अवैध बालू खनन,भंडारण एवं परिवहन के विरुद्ध की गई सख़्त कार्रवाई

अवैध बालू खनन,भंडारण एवं परिवहन के विरुद्ध की गई सख़्त कार्रवाई

ईचागढ़ में सात लाख पचास हजार सीएफटी अवैध बालू जब्त,बालू माफियाओं में मचा हड़कंप

सरायकेला/ईचागढ़

( मालखान महतो)

सरायकेला खरसावां जिला के उपायुक्त नितिश कुमार सिंह के निर्देशानुसार बुधवार को जिला खनन पदाधिकारी ज्योति शंकर सतपति के नेतृत्व में खनन विभाग की टीम द्वारा ईचागढ़ थाना एवं स्थानीय पुलिस बल के सहयोग से ईचागढ़ थाना अंतर्गत मौजा बीरडीह एवं जारगोडीह में अवैध बालू खनन,भंडारण एवं परिवहन के विरुद्ध औचक निरीक्षण अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान उक्त स्थल बीरडीह में दो लाख पचास हजार सीएफटी तथा जारगोडीह में पांच लाख सीएफटी अवैध बालू भंडारण को जब्त किया।

दोनों जगहों पर कुल सात लाख पचास हजार सीएफटी अवैध बालू भंडारण को जब्त किया।सभी जब्त खनिज को विधिवत् जब्त कर ईचागढ़ थाना को सुपुर्द किया गया। इस पर डीएमओ ज्योति शंकर सतपति ने कहा कि क्षेत्र में लगातार अवैध खनन के विरुद्ध कार्रवाई जारी रहेगा तथा किसी भी हालत में अवैध खनन एवं परिवहन नहीं करने दिया जाएगा। मामले की अग्रेतर कारवाई किया जाएगा। मौके पर जिला खनन निरिक्षक समीर ओझा,ईचागढ़ थाना के एसआई विश्वजीत तिवारी एवं पुलिस बल उपस्थित थे।

कुड़ूख विकास परिषद कि ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय कार्तिक उरांव का मनाया जन्म जयंती

कुड़ूख विकास परिषद कि ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय कार्तिक उरांव का मनाया जन्म जयंती

सरायकेला/ईचागढ़

(मालखान महतो)

सरायकेला-खरसावां जिला के ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के डुमटांड़ मोड़ पर कुड़ुख विकास परिषद चांडिल अनुमंडल की ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री, शिक्षाविद एवं अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के संस्थापक स्वर्गीय बाबा कार्तिक उरांव का जन्म जयंती धूमधाम से मनाया गया।

स्वर्गीय कार्तिक उरांव के मुर्ती पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित किया गया। कुड़ुख विकास परिषद के सदस्यों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गाजे बाजे के साथ स्व० कार्तिक उरांव के आदमकद मुर्ती पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया। वहीं कुड़ुख विकास परिषद के अध्यक्ष अभिराम उरांव ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय कार्तिक उरांव के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लंदन,ग्लास्गो एवं ब्रिटेन में इंजीनियरिंग एवं बेरिस्टर की पढ़ाई करने के बाद अपने देश में आकर सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उरांव एवं आदिवासी समाज के लिए बहुत कार्य किया। भारत सरकार में केन्द्रीय मंत्री रहते हुए अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद का संस्थापक व केन्द्रीय अध्यक्ष के रूप में रहते हुए आदिवासी व दबे कुचले लोगों को एकजुट कर हक अधिकार के लिए जागरूक करने का काम किया था।

उन्होंने कहा कि समाज को उनके बताए आदर्श को अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय कार्तिक उरांव उरांव समाज को इसाई व अन्य धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने का भी भरसक प्रयास किया। मौके पर समाज सेवी विश्वनाथ उरांव,बंदीनाथ, शिवनाथ, प्रबोध, जगदीश,नकुल उरांव, लक्ष्मी नारायण सिंह मुण्डा, गुरू प्रसाद उरांव सहित सैकड़ों महिला पुरुषों ने श्रद्धांजलि अर्पित किया ।

सड़क दुर्घटना के 29 दिनों बाद भी आरआईटी थाना में नहीं दर्ज हुई प्राथमिकी,पीड़ित परिवार ने लगाई पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार।

सड़क दुर्घटना के 29 दिनों बाद भी आरआईटी थाना में नहीं दर्ज हुई प्राथमिकी,पीड़ित परिवार ने लगाई पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार।

सरायकेला/आरआईटी


आरआईटी थाना क्षेत्र में विगत एक अक्टूबर को पन्ना मेटल वायर कंपनी के समीप रात्रि 11:00 से 12:00 के बीच हुए सड़क दुर्घटना के 29 दिनों के बाद भी आरआईटी थाना में प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है. इस दुर्घटना में मुस्कान सिंह और उनके पति सोनू सिंह जख्मी हो गए थे. इस घटना में जख्मी मुस्कान की तबियत अब भी ठीक नहीं है तथा उनके कमर में तेज दर्द भी है. परिवार के लोग प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी प्राप्त करने के लिए थाना जाते हैं, तब टाल-मटोल वाली जानकारी दी जाती है.

उल्लेखनीय है कि
मीरूडीह नया बस्ती निवासी सोनू और मुस्कान घटना के दिन अपनी बाइक से रात के 11.15 बजे से 11.45 बजे के बीच अपने घर जा रहे थे. इस बीच ही स्वीफ्ट डिजायर कार ने उन्हें धक्का मार दिया था. बुधवार को भी मामले की जानकारी के लिए परिजन जब आरआईटी थाना गए, तब उन्हें बताया गया कि केस के आईओ अभी छुट्टी पर हैं. अभी तक एफआईआर की कॉपी भी नहीं दी गई है. पीड़ित परिवार ने सीसीटीवी फुटेज निकालकर मामले में कार्रवाई करने की मांग की है.

आर आई टी, थाना प्रभारी

आपको बताते चलें कि दुर्घटना के समीप कई ऐसी कंपनियां हैं जिनमें सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं अगर उन सीसीटीवी कैमरे को खंगाल जाए तो निश्चित ही दुर्घटना को अंजाम देकर भाग खड़े हुए कार का नंबर मिल सकता है लेकिन दुर्घटना के इतने दिनों बीत जाने के बावजूद भी अब तक स्थानीय थाना सीसीटीवी फुटेज निकालने में नाकामयाब साबित हुई है इसके पीछे क्या कारण है यह तो जांच का विषय है। और अब पीड़ित परिवार ने सरायकेला जिले के पुलिस अधीक्षक से इस मामले पर न्याय की गुहार लगाई है एवं पुलिस अधीक्षक से ही सारी उम्मीदें लगाई है।

पुलिस अधीक्षक ( सरायकेला खरसावां )

यक्ष प्रश्न यह है कि इतने दिनों बीत जाने के बावजूद भी पुलिस सीसीटीवी फुटेज निकालने में नाकामयाब क्यों साबित हुई है अथवा पीड़ित परिवार को कब तक न्याय मिलेगी..?

चिलगु में राजयसभा सांसद आदित्य साहू और आजसू नेता हरेलाल महतो की अहम बैठक

चिलगु में राजयसभा सांसद आदित्य साहू और आजसू नेता हरेलाल महतो की अहम बैठक

घाटशिला उपचुनाव पर बनी रणनीति

सरायकेला/ईचागढ़

(मालखान महतो)

राज्यसभा सांसद सह झारखंड भाजपा के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष आदित्य साहू शुक्रवार को चांडिल के चिलगु स्थित आजसू पार्टी के प्रधान कार्यालय पहुंचे। इस दौरान आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव हरे लाल महतो ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया।

बैठक में दोनों नेताओं के बीच घाटशिला उपचुनाव को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। एनडीए प्रत्याशी बाबूलाल सोरेन की जीत सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त रणनीति पर विचार किया गया। इस मौके पर आदित्य साहू ने हरे लाल महतो को कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए और एनडीए के गठबंधन की मजबूती पर बल दिया।

वहीं हरे लाल महतो ने कहा कि हेमंत सरकार ने जनता की भावनाओं से खिलवाड़ किया है। बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्थिति बेहद खराब है। उन्होंने दावा किया कि घाटशिला की जनता आगामी उपचुनाव में हेमंत सरकार को करारा जवाब देगी और एनडीए उम्मीदवार को विजयी बनाएगी। इस अवसर पर कई भाजपा और आजसू कार्यकर्ता भी उपस्थित थे।

बंदना व सोहराई पर्व का रहा धुन, बैल खुंटान व अहीरा गीत पर झुमे ग्रामीण

बंदना व सोहराई पर्व का रहा धुन, बैल खुंटान व अहीरा गीत पर झुमे ग्रामीण

सरायकेला/ईचागढ़

(मालखान महतो)

ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र में बंदना व सोहराई पर्व की गुंज चारों ओर गुंजायमान है। दिपावली के बाद से ही अलग अलग दिनों में लगातार क्षेत्र में बंदना व सोहराई पर्व मनाया जा रहा है। बंदना पर्व के उपलक्ष्य में बिस्टाटांड़ गांव में ग्रामीण अहीरा गीत गाकर ढोल नगाड़े के जाप पर पुरे गांव का भ्रमण किया एवं बेल खुंटान का रस्म को भी किया गया। बैल को खुंटी में बांधकर ढोल नगाड़े बजाकर नचाया गया। हांलांकि बदलते परिवेश के साथ बैल खुंटान और अहीरा‌ गीत का प्रचलन विलुप्त होने के कगार‌ पर है। गाजे-बाजे और अहीरा गीत के साथ दीपावली के अमावस्या के रात से घर घर जाकर बैलों और पशुधनों को जगाया जाता था और खेती कार्य समाप्ति पर अपने पशुधनों को खुश करने के लिए सामुहिक रूप से अहीरा गीत गाकर रात जगा करते हैं। गाय बैलों व भैंसा का सिंग में तेल सिन्दूर लगाने का रिवाज आज भी किसान बखुबी निभाते हैं और बंदना और सोहराई पर्व को पारम्परिक रूप से मनाते हैं।

47 वाँ आसियांन शिखर सम्मेलन 26 से 28 अक्टूबर 2025- मलेशिया की राजधानी क़ुआलालम्पुर- समावेशिता एवं स्थिरता

47 वाँ आसियांन शिखर सम्मेलन 26 से 28 अक्टूबर 2025- मलेशिया की राजधानी क़ुआलालम्पुर- समावेशिता एवं स्थिरता

दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में समावेशी विकास, सामाजिक आर्थिक पक्षों का समुचित समन्वय, और पर्यावरणीय तथा स्थिरता संबंधी चिंताओं को प्रमुखता दी जाएगी

अमेरिका भारत सहित बड़े विकसित देश शामिल होने से आसियान अब केवल क्षेत्रीय मंच नहीं बल्कि एक वैश्विक संवाद केंद्र बनने की प्रक्रिया में है- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया,महाराष्ट्र

गोंदिया/महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर दक्षिण- पूर्व एशिया के संगठन (आसियांन) का 47 वाँ संस्करण, 26 से 28 अक्टूबर 2025 तक मलेशिया की राजधानी क़ुआलालम्पुर में आयोजित होने जा रहा है।मलेशिया इस वर्ष आसियान की अध्यक्षता कर रहा है,और उन्होंने इस सम्मेलन के लिए थीम तय की है, समावेशिता एवं स्थिरता, इस थीम के अंतर्गत दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में समावेशी विकास, सामाजिक,आर्थिक पक्षों का समुचित समन्वय, और पर्यावरणीय तथा स्थिरता संबंधी चिंताओं को प्रमुखता दी जा रही है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि इस आयोजन की विशेषता यह है कि इस बार आसियांन के दस सदस्य देशों के साथ-साथ अनेक संवाद साझेदार और वैश्विक शक्तियों के शीर्ष नेताओं की भागीदारी अपेक्षित है, जिससे यह सम्मेलन सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बता दें, भारतीय पीएम इस शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे,पीएम अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के कारण संबंधित बैठकों में भाग लेने के लिए संभवत: मलेशिया नहीं जाएंगे, मीडिया की मानें तो भारत की ओर से विदेश मंत्री इस बैठक में हिस्सा लेंगे और भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे यहां बताना जरूरी है कि इस आसियान बैठक में डोनाल्ड ट्रंप भी आ रहे हैं,ऐसे में संभावना थी कि अगर मोदी जाते हैं तो ट्रंप संग उनकी मुलाकात हो सकती थी, मगर अब मुलाकात का इंतजार बढ़ गया है।

साथियों बात अगर हम इस सम्मेलन की पृष्ठभूमि और भू-राजनीतिक महत्व को समझने की करें तोआसियान का मूल उद्देश्य है दक्षिण-पूर्व एशिया के दस सदस्य देशों ब्रुनेई, कंबोडिया,इंडोनेशिया,लाओस,मलेशिया,म्याँमार, फिलीपींस, सिंगापुर ,थाईलैंड तथा वियतनाम, में राजनीतिक -सुरक्षा,आर्थिक और सामाजिक- सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ाना। वर्ष 2025 में मलेशियाअध्यक्षत्व संभाले हुए है, जो आसियान के लिए एक अवसर भी है और चुनौती भी। अवसर इसलिए क्योंकि दक्षिण-पूर्व एशिया वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-रणनीति के बदलते केंद्रों में तेजी से उठा है, और चुनौती इसलिए क्योंकि इस क्षेत्र में अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा,रसद व आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान, जलवायु परिवर्तन, और मानवीय व राजनीतिक तनावों का दबाव लगातार बढ़ रहा है।इस सम्मेलन में न सिर्फ आसियान के दस सदस्य देश उपस्थित होंगे, बल्कि उनकी निगाहें उन डायलॉग पार्टनर देशों पर भी हैं जिनके साथ आसियान का व्यापक सामरिक-आर्थिक नेटवर्क बना हुआ है।उदाहरणस्वरूप, डोनाल्ड ट्रम्प की उपस्थिति की पुष्टि हो चुकी है,इसके अतिरिक्त, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, भारत, ऑस्ट्रेलिया, रूस जैसे बड़े बाहरी देश भी चर्चा के दायरे में हैं।यह व्यापक भागीदारी इस बात का संकेत है कि आसियान अब केवल क्षेत्रीय मंच नहीं बल्कि एक वैश्विक संवाद केंद्र बनने की प्रक्रिया में है।

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया,महाराष्ट्र

साथियों बात अगर हम एजेंडा, विषय औरप्राथमिकताओं अवसरों व चुनौतियों को समझने की करें तो,थीम क़ा उद्देश्य है कि विकास का लाभ समस्त सदस्य देशों- समुदायों तक पहुँच सके और सहयोग की संरचना सतत हो।मुख्य एजेंडा में शामिल होंनें की संभावना है, दक्षिण- चीन सागर में समुद्री एवं सुरक्षा विवाद, म्याँमार में नागरिक संकट, आपूर्ति श्रृंखला व आर्थिक निर्भरताएं, डिजिटल अर्थव्यवस्था व जुड़ाव, जलवायु परिवर्तन व सतत विकास, और निस्संदेह बाहरी शक्तियों के साथ रणनीतिक संवाद। इसके अलावा, व्यापार और निवेश को तत्परता से आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठाना इस शिखर सम्मेलन की बड़ी प्राथमिकता होगी क्योंकि वैश्विक आर्थिक माहौल अस्थिर हो रहा है।अवसर और चुनौतियाँ -इस सम्मेलन के माध्यम से आसियान को अनेक अवसर मिल रहे हैं। जैसे-(1) वैश्विक संपर्क बढ़ाना,(2) बहुपक्षीय साझेदारी को गहरा करना, (3) क्षेत्रीय आवाज को सशक्त बनाना, और (4)आर्थिक तथा डिजिटल संक्रमण में नेतृत्व करना।उदाहरण स्वरूप, मलेशिया ने वर्ष 2025 में आसियान अध्यक्ष रहते हुए डिजिटल अर्थव्यवस्था ढाँचे पर जोर दिया है। चुनौतियाँ कम नहीं हैं,अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा, रूस-यूक्रेन-मध्यस्थता, म्याँमार की अंदरूनी स्थिति, दक्षिण-चीन सागर में तनाव, बढ़ती आर्थिक असममिताएँ और सदस्य देशों के बीच विकास की खाई ) जैसी समस्याएं आसियान के समक्ष खड़ी हैं।
साथियों बात अगर कर हम भारत-आसियान संबंध एवं भारत की भूमिका को समझने की करें तो भारत के लिए यह सम्मेलन विशेष महत्व रखता है क्योंकि भारत ने आसियान के साथ व्यापक रणनीतिक साझेदारी स्थापित की है और पोस्ट-2025 दृष्टिकोण तैयार कर रहा है। उपरांत, भारत अपनी अर्थव्यवस्था,सामाजिक शक्ति व रणनीतिक प्रासंगिकता के चलते आसियान क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस सम्मेलन के संदर्भ में यह उल्लेखनीय है कि भारत के पीएम ने इस सम्मेलन में वर्चुअल उपस्थिति की बात कही है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत आसियान मंच पर सक्रिय है, हालांकि सीधी उपस्थिति न हो पाने का तथ्य भी राजनीति- कूटनीति के आयाम को दर्शाता है।
साथियों बात अगर हम अमेरिका -आसियान तथा चीन- आसियान संबंधों का नए परिप्रेक्ष्य में पुनर्संयोजन को समझने की करें तो, अमेरिका की इस क्षेत्र में वापसी और चीन की गहरी दक्षिण-पूर्व एशिया में हिस्सेदारी दोनों ही आसियान की भूमिकाओं को पुनर्परिभाषित कर रहे हैं। उदाहरणस्वरूप, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की उपस्थिति और चीन-रूस-इंडिया समेत अन्य शक्तियों की संभावित उपस्थिति इस क्षेत्र को वैश्विक मुकाबले के केंद्र में ला रही है। इसके मद्देनज़र आसियान को चाहिए कि वह अपनी “आसियान-सेंट्रलिटी” को सुदृढ़ करे,अर्थात् सदस्य देशों का नेतृत्व एवं निर्णय-प्रक्रिया स्वयं आसियान के अंतर्गत रहे, न कि बाहरी शक्तियों द्वारा नियंत्रित हो जाए।आर्थिक एवं व्यापारिक आयाम-इस सम्मेलन के पूर्व 25-26 अक्टूबर को,एक दिन पहले, आसियान बिज़नेस एंड इन्वेस्टमेंट सम्मिट 2025 का आयोजन भी कुआलालम्पुर में होने जा रहा है, जिसमें वैश्विक सीईओ और व्यावसायिक नेतृत्व भाग लेगा।यह दर्शाता है कि सिर्फ राजनीतिगत मंच नहीं, बल्कि आर्थिक-वाणिज्यिक संवाद का भी एक प्रमुख अवसर इस सम्मेलन के दौरान मौजूद होगा। इस तरह, इस शिखर सम्मेलन को आर्थिक उन्नति, निवेश प्रवाह, डिजिटल अर्थव्यवस्था, आपूर्ति श्रृंखला पुनर्संरचना, हरित वित्त जैसे क्षेत्रों में ‘प्रेरणा बिंदु’ के रूप में देखा जा सकता है।

साथियों बात अगर हम सुरक्षा,समुद्री तथा मानवीय चुनौतियों को समझने की करें तो, नियोजन में इस क्षेत्र में विशेष रूप से ध्यान दिया गया है,जैसे पूर्वी एशिया में समुद्री सीमाओं की स्थिति,म्याँमार में राजनीतिक- सामाजिक संकट, दक्षिण-चीन सागर में तनाव, तथा जलवायु -प्रेरित आपदाएँ। उल्लेखनीय यह भी है कि रूस की उपस्थिति या उसकी प्रतिनिधि तैनाती पर अभी निश्चितता नहीं पुतिन के आने पर प्रश्न चिह्न है,इससे यह स्पष्ट होता है कि सुरक्षा-रणनीति, वैश्विक शक्ति-संतुलन, तथा मानवीय अवस्था-मध्यस्थता जैसे जटिल विषय इस सम्मेलन के एजेंडा में अहम भूमिका निभाएंगे।स्थिरता जलवायु परिवर्तन तथा डिजिटल संक्रमण- मलेशिया की अध्यक्षता के तहत, आसियान इस वर्ष “डिजिटल अर्थव्यवस्था फ्रेमवर्क एग्रीमेंट” को आगे बढ़ाने पर विचार कर रहा है। साथ ही, सदस्यों के बीच हरित वित्त, सतत निवेश व आपूर्ति श्रृंखला की लोच पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह दृष्टिकोण वैश्विक अर्थव्यवस्था की अस्थिरता, जलवायु आपदाओं तथा ऊर्जा-संकट की चुनौतियों के बीच आसियान को अगुआ बनाने का अवसर देता है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि 26-28 अक्टूबर 2025 को कुआलालम्पुर में आयोजित होने वाला 47वाँ आसियान शिखर सम्मेलन एक समय-सापेक्ष आयोजन है यह दक्षिण-पूर्व एशिया को वैश्विक मंच पर पुनःस्थापित करने का अवसर प्रस्तुत करता है,जबकि इसकी सफलता मुख्यतः इस बात पर निर्भर करेगी कि सदस्य देश एवं भागीदार देशों ने कितनी सक्रियता, सहयोग और साझा दृष्टिकोण दिखाया है।यदि सम्मेलन में स्पष्ट निर्णय, ठोस संवाद, निवेश व साझेदारी के नए मॉडल तथा रणनीतिक समझौते सामने आते हैं, तो यह आसियान के संदर्भ में एक ‘टर्निंग प्वाइंट’ साबित हो सकता है। दूसरी ओर, यदि सम्मेलन केवल बयानों तक सीमित रहा,तात्कालिक प्रभाव न दिखा पाया, या बाहरी शक्तियों द्वारा आसियान सेंट्रलिटी को चुनौती मिली, तो यह अवसर खो सकता है।

संकलनकर्ता लेखक-कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतर्राष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि सीए(एटीसी) संगीत माध्यमा एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

धीरजगंज सतबहिनी में बच्ची से मोबाइल की छीनतई,,छीनतई की घटना से जनता में आक्रोश

धीरजगंज सतबहिनी में बच्ची से मोबाइल की छीनतई,,छीनतई की घटना से जनता में आक्रोश

आए दिन बढ़ती छीनतई की घटना से जनता में आक्रोश का माहौल

आम जनता परेशान व असुरक्षित,,प्रशासन है सुस्त व खामोश

अचानक हुए हमले से बच्ची बाल बाल बची।

सरायकेला-खरसावां

सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना अंतर्गत धीरजगंज के संतमत सत्संग आश्रम के बगल मैदान में बालू स्टॉक करके रखा गया है वहां एक बच्ची के साथ बृहस्पतिवार की रात्रि 8:30 के आसपास कुत्ते को घूमने के क्रम में मोबाइल छीनतई की घटना घटी है। घटना को अंजाम देने वाला चैन छीनतई गैंग, ड्रगिस्ट , नशेड़ी , कोई चोर या हत्यारा कोई भी हो सकता है। यह तो जांच का विषय है। बच्ची को अकेला देख पटक कर मारपीट कर मोबाइल छीन लिया गया । यह घटना जनहित में काफी चिंता जनक एवं सुरक्षा पर सवाल उठा रही है।

वहीं घटना के बाद घर वालों की चिंताएं बढ़ गई है। परिवार बच्चे की सुरक्षा को लेकर मीडिया से कुछ भी बताने के लिए मना कर दिया। स्वाभाविक सी बात है घटना किसी के साथ भी हो तो अपना मान सम्मान बचाने के लिए समाज में कोई भी जानकारी नहीं देना चाहेगा। हालांकि पुलिस में इसकी शिकायत की गई थी लेकिन पुलिस भी सिर्फ खानापूर्ति कर अपनी भूमिका निभा रही है।

पुलिस अधीक्षक, सरायकेला खरसावां

सूत्रों ने बताया है कि थाना से जनहित में पेट्रोलिंग गाड़ी प्रतिदिन निकलती तो है लेकिन आए दिन देखा गया है कि पेट्रोलिंग गाड़ी अक्सर ड्रगिस्ट, गैस कटिंग, अवैध शराब विक्रेता ,जुआड़ी एवं गांजा बेचने वालों या असंवैधानिक रूप से कार्य करने वालों के आसपास ही रुकती है और बात कर वहां से आगे पेट्रोलिंग गाड़ी निकल जाती है। बात क्या होती है यह जनता सब देख रही है और समझ रही है।

आदित्यपुर थाना प्रभारी

अभी-अभी दुर्गा पूजा, दीपावली बीती है और आस्था का महापर्व छठ की तैयारी चल रही है इसी बीच यह घटना पुलिस की गैर जिम्मेदारी दर्शाता है।

आदित्यपुर थाना सरायकेला खरसावां जिला के सबसे महत्वपूर्ण थाना है जहां हर वह अवैध कार्य हो रहा है जो जनहित में वर्जित है वहीं थाना के लोग खानापूर्ति के लिए छोटी-छोटी मछलियों को पड़कर अपना मुंह मियां मिट्ठू बन रहे हैं । जबकि समुद्र के घड़ियाल तक पहुंचने की या तो उनकी हिम्मत नहीं हो रही है या फिर क्या बात है यह तो यक्ष प्रश्न जनता जानना चाहती है।

जो भी हो इस तरह की घटना आम जनमानस के लिए बहुत ही चिंता जनक है ईश्वर की कृपा से बच्ची बाल बाल बची किसी भी तरह का कोई भी अनहोनी नहीं हुई। लेकिन थाना नेताओं की ड्यूटी करने में व्यस्त है। अगर यही आलम रहा तो वह दिन दूर नहीं जब जनता अपनी सुरक्षा का दायित्व खुद ही उठा ने को वीवस हो जाएगी

एक नजर सीसीटीवी फुटेज पर

अगर आदित्यपुर थाना की पुलिस चाहे तो सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से मोबाइल चोरी की घटना को अंजाम देने वाले अभियुक्त तक पहुंचने में सफल हो सकती है लेकिन अब देखना यह है कि पुलिस इस मामले में किस हद तक छानबीन करती है या फिर दोषियों को कब तक पकड़ पाती है और बच्ची के साथ हुई घटना में बच्ची और उनके परिवार जनों को इंसाफ कब तक मिल पा रही है।

पानी में तैरता हुआ एक अज्ञात महिला का लाश बरामद

पानी में तैरता हुआ एक अज्ञात महिला का लाश बरामद

सरायकेला/ईचागढ़

( मालखान महतो )

सरायकेला-खरसावां जिला के ईचागढ़ थाना क्षेत्र के रूगड़ी का एक तालाब में ईचागढ पुलिस द्वारा एक अज्ञात महिला का लाश बरामद किया गया। प्रथमदृष्टया हत्या कर लाश को छुपाने के नियत से तालाब में फेंक दिया होगा।

सुनसान जगह पर तालाब रहने से ग्रामीणों का नजर नही पड़ा ।लाश मिलते ही क्षेत्र में दहशत फ़ैल गया। थाना प्रभारी बिक्रम आदित्य पांडे ने बताया कि रूगड़ी गांव के बाहर खेत के बीच एक तालाब से करीब 25-30 वर्षीय एक लड़की अज्ञात महिला का लाश बरामद किया गया एवं पोस्टमार्टम हेतु सरायकेला सदर अस्पताल भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि लाश का चेहरा पानी से फुल गया है एवं सड़क गया है, जिससे चेहरा पहचान में नही आ रहा है। उन्होंने कहा कि अनुमानतः करीब 6-7 दिन पहले ही लाश छुपाने के नियत से सुनसान जगह पर तालाब में डाल दिया होगा। उन्होंने कहा कि हर पहलू पर जांच किया जा रहा है एवं लाश का पता लगाने का कोशिश किया जा रहा है।

स्व. डोमन सिंह मुंडा को दी गई श्रद्धांजलि

स्व. डोमन सिंह मुंडा को दी गई श्रद्धांजलि

सरायकेला/ईचागढ़

(मालखान महतो)

प्रखंड क्षेत्र के इंटर कॉलेज तिरुलडीह परिसर में बुधवार को 12 वीं पुण्य तिथि के अवसर पर समाजसेवी सह पूर्व सांसद प्रतिनिधि स्व. डोमन सिंह मुंडा के प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित किया गया। इंटर कॉलेज तिरुलडीह के अध्यक्ष सह पूर्व शिक्षक उमाकांत महतो ने बताया कि डोमन सिंह मुंडा एक शिक्षक के रुप में 60 वर्ष तक सेवा दिया था। सेवानिवृत्त के बाद वो सामाजिक कार्य में बड़ चढ़ कर हिस्सा लेते थे।

तत्कालीन सांसद सुबोध कांत सहाय के कार्यकाल में उन्हें ईचागढ़ प्रखंड का प्रतिनिधि के रुप में नियुक्त किया था। उन्होंने बताया कि इंटर कॉलेज तिरुलडीह के नाम पर स्व. मुंडा ने सात एकड़ जमीन दान दिया है। उनके छोटा पुत्र नयन सिंह मुंडा सोड़ो पंचायत के मुखिया है और पुत्रवधु सुभासिनी देवी ईचागढ़ उत्तरी भाग के जिला परिषद सदस्य है। मौके पर इंटर कॉलेज तिरुलडीह के प्राचार्य उपेन चंद्र महतो, डॉ. गुरुचरण महतो, समाजसेवी राम प्रसाद महतो, प्रोफेसर हृदय रंजन महतो, मृत्युंजय महतो, अनाथ महतो, निरंजन महतो, आरूनी सिंह मुंडा,निपेन्द्र महतो,गुरुपद सिंह मुंडा आनंद महतो आदि उपस्थित थे।

गोविंदपुर के किता में काली पूजा धूमधाम से संपन्न, झूमर गायक संतोष महतो के गीतों पर थिरके श्रद्धालु

गोविंदपुर के किता में काली पूजा धूमधाम से संपन्न, झूमर गायक संतोष महतो के गीतों पर थिरके श्रद्धालु

सरायकेला

प्रखंड सरायकेला के गोविंदपुर पंचायत अंतर्गत किता गांव स्थित काली मंदिर में बुधवार को काली पूजा बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाई गई. पूजा पंडाल में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रही. शाम में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रसिद्ध झूमर गायक संतोष महतो ने बंगला, ओड़िया, नागपुरी और भोजपुरी गीतों की शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया.

कार्यक्रम का आयोजन काली पूजा कमेटी, गोविंदपुर किता द्वारा किया गया. सृष्टि कर्ता हरिहर लोहार लोहार ने बताया कि “काली पूजा की शुरुआत वर्ष 1997 में की गई थी. तब से अब तक यह परंपरा लगातार जारी है. ग्रामीणों और युवाओं के सहयोग से हर वर्ष इसे भव्य रूप से मनाया जाता है. इस वर्ष भी पुलिस प्रशासन का भरपूर सहयोग मिला, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हुआ.

इस अवसर पर पंडित रमानाथ होता ने बताया कि यह पर्व हमें अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होने का संदेश देता है आज के दिन इस समारोह स्थल में रावण दहन का कार्यक्रम कर अन्याय पर न्याय और अधर्म पर धर्म का विजय का संदेश दिया जाता है इस कार्यक्रम में अग्रणी भूमिका निभाने वाले हरिहर लोहार को लोगों ने सह्रदय धन्यवाद दिया श्री हरिहर लोहार क्षेत्र की शांति, सुख, समृद्धि के लिए दक्षिणेश्वर काली मंदिर में माथा टेका एवं पंडित रमानाथ होता से आशीर्वाद ग्रहण किया.

पूजा पंडाल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही. रावण दहन कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसे देखने सैकड़ों लोग जुटे.

इस अवसर पर पूर्णचंद्र तांती, राजेश महतो, राधा गोप, बिस्तु माझी, मुकेश महतो, पीयूष महतो, राजेश लोहार, ठाकुर, बबलू महतो, सहदेव महतो, कीर्तन माझी, बांगो गोप, हीरालाल गोपी, रामनाथ होता, एबी ज्योतिषी, नंदलाल महतो, मंगल गोप, मिथुन सरदार, श्रीधर महतो, बिशु महतो आदि का विशेष सहयोग रहा.

भाई दूज 2025-दीपावली रूपी माला का पांचवा और अंतिम चमकता मोती, स्नेह, सौहार्द और प्रीति का अंतिम दीप

भाई दूज 2025-दीपावली रूपी माला का पांचवा और अंतिम चमकता मोती, स्नेह, सौहार्द और प्रीति का अंतिम दीप

भाई दूज 2025-भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के प्रेम और कर्तव्य का वैश्विक प्रतीक

भाई दुज़ पर्व बहन को ‘सद्भावना की वाहक’ और ‘आशीर्वाद की प्रदात्री’ के रूप में देखा जाता है,जो अपने भाई के लिए प्रेम का दीप जलाती है-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर भाई दूज,यह पर्व न केवल दीपावली के पांच दिवसीय महोत्सव का समापन करता है,बल्कि पारिवारिक संबंधों में निहित स्नेह, प्रेम और सुरक्षा की भावना का दिव्य उदाहरण भी प्रस्तुत करता है। जहां धनतेरस से दीपावली की शुरुआत होती है

वहीं भाई दूज उस श्रृंखला का भावनात्मक चरम है, जब बहन अपने भाई की दीर्घायु और समृद्धि की मंगल कामना करती है। 22अक्टूबर 2025, मंगलवार को मनाया जाने वाला यह पर्व केवल भारतीय समाज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आज यह विश्वभर में प्रवासी भारतीयों के बीच पारिवारिक एकता, आत्मीयता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बन चुका है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं, कि भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के संबंध को सबसे पवित्र और आत्मीय रिश्ता माना गया है। रक्षाबंधन और भाई दूज,दोनों पर्व इस रिश्ते की गरिमा को दर्शाते हैं, किंतु दोनों में एक सूक्ष्म अंतर है। रक्षाबंधन पर बहन अपने भाई को रक्षा सूत्र बांधकर उसकी रक्षा की कामना करती है और भाई वचन देता है कि वह अपनी बहन की हर परिस्थिति में रक्षा करेगा। इस दिन भाई अपनी बहन को अपने घर बुलाता है।वहीं भाई दूज पर परंपरा उलट जाती है,बहन अपने भाई को अपने घर आमंत्रित करती है, उसका स्वागत करती है, तिलक लगाती है,भोजन कराती है और उसकी लंबी उम्र व समृद्धि की मंगलकामना करती है। यह भूमिका का परिवर्तन इस बात का प्रतीक है कि रिश्तों की गरिमा एकतरफा नहीं, बल्कि परस्पर है। जैसे भाई बहन की रक्षा करता है, वैसे ही बहन भी अपने स्नेह और शुभकामनाओं से भाई के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन भरती है।भारत के विविध प्रांतों में तथा वैश्विक स्तरपर भाई दूज को अलग-अलग नामों और रीति- रिवाजों से मनाया जाता है।उत्तर भारत में इसे “भाई दूज” कहा जाता है, जहां बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर भोजन कराती हैं। महाराष्ट्र और गोवा में इसे “भाऊबीज” कहा जाता है,जहां बहनें आरती कर भाई को पान, सुपारी और मिठाई देती हैं।बंगाल में इसे “भाई फोटा” कहा जाता है,और यहां बहनें अपने भाइयों को चंदन का तिलक लगाती हैं तथा विशेष मंत्र का उच्चारण करती हैं।नेपाल में इसे “भाई टीका” कहा जाता है, जो वहां का राष्ट्रीय त्योहार है और पाँच दिन तक चलने वाले तिहार उत्सव का हिस्सा है।21वीं सदी में जब दुनियाँ तकनीकी रूप से जुड़ रही है लेकिन भावनात्मक रूप से दूर हो रही है,तब भाई दूज जैसे पर्व वैश्विक समाज को यह सिखाते हैं कि मानवता की सबसे बड़ी शक्ति रिश्ते हैं अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और खाड़ी देशों में बसे प्रवासी भारतीय आज इस पर्व को धूमधाम से मनाते हैं। वहां की भूमि पर यह केवल भारतीयता का प्रतीक नहीं बल्कि संस्कृति के अंतरराष्ट्रीय संवाद का माध्यम बन चुका है।भाई दूज आज विश्व समुदाय को यह संदेश देता है कि सच्चे संबंध स्वार्थ से नहीं, बल्कि आत्मीयता से बनते हैं। यह पर्व वैश्वीकरण की दौड़ में पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण का जीवंत उदाहरण है।सभी परंपराओं में भाव एक ही है,भाई की सुरक्षा और बहन के स्नेह का सम्मान। यही विविधता भारतीय संस्कृति की एकता में अनेकता का सबसे चूँकि भाई दूज 2025-दीपावली रूपी माला का पांचवा और अंतिम चमकता मोती,स्नेह, सौहार्द और प्रीति का अंतिम दीप हैँ,इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से व इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगेभाई दूज 2025-भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के प्रेम और कर्तव्य का वैश्विक प्रतीक हैँ।


साथियों बात अगर हम, भाई दूज क़े सामाजिक और पारिवारिक आयाम को समझने की करें तो,आधुनिक समाज में जहां परिवार छोटे होते जा रहे हैं और रिश्तों में दूरी बढ़ रही है, वहां भाई दूज जैसे पर्व सामाजिक एकता और पारिवारिक पुनर्सयोजन का अवसर प्रदान करते हैं। इस दिन बहनें अपने मायके जाती हैं, पुराने संबंधों को फिर से जीवित करती हैं और भावनात्मक संवाद का सेतु बनाती हैं।भाई दूज का पर्व हमें यह सिखाता है कि परिवार केवल रक्त संबंध नहीं, बल्कि भावनाओं की बुनावट है। जिस घर में यह पर्व मनाया जाता है, वहां स्नेह, आस्था और संवाद का वातावरण स्वतः निर्मित हो जाता है।यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं के सम्मान और उनकी भूमिका की पहचान का भी अवसर है। बहन को ‘सद्भावना की वाहक’ और ‘आशीर्वाद की प्रदात्री’ के रूप में देखा जाता है, जो अपने भाई के लिए प्रेम का दीप जलाती है।
साथियों बात अगर हम भाई दूज 2025 आध्यात्मिकता, परंपरा और आधुनिकता का संगम को समझने की करें तो, भाई दूज 2025 के आगमन के साथ दीपावली की श्रृंखला पूर्ण होती है, लेकिन उसके साथ ही यह पर्व एक नवीन आरंभ का प्रतीक भी है। यह दिन केवल भाई और बहन के मिलन का नहीं, बल्कि परिवार, समाज और संस्कृति के पुनर्संयोजन का भी अवसर है।आधुनिक समाज में जहां रिश्ते डिजिटल माध्यमों तक सीमित हो रहे हैं,वहां भाई दूज हमें सिखाता है कि स्पर्श, स्नेह और साथ का कोई विकल्प नहीं।जब बहन तिलक लगाती है, तब वह केवल प्रतीकात्मक क्रिया नहीं कर रही होती, बल्कि वह भाई के जीवन में संरक्षण, आशीर्वाद और शुभता का संचार कर रही होती है। यही उस प्रेम की शक्ति है जो न समय, न दूरी और न मृत्यु से बंधी होती है।


साथियों बात अगर हम,भाई दूज का वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक पहलू को समझने की करें तो, भारतीय त्यौहार केवल धार्मिक न होकर वैज्ञानिक और मनो वैज्ञानिक दृष्टि से भी गहरे अर्थ रखते हैं। भाई दूज का पर्व दीपावली के बाद आता है,जब वातावरण में ठंड का आगमन होता है, खेतों में नई फसलें आने लगती हैं और परिवार एक साथ समय बिताते हैं। यह मौसम सामाजिक एकत्रीकरण और मानसिक नवजीवन के लिए उपयुक्त होता है।भाई दूज पर तिलक लगाने की परंपरा का भी वैज्ञानिक आधार है। चंदन, कुमकुम और अक्षत का प्रयोग मस्तक के उस भाग (अज्ञा चक्र) पर किया जाता है जो मन की शांति और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र है। इस तिलक से शरीरमें ऊर्जा संतुलित होती है और भावनात्मक जुड़ाव का अनुभव गहरा होता है।इसके अतिरिक्त, भाई- बहन का मिलन और आत्मीय संवाद सामाजिक मानसिक स्वास्थ्य को भी सुदृढ़ करता है। यह पर्व परिवार में संवाद, संवेदना और समर्थन की भावना को प्रबल तथा सटीक बनाता है।


साथियों बात अगर हम भाई दूज का पौराणिक आध्यात्मिक आधार व नारी सशक्तिकरण क़े संदेश को समझने की करें तो भाई दूज का मूल आधार यमराज और उनकी भगिनी यमुना की पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि यमराज, जो मृत्यु के देवता हैं, एक बार लंबे समय बाद अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे। यमुना ने अपने भाई का आदरपूर्वक स्वागत किया, तिलक लगाया,आरती उतारी और उन्हें स्वादिष्ट भोजनकराया। यमराज बहन की इस आत्मीयता से अत्यंत प्रसन्न हुएऔर वरदान दिया कि जो भी इस दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक ग्रहण करेगा और स्नेहपूर्वक भोजन करेगा, उसे यमलोक का भय नहीं रहेगा।इस कथा में न केवल धार्मिक भावार्थ निहित है, बल्कि यह मानवीय संबंधों की अमरता, आत्मीयता और परस्पर श्रद्धा की झलक भी देता है। यमराज जो मृत्यु के प्रतीक माने जाते हैं, उनके द्वारा बहन के स्नेह से जीवन और दीर्घायु का वरदान मिलना यह सिखाता है कि प्रेम ही वह शक्ति है जो मृत्यु और भय पर भी विजय पा सकती है। भाई दूज केवल भाइयों का नहीं, बल्कि बहनों की गरिमा और शक्ति का भी उत्सव है। यह पर्व इस बात का प्रतीक है कि नारी केवल रक्षा की पात्र नहीं, बल्कि रक्षा की प्रदात्री भी है।यमराज की बहन यमुना ने अपने स्नेह से मृत्यु के देवता को भी जीवन का वरदान देने को प्रेरित किया। यह कथा इस विचार को पुष्ट करती है कि स्त्री का प्रेम और आशीर्वाद अमृत समान है, जो जीवन में ऊर्जा, उत्साह और उद्देश्य भर देता है।आधुनिक युग में जब नारी समाज में आत्मनिर्भरता और नेतृत्व की दिशा में अग्रसर है, तब भाई दूज उस सांस्कृतिक विरासत का स्मरण कराता है जो बहन को परिवार के केंद्र में रखती है,एक ऐसी शक्ति के रूप में जो सृजन,संतुलन और प्रेम का स्रोत है।


अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि भाई दूज का वैश्विक संदेशयह हैँ कि,भाई दूज केवल भारतीय पर्व नहीं, बल्कि मानवता का उत्सव है। यह हमें याद दिलाता है कि इस संसार में सबसे अमूल्य धरोहर हमारे रिश्ते हैं,जो न किसी धर्म, जाति या भौगोलिक सीमा में बंधे हैं।भाई दूज का संदेश है,“जहां स्नेह है, वहां जीवन है; जहां संबंध हैं, वहां स्थायित्व है।”दीपावली रूपी माला का यह अंतिम दीप न केवल घरों में उजाला करता है, बल्कि मनुष्य के हृदय में प्रेम, कृतज्ञता और बंधुत्व का आलोक फैलाता है।2025 का भाई दूज इस युग की उस पुकार का उत्तर है, जो रिश्तों के पुनर्जागरण की ओर अग्रसर है, एक ऐसा समाज जहां प्रेम, संवाद, सहयोग और संवेदना सबसे बड़ा धर्म हो।

गुरु नानक देव जी की कार्तिक प्रभात फेरी महोत्सव -23 अक्टूबर से 5 नवंबर 2025- धन गुरु नानक सारा जग तारिया -आस्था,सेवा और उनकी अनंत ज्योति का विश्वव्यापी उत्सव

गुरु नानक देव जी की कार्तिक प्रभात फेरी महोत्सव -23 अक्टूबर से 5 नवंबर 2025- धन गुरु नानक सारा जग तारिया -आस्था,सेवा और उनकी अनंत ज्योति का विश्वव्यापी उत्सव

पवित्र प्रभात फेरी व गुरु नानक जयंती एक वैश्विक पर्व बन चुकी है। यूनेस्को ने भी गुरु नानक की शिक्षाओं को “वैश्विक मानवता की धरोहर”कहा है

गुरु नानक की ज्योति से आलोकित ,पंद्रह दिवसीय कार्तिक प्रभात फेरी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण का पर्व है,यह समाज में एकता, सेवा, समानता और प्रेम का दीप प्रज्वलित करती है- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया/महाराष्ट्र

गोंदिया/महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर भारत की भूमि ऋषियों,संतों औरगुरुओं की तपस्थली रही है। यहाँ हर पर्व और परंपरा का एक गहन आध्यात्मिक अर्थ निहित है। इन्हीं अमूल्य परंपराओं में से एक है,सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी की जयंती से पहले मनाया जाने वाला कार्तिक प्रभात फेरी महोत्सव जो केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जीवंत आध्यात्मिक यात्रा है, जो समाज को सत्य, प्रेम, समानता और सेवा के पथ पर अग्रसर करती है।

यह प्रभात फेरी 23 अक्टूबर से आरंभ होकर 5 नवंबर 2025 तक चलेगी, यह अवधि न केवल भक्तिभाव और सेवा का प्रतीक है,बल्कि सामाजिक जागरण और मानवता के समरसता संदेश की पुनः पुष्टि का अवसर भी है। पूरे कार्तिक मास की पवित्रता, अनुशासन और भक्ति की प्रतीक होगी। प्रभात फेरी का आरंभ कार्तिक मास के आरंभ (8 अक्टूबर) के बाद विशेष रूप से गुरु नानक जयंती की तैयारियों के साथ किया जाता है,और यह गुरु पर्व की पूर्णिमा (5 नवंबर) पर सम्पन्न होती है। इस अवधि में देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनियाँ में श्रद्धालु सुबह- सुबह कीर्तन, भजन, और सेवा के माध्यम से गुरु की शिक्षाओं को आत्मसात करते हैं। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र स्वयंम भी प्रभात फेरी में शामिल हुआ हूं और देखा हूंकि प्रातःकाल लगभग 3:30 या 4 बजे गुरुद्वारों से प्रारंभ होती है।श्रद्धालु संगत एकत्र होकर गुरु ग्रंथ साहिब के आगे मत्था टेकते हैं, और फिर “कीर्तन सोहिला ”या“ जपजी साहिब” का पाठ करते धन गुरु नानक, सारा जग तारिया,जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल के जय घोष करते हुए गाँव या नगर की गलियों से होकर गुजरते हैं। मार्ग में लोग अपने घरों के बाहर दीये जलाकर, फूलों से स्वागत कर इस यात्रा को धन्य करते हैं। फेरी के अंत में गुरुद्वारे में प्रसाद सेवा होती है जिसमें सभी धर्मों के लोग साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं।

इस दौरान बच्चों और युवाओं को भी सिखाया जाता है कि गुरु की सच्ची भक्ति केवल पूजा में नहीं, बल्कि सेवा और भक्ति भाव में भी है। यह विशेष रूप से गुरु नानक देव जी के जन्मोत्सव से जुड़ी हुई है। आज गुरु नानक देव जी का संदेश केवल पंजाब या भारत तक सीमित नहीं है, दुनियाँ के 150 से अधिक देशों में प्रभात फेरियां निकाली जाती हैं।लंदन में साउथहॉल गुरुद्वारा से हजारों श्रद्धालु प्रभात फेरी में भाग लेते हैं।कनाडा के वैंकूवर में भारतीय मूल के लोगों के साथ स्थानीय नागरिक भी इस भक्ति उत्सव में शामिल होते हैं।सिंगापुर, मलेशिया, दुबई, अमेरिका, केन्या, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में सिख समुदाय और अन्य धर्मों के लोग भी गुरु नानक के उपदेशों से प्रेरित होकर प्रभात फेरियों का आयोजन करते हैं।इस प्रकार कार्तिक प्रभात फेरी आज एक वैश्विक सांस्कृतिक संवाद का माध्यम बन चुकी है। प्रभात फेरी में भाग लेने वालों के जीवन में यह अनुभव गहरा आध्यात्मिक परिवर्तन लाता है। भोर के समय जब पूरा वातावरण शांत होता है और वाहेगुरु का नाम गूंजता है, तब व्यक्ति के भीतर की अशांति मिटने लगती है। यह अनुभव बताता है कि आस्था केवल पूजा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का मार्ग


साथियों बात अगर हम गुरुनानक देव जी की कार्तिक प्रभात फेरी 2025 को समझने की करें तो“सतगुरु की अरदास, प्रभात की प्रभा से विश्व आलोकित ”वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह।आस्था, भक्ति और मानवता के इस पावन संगम में जब सूरज की पहली किरण धरा को स्पर्श करती है, तो गुरबाणी की मधुर वाणी के साथ “वाहेगुरु” का नाम गुंजायमान हो उठता है। यही वह क्षण होता है जब कार्तिक प्रभात फेरी की शुरुआत होती है,वह अनूठी परंपरा जिसे गुरु नानक देव जी ने आध्यात्मिक जागरण और मानवीय एकता का प्रतीक बनाया। पूरे 15 दिवसीय भक्तिमय कालखंड में सिख श्रद्धालु सहित सिंधी व अन्य समाज गुरु नानक जयंती की तैयारी और साधना में डूबे रहेंगे।“प्रभात फेरी” का शाब्दिक अर्थ है,प्रभात (सुबह) के समय की आस्था यात्रा। यह फेरी केवल चलना नहीं, बल्कि संगत (सामूहिकता) के रूप में भक्ति का प्रसार है। जब सूर्योदय से पहले की शांति में भक्तजन “वाहे गुरु,सतनाम” धन गुरु नानक सारा जग तारिया के नाम का उच्चारण करते हुए गलियों, चौपालों और रास्तों से गुजरते हैं, तब यह वातावरण आध्यात्मिक प्रकाश से भर जाता है। प्रभात फेरी आत्मशुद्धि का माध्यम है, यह सिख व अन्य धर्म की उस भावना का प्रतीक है जिसमें कहा गया है कि “नाम जपो, किरत करो,वंड छको”अर्थात ईश्वर का स्मरण करो, ईमानदारी से कार्य करो और सबमें बाँटो। यह लगभग 14 दिनों की धार्मिक यात्रा गुरु नानक जयंती की तैयारी का सबसे पवित्र चरण मानी जाती है। भारत में अमृतसर, पटियाला, लुधियाना, आनंदपुर साहिब, दिल्ली, नांदेड़, पटना साहिब जैसे गुरुद्वारों में प्रभात फेरियों की विशेष व्यवस्था की जाती है।परंतु अब यह परंपरा सीमित नहीं रही।कनाडा,अमेरिका ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, सिंगापुर और दुबई जैसे देशों में बसे सिख समुदाय भी इसे अत्यंत श्रद्धा से मनाते हैं। लंदन के साउथहॉल, वैंकूवर, मेलबर्न, टोरंटो, और कैलिफ़ोर्निया के गुरुद्वारों से प्रभात फेरियाँ निकलती हैं, जिनमें न केवल भारतीय मूल के लोग बल्कि विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के लोग भी भाग लेते हैं। इस तरह यह पर्व “ग्लोबल यूनिटी ऑफ़ स्पिरिचुअल एनर्जी” का प्रतीक बन गया है।


साथियों बात अगर हम इतिहास में प्रभात फेरी की परंपरा व आधुनिक रूप में पर्यावरण और समाज के प्रति संदेश को समझने की करें तो,गुरु नानक देव जी ने 15 वीं शताब्दी में जब आध्यात्मिक यात्रा आरंभ की थी, तब वे अक्सर अपने शिष्यों के साथ प्रभात बेला में भक्ति गीत गाया करते थे। यही परंपरा आगे चलकर प्रभात फेरी के रूप में स्थापित हुई। उनकी यह शिक्षाएँ उस युग में सामाजिक अंधकार में प्रकाश की किरण बनकर फैलीं गुरु नानक देव जी ने जात- पात, अंधविश्वास और धार्मिकभेदभाव के विरुद्ध आवाज़ उठाई और मनुष्य को उसके कर्म और सत्यनिष्ठा से परिभाषित करने की प्रेरणा दी। प्रभात फेरी इन्हीं सिद्धांतों को पुनर्जीवित करती है,यह केवल धार्मिक रिवाज नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और मानवता के जागरण का पर्व है,इस वर्ष की प्रभात फेरी में कई गुरुद्वारों ने ग्रीन प्रभात फेरी की पहल की है। इसका उद्देश्य है कि भक्ति के साथ-साथ प्रकृति की रक्षा भी की जाए। पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता सिख धर्म की मूल भावना से जुड़ी है,क्योंकि गुरुनानक देवजी ने कहा था “पवण गुरु, पानी पिता, माता धरत महत।”इस संदेश के अनुरूप श्रद्धालु पौधरोपण, प्लास्टिक-मुक्त आयोजन और साइकिल प्रभात फेरी जैसी गतिविधियाँ करेंगे। अमृतसर, दिल्ली, पटना साहिब और नांदेड़ के गुरुद्वारों ने इस वर्ष “एक पौधा एक श्रद्धालु अभियान” भी प्रारंभ किया है।


साथियों बात अगर हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्तिक प्रभात फेरी का विस्तार को समझने की करेंतो,21वीं सदी में प्रभात फेरी का स्वरूप अत्यंत वैश्विक हो गया है। विदेशों में बसे भारतीय समुदाय ने इसे “फेस्टिवल ऑफ़ मॉर्निंग डिवोशन”के रूप में स्थापित किया है।कनाडा और ब्रिटेन में सिख समुदाय स्थानीय सरकारों के सहयोग से विशेष परमिट लेकर सड़कों पर प्रभात फेरी निकालता है। इसमें न केवल धार्मिक गीत बल्कि इंटरफेथ संवाद भी होते हैं, जिसमें हिंदू, मुस्लिम, क्रिश्चियन, ज्यू और बौद्ध धर्मों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। इससे गुरु नानक की सार्वभौमिक शिक्षा “एक ओंकार सतनाम”का विश्व संदेश फैलता है कि सत्य एक है, परंतु उसे पाने के मार्ग अनेक हैं।गुरु नानक देव जी का दर्शन अत्यंत व्यापक था। उन्होंने कहा “न को हिन्दू न मुसलमान,”अर्थात इंसान को धर्म से नहीं, उसके कर्म से आँकना चाहिए।प्रभात फेरी इसी विचारधारा की व्यावहारिक अभिव्यक्ति है। जब समाज के लोग एक साथ चलकर नाम जपते हैं, तब जाति, धर्म, भाषा और वर्ग का भेद मिट जाता है।यह एक ऐसा आयोजन है जो आत्मा और समाज दोनों को जोड़ता है। इसमें हर व्यक्ति को यह अनुभव होता है कि “हम सब ईश्वर के एक ही प्रकाश के अंश हैं।”


साथियों बात अगर कर हम पवित्र प्रभात फेरी गुरु नानक जयंती 5 नवंबर 2025 क़े समापन का पवित्र क्षण को समझने की करें तो,5 नवंबर 2025 को जब कार्तिक पूर्णिमा के दिन गुरु नानक जयंती मनाई जाएगी, तब प्रभात फेरी अपने चरम पर होगी। इस दिन सिख गुरुद्वारों में अखंड पाठ, दीवान सजावट,भव्य नगर कीर्तन, लंगर सेवा, और दीयों की रोशनी से वातावरण भक्ति-मय होगादेशभर के गुरुद्वारों में रात भर “शबद कीर्तन”गूंजता रहेगा। अमृतसर का स्वर्ण मंदिर, नांदेड़ का हज़ूर साहिब, पटना साहिब, दिल्ली का बंगला साहिब और पाकिस्तान के करतारपुर साहिब में लाखों श्रद्धालु एक साथ “वाहे गुरु” के नाम का स्मरण करेंगे।यह दृश्य केवल धार्मिक नहीं बल्कि मानवता की एकता का उत्सव होगा।


साथियों बात अगर हम पवित्र प्रभात फेरी को समाज और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक होने की करें तोआज के युग में जब दुनिया भौतिकता और प्रतिस्पर्धा के जाल में उलझी है, तब प्रभात फेरी युवाओं को एक नया दृष्टिकोण देती है। यह उन्हें सिखाती है कि सफलता का अर्थ केवल धन नहीं, बल्कि आत्म- संतोष और सेवा भावना है।कई स्कूलों और कॉलेजों में इस दौरान गुरु नानक अध्ययन सप्ताह आयोजित किए जाते हैं, जहाँ छात्र उनके जीवन, यात्राओं (उदासियों) और शिक्षाओं का अध्ययन करते हैं।


अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि, कार्तिक प्रभात फेरी 2025 केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता एकता और आध्यात्मिकता की विश्व यात्रा है। 23 अक्टूबर से 5 नवंबर तक का यह कालखंड हर हृदय को गुरु नानक देव जी की वाणी से भर देगा“नाम जपो कीरत करो, वंड छको।”यह पंद्रह दिन का सफर केवल सड़कों पर नहीं, बल्कि आत्मा के भीतर तय होता है। जैसे सूरज अंधकार मिटाता है, वैसे ही गुरु नानक देव जी की प्रभात फेरी मानवता के हृदय में प्रकाश जगाती है,एक ऐसा प्रकाश जो सीमाओं से परे है, जो सभी को जोड़ता है, और जो कहता है,“वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह।”
गुरु नानक की वाणी हमें फिर याद दिलाती है, “सभ में जोत, जोत है सोई; तिस दै चानण सब में चानण होई।”(हर प्राणी में एक ही प्रकाश है, ईश्वर की ज्योति सबमें समान है।)

संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतर्राष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि सीए(एटीसी) संगीत माध्यमा एडवोकेट किशन सनमुखदास भावानानी गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

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