंह जी की जीवनी के बारे में बताया।

उन्होंने कहा की सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह ने ही साल 1699 में बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी। उनका जीवन अन्याय, अधर्म, अत्याचार और दमन के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए गुजरा।हिंदू कैलेंडर के अनुसार गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म पौष महीने की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को हुआ था। उन्होंने खालसा वाणी – “वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह” भी दी।गुरु गोबिंद सिंह ने जीवन जीने के लिए पांच सिद्धांत भी बताए जिन्हें ‘पांच ककार’ कहा जाता है. पांच ककार में ये पांच चीजें आती हैं जिन्हें खालसा सिख धारण करते हैं. ये हैं- ‘केश’, ‘कड़ा’, ‘कृपाण’, ‘कंघा’ और ‘कच्छा’. इन पांचो के बिना खालसा वेश पूर्ण नहीं माना जाता है।

इस मौके पर अरदास के बाद कीर्तन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर गुरू का अटूट लंगर का वितरण किया गया। जिसे सभी धर्मावलंबियों ने ग्रहण किया। इस सारे समारोह को संपन्न कराने में मुसाबनी गुरूद्वरा प्रबंधन कमेटी केगुरुद्वारा प्रांगण में लंगर का भी आयोजन हुआ। मौके पर मुसाबनी गुरूद्वरा प्रबंधन कमेटी के चेयरमैन गुरु वचन सिंह, अध्यक्ष सरदार अर्जुन सिंह, उपाध्यक्ष सरदार जगमित सिंह, महासचिव सरदार धर्मेंद्र सिंह, कोषाध्यक्ष सरदार अमरजीत सिंह, रविन्द्र सिंह, हरविदर सिंह, रघुवीर सिंह, मनमोहन सिंह,हरि सिंह, बलजिदर सिंह उर्फ डब्बू, हरपाल सिंह,दिनेश साव, जयंत घोष, मुन्ना नायर, लक्ष्मण चंद्र बाग सहित काफी संख्या में लोग उपस्थित थे।























