सरायकेला/ईचागढ़
साथियों लगातार कई दिनों से हाथियों के हमले से हो रहे मौत की खबर न्यूज़ चैनलों, अखबारों अथवा न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से अथवा सोशल मीडिया के माध्यम से भी हम सभी को प्राप्त हो रहे थी।

इसके साथ ही एक खबर और निकलकर सामने आ रही थी कि 10 दिनों से एक जंगली हाथी मैसाड़ा- कालीचामदा में डेरा जमा हुए था जिसे उक्त स्थान से निकलकर घने जंगल की ओर भेजने का प्रयास लगातार 10 दिनों से वन विभाग द्वारा किया जा रहा था वन विभाग ही नहीं ग्रामीणों के द्वारा भी लगातार हाथी को घने जंगल की ओर भेजने का प्रयास किया जा रहा था लेकिन वन विभाग अथवा ग्रामीणों की प्रयास विफल साबित हो रही थी।
साथ ही वन विभाग द्वारा ग्रामीणों के बीच सुरक्षा के दृष्टिकोण से और हाथी को भगाने हेतु क्षेत्र में लगातार टॉर्च, पटाखा, मोबिल, बोरा आदि का वितरण कर हाथी भगाने में जन सहभागिता को बढ़ाया जा रहा था।
लेकिन वह दिन आ ही गया जब वन विभाग की मेहनत रंग लाई और हाथी को उक्त स्थान से खदेड़ कर वर्तमान में सालबनी के जंगल में भेजा गया। वहीं वन विभाग एवं QRT टीम हाथी पर लगातार नजर बनाई हुई है ताकि हाथी को सुरक्षित घने जंगल की और ले जाया जा सके।
आपको बताते चले की 10 दिनों से मैसाड़ा- कालीचामदा में डेरा डाले इस जंगली हाथी को वन विभाग, पालना का लोकल QRT टीम और बंगाल का QRT टीम तथा ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से इस जटिल भौगालिक क्षेत्र से निकालने में सफलता प्राप्त की है।
इस मामले में प्रभारी वनपाल पातकुम कैलाश चंद्र महतो की अगुवाई में अन्य वन कर्मी , हाथी भगाओ दस्ता, तथा ग्रामीणों द्वारा लगातार 10 दिनों तक प्रयास किया जा रहा था। साथ ही लागातार माइकिंग के माध्यम से ग्रामीणों को सुचना, और जागरूकता बढ़ाया गया।
इस अभियान में वनपाल कैलाश चंद्र महतो, सुरेन्द्र कुमार गोप, मुन्ना सोरेन, वनरक्षी लखीचरण सिंह मुंडा, राजेश किस्कू, भागवत टुडू, राम चरण महतो आदि शामिल हुए।











