RENU DEVI DRINKING WATER पानी प्लांट का उद्घाटन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

RENU DEVI DRINKING WATER पानी प्लांट का उद्घाटन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

सरायकेला/आदित्यपुर

सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बास्को नगर में दूसरा पानी प्लांट ( RENU DEVI DRINKING WATER ) का मंगलवार यानी कि दीपावली के दिन विधिवत रूप से उद्घाटन किया गया। सर्वप्रथम नए पानी प्लांट का पंडित द्वारा विधिवत रूप से पूजा अर्चना की गई। उसके बाद यूनियन बैंक आदित्यपुर ब्रांच के मैनेजर शीव वर्मा एवं समाज सेवी आशीष पति द्वारा फिता काट कर उद्घाटन किया गया। तत्काल नए पानी प्लांट में प्रतिदिन 2000 लीटर पानी की सुविधा उपलब्ध की जा रही है।

आपको बताते चलें कि एक समय था जब लोग पानी के लिए तालाब नदियां एवं कुएं के ऊपर निर्भर रहा करते थे आज के दौर में हर कोई स्वच्छ पानी पीने के लिए जागरूक हो चुका है एवं हर कोई चाहता है कि साफ सुथरा पानी का उपयोग किया जाए जिससे कि कई तरह की बीमारियों से बचा जा सके।

वहीं मंगलवार को उद्घाटन समारोह के मौके पर RENU DEVI DRINKING WATER के संस्थापक रेणु देवी ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि क्षेत्र वासियों की सुविधा एवं क्षेत्र वासियों के स्वास्थ्य को मध्यनजर रखते हुए एवं क्षेत्र वासियों की मांग पर यह फिल्टर पानी प्लांट की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि आज हर कोई स्वच्छ पानी पीने की चाह रखता है उन्होंने कहा कि दूषित पानी पीने से कई तरह की बीमारियां उत्पन्न होती है जिससे कि कितने ही गरीब लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं। आज के दौर में हर किसी को स्वच्छ पानी पीने का अधिकार है चाहे वह छोटी बस्तियों में रहते हो या बड़े-बड़े महलों में रहते हो और इन्ही सब जरूर को देखते हुए यह पानी प्लांट की स्थापना की गई है और जल्द ही पानी की पैकेजिंग कर पानी की बोतल भी मार्केट में भेजा जाएगा जिसकी तैयारियां जोरों पर की जा रही है।

अनुमंडल पदाधिकारी व कार्यपालक अभियंता को सौंपा ज्ञापन

अनुमंडल पदाधिकारी व कार्यपालक अभियंता को सौंपा ज्ञापन

सरायकेला/ईचागढ़


(मालखान महतो)

विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन द्वारा अनुमंडल कार्यालय व कार्यपालक अभियंता चांडिल को एक ज्ञापन सौंपकर 4 नवम्बर 2025 को पुनर्वास कार्यालय चाण्डिल संख्या–2 एवं कार्यपालक अभियंता कार्यालय चाण्डिल के समक्ष अपनी विभिन्न मांगों को लेकर गेट जाम व धरना प्रदर्शन करने सुचना दिया। विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन ने बताया कि सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक एक दिवसीय गैट-जाम सह धरना प्रदर्शन किया जाएगा।

मंच के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने कहा यह निर्णय चाण्डिल डैम से प्रभावित कुल 116 गाँवों के विस्थापित प्रतिनिधियों की बैठक में लिया गया। विस्थापितों का कहना है कि पुनर्वास, नियोजन एवं विकास कार्यों को लेकर वर्षों से लंबित समस्याओं के समाधान हेतु यह कदम उठाया जा रहा है।

धरना का उद्देश्य प्रशासन एवं संबंधित विभागों का ध्यान विस्थापित परिवारों की वास्तविक समस्याओं की ओर आकर्षित करना है, ताकि पुनर्वास प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके और प्रभावित परिवारों को उनका न्यायोचित अधिकार मिल सके।

विस्थापितों ने अनुमंडल प्रशासन से आग्रह किया है कि 4 नवम्बर के इस धरना कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग प्रदान करें तथा शांति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण सुनिश्चित करें। मौके पर हरे कृष्ण महतो, गुरुचरण टुडू ,सनातन सिंह मुंडा, हाड़ी राम कुमार, विजय पोद्दार, जयप्रकाश सिंह मुंडा, जितेंद्र गोप ,सीमांत महतो ,प्रभात महतो तथा पूर्ण डूबी 43 गांव तथा 16 आशिक डूबी के विस्थापित प्रतिनिधि उपस्थित थे।

पूर्वी सिंहभूम जिले की प्रतिभाशाली बेटी मालोती हेंब्रम को विशेष रूप से आदिवासी समाज ने किया सम्मानित

पूर्वी सिंहभूम जिले की प्रतिभाशाली बेटी मालोती हेंब्रम को विशेष रूप से आदिवासी समाज ने किया सम्मानित

मुसाबनी के आदिवासी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत मालती हेमब्रम

जमशेदपुर/मुसाबनी

आदिम महली माहाल के तत्वावधान में मुसाबनी स्थित डाक बंगला, जिला परिषद परिसर में एक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता सोबरा हेंब्रम तोरोप पारगाना ने की।

बैठक का मुख्य उद्देश्य महली पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था पर हो रहे हमला की समीक्षा करना, AIMAA की कार्यप्रणाली में पाई जा रही अनियमितताओं पर विचार-विमर्श करना और संगठन के भविष्य को लेकर ठोस नीतिगत निर्णय लेने के शुरुआत समाज के वरिष्ठ सदस्यों द्वारा पारंपरिक ढंग से क़ी गई।

इसके बाद समाज के विभिन्न प्रतिनिधियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। बैठक में प्रमुख रूप से यह चर्चा हुई कि महली पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था माझी- परगना पर बाहरी हस्तक्षेप और भ्रम फैलाने वाले तत्वों द्वारा लगातार प्रहार किया जा रहा है, जिससे समाज की एकता और परंपरा पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इस पर सभी उपस्थित सदस्यों ने एकमत होकर निर्णय लिया समाज की इस प्राचीन और गौरवशाली व्यवस्था के संरक्षण एवं सुदृढ़ीकरण हेतु एक ठोस नीति बनाई गई। इसी क्रम में ऑल इंडिया महाली आदिवासी एसोसिएशन द्वारा प्रसारित भ्रामक जानकारियों एवं संगठनात्मक कार्यों में पाई जा रही अनियमितताओं पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। सदस्यों ने यह मत प्रकट किया कि ऑल इंडिया महाली आदिवासी की गतिविधियों में पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक पद्धति अपनाना आवश्यक है। संगठन के भीतर पाई जा रही अव्यवस्था, पक्षपात और असंगत गतिविधियों को सुधारने के लिए कार्ययोजना पर निर्णय लिया गया। इसके साथ ही, संगठन के सुचारू संचालन हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश एवं नीतिगत सुधारों पर भी चर्चा की गई। समाज की एक गौरवशाली उपलब्धि पर भी सभी ने गर्व प्रकट किया। पूर्वी सिंहभूम जिले की प्रतिभाशाली बेटी मालोती हेंब्रम को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। उन्होंने हाल ही में जर्मनी की राजधानी बर्लिन में आयोजित प्रतिष्ठित जर्मन- इंडिया समिट ( जी 2 सी — 2025 में भारत का प्रतिनिधित्व कर देश और विशेष रूप से आदिवासी समाज का नाम गौरवान्वित किया। यह सम्मेलन 6 और 7 अक्टूबर 2025 को हुआ था, जिसमें भारत और जर्मनी दोनों देशों के नीति-निर्माताओं, उद्योगपतियों, तकनीकी विशेषज्ञों और सीईओ ने भाग लिया। मालोती हेंब्रम की उपस्थिति भारत के युवा वर्ग, विशेषकर आदिवासी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत रही।

इस बैठक में झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से कई समाजसेवी, पदाधिकारी और प्रतिनिधि उपस्थित हुए। इनमें प्रमुख रूप से शेखर चंद्र महली, सोबरा हेंब्रम, बसुदेव मार्डी, मंगल महली, सुनील मार्डी, शंकर सेन महली, गौरांग बेसरा, नंदलाल महली, अक्लू सोरेन, सलखू बेसरा, लक्ष्मीचरण बास्के, सहदेव सोरेन, आलोक बेसरा (पूर्वी मेदिनीपुर), नारायण बास्के (पूर्वी मेदिनीपुर), दासिया महली (मेदिनीपुर), राम बास्के और सुरई बास्के शामिल थे।

बैठक के अंत में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि महली समाज की एकता, परंपरा और स्वशासन व्यवस्था की रक्षा के लिए सभी राज्यों के प्रतिनिधि मिलकर एक साझा रणनीति तैयार करेंगे। साथ ही, संगठन के कार्यों को पारदर्शी, निष्पक्ष और समाजहित में संचालित करने हेतु आदिम महली माहाल को एक केंद्रीय समन्वय इकाई के रूप में सशक्त किया जाएगा।

इस अवसर पर मुख्य रूप से शेखर चंद्र माहली, सोबरा हेम्ब्रम, बसुदेव मार्डी, मंगल माहली, सुनील मार्डी, शंकर सेन माहली, गौरांग बेसरा, नंदलाल माहली, अकलू सोरेन, सालखू बेसरा, लक्ष्मी चरण बास्के, सहदेव सोरेन, अलोक बेसरा (पश्चिम मिदनापुर), नारायण बास्के (पश्चिम मिदनापुर), दासिया माहली (मिदनापुर), राम बास्के, सुराई बास्के, दुलाल माहली और कार्तिक माहली सहित कई समाज प्रतिनिधि एवं सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में सभी उपस्थित सदस्यों ने समाज की एकता, संगठन माझी परम्परा और आने वाले कार्यक्रमों को लेकर अपने-अपने विचार रखे तथा समाज के उत्थान के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया।

धातकीडीह गाँव में हुई भक्तिभाव से मनसा पूजा

धातकीडीह गाँव में हुई भक्तिभाव से मनसा पूजा

सरायकेला

(पारस कुमार होता)

प्रखण्ड सरायकेला के अन्तर्गत धातकीडीह गाँव में सर्पो की देवी माता मानस की भव्य प्रतिमा स्थापित कर भक्ति भाव से पूजा अर्चना की गई। पूजा की शुरुआत घटवारी से हुई।शुक्रवार शाम को श्रद्धालुओं द्वारा घट में जल भरकर मन्दिर परिसर लाया गया। जहाँ पंडित रामानाथ होता एव रूपक होता ने घट की स्थापना कर विधिवत मंत्रोउच्चरण के साथ सर्पो की देवी माता मानसा की पूजा अर्चना की। वहीं गाँव के श्रद्धांलुओं ने निर्जला उपवास रहकर अपने व परिवार की सुख समृद्धि व वैभव देवी माता से मांगी। पूजा के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से उपस्थित एल आई सी ,जमशेदपुर के अधिकारी सोहन लाल मुखी ने बताया कि मनसा की पूजा गांवों में मनाये जाने वाले प्रमुख त्योहारों में एक है। इस पूजा का गाँव में विशेष महत्व है, मां मनसा को लेकर कई मान्यताएं हैं. सांप-बिच्छू व बरसाती कीड़ों के विष से बचने के लिए मां मनसा की पूजा लोक परंपरा है.

महालिमोरूप क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता हेमसागर प्रधान ने बताया कि गांवों में मां मनसा की पूजा पूरे भक्तिभाव से मनाने के पीछे भी मान्यता है कि मां मनसा की पूजा-अर्चना से सांप-बिच्छुओं के खतरों से उन्हें सुरक्षा मिलती है. इसी कारण गांव के लोग मां मनसा की आराधना पूरे भक्तिभाव से करते हैं.


मौक पर सोहनलाल मुखी, अशोक महतो, धीरेंद्र महतो, सुभाष चंद्र महतो, नगेन महतो, कृष्णा महतो, बुधेश्वर् दास, कमलदेव दास, लखिन्द् नायक समेत अन्य उपस्थित थे।

“आदि कर्मयोगी अभियान” में सरायकेला-खरसावाँ की असाधारण उपलब्धि — महामहिम राष्ट्रपति महोदया द्वारा उपायुक्त को सम्मान 🇮🇳✨

“आदि कर्मयोगी अभियान” में सरायकेला-खरसावाँ की असाधारण उपलब्धि — महामहिम राष्ट्रपति महोदया द्वारा उपायुक्त को सम्मान

सरायकेला-खरसावाँ

सरायकेला-खरसावाँ जिले के लिए आज का दिन ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण है।
जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित “आदि कर्मयोगी अभियान” एवं “धरती आबा जनभागीदारी अभियान” के अंतर्गत देश के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिलों में सरायकेला-खरसावाँ जिले का चयन किया गया है।

इस अवसर पर दिनांक 17 अक्टूबर, 2025 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित “आदिकर्मयोगी अभियान नेशनल कॉन्क्लेव” में महामहिम राष्ट्रपति महोदया द्वारा सरायकेला-खरसावाँ जिले के उपायुक्त श्री नितिश कुमार सिंह (भा.प्र.से.) को सम्मान प्रदान किया गया।

यह सम्मान जिले में जनजातीय सशक्तिकरण, समावेशी विकास, नवाचार आधारित प्रशासनिक कार्यशैली और समुदाय की सक्रिय भागीदारी के उत्कृष्ट परिणामों के लिए दिया गया है।

🟢 प्रमुख उपलब्धियाँ:-

  • जनजातीय ग्रामों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट – आवास, सड़क, शिक्षा, पोषण, पेयजल और आजीविका के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य।
  • PESA अंतर्गत पंचायतें – 132
  • Forest Rights Act (FRA) अंतर्गत पंचायतें – 67 (ग्रामों की संख्या – 311)
  • शैक्षणिक संस्थान – प्राथमिक विद्यालय 818, मध्य विद्यालय 502, उच्च विद्यालय 101 (कुल 1421 विद्यालय)
  • आंगनबाड़ी केंद्र – 1373
  • स्वास्थ्य केंद्र – PHC: 14, CHC: 08
  • संचालित छात्रावासों की संख्या – 28
  • कौशल प्रशिक्षण – DDU-GKY अंतर्गत 5793 लाभार्थी एवं राज्य कौशल मिशन के तहत 705 बैच
  • प्रशिक्षित शिक्षक – 4001
  • डिजिटल लर्निंग सेंटर – 199

इन पहलों से जिले के जनजातीय समुदायों के जीवन स्तर में ठोस सुधार हुआ है और प्रशासन ने विकास योजनाओं के शत-प्रतिशत सैचुरेशन का संकल्प लिया है।

इस अवसर पर झारखण्ड राज्य के सरायकेला-खरसावाँ, पाकुड़, जामताड़ा, सिमडेगा और लोहरदगा जिलों को भी सम्मानित किया गया।

यह उपलब्धि साबित करती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद, समर्पण, नवाचार और जनभागीदारी के बल पर समावेशी विकास का सशक्त मॉडल प्रस्तुत किया जा सकता है।

इस सम्मान से न केवल जिले की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और सशक्त हुई है, बल्कि यह हर नागरिक के लिए गर्व का विषय है।

“आदि कर्मयोगी अभियान” में सरायकेला-खरसावाँ जिले का चयन देश के सर्वश्रेष्ठ जिलों में

“आदि कर्मयोगी अभियान” में सरायकेला-खरसावाँ जिले का चयन देश के सर्वश्रेष्ठ जिलों में

सरायकेला-खरसावाँ

सरायकेला-खरसावाँ जिले के लिए यह गर्व का विषय है कि जिला भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा संचालित “आदि कर्मयोगी अभियान” एवं “धरती आबा जनभागीदारी अभियान” के तहत देश के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिलों में चयनित हुआ है।

यह उपलब्धि जिले में संचालित नवाचारी पहलों, समावेशी जनजातीय विकास के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट कार्यों तथा समुदाय की सक्रिय भागीदारी के कारण संभव हुई है।

इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन एवं पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन दिनांक 17 अक्टूबर, 2025 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में किया जा रहा है। इस समारोह में सरायकेला-खरसावाँ जिला सहित झारखण्ड के पाकुड़, जामताड़ा, सिमडेगा एवं लोहरदगा जिले को सम्मानित किया जाएगा।

इस सम्मान से जिले के जनजातीय सशक्तिकरण, भागीदारी आधारित विकास मॉडल और कर्मठ प्रशासनिक प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।

इस राष्ट्रीय समारोह में सरायकेला-खरसावाँ के उपायुक्त श्री नितिश कुमार सिंह (भा.प्र.से.) उपस्थित रहेंगे।

सत्य वह दौलत है जिसे पहले खर्च करो- जिंदगी भर आनंद पाओ, झूठ वह कर्ज़ है- क्षणिक सुख पाओ जिंदगी भर चुकाते रहो

सत्य वह दौलत है जिसे पहले खर्च करो- जिंदगी भर आनंद पाओ, झूठ वह कर्ज़ है- क्षणिक सुख पाओ जिंदगी भर चुकाते रहो

सच्चाई की राह, सुखद जीवन के लिए विनियोग- झूठ का गंतव्य दुखी जीवन की चरम सीमा- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

गोंदिया/महाराष्ट्र

भारत अपनी संस्कृति,आध्यात्मिकता, अहिंसा धर्मनिरपेक्षता,परमो धर्मा और सच्चाई की मूरत राजा हरिश्चंद्र इत्यादि अनेकों विशेषताओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र से यह मानता हूं कि एक झूठ के पीछे सव झूठ बोलना पड़ता है और झूठ के दलदल में मनुष्य घुसता चला जाता है।जिससे उसकी वर्तमान पीढ़ी तो ध्वस्त होती ही है पर आने वाली पीढ़ियों में भी यह दोष समाया रहता है।


साथियों बात अगर हम सच्चाई की साक्षात मूरत राजा हरिश्चंद्र की करें तो,सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र सदैव सत्य बोलते थे। वह अपने सत्य और न्याय के लिए जाने जाते थे। इसलिए आज भी उनकी कहानियां बड़े सम्मान के साथ सुनाई जाती हैं।हमने अपने बड़े बुजुर्गों से अनेक कई किस्से सुने हैं।हम,आज की जनरेशन करीब-करीब हर सच्चाई वाली बात में इस महान मूरत का नाम ज़रूर जोड़तेहैं।हमारे बड़े बुजुर्गों से हमने कई वाक्य सुने हैं, जैसे सच्चाई छुप नहीं सकती बनावट के उसूलों से, सत्य की हार नहीं होती,सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं,सत्यमेव जयते।


साथियों बात अगर हम सत्यमेव जयते इसकी करें तो हम अनेक शासकीय,अशासकीय स्थानों पर इसका उल्लेख ज़रूर देखते हैं।यही सत्य है कि हमेशा सत्य की विजय होती है।

साथियों बात अगर हम भारतीय आध्यात्मिकता की करें तो हमें यही ज्ञान मिलता है कि सत्य व दौलत है जैसे पहले खर्च करो फिर जिंदगी भर आनंद पाओ और झूठ वह कर्ज है जिससे क्षणिक सुख पाओ और जिंदगी भर उसे चुकाते रहो बिल्कुल सत्य वचन!साथियों यह बात अगर मानव के हृदय में बस जाए तो वाह क्या बात है! हम पृथ्वी लोक में ही स्वर्ग के दर्शन कर सकेंगे।अगर हर भारतीय व्यक्ति चाहे वह सरकारी हो या शासकीय कर्मचारी, मंत्री हो या नेता, कार्यकर्ता हो या मालिक,सभी अगर सत्यता रूपी दौलत को पूरी निष्ठा से खर्च करें अर्थात ईमानदारी से अपनी अफसर शाही ड्यूटी, व्यापार-व्यवसायज दिनचर्या अर्थात जीवन के हर काम हर मोड़ पर सत्यता बरसाएगें तो वह खुद तो जीवन का आनंद जरूर पाएंगें परंतु उससे अधिक भारत को स्वर्ग जैसा सुंदर रचना बनाने में अहम रोल अदा करेगें। भारत एक अपराध मुक्त भारत की परिकल्पना में साकार होगा।कोई अदालत, पुलिस स्टेशन,जांच एजेंसियां नहीं होगी क्योंकि यह सब झूठ और अपराध को काटने के लिए ही बनाई गई हैं।


साथियों बात अगर हम झूठ की करें तो हमने अपने व्यवहारिक जीवन में देखा होगा कि बेईमान, रिश्वतखोर, झूठा, भ्रष्टाचारी, धोखेबाज इत्यादि तरह के मानव कभी अपने जीवन में सुखी नहीं होते। चाहे कितना भी अवैध धन कमा लें,उनके पीछे परिवार का, उनके स्वास्थ्य का, मानसिक हालत हमेशा दुखों में बनी रहती हैउनके शरीर के नसों में झूठ रूपी खून दौड़ता है और इन नकारात्मक झूठे व्यवहारों से उनका क्षणिक आर्थिक सुख मिलता है परंतु उसके लिए उनको जीवन भर कष्टों में गुजारना पड़ता है। जितना क्षणिक सुख प्राप्त होता है वह ब्याज सहित याने अतिरिक्त दुख सहित यहीं इस जीवन में भोगना पड़ता है और फिर अंत में पछताते हैं के ऐसा क्यों हुआ,ऊपर वाले से क्षमा याचना करते हैं।पर कहते हैं ना कि जब चिड़ियां चुग गई खेत,अब पछतावे क्या होए?

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र


साथियों बात अगर हम सत्य की गहराई की करें तो,सत्य दो प्रकार का होता है- एक व्यवहारिक सत्य और दूसरा वास्तविक। व्यवहारिक सत्य का अर्थ है जैसा देखा, जैसा सुना और जैसा अनुभव किया, उसको वैसा ही बोलना सत्य कहलाता है।व्यवहारिक सत्य में हो सकता है, जो एक के लिए सत्य है, वो दूसरे के लिए असत्य हो। वैसे तो हर व्यक्ति अपने मुताबिक अपना सत्य बना लेता है। यह व्यवहारिक सत्य, अनुभव, नजरिए और देश, काल के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। इसलिए इसमें मतभेद की संभावना बनी रहती है।ईमानदार और न्यायवादी व्यक्ति ही सत्य का पालन करता है।यह देखा गया है कि जो लोग ईमानदार होते हैं वह सदैव सच बोलते हैं। झूठे बेईमान और मक्कार लोग सदैव असत्य का फायदा लेकर अपना काम बनाते हैं। हम ऐसे लोगों से बचना चाहिए जो अपने फायदे के लिए (झूठ) असत्य बोलते हैं।सत्य का अर्थ है ‘सते हितम्’ अर्थात् जिसमें हित या कल्याण निहित हो। सत्य भूत, भविष्य एवं वर्तमान तीनों काल में एक सा रहता है तथा इससे यथार्थ का ज्ञान होता है। साधारण बातचीत में जो सच है, यथार्थ है उसे जानना, समझना, मानना, कहना एवं उसके अनुसार ही व्यवहार करना सत्य है। मानव बोध में सत्य के प्रति श्रद्धा एवं असत्य के प्रति घृणा स्वाभाविक रूप से पाई जाती है। मनुष्य जीवन के लिए सत्य सबसे बड़ी शक्ति हैं।जीवन तथा संसार के सत्य की तलाश कर उसे जीवन में अपनाना मानव मात्र का मूल उद्देश्य हैं।हमारी संस्कृति में सत्य को बड़ा महत्व दिया गया हैं।इस सम्बन्ध में एक महापुरुष ने ठीक ही कहा कि सत्य परेशान हो सकता है मगर पराजित नहीं. भारत की भूमि पर हरिश्चन्द्र जैसे राजा हुए जिनकी सत्यनिष्ठा के चलते वे सत्यवादी कहलाए।सत्य के रास्ते पर चलकर व्यक्ति बड़ी-बड़ी समस्या का समाधान आसानी से कर सकता है। सत्य के मार्ग पर चलकर कई लोगों ने सफलता प्राप्त कर अपना और अपने परिवार का भला किया है।सत्य के मार्ग पर चलकर कई लोगों ने सफलता प्राप्त कर दुनिया को बदला है । सत्य बोलने से व्यक्ति को सभी सम्मान देते हैं। ऐसा कहा जाता है कि तीन चीजें छुपाए नहीं छुपती- सूरज, चंद्रमा और सत्य। जो लोग सत्य का, न्याय का पक्ष लेते हैं उनकी प्रशंसा सभी लोग करते हैं।सत्य का साथ देने वालों को इतिहास स्वर्णिम पन्नों पर दर्ज करता है। परंतु जो लोग झूठ,असत्य का साथ देते हैं उनकी चारों ओर आलोचना होती है।

किसी ने खूब ही कहा है कि
चन्द्र टरै, सूरज टरै, टरै जगत व्यवहार।’
पै दृढ़ हरिश्चन्द्र को टरै न सत्य विचार।..
सांच बराबर तप नहीं, झूंठ बराबर पाप।
जाके हृदय सांच है, ताके हृदय आप

किसी ने धर्म के दस लक्षण बताए हैं, जिनमें सत्य भी प्रमुख स्थान रखता है।
‘धृतिः क्षमा दमोऽस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रहः। धीविद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्।।’
अर्थात् धैर्य, क्षमा, संयम, अस्तेय (चोरी न करना ), शौच ( अंतर्मन और शरीर की पवित्रता ), इन्द्रिय निग्रह (इन्द्रियों से धर्म सम्मन आचरण), धी ( सत् बुद्धि), विद्या, सत्य एवं अक्रोध यानी हमेशा शांत रहना।
अतः अगर हम पूरे उपरोक्त विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करेंगे तो हम पाएंगे के सत्य व दौलत है जिसे पहले खर्च करो फिर जिंदगी भर आनंद पाओ और झूठ वह कर्ज है जिसमें सैनिक सुख पाओ फिर जिंदगी भर जो करते रहो और सच्चाई की राह सुखद जीवन के लिए एक विनियोग है तथा झूठ का गंतव्य दुखी जीवन की चरम सीमा है

संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9359653465

उत्कृष्ट कार्य हेतु ईचागढ़ की सेविका रिंकी महतो को जिला में मिला प्रथम स्थान

उत्कृष्ट कार्य हेतु ईचागढ़ की सेविका रिंकी महतो को जिला में मिला प्रथम स्थान

सरायकेला/ईचागढ़


(मालखान महतो)
सरायकेला-खरसावां जिला के ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के आंगनवाड़ी केंद्र तिरुलडीह 2 की सेविका रिंकी महतो को पोषण ट्रैकर के हर क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए बुधवार को उपायुक्त कार्यालय सरायकेला में पोषण माह 2025 के समापन समारोह में सम्मानित किया गया। जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सत्या ठाकुर के द्वारा प्रमाण पत्र और अंग वस्त्र दे कर सम्मनित किया गया।

वहीं महिला पर्यवेक्षिका कृष्णा देवी ने बताया कि रिंकी महतो ईचागढ़ परियोजना के आंगनवाड़ी केंद्र तिरुलडीह 2 की सेविका है। इन्हे पोषण ट्रैकर पर हर क्षेत्र पर प्रतिदिन सुचारु रुप से कार्य की है और पूरे जिले में प्रथम स्थान प्राप्त की है। उन्होंने बाकी सेविकाओं से भी पोषण ट्रैकर के हर क्षेत्र पर अच्छे से कार्य करने की अपील की है।

उप प्रमुख मो. एकराम ने कराया जर्ज़र सड़क का मिट्टी-मोरम से मरम्मती

उप प्रमुख मो. एकराम ने कराया जर्ज़र सड़क का मिट्टी-मोरम से मरम्मती

सरायकेला/ईचागढ़

सरायकेला-खरसावां जिला के कुकड़ू प्रखंड क्षेत्र के तिरुलडीह-चौड़ा मुख्य पथ (सोनाराम महतो के घर के पास) से होकर मध्य विद्यालय कुदा तक जाने वाली जर्जर सड़क की मरम्मत कुकड़ू प्रखंड के उप प्रमुख मो. एकराम की पहल पर कराई गई।

ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही परेशानी को देखते हुए स्वयं उपप्रमुख ने जेसीबी और ट्रैक्टर लगवाकर सड़क पर मिट्टी-मोरम डालने का कार्य करवाया।
बरसात के दिनों में इस सड़क पर पानी जमा हो जाने से स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को आवाजाही में भारी दिक्कत हो रही थी।

आए दिन लोग फिसलकर गिर जाते थे। ग्रामीणों की शिकायत पर उप प्रमुख मो. एकराम ने त्वरित पहल करते हुए अस्थायी रूप से मरम्मत का कार्य पूरा कराया। उप प्रमुख मो. एकराम ने कहा कि आगामी दिनों में 15वीं वित्त आयोग से फंड प्राप्त होने पर इस सड़क पर पीसीसी निर्माण कराया जाएगा, ताकि लोगों को स्थायी राहत मिल सके। इस मौके पर तिरुलडीह थाना के एएसआई रंजीत प्रसाद भी मौजूद थे। उन्होंने उप प्रमुख के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्य ग्रामीण हित में सराहनीय पहल है।

क्रोध का विकराल रूप जुनून है, जो जीव पर सवार होकर जघन्य से जघन्य अपराध करा देता है।

क्रोध का विकराल रूप जुनून है, जो जीव पर सवार होकर जघन्य से जघन्य अपराध करा देता है।

गोंदिया/महाराष्ट्र

क्रोध में व्यक्ति आपा खो देता है-एक दोष को दूर करने के लिए अनेक कुतर्क पेश करता है।

क्रोध से उत्पन्न हुए अपराधों के औचित्य को सिद्ध करने के लिए क्रोधी व्यक्ति कुतर्क कर दूसरे को ही दोषी सिद्ध करता है – एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

भारतीय संस्कृति, सभ्यता के बारे में हमने साहित्य और इतिहास के माध्यम से और भारत माता की गोद में रहकर पारिवारिक संस्कृति,मान सम्मान,रीति-रिवाजों से इसे प्रत्यक्ष महसूस भी कर रहे हैं। परंतु हमारे बड़े बुजुर्गों के माध्यम से हमने कई बार सतयुग का नाम सुने हैं, जिसका वर्णन वे स्वर्गलोक़ के तुल्य करते हैं। याने इतनी सुखशांति, अपराध मुक्ति, इमानदारी,शांति सरोवर तुल्य, कोई चालाकी चतुराई गलतफहमी या कुटिलता या भ्रष्टाचार नहीं, बस एक ऐसा युग कि कोई अगर कुछ दिन, माह के लिए बाहर गांव जाए तो अपने घरों को ताला तक लगाने की ज़रूरत नहीं!अब कल्पना कीजिए कि अपराध बोध मुक्त युग!मेरा मानना है कि हमारी पूर्व की पीढ़ियों ने ऐसा युग जिए होंगे तब यह बोध आगे की पीढ़ियों में आया,जिसे सतयुग के नाम से जरूर जाना जाता है।


साथियों बात अगर हम वर्तमान युग पर बड़े बुजुर्गों में चर्चा की करें तो इस इसे कलयुग नाम देते हैं, याने सभी प्रकार के अपराध बोध से युक्त संसार। हर तरह की बेईमानी, भ्रष्टाचार कुटिलता से भरा हुआ युग!आज भी बुजुर्गों का मानना है कि वह सतयुग फिर आएगा,याने आज की तकनीकी भाषा में अपराध मुक्त, भ्रष्टाचार बेईमानी कुटिलता मुक्त पारदर्शिता और अनेकता में एकता वाले भारत की परिकल्पना का युग।

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

साथियों बात अगर हम अपराध, भ्रष्टाचार, बेईमानी, कुटिलता से भरे जग की करें तो मेरा मानना है कि इसका मुख्य प्रवेश द्वार क्रोध, उत्तेजित स्वभाव व लालच है जिसमें आपराधिक बोध प्रवृत्ति का जन्म होता है और व्यक्ति क्रोध में हिंसा, अपराध, लालच, भ्रष्टाचार, बेईमानी और कुटिलता के अमानवीय कृति और अन्य गलत कार्यों की ओर मुड़ जाता है और आगे बढ़ते ही चले जाता है जब जीवन के असली महत्व का पता चलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। क्रोध की अभिव्यक्ति हमारे अंदर की कुंठा, हिंसा व द्वेष के कारण भी हो सकती है। वर्तमान काल में अपराधों के बढ़ने का एक प्रमुख कारण भीषण क्रोध ही है। क्रोध से उत्पन्न हुए अपराधों के औचित्य को सिद्ध करने के लिए क्रोधी व्यक्ति कुतर्क कर दूसरे को ही दोषी सिद्ध करता है। एक दोष को दूर करने के लिए अनेक कुतर्क पेश करता है। क्रोध में व्यक्ति आपा खो देता है। क्रोध में अंतत: बुद्धि निस्तेज हो जाती है और विवेक नष्ट हो जाता है। क्रोध का विकराल रूप जुनून है। आदमी पर जुनून सवार होने पर वह जघन्य से जघन्य अपराध कर बैठता है। जुनून की हालत में उसे मानवीय गुणों का न बोध रह पाता है और न ही ज्ञान। क्रोध मानव का सबसे बड़ा शत्रु है, बहुत बड़ा अभिशाप है।

साथियों बात अगर हम शांत, परोपकारी स्वभाव ही जीवन का मूल मंत्र की करें तोअभिभावकों, शिक्षकों को बच्चों को यह शिक्षा देना है और हम बड़ों को यह स्वतः संज्ञान लेना है कि माचिस की तीली बनने की बजाय शांत सरोवर बनना होगा, जिसमें कोई अंगारा भी फेंके तो स्वयं ही बुझ जाए, बस! यह भाव अगर हम मनीषियों के हृदय में समाहित हो जाए तो यह विश्व फिर सतयुग का रूप धारण करेगा जहां किसी तरह का कोई अपराध बोध या गलत काम का भाव नहीं होगा। सभी मनीषी जीव परोपकारी भाव से युक्त होंगे भाईचारा, प्रेम, सद्भाव की बारिश होगी जहां बिना ताले घरबार छोड़ कहीं भी जाने के भाव जागृत होंगे और हमारे बुजुर्गों का सतयुग रूपी सपना साकार होगा।

साथियों बात अगर हम स्वयं को माचिस की तीली याने क्रोधित होने पर विपरीत परिणामों की करें तो, क्रोध मनुष्य को बर्बाद कर देता है और उसे अच्छे बुरे का पता नही चलने देता, जिस कारण मनुष्य का इससे नुक्सान होता है। क्रोध मनुष्य का प्रथम शत्रु होता है। क्रोधी व्यक्ति आवेश में दूसरे का इतना बुरा नहीं जितना स्वयं का करता है। क्रोध व्यक्ति की बुद्धि को समाप्त करके मन को काला बना देता है।

साथियों बात अगर हम क्रोध को नियंत्रित कर समाप्त करने की तकनीकी की करें तोइलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अनुसार क्रोध के नकारात्मक प्रभाव पूरे इतिहास में देखे गए हैं। प्राचीन दार्शनिकों, धर्मपरायण व्यक्तियों और आधुनिक मनोवैज्ञानिकों द्वारा प्रतीत होने वाले अनियंत्रित क्रोध का मुकाबला करने की सलाह दी गई है। आधुनिक समय में, क्रोध को नियंत्रित करने की अवधारणा को मनोवैज्ञानिकों के शोध के आधार पर क्रोध प्रबंधनकार्यक्रमों में अनुवादित किया गया है।क्रोध प्रबंधन क्रोध की रोकथाम और नियंत्रण के लिए एक मनो-चिकित्सीय कार्यक्रम है ।

इसे क्रोध को सफलतापूर्वक तैनात करने के रूप में वर्णित किया गया है। क्रोध अक्सर हताशा का परिणाम होता है,या किसी ऐसी चीज से अवरुद्ध या विफल होने का अनुभव होता है जिसे विषय महत्वपूर्ण लगता है। अपनी भावनाओं को समझना क्रोध से निपटने का तरीका सीखने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। जिन बच्चों ने अपनी नकारात्मक भावनाओं को क्रोध डायरी में लिखा था, उन्होंने वास्तव में अपनी भावनात्मक समझ में सुधार किया, जिससे बदले में कम आक्रामकता हुई। जब अपनी भावनाओं से निपटने की बात आती है, तो बच्चे ऐसे उदाहरणों के प्रत्यक्ष उदाहरण देखकर सबसे अच्छा सीखने की क्षमता दिखाते हैं, जिनके कारण कुछ निश्चित स्तर पर गुस्सा आया। उनके क्रोधित होने के कारणों को देखकर, वे भविष्य में उन कार्यों से बचने की कोशिश कर सकते हैं या उस भावना के लिए तैयार हो सकते हैं जो वे अनुभव करते हैं यदि वे खुद को कुछ ऐसा करते हुए पाते हैं जिसके परिणामस्वरूप आमतौर पर उन्हें गुस्सा आता है, इसके साथ ही एकांत में जाकर ध्यान के माध्यम से क्रोध के विकारों को नष्ट करने का प्रयास करें तो ऋणात्मक ऊर्जा को मोड़कर हम सकारात्मक ऊर्जा से विवेक सम्मत निर्णय लेने में सक्षम हो सकते हैं।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि क्रोध का विकराल रूप जुनून है, जो जीव पर सवार होकर जघन्य से जघन्य अपराध करा देता है।क्रोध में व्यक्ति आपा खो देता है-एक दोष को दूर करने के लिए अनेक कुतर्क पेश करता हैक्रोध से उत्पन्न हुए अपराधों के औचित्य को सिद्ध करने के लिए क्रोधी व्यक्ति कुतर्क कर दूसरे को ही दोषी सिद्ध करता है

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9359653465

नक्सलियों द्वारा किए गए आईईडी विस्फोट में घायल सीआरपीएफ के हेड कांस्टेबल महेंद्र लस्कर शहीद।

नक्सलियों द्वारा किए गए आईईडी विस्फोट में घायल सीआरपीएफ के हेड कांस्टेबल महेंद्र लस्कर शहीद।

चाईबासा

चाईबासा के मनोहरपुर प्रखंड के सारंडा जंगल में शुक्रवार की देर रात नक्सलियों द्वारा किए गए आईईडी विस्फोट में घायल सीआरपीएफ के हेड कांस्टेबल महेंद्र लस्कर ने इलाज के दौरान वीरगति प्राप्त कर ली। वे असम के नौगांव जिले के रहने वाले थे।

मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार की रात नक्सलियों ने प्रतिरोध सप्ताह के दौरान सुरक्षा बलों पर हमला बोला था। इस आईईडी विस्फोट में सीआरपीएफ 60 बटालियन के तीन जवान घायल हुए थे, जिनमें इंस्पेक्टर कौशल कुमार मिश्रा और सब-इंस्पेक्टर रामचंद्र गोगी गंभीर रूप से जख्मी हैं। दोनों का इलाज उड़ीसा के राउरकेला अस्पताल में चल रहा है।

शहीद महेंद्र लश्कर का पार्थिव शरीर रांची लाया जा रहा है, जहां पोस्टमार्टम के बाद सीआरपीएफ कैंप में उन्हें अंतिम सलामी दी जाएगी। पुलिस मुख्यालय ने उनके शहीद होने की आधिकारिक पुष्टि की है।

चाईबासा एसपी अमित रेणू ने बताया कि सारंडा में सुरक्षा बलों द्वारा नक्सल विरोधी अभियान चलाया जा रहा था, तभी दो आईईडी धमाके हुए। इस हमले से स्पष्ट है कि नक्सली अब भी घने जंगलों में सक्रिय हैं और सुरक्षा बलों को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं।

घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में सोमेश सोरेन कीजीत निश्चित: प्रधान सोरेन

घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में सोमेश सोरेन कीजीत निश्चित: प्रधान सोरेन

मुसाबनी

जिस तरह से घाटशिला विधानसभा का उपचुनाव जैसे जैसे नजदीक आते जा रहा है वैसे वैसे अपने पार्टी की उम्मीदवार को जीतने के लिए गांव गांव जाकर समर्थन जितना का प्रयास कर रहे हैं उसी क्रम में अपने उम्मीदवार को जीतने के लिए प्रखंड के सुरदा गांव में प्रखंड अध्यक्ष प्रधान सोरेन की अध्यक्षता में झामुमो का कार्यक्रम आयोजित क़ी गई जिसमे में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में झामुमो युवा नेता सोमेश चंद्र सोरेन शामिल हुए.

इस कार्यक्रम में हेमंत सरकार के जन कल्याणकारी योजनाओं एवं विकास कार्यों से प्रभावित होकर भारतीय जनता पार्टी के महिला नेत्री लक्ष्मी रानी पातर एवं जयंती हुई के नेतृत्व में भाजपा एवं आजसू के सैकड़ों समर्थको के साथ झामुमो पार्टी में शामिल हुए। सभी महिलाओं एवं युवाओं को मुख्य अतिथि सोमेश सोरेन ने माला पहनाकर सम्मानित कर झामुमो में शामिल किया इस अवसर पर शामिल महिलाओ ने कहा क़ि अपने उम्मीदवार सोमेश सोरेन की जिताने के लिए तन मन धन से हम लोग काम करेंगे सोमेश सोरेन को जिताने के लिए घर -घर जाकर लोगों संपर्क करेंगे, ताकि भारी बहुमत से जीत हासिल हो सके.

Design a site like this with WordPress.com
Get started