सरायकेला-खरसावां
आखिरकार पेट की भूख और परिवार की जिम्मेदारियों के आगे मजदूरों के बुलंद हौसलों ने दम तोड़ दिया।

प्रिय पाठको अगर संसार में पेट की भूख ना होती तो शायद कोई मजदूर पैदा ना होता और ना कोई सेठ पैदा होता पेट की भूख और परिवार की जिम्मेदारियों की वजह से ही बड़े से बड़े लोग और छोटे से छोटे लोग मजदूरी करते हैं मजदूरी में छोटे लोग ही नहीं आते बड़े से बड़े लोग भी कहीं ना कहीं किसी न किसी रूप में किसी न किसी संगठन के माध्यम से मजदूरी करते हैं और अपने परिवार के साथ गुजर बसर करते हैं लेकिन आए दिन निचली कोटि के मजदूरों के साथ हो रहे शोषण को हम अखबारों के माध्यम से पढ़ते हैं टीवी के माध्यम से सुनते हैं या फिर किसी और के मुख से भी मजदूरों के ऊपर हो रहे शोषण को हम सुनते हैं जानते हैं और समझते हैं। मजदूरों के ऊपर हो रहे हैं शोषण कोई नई बात नहीं यह तो ब्रिटिश काल से चला आ रहा है आज हमारे देश को आजाद हुए 78 वर्ष पूरे हो चुके हैं लेकिन आज भी मजदूर आजाद महसूस नहीं कर रहे उनको उनका अधिकार नहीं मिल पा रहा उनका शोषण किया जा रहा है उन पर अत्याचार किया जा रहा औद्योगिक क्षेत्र में कुछ संगठन ऐसे हैं जो सरकार द्वारा बनाई गई नियम व कानून को ताक पर रखकर मजदूरों का शोषण कर रहे हैं उन पर अत्याचार कर रहे हैं और मजदूर बेबस बिहाल शोषण का शिकार हो रहे हैं।

ज्ञात हो कि कुछ दिन पहले सुधा डेयरी के भीतर विकास कुमार ठेकेदार के अधीन कार्यरत मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी दर नहीं दी जाने की खबर को झारखंड क्राइम रिपोर्टर अखबार ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था जिसमें जमशेदपुर डेरी सुधा डेयरी में मजदूरों का शोषण दबंगई से किया जा रहा था इसकी सूचना सरायकेला खरसावां जिला के सुपरिंटेंडेंट को लिखित रूप से मजदूरों ने दी थी। मजदूरों की लिखित शिकायत आने पर सरायकेला श्रम अधीक्षक अविनाश कुमार ठाकुर ने पूंजीपति ठेकादार वा सुधा डेयरी को नोटिस कर अपनी बात रखने के लिए लेबर ऑफिस बुलाया था। लेकिन मजदूरों की सहमी एवं दबी आवाज ने आखिर यह तय कर दिया कि पापी पेट का सवाल है पेट के लिए झुक जाना शोषण हो जाना मंजूर है लेकिन अपने ऊपर के वरिय अधिकारियों पर कार्रवाई ना हो इसके लिए उन्होंने अपनी आवाज को वापस लिया। वहीं श्रम अधीक्षक अविनाश कुमार ठाकुर ने उक्त कंपनी व उक्त ठेकेदार को 3 महीने का रजिस्टर्ड लेकर श्रम कार्यालय में उपस्थित होने का नोटिस जारी किया ताकी सही निर्णय लिया जा सके। खबर का दिखा असर लेबर सुपरिंटेंडेंट ने किया नोटिफिकेशन सुधा डेयरी के ठेका मजदूर के साथ हो रहा है शोषण वा दबंगई।
मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी दर न देकर जबरन काम लिया जा रहा शिकायत करने वालों को दबाया जा रहा है। आजादी मिलने के बावजूद भी सुधा डेयरी के मजदूरों को आजादी नहीं मिल पाई है और बुरी तरह से शोषित मजदूर अपनी आवाज उठाने पर भी डरे एवं सहमे हुए नजर आ रहे हैं। क्योंकि यह पापी पेट का सवाल है वहीं श्रम अधीक्षक अविनाश कुमार ठाकुर ने नोटिस जारी कर अपना काम बखूबी निभाते हुए आगे की कार्रवाई करने की बात कही।
आपको बताते चलें कि जमशेदपुर डेरी के नाम से सुधा डेयरी यह वही डेयरी है जो अक्सर मजदूर के शोषण एवं मिलावटी कार्य को लेकर चर्चा में रही है।
वही सरायकेला में दिशा की बैठक में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा है कि नियम का पालन करें नहीं तो होगा कार्रवाई । अब देखना है कि क्या झारखंड के सरायकेला खरसावां जिला में कंपनी और ठेकेदार की मिली भगत से मजदूरों पर शोषण होता है या फिर रक्षा व केंद्रीय राज्य मंत्री इस पर अंकुश लगा पाते हैं ।














