ईचागढ़ के हाड़ात गांव में जंगली हाथियों का तांडव, मां बेटी की दर्दनाक मौत, दो गंभीर रूप से घायल।

ईचागढ़ के हाड़ात गांव में जंगली हाथियों का तांडव, मां बेटी की दर्दनाक मौत, दो गंभीर रूप से घायल।

सरायकेला/ईचागढ़

मृतक में एक 35 वर्षीय महिला व एक 13 वर्षीय बच्ची।

मृतक के परिवार को मुआवाजा राशि सौंपते वन विभाग पदाधिकारी व अन्य।

ईचागढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत हाड़ात गांव में शनिवार की अहले सुबह करीब 2 बजे जंगली हाथियों ने एक ही परिवार पर हमला कर मां बेटी को जान से मार डाला, जबकि दो अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतकों की पहचान चाइना देवी (35 वर्ष), जो कमल चांद महतो की पत्नी थीं, और उनकी पुत्री अमिता बाला (13 वर्ष) के रूप में हुई है। वहीं घायलों में कमल चांद महतो के पिता मोहन लाल महतो (72 वर्ष) एवं मां सांतुला देवी (71 वर्ष) के रूप में की गई।

मृतक चायना देवी

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, जिसमें प्रभारी वनपाल मुकेश महतो, राणा प्रताप, सनातन रेबानी, वन रक्षी मुन्ना सोरेन और कैलाश चंद्र महतो शामिल थे। साथ ही ईचागढ़ थाना प्रभारी बजरंग महतो भी अपने दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। तत्काल कार्रवाई करते हुए वन विभाग के अधिकारियों ने मृतक के परिजनों को 50,000 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से एक लाख रुपये नगद सहायता प्रदान की। घायलों को 10-10 हजार रुपए इलाज हेतु तत्काल दिया गया,साथ ही कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रत्येक मृतक के परिजनों को 3,50,000 रुपये की मुआवजा राशि देने की बात कही गई। प्रभारी वनपाल मुकेश कुमार महतो ने बताया कि कमल चांद महतो के माता-पिता का घर को हाथी द्वारा तोड़ा गया, जिससे दोनों घायल हो गए। हल्ला करने पर अचानक मां बेटी अपने कमरे से निकला की हाथियों के चपेट में आने से दोनों की मौत हो गई। ईचागढ़ पुलिस द्वारा दोनों मृतकों के शव को पोस्टमार्टम के लिए सरायकेला सदर अस्पताल भेजा गया है, जबकि घायलों का इलाज एमजीएम अस्पताल में चल रहा है। वन विभाग की ओर से ग्रामीणों के बीच टार्च पटाखा का भी वितरण किया गया।

मृतक अमिता बाला

घटना के बाद ग्रामीणों ने जमकर बबाल मचाया। उप प्रमुख दीपक कुमार साहू, मुखिया नयन सिंह मुण्डा,ग्राम प्रधान बुधु सिंह मुण्डा,तीमीर सिंह मुंडा एवं अन्य आक्रोशित ग्रामीणों ने हाथियों को क्षेत्र से भगाने, घायलों का समुचित इलाज कराने,समुचित मुआवजा एवं 8 वर्षीय अनाथ हुए बच्चा को आवासीय विद्यालय में पढ़ाने, प्रभारी रेंजर के बदले रेंजर तत्काल नियुक्त करने का मांग किया है।

घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है। लोगों का आरोप है कि प्रभारी रेंजर विमोद कुमार न कभी क्षेत्र भ्रमण करते हैं और न ही चांडिल रेंज कार्यालय में उपस्थित रहते है।

सापारुम गाँव में जंगली हाथी के हमले से 60 वर्षीय व्यक्ति की दर्दनाक मौत।

सापारुम गाँव में जंगली हाथी के हमले से 60 वर्षीय व्यक्ति की दर्दनाक मौत।

सरायकेला/तिरूलडीह

सरायकेला-खरसावां जिले के तिरूलडीह थाना क्षेत्र के सापारुम गाँव में जंगली हाथियों के हमले से एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान राधा तंतुबाई के रूप में हुई है, जिनकी उम्र लगभग 60 वर्ष बताई जा रही है।

घटना की सुचना मिलते ही प्रभारी वनपाल मुकेश महतो, थाना प्रभारी कौशल कुमार दलवल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और वन विभाग कि ओर से परिजनों को 50 हजार रुपए नगद मुआवजा का भूगतान किया एवं कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद 3 लाख 50 हजार रूपए मुआवजा राशि देने की बात कही गई।

वहीं तिरूलडीह पुलिस लाश को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हेतु सरायकेला सदर अस्पताल भेज दिया। वनपाल मुकेश कुमार महतो ने बताया कि मृतक शनिवार सुबह शौच के लिए तालाब जा रहा था जहां 6 कि संख्या में जंगली हाथी गांव में घुस आया और इसी दौरान राधा तंतुबाई उसकी चपेट में आ गए। हाथी के हमले से मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है और ग्रामीणों में काफी भय व्याप्त है

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। परिजनों ने वन विभाग से समुचित मुआवजा एवं कम-से-कम चतुर्थ श्रेणी का नौकरी मृतक के एक आश्रीत को देने का मांग किया है। ग्रामीणों के आक्रोश का भी सामना वन विभाग के पदाधिकारियों को करना पड़ा । थाना प्रभारी के समझाने के बाद लोग शांत हुए ।

ग्रामीणों का मांग है कि हाथियों से निजात के लिए ठोस कदम उठाए जाय , गांव में टार्च,पटाखा आदि उपलब्ध कराया जाय एवं हाथियों को क्षेत्र से भगाया जाय ‌।मौके पर मुखिया सुधीर सिंह मुण्डा, पूर्व मुखिया तपन सिंह मुण्डा सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे।

असंगी चेक डैम में नहाने के दौरान दो स्कूली छात्रों की मौत।

असंगी चेक डैम में नहाने के दौरान दो स्कूली छात्रों की मौत।

स्कूल से भाग कर नहाने डैम पहुंचे हुई मौत, परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल

सरायकेला/आर.आई.टी

बृहस्पतिवार को सरायकेला खरसावां जिले के आर.आई.टी थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जिसमें की सेंट्रल पब्लिक स्कूल आदित्यपुर के 5 छात्र स्कूल के वक्त स्कूल से भाग कर नहाने चेक डैम पहुंचे जिसमें की नहाने के दौरान नौवीं कक्षा के दो छात्र रौनक भारद्वाज और गॉडविन थॉमस की मौत हो गई। छात्रों की मौत से इलाके में मातम का माहौल पसर गया है परिजनों की आंखों से आंसू थम नहीं रहे।

घटना की जानकारी मिलने पर आदित्यपुर नगर निगम के अध्यक्ष संजय सरदार  और डिप्टी मेयर अंकुर सिंह घटना स्थल पर पहुंचे और मृतक के परिजनों को ढांढस बंधाया.

घटित घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार सेंट्रल पब्लिक स्कूल के पांच छात्र स्कूल ऑवर्स के दौरान क्लास छोड़कर खरकई नदी पर बने आसंगी चेक डैम में नहाने पहुंचे थे. जब छात्र डैम में उतरे, तो अचानक गहराई का अंदाजा न होने के कारण रौनक और गॉडविन पानी के तेज बहाव और गहराई में समा गए. मौके पर मौजूद उनके सहपाठी प्रशांत कुमार ने बताया कि वह उस वक्त पानी लाने गया था, तभी यह चीख-पुकार मच गई. अन्य दो छात्र किसी तरह सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे.

घटना की सूचना मिलते ही आरआईटी थाना प्रभारी संजीव सिंह दलबल के साथ मौके पर पहुंचे. स्थानीय गोताखोरों की मदद से तत्काल सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया. लगभग एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद गोताखोरों ने दोनों छात्रों के शवों को पानी से बाहर निकाला. पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है.

ग्राम प्रधान शीतल दास की हुई आकस्मिक निधन, क्षेत्र में शोक की लहर।

ग्राम प्रधान शीतल दास की हुई आकस्मिक निधन, क्षेत्र में शोक की लहर।

सरायकेला/ईचागढ़

प्रखंड क्षेत्र के नारो गांव के ग्राम प्रधान सह झामुमो के वरिष्ठ कार्यकर्ता शीतल दास का बुधवार को सांस लेने की तकलीफ़ एवं छाती में दर्द होने से चिकित्सा हेतु जमशेदपुर ले जाने के दौरान रास्ते में ही उनकी हृदय गति रुक जाने से निधन हो गया। 64 वर्षीय शीतल दास की आकस्मिक निधन से गांव एवं क्षेत्र में शोक व्याप्त है।

झामुमो प्रखंड सचिव अमित सिन्हा ने बताया कि मृत शितल दास एक सरल स्वभाव और मिलनसार व्यक्ति थे और हर सामाजिक कार्य में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते थे। उन्होंने बताया कि झामुमो पार्टी के भी सच्चा सिपाही थे। उन्होंने बताया कि ग्राम प्रधान के निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार करकरी नदी घाट पर बुधवार को ही किया गया। ग्राम प्रधान के निधन पर क्षेत्र में शोक की लहर है।

उन्होंने कहा कि शव यात्रा में गांव के सैकड़ों लोग एवं कई झामुमो के वरिष्ठ नेता कार्यकर्ता भी शामिल हुए। वहीं विधायक सविता महतो ने भी शितल दास की आकस्मिक निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि शितल दास का निधन से पार्टी एवं क्षेत्र के लोगों के लिए अपुर्नीय क्षति हुई है। उन्होंने उनके मृत आत्मा की शांति की कामना किया।

आदिवासी कुड़मि समाज के प्रदेश संगठन सचिव स्व. संजीव कुमार महतो के असामयिक निधन पर गहरा शोक

आदिवासी कुड़मि समाज के प्रदेश संगठन सचिव स्व. संजीव कुमार महतो के असामयिक निधन पर गहरा शोक

पश्चिम सिंहभूम

आदिवासी कुड़मि समाज आज अत्यंत मर्माहट और शोक की स्थिति में है। समाज के समर्पित, संघर्षशील एवं कर्मठ नेता प्रदेश संगठन सचिव संजीव कुमार महतो का असामयिक निधन समाज के लिए अपूर्णीय क्षति है।

पश्चिम सिंहभूम जिला अंतर्गत चक्रधरपुर प्रखंड के चंद्री ग्राम निवासी स्व. संजीव कुमार महतो समाज के उन बिरला कार्यकर्ताओं में से थे जिन्होंने जीवनभर कुड़मि समाज की एकता, सम्मान, संस्कृति की रक्षा तथा सामाजिक जागरण के लिए स्वयं को समर्पित रखा। रेल टेका आंदोलन, सामाजिक उत्थान के कार्यों और झारखंड, बंगाल एवं ओडिशा में समाज के संगठन को सुदृढ़ बनाने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

दिनांक 29 अक्टूबर की सुबह टहलने के दौरान हुए दुर्भाग्यपूर्ण सड़क हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आई। तत्पश्चात रेलवे अस्पताल चक्रधरपुर में प्राथमिक उपचार के बाद उचित चिकित्सा हेतु जमशेदपुर टीएमएच में भर्ती कराया गया। जहां उपचार के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें संध्या 7:25 बजे मृत घोषित कर दिया।

उनका इस प्रकार अकस्मात् चले जाना न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि संपूर्ण कुड़मि समाज के लिए गहन शोक और पीड़ा का विषय है। उन्होंने अपने पीछे विधवा मां, एक भाई, एक बहन, शिक्षिका पत्नी, एक पुत्री और एक पुत्र को छोड़ दिया है। समाज इस दुखद घड़ी में शोकाकुल परिवार के साथ खड़ा है और ईश्वर से प्रार्थना करता है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा परिवार को इस असहनीय क्षति को सहने की शक्ति दें।

उनके अंतिम संस्कार के समय समाज के वरिष्ठ मुलखुंटी मूलमानता अजीत प्रसाद महतो, केंद्रीय अध्यक्ष शशांक शेखर महतो, केंद्रीय महासचिव सुनील कुमार गुलिआर, केंद्रीय सहसचित जयराम महतो, गुणधाम मुतरुआर सहित अनेक सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित थे,

जिन्होंने शोकाकुल परिवार को सांत्वना दी और समाज से आह्वान किया कि हम सभी स्व. संजीव कुमार महतो के अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लें।
स्व. महतो जी का जीवन समाजसेवा, निष्ठा और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए समर्पित रहा। उनका जाना केवल एक व्यक्ति के नहीं, बल्कि एक विचारधारा की क्षति है। अब यह हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है कि उनके सपनों के समाज की दिशा में एकजुट होकर कार्य करें।

नही रहे झारखंड के जननायक दिशोम गुरू शिबू सोरेन दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में ली आखरी सांस निधन

नही रहे झारखंड के जननायक दिशोम गुरू शिबू सोरेन दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में ली आखरी सांस निधन

दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन पर 3 दिन का राज्यकिया शोक घोषित

झारखंड/रांची

झारखंड के जननायक दिशोम गुरु शिबू सोरेन (81 वर्ष ) का सोमवार को दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में निधन हो गया. पिछले कई दिनों से बीमार चल रहा थे. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद ट्वीट कर इसकी आधिकारिक जानकारी देते हुए कहा कि उनके निधन से मैं हो गया.गुरुजी शिबू सोरेन झारखंड अलग राज्य के जननायक हैं और उन्होंने ही अपने संघर्ष से झारखंड अलग राज्य का गठन कराया था. शिबू सोरेन का निधन के बाद है झारखंड आंदोलन के एक बड़े युग का समापन हो गया है. शिबू सोरेन अभी राज्यसभा सांसद थे. उनके निधन की खबर पाकर पूरे झारखंड ही नहीं पूरे देश में शोक की लहर है. करीब 81 वर्ष के शिबू सोरेन पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे और वे दिल्ली में इलाजरत थे.झारखंड मुक्ति मोर्चा का उन्होंने झारखंड अलग राज्य के गठन को लेकर अन्य लोगों के साथ मिलकर गठित किया था.

शिबू सोरेन, राष्ट्रीय पटल पर एक चिर परिचित पहचान है. एक आम शख्स से शख्सियत बनने का उनका सफर

झारखंड की राजनीति में  ध्रुव तारा की तरह चमकते रहे गुरुजी का निधन हो गया. गुरूजी का शुरुआती जीवन संघर्षों से भरा रहा. 11 जनवरी 1944 को गोला प्रखंड के नेमरा गांव में सोबरन सोरेन के घर जन्मे शिबू सोरेन को बचपन में प्यार से शिवलाल कहकर पुकारा जाता था. लेकिन उनकी प्रारंभिक शिक्षा शिवचरण मांझी के नाम से हुई. शिवचरण के नाम से उन्होंने 1972 में पहली बार जरीडीह से विधानसभा का चुनाव भी लड़ा था. उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही प्राइमरी स्कूल में हुई. फिर गोला प्रखंड में मौजूद राज्य संपोषित हाई स्कूल में उनके पिता ने नामांकन कराया. जहां आदिवासी छात्रावास में रहकर उन्होंने पढ़ाई को जारी रखा.

किशोरावस्था में ही महाजनों को देने लगे चुनौती

जब उनकी उम्र महज 13 साल थी, तभी एक घटना ने किशोर शिबू सोरेन के जीवन को बदल कर रख दिया. तारीख- 27 नवंबर 1957, जब उन्हें सूचना मिली कि उनके पिता सोबरन सोरेन की महाजनों ने हत्या कर दी है. वरिष्ठ पत्रकार अनुज कुमार सिन्हा की पुस्तक दिशोम गुरु शिबू सोरेन के मुताबिक महाजनों के लड़कों ने एक आदिवासी महिला के खिलाफ अपशब्द कहा था, जिसका विरोध शिबू सोरेन के पिता सोबरन सोरेन ने किया था. यह बात महाजनों को इतनी नागवार गुजरी की साजिश रचकर उनकी हत्या कर दी गई.

पिता की हत्या की घटना ने बदल दी गुरुजी की जिंदगी

गांधीवादी पिता की हत्या ने शिबू सोरेन को भीतर से झकझोर कर रख दिया. उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और महाजनों के खिलाफ फूंक बिगुल दिया. लेकिन महाजनों से लड़ना आसान नहीं था. क्योंकि ग्रामीण महाजनों के कर्ज तले दबे हुए थे. सूद नहीं देने पर जमीन हड़प ली जाती थी. शराब पीलाकर सादे कागज पर अंगूठे का निशान ले लिया जाता था. इन घटनाओं ने शिबू सोरेन को आंदोलन खड़ा करने का रास्ता दिखा दिया. उन्होंने आवाज बुलंद करनी शुरू की तो लोग जुड़ने लगे. इसी दौरान शिबू सोरेन ने शराब और हड़िया के सेवन के खिलाफ ग्रामीणों को जागरूक करना शुरु किया.

टुंडी के आंदोलन से मिली पहचान

अपनी जन्म भूमि गोला के बाद उनको पेटरवार, जैनामोड़, बोकारो और धनबाद में लोग जानने लगे थे. इनके समाज सुधार आंदोलन और महाजनी प्रथा के खिलाफ उलगुलान को बड़ी पहचान मिली धनबाद के टुंडी में. यहां 1972 से 1976 के बीच उनका आंदोलन जबरदस्त रुप से प्रभावी रहा. वह महाजनों द्वारा हड़पी गई जमीन आदिवासियों को वापस कराने में सफलता हासिल करने लगे थे.

शिबू सोरेन की एक आवाज पर हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग तीर-धनुष के साथ जुट जाते थे. एक आह्वान पर हड़पी गई खेतों में लगी फसल काट ली जाती थी. टुंडी के पोखरिया में उन्होंने एक आश्रम बनाया था, जिसे लोग शिबू आश्रम कहते थे. इसी दौरान लोग प्यार और सम्मान से उनको गुरुजी कहने लगे. लेकिन गुरुजी को राजनीतिक पहचान मिली संथाल की धरती पर से उनको दिशोम गुरु यानी देश का गुरु कहलाए.

आचार्य पंडित सुरेश कुमार द्विवेदी का हुआ निधन

आचार्य पंडित सुरेश कुमार द्विवेदी का हुआ निधन

सरायकेला/आदित्यपुर

( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )

इस पूरे संसार में आचार्य पंडित अथवा गुरु की एक अहम भूमिका है उनके ही आशीर्वाद से आपकी शिक्षा साक्षरता, सांसारिक ज्ञान, भौतिक ज्ञान, अथवा इस संसार में अपना जीवन यापन करने के लिए प्रयुक्त ज्ञान इन्हीं से प्राप्त होती है। और संसार में आचार्य अथवा पंडितों का निधन होना इस संसार के लिए अपूर्णीय क्षती के समान माना जाता है। और इस अपूर्णिया क्षती की पूर्ति करना किसी के लिए भी संभव नहीं।

स्वर्गीय पंडित सुरेश कुमार द्विवेदी

कुछ इसी प्रकार मंगलवार की रात्रि में प्रख्यात आचार्य पंडित सुरेश कुमार द्विवेदी का निधन हो गया जो समाज के लिए काफी बड़ी क्षति है पंडित जी काफी दूरदर्शी एवं हाजिर मिजाज चेहरे पर मुस्कान व्यक्तित्व को धारण करते थे।

वहीं पंडित सुरेश कुमार द्विवेदी अपने पीछे दो पुत्र व एक पुत्री के साथ भरा पूरा परिवार छोड़ गए आज बुधवार के दिन पार्वती घाट में उनका अंतिम संस्कार होना है।

आपको बताते चले कि आचार्य पंडित सुरेश कुमार द्विवेदी ने कई जोड़ों की शादीयां भी करवाई है जो कि आज के समय में सफल जीवन यापन कर रहे हैं और उनके आशीर्वाद से पूरा परिवार खुशमय जीवन यापन कर रहा है।

पोप फ्रांसिस के निधन पर भारत सरकार ने देशभर में तीन दिन का राजकीय शोक की घोषणा की।

पोप फ्रांसिस के निधन पर भारत सरकार ने देशभर में तीन दिन का राजकीय शोक की घोषणा की।

नई दिल्ली

पोप फ्रांसिस, जिनका असली नाम जॉर्ज मारियो बर्गोलियो था, मार्च 2013 में पोप चुने गए थे। वह अपने सादगी भरे जीवन, सामाजिक न्याय के प्रति समर्पण और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर मुखर रुख के लिए विश्व भर में जाने जाते थे। 21 अप्रैल 2025 को 88 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। पोप फ्रांसिस के निधन पर भारत सरकार ने देशभर में तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। गृह मंत्रालय ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि महामहिम पोप फ्रांसिस, सर्वोच्च धर्मगुरु का सोमवार, 21 अप्रैल 2025 को निधन हो गया। उनके सम्मान में भारत में तीन दिन का राजकीय शोक मनाया जाएगा।

गृह मंत्रालय के अनुसार, राजकीय शोक का पहला चरण दो दिनों का होगा, जो मंगलवार, 22 अप्रैल और बुधवार, 23 अप्रैल को लागू रहेगा। तीसरा दिन पोप फ्रांसिस के अंतिम संस्कार के दिन मनाया जाएगा। इस दौरान पूरे भारत में उन सभी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा, जहां इसे नियमित रूप से फहराया जाता है। साथ ही, इस अवधि में कोई भी आधिकारिक मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं होगा।

उनके निधन से न केवल कैथोलिक समुदाय, बल्कि पूरी दुनिया में शोक की लहर है। भारत में भी उनके निधन पर कई नेताओं और संगठनों ने शोक व्यक्त किया है। देश में कई चर्चों के पादरियों ने भी उनके निधन पर शोक जताया है।

जी सी जी डी हाई स्कूल में शहीद संजय भद्र को दी गई श्रद्धांजलि

जी सी जी डी हाई स्कूल में शहीद संजय भद्र को दी गई श्रद्धांजलि

मुसाबनी

जीसीजेडी हाई स्कूल में शनिवार को सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर जमशेदपुर के डिप्टी कमांडेंट नीरज कुमार,193 बटालियन के डिप्टी कमांडेंट प्रदीप घोष, मुसाबनी डीएसपी संदीप भगत,सांसद प्रतिनिधि दिनेश साव, पूर्वी मुसाबनी पंचायत के मुखिया दुला राम महाली,चौधरी उमेश सिंह, बबलू सिंह, निराकार साउ, बिनोद लाल,कृष्ण कुमार,किरण कुमारी,अल्पना सिंह, बबलू दत्ता, सरोज दत्ता आदि द्वारा शहीद संजय भद्र की पुण्यतिथि के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में उनके चित्र पर फूल माला चढ़ाकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित किया। इस अवसर पर विद्यालय के सभी वर्ग के छात्राओं ने बारी बारी से शहीद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया।

सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट ने बलिदानी संजय भद्र की पत्नी अनुपा भद्र को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया एवं उपहार भेंट किया। इस मौके पर उनके दोनों पुत्र शिवम भद्र एवं सत्यम भद्र व बलिदानी की बहन भी उपस्थित थे। बताते चलें कि शहीद जवान संजय भद्र ने इस विद्यालय में पढ़ाई कर मैट्रिक पास करने के बाद वर्ष 1995 में सीआरपीएफ में भर्ती हुये थे। शहीद संजय भद्र 19 अप्रैल 2011 को वे बिहार के गया जिला के डुमरिया थाना क्षेत्र नवीगढ़ जंगल क्षेत्र के एक गाँव में नक्सलियो से लोहा लेते शहीद हो गए थे।

जुझारू नेता बृजमोहन सिंह, भाजपा नेता बास्को बेसरा के पुत्र अग्नि बेसरा एवं अन्य कई लोगों के निधन पर जन कल्याण मोर्चा के  अध्यक्ष ओम प्रकाश ने गहरा शोक व्यक्त किया।

जुझारू नेता बृजमोहन सिंह, भाजपा नेता बास्को बेसरा के पुत्र अग्नि बेसरा एवं अन्य कई लोगों के निधन पर जन कल्याण मोर्चा के  अध्यक्ष ओम प्रकाश ने गहरा शोक व्यक्त किया।

सरायकेला/आदित्यपुर

स्व: बृजमोहन सिंह की फाइल तस्वीर

आदित्यपुर के रहने वाले युवा तुर्क, जुझारू, एवं कर्मठ नेता बृज मोहन सिंह, बास्को बेसरा के पुत्र अगनि बेसरा, सराइकेला जिला पुलिस बल के आरक्छि अनिल कुमार झा के आकस्मिक निधन पर हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूँ,साथ ही सरायकेला जिला बार एसोसिएशन के तीन अधिवक्ता (सुरेंद्र नाथ महंता का जनवरी 25 में, अनिरुद्ध महतो का फ़रवरी 25 में एवं तपन मालाकार, लाइब्रेरी सेक्रेटरी, जिला बार एसोसिएशन का मार्च 25, में निधन हो जाने से काफ़ी शोक व्याप्त है, अधिवक्ताओं एवं आम जनो में गहरा दुःख है, ईश्वर सभी दिवंगत के आत्मा को शांति प्रदान करें.इस अपार दुःख के कारण इस वर्ष होली नहीं मनाएंगे। ओम प्रकाश, अध्यक्ष, जन कल्याण मोर्चा आदित्यपुर एवं पूर्व उपाध्यक्ष, जिला बार एसोसिएशन, सेराइकेल्ला

सरायकेला : लोजपा के जिलाध्यक्ष बृज मोहन सिंह का निधन, आदित्यपुर में शोक की लहर

सरायकेला : लोजपा के जिलाध्यक्ष बृज मोहन सिंह का निधन, आदित्यपुर में शोक की लहर

सरायकेला/आदित्यपुर

स्व: बृज मोहन सिंह की फ़ाइल तस्वीर

आदित्यपुर-2 के मार्ग संख्या 10 निवासी तथा पूर्वी सिंहभूम जिला लोजपा के जिलाध्यक्ष बृजमोहन सिंह का आज टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) में निधन हो गया. लगभग 45 वर्ष के स्व बृजमोहन अविवाहित थे तथा अपने पीछे भाई बहन सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं. वे पिछले कुछ समय से फेफड़े की बीमारी से पीड़ित थे. स्व बृजमोहन सिंह के बड़े बहनोई भरत सिंह ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार गुरुवार को उनके परिजनों के आदित्यपुर पहुँचने के बाद किया जाएगा.

पूर्व केंद्रीय मंत्री सह पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के बड़े भाई भीम सिंह मुंडा का निधन।

पूर्व केंद्रीय मंत्री सह पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के बड़े भाई भीम सिंह मुंडा का निधन।

जमशेदपुर

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के बड़े भाई भीम सिंह मुंडा का मंगलवार की सुबह जमशेदपुर के टाटा मोटर्स अस्पताल में निधन हो गया.

मिली जानकारी के अनुसार भीम सिंह मुंडा गले के कैंसर से ग्रसित थे. उनका दिल्ली के अस्पताल में इलाज चल रहा था. कुछ दिनों पूर्व ही भीम सिंह मुंडा को दिल्ली से जमशेदपुर लाया गया था। ठीक नहीं होने के कारण उन्हें जमशेदपुर के टाटा मोटर्स अस्पताल में दो दिन पूर्व इलाज के लिए भर्ती किया गया था. जहां उन्होंने मंगलवार सुबह अंतिम सांस ली.

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