( मालखान महतो) सरायकेला-खरसावां जिला के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में मंगलवार शाम से हो रही आंधी तुफान और रुक रुक कर हो रही बारिश से किसानों के मेहनत पर पानी फेर दिया है। मोंथा चक्रवर्ती तुफान का ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र में काफी असर देखने को मिला। खेत में खड़ी और तैयार धान की फसलों को आंधी तूफान से गीला दिया, जिससे अधिकांश खेतों में खड़ी धान नष्ट हो गया। इस वर्ष लगातार भारी बारिश से जहां धान बीचड़ा नष्ट होने से किसानों को दुबारा बीज डालने से क्षति हुई, वहीं पके और अधपके धानों पर चक्रवर्ती तुफान ने अपना रौद्र रूप से फसलों को नष्ट कर दिया, जिससे किसान काफी चिंतित हैं। तालापीढ़ी निवासी किसान निमाई चंद्र महतो ने बताया कि बेमौसम बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान धान की खेती पर हुआ है।
उन्होंने बताया कि धान की बाली हवा और पानी से अपने आप गिर रही है जिससे खराब होने की संभवाना है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अत्यधिक बारिश होने के कारण धान की फसल पर विभिन्न प्रकार की बीमारी भी हुआ है। उन्होंने आपदा प्रबंधन विभाग से तत्काल किसानों के लिए मुआवजा देने का मांग किया है। उन्होंने कहा कि किसान बार बार की आपदा से काफी तनाव महसूस कर रहे हैं और सारी मेहनत पर पानी फेर दिया।
तंबाकू मुक्त युवा अभियान 3.0 के तहत जिले में चलाया गया छापामारी अभियान।
सरायकेला-खरसावां
दुकानों एवं व्यक्तियों पर की गई कार्रवाई, ₹1400 अर्थदंड वसूला गया।
31 अक्टूबर, 2025 को तंबाकू मुक्त युवा अभियान 3.0 के तहत जनजागरूकता एवं प्रवर्तन अभियान चलाया गया। इस क्रम में सरायकेला-खरसावाँ जिले के नगर पंचायत क्षेत्र अंतर्गत संजय चौक एवं कालूराम चौक स्थित विभिन्न दुकानों में निषिद्ध तंबाकू उत्पादों की बिक्री तथा सार्वजनिक स्थलों पर उपभोग के विरुद्ध छापामारी अभियान संचालित किया गया।
यह अभियान राज्य नोडल पदाधिकारी (NTCP) डॉ. अश्विनी कुमार एवं सिविल सर्जन सरायकेला-खरसावाँ डॉ. सरयू प्रसाद सिंह के नेतृत्व में संपन्न हुआ। अभियान के दौरान सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA) की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत दुकानों एवं व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए ₹1400 का अर्थदंड वसूला गया।
इस अभियान में खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी श्री सुबीर रंजन, डॉ. चंदन पासवान, NTCP स्टेट कोऑर्डिनेटर श्री धीरज कुमार, सिटी मैनेजर नगर पंचायत श्री महेश जरिका, NTCP कंसल्टेंट श्री अशोक यादव, जिला कार्यक्रम समन्वयक (NCD) श्री पुष्कर भूषण, तथा सरायकेला थाना के पदाधिकारी एवं पुलिस बल शामिल रहे।
सिविल सर्जन ने बताया कि तंबाकू सेवन जनस्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है तथा इसे रोकने के लिए जिले में सतत प्रवर्तन एवं जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू सेवन करने वाले एवं निषिद्ध उत्पाद बेचने वाले दुकानदारों के विरुद्ध आगे भी इसी प्रकार की नियमित कार्रवाई की जाएगी।
ट्रंप-ज़िनपिंग के बीच समझौता वास्तव में अमेरिका की रणनीतिक सफ़लता है, या चीन की शतरंजी चाल का एक हिस्सा -एक सटीक विश्लेषण
दक्षिण कोरिया बुसान बैठक- संवाद या शक्ति प्रदर्शन?“छह साल बाद एक फ्रेम में दिखे डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग- वैश्विक शक्ति संतुलन की नई परिभाषा”
दक्षिण कोरिया बुसान ट्रंप- ज़िनपिंग मुलाक़ात -दुनियाँ के लिए एक प्रतीकात्मक संदेश है,कि वैश्विक शांति का रास्ता संवाद से गुजरता है, जिसमें विश्वास और समानता की भावना हो, ज़ो नहीं दिखा-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र
गोंदिया/महाराष्ट्र
वैश्विक स्तरपर दुनियाँ की निगाहें आज दक्षिण कोरिया के बुसान शहर पर टिकी थीं, जहाँ लगभग छह वर्षों केअंतराल के बाद अमेरिकी राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में से एक डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक ही फ्रेम में नजर आए। यह दृश्य प्रतीकात्मक रूप से जितना साधारण दिखा,उतना ही भू-राजनीतिक दृष्टि से गूढ़ था। दोनों नेता विश्व राजनीति की दो ऐसी ध्रुवीय शक्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो पिछले एक दशक से अधिक समय से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से वैश्विक आर्थिक, सैन्य और वैचारिक प्रतिस्पर्धा में लिप्त हैं। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि यद्यपि मंच साझा करने का दृश्य शांति और संवाद का संदेश देता है, किंतु दोनों के बीच उपस्थित कूटनीतिक दूरी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी। यह दूरी मात्र शारीरिक नहीं, बल्कि नीतिगत, विचारधारात्मक और शक्ति-प्रदर्शन की गहराइयों में निहित है।साउथ कोरिया के बुसान में हुई यह बैठक औपचारिक रूप से एशिया- पैसिफिक क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा मुद्दों पर केंद्रित थी। लेकिन इसके पीछे वास्तविक उद्देश्य था,वैश्विक शक्ति समीकरणों को पुनः परिभाषित करना। ट्रंप, जो दोबारा अमेरिकी राजनीति के केंद्र में लौट आए हैं, अपनी पूर्ववर्ती नीतियों के समान ही इस बार भी “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडा लेकर आए हैं। दूसरी ओर, शी जिनपिंग, जो अपनी तीसरी कार्यावधि में चीन को एक आर्थिक और सैन्य सुपरपावर के रूप में स्थापित करने की दिशा में अग्रसर हैं, इस बैठक को एक मंच के रूप में देख रहे थे,जहाँ चीन अपनी रणनीतिक आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन कर सके।
एडवोकेट किशन सनमुखदास
हालांकि, इन दोनों के बीच हुए संवाद की प्रकृति में ठंडापन झलक रहा था।ऐसा प्रतीत हुआ मानो दोनों नेता एक औपचारिक कूटनीतिक आवश्यकता के तहत एक साथ बैठे हों, न कि आपसी विश्वास या सामरिक साझेदारी के उद्देश्य से बैठक की।
साथियों बात अगर हम दक्षिण कोरिया बुसान बैठक चीन-रूस ऊर्जा गठबंधन और अमेरिकी मौन को समझने की करें तो, वर्तमान वैश्विक ऊर्जा समीकरण में चीन और रूस के बीच का गठबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण है। रूस- यूक्रेन युद्ध के बाद, जब पश्चिमी देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए, तब चीन ने रूस से कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि की।आज चीन रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बन चुका है।लेकिन बुसान की बैठक में, जहाँ ट्रंप ने भारत पर रुस से तेल खरीदने पर 50 पर्सेंट टैरिफ लगाने जैसे कठोर आर्थिक कदमों की घोषणा की थीं, वहीं उन्होंने चीन-रूस ऊर्जा गठबंधन के मुद्दे पर आश्चर्यजनक मौन बनाए रखा। ताइवान चीन संबंधों पर भी यह मौन तथा 10 पर्सेंट टैरिफ कम करना अमेरिका की रणनीतिक विवशता को दर्शाता है,क्योंकि ट्रंप भली-भांति जानते हैं कि रूस के तेल व्यापार में चीन की भागीदारी पर सीधा प्रश्न उठाना एक व्यापक जियो- इकोनॉमिक टकराव को जन्म दे सकता है।दूसरी ओर, ट्रंप भारत के उभरते व्यापारिक प्रभाव और डॉलर-मुक्त ऊर्जा सौदों से असहज हैं। इसलिए उन्होंने भारत पर टैरिफ बढ़ाकर आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति अपनाई ,यह चीन के बजाय एक सॉफ्ट टारगेट पॉलिसी की झलक है।अमेरिका और चीन की प्रतिद्वंद्विता अब केवल आर्थिक नहीं रही,यह अब सॉफ्ट पावर बनाम हार्ड पॉलिटिक्स की लड़ाई बन चुकी है। चीन अपनी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव,टेक्नोलॉजी हब्स और डिजिटल युआन के माध्यम से एक वैकल्पिक वैश्विक आर्थिक व्यवस्था तैयार कर रहा है। वहीं अमेरिका अपने पुराने सहयोगियों जापान, दक्षिण कोरिया,ऑस्ट्रेलिया और भारत (क्वाड के ज़रिए) के साथ सामरिक संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है।बुसान बैठक इस व्यापक संघर्ष का एक कूटनीतिक मंच बनकर उभरी। ट्रंप और शी जिनपिंग दोनों ने अपने-अपने राजनीतिक हितों को साधने की कोशिश की,परंतु विश्वास की पुनर्स्थापना अभी बहुत दूर दिख रही है।
साथियों बात अगर हम ट्रंप की गर्मजोशी और शी जिनपिंग की भावहीनता-दो व्यक्तित्व, दो रणनीतियाँ मंत्र को समझने की करें तो,जब बैठक की शुरुआत हुई, ट्रंप पूरे उत्साह और आत्मविश्वास में दिखाई दिए। उन्होंने शी जिनपिंग की ओर बढ़ते हुए अत्यंत गर्मजोशी से हाथ मिलाया। यह वही ट्रंप हैं,जिन्होंने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान “ट्रेड वॉर” के जरिए चीन की अर्थव्यवस्था को चुनौती दी थी,लेकिन साथ ही समय- समय पर व्यक्तिगत संबंधों की राजनीति का भी प्रयोग किया। उनके चेहरे पर मुस्कुराहट,आत्मीयता और कैमरों की ओर देखने का आत्मविश्वास था,यह ट्रंप की विशिष्ट शैली है, जो वे अक्सर कूटनीतिक मंचों पर दिखाते हैं।इसके विपरीत,शी जिनपिंग का चेहरा लगभग भावहीन था, न मुस्कुराहट,न तनाव,न ही कोई प्रतिक्रिया। यह चीन की कूटनीतिक परंपरा का हिस्सा है,जहाँ “संयम”और “भावनाओं का नियंत्रण” नेतृत्व की परिपक्वता का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इस बार उनकी शांति एक गहरी असहमति या असंतोष का संकेत भी दे रही थी। यह संकेत उस अविश्वास का था,जो अमेरिका और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों में और गहराता गया है,विशेषकर ट्रेड वॉर, टेक्नोलॉजी कंट्रोल्स, साउथ चाइना सी विवाद, और ताइवान के मुद्दों के कारण।
साथियों बात अगर हम ट्रंप का “अकेले चलना”,शक्ति प्रदर्शन या संदेश? कुछ समझने की करें तो,बैठक के समापन पर जब सभी नेता अपने-अपने मार्ग की ओर बढ़े, तो ट्रंप ने शी जिनपिंग के साथ कुछ औपचारिक शब्दों का आदान-प्रदान करने के बाद उन्हें उनकी गाड़ी तक छोड़ा फिर वहां से अकेले प्रस्थान किया। यह दृश्य मीडिया के कैमरों में कैद हुआ और तुरंत अंतरराष्ट्रीय सुर्खियाँ बन गया। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का “अकेले चलना” किसी अनायास घटना का परिणाम नहीं था, बल्कि एक सामरिक संकेत था,यह दिखाने के लिए कि अमेरिका किसी पर निर्भर नहीं है और वह विश्व मंच पर एकाकी नेतृत्व करने में सक्षम है। इसके विपरीत, शी जिनपिंग ने इस दृश्य को पूरी तरह नज़र अंदाज़ किया। उनका शांत और संयमित व्यवहार यह दर्शा रहा था कि चीन भावनात्मक प्रतिक्रियाओं से ऊपर उठकर रणनीतिक स्तर पर सोच रहा है। यह उनके “सॉफ्ट पॉवर” और “कूटनीतिक मौन”की नीति का प्रतीक है,जहाँ प्रतिक्रियाएँ शब्दों से नहीं, बल्कि नीतियों से दी जाती हैं।
साथियों बात अगर हम ट्रंप की मीडिया रणनीति और “10 में से 12” अंक देने को समझने की करें तो,मीटिंग के बाद अमेरिकी मीडिया में ट्रंप ने बयान दिया कि वे इस बैठक को “सफल” मानते हैं और उसे 10 में से 12 अंक देते हैं। यह बयान उनके विशिष्ट अंदाज़ का हिस्सा था अतिशयोक्ति पूर्ण, आत्मविश्वासी और मीडिया आकर्षण केंद्रित। ट्रंप जानते हैं कि उनकी राजनीतिक पहचान केवल नीतियों से नहीं, बल्कि नैरेटिव कंट्रोल से बनती है।उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि वे एक ऐसे नेता हैं,जो हरपरिस्थिति में विजयी दिखाई देते हैं।यह अमेरिकी मतदाताओं के लिए एक मनोवैज्ञानिक संकेत था कि ट्रंप वैश्विक कूटनीति में फिर से सक्रिय हैं और “अमेरिका की प्रतिष्ठा” को पुनः स्थापित कर रहे हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीयविश्लेषकों का मत इससे भिन्न है। उनका कहना है कि ट्रंप की यह सफलता घोषणा अधिकतर प्रचारात्मक थी, क्योंकि बैठक में किसी ठोस नीति या समझौते की घोषणा नहीं हुई।
साथियों बातअगर हम ट्रंप व ज़िनपिंग क़ी बुसान बैठक के भू-राजनीतिक निहितार्थ को समझने की करें तो, बुसान की बैठक केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी,यह आने वाले दशक की अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने वाला संकेत थी। अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा अब भू-अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल प्रभुत्व और कूटनीतिक गठबंधनों में परिलक्षित होगी।ट्रंप और शी जिनपिंग के चेहरे के भाव, उनकी शारीरिक भाषा, और उनके मौन तक ने इस बात को स्पष्ट कर दिया कि यह शीत युद्ध का नया संस्करण शुरू हो चुका है,एक ऐसा युद्ध, जिसमें हथियार नहीं बल्कि टैरिफ, टेक्नोलॉजी और ट्रेड ब्लॉक इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
साथियों बात अगर हम भारत की भूमिका, संतुलनकारी शक्ति को समझने की करें तो,इस पूरी परिदृश्य में भारत की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जहाँ ट्रंप भारत पर टैरिफ बढ़ाकर आर्थिक दबाव बना रहे हैं, वहीं भारत अब वैश्विक मंचों पर रणनीतिक आत्मनिर्भरता और मल्टी- अलाइनमेंट की नीति अपना रहा है। भारत न तो अमेरिका की कठपुतली है,न चीन का समर्थक ,बल्कि वह दोनों के बीच एक तटस्थ शक्ति संतुलनकारी देश के रूप में उभर रहा है। ट्रंप का भारत पर टैरिफ लगाना यह भी दर्शाता है कि अमेरिका अब भारत को केवल सहयोगी नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था के रूप में देखने लगा है। वहीं चीन भारत को एशिया में अमेरिका की कूटनीति का विस्तार मानता है। इस जटिल त्रिकोणीय संबंध में, भारत का हर कदम अब वैश्विक शक्ति समीकरणों को प्रभावित करता है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि एक फ्रेम में दो विपरीत ध्रुव,छह वर्षों बाद एक ही मंच पर दिखाई दिए ट्रंप और शी जिनपिंग,परंतु उनके बीच की मानसिक दूरी शायद पहले से भी अधिक बढ़ चुकी है। ट्रंप की राजनीति “सीधे टकराव और मीडिया प्रभुत्व” पर आधारित है, जबकि शी जिनपिंग “रणनीतिक संयम और दीर्घकालिक योजनाओं” के प्रतीक हैं।यह मुलाकात दुनियाँ के लिए एक प्रतीकात्मक संदेश है, कि वैश्विक शांति का रास्ता संवाद से गुजरता है,लेकिन संवाद तभी फलदायी होता है जब उसमें विश्वास और समानता की भावना हो। बुसान की यह मुलाकात फिलहाल विश्वास नहीं,बल्कि अविश्वास का संकेत बनकर उभरी है।ट्रंप और शी जिनपिंग भले ही एक फ्रेम में कैद हुए हों,लेकिन उनके बीच की विचारधारात्मक और नीतिगत दूरी आज भी उतनी ही गहरी है,जितनी प्रशांत महासागर के दोनों किनारों के बीच की दूरी।
संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9359653465
कुड़ूख विकास परिषद कि ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय कार्तिक उरांव का मनाया जन्म जयंती
सरायकेला/ईचागढ़
(मालखान महतो)
सरायकेला-खरसावां जिला के ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के डुमटांड़ मोड़ पर कुड़ुख विकास परिषद चांडिल अनुमंडल की ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री, शिक्षाविद एवं अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के संस्थापक स्वर्गीय बाबा कार्तिक उरांव का जन्म जयंती धूमधाम से मनाया गया।
स्वर्गीय कार्तिक उरांव के मुर्ती पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित किया गया। कुड़ुख विकास परिषद के सदस्यों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गाजे बाजे के साथ स्व० कार्तिक उरांव के आदमकद मुर्ती पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया। वहीं कुड़ुख विकास परिषद के अध्यक्ष अभिराम उरांव ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय कार्तिक उरांव के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लंदन,ग्लास्गो एवं ब्रिटेन में इंजीनियरिंग एवं बेरिस्टर की पढ़ाई करने के बाद अपने देश में आकर सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उरांव एवं आदिवासी समाज के लिए बहुत कार्य किया। भारत सरकार में केन्द्रीय मंत्री रहते हुए अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद का संस्थापक व केन्द्रीय अध्यक्ष के रूप में रहते हुए आदिवासी व दबे कुचले लोगों को एकजुट कर हक अधिकार के लिए जागरूक करने का काम किया था।
उन्होंने कहा कि समाज को उनके बताए आदर्श को अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय कार्तिक उरांव उरांव समाज को इसाई व अन्य धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने का भी भरसक प्रयास किया। मौके पर समाज सेवी विश्वनाथ उरांव,बंदीनाथ, शिवनाथ, प्रबोध, जगदीश,नकुल उरांव, लक्ष्मी नारायण सिंह मुण्डा, गुरू प्रसाद उरांव सहित सैकड़ों महिला पुरुषों ने श्रद्धांजलि अर्पित किया ।
चिलगु में राजयसभा सांसद आदित्य साहू और आजसू नेता हरेलाल महतो की अहम बैठक
घाटशिला उपचुनाव पर बनी रणनीति
सरायकेला/ईचागढ़
(मालखान महतो)
राज्यसभा सांसद सह झारखंड भाजपा के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष आदित्य साहू शुक्रवार को चांडिल के चिलगु स्थित आजसू पार्टी के प्रधान कार्यालय पहुंचे। इस दौरान आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव हरे लाल महतो ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया।
बैठक में दोनों नेताओं के बीच घाटशिला उपचुनाव को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। एनडीए प्रत्याशी बाबूलाल सोरेन की जीत सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त रणनीति पर विचार किया गया। इस मौके पर आदित्य साहू ने हरे लाल महतो को कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए और एनडीए के गठबंधन की मजबूती पर बल दिया।
वहीं हरे लाल महतो ने कहा कि हेमंत सरकार ने जनता की भावनाओं से खिलवाड़ किया है। बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्थिति बेहद खराब है। उन्होंने दावा किया कि घाटशिला की जनता आगामी उपचुनाव में हेमंत सरकार को करारा जवाब देगी और एनडीए उम्मीदवार को विजयी बनाएगी। इस अवसर पर कई भाजपा और आजसू कार्यकर्ता भी उपस्थित थे।
सरायकेला-खरसावां जिला के ईचागढ़ थाना क्षेत्र के रूगड़ी का एक तालाब में ईचागढ पुलिस द्वारा एक अज्ञात महिला का लाश बरामद किया गया। प्रथमदृष्टया हत्या कर लाश को छुपाने के नियत से तालाब में फेंक दिया होगा।
सुनसान जगह पर तालाब रहने से ग्रामीणों का नजर नही पड़ा ।लाश मिलते ही क्षेत्र में दहशत फ़ैल गया। थाना प्रभारी बिक्रम आदित्य पांडे ने बताया कि रूगड़ी गांव के बाहर खेत के बीच एक तालाब से करीब 25-30 वर्षीय एक लड़की अज्ञात महिला का लाश बरामद किया गया एवं पोस्टमार्टम हेतु सरायकेला सदर अस्पताल भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि लाश का चेहरा पानी से फुल गया है एवं सड़क गया है, जिससे चेहरा पहचान में नही आ रहा है। उन्होंने कहा कि अनुमानतः करीब 6-7 दिन पहले ही लाश छुपाने के नियत से सुनसान जगह पर तालाब में डाल दिया होगा। उन्होंने कहा कि हर पहलू पर जांच किया जा रहा है एवं लाश का पता लगाने का कोशिश किया जा रहा है।
प्रखंड क्षेत्र के इंटर कॉलेज तिरुलडीह परिसर में बुधवार को 12 वीं पुण्य तिथि के अवसर पर समाजसेवी सह पूर्व सांसद प्रतिनिधि स्व. डोमन सिंह मुंडा के प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित किया गया। इंटर कॉलेज तिरुलडीह के अध्यक्ष सह पूर्व शिक्षक उमाकांत महतो ने बताया कि डोमन सिंह मुंडा एक शिक्षक के रुप में 60 वर्ष तक सेवा दिया था। सेवानिवृत्त के बाद वो सामाजिक कार्य में बड़ चढ़ कर हिस्सा लेते थे।
तत्कालीन सांसद सुबोध कांत सहाय के कार्यकाल में उन्हें ईचागढ़ प्रखंड का प्रतिनिधि के रुप में नियुक्त किया था। उन्होंने बताया कि इंटर कॉलेज तिरुलडीह के नाम पर स्व. मुंडा ने सात एकड़ जमीन दान दिया है। उनके छोटा पुत्र नयन सिंह मुंडा सोड़ो पंचायत के मुखिया है और पुत्रवधु सुभासिनी देवी ईचागढ़ उत्तरी भाग के जिला परिषद सदस्य है। मौके पर इंटर कॉलेज तिरुलडीह के प्राचार्य उपेन चंद्र महतो, डॉ. गुरुचरण महतो, समाजसेवी राम प्रसाद महतो, प्रोफेसर हृदय रंजन महतो, मृत्युंजय महतो, अनाथ महतो, निरंजन महतो, आरूनी सिंह मुंडा,निपेन्द्र महतो,गुरुपद सिंह मुंडा आनंद महतो आदि उपस्थित थे।
गोविंदपुर के किता में काली पूजा धूमधाम से संपन्न, झूमर गायक संतोष महतो के गीतों पर थिरके श्रद्धालु
सरायकेला
प्रखंड सरायकेला के गोविंदपुर पंचायत अंतर्गत किता गांव स्थित काली मंदिर में बुधवार को काली पूजा बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाई गई. पूजा पंडाल में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रही. शाम में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रसिद्ध झूमर गायक संतोष महतो ने बंगला, ओड़िया, नागपुरी और भोजपुरी गीतों की शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया.
कार्यक्रम का आयोजन काली पूजा कमेटी, गोविंदपुर किता द्वारा किया गया. सृष्टि कर्ता हरिहर लोहार लोहार ने बताया कि “काली पूजा की शुरुआत वर्ष 1997 में की गई थी. तब से अब तक यह परंपरा लगातार जारी है. ग्रामीणों और युवाओं के सहयोग से हर वर्ष इसे भव्य रूप से मनाया जाता है. इस वर्ष भी पुलिस प्रशासन का भरपूर सहयोग मिला, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हुआ.
इस अवसर पर पंडित रमानाथ होता ने बताया कि यह पर्व हमें अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होने का संदेश देता है आज के दिन इस समारोह स्थल में रावण दहन का कार्यक्रम कर अन्याय पर न्याय और अधर्म पर धर्म का विजय का संदेश दिया जाता है इस कार्यक्रम में अग्रणी भूमिका निभाने वाले हरिहर लोहार को लोगों ने सह्रदय धन्यवाद दिया श्री हरिहर लोहार क्षेत्र की शांति, सुख, समृद्धि के लिए दक्षिणेश्वर काली मंदिर में माथा टेका एवं पंडित रमानाथ होता से आशीर्वाद ग्रहण किया.
पूजा पंडाल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही. रावण दहन कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसे देखने सैकड़ों लोग जुटे.
इस अवसर पर पूर्णचंद्र तांती, राजेश महतो, राधा गोप, बिस्तु माझी, मुकेश महतो, पीयूष महतो, राजेश लोहार, ठाकुर, बबलू महतो, सहदेव महतो, कीर्तन माझी, बांगो गोप, हीरालाल गोपी, रामनाथ होता, एबी ज्योतिषी, नंदलाल महतो, मंगल गोप, मिथुन सरदार, श्रीधर महतो, बिशु महतो आदि का विशेष सहयोग रहा.
गुरु नानक देव जी की कार्तिक प्रभात फेरी महोत्सव -23 अक्टूबर से 5 नवंबर 2025- धन गुरु नानक सारा जग तारिया -आस्था,सेवा और उनकी अनंत ज्योति का विश्वव्यापी उत्सव
पवित्र प्रभात फेरी व गुरु नानक जयंती एक वैश्विक पर्व बन चुकी है। यूनेस्को ने भी गुरु नानक की शिक्षाओं को “वैश्विक मानवता की धरोहर”कहा है
गुरु नानक की ज्योति से आलोकित ,पंद्रह दिवसीय कार्तिक प्रभात फेरी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण का पर्व है,यह समाज में एकता, सेवा, समानता और प्रेम का दीप प्रज्वलित करती है- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया/महाराष्ट्र
गोंदिया/महाराष्ट्र
वैश्विक स्तरपर भारत की भूमि ऋषियों,संतों औरगुरुओं की तपस्थली रही है। यहाँ हर पर्व और परंपरा का एक गहन आध्यात्मिक अर्थ निहित है। इन्हीं अमूल्य परंपराओं में से एक है,सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी की जयंती से पहले मनाया जाने वाला कार्तिक प्रभात फेरी महोत्सव जो केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जीवंत आध्यात्मिक यात्रा है, जो समाज को सत्य, प्रेम, समानता और सेवा के पथ पर अग्रसर करती है।
यह प्रभात फेरी 23 अक्टूबर से आरंभ होकर 5 नवंबर 2025 तक चलेगी, यह अवधि न केवल भक्तिभाव और सेवा का प्रतीक है,बल्कि सामाजिक जागरण और मानवता के समरसता संदेश की पुनः पुष्टि का अवसर भी है। पूरे कार्तिक मास की पवित्रता, अनुशासन और भक्ति की प्रतीक होगी। प्रभात फेरी का आरंभ कार्तिक मास के आरंभ (8 अक्टूबर) के बाद विशेष रूप से गुरु नानक जयंती की तैयारियों के साथ किया जाता है,और यह गुरु पर्व की पूर्णिमा (5 नवंबर) पर सम्पन्न होती है। इस अवधि में देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनियाँ में श्रद्धालु सुबह- सुबह कीर्तन, भजन, और सेवा के माध्यम से गुरु की शिक्षाओं को आत्मसात करते हैं। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र स्वयंम भी प्रभात फेरी में शामिल हुआ हूं और देखा हूंकि प्रातःकाल लगभग 3:30 या 4 बजे गुरुद्वारों से प्रारंभ होती है।श्रद्धालु संगत एकत्र होकर गुरु ग्रंथ साहिब के आगे मत्था टेकते हैं, और फिर “कीर्तन सोहिला ”या“ जपजी साहिब” का पाठ करते धन गुरु नानक, सारा जग तारिया,जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल के जय घोष करते हुए गाँव या नगर की गलियों से होकर गुजरते हैं। मार्ग में लोग अपने घरों के बाहर दीये जलाकर, फूलों से स्वागत कर इस यात्रा को धन्य करते हैं। फेरी के अंत में गुरुद्वारे में प्रसाद सेवा होती है जिसमें सभी धर्मों के लोग साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं।
इस दौरान बच्चों और युवाओं को भी सिखाया जाता है कि गुरु की सच्ची भक्ति केवल पूजा में नहीं, बल्कि सेवा और भक्ति भाव में भी है। यह विशेष रूप से गुरु नानक देव जी के जन्मोत्सव से जुड़ी हुई है। आज गुरु नानक देव जी का संदेश केवल पंजाब या भारत तक सीमित नहीं है, दुनियाँ के 150 से अधिक देशों में प्रभात फेरियां निकाली जाती हैं।लंदन में साउथहॉल गुरुद्वारा से हजारों श्रद्धालु प्रभात फेरी में भाग लेते हैं।कनाडा के वैंकूवर में भारतीय मूल के लोगों के साथ स्थानीय नागरिक भी इस भक्ति उत्सव में शामिल होते हैं।सिंगापुर, मलेशिया, दुबई, अमेरिका, केन्या, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में सिख समुदाय और अन्य धर्मों के लोग भी गुरु नानक के उपदेशों से प्रेरित होकर प्रभात फेरियों का आयोजन करते हैं।इस प्रकार कार्तिक प्रभात फेरी आज एक वैश्विक सांस्कृतिक संवाद का माध्यम बन चुकी है। प्रभात फेरी में भाग लेने वालों के जीवन में यह अनुभव गहरा आध्यात्मिक परिवर्तन लाता है। भोर के समय जब पूरा वातावरण शांत होता है और वाहेगुरु का नाम गूंजता है, तब व्यक्ति के भीतर की अशांति मिटने लगती है। यह अनुभव बताता है कि आस्था केवल पूजा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का मार्ग।
साथियों बात अगर हम गुरुनानक देव जी की कार्तिक प्रभात फेरी 2025 को समझने की करें तो“सतगुरु की अरदास, प्रभात की प्रभा से विश्व आलोकित ”वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह।आस्था, भक्ति और मानवता के इस पावन संगम में जब सूरज की पहली किरण धरा को स्पर्श करती है, तो गुरबाणी की मधुर वाणी के साथ “वाहेगुरु” का नाम गुंजायमान हो उठता है। यही वह क्षण होता है जब कार्तिक प्रभात फेरी की शुरुआत होती है,वह अनूठी परंपरा जिसे गुरु नानक देव जी ने आध्यात्मिक जागरण और मानवीय एकता का प्रतीक बनाया। पूरे 15 दिवसीय भक्तिमय कालखंड में सिख श्रद्धालु सहित सिंधी व अन्य समाज गुरु नानक जयंती की तैयारी और साधना में डूबे रहेंगे।“प्रभात फेरी” का शाब्दिक अर्थ है,प्रभात (सुबह) के समय की आस्था यात्रा। यह फेरी केवल चलना नहीं, बल्कि संगत (सामूहिकता) के रूप में भक्ति का प्रसार है। जब सूर्योदय से पहले की शांति में भक्तजन “वाहे गुरु,सतनाम” धन गुरु नानक सारा जग तारिया के नाम का उच्चारण करते हुए गलियों, चौपालों और रास्तों से गुजरते हैं, तब यह वातावरण आध्यात्मिक प्रकाश से भर जाता है। प्रभात फेरी आत्मशुद्धि का माध्यम है, यह सिख व अन्य धर्म की उस भावना का प्रतीक है जिसमें कहा गया है कि “नाम जपो, किरत करो,वंड छको”अर्थात ईश्वर का स्मरण करो, ईमानदारी से कार्य करो और सबमें बाँटो। यह लगभग 14 दिनों की धार्मिक यात्रा गुरु नानक जयंती की तैयारी का सबसे पवित्र चरण मानी जाती है। भारत में अमृतसर, पटियाला, लुधियाना, आनंदपुर साहिब, दिल्ली, नांदेड़, पटना साहिब जैसे गुरुद्वारों में प्रभात फेरियों की विशेष व्यवस्था की जाती है।परंतु अब यह परंपरा सीमित नहीं रही।कनाडा,अमेरिका ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, सिंगापुर और दुबई जैसे देशों में बसे सिख समुदाय भी इसे अत्यंत श्रद्धा से मनाते हैं। लंदन के साउथहॉल, वैंकूवर, मेलबर्न, टोरंटो, और कैलिफ़ोर्निया के गुरुद्वारों से प्रभात फेरियाँ निकलती हैं, जिनमें न केवल भारतीय मूल के लोग बल्कि विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के लोग भी भाग लेते हैं। इस तरह यह पर्व “ग्लोबल यूनिटी ऑफ़ स्पिरिचुअल एनर्जी” का प्रतीक बन गया है।
साथियों बात अगर हम इतिहास में प्रभात फेरी की परंपरा व आधुनिक रूप में पर्यावरण और समाज के प्रति संदेश को समझने की करें तो,गुरु नानक देव जी ने 15 वीं शताब्दी में जब आध्यात्मिक यात्रा आरंभ की थी, तब वे अक्सर अपने शिष्यों के साथ प्रभात बेला में भक्ति गीत गाया करते थे। यही परंपरा आगे चलकर प्रभात फेरी के रूप में स्थापित हुई। उनकी यह शिक्षाएँ उस युग में सामाजिक अंधकार में प्रकाश की किरण बनकर फैलीं गुरु नानक देव जी ने जात- पात, अंधविश्वास और धार्मिकभेदभाव के विरुद्ध आवाज़ उठाई और मनुष्य को उसके कर्म और सत्यनिष्ठा से परिभाषित करने की प्रेरणा दी। प्रभात फेरी इन्हीं सिद्धांतों को पुनर्जीवित करती है,यह केवल धार्मिक रिवाज नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और मानवता के जागरण का पर्व है,इस वर्ष की प्रभात फेरी में कई गुरुद्वारों ने ग्रीन प्रभात फेरी की पहल की है। इसका उद्देश्य है कि भक्ति के साथ-साथ प्रकृति की रक्षा भी की जाए। पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता सिख धर्म की मूल भावना से जुड़ी है,क्योंकि गुरुनानक देवजी ने कहा था “पवण गुरु, पानी पिता, माता धरत महत।”इस संदेश के अनुरूप श्रद्धालु पौधरोपण, प्लास्टिक-मुक्त आयोजन और साइकिल प्रभात फेरी जैसी गतिविधियाँ करेंगे। अमृतसर, दिल्ली, पटना साहिब और नांदेड़ के गुरुद्वारों ने इस वर्ष “एक पौधा एक श्रद्धालु अभियान” भी प्रारंभ किया है।
साथियों बात अगर हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्तिक प्रभात फेरी का विस्तार को समझने की करेंतो,21वीं सदी में प्रभात फेरी का स्वरूप अत्यंत वैश्विक हो गया है। विदेशों में बसे भारतीय समुदाय ने इसे “फेस्टिवल ऑफ़ मॉर्निंग डिवोशन”के रूप में स्थापित किया है।कनाडा और ब्रिटेन में सिख समुदाय स्थानीय सरकारों के सहयोग से विशेष परमिट लेकर सड़कों पर प्रभात फेरी निकालता है। इसमें न केवल धार्मिक गीत बल्कि इंटरफेथ संवाद भी होते हैं, जिसमें हिंदू, मुस्लिम, क्रिश्चियन, ज्यू और बौद्ध धर्मों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। इससे गुरु नानक की सार्वभौमिक शिक्षा “एक ओंकार सतनाम”का विश्व संदेश फैलता है कि सत्य एक है, परंतु उसे पाने के मार्ग अनेक हैं।गुरु नानक देव जी का दर्शन अत्यंत व्यापक था। उन्होंने कहा “न को हिन्दू न मुसलमान,”अर्थात इंसान को धर्म से नहीं, उसके कर्म से आँकना चाहिए।प्रभात फेरी इसी विचारधारा की व्यावहारिक अभिव्यक्ति है। जब समाज के लोग एक साथ चलकर नाम जपते हैं, तब जाति, धर्म, भाषा और वर्ग का भेद मिट जाता है।यह एक ऐसा आयोजन है जो आत्मा और समाज दोनों को जोड़ता है। इसमें हर व्यक्ति को यह अनुभव होता है कि “हम सब ईश्वर के एक ही प्रकाश के अंश हैं।”
साथियों बात अगर कर हम पवित्र प्रभात फेरी गुरु नानक जयंती 5 नवंबर 2025 क़े समापन का पवित्र क्षण को समझने की करें तो,5 नवंबर 2025 को जब कार्तिक पूर्णिमा के दिन गुरु नानक जयंती मनाई जाएगी, तब प्रभात फेरी अपने चरम पर होगी। इस दिन सिख गुरुद्वारों में अखंड पाठ, दीवान सजावट,भव्य नगर कीर्तन, लंगर सेवा, और दीयों की रोशनी से वातावरण भक्ति-मय होगादेशभर के गुरुद्वारों में रात भर “शबद कीर्तन”गूंजता रहेगा। अमृतसर का स्वर्ण मंदिर, नांदेड़ का हज़ूर साहिब, पटना साहिब, दिल्ली का बंगला साहिब और पाकिस्तान के करतारपुर साहिब में लाखों श्रद्धालु एक साथ “वाहे गुरु” के नाम का स्मरण करेंगे।यह दृश्य केवल धार्मिक नहीं बल्कि मानवता की एकता का उत्सव होगा।
साथियों बात अगर हम पवित्र प्रभात फेरी को समाज और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक होने की करें तोआज के युग में जब दुनिया भौतिकता और प्रतिस्पर्धा के जाल में उलझी है, तब प्रभात फेरी युवाओं को एक नया दृष्टिकोण देती है। यह उन्हें सिखाती है कि सफलता का अर्थ केवल धन नहीं, बल्कि आत्म- संतोष और सेवा भावना है।कई स्कूलों और कॉलेजों में इस दौरान गुरु नानक अध्ययन सप्ताह आयोजित किए जाते हैं, जहाँ छात्र उनके जीवन, यात्राओं (उदासियों) और शिक्षाओं का अध्ययन करते हैं।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि, कार्तिक प्रभात फेरी 2025 केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता एकता और आध्यात्मिकता की विश्व यात्रा है। 23 अक्टूबर से 5 नवंबर तक का यह कालखंड हर हृदय को गुरु नानक देव जी की वाणी से भर देगा“नाम जपो कीरत करो, वंड छको।”यह पंद्रह दिन का सफर केवल सड़कों पर नहीं, बल्कि आत्मा के भीतर तय होता है। जैसे सूरज अंधकार मिटाता है, वैसे ही गुरु नानक देव जी की प्रभात फेरी मानवता के हृदय में प्रकाश जगाती है,एक ऐसा प्रकाश जो सीमाओं से परे है, जो सभी को जोड़ता है, और जो कहता है,“वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह।” गुरु नानक की वाणी हमें फिर याद दिलाती है, “सभ में जोत, जोत है सोई; तिस दै चानण सब में चानण होई।”(हर प्राणी में एक ही प्रकाश है, ईश्वर की ज्योति सबमें समान है।)
संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतर्राष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि सीए(एटीसी) संगीत माध्यमा एडवोकेट किशन सनमुखदास भावानानी गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318
तिरूलडीह गोलीकांड के शहीदों को विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता व समाजसेवियों ने दिया श्रद्धांजलि
सरायकेला/ईचागढ़
(मालखान महतो)
सरायकेला-खरसावां जिला के कुकड़ु प्रखंड क्षेत्र के तिरूलडीह शहीद स्थल, तिरूलडीह शहीद चौक, कुकड़ू,सीरूम एवं ईचागढ़ के चोगा आदारडीह स्थित शहीद स्मारक पर मंगलवार को विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित कर शहीदों को याद किया।
विधायक सविता महतो ने तिरूलडीह शहीद स्थल व शहीद चौक में शहीद अजीत, धनंजय महतो के मुर्ती पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित किया। वहीं शहीद धनंजय महतो के पुत्र उपेन महतो, पत्नी बारी देवी, आजसू पार्टी के केन्द्रीय महासचिव हरेलाल महतो, समाजसेवी खगेन महतो, पूर्व जिप उपाध्यक्ष, अशोक साव, जेएलकेएम नेता देवेन्द्र नाथ महतो, महासचिव गोपेश महतो, सुनील महतो सहित कई राजनीतिक दल के नेता व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित किया। झामुमो प्रखंड कमेटी की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।
मालूम हो कि 21 अक्टूबर 1982 को क्रांतिकारी छात्र युवा मोर्चा के वैनर तले अलग झारखंड सहित सुखा क्षेत्र घोषित करने आदि मांगों को लेकर तत्कालीन ईचागढ़ प्रखंड कार्यालय तिरूलडीह में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा गोली चलाई गई थी, जिसमें अजित महतो एवं धनंजय महतो शहीद हो गए।तब से प्रति वर्ष 21 अक्टूबर को शहादत दिवस मनाने के लिए नेता मंत्री आते हैं और श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। जेएमएम, आजसू एवं बीजेपी झारखंड में सरकार में रहे , लेकिन आज तक शहीद परिवार के लिए कोई पहल नहीं किया गया। सिर्फ चुनाव के समय शहीद परिवार को लेकर चुनावी मुद्दा बनाकर वोट बटोरने का काम ही हुआ। आज भी शहीद धनंजय महतो के परिवार मजदूरी कर जिवन यापन करने को मजबुर है।
RENU DEVI DRINKING WATER पानी प्लांट का उद्घाटन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
सरायकेला/आदित्यपुर
सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बास्को नगर में दूसरा पानी प्लांट ( RENU DEVI DRINKING WATER ) का मंगलवार यानी कि दीपावली के दिन विधिवत रूप से उद्घाटन किया गया। सर्वप्रथम नए पानी प्लांट का पंडित द्वारा विधिवत रूप से पूजा अर्चना की गई। उसके बाद यूनियन बैंक आदित्यपुर ब्रांच के मैनेजर शीव वर्मा एवं समाज सेवी आशीष पति द्वारा फिता काट कर उद्घाटन किया गया।तत्काल नए पानी प्लांट में प्रतिदिन 2000 लीटर पानी की सुविधा उपलब्ध की जा रही है।
आपको बताते चलें कि एक समय था जब लोग पानी के लिए तालाब नदियां एवं कुएं के ऊपर निर्भर रहा करते थे आज के दौर में हर कोई स्वच्छ पानी पीने के लिए जागरूक हो चुका है एवं हर कोई चाहता है कि साफ सुथरा पानी का उपयोग किया जाए जिससे कि कई तरह की बीमारियों से बचा जा सके।
वहीं मंगलवार को उद्घाटन समारोह के मौके पर RENU DEVI DRINKING WATER के संस्थापक रेणु देवी ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि क्षेत्र वासियों की सुविधा एवं क्षेत्र वासियों के स्वास्थ्य को मध्यनजर रखते हुए एवं क्षेत्र वासियों की मांग पर यह फिल्टर पानी प्लांट की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि आज हर कोई स्वच्छ पानी पीने की चाह रखता है उन्होंने कहा कि दूषित पानी पीने से कई तरह की बीमारियां उत्पन्न होती है जिससे कि कितने ही गरीब लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं। आज के दौर में हर किसी को स्वच्छ पानी पीने का अधिकार है चाहे वह छोटी बस्तियों में रहते हो या बड़े-बड़े महलों में रहते हो और इन्ही सब जरूर को देखते हुए यह पानी प्लांट की स्थापना की गई है और जल्द ही पानी की पैकेजिंग कर पानी की बोतल भी मार्केट में भेजा जाएगा जिसकी तैयारियां जोरों पर की जा रही है।
अनुमंडल पदाधिकारी व कार्यपालक अभियंता को सौंपा ज्ञापन
सरायकेला/ईचागढ़
(मालखान महतो)
विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन द्वारा अनुमंडल कार्यालय व कार्यपालक अभियंता चांडिल को एक ज्ञापन सौंपकर 4 नवम्बर 2025 को पुनर्वास कार्यालय चाण्डिल संख्या–2 एवं कार्यपालक अभियंता कार्यालय चाण्डिल के समक्ष अपनी विभिन्न मांगों को लेकर गेट जाम व धरना प्रदर्शन करने सुचना दिया। विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन ने बताया कि सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक एक दिवसीय गैट-जाम सह धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
मंच के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने कहा यह निर्णय चाण्डिल डैम से प्रभावित कुल 116 गाँवों के विस्थापित प्रतिनिधियों की बैठक में लिया गया। विस्थापितों का कहना है कि पुनर्वास, नियोजन एवं विकास कार्यों को लेकर वर्षों से लंबित समस्याओं के समाधान हेतु यह कदम उठाया जा रहा है।
धरना का उद्देश्य प्रशासन एवं संबंधित विभागों का ध्यान विस्थापित परिवारों की वास्तविक समस्याओं की ओर आकर्षित करना है, ताकि पुनर्वास प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके और प्रभावित परिवारों को उनका न्यायोचित अधिकार मिल सके।
विस्थापितों ने अनुमंडल प्रशासन से आग्रह किया है कि 4 नवम्बर के इस धरना कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग प्रदान करें तथा शांति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण सुनिश्चित करें। मौके पर हरे कृष्ण महतो, गुरुचरण टुडू ,सनातन सिंह मुंडा, हाड़ी राम कुमार, विजय पोद्दार, जयप्रकाश सिंह मुंडा, जितेंद्र गोप ,सीमांत महतो ,प्रभात महतो तथा पूर्ण डूबी 43 गांव तथा 16 आशिक डूबी के विस्थापित प्रतिनिधि उपस्थित थे।