भारत की कूटनीतिक उड़ान बनाम पश्चिम एशिया का युद्ध: वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए अवसर, जोखिम और नई दिशा -समग्र व्यापक विश्लेषण।

भारत की कूटनीतिक उड़ान बनाम पश्चिम एशिया का युद्ध: वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए अवसर, जोखिम और नई दिशा -समग्र व्यापक विश्लेषण।

इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की सफ़ल त्रि-राष्ट्र यात्रा तथा ईरान -अमेरिका संघर्ष के बीच भारत की आर्थिक रणनीति।

विश्व अर्थव्यवस्था एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां एक तरफ युद्ध से उत्पन्न जोखिम हैं, तो दूसरी ओर भारत के लिए नए आर्थिक अवसर भी तेजी से उभर रहे हैं।

गोंदिया/महाराष्ट्र।

वैश्विक स्तरपर भारतीय विदेश नीति,वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों के दृष्टिकोण से 11 जुलाई 2026 एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन के रूप में दर्ज किया जाएगा। एक ओर भारतीय प्रधानमंत्री की छह दिवसीय इंडोनेशिया,ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड यात्रा 6 से 11 जुलाई 2026 छह दिवसीय यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हुई,जिसमें अनेक रणनीतिक समझौते,निवेश साझेदारियां, रक्षा सहयोग,क्रिटिकल मिनरल्स, मुक्त व्यापार और तकनीकी सहयोग से जुड़े एमओयू हुए।दूसरी ओर,पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच समझौता टूटने के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य हमले तेज होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार,समुद्री व्यापार, निवेशकों की धारणा और अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई।इन दोनों घटनाओं को यदि एक साथ देखा जाए तो स्पष्ट होता है कि विश्व अर्थव्यवस्था एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां एक तरफ युद्ध से उत्पन्न जोखिम हैं तो दूसरी ओर भारत के लिए नए आर्थिक अवसर भी तेजी से उभर रहे हैं।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र वित्तीय दृष्टिकोण से बताना चाहूंगा कि भारतीय पीएम की इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड यात्रा केवल एक राजनयिक दौरा नहीं थी बल्कि यह भारत की दीर्घकालिक आर्थिक और रणनीतिक नीति का महत्वपूर्ण विस्तार थी। इंडोनेशिया के साथ रक्षा उत्पादन,समुद्री सुरक्षा तथा लगभग 5,400 करोड़ रूपए के रक्षा सहयोग,ऑस्ट्रेलिया के साथ क्रिटिकल मिनरल्स, लिथियम, दुर्लभ खनिज, शिक्षा,ऊर्जा तथा सेमीकंडक्टर सहयोग और न्यूजीलैंड के साथ ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते ने यह संकेत दिया कि भारत केवल व्यापार नहीं बढ़ाना चाहता बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में एक निर्णायक भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इससे भारत के विनिर्माण,निर्यात,रक्षा उत्पादन, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी और हाई-टेक उद्योगों को सटीकता से नई गति मिलने की संभावना है।

साथियों भारतीय शेयर बाजार के दृष्टिकोण से देखें तो इन समझौतों का सबसे अधिक लाभ रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स सेमीकंडक्टर,खनन,नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, पोर्ट, जहाजरानी और निर्यात आधारित कंपनियों को मिलने की संभावना है। निवेशकों की सोच सामान्यतः भविष्य की संभावनाओं पर आधारित होती है।जब किसी देश के साथ दीर्घकालिक व्यापारिक समझौते होते हैं,तब विदेशी निवेशकों का विश्वास मजबूत होता है।यही कारण है कि ऐसे कूटनीतिक समझौते अक्सर बाजार को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करते हैं,भले ही अल्पकाल में वैश्विक घटनाओं के कारण सटीकता से उतार- चढ़ाव बना रहे।

साथियों, न्यूजीलैंड के साथ रिकॉर्ड समय में संपन्न मुक्त व्यापार समझौता,40 साल का सूखा खत्म! 35000 करोड़ का होगा ट्रेड, समझौते हुए?- भारत -न्यूजीलैंड ने तैयार किया विजन 2030, भारतीय कृषि,डेयरी, फार्मास्यूटिकल्स,आईटी सेवाओं वस्त्र उद्योग,खाद्य प्रसंस्करण तथा इंजीनियरिंग उत्पादों के लिए नए अवसर लेकर आया है। यदि दोनों देशों के बीच व्यापार 2030 तक दोगुना होता है तो भारत के निर्यातकों, बंदरगाहों, कंटेनर लॉजिस्टिक्स बैंकिंग और बीमा क्षेत्र को भी अप्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा। इससे भारतीय रुपये की स्थिरता और विदेशी मुद्रा भंडार पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

साथियों, ऑस्ट्रेलिया के साथ क्रिटिकल मिनरल्स साझेदारी भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि भविष्य की अर्थव्यवस्था इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स,सौर ऊर्जा,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर उद्योग पर आधारित होगी। लिथियम, कोबाल्ट तथा अन्य दुर्लभ खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति भारत को चीन पर निर्भरता कम करने का अवसर देती है। इससे मेक इन इंडिया,आत्मनिर्भर भारत और उच्च मूल्य विनिर्माण को नई गति मिलने की संभावना है।इंडोनेशिया के साथ रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा समझौते हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की सामरिक स्थिति को मजबूत करते हैं। ब्रह्मोस जैसे रक्षा निर्यात भारतीय रक्षा उद्योग के लिए वैश्विक बाजार खोल सकते हैं। रक्षा निर्यात में वृद्धि का सीधा लाभ सार्वजनिक और निजी दोनों रक्षा कंपनियों, अनुसंधान संस्थानों और सहायक उद्योगों को मिलेगा। इससे रोजगार, उत्पादन और निर्यात आय में सटीकता से वृद्धि होगी।

साथियों, इन सकारात्मक संकेतों के बीच पश्चिम एशिया से आने वाली खबरें वैश्विक बाजारों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। ईरान और अमेरिका के बीच समझौता टूटने तथा दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक निवेशकों को जोखिम से बचने की रणनीति अपनाने के लिए प्रेरित किया है। जब भी विश्व में युद्ध या बड़े भू- राजनीतिक तनाव उत्पन्न होते हैं, तब निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों जैसे सोना, अमेरिकी डॉलर और सरकारी बॉन्ड की ओर रुख करते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि उभरते बाजारों से विदेशी निवेश का अस्थायी बहिर्वाह शुरू हो सकता है।भारत अपनी कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है।यदि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव बना रहता है और तेल आपूर्ति प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची रह सकती हैं। इससे भारत का आयात बिल बढ़ेगा, चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव आ सकता है तथा घरेलू महंगाई में वृद्धि की आशंका बनेगी। पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, उर्वरक, प्लास्टिक, रसायन तथा परिवहन लागत बढ़ने से लगभग हर क्षेत्र प्रभावित हो सकता है।भारतीय शेयर बाजार में ऐसे समय सबसे अधिक दबाव विमानन, ऑटोमोबाइल, पेंट, टायर, सीमेंट, रसायन और उपभोक्ता वस्तु क्षेत्रों पर दिखाई देता है क्योंकि इनकी उत्पादन लागत ऊर्जा पर काफी निर्भर करती है। दूसरी ओर तेल एवं गैस उत्पादन,रक्षा, ऊर्जा अवसंरचना तथा कुछ कमोडिटी आधारित कंपनियों को अपेक्षाकृत लाभ मिल सकता है।यही कारण है कि युद्धकालीन परिस्थितियों में सेक्टर रोटेशन तेजी से देखने को मिलता है।

साथियों, अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में भी यही प्रवृत्ति दिखाई देती है। अमेरिका, यूरोप और एशिया के प्रमुख बाजार युद्ध संबंधी समाचारों पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं। यदि संघर्ष लंबा चलता है तो वैश्विक विकास दर प्रभावित हो सकती है, समुद्री मालभाड़ा बढ़ सकता है, बीमा लागत बढ़ सकती है और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव आ सकता है। इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लाभ पर असर पड़ सकता है।हालांकि भारत के लिए एक महत्वपूर्ण सकारात्मक पक्ष यह भी है कि विश्व की अनेक कंपनियां अब अपनी आपूर्ति श्रृंखला का विविधीकरण करना चाहती हैं। चीन-प्लस-वन रणनीति, हिंद- प्रशांत साझेदारी और भारत के साथ बढ़ते व्यापारिक समझौते भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने का अवसर प्रदान कर रहे हैं।यदि भारत समय पर अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स श्रम सुधार और उत्पादन क्षमता को मजबूत करता है तो वह युद्ध से उत्पन्न वैश्विक पुनर्संतुलन का वास्तव में बहुत बड़ा लाभ उठा सकता है।

साथियों, विदेशी संस्थागत निवेशकों की दृष्टि से भारत आज भी सबसे आकर्षक उभरती अर्थव्यवस्थाओं में गिना जा रहा है। मजबूत घरेलू मांग, डिजिटल अर्थव्यवस्था युवा कार्यबल, तेज बुनियादी ढांचा विकास, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाएं और स्थिर वित्तीय प्रणाली भारत को अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश गंतव्य बनाती हैं। यही कारण है कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद दीर्घकालिक निवेशकों का विश्वास बना रह सकता है।भारतीय रिजर्व बैंक और केंद्र सरकार के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती महंगाई नियंत्रण और विकास दर के बीच संतुलन बनाए रखने की होगी। यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो मौद्रिक नीति, राजकोषीय प्रबंधन और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ेगी। साथ ही रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार, ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा और घरेलू गैस उत्पादन का महत्व और बढ़ जाएगा।

साथियों, विश्व अर्थव्यवस्था के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखें तो वर्तमान समय दो विपरीत धाराओं का संगम है। पहली धारा युद्ध, ऊर्जा संकट,महंगाई और अनिश्चितता की है।दूसरी धारा तकनीकी निवेश,हरित ऊर्जा,डिजिटल परिवर्तन,रक्षा आधुनिकीकरण और नए व्यापारिक गठबंधनों की है। भारत की त्रि-राष्ट्र यात्रा दूसरी धारा का प्रतिनिधित्व करती है,जबकि ईरान-अमेरिका संघर्षपहली धारा का। आने वाले वर्षों में जो देश इन दोनों चुनौतियों के बीच संतुलन स्थापित कर पाएंगे, वही वैश्विक आर्थिक नेतृत्व की दौड़ में आगे रहेंगे।
साथियों, भारत के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि वह आज केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार नहीं बल्कि एक विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार, रक्षा सहयोगी,तकनीकी भागीदार और विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती भूमिका, मुक्त व्यापार समझौते,रक्षा निर्यात, क्रिटिकल मिनरल्स साझेदारी और वैश्विक निवेश आकर्षित करने की क्षमता भारत को आने वाले दशक में विश्व अर्थव्यवस्था के प्रमुख विकास इंजन के रूप में सटीकता से स्थापित कर सकती है।

साथियों,11 जुलाई 2026 शाम हुई भारतीय पीएम के त्रि-राष्ट्रीय छह दिवसीय दौरे में भारत- न्यूजीलैंड का विजन 2030 दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत जैसा है, जिसका भारतीय अर्थव्यवस्था व शेयर बाजारों मैं दूरगामी सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकता है।40 साल बाद हुई इस पहल से उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच व्यापार और सहयोग नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा, भारत और न्यूजीलैंड के रिश्तों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. करीब 40 साल बाद न्यूजीलैंड के किसी प्रधानमंत्री की भारत यात्रा और दोनों देशों के बीच हुई अहम बातचीत ने व्यापारिक रिश्तों के लिए नए रास्ता खोल दिए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने मिलकर ‘विजन 2030’ का रोडमैप तैयार किया है, जिसका मकसद दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना है. दोनों देशों की कोशिश है कि आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को करीब 35,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाया जाए.भारत और न्यूजीलैंड के बीच लंबे समय से अच्छे कूटनीतिक संबंध रहे हैं, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर दोनों देशों के बीच व्यापार की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ पाई थी. अब दोनों देशों ने इस अंतर को कम करने के लिए विजन 2030 तैयार किया है. ट्रेड डील लागू होने के बाद पहले दिन से ही न्यूजीलैंड के 57 प्रतिशत निर्यात को भारत में बिना टैरिफ के एंट्री मिलेगी. इससे न्यूजीलैंड के कृषि, फूड प्रोसेसिंग, डेयरी के सामान को भारतीय बाजार में पहुंच बनाने में मदद मिलेगी. वहीं, भारत को भी न्यूजीलैंड के बाजार में अपने उत्पादों के लिए बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है. इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार के नए रास्ते खुलेंगे।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि भारतीय पीएम की इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड यात्रा भारत की आर्थिक कूटनीति को नई ऊंचाई देने वाली सिद्ध हो सकती है,जबकि ईरान- अमेरिका संघर्ष विश्व अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर जोखिम प्रस्तुत करता है। अल्पकाल में शेयर बाजारों में अस्थिरता,महंगाई और ऊर्जा लागत का दबाव बना रह सकता है,किंतु यदि भारत अपने सुधारों,व्यापारिक साझेदारियों, ऊर्जा सुरक्षा और निवेश वातावरण को मजबूत बनाए रखता है, तो वह इस वैश्विक संकट को भी अवसर में बदल सकता है।यही कारण है कि आज भारत के सामने चुनौती जितनी बड़ी है, संभावना उससे कहीं अधिक व्यापक है। आने वाले वर्षों में भारतीय शेयर बाजार, भारतीय उद्योग और भारतीय अर्थव्यवस्था का भविष्य केवल घरेलू नीतियों पर नहीं बल्कि भारत की सक्रिय वैश्विक कूटनीति, रणनीतिक साझेदारियों और बदलते विश्व आर्थिक संतुलन को अवसर में बदलने की क्षमता पर भी निर्भर करेगा।

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को तंबाकू के दुष्प्रभावों एवं मुख स्वास्थ्य के प्रति किया गया जागरूक।

राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को तंबाकू के दुष्प्रभावों एवं मुख स्वास्थ्य के प्रति किया गया जागरूक।

“जिंदगी चुनें, तंबाकू नहीं।”

सरायकेला-खरसावां

राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम एवं राष्ट्रीय मुख स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत शुक्रवार को राजनगर स्थित एस.एस. प्लस-2 उच्च विद्यालय में जागरूकता एवं मुख स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को तंबाकू सेवन के दुष्प्रभाव, सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA), 2003, झारखंड संशोधित अधिनियम, 2021, तंबाकू मुक्ति केंद्र तथा तंबाकू सेवन से होने वाली स्वास्थ्य संबंधी हानियों की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही विद्यार्थियों को तंबाकू सेवन नहीं करने की शपथ दिलाई गई।

जागरूकता कार्यक्रम को रोचक एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसके उपरांत कक्षा 11 के लगभग 200 विद्यार्थियों का मुख स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। जांच के दौरान अधिकांश विद्यार्थियों का मुख स्वास्थ्य सामान्य पाया गया तथा केवल चार से पांच विद्यार्थियों में उपचार की आवश्यकता चिन्हित की गई। जांच में किसी भी विद्यार्थी द्वारा खैनी, गुटखा अथवा अन्य तंबाकू उत्पादों के सेवन के प्रमाण नहीं पाए गए।

कार्यक्रम के क्रम में राजनगर क्षेत्र की लगभग 25 से 30 दुकानों का निरीक्षण कर दुकानदारों को COTPA अधिनियम, 2003 एवं झारखंड संशोधित अधिनियम, 2021 के प्रावधानों की जानकारी दी गई। सभी दुकानदारों से अधिनियम का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया। साथ ही उपायुक्त, सरायकेला-खरसावाँ के निर्देशानुसार विद्यालयों के 100 मीटर की परिधि में स्थित तंबाकू उत्पादों की बिक्री करने वाली दुकानों को पांच दिनों के भीतर हटाने के निर्देश दिए गए। निर्धारित अवधि के बाद भी अनुपालन नहीं होने की स्थिति में पुलिस के सहयोग से विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने वालों के विरुद्ध अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार स्पॉट फाइन एवं अन्य आवश्यक कार्रवाई करने की भी जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में सदर अस्पताल, सरायकेला के दंत विभाग की वरिष्ठ दंत शल्य चिकित्सक डॉ. कामिनी लता, दंत स्वास्थ्य विशेषज्ञ राजू कुमार पासवान तथा परामर्शी अशोक यादव उपस्थित रहे।

इस अवसर पर बताया गया कि गुटखा, पान मसाला, खैनी एवं अन्य तंबाकू उत्पादों के सेवन तथा मुख की समुचित साफ-सफाई नहीं रखने से मुख कैंसर सहित अनेक गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। राष्ट्रीय गैर संचारी रोग (एनसीडी) कार्यक्रम के तहत जिला स्तर पर समय-समय पर विभिन्न जागरूकता गतिविधियों का आयोजन कर आमजन को तंबाकू मुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सभी नागरिकों से तंबाकू एवं अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहने तथा दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की गई, ताकि गंभीर बीमारियों, विशेषकर मुख कैंसर, से बचाव सुनिश्चित किया जा सके।

एफ़एसएस एआई क़ा चला बड़ा डंडा एक्शन पार्ट-2-भ्रामक फ़ूड लेबलिंग पर कसता शिकंजा: क्या फ्रेश,प्योर,नेचुरल हेल्दी और ज़ीरो शुगर के दावों का युग अब समाप्त होने जा रहा है? -समग्र व्यापक विश्लेषण

एफ़एसएस एआई क़ा चला बड़ा डंडा एक्शन पार्ट-2-भ्रामक फ़ूड लेबलिंग पर कसता शिकंजा: क्या फ्रेश,प्योर,नेचुरल हेल्दी और ज़ीरो शुगर के दावों का युग अब समाप्त होने जा रहा है? -समग्र व्यापक विश्लेषण

6 जुलाई की कार्रवाई के ठीक दो दिन बाद, 8 जुलाई 2026 को एफ़एसएसएआई क़ा बड़ा एक्शन पार्ट-2

स्वस्थ भारत क़े निर्माण हेतु कठोर कानूनों क़े साथ सरकार की सतर्कता,नियामक संस्थाओं की निष्पक्षता, उद्योग जगत की ईमानदारी और सबसे बढ़कर जागरूक उपभोक्ता की सक्रिय भागीदारी ज़रूरी -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी।

गोंदिया/महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर आज का उपभोक्ता केवलभोजन नहीं खरीदता,बल्कि स्वास्थ्य विश्वास और जीवनशैली भी खरीदता है।यही कारण है कि खाद्य उद्योग ने अपने उत्पादों पर फ्रेश,हेल्दी,प्योर,नेचुरल,100 प्रतिशत आर्गेनिक,ज़ीरो शुगर,नों एडेड शुगर, इम्युनिटी बूस्टर और होलसमथिंग जैसे आकर्षक शब्दों का व्यापक उपयोग शुरू कर दिया है। एफ़एसएस एआई ने भ्रामक विज्ञापनों और गलत लेबलिंग के खिलाफ अपने देशव्यापी अभियान का विस्तार कर दिया है। 6 जुलाई की कार्रवाई के ठीक दो दिन बाद,यानी 8 जुलाई 2026 को एफ़एसएस एआई ने बड़ा एक्शन पार्ट-2 लिया है।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और इंस्टाग्राम पर आधिकारिक घोषणा करते हुए देश के तीन अन्य बड़े ब्रांडों को कारण बताओ (शो-कॉज ) नोटिस जारी किया है।इन शब्दों का मनोवैज्ञानिक प्रभाव इतना गहरा होता है कि अधिकांश ग्राहक पैकेट के सामने लिखे दावों को ही अंतिम सत्य मान लेते हैं और पीछे दिए गए वास्तविक तथ्यों को पढ़ने की आवश्यकता भी नहीं समझते।परिणाम स्वरूप,उपभोक्ता कई बार ऐसे उत्पाद खरीद लेते हैं जो वास्तव में उतने स्वास्थ्य वर्धक नहीं होते जितना उनका प्रचार किया जाता है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी,गोंदिया,महाराष्ट्र अधिवक्ता होने के नाते आम जनता को यह जानकारी देना चाहूंगा कि अब भारत में इस प्रवृत्ति पर निर्णायक कार्रवाई की शुरुआत दिखाई दे रही है।भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफ़एसएस एआई ) ने कई कंपनियों को उनके भ्रामक दावों के संबंध में नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। यह केवल कुछ कंपनियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे खाद्य उद्योग के लिए स्पष्ट संदेश है कि अब बिना वैज्ञानिक प्रमाण के किए गए स्वास्थ्य संबंधी दावों को सटीकता से स्वीकार नहीं किया जाएगा।

साथियों, भारत में खाद्य सुरक्षा का पूरा कानूनी ढांचाखाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 पर आधारित है, जिसने पहले से लागू अनेक अलग- अलग खाद्यकानूनों को एकीकृत कर आधुनिक और वैज्ञानिक व्यवस्था प्रदान की। इस अधिनियम की धारा 24 विशेष रूप से भ्रामक विज्ञापनों और गलत दावों पर रोक लगाती है। कोई भी निर्माता, विक्रेता या कंपनी ऐसा विज्ञापन प्रकाशित नहीं कर सकती जो उत्पाद की गुणवत्ता,प्रकृति,संरचना या स्वास्थ्य संबंधी लाभों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करे अथवा उपभोक्ता को भ्रमित करे। यही कारण है कि यदि कोई कंपनी 100 प्रतिशत प्राकृतिक या पूर्णतः शुद्ध लिखती है तो उसे यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध करना होगा कि उसका दावा वस्तुतः सही है।इसी उद्देश्य से एफएसएसएआई (विज्ञापन एवं दावे) विनियम, 2018 लागू किए गए। इन विनियमों ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक स्वास्थ्य दावा, पोषण दावा अथवा गुणवत्ता संबंधी दावा वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित होना चाहिए। विशेष रूप से अनुसूची-5 में नेचुरल, फ्रेश,प्योर,ओरिजिनल तथा ट्रेडिशनल जैसे शब्दों के उपयोग के लिए अत्यंत कठोर मानदंड निर्धारित किए गए हैं। इन मानकों के अनुसार अधिकांश प्रसंस्कृत (प्रोसेसड) खाद्य पदार्थ वास्तव में नेचुरल अथवा फ्रेश कहलाने की पात्रता ही नहीं रखते। अर्थात केवल विपणन (मार्केटिंग) के उद्देश्य से इन शब्दों का उपयोग करना कानून का उल्लंघन माना जा सकता है।

साथियों,आज सबसे अधिक भ्रम ज़ीरो शुगर और नों एडेड शुगर जैसे शब्दों को लेकर है। सामान्य उपभोक्ता दोनों को समान समझता है,जबकि वैज्ञानिक दृष्टि से दोनों का अर्थ अलग-अलग है। नों एडेड शुगर का अर्थ केवल इतना है कि निर्माण प्रक्रिया के दौरान अतिरिक्त चीनी नहीं मिलाई गई। इसका अर्थ यह नहीं कि उत्पाद में प्राकृतिक शर्करा या अन्य प्रकार की शर्करा मौजूद नहीं है। कई कंपनियां सुक्रोज,माल्टोडेक्सट्रिन, हाई- फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप,डेक्सट्रोज, इनवर्ट शुगर,कॉन्सन्ट्रेटेड फ्रूट जूस अथवा अन्य कार्बोहाइड्रेट स्रोतों का उपयोग करती हैं, जो शरीर में जाकर अंततः ग्लूकोज में परिवर्तित होते हैं। इसलिए केवल पैकेट के सामने लिखे आकर्षक दावे पर विश्वास करना उपभोक्ता के लिए सटीकता से जोखिमपूर्ण हो सकता है।
साथियों भारतीय कानून केवल खाद्य सुरक्षा तक सीमित नहीं है।उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के अंतर्गत गठित केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण को भी भ्रामक विज्ञापनों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई का अधिकार प्राप्त है। यह संस्था स्वतः संज्ञान लेकर कंपनियों पर भारी आर्थिक दंड लगा सकती है, विज्ञापन वापस लेने का आदेश दे सकती है तथा आवश्यक होने पर ऐसे प्रचार में शामिल प्रसिद्ध व्यक्तियों पर भी प्रतिबंध लगा सकती है। इस प्रकार एफएसएसएआई और सीसीपीए मिलकर उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और आर्थिक हितों की दोहरी सुरक्षा प्रदान करते हैं।भारत की संघीय व्यवस्था में कानून केंद्र बनाता है,किंतु उसका वास्तविक क्रियान्वयन राज्यों द्वारा किया जाता है। प्रत्येक राज्य में खाद्य सुरक्षा आयुक्त नियुक्त होते हैं, जिनके अधीन नामित अधिकारी और खाद्य सुरक्षा अधिकारी कार्य करते हैं।यहीअधिकारी खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करते हैं,नमूने लेते हैं,प्रयोगशाला परीक्षण कराते हैं, उल्लंघन पाए जाने पर उत्पाद जब्त करते हैं तथा न्यायालयों में अभियोजन चलाते हैं। यदि किसी कंपनी का उत्तर असंतोषजनक पाया जाता है तो उसका लाइसेंस निलंबित या रद्द भी किया जा सकता है। इस प्रकार केंद्रीय नियमों का वास्तविक प्रभाव राज्य स्तर के प्रभावी प्रवर्तन पर निर्भर करता है।

साथियों, वर्तमान कार्रवाई केवल कुछ कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय खाद्य उद्योग के लिए एक व्यापक चेतावनी है कि भविष्य में बिना वैज्ञानिक आधार के किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य संबंधी दावे स्वीकार नहीं किए जाएंगे।यदि किसी उत्पाद कोइम्युनिटी बूस्टर, हार्ट हेल्दी,डायबिटिक फ्रेंडली अथवा पूर्णतः प्राकृतिक कहा जाता है, तो निर्माता को उसके समर्थन में वैज्ञानिक अनुसंधान, परीक्षण तथा प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे। केवल विपणन की भाषा अब पर्याप्त नहीं होगी।उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि वे सही उत्पाद की पहचान कैसे करें। किसी भी पैकेज्ड खाद्य पदार्थ को खरीदते समय केवल सामने लिखे दावों पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। सबसे पहले पीछे दी गई इंग्रेडिट्स लिस्ट को पढ़ना चाहिए। कानून के अनुसार सामग्री घटते क्रम में लिखी जाती है। यदि किसी तथाकथित हेल्दी बिस्कुट में सबसे पहले मैदा और दूसरे स्थान पर चीनी लिखी है, तो इसका अर्थ स्पष्ट है कि वही उसकी प्रमुख सामग्री है।इसी प्रकार पोषण संबंधी तालिका में प्रति 100 ग्राम चीनी, सोडियम, संतृप्त वसा और ऊर्जा की मात्रा देखनी चाहिए। कंपनियां कई बार बहुत छोटे सर्विग साइज का उपयोग करके वास्तविक मात्रा कम दिखाई देती हैं।इसलिए प्रति 100 ग्राम का कॉलम ही सही तुलना का सटीक आधार होता है।
साथियों, प्रत्येक उपभोक्ता को उत्पाद पर अंकित 14 अंकों का एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर अवश्य देखना चाहिए। यही नंबर बताता है कि उत्पाद अधिकृत इकाई द्वारा निर्मित है। आवश्यकता पड़ने पर इस लाइसेंस नंबर का सत्यापन भी किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त निर्माण तिथि समाप्ति तिथि,शाकाहारी अथवा मांसाहारी चिह्न एलर्जी संबंधी चेतावनी तथा भंडारण संबंधी निर्देशों को भी गंभीरता से पढ़ना चाहिए।

साथियों, भारत ने भी अपने नियमों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया है। हालांकि अभी भी एक महत्वपूर्ण सुधार शेष है,फ्रंट- ऑफ-पैक लेबलिंग अनेक विशेषज्ञ वर्षों से सुझाव दे रहे हैं कि जिन खाद्य पदार्थों में अत्यधिक चीनी, नमक या संतृप्त वसा हो, उनके पैकेट के सामने ही स्पष्ट चेतावनी अंकित की जाए। इससे उपभोक्ता बिना पूरा पैकेट पढ़े भी जोखिम का प्रारंभिक आकलन कर सकेगा। विश्व के अनेक देशों में ऐसी प्रणाली सफल सिद्ध हुई है और भारत में भी इसे शीघ्र लागू करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।वर्तमान समय में खाद्य उद्योग केवल स्वाद नहीं बेच रहा, बल्कि स्वास्थ्य की छवि भी बेच रहा है। उपभोक्ता का मनोविज्ञान इस प्रकार प्रभावित किया जाता है कि वह चमकीले रंग, आकर्षक पैकेजिंग और स्वास्थ्य संबंधी दावों के आधार पर निर्णय लेने लगता है। यही कारण है कि आधुनिक उपभोक्ता के लिए वैज्ञानिक जागरूकता उतनी ही आवश्यक है जितनी कानूनी सुरक्षा।यदि उपभोक्ता स्वयं सामग्री सूची,पोषण तालिका और लाइसेंस विवरण पढ़ने की आदत विकसित कर ले, तो भ्रामक विपणन का प्रभाव स्वतःकम हो जाएगा।एफएस एसएआई द्वारा हाल में जारी नोटिस भारतीय खाद्य विनियमन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ का संकेत हैं। इससे स्पष्ट संदेश गया है कि केवल विपणन की भाषा के सहारे उपभोक्ताओं को प्रभावित करने की संस्कृति अब स्वीकार नहीं की जाएगी। यह कदम ईमानदार कंपनियों के लिए भी लाभकारी है, क्योंकि इससे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा और गुणवत्ता आधारित बाजार सटीकता से विकसित होगा।

साथियों, विश्व स्तरपर भी भ्रामक खाद्य लेबलिंग एक गंभीर चिंता का विषय है। संयुक्त राष्ट्र के कोडेक्स एलिमेंटेरिय ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं कि किसी भी खाद्य उत्पाद पर किया गया दावा वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित होना चाहिए तथा उपभोक्ता को भ्रमित नहीं करना चाहिए। यही वैश्विक मानक अधिकांश देशों की नीतियों का आधार है।यूरोपीय संघ ने इस क्षेत्र में विश्व का सबसे कठोर ढांचा विकसित किया है। वहां केवल वही स्वास्थ्य अथवा पोषण संबंधी दावे स्वीकार किए जाते हैं जिन्हें यूरोपीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण द्वारा वैज्ञानिक रूपसेअनुमोदित किया गया हो। नेचुरल, हेल्दी अथवा प्योर जैसे सामान्य दावों का मनमाना उपयोग लगभग असंभव है। यदि दावा स्वीकृत सूची में नहीं है तो उसे पैकेट पर लिखना ही प्रतिबंधित है। इस कारण यूरोपीय उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत अधिक पारदर्शी जानकारी उपलब्ध होती है।संयुक्त राज्य अमेरिका में एफडीए और एफ़टीसी मिलकर इस व्यवस्था का संचालन करते हैं। एफडीए खाद्य लेबलों की वैज्ञानिक सत्यता की जांच करता है, जबकि एफ़टीसी भ्रामक विज्ञापनों पर आर्थिक दंड लगाता है। अनेक स्वास्थ्य संबंधी दावों के साथ यह स्पष्ट करना भी आवश्यक होता है कि संबंधित दावा सरकारी वैज्ञानिक प्रमाणन के अंतर्गत स्वीकृत नहीं है। इससे उपभोक्ता को भ्रमित होने की संभावना कम होती है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि स्वस्थ भारत का निर्माण केवल कठोर कानूनों से संभव नहीं है। इसके लिए सरकार की सतर्कता नियामक संस्थाओं की निष्पक्षता उद्योग जगत की ईमानदारी और सबसे बढ़कर जागरूक उपभोक्ता की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। जब उपभोक्ता पैकेट के सामने लिखे आकर्षक शब्दों के बजाय पीछे छिपे वैज्ञानिक तथ्यों को पढ़ना शुरू करेगा,तभी फ्रेश,प्योर, नेचुरल हेल्दी और ज़ीरो शुगर जैसे शब्द वास्तविक अर्थों में विश्वसनीय बन सकेंगे। यही उपभोक्ता अधिकारों की वास्तविक विजय होगी और यही आधुनिक खाद्य सुरक्षा व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य भी है।

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

“बच्चे मन लगाकर पढ़ें, अनुशासन अपनाएँ और जीवन में आगे बढ़ें, यही झारखंड सरकार की सोच है”:- मनोज कुमार चौधरी

“बच्चे मन लगाकर पढ़ें, अनुशासन अपनाएँ और जीवन में आगे बढ़ें, यही झारखंड सरकार की सोच है”:- मनोज कुमार चौधरी

सरायकेला

राजकीय प्लस टू मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय, सरायकेला में झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी निःशुल्क साइकिल वितरण योजना “उन्नति का पहिया” के अंतर्गत छात्र-छात्राओं के बीच साइकिलों का वितरण किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नगर पंचायत सरायकेला के अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने विद्यार्थियों को साइकिल प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं तथा उन्हें शिक्षा के प्रति समर्पित होकर जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

अपने संबोधन में मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति के जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है। पढ़ाई केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, अनुशासन, संस्कार, आत्मविश्वास और जीवन में सफलता प्राप्त करने का सबसे मजबूत आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यदि वे नियमित रूप से विद्यालय आएँ, अनुशासन का पालन करें और पूरी लगन एवं ईमानदारी से अध्ययन करें, तो निश्चित रूप से अपने परिवार, समाज, जिले और राज्य का नाम रोशन करेंगे।

उन्होंने कहा कि “बच्चे मन लगाकर पढ़ें, यही झारखंड सरकार की सोच है। साइकिल मिलने से विशेष रूप से सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को विद्यालय आने-जाने में सुविधा होगी। समय की बचत होगी, नियमित उपस्थिति बढ़ेगी, पढ़ाई के प्रति रुचि विकसित होगी तथा विद्यालय छोड़ने वाले बच्चों (ड्रॉपआउट) की संख्या में कमी आएगी। यह योजना शिक्षा को और अधिक सुलभ एवं प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।”

मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार ऐतिहासिक पहल कर रही है। राज्य में मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालयों की स्थापना, बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति, विद्यालयों की आधारभूत संरचना का सुदृढ़ीकरण, आधुनिक शिक्षण सुविधाओं का विस्तार तथा छात्र-छात्राओं के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन इस बात का प्रमाण है कि सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा में किया गया निवेश राज्य के भविष्य में किया गया निवेश है। सरकार का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है जहाँ आर्थिक या भौगोलिक कठिनाइयों के कारण कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। निःशुल्क साइकिल वितरण जैसी योजनाएँ विद्यार्थियों को विद्यालय से जोड़ने, बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की पहुँच को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

मनोज कुमार चौधरी ने विद्यार्थियों से साइकिल का सुरक्षित एवं जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने का आग्रह करते हुए कहा कि वे समय का सदुपयोग करें, अपने शिक्षकों का सम्मान करें, अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाएं और अपने सपनों को साकार करने के लिए निरंतर मेहनत करें।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक वासुदेव राम ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए झारखंड सरकार द्वारा संचालित छात्रहितकारी योजनाओं की सराहना की तथा विद्यार्थियों से इन सुविधाओं का लाभ उठाकर बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन करने का आह्वान किया।

विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि बीईईओ कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची के अनुसार विभिन्न मध्य विद्यालयों से आए पात्र विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर साइकिलों का आवंटन किया गया, ताकि सभी पात्र छात्र-छात्राओं को योजना का लाभ मिल सके।

कार्यक्रम में प्रधानाध्यापक वासुदेव राम, शिक्षक-शिक्षिकाएँ, शिक्षा विभाग के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ तथा विद्यार्थियों ने सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई इस सुविधा के लिए प्रसन्नता व्यक्त की।

प्रखंड कार्यालय परिसर, नीमडीह में लर्नर लाइसेंस शिविर आयोजित, 81 अभ्यर्थी हुए सफल।

प्रखंड कार्यालय परिसर, नीमडीह में लर्नर लाइसेंस शिविर आयोजित, 81 अभ्यर्थी हुए सफल।

सरायकेला/नीमडीह

उपायुक्त सह जिला दण्डाधिकारी नितिश कुमार सिंह के निर्देशानुसार जिला परिवहन कार्यालय द्वारा मंगलवार को नीमडीह प्रखंड कार्यालय परिसर में लर्नर लाइसेंस (Learner Licence) हेतु शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का संचालन जिला परिवहन पदाधिकारी अमित कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में मोटरयान निरीक्षक (MVI) सहित जिला परिवहन कार्यालय के पदाधिकारियों एवं कर्मियों की उपस्थिति में किया गया।

शिविर में पूर्व से ऑनलाइन स्लॉट बुक करा चुके आवेदकों की लर्नर लाइसेंस संबंधी प्रक्रिया संपन्न कराई गई। इस दौरान अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन, ऑनलाइन आवेदन की जांच तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप लर्नर लाइसेंस परीक्षा का संचालन किया गया।

शिविर के लिए कुल 130 अभ्यर्थियों ने स्लॉट बुक कराया था। इनमें 81 अभ्यर्थी परीक्षा में सफल हुए, 18 अभ्यर्थी असफल रहे, जबकि 31 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे।

उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन परिवहन विभाग की सेवाओं को आम नागरिकों तक सुगमता एवं पारदर्शिता के साथ प्रखंड स्तर पर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से जिले के सभी प्रखंडों में चरणबद्ध तरीके से लर्नर लाइसेंस शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि आवेदकों को अपने प्रखंड स्तर पर ही समयबद्ध एवं सुविधाजनक सेवाओं का लाभ प्राप्त हो सके।

झामुमो के केंद्रीय महासचिव गुरुचरण बाबू से मिले वरिष्ठ कांग्रेस नेता फूलकांत झा, शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।

झामुमो के केंद्रीय महासचिव गुरुचरण बाबू से मिले वरिष्ठ कांग्रेस नेता फूलकांत झा, शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।

सरायकेला-खरसावां

सरायकेला-खरसावां। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पीडीएस संघ के प्रदेश सचिव और जिला अध्यक्ष फूलकांत झा ने चांडिल स्थित झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के केंद्रीय महासचिव गुरुचरण बाबू के आवास पर पहुंचकर उनका कुशलक्षेम जाना। गुरुचरण बाबू पिछले लगभग 15 दिनों से अस्वस्थ चल रहे हैं।

इस अवसर पर फूलकांत झा ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए कहा कि गुरुचरण बाबू जल्द पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर पुनः आम जनता की सेवा और क्षेत्र के विकास कार्यों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने ईश्वर से उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की प्रार्थना की।

फूलकांत झा ने बताया कि उनके परिवार और गुरुचरण बाबू के परिवार के बीच पिछले लगभग 40 वर्षों से आत्मीय एवं पारिवारिक संबंध रहे हैं। इसी स्नेह और आत्मीयता के कारण वे व्यक्तिगत रूप से उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेने पहुंचे।

इस मौके पर देव प्रकाश देवता, गम्हरिया प्रखंड कांग्रेस के उपाध्यक्ष इंद्रकांत झा तथा मनोहर मंडल भी उपस्थित रहे। सभी ने गुरुचरण बाबू (मामाजी)  के शीघ्र स्वस्थ होकर जनसेवा में पुनः सक्रिय होने की कामना की।

15 वर्षों बाद कुंवर सिंह मैदान रोड नंबर-3 के 50 घरों में पहुंचा नल का पानी।

15 वर्षों बाद कुंवर सिंह मैदान रोड नंबर-3 के 50 घरों में पहुंचा नल का पानी।

जमशेदपुर/बागबेड़ा

पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता के प्रयास रंग लाए।

बागबेड़ा हाउसिंग कॉलोनी जलापूर्ति योजना के अंतर्गत करीब 15 वर्षों से पेयजल संकट झेल रहे कुंवर सिंह मैदान रोड नंबर-3 के लगभग 50 घरों में आखिरकार नियमित जलापूर्ति शुरू हो गई है। लंबे समय से चली आ रही इस समस्या के समाधान से क्षेत्र के लोगों में खुशी का माहौल है।

पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता ने बताया कि डीएमएफटी मद से लगभग चार लाख रुपये की लागत से पाइपलाइन का इंटर कनेक्शन निर्माण कार्य पूरा होने के बाद जलापूर्ति बहाल हो सकी। उन्होंने बताया कि सुबह बेला की सप्लाई शुरू होते ही सभी घरों में पर्याप्त दबाव के साथ पानी पहुंचा। वर्षों से पानी की समस्या झेल रहे लोगों के लिए यह किसी बड़ी राहत से कम नहीं थी। पानी आते ही लोगों ने अपने घरों में बाल्टी, ड्रम एवं अन्य बर्तनों में पानी संग्रह किया और अपनी खुशी व्यक्त की।

सुनील गुप्ता ने कहा कि इस कार्य को पूरा कराने के लिए वे पिछले कई वर्षों से लगातार प्रयासरत थे। उन्होंने इस संबंध में पोटका विधानसभा क्षेत्र के विधायक संजीव सरदार, जिला उपायुक्त, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता, कनीय अभियंता तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी से कई बार मुलाकात कर मांग पत्र सौंपे। इसके अलावा पंचायत समिति की मासिक बैठकों में भी उन्होंने लगातार इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।

उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े इस महत्वपूर्ण कार्य के पूरा होने से क्षेत्र के लोगों को वर्षों पुरानी समस्या से निजात मिली है। स्थानीय निवासियों ने जलापूर्ति बहाल होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता के निरंतर प्रयासों की सराहना की। लोगों का कहना है कि “सुनील गुप्ता केवल वादे नहीं करते, बल्कि अपने प्रयासों से उन्हें धरातल पर साकार भी करते हैं।”

असंगी चेक डैम में डूबे दो बच्चे एक का शव बरामद दूसरे की तलाश जारी

असंगी चेक डैम में डूबे दो बच्चे एक का शव बरामद दूसरे की तलाश जारी

सरायकेला/आदित्यपुर

सरायकेला खरसावां जिले से दिल को झांकझोर देने वाली और खबर निकल कर सामने आ रही है कि जिले के आरआईटी थाना क्षेत्र अंतर्गत आसंगी चेक डैम से सटे खरकई नदी किनारे शनिवार दोपहर एक बड़ा हादसा हो गया। जहां नहाने के दौरान दो युवक गहरे पानी में चले गए और डूब गए।

वहीं इस पूरे मामले की सूचना स्थानीय लोगों द्वारा स्थानीय थाना को दी गई। सूचना मिलते ही आरआईटी पुलिस ने की पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और त्वरित कार्रवाई करते हुए स्थानीय गोताखोरों की मदद से काफी मशक्कत के बाद गोताखोरों ने कुश का शव पानी से बाहर निकाल लिया। लेकिन उत्सव का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। गोताखोरों की टीम लगातार चेक डैम में सर्च ऑपरेशन चला रही है। घटना के बाद चेक डैम के आसपास भारी भीड़ जमा हो गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे इलाके में मातम और शोक का माहौल है। फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। यह हादसा एक बार फिर गहरे जलाशयों के आसपास सावधानी बरतने की बड़ी चेतावनी दे रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक छात्र की पहचान आदित्यपुर के कल्पनापुरी अशोक विहार निवासी उत्कर्ष कुमार के रूप में हुई है। वहीं, लापता दूसरा छात्र एस टाइप का रहने वाला बताया जा रहा है। दोनों दोपहर करीब 1:00 बजे नदी किनारे नहाने पहुंचे थे, जहां वे तेज बहाव और गहराई का अंदाजा नहीं लगा पाए और डूब गए।

पुलिस ने बताया कि एक शव को बाहर निकाल लिया गया है और दूसरे की खोज जारी है। गौरतलब है कि आसंगी चेक डैम और खरकाई नदी के इस क्षेत्र में लगातार डूबने की घटनाएं हो रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वे अक्सर बाहर से आने वाले युवकों को गहरे पानी में जाने से मना करते हैं, लेकिन युवक चेतावनी को नजरअंदाज कर नदी में उतर जाते हैं, जिससे ऐसे हादसे होते हैं।

मानवाधिकार मिशन के पूर्वी सिंहभूम ज़िला अध्यक्ष के रूप में रजनीश कुमार की नियुक्ति।

मानवाधिकार मिशन के पूर्वी सिंहभूम ज़िला अध्यक्ष के रूप में रजनीश कुमार की नियुक्ति।

सरायकेला/खरसावां

लायंस क्लब्स इंटरनेशनल के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर और कई सामाजिक संगठनों से अलग-अलग भूमिकाओं में जुड़े रजनीश कुमार ने झारखंड ह्यूमन राइट्स मिशन के वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान अपनी ओर खींचा। उचित जांच-पड़ताल के बाद, उन्हें पूर्वी सिंहभूम, जमशेदपुर के लिए ह्यूमन राइट्स मिशन का डिस्ट्रिक्ट प्रेसिडेंट नियुक्त करने का निर्णय लिया गया।

एक सादे समारोह में, झारखंड ह्यूमन राइट्स मिशन के स्टेट प्रेसिडेंट पी.के. लाला ने रजनीश कुमार को नियुक्ति पत्र, ज़रूरी दस्तावेज़ और बैच सौंपा। पी.के. लाला एक अनुभवी और प्रतिष्ठित कानूनी विशेषज्ञ और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं।

बहुत जल्द पूर्वी सिंहभूम शाखा के ह्यूमन राइट्स मिशन की एक उचित समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति लोगों की जायज़ मांगों और अधिकारों के मुद्दों पर काम करेगी और उन सभी लोगों की मदद करेगी जो पीड़ित या परेशान हैं।

शिव किशोर शर्मा
राज्य मीडिया सचिव
ह्यूमन राइट्स मिशन

मॉडल स्कूल खरसावॉं में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों का स्वास्थ्य परीक्षण संपन्न।

मॉडल स्कूल खरसावॉं में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों का स्वास्थ्य परीक्षण संपन्न।

सरायकेला-खरसावां

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत मॉडल स्कूल खरसावॉं में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खरसावॉं के चिकित्सकों द्वारा विद्यालय के कक्षा 6 से 10 तक के छात्र-छात्राओं का व्यापक स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
इस स्वास्थ्य शिविर में डॉ. मो. नजीर आलम एवं डॉ. ममता कुमारी ने विद्यार्थियों के सामान्य स्वास्थ्य की जॉंच करने के साथ-साथ उन्हें स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार, व्यक्तिगत स्वच्छता एवं नियमित स्वस्थ्य देखभाल के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी एवं आवश्यक परामर्श प्रदान किया।

चिकित्सकों ने बताया कि यदि किसी विद्यार्थी में पोलियो, कटे होंठ (क्लेफ्ट लिप), कटे तालु (क्लेफ्ट पैलेट), जन्मजात विकृतियॉं अथवा अन्य गंभीर एवं असाध्य बीमारियों के लक्षण पाए जाते हैं, तो उनके समुचित उपचार की व्यवस्था सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं के माध्यम से कराई जाएगी, ताकि प्रत्येक बच्चे को समय पर आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सके।

विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका बासुमति मिश्रा ने इस अवसर पर कहा कि विद्यार्थियों का शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य उनके सर्वांगीण विकास की आधारशिला है। उन्होंने सभी अभिभावकों एवं विद्यार्थियों से ऐसे स्वास्थ्य कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने की अपील की।
कार्यक्रम के सफल संचालन में शिक्षिका शशिवाला बागे, शिक्षक जीडी महन्त, आशिष कुमार प्रमाणिक, विकास चंद्र महतो, सतीश सेन प्रधान, प्रभात कुमार महतो, प्रियतम सिंह, बीएड प्रशिक्षु शिक्षिका रोजालिन नाहक तथा मो. अब्दुल सत्तार सहित विद्यालय परिवार के सभी सदस्यों ने महत्वपूर्ण एवं सराहनीय योगदान दिया।

विद्यालय प्रबंधन ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, खरसावॉं की चिकित्सा टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के स्वास्थ्य परीक्षण शिविर बच्चों के स्वस्थ सुरक्षित एवं उज्जवल भविष्य के निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कुकड़ू के हाई तिरुल गांव में पेयजल संकट, जान जोखिम में डालकर पानी लाती हैं महिलाएं।

कुकड़ू के हाई तिरुल गांव में पेयजल संकट, जान जोखिम में डालकर पानी लाती हैं महिलाएं।

सरायकेला/ईचागढ़

सरायकेला-खरसावां जिले के कुकड़ू प्रखंड स्थित पारगामा पंचायत का हाईतीरूल गांव आज भी शुद्ध पेयजल की सुविधा से वंचित है। आदिवासी बहुल इस गांव की महिलाएं रोज 2 से 4 किलोमीटर पैदल चलकर पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले से पानी लाने को मजबूर हैं। गांव में न हैंडपंप है, न जलमीनार और न ही नल-जल योजना की सुविधा उपलब्ध है। हाईतीरूल गांव में अधिकांश आदिवासी परिवार रहते हैं। गर्मी हो या बरसात, महिलाएं रोज सुबह-शाम जंगल, झाड़ियों और खेतों की मेड़ से होकर 2 से 4 किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाने जाती हैं।

पश्चिम बंगाल से लाना पड़ता है पानी

पानी के लिए ग्रामीणों को पश्चिम बंगाल की सीमा पार कर पुरुलिया जिले के बागमुंडी थाना क्षेत्र के माठा अंचल स्थित चड़क पाथर गांव जाना पड़ता है। वहां डाढ़ी, चुआं, डोभा और पुराने कूप से पानी भरकर महिलाएं डेगची और हांडी सिर पर रखकर गांव लौटती हैं। ग्रामीण महिलाओं का कहना है, “रास्ते में हाथियों का झुंड, सांप और बिच्छू मिलने का खतरा बना रहता है। कांटों भरे जंगल से होकर गुजरना पड़ता है। मजबूरी में यही पानी लाकर कपड़े से छानकर पीने और खाना बनाने में इस्तेमाल करते हैं. सालभर यही स्थिति रहती है।”

पेयजल की स्थायी व्यवस्था नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ियों के बीच बसे इस गांव तक अब तक जल जीवन मिशन और हर घर नल से जल योजना का लाभ नहीं पहुंचा है। गांव में शुद्ध पेयजल की स्थायी व्यवस्था नहीं होने से लोगों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सिर्फ लोगों को ही नहीं, पालतू मवेशियों के लिए भी कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है। यह इलाका हाथी प्रभावित क्षेत्र है, जिससे पानी लाने के दौरान हमेशा खतरा बना रहता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव में चापाकल, जलमीनार अथवा नल-जल योजना के तहत शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि गांव में जल्द पेयजल की स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि लोगों को दूसरे राज्य से पानी लाने की मजबूरी खत्म हो सके।

राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे के अवसर पर हरेलाल महतो ने चिकित्सकों को किया सम्मानित, मरीजों के बीच किया फल वितरण।

राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे के अवसर पर हरेलाल महतो ने चिकित्सकों को किया सम्मानित, मरीजों के बीच किया फल वितरण।

सरायकेला/ईचागढ़

राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे के अवसर पर ईचागढ़ विधानसभा के पूर्व एनडीए प्रत्याशी एवं आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव हरेलाल महतो ने चांडिल अनुमंडल अस्पताल पहुंचकर अस्पताल में कार्यरत चिकित्सकों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों के बीच फल वितरण कर उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। कार्यक्रम के उपरांत हरेलाल महतो ने अनुमंडल अस्पताल का औचक निरीक्षण किया तथा अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने कहा कि डॉक्टर हमारे समाज में भगवान का दूसरा स्वरूप हैं। मानव सेवा में उनका योगदान अतुलनीय है और राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे के अवसर पर उनका सम्मान करना हम सभी का कर्तव्य है। हरेलाल महतो ने अस्पताल में चिकित्सकों की भारी कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में पूरा अनुमंडल अस्पताल मात्र एक डॉक्टर के भरोसे संचालित हो रहा है, जिससे क्षेत्र के हजारों मरीजों को समुचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि जनहित को ध्यान में रखते हुए अविलंब कम-से-कम चार से पांच चिकित्सकों की नियुक्ति की जाए, ताकि आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें।

उन्होंने 23 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नए अनुमंडल अस्पताल भवन का भी उल्लेख करते हुए कहा कि भवन तैयार होने के बावजूद वर्षों से उसका समुचित संचालन नहीं हो पाया है। लगातार टेंडर और मरम्मत कार्य होना सरकार की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने सरकार से शीघ्र अस्पताल भवन को पूर्ण रूप से चालू कर क्षेत्रवासियों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। श्री महतो ने कहा कि जनता के स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि क्षेत्र की जनता को समय पर बेहतर उपचार मिल सके।

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