“आदि कर्मयोगी अभियान” में सरायकेला-खरसावाँ की असाधारण उपलब्धि — महामहिम राष्ट्रपति महोदया द्वारा उपायुक्त को सम्मान 🇮🇳✨

“आदि कर्मयोगी अभियान” में सरायकेला-खरसावाँ की असाधारण उपलब्धि — महामहिम राष्ट्रपति महोदया द्वारा उपायुक्त को सम्मान

सरायकेला-खरसावाँ

सरायकेला-खरसावाँ जिले के लिए आज का दिन ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण है।
जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित “आदि कर्मयोगी अभियान” एवं “धरती आबा जनभागीदारी अभियान” के अंतर्गत देश के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिलों में सरायकेला-खरसावाँ जिले का चयन किया गया है।

इस अवसर पर दिनांक 17 अक्टूबर, 2025 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित “आदिकर्मयोगी अभियान नेशनल कॉन्क्लेव” में महामहिम राष्ट्रपति महोदया द्वारा सरायकेला-खरसावाँ जिले के उपायुक्त श्री नितिश कुमार सिंह (भा.प्र.से.) को सम्मान प्रदान किया गया।

यह सम्मान जिले में जनजातीय सशक्तिकरण, समावेशी विकास, नवाचार आधारित प्रशासनिक कार्यशैली और समुदाय की सक्रिय भागीदारी के उत्कृष्ट परिणामों के लिए दिया गया है।

🟢 प्रमुख उपलब्धियाँ:-

  • जनजातीय ग्रामों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट – आवास, सड़क, शिक्षा, पोषण, पेयजल और आजीविका के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य।
  • PESA अंतर्गत पंचायतें – 132
  • Forest Rights Act (FRA) अंतर्गत पंचायतें – 67 (ग्रामों की संख्या – 311)
  • शैक्षणिक संस्थान – प्राथमिक विद्यालय 818, मध्य विद्यालय 502, उच्च विद्यालय 101 (कुल 1421 विद्यालय)
  • आंगनबाड़ी केंद्र – 1373
  • स्वास्थ्य केंद्र – PHC: 14, CHC: 08
  • संचालित छात्रावासों की संख्या – 28
  • कौशल प्रशिक्षण – DDU-GKY अंतर्गत 5793 लाभार्थी एवं राज्य कौशल मिशन के तहत 705 बैच
  • प्रशिक्षित शिक्षक – 4001
  • डिजिटल लर्निंग सेंटर – 199

इन पहलों से जिले के जनजातीय समुदायों के जीवन स्तर में ठोस सुधार हुआ है और प्रशासन ने विकास योजनाओं के शत-प्रतिशत सैचुरेशन का संकल्प लिया है।

इस अवसर पर झारखण्ड राज्य के सरायकेला-खरसावाँ, पाकुड़, जामताड़ा, सिमडेगा और लोहरदगा जिलों को भी सम्मानित किया गया।

यह उपलब्धि साबित करती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद, समर्पण, नवाचार और जनभागीदारी के बल पर समावेशी विकास का सशक्त मॉडल प्रस्तुत किया जा सकता है।

इस सम्मान से न केवल जिले की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और सशक्त हुई है, बल्कि यह हर नागरिक के लिए गर्व का विषय है।

“आदि कर्मयोगी अभियान” में सरायकेला-खरसावाँ जिले का चयन देश के सर्वश्रेष्ठ जिलों में

“आदि कर्मयोगी अभियान” में सरायकेला-खरसावाँ जिले का चयन देश के सर्वश्रेष्ठ जिलों में

सरायकेला-खरसावाँ

सरायकेला-खरसावाँ जिले के लिए यह गर्व का विषय है कि जिला भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा संचालित “आदि कर्मयोगी अभियान” एवं “धरती आबा जनभागीदारी अभियान” के तहत देश के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिलों में चयनित हुआ है।

यह उपलब्धि जिले में संचालित नवाचारी पहलों, समावेशी जनजातीय विकास के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट कार्यों तथा समुदाय की सक्रिय भागीदारी के कारण संभव हुई है।

इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन एवं पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन दिनांक 17 अक्टूबर, 2025 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में किया जा रहा है। इस समारोह में सरायकेला-खरसावाँ जिला सहित झारखण्ड के पाकुड़, जामताड़ा, सिमडेगा एवं लोहरदगा जिले को सम्मानित किया जाएगा।

इस सम्मान से जिले के जनजातीय सशक्तिकरण, भागीदारी आधारित विकास मॉडल और कर्मठ प्रशासनिक प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।

इस राष्ट्रीय समारोह में सरायकेला-खरसावाँ के उपायुक्त श्री नितिश कुमार सिंह (भा.प्र.से.) उपस्थित रहेंगे।

सत्य वह दौलत है जिसे पहले खर्च करो- जिंदगी भर आनंद पाओ, झूठ वह कर्ज़ है- क्षणिक सुख पाओ जिंदगी भर चुकाते रहो

सत्य वह दौलत है जिसे पहले खर्च करो- जिंदगी भर आनंद पाओ, झूठ वह कर्ज़ है- क्षणिक सुख पाओ जिंदगी भर चुकाते रहो

सच्चाई की राह, सुखद जीवन के लिए विनियोग- झूठ का गंतव्य दुखी जीवन की चरम सीमा- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

गोंदिया/महाराष्ट्र

भारत अपनी संस्कृति,आध्यात्मिकता, अहिंसा धर्मनिरपेक्षता,परमो धर्मा और सच्चाई की मूरत राजा हरिश्चंद्र इत्यादि अनेकों विशेषताओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र से यह मानता हूं कि एक झूठ के पीछे सव झूठ बोलना पड़ता है और झूठ के दलदल में मनुष्य घुसता चला जाता है।जिससे उसकी वर्तमान पीढ़ी तो ध्वस्त होती ही है पर आने वाली पीढ़ियों में भी यह दोष समाया रहता है।


साथियों बात अगर हम सच्चाई की साक्षात मूरत राजा हरिश्चंद्र की करें तो,सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र सदैव सत्य बोलते थे। वह अपने सत्य और न्याय के लिए जाने जाते थे। इसलिए आज भी उनकी कहानियां बड़े सम्मान के साथ सुनाई जाती हैं।हमने अपने बड़े बुजुर्गों से अनेक कई किस्से सुने हैं।हम,आज की जनरेशन करीब-करीब हर सच्चाई वाली बात में इस महान मूरत का नाम ज़रूर जोड़तेहैं।हमारे बड़े बुजुर्गों से हमने कई वाक्य सुने हैं, जैसे सच्चाई छुप नहीं सकती बनावट के उसूलों से, सत्य की हार नहीं होती,सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं,सत्यमेव जयते।


साथियों बात अगर हम सत्यमेव जयते इसकी करें तो हम अनेक शासकीय,अशासकीय स्थानों पर इसका उल्लेख ज़रूर देखते हैं।यही सत्य है कि हमेशा सत्य की विजय होती है।

साथियों बात अगर हम भारतीय आध्यात्मिकता की करें तो हमें यही ज्ञान मिलता है कि सत्य व दौलत है जैसे पहले खर्च करो फिर जिंदगी भर आनंद पाओ और झूठ वह कर्ज है जिससे क्षणिक सुख पाओ और जिंदगी भर उसे चुकाते रहो बिल्कुल सत्य वचन!साथियों यह बात अगर मानव के हृदय में बस जाए तो वाह क्या बात है! हम पृथ्वी लोक में ही स्वर्ग के दर्शन कर सकेंगे।अगर हर भारतीय व्यक्ति चाहे वह सरकारी हो या शासकीय कर्मचारी, मंत्री हो या नेता, कार्यकर्ता हो या मालिक,सभी अगर सत्यता रूपी दौलत को पूरी निष्ठा से खर्च करें अर्थात ईमानदारी से अपनी अफसर शाही ड्यूटी, व्यापार-व्यवसायज दिनचर्या अर्थात जीवन के हर काम हर मोड़ पर सत्यता बरसाएगें तो वह खुद तो जीवन का आनंद जरूर पाएंगें परंतु उससे अधिक भारत को स्वर्ग जैसा सुंदर रचना बनाने में अहम रोल अदा करेगें। भारत एक अपराध मुक्त भारत की परिकल्पना में साकार होगा।कोई अदालत, पुलिस स्टेशन,जांच एजेंसियां नहीं होगी क्योंकि यह सब झूठ और अपराध को काटने के लिए ही बनाई गई हैं।


साथियों बात अगर हम झूठ की करें तो हमने अपने व्यवहारिक जीवन में देखा होगा कि बेईमान, रिश्वतखोर, झूठा, भ्रष्टाचारी, धोखेबाज इत्यादि तरह के मानव कभी अपने जीवन में सुखी नहीं होते। चाहे कितना भी अवैध धन कमा लें,उनके पीछे परिवार का, उनके स्वास्थ्य का, मानसिक हालत हमेशा दुखों में बनी रहती हैउनके शरीर के नसों में झूठ रूपी खून दौड़ता है और इन नकारात्मक झूठे व्यवहारों से उनका क्षणिक आर्थिक सुख मिलता है परंतु उसके लिए उनको जीवन भर कष्टों में गुजारना पड़ता है। जितना क्षणिक सुख प्राप्त होता है वह ब्याज सहित याने अतिरिक्त दुख सहित यहीं इस जीवन में भोगना पड़ता है और फिर अंत में पछताते हैं के ऐसा क्यों हुआ,ऊपर वाले से क्षमा याचना करते हैं।पर कहते हैं ना कि जब चिड़ियां चुग गई खेत,अब पछतावे क्या होए?

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र


साथियों बात अगर हम सत्य की गहराई की करें तो,सत्य दो प्रकार का होता है- एक व्यवहारिक सत्य और दूसरा वास्तविक। व्यवहारिक सत्य का अर्थ है जैसा देखा, जैसा सुना और जैसा अनुभव किया, उसको वैसा ही बोलना सत्य कहलाता है।व्यवहारिक सत्य में हो सकता है, जो एक के लिए सत्य है, वो दूसरे के लिए असत्य हो। वैसे तो हर व्यक्ति अपने मुताबिक अपना सत्य बना लेता है। यह व्यवहारिक सत्य, अनुभव, नजरिए और देश, काल के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। इसलिए इसमें मतभेद की संभावना बनी रहती है।ईमानदार और न्यायवादी व्यक्ति ही सत्य का पालन करता है।यह देखा गया है कि जो लोग ईमानदार होते हैं वह सदैव सच बोलते हैं। झूठे बेईमान और मक्कार लोग सदैव असत्य का फायदा लेकर अपना काम बनाते हैं। हम ऐसे लोगों से बचना चाहिए जो अपने फायदे के लिए (झूठ) असत्य बोलते हैं।सत्य का अर्थ है ‘सते हितम्’ अर्थात् जिसमें हित या कल्याण निहित हो। सत्य भूत, भविष्य एवं वर्तमान तीनों काल में एक सा रहता है तथा इससे यथार्थ का ज्ञान होता है। साधारण बातचीत में जो सच है, यथार्थ है उसे जानना, समझना, मानना, कहना एवं उसके अनुसार ही व्यवहार करना सत्य है। मानव बोध में सत्य के प्रति श्रद्धा एवं असत्य के प्रति घृणा स्वाभाविक रूप से पाई जाती है। मनुष्य जीवन के लिए सत्य सबसे बड़ी शक्ति हैं।जीवन तथा संसार के सत्य की तलाश कर उसे जीवन में अपनाना मानव मात्र का मूल उद्देश्य हैं।हमारी संस्कृति में सत्य को बड़ा महत्व दिया गया हैं।इस सम्बन्ध में एक महापुरुष ने ठीक ही कहा कि सत्य परेशान हो सकता है मगर पराजित नहीं. भारत की भूमि पर हरिश्चन्द्र जैसे राजा हुए जिनकी सत्यनिष्ठा के चलते वे सत्यवादी कहलाए।सत्य के रास्ते पर चलकर व्यक्ति बड़ी-बड़ी समस्या का समाधान आसानी से कर सकता है। सत्य के मार्ग पर चलकर कई लोगों ने सफलता प्राप्त कर अपना और अपने परिवार का भला किया है।सत्य के मार्ग पर चलकर कई लोगों ने सफलता प्राप्त कर दुनिया को बदला है । सत्य बोलने से व्यक्ति को सभी सम्मान देते हैं। ऐसा कहा जाता है कि तीन चीजें छुपाए नहीं छुपती- सूरज, चंद्रमा और सत्य। जो लोग सत्य का, न्याय का पक्ष लेते हैं उनकी प्रशंसा सभी लोग करते हैं।सत्य का साथ देने वालों को इतिहास स्वर्णिम पन्नों पर दर्ज करता है। परंतु जो लोग झूठ,असत्य का साथ देते हैं उनकी चारों ओर आलोचना होती है।

किसी ने खूब ही कहा है कि
चन्द्र टरै, सूरज टरै, टरै जगत व्यवहार।’
पै दृढ़ हरिश्चन्द्र को टरै न सत्य विचार।..
सांच बराबर तप नहीं, झूंठ बराबर पाप।
जाके हृदय सांच है, ताके हृदय आप

किसी ने धर्म के दस लक्षण बताए हैं, जिनमें सत्य भी प्रमुख स्थान रखता है।
‘धृतिः क्षमा दमोऽस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रहः। धीविद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्।।’
अर्थात् धैर्य, क्षमा, संयम, अस्तेय (चोरी न करना ), शौच ( अंतर्मन और शरीर की पवित्रता ), इन्द्रिय निग्रह (इन्द्रियों से धर्म सम्मन आचरण), धी ( सत् बुद्धि), विद्या, सत्य एवं अक्रोध यानी हमेशा शांत रहना।
अतः अगर हम पूरे उपरोक्त विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करेंगे तो हम पाएंगे के सत्य व दौलत है जिसे पहले खर्च करो फिर जिंदगी भर आनंद पाओ और झूठ वह कर्ज है जिसमें सैनिक सुख पाओ फिर जिंदगी भर जो करते रहो और सच्चाई की राह सुखद जीवन के लिए एक विनियोग है तथा झूठ का गंतव्य दुखी जीवन की चरम सीमा है

संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9359653465

उत्कृष्ट कार्य हेतु ईचागढ़ की सेविका रिंकी महतो को जिला में मिला प्रथम स्थान

उत्कृष्ट कार्य हेतु ईचागढ़ की सेविका रिंकी महतो को जिला में मिला प्रथम स्थान

सरायकेला/ईचागढ़


(मालखान महतो)
सरायकेला-खरसावां जिला के ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के आंगनवाड़ी केंद्र तिरुलडीह 2 की सेविका रिंकी महतो को पोषण ट्रैकर के हर क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए बुधवार को उपायुक्त कार्यालय सरायकेला में पोषण माह 2025 के समापन समारोह में सम्मानित किया गया। जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सत्या ठाकुर के द्वारा प्रमाण पत्र और अंग वस्त्र दे कर सम्मनित किया गया।

वहीं महिला पर्यवेक्षिका कृष्णा देवी ने बताया कि रिंकी महतो ईचागढ़ परियोजना के आंगनवाड़ी केंद्र तिरुलडीह 2 की सेविका है। इन्हे पोषण ट्रैकर पर हर क्षेत्र पर प्रतिदिन सुचारु रुप से कार्य की है और पूरे जिले में प्रथम स्थान प्राप्त की है। उन्होंने बाकी सेविकाओं से भी पोषण ट्रैकर के हर क्षेत्र पर अच्छे से कार्य करने की अपील की है।

उप प्रमुख मो. एकराम ने कराया जर्ज़र सड़क का मिट्टी-मोरम से मरम्मती

उप प्रमुख मो. एकराम ने कराया जर्ज़र सड़क का मिट्टी-मोरम से मरम्मती

सरायकेला/ईचागढ़

सरायकेला-खरसावां जिला के कुकड़ू प्रखंड क्षेत्र के तिरुलडीह-चौड़ा मुख्य पथ (सोनाराम महतो के घर के पास) से होकर मध्य विद्यालय कुदा तक जाने वाली जर्जर सड़क की मरम्मत कुकड़ू प्रखंड के उप प्रमुख मो. एकराम की पहल पर कराई गई।

ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही परेशानी को देखते हुए स्वयं उपप्रमुख ने जेसीबी और ट्रैक्टर लगवाकर सड़क पर मिट्टी-मोरम डालने का कार्य करवाया।
बरसात के दिनों में इस सड़क पर पानी जमा हो जाने से स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को आवाजाही में भारी दिक्कत हो रही थी।

आए दिन लोग फिसलकर गिर जाते थे। ग्रामीणों की शिकायत पर उप प्रमुख मो. एकराम ने त्वरित पहल करते हुए अस्थायी रूप से मरम्मत का कार्य पूरा कराया। उप प्रमुख मो. एकराम ने कहा कि आगामी दिनों में 15वीं वित्त आयोग से फंड प्राप्त होने पर इस सड़क पर पीसीसी निर्माण कराया जाएगा, ताकि लोगों को स्थायी राहत मिल सके। इस मौके पर तिरुलडीह थाना के एएसआई रंजीत प्रसाद भी मौजूद थे। उन्होंने उप प्रमुख के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्य ग्रामीण हित में सराहनीय पहल है।

क्रोध का विकराल रूप जुनून है, जो जीव पर सवार होकर जघन्य से जघन्य अपराध करा देता है।

क्रोध का विकराल रूप जुनून है, जो जीव पर सवार होकर जघन्य से जघन्य अपराध करा देता है।

गोंदिया/महाराष्ट्र

क्रोध में व्यक्ति आपा खो देता है-एक दोष को दूर करने के लिए अनेक कुतर्क पेश करता है।

क्रोध से उत्पन्न हुए अपराधों के औचित्य को सिद्ध करने के लिए क्रोधी व्यक्ति कुतर्क कर दूसरे को ही दोषी सिद्ध करता है – एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

भारतीय संस्कृति, सभ्यता के बारे में हमने साहित्य और इतिहास के माध्यम से और भारत माता की गोद में रहकर पारिवारिक संस्कृति,मान सम्मान,रीति-रिवाजों से इसे प्रत्यक्ष महसूस भी कर रहे हैं। परंतु हमारे बड़े बुजुर्गों के माध्यम से हमने कई बार सतयुग का नाम सुने हैं, जिसका वर्णन वे स्वर्गलोक़ के तुल्य करते हैं। याने इतनी सुखशांति, अपराध मुक्ति, इमानदारी,शांति सरोवर तुल्य, कोई चालाकी चतुराई गलतफहमी या कुटिलता या भ्रष्टाचार नहीं, बस एक ऐसा युग कि कोई अगर कुछ दिन, माह के लिए बाहर गांव जाए तो अपने घरों को ताला तक लगाने की ज़रूरत नहीं!अब कल्पना कीजिए कि अपराध बोध मुक्त युग!मेरा मानना है कि हमारी पूर्व की पीढ़ियों ने ऐसा युग जिए होंगे तब यह बोध आगे की पीढ़ियों में आया,जिसे सतयुग के नाम से जरूर जाना जाता है।


साथियों बात अगर हम वर्तमान युग पर बड़े बुजुर्गों में चर्चा की करें तो इस इसे कलयुग नाम देते हैं, याने सभी प्रकार के अपराध बोध से युक्त संसार। हर तरह की बेईमानी, भ्रष्टाचार कुटिलता से भरा हुआ युग!आज भी बुजुर्गों का मानना है कि वह सतयुग फिर आएगा,याने आज की तकनीकी भाषा में अपराध मुक्त, भ्रष्टाचार बेईमानी कुटिलता मुक्त पारदर्शिता और अनेकता में एकता वाले भारत की परिकल्पना का युग।

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

साथियों बात अगर हम अपराध, भ्रष्टाचार, बेईमानी, कुटिलता से भरे जग की करें तो मेरा मानना है कि इसका मुख्य प्रवेश द्वार क्रोध, उत्तेजित स्वभाव व लालच है जिसमें आपराधिक बोध प्रवृत्ति का जन्म होता है और व्यक्ति क्रोध में हिंसा, अपराध, लालच, भ्रष्टाचार, बेईमानी और कुटिलता के अमानवीय कृति और अन्य गलत कार्यों की ओर मुड़ जाता है और आगे बढ़ते ही चले जाता है जब जीवन के असली महत्व का पता चलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। क्रोध की अभिव्यक्ति हमारे अंदर की कुंठा, हिंसा व द्वेष के कारण भी हो सकती है। वर्तमान काल में अपराधों के बढ़ने का एक प्रमुख कारण भीषण क्रोध ही है। क्रोध से उत्पन्न हुए अपराधों के औचित्य को सिद्ध करने के लिए क्रोधी व्यक्ति कुतर्क कर दूसरे को ही दोषी सिद्ध करता है। एक दोष को दूर करने के लिए अनेक कुतर्क पेश करता है। क्रोध में व्यक्ति आपा खो देता है। क्रोध में अंतत: बुद्धि निस्तेज हो जाती है और विवेक नष्ट हो जाता है। क्रोध का विकराल रूप जुनून है। आदमी पर जुनून सवार होने पर वह जघन्य से जघन्य अपराध कर बैठता है। जुनून की हालत में उसे मानवीय गुणों का न बोध रह पाता है और न ही ज्ञान। क्रोध मानव का सबसे बड़ा शत्रु है, बहुत बड़ा अभिशाप है।

साथियों बात अगर हम शांत, परोपकारी स्वभाव ही जीवन का मूल मंत्र की करें तोअभिभावकों, शिक्षकों को बच्चों को यह शिक्षा देना है और हम बड़ों को यह स्वतः संज्ञान लेना है कि माचिस की तीली बनने की बजाय शांत सरोवर बनना होगा, जिसमें कोई अंगारा भी फेंके तो स्वयं ही बुझ जाए, बस! यह भाव अगर हम मनीषियों के हृदय में समाहित हो जाए तो यह विश्व फिर सतयुग का रूप धारण करेगा जहां किसी तरह का कोई अपराध बोध या गलत काम का भाव नहीं होगा। सभी मनीषी जीव परोपकारी भाव से युक्त होंगे भाईचारा, प्रेम, सद्भाव की बारिश होगी जहां बिना ताले घरबार छोड़ कहीं भी जाने के भाव जागृत होंगे और हमारे बुजुर्गों का सतयुग रूपी सपना साकार होगा।

साथियों बात अगर हम स्वयं को माचिस की तीली याने क्रोधित होने पर विपरीत परिणामों की करें तो, क्रोध मनुष्य को बर्बाद कर देता है और उसे अच्छे बुरे का पता नही चलने देता, जिस कारण मनुष्य का इससे नुक्सान होता है। क्रोध मनुष्य का प्रथम शत्रु होता है। क्रोधी व्यक्ति आवेश में दूसरे का इतना बुरा नहीं जितना स्वयं का करता है। क्रोध व्यक्ति की बुद्धि को समाप्त करके मन को काला बना देता है।

साथियों बात अगर हम क्रोध को नियंत्रित कर समाप्त करने की तकनीकी की करें तोइलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अनुसार क्रोध के नकारात्मक प्रभाव पूरे इतिहास में देखे गए हैं। प्राचीन दार्शनिकों, धर्मपरायण व्यक्तियों और आधुनिक मनोवैज्ञानिकों द्वारा प्रतीत होने वाले अनियंत्रित क्रोध का मुकाबला करने की सलाह दी गई है। आधुनिक समय में, क्रोध को नियंत्रित करने की अवधारणा को मनोवैज्ञानिकों के शोध के आधार पर क्रोध प्रबंधनकार्यक्रमों में अनुवादित किया गया है।क्रोध प्रबंधन क्रोध की रोकथाम और नियंत्रण के लिए एक मनो-चिकित्सीय कार्यक्रम है ।

इसे क्रोध को सफलतापूर्वक तैनात करने के रूप में वर्णित किया गया है। क्रोध अक्सर हताशा का परिणाम होता है,या किसी ऐसी चीज से अवरुद्ध या विफल होने का अनुभव होता है जिसे विषय महत्वपूर्ण लगता है। अपनी भावनाओं को समझना क्रोध से निपटने का तरीका सीखने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। जिन बच्चों ने अपनी नकारात्मक भावनाओं को क्रोध डायरी में लिखा था, उन्होंने वास्तव में अपनी भावनात्मक समझ में सुधार किया, जिससे बदले में कम आक्रामकता हुई। जब अपनी भावनाओं से निपटने की बात आती है, तो बच्चे ऐसे उदाहरणों के प्रत्यक्ष उदाहरण देखकर सबसे अच्छा सीखने की क्षमता दिखाते हैं, जिनके कारण कुछ निश्चित स्तर पर गुस्सा आया। उनके क्रोधित होने के कारणों को देखकर, वे भविष्य में उन कार्यों से बचने की कोशिश कर सकते हैं या उस भावना के लिए तैयार हो सकते हैं जो वे अनुभव करते हैं यदि वे खुद को कुछ ऐसा करते हुए पाते हैं जिसके परिणामस्वरूप आमतौर पर उन्हें गुस्सा आता है, इसके साथ ही एकांत में जाकर ध्यान के माध्यम से क्रोध के विकारों को नष्ट करने का प्रयास करें तो ऋणात्मक ऊर्जा को मोड़कर हम सकारात्मक ऊर्जा से विवेक सम्मत निर्णय लेने में सक्षम हो सकते हैं।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि क्रोध का विकराल रूप जुनून है, जो जीव पर सवार होकर जघन्य से जघन्य अपराध करा देता है।क्रोध में व्यक्ति आपा खो देता है-एक दोष को दूर करने के लिए अनेक कुतर्क पेश करता हैक्रोध से उत्पन्न हुए अपराधों के औचित्य को सिद्ध करने के लिए क्रोधी व्यक्ति कुतर्क कर दूसरे को ही दोषी सिद्ध करता है

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9359653465

नक्सलियों द्वारा किए गए आईईडी विस्फोट में घायल सीआरपीएफ के हेड कांस्टेबल महेंद्र लस्कर शहीद।

नक्सलियों द्वारा किए गए आईईडी विस्फोट में घायल सीआरपीएफ के हेड कांस्टेबल महेंद्र लस्कर शहीद।

चाईबासा

चाईबासा के मनोहरपुर प्रखंड के सारंडा जंगल में शुक्रवार की देर रात नक्सलियों द्वारा किए गए आईईडी विस्फोट में घायल सीआरपीएफ के हेड कांस्टेबल महेंद्र लस्कर ने इलाज के दौरान वीरगति प्राप्त कर ली। वे असम के नौगांव जिले के रहने वाले थे।

मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार की रात नक्सलियों ने प्रतिरोध सप्ताह के दौरान सुरक्षा बलों पर हमला बोला था। इस आईईडी विस्फोट में सीआरपीएफ 60 बटालियन के तीन जवान घायल हुए थे, जिनमें इंस्पेक्टर कौशल कुमार मिश्रा और सब-इंस्पेक्टर रामचंद्र गोगी गंभीर रूप से जख्मी हैं। दोनों का इलाज उड़ीसा के राउरकेला अस्पताल में चल रहा है।

शहीद महेंद्र लश्कर का पार्थिव शरीर रांची लाया जा रहा है, जहां पोस्टमार्टम के बाद सीआरपीएफ कैंप में उन्हें अंतिम सलामी दी जाएगी। पुलिस मुख्यालय ने उनके शहीद होने की आधिकारिक पुष्टि की है।

चाईबासा एसपी अमित रेणू ने बताया कि सारंडा में सुरक्षा बलों द्वारा नक्सल विरोधी अभियान चलाया जा रहा था, तभी दो आईईडी धमाके हुए। इस हमले से स्पष्ट है कि नक्सली अब भी घने जंगलों में सक्रिय हैं और सुरक्षा बलों को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं।

घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में सोमेश सोरेन कीजीत निश्चित: प्रधान सोरेन

घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में सोमेश सोरेन कीजीत निश्चित: प्रधान सोरेन

मुसाबनी

जिस तरह से घाटशिला विधानसभा का उपचुनाव जैसे जैसे नजदीक आते जा रहा है वैसे वैसे अपने पार्टी की उम्मीदवार को जीतने के लिए गांव गांव जाकर समर्थन जितना का प्रयास कर रहे हैं उसी क्रम में अपने उम्मीदवार को जीतने के लिए प्रखंड के सुरदा गांव में प्रखंड अध्यक्ष प्रधान सोरेन की अध्यक्षता में झामुमो का कार्यक्रम आयोजित क़ी गई जिसमे में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में झामुमो युवा नेता सोमेश चंद्र सोरेन शामिल हुए.

इस कार्यक्रम में हेमंत सरकार के जन कल्याणकारी योजनाओं एवं विकास कार्यों से प्रभावित होकर भारतीय जनता पार्टी के महिला नेत्री लक्ष्मी रानी पातर एवं जयंती हुई के नेतृत्व में भाजपा एवं आजसू के सैकड़ों समर्थको के साथ झामुमो पार्टी में शामिल हुए। सभी महिलाओं एवं युवाओं को मुख्य अतिथि सोमेश सोरेन ने माला पहनाकर सम्मानित कर झामुमो में शामिल किया इस अवसर पर शामिल महिलाओ ने कहा क़ि अपने उम्मीदवार सोमेश सोरेन की जिताने के लिए तन मन धन से हम लोग काम करेंगे सोमेश सोरेन को जिताने के लिए घर -घर जाकर लोगों संपर्क करेंगे, ताकि भारी बहुमत से जीत हासिल हो सके.

ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए रफ्तार को आगे बढ़ाने के लिए एन.डी.ए प्रत्याशी को जीताने का काम करें: बुद्धेश्वर मुर्मू

ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए रफ्तार को आगे बढ़ाने के लिए एन.डी.ए प्रत्याशी को जीताने का काम करें: बुद्धेश्वर मुर्मू

मुसाबनी

आजसू पार्टी में बुधवार को जिला प्रधान सचिव बुद्धेश्वर मुर्मू के नेतृत्व में आगामी घाटशिला विधानसभा उपचुनाव को लेकर एन डी ए के पक्ष में गोहला पंचायत के विक्रमपुर गांव का दौरा किया गया।

इस दौरान विक्रमपुर गांव में ग्राम प्रधान मानसिंह सोरेन के अध्यक्षता में ग्रामीणों के साथ बैठक किया गया और आगामी घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में एन डी ए प्रत्याशी के पक्ष में वोट देने की अपील कि गई । उन्होंने ग्रामीणों के समक्ष वर्तमान हेमंत सरकार द्वारा गांव के विकास में शिथिलता का आरोप लगाते हुए क्षेत्र का विकास रफ्तार को आगे बढ़ाने के लिए एन डी ए प्रत्याशी को जीताने के लिए अपील की गई। उन्होंने वर्तमान सरकार पर बोलते हुए कहा की गांव की विकास को हेमंत सरकार द्वारा ठप्प करके रख दिया है । वर्तमान पंचायत जो गांव के विकास का पैमाना माना जाता है पूरे झारखंड में मईया योजना के नाम से विकास ठप्प पड़ा हुआ है । घाटशिला विधानसभा विकास का रफ्तार को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने एन डी ए प्रत्याशी को जीताने की अपील की है । जिला प्रधान सचिव बुद्धेश्वर मुर्मू ने ग्रामीणों को बताया की आगामी 16 अक्टूबर को आजसू पार्टी के सुप्रीमो का घाटशिला आगमन होने जा रहा है।

उन्होंने उपस्थित ग्रामीणों को कहा कि आजसू पार्टी के सुप्रीमो सुदेश कुमार महतो का आगमन आगामी 16 अक्टूबर को घाटशिला में होने जा रहा है । इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक ग्रामीणों को उपस्थित होने की अपील की गई।

इस अवसर पर आजसू के जिला प्रधान सचिव बुद्धेश्वर मुर्मू,निशित पातर,विक्रमपुर ग्राम प्रधान मानसिंह सोरेन, पांडु मुर्मू,नूरी हो, बुधराई सोरेन, राकेश मुर्मू,, मोनिन पातर, शक्ति पदों राउत आदि उपस्थित थे।

भारत-ब्रिटेन नई आर्थिक साझेदारी की दास्तान -प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की ऐतिहासिक सफ़ल भारत यात्रा 2025- व्यापार निवेश, तकनीक और विश्वास की नई परिभाषा

भारत-ब्रिटेन नई आर्थिक साझेदारी की दास्तान -प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की ऐतिहासिक सफ़ल भारत यात्रा 2025- व्यापार निवेश, तकनीक और विश्वास की नई परिभाषा

“डेड इकोनॉमी”कहने वालों को करारा जवाब

उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में 125 से अधिक शीर्ष सीईओ, अग्रणी उद्यमी, विश्वविद्यालयों के कुलपति और सांस्कृतिक संस्थानों के प्रमुख शामिल हैं,जो यात्रा के महत्व को रेखांकित करता है- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

गोंदिया/महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर ब्रिटिश प्रधानमंत्री सर कीर स्टार्मर की 9-10 अक्टूबर 2025 की भारत यात्रा ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। यह यात्रा केवल दो दिनों की औपचारिक मुलाक़ात नहीं, बल्कि 21वीं सदी के वैश्विक व्यापारिक समीकरणों में भारत की निर्णायक भूमिका को स्वीकार करने की ठोस अभिव्यक्ति है।भारतीय पीएम के निमंत्रण पर भारत पहुंचे स्टार्मर का मुंबई एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत हुआ, जहां से इस यात्रा की शुरुआत ने एक ऐसा संदेश दिया “भारत अब वैश्विक शक्ति संतुलन का निर्णायक केंद्र है”।

पीएम ने ब्रिटेन पीएम के साथ मुलाकात की एक तस्वीर साझा करते हुए कहा कि भारत और ब्रिटेन के रिश्ते तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और”नई ऊर्जा से भरे हुए हैं”एक तस्वीर में पीएम मोदी ब्रिटिश पीएम के साथ एक ही कार में नजर आए मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यहमानता हूं कि अमेरिका द्वारा भारत को डेड इकोनामी कहे जाने व 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने के बाद भारत-यूके रिश्तों का नया दौर शुरू हो गया है, व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी पर केंद्रित कूटनीति ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत डेट इकोनामी नहीं है,आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी क़े सहयोग से आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, भारत-ब्रिटेन नई आर्थिक साझेदारी की दास्तान,प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की ऐतिहासिक सफ़ल भारत यात्रा 2025- व्यापार,निवेश, तकनीक और विश्वास की नई परिभाषा।

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

साथियों बात अगर हम ब्रिटेन पीएम की दो दिवसीय यात्रा की करें तो, यह ऐसे समय में हो रही है जब भारत और ब्रिटेन दोनों ही अपने-अपने आर्थिक और रणनीतिक भविष्य के पुनर्संरचना के दौर से गुजर रहे हैं। यात्रा का प्रमुख उद्देश्य व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग को सुदृढ़ करना है। ब्रिटिश पीएम के साथ आए उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में 125 से अधिक शीर्ष सीईओ, अग्रणी उद्यमी, विश्वविद्यालयों के कुलपति और सांस्कृतिक संस्थानों के प्रमुख शामिल हैं, यह अपने आप में इस यात्रा के महत्व को रेखांकित करता है।यह केवल एक राजनयिक यात्रा नहीं, बल्कि ब्रिटिश व्यापारिक समुदाय का भारत के प्रति बदलता नजरिया दर्शाने वाली ऐतिहासिक घटना है। ब्रिटेन के कई औद्योगिक घराने अब भारत को मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी हब के रूप में देख रहे हैं, न कि केवल एक उपभोक्ता बाज़ार के रूप में।“डेड इकोनॉमी” कहने वालों को करारा जवाब हैँ।


साथियों बात अगर हम अमेरिकी राष्ट्रपति द्वाराकुछ समय पहले भारत की अर्थव्यवस्था को “डेड इकोनामी” कहकर प्रश्न उठाए गए थे। वहीं भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद, वैश्विक व्यापार जगत में भारत की नीतियों को लेकर बहस तेज़ हो गई थी।लेकिन ब्रिटिश प्रधानमंत्री की यह यात्रा उस सोच को सीधा जवाब देती है। ब्रिटिश पीएम ने मुंबई में उतरते ही कहा कि “भारत 2028 तक दुनियाँ की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है, और ब्रिटेन उस यात्रा का मजबूत भागीदार बनेगा।”यह बयान न केवल आर्थिक विश्वास का प्रतीक है, बल्कि यह उन तमाम संशयवादियों के लिए एक संदेश है जो भारत की विकास गाथा पर सवाल उठाते रहे हैं।


साथियों बातें कर हम ब्रिटेन के जेम्बो डेलिगेशन की करें तो यह विश्वास की कूटनीतिक मिसाल हैँ, इतिहास में शायद ही ऐसा हुआ हो जब ब्रिटेन का इतना बड़ा प्रतिनिधिमंडल किसी देश की यात्रा पर आया हो। यह “जेम्बो डेलिगेशन”भारत-ब्रिटेन संबंधों की गहराई और गंभीरता दोनों को दर्शाता है। 125 से अधिक शीर्ष सीईओ और शिक्षाविदों के साथ प्रधानमंत्री स्टार्मर का आना इस बात की पुष्टि करता है कि ब्रिटेन भारत को एक ऐसे रणनीतिक सहयोगी के रूप में देख रहा है, जो उसके पोस्ट-ब्रेक्सिट युग में वैश्विक प्रभाव को बनाए रख सकता है।इस प्रतिनिधिमंडल में ऑक्सफोर्ड कैम्ब्रिज और लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स जैसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के कुलपति शामिल हैं, जो शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भारत के साथ साझेदारी की नई संभावनाओं पर विचार करेंगे। वहीं, तकनीकी कंपनियों के प्रमुख भारत में एआई, ग्रीन एनर्जी,साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में निवेश की नई संभावनाओं को तलाश रहे हैं।


साथियों बात अगर हम मोदी- स्टार्मर शिखर वार्ता साझेदारी की नई परिभाषा की करें तो नई दिल्ली में मोदी और कीर स्टार्मर के बीच हुई शिखर बैठक में व्यापार, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और संस्कृति को केंद्र में रखकर गहन चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने यह स्पष्ट किया कि भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाएगा।बैठक में भारत ने ब्रिटेन को रक्षा उत्पादन, अंतरिक्ष तकनीक और ग्रीन एनर्जी मिशनों में साझेदारी के लिए आमंत्रित किया। वहीं ब्रिटेन ने भारत में अपने निवेश को तीन गुना बढ़ाने का आश्वासन दिया।“इनोवेशन पार्टनरशिप”के तहत दोनों देशों के बीच स्टार्टअप्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्रों में संयुक्त रिसर्च पर सहमति बनी।


साथियों बात अगर हम भारत की ओर झुकता ब्रिटेन, वैश्विक शक्ति समीकरण में बदलाव कोसमझने की करें तो, ब्रिटेन पीएम की यात्रा ब्रिटिश विदेश नीति में एक मौलिक परिवर्तन का प्रतीक है। यह वही ब्रिटेन है जिसने दशकों तक भारत को “डेवलपिंग नेशन” की दृष्टि से देखा था। लेकिन अब यह मान्यता बदल चुकी है। भारत को ब्रिटेन अब एक इक्वल पार्टनर, एक टेक्नोलॉजिकल पॉवरहाउस और एक वैश्विक निवेश गंतव्य के रूप में स्वीकार कर रहा है।ब्रेक्सिट के बाद ब्रिटेन को यूरोपीय संघ के बाहर नए आर्थिक साझेदारों की तलाश थी। ऐसे में भारत उसकी पहली प्राथमिकता बनकर उभरा है। ब्रिटिश मीडिया इसे“यूकेस पीवोट टू इंडिया ”कह रहा है।


साथियों बात अगर हम भारत के लिए अवसर और जिम्मेदारी दोनों को समझने की करें तो,यह यात्रा भारत के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आई है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी है। भारत को अब यह साबित करना होगा कि वह केवल निवेश आकर्षित करने वाला देश नहीं, बल्कि विनिर्माण, नवाचार और नीति स्थिरता के लिहाज से विश्वसनीय साझेदार भी है।भारत के लिए यह समय है कि वह अपने मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, और स्टार्टअप इंडिया जैसे कार्यक्रमों को ब्रिटिश सहयोग के साथ वैश्विक स्तर पर पहुंचाए। विशेष रूप से एआई, सेमीकंडक्टर, और क्लाइमेट टेक्नोलॉजी में भारत की भूमिका निर्णायक बन सकती है।


साथियों बात अगर हम संस्कृति और शिक्षा,साझेदारी के मानवीय आयाम को समझने की करें तो,भारत-ब्रिटेन संबंध केवल अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच संस्कृति, शिक्षा और सामाजिक मूल्य का भी गहरा जुड़ाव है। इस यात्रा में “कल्चरल एक्सचेंज मिशन” पर भी सहमति बनी, जिसके तहत ब्रिटेन और भारत के बीच कलाकारों, फिल्म निर्माताओं और विद्यार्थियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।ब्रिटिश विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों की संख्या पहले ही रिकॉर्ड स्तर पर है। अब ब्रिटेन ने भारत को “प्राथमिक शिक्षा भागीदार” के रूप में मान्यता देने का निर्णय लिया है। इसके तहत उच्च शिक्षा में द्विपक्षीय डिग्री कार्यक्रम, स्कॉलरशिप्स और कोर्स एक्सचेंज की शुरुआत होगी।


साथियों बात अगर हम यात्रा का ऐतिहासिक महत्व भविष्य के वैश्विक समीकरणों की झलक, यह यात्रा केवल भारत और ब्रिटेन के संबंधों की मजबूती का प्रतीक नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति समीकरणों में एशिया की केंद्रीय भूमिका को भी स्थापित करती है।जब दुनियाँ अमेरिका- चीन प्रतिस्पर्धा में उलझी हुई है, तब ब्रिटेन का भारत की ओर झुकाव इस बात का संकेत है कि 21वीं सदी का आर्थिक केंद्र अबएशिया की धरती पर स्थित है।

भारत इस साझेदारी से न केवल व्यापारिक लाभ प्राप्त करेगा, बल्कि वह पश्चिमी देशों के साथ अपने कूटनीतिक संतुलन को भी और मजबूत करेगा।


अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि विश्वास, साझेदारी और भविष्य की एक नई कहानी,ब्रिटिश पीएम की भारत यात्रा 2025 इतिहास में “इकोनॉमिक डिप्लोमेसी के पुनर्जागरण” के रूप में दर्ज होगी। इस यात्रा ने दिखा दिया कि भारत अब किसी के समर्थन का आकांक्षी नहीं, बल्कि साझेदारी का निर्णायक केंद्र बन चुका है।ब्रिटेन के लिए यह यात्रा भारत के प्रति विश्वास की पुनर्स्थापना है, वहीं भारत के लिए यह अपनी वैश्विक स्थिति को और ऊंचा उठाने का अवसर। व्यापार, शिक्षा, तकनीक और संस्कृति,इन चारों स्तंभों पर खड़ी यह नई साझेदारी आने वाले दशक में विश्व की आर्थिक दिशा तय कर सकती है।भारत और ब्रिटेन अब केवल साझेदार नहीं, बल्कि वैश्विक पुनरुत्थान के सह-निर्माता हैं, एक ऐसा अध्याय जो आने वाली पीढ़ियाँ “न्यू ऐज ऑफ़ इंडो – ब्रिटिश पार्टनरशिप ” के नाम से याद करेंगी।

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9359653465

बागबेड़ा कॉलोनी में जल्द शुरू होगी जलापूर्ति योजना, एक महीने में मिलेगा शुद्ध पानी, विभाग ने दिया आश्वासन

बागबेड़ा कॉलोनी में जल्द शुरू होगी जलापूर्ति योजना, एक महीने में मिलेगा शुद्ध पानी, विभाग ने दिया आश्वासन

जमशेदपुर

बागबेड़ा हाउसिंग कॉलोनी के हजारों निवासियों के लिए खुशखबरी है। लंबे इंतजार के बाद अब जल्द ही कॉलोनीवासियों को शुद्ध पेयजल की सुविधा मिलने जा रही है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के एसडीओ महेंद्र बैठा और जेई आशुतोष ने जानकारी दी कि एक महीने के अंदर बागबेड़ा हाउसिंग कॉलोनी जलापूर्ति योजना शुरू कर दी जाएगी, जिसके बाद लोगों को नियमित रूप से स्वच्छ पानी की आपूर्ति की जाएगी।

पंचायत प्रतिनिधियों ने सौंपा छह सूत्री मांग पत्र

इस संबंध में बागबेड़ा कॉलोनी पंचायत प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने विभाग को छह सूत्री मांग पत्र सौंपा, जिसे कार्यपालक अभियंता सुमित कुमार के निर्देश पर एसडीओ महेंद्र बैठा और जेई आशुतोष को सौंपा गया। तत्पश्चात सकारात्मक वार्ता भी हुई।

माॅग पत्र में प्रमुख रूप से यह बिंदु शामिल

बागबेड़ा हाउसिंग कॉलोनी जलापूर्ति योजना को शीघ्र शुरू किया जाए।कुंवर सिंह मैदान रोड नंबर 3 के 50 घरों में तत्काल जलापूर्ति बहाल की जाए। रोड नंबर 1 स्थित फिल्टर पंप हाउस के मोटर कक्ष की मरम्मत शीघ्र कराई जाए। विभागीय कार्यों में पारदर्शिता हेतु समीति की मासिक बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएं। विभाग के द्वारा समिति को आय-व्यय का विवरण सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया जाए।

विभाग ने दिया सकारात्मक आश्वासन

सभी बिंदुओं पर चर्चा के बाद एसडीओ महेंद्र बैठा और जेई आशुतोष ने संयुक्त रूप से आश्वासन दिया कि एक महीने के भीतर जलापूर्ति योजना चालू कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि आय-व्यय का ब्योरा जारी करने के लिए एक सप्ताह के भीतर पत्र निर्गत किया जाएगा, वहीं कुंवर सिंह मैदान रोड नंबर 3 में जल्द ही जलापूर्ति बहाल की जाएगी।

बैठक में शामिल रहे स्थानीय प्रतिनिधि

इस मौके पर पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता, उप मुखिया संतोष ठाकुर, बागबेड़ा मध्य पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि के.डी. मुंडा सहित कई स्थानीय लोग उपस्थित थे।

उपायुक्त की अध्यक्षता में कौशल विकास, आजीविका संवर्धन, रोजगार सृजन एवं औद्योगिक समन्वय से संबंधित समीक्षा बैठक संपन्न

उपायुक्त की अध्यक्षता में कौशल विकास, आजीविका संवर्धन, रोजगार सृजन एवं औद्योगिक समन्वय से संबंधित समीक्षा बैठक संपन्न

सरायकेला-खरसावाँ

10 अक्टूबर, 2025 को समाहरणालय सभागार, सरायकेला-खरसावाँ में उपायुक्त नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में कौशल विकास, आजीविका मिशन, रोजगार सृजन, नाबार्ड योजनाओं एवं औद्योगिक संस्थानों के साथ समन्वय से संबंधित समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक के दौरान उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जिले के विभिन्न औद्योगिक संस्थानों से समन्वय स्थापित करते हुए रोजगार हेतु उपलब्ध रिक्त पदों के अनुरूप स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जाए, जिससे उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि सभी प्रशिक्षण संचालित करने वाले संस्थान एवं विभाग निर्धारित समय सीमा में प्रशिक्षण सत्र पूर्ण करें तथा इसके लिए व्यवस्थित एक्शन प्लान तैयार कर जिला कार्यालय को उपलब्ध कराएं।

उपायुक्त ने यह भी निर्देश दिया कि ऐसे प्रशिक्षण प्राप्त युवक-युवतियों को चिन्हित किया जाए जो किसी कारणवश अब तक रोजगार से नहीं जुड़े हैं, और उनकी अभिरुचि के अनुरूप क्षेत्र में रोजगार या स्वरोजगार से जोड़ने हेतु ठोस एवं सकारात्मक पहल की जाए। उन्होंने RSETI के अंतर्गत मोबाइल रिपेयरिंग, सोलर इंस्टालेशन, सीसीटीवी इंस्टालेशन, ड्रोन टेक्निशियन जैसे तकनीकी क्षेत्रों में इच्छुक अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण प्रदान करने तथा सरकारी योजनाओं से जोड़ते हुए रोजगार एवं स्वरोजगार सृजन की दिशा में कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

इसके अतिरिक्त, उपायुक्त ने सभी विभागीय पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि कौशल विकास के विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके विद्यार्थियों के साथ औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधियों की संयुक्त कार्यशाला आयोजित की जाए, ताकि युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में मार्गदर्शन और प्रेरणा प्राप्त हो सके।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके लाभुकों को उनके अनुकूल संचालित सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाए तथा उन्हें संबंधित योजनाओं से जोड़ने में विभागीय स्तर पर सहयोग सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि योजना अंतर्गत प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके अभ्यर्थियों को चिन्हित कर लाभान्वित किया जाए तथा लंबित आवेदनों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।

इसके साथ ही प्लास मार्ट के संचालन से संबंधित विषयों पर चर्चा की गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि प्लास मार्ट के संचालन हेतु योग्य स्वयं सहायता समूहों (SHG) का चयन किया जाए, जिनमें विभिन्न समूहों को उत्पाद निर्माण एवं संचालन की जिम्मेदारी सौंपी जाए। उन्होंने कहा कि प्लास मार्ट को जिले के मुख्य बाजारों एवं सभी प्रखंड मुख्यालयों में संचालित करने की दिशा में कार्ययोजना तैयार की जाए, साथ ही इसमें स्थानीय क्षेत्र में उत्पादित सामग्रियों को प्राथमिकता के साथ प्रदर्शित एवं विक्रय के लिए रखा जाए, जिससे स्थानीय उत्पादों को उचित मूल्य एवं आमजन को सुलभ उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने अंत में कहा कि कौशल विकास, औद्योगिक समन्वय एवं आजीविका मिशन का मूल उद्देश्य युवाओं एवं महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि आगामी समीक्षा बैठक से पूर्व योजनाओं की अद्यतन प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें, ताकि रोजगार सृजन की दिशा में ठोस एवं परिणामोन्मुखी प्रगति सुनिश्चित की जा सके।

बैठक में श्रम अधीक्षक अविनाश ठाकुर, नियोजन पदाधिकारी आदित्यपुर, जिला कार्यक्रम प्रबंधक JSLPS तथा अन्य सम्बन्धित विभागीय पदाधिकारी एवं विभिन्न संस्थानों (प्रशिक्षण केंद्र) के प्रतिनिधि उपस्थित रहें।

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