तंबाकू,नशे का बदलता स्वरूप और आधुनिक दौर की चुनौती।

तंबाकू,नशे का बदलता स्वरूप और आधुनिक दौर की चुनौती।

आजतक राजनीतिक सामाजिक या व्यक्तिगत संगठनों द्वारा तंबाकू व नशीली चीजों के विरुद्ध उग्र आंदोलन क्यों नहीं चलाया यह विचारणीय प्रश्न ? क्या हम एक मूक सामूहिक हत्या के मूकदर्शक बने हुए हैं?

तंबाकू निषेध दिवस 31 मई 2026 मनाने क़े साथ शासन प्रशासन विद्यालयों, महाविद्यालयों, पंचायतों,नगर निकायों,सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं, चिकित्सक समुदाय,मीडिया और राजनीतिक दलों को साथ मिलकर सशक्त राष्ट्रव्यापी उग्र तंबाकू निषेध आंदोलन चलाने की जरूरत?

तंबाकू निषेध नशा मुक्त भारत- अगर भ्रष्टाचार,आरक्षण, नागरिकता, कृषि कानून, क्षेत्रीय पहचान या सामाजिक न्याय के प्रश्न राष्ट्रीय बहस और जनआंदोलन का विषय बन सकते हैं, तो नशा मुक्त संपूर्ण क्रांति आंदोलन क्यों नहीं बना?

गोंदिया/महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर हर वर्ष 31 मई को पूरी दुनियाँ में वर्ल्ड नों टोबैक्को अर्थात विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। हर वर्ष इस अवसर पर भाषण होते हैं, शपथ ली जाती है, पोस्टर लगाए जाते हैं और तंबाकू के दुष्परिणामों पर चर्चा होती है।लेकिन एक कड़वा प्रश्न आज हमारे सामने खड़ा है,क्या केवल एक दिन का यह प्रतीकात्मक आयोजन उस भयावह महामारी को रोक सकता है जो प्रतिदिन लाखों लोगों के शरीर में कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक और फेफड़ों की घातक बीमारियों का जहर घोल रही है? भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में नागरिकता कानून,आरक्षण,भ्रष्टाचार,किसानों की समस्याएं,भाषा विवाद, जल-जंगल-जमीन के प्रश्न, मंडल -कमंडल की राजनीति, जनलोकपाल आंदोलन, महिला सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, महंगाई, बेरोजगारी और क्षेत्रीय अस्मिता जैसे मुद्दे बड़े जनांदोलनों का रूप ले चुके हैं।सड़कों पर लाखों लोग उतरते हैं,संसद और विधान सभाओं में बहस होती है, सरकारें झुकती हैं और नीतियां बदलती हैं।परंतु मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र इस आर्टिकल का माध्यम से शासन प्रशासन व समाज से पूछना चाहता हूं कि तंबाकू, जो हर वर्ष लाखों परिवारों को उजाड़ देता है, आज भी उतना बड़ा राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन क्यों नहीं बन पाया? जब किसी परिवार का कमाने वाला सदस्य तंबाकूजनित कैंसर से मरता है, जब किसी बच्चे का पिता गुटखा या सिगरेट के कारण असमय दुनियाँ छोड़ देता है, जब किसी मां की आंखों के सामने उसका जवान बेटा निकोटीन की लत का शिकार होकर जीवन हार जाता है, तब यह केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं रह जाती,बल्कि यह राष्ट्रीय चिंता का विषय बन जाती है। मेरे अपने एक निकट संबंधी की मृत्यु भी तंबाकूजनित कैंसर के कारण हुई। ऐसे हजारों-लाखों परिवारों का दर्द यह संकेत देता है कि अब तंबाकू निषेध को केवल स्वास्थ्य अभियान नहीं बल्कि एक व्यापक सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक आंदोलन का रूप देने की आवश्यकता है।

साथियों बात अगर हम तंबाकू व नशीली चीजों के खिलाफ़ बहुत बड़े आंदोलन की करें तो तंबाकू निषेध आंदोलन को इस तरह के आंदोलन समक़क्ष बनाने की जरूरत है जैसे भारतीय लोकतंत्र का इतिहास इस बात का साक्षी रहा है कि जब किसी मुद्दे को जनआंदोलन का रूप मिला, तब उसने सरकारों की नीतियों,कानूनों और सामाजिक व्यवहार को प्रभावित किया। वर्ष 1974 का जेपी आंदोलन (संपूर्ण क्रांति आंदोलन), वर्ष 1990 का मंडल आयोग आरक्षण आंदोलन 1980 और 1990 के दशक का राम जन्मभूमि आंदोलन,वर्ष 2011 का अन्ना हजारे के नेतृत्व वाला भ्रष्टाचार विरोधी जनलोकपाल आंदोलन, वर्ष 2019- 20 का नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) विरोधी आंदोलन, वर्ष 2020-21 का कृषि कानूनों के विरुद्ध किसान आंदोलन, वर्ष 2015 और उसके बाद विभिन्न राज्यों में हुए पटीदार आरक्षण आंदोलन,जाट आरक्षण आंदोलन, मराठा आरक्षण आंदोलन, गुर्जर आरक्षण आंदोलन तथा हाल के वर्षों में विभिन्न राज्यों में जातीय, सामाजिक और क्षेत्रीय पहचान से जुड़े आंदोलनों ने यह सिद्ध किया है कि संगठित जनदबाव लोकतांत्रिक व्यवस्था में परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।इन आंदोलनों ने न केवल राजनीतिक विमर्श को प्रभावित किया बल्कि सरकारों को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए भी बाध्य किया। आज 30 मई 2026 से महाराष्ट्र में शुरू हुआ मनोहर जराँगे का मराठा आरक्षण आंदोलन सहित देश के अनेक हिस्सों में सामाजिक, जातीय और आरक्षण से जुड़े आंदोलन लगातार सुर्खियों में हैं, जो यह दर्शाते हैं कि जनता जब किसी विषय को अपने अस्तित्व, अधिकार या भविष्य से जोड़ लेती है तो वह एक विशाल जनशक्ति का रूप धारण कर लेता है। तो फिर तंबाकू व नशीली चीजों के विरुद्ध ऐसा आंदोलन किसी राजनीतिक सामाजिक या व्यक्तिगत संगठन में क्यों नहीं उठाया है यह विचारणीय प्रश्न है?

साथियों, पिछले एक दशक में नशे का स्वरूप तेजी से बदला है। कभी बीड़ी, सिगरेट और तंबाकू की पुड़िया तक सीमित रहने वाला यह कारोबार अब अत्याधुनिक तकनीक के आवरण में युवाओं के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है। ई- सिगरेट, वेप्स, निकोटीन पॉड्स, फ्लेवर्ड हुक्के, निकोटीन पाउच और विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक धूम्रपान उपकरण आधुनिक जीवनशैली के प्रतीक के रूप में प्रचारित किए जा रहे हैं। तंबाकू उद्योग ने समझ लिया है कि यदि उसे नई पीढ़ी को अपने जाल में फंसाना है तो उत्पाद का स्वरूप बदलना होगा। इसलिए आज कई वेपिंग उपकरण पेन ड्राइव, स्मार्ट गैजेट, इलेक्ट्रॉनिक पेन या स्टाइलिश एक्सेसरी जैसे दिखाई देते हैं। किशोर और युवा इन्हें आधुनिकता, स्वतंत्रता और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक समझने लगते हैं। चॉकलेट, स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, वनीला, मिंट और अन्य आकर्षक फ्लेवर के माध्यम से निकोटीन को मीठे जहर के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।यह रणनीति केवल व्यापारिकनहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक भी है,क्योंकि स्वाद और आकर्षण के माध्यम से लत को आसान बनाया जाता है।

साथियों, सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन आधुनिक उत्पादों को अक्सर पारंपरिक सिगरेट से कम हानिकारक बताने का भ्रम फैलाया जाता है।अनेक युवा यह मान लेते हैं कि वेपिंग सुरक्षित है,जबकि वैज्ञानिक अध्ययनों ने संकेत दिया है कि ई-सिगरेट से निकलने वाला एयरोसोल निकोटीन सहित अनेक हानिकारक रसायनों से भरा होता है। निकोटीन स्वयं अत्यधिक नशे की लत पैदा करने वाला पदार्थ है। इसके अतिरिक्त कई उपकरणों में प्रयुक्त धातुओं, रसायनों और अन्य तत्वों के दीर्घकालिक प्रभाव अभी भी शोध का विषय हैं। इसलिए यह कहना कि आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक धूम्रपान पूरी तरह सुरक्षित है, वैज्ञानिक दृष्टि से उचित नहीं होगा।वास्तव में यह नशे का नया मुखौटा है,जिसका उद्देश्य युवाओं को आकर्षित करना और बाजार का विस्तार करना है।तंबाकू और निकोटीन की इस महामारी का सबसे भयावह पक्ष यह है कि इसका शिकार केवल सेवन करने वाला व्यक्ति ही नहीं होता।पैसिव स्मोकिंग या अप्रत्यक्ष धूम्रपान उन लाखों निर्दोष लोगों की जान ले रहा है जिन्होंने कभी सिगरेट या तंबाकू को हाथ तक नहीं लगाया। घरों, कार्यालयों, रेस्तरां, सार्वजनिक स्थलों और वाहनों में छोड़ा गया धुआं आसपास मौजूद लोगों के शरीर में प्रवेश करता है।बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और कमजोर स्वास्थ्य वाले व्यक्तियों पर इसका प्रभाव और भी गंभीर होता है। जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर धूम्रपान करता है तो वह केवल अपने स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि दूसरों के स्वास्थ्य अधिकारों का भी उल्लंघन करता है। यही कारण है कि पैसिव स्मोकिंग को केवल व्यक्तिगत व्यवहार का प्रश्न नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक उत्तरदायित्व का विषय माना जाता है।

साथियों, कई विशेषज्ञों का मानना है कि पैसिव स्मोकिंग के कारण होने वाली मौतों को केवल दुर्घटना याव्यक्तिगत दुर्भाग्य नहीं कहा जा सकता। यह ऐसी स्थिति है जिसमें निर्दोष लोग दूसरों की आदतों के कारण बीमारी औरमृत्यु का शिकार बनते हैं। धुएं में हजारों प्रकार के रसायन पाए जाते हैं, जिनमें अनेक कैंसरकारी तत्व भी शामिल हैं। यही कारण है कि विश्वभर में सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंध संबंधी कानून बनाए गए हैं। लेकिन कानून तभी प्रभावी होते हैं जब उनका कठोर और ईमानदार क्रियान्वयन हो। भारत में भी कई स्थानों पर धूम्रपान निषेध के नियम हैं, परंतु उनका पालन अभी भी चुनौती बना हुआ है।

साथियों, यह प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण है कि तंबाकू विरोधी संघर्ष आज तक एक बड़े जनांदोलन का रूप क्यों नहीं ले पाया। इसका पहला कारण यह है कि तंबाकू तत्काल मृत्यु नहीं देता। सड़क दुर्घटना,हिंसा या प्राकृतिक आपदा की तरह इसका प्रभाव अचानक दिखाई नहीं देता। यह धीरे-धीरे शरीर को भीतर से नष्ट करता है। कैंसर, हृदय रोग और फेफड़ों की बीमारियां वर्षों में विकसित होती हैं। इसलिए जनता का आक्रोश कभी एक साथ विस्फोटक रूप में सामने नहीं आता। दूसरा कारण तंबाकू उद्योग का विशाल आर्थिक ढांचा है। खेती, उत्पादन, वितरण और कर राजस्व से जुड़े अनेक हित इसमें शामिल रहते हैं। तीसरा कारण सामाजिक स्वीकृति है। कई लोग तंबाकू सेवन को व्यक्तिगत पसंद का विषय मानते हैं, जबकि इसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है। चौथा कारण जागरूकता और क्रियान्वयन के बीच की दूरी है। कानून मौजूद हैं, चेतावनियां मौजूद हैं, लेकिन व्यवहार परिवर्तन अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पाया है।
साथियों, भारत में तंबाकू और अन्य नशे के नियंत्रण की जिम्मेदारी केवल स्वास्थ्य विभाग की नहीं है।इसमेंपुलिस विभाग, राज्य आबकारी विभाग,स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग,शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, नारकोटिक्स नियंत्रण एजेंसियां, स्थानीय निकाय, जिला प्रशासन और विभिन्न नियामक संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। जिस प्रकार अवैध शराब से मौतों के मामलों में कई राज्यों में संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती रही है, उसी प्रकार तंबाकू नियंत्रण कानूनों के प्रभावी पालन को लेकर भी जवाबदेही तय करने की आवश्यकता महसूस की जाती है। जब किसी क्षेत्र में खुलेआम प्रतिबंधित उत्पाद बिकते हैं,जब स्कूलों के आसपास तंबाकू की बिक्री होती है या जब सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान रोकने के नियम लागू नहीं होते, तब केवल कानून बना देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। प्रभावी निगरानी, नियमित निरीक्षण, जनभागीदारी और उत्तरदायित्व की स्पष्ट व्यवस्था आवश्यक है।

साथियों, आज की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि नई पीढ़ी नशे को आधुनिकता और स्टेटस सिंबल के रूप में देखने लगी है। सोशल मीडिया,फिल्मों, डिजिटल संस्कृति और समूह दबाव के कारण कई किशोर यह मान बैठते हैं कि वेपिंग या धूम्रपान उन्हें अधिक आकर्षक, परिपक्व या आधुनिक बनाता है।वास्तविकता इसके ठीक विपरीत है। चिकित्सा विज्ञान यह संकेत देता है कि निकोटीन की लत मस्तिष्क के विकास को प्रभावित कर सकती है, विशेषकर किशोरावस्था में। कुछ मामलों में ई-सिगरेट से जुड़ी गंभीर फेफड़ों की बीमारियों की भी रिपोर्ट सामने आई हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष चिकित्सीय श्रेणियों में अध्ययन किया गया है। यह स्पष्ट है कि आधुनिक नशे का आकर्षक आवरण उसके भीतर छिपे जोखिमों को समाप्त नहीं करता।इसलिए अब आवश्यकता केवल जागरूकता की नहीं बल्कि सामाजिक चेतना के व्यापक पुनर्जागरण की है। स्कूलों और कॉलेजों में नशा विरोधी शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए। अभिभावकों को अपने बच्चों के साथ खुलकर संवाद करना होगा। मीडिया को तंबाकू उद्योग के भ्रामक प्रचार का पर्दाफाश करना होगा। चिकित्सकों, शिक्षकों, धार्मिक नेताओं, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों को मिलकर ऐसा वातावरण बनाना होगा जिसमें तंबाकू सेवन सामाजिक प्रतिष्ठा नहीं बल्कि स्वास्थ्य जोखिम के रूप में देखा जाए। जिस प्रकार स्वच्छता, बेटी बचाओ, पोलियो उन्मूलन और सड़क सुरक्षा जैसे अभियानों को जनभागीदारी के माध्यम से व्यापक सफलता मिली, उसी प्रकार तंबाकू निषेध को भी राष्ट्रीय जनअभियान का रूप दिया जा सकता है।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि विश्व तंबाकू निषेध दिवस का वास्तविक उद्देश्य केवल एक दिन जागरूकता फैलाना नहीं बल्कि पूरे वर्ष चलने वाली सामाजिक प्रतिबद्धता को मजबूत करना है। यदि हम तंबाकू और निकोटीन की बदलती रणनीतियों को नहीं समझेंगे,यदि हम आधुनिक नशे के मुखौटों को नहीं पहचानेंगे और यदि हम युवाओं को इसके जाल से बचाने के लिएसामूहिक प्रयास नहीं करेंगे,तो आने वाली पीढ़ियां इसकी भारी कीमत चुकाएंगी। तंबाकू विरोधी संघर्ष केवल स्वास्थ्य का प्रश्न नहीं, बल्कि मानव गरिमा, सामाजिक न्याय, आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की पीढ़ियों के संरक्षण का प्रश्न है। समय आ गया है कि इसे केवल एक स्मृति दिवस या सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे एक सशक्त राष्ट्रीय जनचेतना आंदोलन बनाया जाए। क्योंकि नशा कभी शान नहीं हो सकता; यह व्यक्ति, परिवार और समाज की चेतना का क्षरण है। तंबाकू को ना कहना केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि एक स्वस्थ और जिम्मेदार समाज के निर्माण की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9284141425

जनगणना 2027 के प्रथम चरण के सफल संचालन हेतु जागरूकता वाहनों को DY- DRDA एवं ADC के द्वारा हरी झंडी दिखाकर किया गया रवाना

जनगणना 2027 के प्रथम चरण के सफल संचालन हेतु जागरूकता वाहनों को DY- DRDA एवं ADC के द्वारा हरी झंडी दिखाकर किया गया रवाना

सरायकेला/खरसावां

जनगणना 2027 के प्रथम चरण अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना कार्यक्रम के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं जन-जागरूकता के उद्देश्य से दो जागरूकता वाहनों को निदेशक, डीआरडीए अजय तिर्की एवं अपर उपायुक्त जयवर्धन कुमार द्वारा संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

दोनों जागरूकता वाहन आगामी सात दिनों तक जिले के दोनों अनुमंडलों के विभिन्न प्रखंडों अंतर्गत ग्राम पंचायतों का भ्रमण कर जनगणना 2027 से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों का व्यापक प्रचार-प्रसार करेंगे तथा आमजन को जनगणना कार्य में सक्रिय सहभागिता एवं सहयोग के प्रति जागरूक करेंगे।

अभियान के दौरान नागरिकों को जनगणना की प्रक्रिया, मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के दौरान पूछी जाने वाली जानकारियों, अपेक्षित दस्तावेजों तथा जनगणना के महत्व के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की जाएगी। साथ ही यह भी बताया जाएगा कि जनगणना से प्राप्त आंकड़े विकास योजनाओं के निर्माण, संसाधनों के समुचित आवंटन तथा विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन का आधार बनते हैं।

इस अवसर पर आमजन से अपील की गई कि वे जनगणना संबंधी जानकारी प्राप्त करें, जनगणना कर्मियों को सही एवं पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएं तथा किसी भी प्रकार की भ्रांति अथवा अफवाह पर ध्यान न दें। साथ ही सभी संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों को जन-जागरूकता गतिविधियों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने तथा अभियान के सफल क्रियान्वयन हेतु समन्वित रूप से कार्य करने के आवश्यक निर्देश दिए गए।

“हमारी जनगणना, हमारा विकास” के संदेश के साथ जिलेवासियों से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान को सफल बनाने हेतु सक्रिय सहयोग एवं सहभागिता सुनिश्चित करने की अपील की गई।

इस अवसर पर जिला जनसंपर्क पदाधिकारी अविनाश कुमार, अपर जिला जनगणना पदाधिकारी कमलेश कुमार दास सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।

उपायुक्त ने प्रखंड -सह- अंचल कार्यलय नीमडीह का किया औचक निरीक्षण।

उपायुक्त ने प्रखंड -सह- अंचल कार्यलय नीमडीह का किया औचक निरीक्षण।

सरायकेला/खरसावां

उपायुक्त सरायकेला-खरसावां नितिश कुमार सिंह द्वारा प्रखंड -सह- अंचल कार्यालय नीमडीह का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्यालय परिसर, विभिन्न शाखाओं, अभिलेखों के संधारण, राजस्व संबंधी कार्यों, लंबित मामलों एवं आमजनों को उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं की समीक्षा की।

निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त ने कार्यालय में उपस्थित पदाधिकारियों एवं कर्मियों को समयबद्ध, पारदर्शी एवं जवाबदेह तरीके से कार्य निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों से जुड़े मामलों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर निष्पादन किया जाए तथा अनावश्यक विलंब एवं लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी।

उपायुक्त ने दाखिल-खारिज, परिमार्जन, राजस्व वसूली, भूमि संबंधी मामलों एवं अन्य अंचल स्तरीय कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। निरीक्षण के क्रम में उन्होंने विभिन्न शाखाओं में संचालित कार्यों एवं अभिलेखों के संधारण का अवलोकन किया तथा कार्यों के संतोषजनक निष्पादन पर प्रसन्नता व्यक्त की। साथ ही लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन, कार्यालय अभिलेखों के सुव्यवस्थित संधारण एवं नियमित अद्यतन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आमजनों को गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी पदाधिकारी एवं कर्मी संवेदनशीलता एवं जवाबदेही के साथ कार्य करें तथा कार्यालय आने वाले नागरिकों की समस्याओं का यथासंभव त्वरित समाधान सुनिश्चित करें।

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने कार्यालय पहुंचे स्थानीय नागरिकों से संवाद कर उनकी समस्याओं एवं शिकायतों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को प्राप्त आवेदनों एवं मामलों का नियमानुसार समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने तथा आमजनों को अनावश्यक रूप से कार्यालय का चक्कर न लगाना पड़े, इसके लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने कार्यालय परिसर की स्वच्छता, अनुशासन एवं कार्य संस्कृति को और बेहतर बनाने पर बल देते हुए कहा कि सुशासन, पारदर्शिता एवं जनकल्याण की भावना के अनुरूप कार्य करते हुए प्रशासन और जनता के बीच विश्वास को मजबूत करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

निरीक्षण के दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारी नीमडीह कुमार अभिनव, अंचल अधिकारी नीमडीह अभय कुमार द्विवेदी सहित अंचल कार्यालय के अन्य पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।

कागज कलम पर चल रहा चापाकल मरम्मती, पानी के लिए तरस रहे ग्रामीण।

कागज कलम पर चल रहा चापाकल मरम्मती, पानी के लिए तरस रहे ग्रामीण।

सरायकेला/ईचागढ़

सरायकेला-खरसावां जिला के ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र में दर्जनों चापाकल और सौर ऊर्जा चालित जल मीनार खराब है, जिससे कई गांवों में जलसंकट से ग्रामीण जुझ रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण सोड़ो पंचायत में देखने को मिला। सोड़ों गांव में अमुल्य प्रामाणिक के घर के पास चापाकल दो सप्ताह से खराब है, जारगोडीह में सुबोध राय के घर के पास चापाकल एवं जल मीनार खराब है, बिस्टाटांड़ में जल मीनार व चापाकल,ताला पीढ़ी में चापाकल व जल मीनार, तुता पंचायत के बड़ा चुनचुड़ीया में चापाकल व जल मीनार सहित कई गांवों में महिनों से दर्जनों चापाकल व जल मीनार खराब है, जिससे इस गर्मी के समय लोगों को खेतों में बने सिंचाई कुआं से पानी लाकर प्यास बुझाना पड़ रहा है।

उपायुक्त के निर्देश पर पंचायतों व पीएच ईडी विभाग को खराब चापाकलों का मरम्मती कराने का निर्देश दिया गया है एवं हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है, लेकिन उपायुक्त का निर्देश के बावजूद चापाकल व जल मीनारों का मरम्मती के नाम पर सिर्फ और सिर्फ कागजी प्रक्रिया तक सीमित है। सुबोध राय ने बताया कि इसकी सुचना देने के बाद भी मरम्मती के लिए विभाग पहल नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि पानी के लिए लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि विभाग से बात करने पर बताया जा रहा है कि चापाकल मरम्मती का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ ओर है, सिर्फ कागज पर ही मरम्मती कार्य किया जा रहा है। उन्होंने जल्द से जल्द चापाकल व जल मीनार का मरम्मती कराने का मांग किया है।

संस्कृति समिति का छऊ झूमर उत्सव का हुआ समापन।

संस्कृति समिति का छऊ झूमर उत्सव का हुआ समापन।

सरायकेला/ईचागढ़

प्रखंड क्षेत्र के चोगा आदारडीह में दो दिवसीय छऊ झुमर महोत्सव का समापन किया गया।संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से मानभूम सांस्कृतिक समिति के द्वारा आयोजित दो दिवसीय छऊ झूमर उत्सव का समापन हुआ। समापन समारोह के अवसर पर जिला जनसंपर्क पदाधिकारी पूर्वी सिंहभूम पंचानन उरांव, जिला परिषद सदस्य ईचागढ़ पश्चिम सुभाषिनी देवी, उप प्रमुख ईचागढ़ दीपक कुमार साव, वरिष्ठ नागपुरी लोक कलाकार रांची सुनील कुमार, सोरों पंचायत के मुखिया नयन सिंह मुंडा,ठाकुर दास महतो आदि बहुत सारे गणमान्य लोग मौजूद रहे।

सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रथम प्रस्तुति भवतारण महतो एवं साथी के दरबारी झूमर से हुआ द्वितीय प्रस्तुति गूंजे झारखंड कला केंद्र रांची के द्वारा नागपुरी झूमर की प्रस्तुति से लोग झूम उठे वहीं तीसरी प्रस्तुति सुचांद महतो चोगा सरायकेला खरसावां के द्वारा मानभूम छऊ नृत्य की प्रस्तुति से लोगों को भाव विभोर कर दिया तथा अंतिम प्रस्तुति ममता महतो एवं संप्रदाय कोठशिला पश्चिम बंगाल के द्वारा कुरमाली झूमर से लोग काफी उत्साहित हुए। नटराज कला केन्द्र चोगा के सचिव प्रभात कुमार महतो ने कहा कि लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।

मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत 12 यूनिट बकरियों का वितरण।

मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत 12 यूनिट बकरियों का वितरण।

सरायकेला/ईचागढ़

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने तथा पशुपालन आधारित आजीविका को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के अंतर्गत ईचागढ़ प्रखंड में चयनित लाभुकों के बीच शुक्रवार को 12 यूनिट बकरी पालन योजना के तहत बकरियों का वितरण किया गया।

इस अवसर पर लाभुकों को वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन, पशुओं के स्वास्थ्य प्रबंधन, टीकाकरण एवं पोषण संबंधी आवश्यक जानकारियां भी प्रदान की गईं, ताकि वे योजना का समुचित लाभ प्राप्त कर आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। योजना के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को आय का अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध कराने तथा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण साबित होगी।

संबंधित अधिकारियों ने लाभुकों से पशुओं की उचित देखभाल करने तथा विभागीय दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए बकरी पालन को आय सृजन का सशक्त माध्यम बनाने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत जिले में पात्र लाभुकों को पशुपालन गतिविधियों से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है।

विश्व हिंदू रक्षा परिषद के राष्ट्रीय सब प्रभारी संपूर्ण भारत बनाए गए भरत सिंह।

विश्व हिंदू रक्षा परिषद के राष्ट्रीय सब प्रभारी संपूर्ण भारत बनाए गए भरत सिंह।

झारखंड

साथियों लगभग भारत के सभी हिस्सों में सनातन धर्म की रक्षा,धर्म परिवर्तन एवं हिंदुत्व की रक्षा के लिए विश्व हिंदू रक्षा परिषद संगठन अपनी आवाज बुलंद कर रही है। और आए दिन संगठन पीड़ितों को न्याय दिलाने का कार्य कर रही है।

वहीं मंगलवार को विश्व हिंदू रक्षा परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय के द्वारा झारखंड के प्रदेश प्रभारी भरत सिंह को उनके समाज हित सनातन हित हिंदुत्व की रक्षा एवं धर्म परिवर्तन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने के लिए विश्व हिंदू रक्षा परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय के द्वारा भरत सिंह को राष्ट्रीय सब प्रभारी संपूर्ण भारत बनाया गया।

वही कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोपाल राय ने कहा कि भरत सिंह के राष्ट्रीय हित एवं सनातन समाज के प्रति सराहनीय गतिविधि को देखते हुए सनातन समाज के स्वर्णिम विकास व अखंड भारत एवं हिंदू राष्ट्र निर्माण के लिए भरत सिंह को राष्ट्रीय सब प्रभारी संपूर्ण भारत पद पर मनोनीत किया गया। आगे उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू रक्षा परिषद भरत सिंह से अपेक्षा करता है कि राष्ट्र निर्माण हेतु सनातन शिक्षा के अनुरूप सनातन शक्ति को लामबंद करते हुए भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने में अपना बहुमूल्य योगदान करते रहेंगे।

वहीं इस मौके पर भारत सिंह ने कहा कि विश्व हिंदू रक्षा परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय द्वारा जो जिम्मेदारियां मुझ पर सौंप गई है मैं उन्हें स्वीकार करता हूं और अपनी आखिरी सांस तक हिंदुत्व की रक्षा के लिए वचनबद्ध रहूंगा।

भारत अब कूटनीति के माध्यम से विश्व राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था के केंद्र में तेजी से अपनी जगह बना रहा है।

भारत अब कूटनीति के माध्यम से विश्व राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था के केंद्र में तेजी से अपनी जगह बना रहा है।

गोंदिया/महाराष्ट्र

भारत की सक्रिय कूटनीति, वैश्विक रणनीतिक साझेदारियाँ मील का पत्थर साबित होगी- वैश्विक निवेश प्रवाह, विदेशी संस्थागत निवेश, ऊर्जा कंपनियों रक्षाउद्योग टेक्नोलॉजी सेक्टर पर दुर्गामी प्रभाव -समग्र व्यापक विश्लेषण

भारत क़ा विश्व राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था के केंद्र में तेजी से अपनी जगह बनाने का सकारात्मक प्रभाव,अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के विश्वास,विदेशी पूंजी प्रवाह, रणनीतिक उद्योगों और शेयर बाजारों की दीर्घकालिक दिशा पर पड़ेगा -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी

वैश्विक स्तरपर मई 2026 के तीसरे सप्ताह में भारत की विदेश नीति और वैश्विक कूटनीतिक सक्रियता ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति के साथ-साथ भारतीय तथा वैश्विक वित्तीय बाजारों तथा अर्थव्यवस्थाओं का भी ध्यान आकर्षित किया।

एक ओर भारत के पीएम की 15 से 20 मई 2026 संयुक्त अरब अमीरात नीदरलैंड, स्वीडन,नॉर्वे और इटली की बहु-देशीय यात्रा ने ऊर्जा सुरक्षा,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,हरित प्रौद्योगिकी, रक्षा सहयोग और रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को नई गति दी, वहीं दूसरी ओर साइप्रस के राष्ट्रपति निकोसक्रिस्चिदोलिडेस की 20 से 23 मई 2026 भारत यात्रा ने यूरोप और भूमध्य सागरीय क्षेत्र में भारत की आर्थिक उपस्थिति को मजबूत करने के संकेत दिए। इसी क्रम में अमेरिकी विदेश मंत्री मारको रूबीओ का शनिवार 23 मई 2026 शाम को भारत आगमन और क्वाड देशों की बैठक ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को और मजबूत बनाया।

मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि इन तीनों घटनाओं का संयुक्त प्रभाव केवल कूटनीतिक व भारतीय अर्थव्यवस्था पर ही नहीं बल्कि वैश्विक निवेश प्रवाह, विदेशी संस्थागत निवेश,भारतीय शेयर बाजार, ऊर्जा कंपनियों, रक्षा उद्योग, टेक्नोलॉजी सेक्टर और अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों पर भी सटीकता वह गहराई से पड़ने वाला है।

साथियों, सबसे पहले यदि भारतीय पीएम की पांच देशों की यात्रा को आर्थिक दृष्टि से देखा जाए तो यह स्पष्ट होता है कि भारत अब केवल विकासशील अर्थव्यवस्था नहीं बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, डिजिटलअर्थव्यवस्था और रणनीतिक भू-राजनीतिक संतुलन का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। संयुक्त अरब अमीरात के साथ भारत के संबंध पहले से ही ऊर्जा, निवेश और व्यापार के आधार पर मजबूत रहे हैं, लेकिन इस यात्रा में ऊर्जा सुरक्षा और भविष्य की प्रौद्योगिकियों पर जो जोर दिया गया, उसने निवेशकों के बीच भारत के प्रति भरोसा और बढ़ाया है। यूएई पहले से भारत के सबसे बड़े निवेश साझेदारों में से एक है। यदि ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल्स, ग्रीन हाइड्रोजन और इंफ्रास्ट्रक्चर में संयुक्त निवेश तेजी पकड़ता है तो भारतीय शेयर बाजार में रिलायंस, ओएनजीसी, इंडियन ऑयल, अदाणी समूह और ग्रीन एनर्जी कंपनियों के शेयरों में दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए यह संकेत है कि भारत भविष्य की ऊर्जा अर्थव्यवस्था में केंद्रीय भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है।ऊर्जा सुरक्षा का प्रश्न वैश्विक निवेशकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि तेल और गैस की कीमतें सीधे मुद्रास्फीति, औद्योगिक लागत और कॉरपोरेट मुनाफे को प्रभावित करती हैं। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच यदि भारत यूएई जैसे स्थिर साझेदारों के साथ दीर्घकालिक ऊर्जा आपूर्ति समझौते करता है तो इससे भारतीय अर्थव्यवस्था की ऊर्जा लागत स्थिर रह सकती है। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर सकारात्मक होगा क्योंकि ऊर्जा आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं में स्थिर आपूर्ति निवेशकों का भरोसा बढ़ाती है। विदेशी संस्थागत निवेशक ऐसे देशों में पूंजी लगाना पसंद करते हैं जहाँ ऊर्जा संकट की संभावना कम हो। इसलिए यह यात्रा भारतीय बाजारों के लिए स्थिरता का संकेत बन सकती है। नीदरलैंड और स्वीडन की यात्रा का महत्व तकनीकी और नवाचार आधारित निवेशों के संदर्भ में और भी बड़ा माना जा रहा है। नीदरलैंड सेमीकंडक्टर, लॉजिस्टिक्स और स्मार्ट पोर्ट टेक्नोलॉजी का वैश्विक केंद्र है। यदि भारत इस क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग बढ़ाता है तो इसका सीधा प्रभाव भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षमता पर पड़ेगा। वर्तमान समय में दुनिया चीन पर निर्भर सप्लाई चेन को विविध बनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में भारत यदि यूरोपीय तकनीकी सहयोग के साथ सेमीकंडक्टर और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में आगे बढ़ता है तो इससे भारतीय टेक और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों में विदेशी निवेश बढ़ सकता है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, डिक्सन टेक्नोलॉजीज और सेमीकंडक्टर से जुड़ी नई भारतीय कंपनियों के प्रति निवेशकों का आकर्षण बढ़ सकता है।स्वीडन के साथ सहयोग का एक बड़ा आयाम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हरित उद्योग और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग है। वर्तमान वैश्विक शेयर बाजार में एआई आधारित कंपनियां निवेशकों की पहली पसंद बनी हुई हैं। अमेरिका में एनवीडिया जैसी कंपनियों की तेज वृद्धि ने दुनिया को यह दिखा दिया है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था एआई आधारित होगी।

साथियों, यदि भारत यूरोपीय देशों के साथ एआई अनुसंधान, डेटा सेंटर, क्लाउड टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा में सहयोग बढ़ाता है तो भारतीय आईटी कंपनियों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं।इससे इनफ़ोसिस टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज , विप्रो और एचसीएलटेक जैसी कंपनियों में दीर्घकालिक तेजी देखी जा सकती है। विदेशी निवेशक उन बाजारों की ओर आकर्षित होते हैं जहाँ भविष्य की तकनीकों में सरकारी और कूटनीतिक समर्थन दिखाई देता है।नॉर्वे की यात्रा का प्रभाव हरित ऊर्जा और समुद्री अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ माना जा रहा है। नॉर्वे दुनिया में ग्रीन शिपिंग, स्वच्छ ऊर्जा और संप्रभु संपत्ति कोष के लिए प्रसिद्ध है। नॉर्वे का सरकारी निवेश कोष दुनिया का सबसे बड़ा सॉवरेन वेल्थ फंड माना जाता है। यदि भारत और नॉर्वे के बीच हरित ऊर्जा, अपतटीय पवन ऊर्जा और समुद्री अवसंरचना में सहयोग बढ़ता है तो भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में बड़े विदेशी निवेश आने कीसंभावना बन सकती है। इससे भारतीय ग्रीन एनर्जी कंपनियों और ईएसज़ी आधारित निवेशों को मजबूती मिलेगी। आज दुनिया के बड़े निवेशक केवल लाभ नहीं बल्कि पर्यावरणीय स्थिरता को भी महत्व दे रहे हैं।

साथियों, भारत की ग्रीन डिप्लोमेसी शेयर बाजार के लिए नया सकारात्मक संकेत बन सकती है।इटली यात्रा का सबसे बड़ा महत्व यूरोप के साथ भारत की रणनीतिक आर्थिक साझेदारी में दिखाई देता है। इटली यूरोप की प्रमुख औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और प्रधानमंत्री जिओर्जिया मेलोनी के साथ भारत की बढ़ती निकटता यूरोपीय संघ में भारत की स्थिति को मजबूत कर सकती है। इससे रक्षा विनिर्माण, ऑटोमोबाइल, मशीनरी और फैशन उद्योगों में निवेश सहयोग बढ़ सकता है। यूरोप की कंपनियां चीन से उत्पादन हटाकर वैकल्पिक बाजार खोज रही हैं और भारत इसके लिए सबसे बड़ाउम्मीदवार बनकर उभर रहा है। यदि यह प्रवृत्ति मजबूत होती है तो भारतीय विनिर्माण क्षेत्र में तेज पूंजी प्रवाह संभव है। इससे “मेक इन इंडिया” अभियान को भी बल मिलेगा और भारतीय शेयर बाजार में औद्योगिक तथा पूंजीगत वस्तु कंपनियों में तेजी आ सकती है।

साथियों अब यदि साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टो डौलाइड्स की भारत यात्रा को निवेश और वित्तीय दृष्टि से समझें तो इसका महत्व काफी गहरा है। साइप्रस लंबे समय से भारत में विदेशी निवेश के मार्ग के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय निवेश फंड और कंपनियां साइप्रस के माध्यम से भारत में निवेश करती रही हैं। ऐसे में भारत और साइप्रस के बीच रणनीतिक साझेदारी बढ़ने का अर्थ है कि वित्तीय सहयोग, निवेश संरक्षण और पूंजी प्रवाह को नई मजबूती मिल सकती है। यह भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है क्योंकि विदेशी निवेशक ऐसे देशों में निवेश बढ़ाते हैं जहाँ द्विपक्षीय समझौते स्थिरता और कानूनी सुरक्षा प्रदान करते हैं।साइप्रस यात्रा के दौरान व्यापार, रक्षा, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग पर हुए समझौते अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए भरोसे का वातावरण तैयार करते हैं। साइबर सुरक्षा आज वैश्विक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण विषय बन चुकी है। डिजिटल बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान,ए आई और डेटा आधारित अर्थव्यवस्था के दौर में साइबर सुरक्षा में सहयोग से भारतीय टेक कंपनियों और फिनटेक सेक्टर को मजबूती मिल सकती है। इससे भारतीय डिजिटल अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेश का मार्ग और खुल सकता है।

मुंबई में साइप्रस प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी और बॉलीवुड फिल्म शूटिंग से जुड़ी घोषणाएं यह भी दर्शाती हैं कि भारत अब केवल औद्योगिक निवेश का केंद्र नहीं बल्कि सांस्कृतिक और मनोरंजन आधारितअर्थव्यवस्था का भी वैश्विक केंद्र बन रहा है। मनोरंजन उद्योग में विदेशी निवेश बढ़ने से मीडिया, ओटीटी प्लेटफॉर्म और पर्यटन क्षेत्र को लाभ मिल सकता है। इसका असर संबंधित सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों पर भी दिखाई दे सकता है।

साथियों, अब यदि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की भारत यात्रा और क्वाड बैठक के प्रभाव को समझें तो इसका असर सबसे व्यापक माना जा सकता है। अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और सबसे बड़ा पूंजी बाजार है। भारत-अमेरिका संबंधों में सुधार का सीधा प्रभाव विदेशी संस्थागत निवेशकों की धारणा पर पड़ता है।

हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक मतभेद, वीजा मुद्दे और रणनीतिक चिंताओं को लेकर कुछ तनाव दिखाई दिए थे। ऐसे में यह यात्रा संकेत देती है कि दोनों देश संबंधों को पुनः मजबूत करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। यह संदेश वैश्विक बाजारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। क्वाड बैठक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के संतुलन के रूप में देखी जाती है। निवेशकों की दृष्टि से स्थिर और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक व्यापार के लिए आवश्यक है क्योंकि दुनिया का बड़ा समुद्री व्यापार इसी क्षेत्र से गुजरता है। यदि क्वाड सहयोग मजबूत होता है तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षा मिल सकती है। इसका लाभ भारत को एक वैकल्पिक विनिर्माण और व्यापारिक केंद्र के रूप में मिलेगा। इससे भारतीय बाजारों में दीर्घकालिक विदेशी निवेश बढ़ सकता है। रक्षा सहयोग पर बातचीत का सीधा प्रभाव भारतीय रक्षा कंपनियों पर पड़ सकता है। भारत लगातार रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

अमेरिका के साथ रक्षा तकनीक, ड्रोन, मिसाइल सिस्टम, साइबर रक्षा और सेमीकंडक्टर तकनीक में सहयोग भारतीय रक्षा उद्योग को नई ऊंचाई दे सकता है। इससे हिंदुस्तान ऐरोनाटिक्स लिमिटेड ,भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और निजी रक्षा कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है। वैश्विक निवेशक रक्षा क्षेत्र को अब केवल युद्ध उद्योग नहीं बल्कि उच्च प्रौद्योगिकी और रणनीतिक स्थिरता के क्षेत्र के रूप में देख रहे हैं।महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला पर चर्चा भी निवेशकों के लिए बड़ा संकेत है। इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, सेमीकंडक्टर और रक्षा तकनीक के लिए लिथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थमिनरल्स की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है। यदि भारत अमेरिका और अन्य साझेदार देशों के साथ इस क्षेत्र में दीर्घकालिक समझौते करता है तो भारत भविष्य की हरित औद्योगिक क्रांति में बड़ी भूमिका निभा सकता है। इससे इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी क्षेत्र की भारतीय कंपनियों को भारी लाभ हो सकता है।

साथियों, अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों पर भी इन यात्राओं का प्रभाव दिखाई देगा। यदि भारत पश्चिमी देशों और मध्य-पूर्व के साथ मजबूत रणनीतिक साझेदारी बनाता है तो उभरते बाजारों में भारत का वज़न बढ़ेगा। वैश्विक फंड मैनेजर चीन के विकल्प के रूप में भारत में निवेश बढ़ा सकते हैं। इससे एमएससीआई और अन्य वैश्विक सूचकांकों में भारतीय शेयरों की हिस्सेदारी बढ़ सकती है। लंबे समय में यह भारतीय बाजारों में लगातार विदेशी पूंजी प्रवाह सुनिश्चित कर सकता है। हालांकि, इसके साथ कुछ जोखिम भी मौजूद हैं। यदि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है, तेल कीमतें अचानक बढ़ती हैं या अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता अधिक तीव्र होती है तो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता आ सकती है। विदेशी निवेशक जोखिम बढ़ने पर उभरते बाजारों से पूंजी निकालने लगते हैं। इसलिए भारत को अपनी कूटनीतिक संतुलन नीति को सावधानी से बनाए रखना होगा। भारत की विशेषता यही रही है कि उसने अमेरिका, यूरोप, रूस और मध्य-पूर्व सभी के साथ संतुलित संबंध बनाए हैं। यही संतुलन भविष्य में भारतीय बाजारों की स्थिरता का आधार बन सकता है।

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9284141425

राज्य सरकार के निर्देश पर भिषण गर्मी को देखते हुए जगह-जगह पर पेड़ जल की सुविधा सुनिश्चित की गई।

राज्य सरकार के निर्देश पर भिषण गर्मी को देखते हुए जगह-जगह पर पेड़ जल की सुविधा सुनिश्चित की गई।

सरायकेला/खरसावां

राज्य सरकार से प्राप्त निर्देश के आलोक में भीषण गर्मी एवं लू की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा आमजन की सुविधा एवं सुरक्षा हेतु आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। उपायुक्त नितिश कुमार सिंह के निर्देशानुसार जिले के सभी सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों, बस स्टैंड एवं अन्य सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ खराब चापाकलों की मरम्मत एवं त्वरित जलापूर्ति के निर्देश संबंधित विभागों को दिए गए हैं।

जिला प्रशासन द्वारा आमजन से अपील की गई है कि अत्यधिक गर्मी एवं लू से बचाव हेतु आवश्यक सावधानियां बरतें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, अनावश्यक रूप से धूप में निकलने से बचें तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।

अतिक्रमण मुक्त अभियान के दौरान प्रभावित हुए गरीब फुटपाथ दुकानदारों के पुनर्वास की उठी मांग।

अतिक्रमण मुक्त अभियान के दौरान प्रभावित हुए गरीब फुटपाथ दुकानदारों के पुनर्वास की उठी मांग।

सरायकेला/गम्हरिया

गम्हरिया में फुटपाथ दुकानदारों के पुनर्वास की मांग को लेकर कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा प्रखण्ड विकास पदाधिकारी के अनुपस्थित में बड़ा बाबू तरूण ठाकुर को को ज्ञापन सौंपा।

25 मई 2026 को गम्हरिया प्रखंड में कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने प्रखण्ड विकास पदाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर हाल ही में लाल बिल्डिंग चौक के आसपास चलाए गए अतिक्रमण मुक्त अभियान के दौरान प्रभावित हुए गरीब फुटपाथ दुकानदारों के पुनर्वास की मांग की।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सराहनीय है, क्योंकि इससे यातायात व्यवस्था एवं आमजन की सुविधा में सुधार होगा। किंतु इस अभियान से प्रभावित हुए छोटे-छोटे दुकानदारों एवं उनके परिवारों के समक्ष आजीविका का संकट उत्पन्न हो गया है। ऐसे में उनके भरण-पोषण एवं रोजगार की व्यवस्था सुनिश्चित करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
कांग्रेस पार्टी के जिला महासचिव राजू रजक के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में मांग की गई कि गम्हरिया बाजार स्थित पुराने भवन का पुनर्निर्माण कर उसे दो मंजिला बनाया जाए तथा वहां फुटपाथ पर व्यवसाय करने वाले छोटे दुकानदारों को अस्थायी रूप से दुकानें आवंटित की जाएं, ताकि उनका रोजगार सुरक्षित रह सके और बाजार क्षेत्र भी व्यवस्थित बना रहे।

प्रतिनिधिमंडल ने प्रखण्ड विकास पदाधिकारी से इस मांग पर सकारात्मक पहल करने की अपील की।
इस अवसर पर मुख्य रूप से सरायकेला विधानसभा के कांग्रेस पार्टी के पूर्व प्रत्याशी के.पी सोरेन जी,जिला उपाध्यक्ष खिरोद सरदार, जिला मीडिया चेयरमैन सुमंत शर्मा, गम्हारिया प्रखंड उपाध्यक्ष इंद्रकांत झा सेवा दल के जिला अध्यक्ष गौरी शंकर, प्रखंड महिला अध्यक्ष उर्मिला देवी, सेवा सहित अन्य कांग्रेस जन उपस्थित थे।

आयकर कर्मचारी महासंघ रांची इकाई का Platinum jubilee celebration समारोह संपन्न।

आयकर कर्मचारी महासंघ रांची इकाई का Platinum jubilee celebration समारोह संपन्न।

रांची/झारखंड

आयकर कर्मचारी महासंघ के गौरवशाली 74 वर्ष पूर्ण होने एवं संगठन के 75वें वर्ष में प्रवेश के उपलक्ष में ITEF UNIT द्वारा platinum bubbles celebration अत्यंत उत्साह गरिमा एवं संगठनित्मक एकजुटता के साथ केंद्रीय राजस्व भवन रांची के प्रांगण में मनाया गया।

आपको बताते चलें कि यह अवसर संगठन के लंबे संघर्ष कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा हेतु किए गए ऐतिहासिक प्रयासों तथा कर्मचारी एकता की सशक्त परंपरा को स्मरण करने का महत्वपूर्ण छान रहा।

वहीं कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजारोहण के साथ की गई ITEF रांची इकाई के महिला सदस्यों ने संगठन का ध्वज फहराकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया जो एक अनूठी पहल है ध्वजारोहण के दौरान उपस्थित सदस्यों ने संगठन की एकता अनुशासन एवं कर्मचारी हितों की रक्षा हेतु सदैव प्रतिबध्द रहने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर यूनिट के अधिकारियों वरिष्ठ साथियों युवा कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ITEF सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही । पूरे परिषद में संगठनात्मक उत्साह भाईचारा एवं कर्मचारी एकता का वातावरण देखने को मिला।

कार्यक्रम का संबोधित करते हुए अध्यक्ष मनोज शुक्ला ने कहा कि ITEF केवल एक संगठन नहीं है बल्कि कर्मचारियों के अधिकार सम्मान और न्याय की आवाज है उन्होंने कहा कि पिछले 74 वर्षों से federation ने अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए कर्मचारियों के ही तो की रक्षा हेतु ऐतिहासिक संघर्ष किए हैं। आज का यह platinum bubbles celebration उन सभी पूर्वज साथियों के योगदान को नमन करने का अवसर है जिन्होंने संगठन को मजबूत आधार प्रदान किया।

अपने संबोधन उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान समय में कर्मचारियों के समक्ष नई चुनौतियां हैं जिनका सामना केवल संगठनात्मक एकता और सामूहिक प्रयासों से ही किया जा सकता है। उन्होंने सभी सदस्यों से संगठन को और अधिक सशक्त बनाने तथा कर्मचारियों के हितों के लिए निरंतर सक्रिय रहने का आवाहन किया है।

वंही कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सचिन आभास नाथ ने कहा कि ITEF का इतिहास संघर्ष समर्पण एवं उपलब्धियां से भरा हुआ है उन्होंने कहा कि platinum bubbles वर्ष संगठन के लिए आत्ममंथन, उपलब्धियों के मूल्यांकन तथा भविष्य की नई दिशा तय करने का अवसर है उन्होंने सभी सदस्यों से संगठन की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने एवं आने वाली पीढ़ी को संगठन के मूल्यों से जोड़ने की अपील की है।

ज्ञात हो कि ITEF का PLATINUM BUBBLES CELEBRATION 20 मई 2026 से प्रारंभ होकर 10 फरवरी 2027 तक विभिन्न कार्यक्रमों, संगोष्ठियों, सामाजिक गतिविधियों एवं संगठनात्मक आयोजनों के माध्यम से मनाया जाएगा।

इस ऐतिहासिक पल के अवसर पर अविनाश कुमार उपाध्याय आईटीएफ बिहार झारखण्ड, सी के झा सहायक आयकर आयुक्त, प्रशांत कुमार सिंह, रवि कुमार, मनीष रंजन, बबलू रजक, राकेश सिंह, अरविंद प्रसाद, रजनीश कुमार, मिथिलेश कुमार के साथ-साथ रांची धनबाद एवं जमशेदपुर के सदस्य वृहद संख्या में शामिल होकर कार्यक्रम को अविश्वसनीय एवं अद्भुत बनाया।

कार्यक्रम का समापन संगठन आत्मक एकता एवं कर्मचारी हितों की रक्षा के संकल्प के साथ हुआ।

मशहूर बिल्डर द्वारा जमीन घोटाले का मामला सामने आया।, बिल्डर ने जमींदार से मांगी माफी।

मशहूर बिल्डर द्वारा जमीन घोटाले का मामला सामने आया।, बिल्डर ने जमींदार से मांगी माफी।

सरायकेला/आदित्यपुर

सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना अंतर्गत एक मशहूर बिल्डर द्वारा जमीन घोटाले का मामला सामने आया। और यह मामला आदित्यपुर क्षेत्र में अथवा बिल्डरों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

खबर सामने आ रही है कि बिल्डर जितेंद्र मिश्रा द्वारा₹60 लाख में जमीन खरीद कर जमीन का मोटेशन भी करा लिया गया लेकिन जमीनदारों को उनके अधिकार का पैसा नहीं दिया गया। जिससे कि जमींदारों में आक्रोश व्याप्त है।

सूत्रों द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार जितेंद्र मिश्रा द्वारा करीब-करीब 60 लाख रुपए में जमीन की खरीदी की गई थी। साथ ही जमीन पर जितेंद्र मिश्रा द्वारा रजिस्ट्री और मोटेशन भी कर लिया गया था लेकिन काफी समय बीत जाने के बावजूद भी जमींदारों को अभी तक उसका खरीद का पैसा नहीं देने के कारण गुस्साए लोगों ने धीराजगंज स्थित उनके यशिका फ्लैट में आकर अपने रुपए की मांगने करते हुए देखा गया।

आपको बताते चले कि जितेंद्र मिश्रा आदित्यपुर कॉलोनी रोड नंबर 11 के निवासी हैं।
वहीं बिल्डर जितेंद्र मिश्रा लेनदारों से खुद को काफी देर तक छुपाए रखा। फिर लेनदारों और बिल्डर के बीच में बातचीत के दौरान बिल्डर द्वारा जो जमींदार से जमीन खरीदे गया था और जमीन की कुल राशि का भुगतान जमींदार को नहीं किया गया जिसकी वजह से बिल्डर जितेंद्र मिश्रा ने माफी मांग कर कुछ समय के लिए छुटकारा प्राप्त किया।

सूत्रों ने यह भी बताया है कि बिल्डर जितेंद्र मिश्रा का इतिहास काफी ऐतिहासिक सनसनीखेज रहा है कहते हैं ना चोर चोरी करना छोड़ देगा लेकिन हेरा फेरी करना नहीं छोड़ेगा। यह कहावत चरितार्थ सिद्ध होती है।
खैर जो भी हो मामला कुछ समय के लिए टला जरूर है लेकिन तलवार अभी भी सर के ऊपर लटक रही है ।अगर आदतों में सुधार नहीं हुई तो वह दिन दूर नहीं….? जनता की नजर सब पर है।

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free