राजीव गांधी जी भारतीय राजनीति के उन नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने भविष्य के भारत की कल्पना केवल शब्दों में नहीं, बल्कि नीतियों और निर्णयों के माध्यम से करने का प्रयास किया। उन्होंने ऐसे समय में देश की बागडोर संभाली, जब भारत कई चुनौतियों का सामना कर रहा था। उनका विश्वास था कि यदि भारत को 21वीं सदी में एक मजबूत, आत्मनिर्भर और आधुनिक राष्ट्र बनाना है, तो विज्ञान, तकनीक, शिक्षा और युवाओं की शक्ति को केंद्र में रखना होगा।
भारत में सूचना प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर, दूरसंचार और डिजिटल सोच को बढ़ावा देने का श्रेय बड़े पैमाने पर राजीव गांधी जी की दूरदर्शिता को दिया जाता है। आज जिस डिजिटल भारत की हम बात करते हैं, उसकी बुनियाद रखने वाले प्रमुख नेताओं में उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने पंचायतों को अधिक अधिकार देने, युवाओं को राजनीतिक भागीदारी का अवसर देने और प्रशासन को आधुनिक बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रयास किए।
राजीव गांधी जी का मानना था कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा पीढ़ी है। इसलिए उन्होंने शिक्षा, विज्ञान और नवाचार को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया। उनकी सोच थी कि देश का विकास तभी संभव है जब गाँव और शहर दोनों समान गति से आगे बढ़ें और तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।
यद्यपि उनके राजनीतिक जीवन में अनेक चुनौतियाँ और विवाद भी रहे, लेकिन यह भी सच है कि उन्होंने भारत को आधुनिक युग की ओर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की। इतिहास किसी भी नेता का मूल्यांकन उसके योगदान और उसकी कमियों—दोनों के आधार पर करता है, और राजीव गांधी जी भी इसका अपवाद नहीं हैं। फिर भी आधुनिक भारत की नींव मजबूत करने में उनके योगदान को व्यापक रूप से याद किया जाता है।
आज उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए यही कहना उचित होगा कि राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान, दूरदर्शी सोच और भारत को नई तकनीकी दिशा देने के प्रयासों को हमेशा स्मरण किया जाएगा।
“नेता केवल अपने समय के लिए नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सोचते हैं। राजीव गांधी जी की कई पहलें आज भी भारत के विकास की कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।”
पीड़ित ठेका मजदूर चंदन पासवान को न्याय दिलाने हेतु इंटक प्रतिनिधिमंडल ने डेप्युटी लेबर कमिश्नर से की मुलाकात।
सरायकेला/गम्हरिया
गम्हरिया प्रखंड कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सह सरायकेला-खरसावां इंटक जिला अध्यक्ष अनिल ठाकुर ने अपने प्रतिनिधिमंडल एवं पीड़ित ठेका मजदूर चंदन पासवान के साथ जमशेदपुर स्थित सीतारामडेरा स्थित डेप्युटी लेबर कमिश्नर (DLC) कार्यालय में पदस्थापित अरविंद कुमार से मुलाकात कर पीड़ित मजदूर की गंभीर समस्याओं से अवगत कराया।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि टाटा स्टील के ठेकेदार जोश ब्रदर्स के अधीन कार्यरत मजदूर चंदन पासवान 1 जनवरी 2026 को कार्य के दौरान कंपनी परिसर में दुर्घटना का शिकार हो गए थे। उनके दाहिने पैर पर रोल बार गिर जाने से पैर का पंजा गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया।
आरोप लगाया गया कि दुर्घटना के बाद पिछले छह महीनों में ठेकेदार द्वारा न तो उनका समुचित इलाज कराया गया और न ही कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के अंतर्गत मिलने वाली इंजरी वेज (Injury Wage) सहित अन्य वैधानिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। इसके अलावा पिछले चार महीनों का वेतन भी भुगतान नहीं किया गया।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया कि ठेकेदार ने चिकित्सकों पर दबाव बनाकर घायल मजदूर को जबरन मेडिकल फिट घोषित करवा दिया। जबकि उनकी शारीरिक स्थिति अभी भी कार्य करने योग्य नहीं है। इतना ही नहीं, दवा एवं चिकित्सा का खर्च भी नहीं उठाया जा रहा है और लगातार फोन कर काम पर लौटने का दबाव बनाया जा रहा है।
वेतन एवं इलाज नहीं मिलने के कारण पीड़ित मजदूर और उनका परिवार गंभीर आर्थिक, मानसिक तथा भुखमरी जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहा है। मुलाकात के दौरान चंदन पासवान ने स्वयं डेप्युटी लेबर कमिश्नर अरविंद कुमार के समक्ष अपनी पूरी आपबीती सुनाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए श्री अरविंद कुमार ने निष्पक्ष जांच कराते हुए कंपनी एवं ठेकेदार से पीड़ित मजदूर को उचित मुआवजा, बकाया वेतन तथा न्याय दिलाने के लिए हरसंभव कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
विक्रम-1 से भारत-ब्रिटेन एफ़टीए तक -क्या जुलाई 2026 विश्व अर्थव्यवस्था और भारतीय शेयर बाजार का टर्निंग पॉइंट है? -भारत दुनियाँ की नई सेफ ग्रोथ डेस्टिनेशन बन रहा है?
युद्ध, व्यापार और तकनीक का त्रिकोण: क्या भारतीय शेयर बाजार वैश्विक उथल- पुथल में बनेगा निवेशकों की पहली पसंद?
वैश्विक संकट बनाम भारत की आर्थिक उड़ान- युद्ध की आंच, व्यापार की ताकत और अंतरिक्ष की छलांग -क्या भारतीय शेयर बाजार व अर्थव्यवस्था दुनियाँ की नई सेफ ग्रोथ डेस्टिनेशन बन रहा है? -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र
वैश्विक स्तरपर जुलाई 2026 के दूसरे सप्ताह में विश्व और भारत में अनेक ऐसी घटनाएं हुईं जिन्होंने निवेशकों,उद्योग जगत, नीति- निर्माताओं तथा वैश्विक वित्तीय संस्थानों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। रविवार दिनांक 18 जुलाई 2026 को भारत में निजी क्षेत्र के पहले ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 के प्रक्षेपण की दिशा में ऐतिहासिक प्रगति जिसने पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित किया,भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते का 15 जुलाई से लागू होना,20 जुलाई से 13 अगस्त 2026 प्रारंभ होने वाला संसद का मानसून सत्र,पश्चिम एशिया में ईरान- अमेरिका संघर्ष का विस्तार तथा होरमुज़ क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव,साथ ही ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की भ्रष्टाचार धारणा रिपोर्ट जैसे घटनाक्रम केवल समाचार नहीं हैं, बल्कि वैश्विक पूंजी प्रवाह,ऊर्जा कीमतों,मुद्रा बाजार, निवेश विश्वास और आर्थिक विकास को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारक हैं। जिस पर पूरे विश्व की निगाहें हैं इसलिए मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र पूरे भारत व अंतरराष्ट्रीय स्तरपर इस आर्टिकल के माध्यम से इन डेवलपमेंट्स कों शेयर कर बताना चाहूंगा कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था व शेयर मार्केट पर क्या असर पड़ेगा। भारत के लिए सबसे सकारात्मक घटनाओं में निजी अंतरिक्ष क्षेत्र का तेजी से उभरना है। स्काईरूट एयरोस्पेस का विक्रम-1 मिशन भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी की नई शुरुआत का प्रतीक है। सरकार के अनुसार भारत का अंतरिक्ष उद्योग 2030 तक लगभग 40-45 अरब डॉलर और 2040 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचने का लक्ष्य रखता है। इससे एयरोस्पेस, रक्षा,इलेक्ट्रॉनिक्स,सैटेलाइट सेवाओं,कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा उच्च तकनीकी विनिर्माण क्षेत्र की सूचीबद्ध कंपनियों में दीर्घकालिक निवेश आकर्षित होने की संभावना है। विदेशी निवेशकों के लिए भी यह संकेत है कि भारत केवल सेवा आधारित अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि उच्च प्रौद्योगिकी निर्माण की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
साथियों, 15 जुलाई 2026 से भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते का लागू होना भारतीय निर्यातकों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।वस्त्र,ऑटो कंपोनेंट फार्मास्यूटिकल्स इंजीनियरिंग, कृषि-प्रसंस्करण, रत्न एवं आभूषण तथा आईटी सेवाओं को बेहतर बाजार मिलने की संभावना है। यदि निर्यात बढ़ता है तो भारतीय कंपनियों के मुनाफे में वृद्धि हो सकती है,जिसका सकारात्मक प्रभाव शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है।साथ ही विदेशी कंपनियों का भारत में निवेश बढ़ने से रोजगार, उत्पादन और कर संग्रह में भी वृद्धि संभव है। साथियों, 20 जुलाई से 13 अगस्त तक प्रस्तावित संसद का मानसून सत्र निवेशकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा क्योंकि इस दौरान कर सुधार,एमएसएमई,निवेश, बैंकिंग तथा अन्य आर्थिक विधेयकों पर चर्चा और निर्णय संभावित हैं। यदि सुधारवादी नीतियां आगे बढ़ती हैं तो बाजार इसे सकारात्मक संकेत के रूप में देख सकता है। वहीं यदि राजनीतिक गतिरोध बढ़ता है और महत्वपूर्ण विधेयक लंबित रह जाते हैं तो निवेशकों में अस्थायी अनिश्चितता भी उत्पन्न हो सकती है।दूसरी ओर, पश्चिम एशिया का संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा जोखिम बना हुआ है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव तथा खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष की घटनाएं तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं। यदि होरमुज़ जलडमरूमध्य में व्यवधान बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल संभव है। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा भाग आयात करता है,इसलिए तेल महंगा होने पर महंगाई, चालू खाते का घाटा और वित्तीय दबाव बढ़ सकता है।तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा प्रभाव भारतीय शेयर बाजार के विभिन्न क्षेत्रों पर अलग- अलग पड़ सकता है। तेल विपणन कंपनियों, विमानन, परिवहन, रसायन और पेंट उद्योग पर लागत का दबाव बढ़ सकता है, जबकि तेल एवं गैस खोज, ऊर्जा तथा रक्षा क्षेत्र की कुछ कंपनियों को लाभ मिल सकता है। इसलिए बाजार में क्षेत्रवार प्रदर्शन में बड़ा अंतर दिखाई दे सकता है।अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजार सामान्यतः युद्ध और भू- राजनीतिक तनाव के समय जोखिम से बचने की रणनीति अपनाते हैं। ऐसे समय निवेशक शेयरों से धन निकालकर सोना,अमेरिकी डॉलर, सरकारी बॉन्ड और अन्य सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख करते हैं। यदि पश्चिम एशिया का संघर्ष लंबा चलता है तो वैश्विक पूंजी बाजारों में अस्थिरता बनी रह सकती है और उभरते देशों में विदेशी निवेश का प्रवाह धीमा पड़ सकता है।
साथियों, ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की भ्रष्टाचार धारणा रिपोर्ट भी निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक मानी जाती है। यदि किसी देश की रैंकिंग कमजोर होती है तो विदेशी निवेशक शासन व्यवस्था, नियामकीय पारदर्शिता और कारोबारी वातावरण को लेकर अधिक सतर्क हो सकते हैं। हालांकि किसी एक रिपोर्ट के आधार पर निवेश निर्णय नहीं लिए जाते, फिर भी दीर्घकाल में पारदर्शिता, न्यायिक दक्षता और नीति-स्थिरता विदेशी निवेश आकर्षित करने के सटीकता से प्रमुख आधार बने रहते हैं।
साथियों, 17 जुलाई 2026 तक भारतीय शेयर बाजार का समग्र रुझान यह संकेत देता है कि निवेशक एक ओर भारत की विकास क्षमता, एफटीए,अंतरिक्ष क्षेत्र और बुनियादी ढांचा सुधारों को सकारात्मक रूप में देख रहे हैं,वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया के संकट और वैश्विक महंगाई के जोखिमों को लेकर सतर्क भी हैं। ऐसी स्थिति में बाजार में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक माना जाता है।शेयर बाजार पर प्रभाव का आकलन संभावनाओं परआधारित होता है, क्योंकि वास्तविक बाजार अनेक घरेलू एवं वैश्विक कारकों से प्रभावित होता है।विदेशी संस्थागत निवेशकों की रणनीति भी इसी संतुलन पर निर्भर करेगी।यदि वैश्विक जोखिम बढ़ते हैं तो वे कुछ समय के लिए पूंजी सुरक्षित बाजारों में स्थानांतरित कर सकते हैं,लेकिन भारत की मजबूत विकास दर, जनसांख्यिकीय लाभ, डिजिटल अर्थव्यवस्था और विनिर्माण विस्तार दीर्घकालिक निवेश को आकर्षित करते रह सकते हैं।भारतीय रुपया भी इन घटनाओं से प्रभावित हो सकता है। तेल महंगा होने और विदेशी निवेश में कमी आने पर रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जबकि निर्यात वृद्धि,एफटीए के लाभ तथा निरंतर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश रुपये को समर्थन दे सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथियों, नीट पेपर लीक प्रकरण में केंद्रीय शिक्षामंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी राजनीतिक विवाद तथा लगभग 21 दिनों के आंदोलन के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को रविवार दिनांक 18 जुलाई 2026 धरना स्थल से पुलिस द्वारा हटाकर अस्पताल में भर्ती कराए जाने जैसी घटनाएं स्वाभाविक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस और सामाजिक असंतोष को बढ़ाती हैं। यदि ऐसे घटनाक्रम लंबे समय तक जारी रहें, तो उनका अप्रत्यक्ष प्रभाव निवेशकों की धारणा (इन्वेस्टर सेंटीमेंट) और आर्थिक विश्वास (इकोनॉमिक कॉन्फिडेंस) पर पड़ सकता है। हालांकि भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन मुख्यतः कॉर्पोरेट आय,महंगाई,ब्याज दरों,विदेशी निवेश,वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और सरकारीनीतियों जैसे व्यापक आर्थिक कारकों से निर्धारित होता है, फिर भी बड़े राजनीतिक आंदोलनों या अस्थिरता के दौर में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। यदि विरोध-प्रदर्शन शांतिपूर्ण और सीमित दायरे में रहते हैं, तो उनका व्यापक आर्थिक प्रभाव सामान्यतः सीमित रहता है। लेकिन यदि वे देशव्यापी अवरोध, प्रशासनिक व्यवधान या नीति- निर्माण में देरी का कारण बनें, तो निवेशकों में सतर्कता बढ़ सकती है तथा कुछ समय के लिए पूंजी बाजार, पर्यटन, उपभोग और व्यापारिक गतिविधियों पर दबाव दिखाई दे सकता है। इसलिए ऐसी परिस्थितियों का समाधान लोकतांत्रिक संवाद, पारदर्शी जांच और संस्थागत विश्वास को मजबूत करने के माध्यम से किया जाना भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजारों की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए सटीकता से अधिक अनुकूल माना जाता है।
साथियों, वैश्विक स्तरपर अमेरिका,यूरोप,जापान और चीन के बाजार भी इन घटनाओं से प्रभावित होंगे। ऊर्जा आयातक देशों के लिए तेल कीमतों में वृद्धि आर्थिक चुनौती बनेगी, जबकि ऊर्जा निर्यातक देशों को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है। इससे वैश्विक पूंजी का पुनर्संतुलन देखने को मिल सकता है।यदि समग्र दृष्टि से देखा जाए तो भारत के सामने इस समय दो समानांतर चित्र दिखाई देते हैं। पहला, उच्च प्रौद्योगिकी,अंतरिक्ष, मुक्त व्यापार,डिजिटल अर्थव्यवस्था और सुधारवादी नीतियों के माध्यम से तेज आर्थिक विकास का अवसर। दूसरा, वैश्विक युद्ध, ऊर्जा संकट, महंगाई और भू- राजनीतिक अस्थिरता जैसी चुनौतियां। आने वाले महीनों में भारतीय अर्थव्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह इन अवसरों का लाभ उठाते हुए बाहरी जोखिमों का कितनी कुशलता से सामना करती है।
अतःअगर उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि,जुलाई 2026 का यह सप्ताह भारत और विश्व की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा सकता है।यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव नियंत्रित रहता है और भारत सुधारों, निर्यात विस्तार, तकनीकी नवाचार तथा नीति-स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ता है, तो भारतीय शेयर बाजार दीर्घकाल में वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रह सकता है। वहीं यदि युद्ध का दायरा बढ़ता है, ऊर्जा आपूर्ति बाधित होती है और वैश्विक वित्तीय अस्थिरता गहराती है, तो अल्पकाल में विश्वभर के शेयर बाजारों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। भारत के लिए सबसे बड़ी रणनीति यही होगी कि वह अपने मजबूत घरेलू आर्थिक आधार, तकनीकी प्रगति और संतुलित विदेश नीति के माध्यम से इन वैश्विक चुनौतियों को अवसर में परिवर्तित करे।
संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318
एमबीएनएस इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, आसनबनी में बी.एड. सत्र 2023–2025 के विद्यार्थियों का भव्य दीक्षांत समारोह संपन्न।
सरायकेला/चांडिल
एमबीएनएस इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, आसनबनी में बी.एड. सत्र 2023–2025 के विद्यार्थियों का भव्य दीक्षांत समारोह एमबीएनएस इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, आसनबनी में बी.एड. सत्र 2023–2025 के विद्यार्थियों के सम्मान में भव्य दीक्षांत (Graduation Day) समारोह का आयोजन अत्यंत गरिमामय वातावरण में किया गया। समारोह में विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों एवं गणमान्य अतिथियों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही। यह आयोजन विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की नई शुरुआत का प्रतीक बना।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र की माननीय विधायक श्रीमती सबिता महतो थीं। विशिष्ट अतिथियों के रूप में एमबीएनएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के मेंटर श्री राम केवल सिंह, एमबीएनएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के चेयरमैन श्री विवेक कुमार सिंह तथा एमबीएनएस इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन की निदेशक श्रीमती अनुपा सिंह उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुआ। अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिह्न देकर स्वागत किया गया। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि श्रीमती सबिता महतो ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति हैं। उन्होंने सभी स्नातक विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उन्हें समर्पण, अनुशासन और सेवा-भाव के साथ समाज के विकास में योगदान देने का संदेश दिया।
श्री राम केवल सिंह ने विद्यार्थियों को जीवनभर सीखते रहने, ईमानदारी एवं कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने की प्रेरणा दी। संस्थान के चेयरमैन श्री विवेक कुमार सिंह ने कहा कि ग्रेजुएशन डे केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि नई जिम्मेदारियों और नए सपनों की शुरुआत है। निदेशक श्रीमती अनुपा सिंह ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि एक आदर्श शिक्षक अपने ज्ञान, संस्कार और चरित्र से समाज को नई दिशा देता है।
इस अवसर पर बी.एड. सत्र 2023–2025 के सभी सफल छात्र-छात्राओं को ग्रेजुएशन डे प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। प्रमाण-पत्र प्राप्त करते समय विद्यार्थियों के चेहरे पर गर्व, आत्मविश्वास और भविष्य के प्रति उत्साह स्पष्ट दिखाई दे रहा था।
समारोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को विशेष पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। Academic Excellence Award से प्रीति कुमारी को सम्मानित किया गया। Best Personality Award से नरेंद्र प्रसाद सिंह को सम्मानित किया गया। Student Favourite Award से गिरिधारी तंतुबाई को सम्मानित किया गया। Cultural Star Award से प्रभा, थेरेसा, लिपिका एवं प्रीति कुम्भकार को सम्मानित किया गया। NSS Excellence Award शाक्या कुमारी को प्रदान किया गया। Chatter Box Award नेहा मोहंती को मिला। Best Disciplined Student Award संयुक्त रूप से बरनाली अधिकारी एवं फिरोज आलम अंसारी को प्रदान किया गया। Best Leadership Award से पूनम करवा को सम्मानित किया गया तथा Pride of the Batch Award प्रीति कुमारी कुम्भकार को प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। गीत, नृत्य एवं प्रेरणादायक प्रस्तुतियों ने समारोह को और भी आकर्षक बना दिया। उपस्थित अभिभावकों एवं अतिथियों ने विद्यार्थियों के उत्साह और प्रतिभा की सराहना की।
समारोह के अंत में विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों एवं संस्थान के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एमबीएनएस इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन ने उन्हें केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, नैतिक मूल्य एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का भी पाठ पढ़ाया है। सभी विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए संकल्प लिया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में संस्थान के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। धन्यवाद ज्ञापन के उपरांत सभी अतिथियों, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने सामूहिक छायाचित्र खिंचवाए। राष्ट्रगान के साथ समारोह का सफल समापन हुआ।
यह दीक्षांत समारोह एमबीएनएस इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, आसनबनी के लिए एक गौरवपूर्ण अवसर रहा, जिसने एक बार फिर गुणवत्तापूर्ण शिक्षक शिक्षा, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास तथा सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से प्रदर्शित किया।
चांडिल प्रखंड अंतर्गत पंचायत भवन, चावलीबासा में लर्नर लाइसेंस शिविर आयोजित, 151 अभ्यर्थी हुए सफल।
सरायकेला/चांडिल
उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी नितिश कुमार सिंह के निर्देशानुसार जिला परिवहन कार्यालय, सरायकेला-खरसावाँ द्वारा प्रखंडवार लर्नर लाइसेंस (Learner Licence) शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में दिनांक 17 जुलाई, 2026 को चांडिल प्रखंड अंतर्गत पंचायत भवन, चावलीबासा में लर्नर लाइसेंस शिविर का आयोजन किया गया।
शिविर में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संबंधित पंचायतों के उन अभ्यर्थियों को शामिल किया गया, जिन्होंने पूर्व से ऑनलाइन स्लॉट बुक कराया था। शिविर के दौरान अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन, ऑनलाइन आवेदन की जांच तथा निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप लर्नर लाइसेंस परीक्षा संपन्न कराई गई।
जिला परिवहन कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार शिविर के लिए कुल 201 अभ्यर्थियों का स्लॉट निर्धारित था। इनमें से 151 अभ्यर्थी लर्नर लाइसेंस परीक्षा में सफल हुए, 27 अभ्यर्थी असफल रहे तथा 23 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। परीक्षा में सफल सभी अभ्यर्थियों को लर्नर लाइसेंस उपलब्ध कराया गया।
शिविर के दौरान मोटर वाहन निरीक्षक (एमवीआई) के साथ प्रखंड प्रशासन के पदाधिकारी एवं कर्मी भी उपस्थित रहे।
जिला परिवहन पदाधिकारी ने बताया कि प्रखंडवार आयोजित किए जा रहे इन शिविरों का उद्देश्य आम नागरिकों को उनके निकट ही लर्नर लाइसेंस से संबंधित सेवाएं उपलब्ध कराना तथा आवेदन प्रक्रिया को सरल एवं सुगम बनाना है। उन्होंने अभ्यर्थियों से परिवहन विभाग की ऑनलाइन सेवाओं का अधिकाधिक उपयोग करने तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप आवेदन एवं स्लॉट बुकिंग सुनिश्चित करने की अपील की।
साथ ही सभी वाहन चालकों से वैध ड्राइविंग लाइसेंस के साथ ही वाहन का परिचालन करने, यातायात नियमों का पालन करने, दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट तथा चारपहिया वाहन चलाते समय सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से उपयोग करने एवं सड़क सुरक्षा के प्रति सदैव सजग रहने की अपील की गई।
झारखंड क्षेत्रीय कार्यकर्ता प्रतियोगिता परीक्षा-2024 के सफल, निष्पक्ष एवं कदाचारमुक्त संचालन को लेकर प्रतिनियुक्त दण्डाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों की संयुक्त ब्रीफिंग आयोजित।
सरायकेला/खरसावां
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा दिनांक 19 जुलाई, 2026 को आयोजित होने वाली झारखंड क्षेत्रीय कार्यकर्ता प्रतियोगिता परीक्षा-2024 के सफल, निष्पक्ष, शांतिपूर्ण एवं कदाचारमुक्त संचालन को लेकर आज नगर भवन, सरायकेला के सभागार में उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में प्रतिनियुक्त स्टैटिक दण्डाधिकारी, सेक्टर दण्डाधिकारी, उड़नदस्ता दण्डाधिकारी, पेट्रोलिंग दण्डाधिकारी, ऑब्जर्वर, केंद्राधीक्षक एवं पुलिस पदाधिकारियों की संयुक्त ब्रीफिंग आयोजित की गई। बैठक में पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी उपस्थित रहे।
बैठक को संबोधित करते हुए उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने कहा कि आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों एवं मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करते हुए परीक्षा का संचालन पूर्णतः निष्पक्ष, पारदर्शी, शांतिपूर्ण एवं कदाचारमुक्त वातावरण में कराया जाए। उन्होंने सभी प्रतिनियुक्त दण्डाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों को निर्धारित समय से पूर्व अपने-अपने परीक्षा केंद्रों पर उपस्थित रहकर सौंपे गए दायित्वों का गंभीरतापूर्वक निर्वहन करने का निर्देश दिया। साथ ही परीक्षा केंद्रों पर विधि-व्यवस्था बनाए रखने, अभ्यर्थियों के प्रवेश एवं निकास को सुव्यवस्थित करने, प्रश्नपत्र एवं अन्य परीक्षा सामग्रियों के सुरक्षित वितरण, उत्तरपुस्तिकाओं के संकलन, सीलबंदी तथा परीक्षा उपरांत निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप स्ट्रांग रूम में सुरक्षित जमा कराने की प्रक्रिया का पूर्णतः अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा।
उपायुक्त ने सभी केंद्राधीक्षकों को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा निर्गत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने सभी परीक्षा केंद्रों का पूर्व निरीक्षण कर उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं का जायजा लेने तथा परीक्षा प्रारंभ होने से पूर्व प्रत्येक केंद्र पर स्वच्छ पेयजल, शौचालय, पर्याप्त बेंच-डेस्क, समुचित प्रकाश व्यवस्था हेतु बल्ब, विद्युत पंखे, कार्यशील दीवार घड़ी सहित सभी आवश्यक सुविधाएं समय पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता, कदाचार अथवा संदिग्ध गतिविधि की सूचना प्राप्त होने पर तत्काल नियमानुसार कार्रवाई करते हुए इसकी सूचना वरीय पदाधिकारियों को उपलब्ध कराई जाए। सभी प्रतिनियुक्त पदाधिकारी आपसी समन्वय, सतर्कता एवं जवाबदेही के साथ कार्य करते हुए परीक्षा की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता बनाए रखें।
पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी ने अपने संबोधन में कहा कि सभी प्रतिनियुक्त दण्डाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारी आपसी समन्वय स्थापित करते हुए परीक्षा को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष एवं कदाचारमुक्त वातावरण में संपन्न कराने हेतु कार्य करें। उन्होंने परीक्षा केंद्रों एवं उसके आसपास सतत निगरानी रखने, विधि-व्यवस्था बनाए रखने तथा किसी भी प्रकार की अवांछित अथवा संदिग्ध गतिविधि की सूचना प्राप्त होने पर तत्काल नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि परीक्षा की निष्पक्षता एवं गरिमा बनाए रखना सभी प्रतिनियुक्त अधिकारियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
बैठक के दौरान संयुक्त आदेश में वर्णित विभिन्न दायित्वों, परीक्षा सामग्री के सुरक्षित परिवहन एवं संधारण, प्रश्नपत्र वितरण, उत्तरपुस्तिका संकलन, सीलबंदी, स्ट्रांग रूम में जमा करने की प्रक्रिया, स्टैटिक, सेक्टर, उड़नदस्ता एवं पेट्रोलिंग दण्डाधिकारियों की भूमिका तथा आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही सभी प्रतिनियुक्त पदाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों को परीक्षा के सफल, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं कदाचारमुक्त संचालन हेतु पूर्ण सजगता, अनुशासन एवं समन्वय के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
इस अवसर पर अपर उपायुक्त जयवर्धन कुमार, जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी, प्रतिनियुक्त दण्डाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारी उपस्थित रहे।
आदित्यपुर के नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में एमबीबीएस सीटों की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 की गई, अधिक संख्या में विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का मिलेगा अवसर।
सरायकेला/आदित्यपुर
( सोनू कुमार सिंह )
सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर स्थित नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। और यह नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (NSMCH) के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
आपको बताते चलें कि नेताजी नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के चेयरमैन मदन मोहन सिंह ने बुधवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में अपनी उपलब्धियों की जानकारी देते हुए मिडिया को बताया कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने आदित्यपुर स्थित नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में एमबीबीएस सीटों की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 कर दी है।
उन्होंने कॉलेज एंड हॉस्पिटल की दूसरी उपलब्धि के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि पटना के बिहटा में स्थित नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल ( NSMCH ) में भी एमबीबीएस की सीटें 150 से बढ़ाकर 250 कर दी गई हैं।
साथ हीउन्होंने संस्थान की तीसरी बड़ी परियोजना की घोषणा करते हुए कहा कि टाटा-रांची रिंग रोड के पास 21.20 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है. जिसमें वर्ष 2028 तक तीसरा नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल शुरू किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण उपलब्धियां केवल संस्थान के लिए नहीं है संस्थान में सीटों की संख्या बढ़ने से अधिक संख्या में विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा और स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रशिक्षित डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
आदित्यपुर के बास्कोनगर से लापता हुई तीन लड़कियां, परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल, पुलिस जांच में जुटी।
सरायकेला/आदित्यपुर
( सोनू कुमार सिंह )
सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत वास्को नगर से तीन नाबालिक लड़कियों के लापता होने की खबर है। लापता तीनों लड़कियां आदित्यपुर थाना क्षेत्र के बास्कोनगर की निवासी बताई जा रही हैं।लापता लड़कियों की पहचान शांति सामड (14 वर्ष), अनुष्का गगराई (15 वर्ष) एवं सिमरन जोजो (14 वर्ष) के रूप में हुई है।
घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार, चार नाबालिग लड़कियां 13 जुलाई 2026 को घर से घूमने के लिए निकली थीं। जिनमें से एक लड़की मंगलवार दोपहर अपने घर लौट आई, जबकि तीन अन्य लड़कियां अब तक घर नहीं पहुंची हैं। परिजनों द्वारा दी गई सूचना के बाद पुलिस लड़कियों की तलाश में जुट गई हैं संभावित स्थानों पर खोजबीन की जा रही है तथा आसपास के क्षेत्रों में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
इधर नाबालिक लड़कियों के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है परिजनों ने आम जनता से अपील की है कि किसी को भी अगर लड़कियां दिखाई दे या फिर लड़कियों की सूचना प्राप्त हो तो वे तुरंत इसकी सूचना स्थानीय थाना या फिर परिजनों को दें।
मुख्यमंत्री से चक्रधरपुर, घाटशिला एवं चांडिल अनुमंडलों को जिला बनाने की मांग।
सरायकेला/खरसावां
कांग्रेस के पूर्व वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष फूलकांत झा ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को संबोधित एक स्मार पत्र भेज कर मांग किये है सीकेपी (चक्रधरपुर) पोड़ाहाट, घाटशिला तथा चांडिल अनुमंडलों को जिला घोषित करने की मांग की है।
पत्र में उन्होंने कहा कि चक्रधरपुर अनुमंडल को बने लगभग 25 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन आज भी इसे जिला का दर्जा नहीं मिल सका है। पश्चिमी सिंहभूम के दूरस्थ क्षेत्रों जैसे चाईबासा, जगन्नाथपुर, नोवामुंडी, मनोहरपुर, गोइलकेरा, मझगांव आदि के लोगों को जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए 80 से 100 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे आम जनता को सरकारी योजनाओं एवं प्रशासनिक सेवाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पाता।
उन्होंने कहा कि घाटशिला अनुमंडल के बहरागोड़ा, चाकुलिया और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को भी जिला मुख्यालय जमशेदपुर तक पहुंचने में काफी कठिनाई होती है। वहीं चांडिल अनुमंडल, जो लगभग 24 वर्षों से अस्तित्व में है, के लोगों को भी सरायकेला जिला मुख्यालय तक पहुंचने में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं।
फूलकांत झा ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि मानसून सत्र में इस विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए चक्रधरपुर, घाटशिला एवं चांडिल अनुमंडलों को जिला घोषित करने की घोषणा की जाए, ताकि कोल्हान क्षेत्र के लोगों को बेहतर प्रशासनिक सुविधा, विकास योजनाओं का लाभ और सुशासन सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि नए जिलों के गठन से प्रशासन आम जनता के और करीब पहुंचेगा तथा क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति मिलेगी।
कोल्हान झारखंड सरकार की राजनीतिक हृदयस्थली रहा है। वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में कोल्हान की 14 विधानसभा सीटों में से 12 सीटों पर महागठबंधन को जनता ने अपना प्रचंड समर्थन देकर विजय दिलाई। वहीं, कोल्हान के दो लोकसभा क्षेत्रों में से एक सीट पश्चिमी सिंहभूम से भी महागठबंधन के प्रत्याशी को जनता ने विजयी बनाया, जो इस क्षेत्र के लोगों के विश्वास और समर्थन का स्पष्ट प्रमाण है।
ऐसे में कोल्हान की जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग चक्रधरपुर, घाटशिला एवं चांडिल अनुमंडलों को जिला का दर्जा देने पर सरकार को गंभीरता से विचार करते हुए सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। इससे जनता को प्रशासनिक सुविधाएं सुलभ होंगी और क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति मिलेगी।
झारखंड क्षत्रिय संघ के केंद्रीय अध्यक्ष शंभू नाथ सिंह ने की हिमांशु हत्याकांड मामले पर सीबीआई जांच की मांग।
अगर झारखंड क्षत्रिय संघ पुलिस के ऊपर मुकदमा कर दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई करने की मांग करती है तो क्या यह गलत है ?:- शंभू नाथ सिंह केंद्रीय अध्यक्ष, झारखंड क्षत्रिय संघ
गंभीर रूप से घायल हिमांशु और प्रत्युष को पुलिस ने 40 मिनट तक अस्पताल नहीं पहुंचाया:- शंभू नाथ सिंह, केंद्रीय अध्यक्ष, झारखंड क्षत्रिय संघ
सरायकेला/आदित्यपुर
( सोनू कुमार सिंह )
चर्चित हिमांशु सिंह हत्याकांड मामले में झारखंड क्षत्रिय संघ के केंद्रीय अध्यक्ष शंभू नाथ सिंह ने सीधे तौर पर पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि अगर पुलिस ने हिमांशु और प्रत्युष को रोक कर नहीं रखा होता तो यह हत्या नहीं होती।
शंभू नाथ सिंह, केंद्रीय अध्यक्ष, झारखंड क्षत्रिय संघ
ज्ञात हो कि जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाना क्षेत्र स्थित डीडी बार के समीप 27 जून की रात हिमांशु सिंह और प्रत्युष पर विश्वनाथ मंडल उर्फ बोदरा और उसके साथियों ने जानलेवा हमला किया था। जिसमें गंभीर रूप से घायल हिमांशु सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। और इस घटना ने पुलिस की कार्यशैली पर एक सवालिया निशान छोड़ दिया था। साथ ही कांड के मुख्य आरोपी विश्वनाथ मंडल उर्फ बोदरा ने 9 जुलाई को न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण कर कियाथा।
वहीं इस मामले पर झारखंड क्षत्रिय संघ के केंद्रीय अध्यक्ष शंभूनाथ सिंह ने सीधे तौर पर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाया है। अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इस मामले में सीधे तौर पर पुलिस दोषी है और पुलिस पर मुकदमा होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमने डीडी बार के अंदर और बाहर लगे सीसीटीवी फुटेज को भी देखा है जिसमें यह साफ दिखाई देता है कि हिमांशु और प्रत्यूष के साथ और भी पांच लोग थे और वह पांच लोग डीडी बार में हाथापाई होने के बाद वहां से निकल गए थे जिसके बाद हिमांशु और प्रत्यूष भी निकलने के लिए अपनी गाड़ी स्टार्ट कर रहे थे इतने में ही पुलिस ने आकर उन दोनों को रोक लिया और 20 से 25 मिनट अपनी वैन के पास खड़ा रखा। और इतने में ही 8 से 10 की संख्या में अपराधियों ने वैन के पास आकर प्रत्युष और हिमांशु पर जानलेवा हमला कर दिया जिसमें कि प्रत्युष नीचे सड़क पर ही गिर गया लेकिन हिमांशु अपनी जान बचाने के लिए पुलिस की वैन में जाकर छुप गया लेकिन अपराधियों ने हिमांशु पर वैन के अंदर ही हमला कर दिया फिर हिमांशु को वैन से बाहर निकाल कर मारने लगे जिसमें कि वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
उन्होंने आगे कहा कि घायल होने के बावजूद अस्पताल ले जाने की जगह लगभग 40 मिनट तक पुलिस ने उन्हें वहीं छोड़ दिया जिसके बाद हिमांशु और प्रत्युष के पांच दोस्त वापस लौट कर आए और दोस्तों ने ही मिलकर एक को स्कॉर्पियो में और एक को टेंपो के सहारे अस्पताल पहुंचाया।
उन्होंने कहा कि झारखंड क्षत्रिय संघ का मानना है कि पुलिस अभिरक्षा में हत्या हुई है इसमें पूरी तरह से पुलिस दोषी है। और इसमें पुलिस पर मुकदमा होना चाहिए पुलिस अगर रोकती नहीं तो हत्या होती नहीं। अगर पुलिस हवाई फायरिंग करती या फिर अपराधियों के सामने सिर्फ बंदूक तान भी देती तो भी यह हत्या टल जाती लेकिन पुलिस ने ना तो हवाई फायरिंग की ना ही रिवाल्वर निकालने का प्रयास किया। पुलिस ने अगर हिमांशु और प्रत्युष को अपनी अभिरक्षा में रखा था तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह से पुलिस की थी जिसमें पुलिस पूरी तरह से विफल हो गई।पुलिस अगर सतर्कता से अपने कर्तव्यों का निर्वाह करती तो यह हत्या नहीं होती।
उन्होंने पुलिस के कार्यशैली पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि शहर में जितने भी पीसीआर वैन घूम रही है उनका एकमात्र का काम होता है पैसे की उगाही करना इसके अलावा पुलिस कोई काम नहीं करती है। पब्लिक को प्रोटेक्शन देने का काम पुलिस से बिल्कुल भी नहीं होता है। साथ ही कहा कि घटना के वक्त पेट्रोलिंग गाड़ी में जितने भी पुलिस कर्मियों की तैनाती थी उन पर अगर हत्या का मुकदमा नहीं होता है तो पुलिस की कार्यशैली में कभी बदलाव नहीं आ सकता।
आगे मीडिया को जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि विगत 6 महीने का डाटा हमने दिया था जिसमें कि 3000 चापड़ की घटना हुई है हजारों चैन चिंताई की घटना हो चुकी है लोग घर से निकलना बंद कर चुके हैं औरतें गहना पहन कर बाहर निकालना पसंद नहीं कर रही हैं।
आपको बताते चलें की उक्त हत्याकांड के घटित होने के बाद जमशेदपुर क्षेत्र में बंदी का आवाहन किया गया था जिस पर केंद्रीय अध्यक्ष शंभूनाथ सिंह ने कहा कि उक्त बंदी के क्रम में हमने पूरे पश्चिम क्षेत्र का भ्रमण किया पूर्वी क्षेत्र में भी हमारे लोगों ने भ्रमण किया लेकिन किसी जगह पर किसी को भी बंद करने को नहीं कहना पड़ा सभी लोगों ने अपनी शुभेच्छा से बंद रखा बंदी का समर्थन किया तो आप समझ सकते हैं कि लोगों में हत्या की घटना को लेकर कितना आक्रोश है और प्रशासन के प्रति कितनी नाराजगी है।
आखिर में उन्होंने मीडिया के माध्यम से इस मामले पर सीबीआई जांच की माग की है।
राज्यसभा सांसद प्रदीप वर्मा से मिले डिप्टी मेयर अंकुर सिंह, लिया आशीर्वाद।
सरायकेला/आदित्यपुर
( सोनू कुमार सिंह )
आदित्यपुर नगर निगम के डिप्टी मेयर अंकुर सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद प्रदीप वर्मा से राजधानी रांची स्थित उनके आवास पर शिष्टाचार मुलाकात की।
इस दौरान अंकुर सिंह ने सांसद प्रदीप वर्मा से आशीर्वाद प्राप्त किया और विभिन्न समसामयिक विषयों पर यह मुलाकात सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। अंकुर सिंह ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए इसे शिष्टाचार भेंट बताया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेतृत्व का मार्गदर्शन और आशीर्वाद उन्हें जनसेवा के कार्यों में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
सोशल मीडिया पर साझा की गई इस मुलाकात की तस्वीर और जानकारी को भाजपा कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों द्वारा भी सराहा जा रहा है।
आदरडीह एसएम स्टील परियोजना को लेकर विवाद बरकरार, ठीकेदारी विवाद का समझौता, फिर भी ग्रामीणों का विरोध तेज।
सरायकेला/चांडिल
सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह प्रखंड के आदरडीह, गौरडीह, रघुनाथपुर, सांगिड़ा, नीमडीह, केतूंगा सहित आसपास के मौजा में प्रस्तावित एसएम स्टील एंड पावर लिमिटेड परियोजना शुरू से ही विवादों में घिरी रही है। दो दिन पहले कंपनी में ठीकेदारी को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हुआ था, जिसका पटाक्षेप रविवार 12 जुलाई को नीमडीह थाना में आपसी समझौते के साथ हो गया। लेकिन विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ। सोमवार को ग्रामीणों का एक पक्ष कंपनी गेट के पास धरने पर बैठ गया। बाद में ग्रामीण, कंपनी प्रबंधन एवं जमीन अधिग्रहण के बिचौलिया के साथ वार्ता के बाद धरना वापस ले लिया गया। हालांकि इसी बीच जमीन अधिग्रहण को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश की आग अंदर ही अंदर सुलग रहा है, जो कभी भी ज्वालामुखी बन सकता है।
छह महीने पूर्व नीमडीह प्रखंड के गौरडीह पंचायत भवन में आयोजित ग्रामसभा में माहौल पूरी तरह विरोध के रंग में दिखाई दिया। ग्रामसभा शुरू होते ही उन्होंने कहा कि ‘हम अपनी जमीन किसी कीमत पर नहीं देंगे।’ इसके बाद पूरे पंचायत भवन में विरोध के स्वर तेज हो गए।
सभा में नीमडीह, गौरडीह, रघुनाथपुर, सांगिड़ा, केतूंगा और सुंडीदीह मौजा के ग्रामीणों ने एक स्वर में घोषणा की कि वे प्रस्तावित एसएम स्टील एंड पावर लिमिटेड की स्थापना किसी भी कीमत पर नहीं होने देंगे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जमीन अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया विवादों से घिरी हुई है। उनका दावा है कि बहु संख्यक जमीन मालिकों ने अपनी सहमति नहीं दी, फिर भी कागजों में सहमति दिखाकर जमीन की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि दलालों ने 44 हजार रुपये प्रति डिसमिल की दर वाली जमीन को मात्र 11 हजार रुपये प्रति डिसमिल दिखाकर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की है। कई किसानों को अब तक मुआवजा भी नहीं मिला है।
सूत्रों के अनुसार, जमीन अधिग्रहण को लेकर क्षेत्र में लंबेसमय से गहरा विवाद बना हुआ है। ग्रामीणों के भीतर नाराजगी लगातार सुलग रही है, जो यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो कभी भी बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकती है। लोगों का कहना है कि उनके लिए जमीन सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि उनकी पहचान और अस्मिता है। ग्रामीणों ने एक बार फिर दोहराने लगा कि उनका संघर्ष केवल एक कंपनी के खिलाफ नहीं, बल्कि अपनी जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए है।