चौका थाना के डकैती कांड में 2 साल से फरार आरोपी गिरफ्तार।
सरायकेला/चौका
सरायकेला-खरसावां जिले की चौका थाना पुलिस ने डकैती के एक मामले में दो साल से फरार चल रहे प्राथमिकी अभियुक्त को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। गिरफ्तार आरोपी अपना और अपने पिता का नाम-पता बदलकर आदित्यपुर थाना क्षेत्र में छिपकर रह रहा था।
क्या है मामला?
यह मामला चौका थाना कांड संख्या- 66/24, दिनांक 06.12.2024, धारा 310(2) BNS से जुड़ा है। इस कांड के वादी पसुवा सरदार, पिता स्व. शत्रुधन सरदार, ग्राम- रेयांगदा, टोला डुंगरीडीह, थाना- चौका के लिखित आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
इस कांड में कुल 7 नामजद और अन्य अज्ञात के विरुद्ध डकैती का आरोप लगा था। नामजद अभियुक्त हैं – (1) फागु सरदार, (2) मकता सरदार, (3) कालीचरण सरदार, (4) पोदो सरदार, (5) सुखराम सरदार, (6) पोदो सरदार उर्फ लंगड़ा, सभी ग्राम रेयांगदा, टोला डुंगरीडीह, थाना चौका और (7) राजाराम, ग्राम गोपालपुर सीनी, थाना सरायकेला।
पुलिस ने अनुसंधान के क्रम में पूर्व में 6 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
दो साल से फरार था मुख्य आरोपी
इस कांड का फरार प्राथमिकी अभियुक्त पोदो सरदार उर्फ पोदो भूमिज उर्फ लंगड़ा उर्फ पदो सरदार, उम्र करीब 30 वर्ष, पिता स्व. रूई दास सरदार उर्फ रोईदास सरदार, स्थाई पता- टोला डुंगरीडीह, गाँव रेयांगदा, थाना चौका को पुलिस ने बीते दिन 18.08.2026 को गिरफ्तार किया।
पुलिस के अनुसार आरोपी आदित्यपुर थाना अंतर्गत ग्राम शिवनारायणपुर के सरना टोला में अपना नाम-पता बदलकर रह रहा था। गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर उसे धर दबोचा गया।
*आरोपी का आपराधिक इतिहास:*
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी का लंबा आपराधिक इतिहास रहा है 1. चौका थाना कांड सं0- 58/14, दि0- 07.12.2014, धारा 147/148/149/302/427 भा.द.वि. एवं 17 सीएलए एक्ट. 2. 2. कांड्रा थाना कांड सं0- 24/2015, दि0- 06.07.2015, धारा 395 भा.द.वि. 3. 3. खरसावां थाना कांड सं0- 51/2012, दि0- 23.07.2012, धारा 17 सीएलए एक्ट. 4. चौका थाना कांड सं0- 42/2024, दि0- 11.07.2024, धारा 137(2)/3(5) बीएनएस 2023 5. चौका थाना कांड सं0- 66/24, दि0- 06.12.24, धारा 310(2) बीएनएस।
छापेमारी में दूसरा फरार भी पकड़ा गया
इसी छापेमारी के दौरान पुलिस ने अंड़की थाना कांड सं0- 44/23, दि0- 04.08.23, धारा 394 IPC व 27 आर्म्स एक्ट में तीन साल से फरार चल रहे अप्राथमिकी अभियुक्त गंगाधर सिंह मुंडा, पिता धनुषधारी सिंह मुंडा, थाना चौका को भी गिरफ्तार किया। उसे अंड़की थाना को सुपुर्द कर दिया गया है। उसका भी आपराधिक इतिहास रहा है।
छापेमारी दल में शामिल थे: पु.अ.नि. गौरव कुमार (थाना प्रभारी, चौका), पु.अ.नि. प्रकाश कुमार (चौका), पु.अ.नि. अरुण कुमार (सरायकेला), पु.अ.नि. शिवशंकर सिंह (आदित्यपुर), स.अ.नि. दिलेश्वर कुमार, स.अ.नि. अंजेश कुमार राय एवं चौका थाना के सशस्त्र बल।
आदित्यपुर में दिखेगी अमेरिका के स्वामीनारायण मंदिर की झलक, सिंहभूम बॉयज क्रिकेट क्लब का 85 फीट ऊंचा पंडाल बनेगा सेंटर ऑफ अट्रैक्शन।
सरायकेला/आदित्यपुर
आदित्यपुर के एस टाइप स्थित सिंहभूम बॉयज क्रिकेट क्लब पूजा समिति इस साल दुर्गा पूजा में कुछ खास करने जा रही है। इस वर्ष समिति श्रद्धालुओं के लिए अमेरिका के मशहूर स्वामीनारायण मंदिर की प्रतिकृति वाला पंडाल बनाने जा रही है।
शुक्रवार को वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पूजा स्थल पर भूमि पूजन कर पंडाल निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया। इस दौरान समिति के मुख्य संरक्षक मनोज सिंह और अध्यक्ष दिनेश सिंह उर्फ बबलू मुख्य यजमान के तौर पर मौजूद रहे।
समिति के सदस्यों के अनुसार इस बार आयोजन का कुल बजट करीब 50 लाख रुपये रखा गया है। इसमें से लगभग 30 लाख रुपये पंडाल के निर्माण पर और 10 लाख रुपये आकर्षक लाइट डेकोरेशन पर खर्च किए जाएंगे। बनने वाले पंडाल की ऊंचाई करीब 85 फीट और चौड़ाई 100 फीट होगी।
इस पंडाल की सबसे बड़ी खासियत शीशे और क्रिस्टल से की जाने वाली कारीगरी होगी। पंडाल के अंदर और बाहर दोनों तरफ कांच की अद्भुत कलाकारी देखने को मिलेगी। यही नहीं, मां दुर्गा की प्रतिमा भी शीशे और फाइबर के विशेष संयोजन से बनाई जा रही है।
पंडाल और मूर्ति बनाने की जिम्मेदारी पश्चिम बंगाल के कांथी से आए कुशल कारीगरों को दी गई है, जबकि मनमोहक विद्युत सज्जा का काम चंदननगर के लाइट आर्टिस्ट करेंगे। आयोजकों का कहना है कि हर साल की तरह इस बार भी उनका पंडाल जमशेदपुर और आसपास के इलाकों में लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेगा।
पूजा को भव्य और सुव्यवस्थित रूप से संपन्न कराने के लिए नई कमेटी का गठन कर दिया गया है। इसमें मनोज सिंह को प्रधान संरक्षक बनाया गया है, जबकि विमल सिंह, छोटे सिंह, विनोद सिंह और इंदर अग्रवाल को संरक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। अध्यक्ष के रूप में बबलू सिंह कमेटी का नेतृत्व करेंगे। राणा सिंह और भोला सिंह को उपाध्यक्ष, नीरू सिंह, विक्की सिंह और सोनू खान को सचिव, चिंटू कुमार को पूजा प्रभारी और संजीव पांडे को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
इनके अलावा बंटी कुमार, गोरा दादा, जसपाल सिंह, प्रकाश मेहता, पप्पू सिंह सहित सेंट्रल कमेटी के अन्य सभी सक्रिय सदस्य तैयारियों में पूरी तरह जुट गए हैं।
रांची लोकसभा के ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत रेलवे के दो मार्ग वाले फाटक के ओभर रांची लोकसभा के संसद द्वारा ब्रीज को आगमी 22 अगस्त 2026 का उद्घाटन कर ,पितकी रेलवे फाटक की जाम मुक्त करेग।पितकी जाम से वाहन चालकों,राह हर तबके के लोग परेशान थे। आगमी 22अगस्त के बाद जाम मुक्त होगा।
राजमार्ग NH 32 वर्तमान में एन एच 18 पर स्थित टाटा पुरूलिया मार्ग पर के नीमडीह प्रखंड अंतर्गत नवनिर्मित पितकी फ्लाईओवर दिनांक 22/8/2026 को सुबह 11:00 बजे जनता को समर्पित किया जाएगा।इस मौके पर रांची लोकसभा के सांसद संजय सेठ सह भारत सरकार के केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री सह उपस्थित होंगे मुख्य अतिथि के रूप में सभा कार्यक्रम आगमी कल दिनांक 22/08/2026 शनिवार को रावताडा मोड़ पर आयोजित होगा। संनद् रहे इस क्षेत्र की जनता ने पितकी ओवरब्रिज चालू नहीं होने से बढ़ी परेशानी, को निजात दिलाने हेतु NHAI से जल्द शुरू ओभर ब्रीज को चालु करने की मांग काई माह से कर रहे थे।
NHAI को ईमेल के माध्यम से नोटिस/पत्र भेजकर पितकी ओवरब्रिज को जल्द चालू करने की मांग
चांडिल: पितकी ओवरब्रिज अब तक चालू नहीं होने के कारण पितकी रेलवे गेट पर लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। रेलवे गेट बंद होने पर टाटा-पुरुलिया राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-18) पर सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। कई बार जाम की स्थिति 5 से 6 किलोमीटर तक पहुंच जाती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, ट्रेनों के आवागमन के दौरान पितकी रेलवे गेट करीब 30 से 40 मिनट तक बंद रहता है। गेट बंद रहने के दौरान वाहनों के फंसने से स्कूली बच्चों, कॉलेज विद्यार्थियों, यात्रियों और वाहन चालकों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। छात्र-छात्राओं को समय पर स्कूल और कॉलेज पहुंचने में भी परेशानी होती है।
लगातार हो रही बारिश के कारण पितकी गेट के आसपास सड़क के कई हिस्सों में गड्ढों में पानी जमा हो गया है। जाम के साथ जलजमाव और खराब सड़क की स्थिति से दुर्घटना की आशंका भी बढ़ गई है।
*छात्र नेता समीर कुमार महतो ने इस समस्या को लेकर NHAI को ईमेल के माध्यम से नोटिस/पत्र भेजकर पितकी ओवरब्रिज को जल्द चालू करने की मांग की है।* उन्होंने NHAI से यह भी मांग की है कि ओवरब्रिज के चालू होने की संभावित तिथि स्पष्ट रूप से बताई जाए और यह जानकारी सार्वजनिक की जाए कि आखिर ओवरब्रिज कब तक चालू होगा।
बताया गया कि पितकी ओवरब्रिज को चालू करने को लेकर NHAI की ओर से कई बार तिथियां निर्धारित की गईं, लेकिन निर्धारित तिथियों पर ओवरब्रिज चालू नहीं हो सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब पांच बार ओवरब्रिज चालू होने की तिथि निर्धारित होने के बावजूद तिथि रद्द हो चुकी है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
समीर कुमार महतो ने कहा कि बरसात के मौसम में पितकी रेलवे गेट पर लगने वाला लंबा जाम आम लोगों के लिए गंभीर समस्या बन गया है। ओवरब्रिज चालू होने से रेलवे गेट पर निर्भरता कम होगी और जाम की समस्या से लोगों को काफी राहत मिल सकती है।
स्थानीय लोगों ने NHAI से मांग की है कि पितकी ओवरब्रिज को जल्द से जल्द चालू किया जाए, इसकी निश्चित/संभावित चालू होने की तिथि सार्वजनिक की जाए, क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत कराई जाए और जलजमाव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। साथ ही रेलवे गेट के आसपास यातायात एवं सड़क सुरक्षा की व्यवस्था मजबूत करने की मांग की गई है।
उपायुक्त की जिलेवासियों से अपील—सर्पदंश से बचाव के लिए बरतें सावधानी, सर्पदंश की स्थिति में बिना विलंब नजदीकी CHC पहुंचाएं।
सरायकेला/खरसावां
सरायकेला-खरसावाँ जिले में वर्षा ऋतु के दौरान सर्पदंश की आशंका को देखते हुए उपायुक्त सह जिला दण्डाधिकारी नितिश कुमार सिंह (भा.प्र.से.) ने जिलेवासियों से सतर्कता एवं सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सर्पदंश एक गंभीर चिकित्सकीय आपातस्थिति हो सकती है। सतर्कता, समय पर चिकित्सा सहायता और उचित उपचार से सर्पदंश के कारण होने वाली गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम किया जा सकता है तथा व्यक्ति का जीवन बचाया जा सकता है।
उपायुक्त ने कहा कि सर्पदंश की स्थिति में बिना किसी विलंब के मरीज को नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाएं। सर्पदंश के उपचार के लिए जिले के संबंधित CHC में प्रशिक्षित चिकित्सक उपलब्ध हैं तथा चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार एंटी-स्नेक वेनम (ASV) उपलब्ध कर उपचार किया जाता है। इसलिए सर्पदंश को गंभीरता से लेते हुए तत्काल चिकित्सकीय सहायता प्राप्त करना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि सर्पदंश के बाद पीड़ित को शांत रखें और अनावश्यक रूप से चलने-फिरने न दें। प्रभावित अंग को यथासंभव स्थिर रखें। अंगूठी, घड़ी, कड़ा अथवा अन्य कसाव वाली वस्तुएं पहनी हों तो उन्हें हटा दें, ताकि सूजन की स्थिति में परेशानी न हो। सर्प को पकड़ने अथवा मारने का प्रयास न करें।
उपायुक्त ने स्पष्ट रूप से अपील की कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र अथवा अप्रमाणित घरेलू उपचार का सहारा न लें। घाव को काटना, जहर चूसना, जलाना, रगड़ना या उस पर किसी प्रकार की जड़ी-बूटी अथवा रासायनिक पदार्थ लगाना नहीं चाहिए। ऐसी स्थिति में प्राथमिकता तत्काल चिकित्सकीय सहायता प्राप्त करना होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्षा ऋतु में सर्पों की गतिविधि को देखते हुए घर एवं आसपास के परिसर को साफ-सुथरा रखें तथा अनावश्यक झाड़ियों, कचरे एवं ऐसे स्थानों की नियमित सफाई करें जहां सर्प छिप सकते हैं। रात में बाहर निकलते समय टॉर्च का उपयोग करें तथा पैरों को ढकने वाले जूते पहनें। खेतों एवं अन्य कार्यस्थलों पर भी आवश्यक सावधानी बरतें।
उपायुक्त श्री नितिश कुमार सिंह ने जिलेवासियों से अपील की कि सर्पदंश की स्थिति में घबराएं नहीं, समय न गंवाएं और तत्काल चिकित्सा सहायता प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि जागरूकता एवं सावधानी के साथ सर्पदंश की घटनाओं से बचाव किया जा सकता है तथा समय पर उचित उपचार मिलने से गंभीर परिणामों को रोका जा सकता है।
उन्होंने जिलेवासियों से स्वयं जागरूक रहने के साथ-साथ परिवार, पड़ोस एवं आसपास के लोगों को भी सर्पदंश से बचाव तथा समय पर चिकित्सा सहायता प्राप्त करने के प्रति जागरूक करने की अपील की।
व्यर्थ नहीं गया जनता का वोट – जनसेवा की मिसाल बने आदित्यपुर वार्ड 23 के पार्षद अवधेश सिंह।
सरायकेला/आदित्यपुर
( सोनू कुमार सिंह )
कहते हैं जनता का वोट सबसे बड़ी ताकत होता है, और जब चुना हुआ प्रतिनिधि उस वोट की कीमत समझे तो विकास खुद-ब-खुद धरातल पर दिखने लगता है। ऐसा ही कुछ देखने को मिला आदित्यपुर नगर निगम के वार्ड संख्या 23 में।
वार्ड के मुख्य मार्ग पर देना बैंक के सामने कई दिनों से नाली के ऊपर का स्लैब टूटा हुआ था। टूटे स्लैब के कारण न सिर्फ राहगीरों को आवागमन में भारी परेशानी हो रही थी, बल्कि दुर्घटना का भी डर बना हुआ था। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को इस मार्ग से निकलने में सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
मामले को संज्ञान में आते ही जनहित को सर्वोपरि रखते हुए वार्ड 23 के लोकप्रिय पार्षद श्री अवधेश सिंह ने बिना किसी सरकारी प्रक्रिया का इंतजार किए, अपने निजी खर्च से नए स्लैब का निर्माण कराकर उसे ठीक करवा दिया।
आज स्लैब के ठीक होते ही स्थानीय लोगों के चेहरे पर राहत और खुशी साफ देखी जा रही है।
इस अवसर पर पार्षद अवधेश सिंह ने कहा, “नगर वासियों ने कड़ी धूप में घंटों लाइन में लगकर जो भरोसा और प्यार हमें दिया है, उन उम्मीदों पर खरा उतरना ही मेरी पहली प्राथमिकता है। मेरे लिए पार्षद का पद नहीं, जनसेवा ही सबसे बड़ा संकल्प है। जनता के सुख-दुख में खड़ा रहना ही मेरी असली जीत है।”
नगर वासियों ने ज शत्ताया आभार:
पार्षद के इस सराहनीय कार्य के बाद पूरे वार्ड में उनकी प्रशंसा हो रही है। स्थानीय नागरिकों ने कहा, “हमने जिसे वोट दिया था, आज वो सच में हमारे सुख-दुख का साथी बनकर खड़ा है। अवधेश जी जैसे पार्षद ही सच्चे जनसेवक कहलाते हैं। हम सभी वार्ड वासी दिल से उनका धन्यवाद करते हैं।”
निश्चित तौर पर यह कार्य अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए भी एक प्रेरणा है कि अगर नीयत साफ हो तो छोटे-छोटे कार्यों से भी जनता के दिल में बड़ी जगह बनाई जा सकती है।
वार्ड 23 की जनता का एक ही कहना है – “हमारा वोट व्यर्थ नहीं गया।”
सरायकेला सदर अस्पताल से बाइक चोरी का खुलासा: दो शातिर चोर गिरफ्तार, चोरी की दो स्प्लेंडर बाइक बरामद।
सरायकेला
( सोनू कुमार सिंह )
सरायकेला सदर अस्पताल परिसर से हुई मोटरसाइकिल चोरी मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने इस कांड का उद्भेदन करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से चोरी की दो काले रंग की स्प्लेंडर मोटरसाइकिल बरामद की है।
क्या है पूरा मामला? जानकारी के अनुसार, 27 जुलाई 2026 को वादी अपनी पत्नी के इलाज के लिए बाइक संख्या JH05CZ-2871 से सरायकेला सदर अस्पताल आए थे। उन्होंने अपनी बाइक अस्पताल परिसर में खड़ी की थी। इलाज के बाद जब वे बाहर लौटे तो उनकी बाइक गायब थी। इस संबंध में वादी ने सरायकेला थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर कांड संख्या 63/26, दिनांक 01 अगस्त 2026, धारा 303(2) BNS के तहत मामला दर्ज किया गया था।
पुलिस की कार्रवाई पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सरायकेला अंचल के पुलिस निरीक्षक राजेश टुडू के नेतृत्व में एक विशेष छापामारी दल का गठन किया गया। टीम ने तकनीकी साक्ष्य और गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को धर दबोचा।
गिरफ्तार आरोपी: 1. सुरज नाथ (24 वर्ष), पिता सिद्धेश्वर योगी, निवासी – लदईपुर, थाना राजनगर 2. अभिषेक महतो (26 वर्ष), पिता हरिपद महतो, निवासी – दुगनी, जोराडीहा, पुराना FCI गोदाम के पास, थाना सरायकेला दोनों आरोपी सरायकेला-खरसावां जिले के रहने वाले हैं।
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर दो काले रंग की स्प्लेंडर बाइक बरामद की हैं, जिनके चेचिस नंबर MBLHAW126MHG79933 और MBLHAW123MHK54117 हैं। पुलिस के मुताबिक एक बाइक इसी कांड की है, जबकि दूसरी भी चोरी की है, जिसकी जांच की जा रही है।
छापामारी दल में इंस्पेक्टर राजेश टुडू के साथ थाना प्रभारी विनय कुमार, एसआई अरुण कुमार महतो, विनोद टुडू सहित सशस्त्र बल के जवान शामिल थे।
पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई से क्षेत्र में लगातार हो रही बाइक चोरी की घटनाओं पर लगाम लगेगी।
उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक संपन्न, विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की हुई समीक्षा।
सरायकेला-खरसावां
सरायकेला-खरसावाँ समाहरणालय सभागार में आज उपायुक्त श्री नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा संचालित विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए योजनाओं का प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने हेतु संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन की प्राथमिकता जनहित से जुड़े मामलों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करते हुए पात्र लाभुकों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से पहुंचाना है। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि योजनाओं का लाभ लेने के लिए आमजनों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाना पड़े तथा कार्यालय स्तर पर ही उनकी समस्याओं का नियमानुसार समाधान सुनिश्चित हो।
समीक्षा के क्रम में प्रखंड एवं अंचल स्तर पर नियमित समन्वय बैठक आयोजित करने, योजनाओं की सतत निगरानी रखने तथा सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने का निर्देश दिया गया। लाभुकों को योजनाओं का लाभ बिना किसी मध्यस्थता के सीधे उपलब्ध कराने तथा राजस्व एवं अन्य जनहित से जुड़े कार्यों में अनावश्यक विलंब समाप्त करने को कहा गया।
सभी संबंधित पदाधिकारियों को सप्ताह में कम-से-कम एक से दो दिन कार्यालय अवधि में अपने-अपने कार्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहकर क्षेत्र से आने वाले आमजनों की समस्याओं को सुनने तथा प्राप्त आवेदनों एवं शिकायतों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने कहा कि विभिन्न कार्यों के लिए प्रखंड, अंचल एवं अन्य कार्यालयों में आने वाले फरियादियों की समस्याओं पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि लोगों को एक ही कार्य के लिए बार-बार कार्यालय का चक्कर न लगाना पड़े।
आपूर्ति विभाग की समीक्षा के क्रम में गोदाम निर्माण एवं मरम्मती कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया गया। राशन के उठाव से संबंधित लंबित कार्यों को यथाशीघ्र पूर्ण करते हुए ससमय राशन वितरण सुनिश्चित करने को कहा गया। विभिन्न माध्यमों से राशन वितरण में अनियमितता संबंधी प्राप्त शिकायतों की नियमानुसार जांच कर दोषी पाए जाने वाले डीलरों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा स्टॉक का नियमित मिलान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया, ताकि लाभुकों को निर्धारित मात्रा में राशन उपलब्ध हो सके।
शिक्षा विभाग की समीक्षा के क्रम में छूटे हुए सभी विद्यार्थियों का जन्म प्रमाण पत्र निर्गत कराने तथा बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया पूर्ण करने का निर्देश दिया गया। साथ ही नामांकन, विद्यार्थियों की उपस्थिति एवं शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित करने को कहा गया।
उद्योग एवं श्रम विभाग की समीक्षा के क्रम में विभिन्न योजनाओं के तहत लोन आवेदन तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा अधिकाधिक पात्र लाभुकों को योजनाओं से जोड़कर स्वरोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का निर्देश दिया गया। श्रमिकों के पंजीकरण में तेजी लाने तथा विभागीय योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने को कहा गया।
कृषि एवं संबद्ध विभागों की समीक्षा के दौरान तालाब जीर्णोद्धार, योग्य किसानों के बीच कृषि सहायक उपकरण एवं बीज आदि का समयबद्ध वितरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। मत्स्य पालन के इच्छुक किसानों को संबंधित योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने तथा तालाबों की बंदोबस्ती की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा गया। योजनाओं से संबंधित डेटा की संबंधित पोर्टल पर समयबद्ध ऑनलाइन प्रविष्टि सुनिश्चित करने तथा किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों से जोड़ने का निर्देश दिया गया।
खेल एवं पर्यटन विभाग की समीक्षा के क्रम में जिला खेल पदाधिकारी को सतनाला डैम को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने हेतु आवश्यक कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया गया। पर्यटकों की सुविधा एवं क्षेत्र के पर्यटन विकास को ध्यान में रखते हुए सीटिंग बेंच, बोटिंग आदि आवश्यक सुविधाओं के विकास की दिशा में कार्य करने को कहा गया।
सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण विभाग को केंद्र सरकार की पेंशन योजनाओं के अंतर्गत पेंशन प्राप्त करने वाले लाभुकों का डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेशन शत-प्रतिशत सुनिश्चित करने तथा लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन करने का निर्देश दिया गया।
बैठक के दौरान मिशन वात्सल्य योजना की समीक्षा करते हुए एकल एवं अनाथ बच्चों को चिन्हित कर उन्हें स्पॉन्सरशिप योजना से जोड़ने का निर्देश दिया गया। स्वयं सहायता समूह की दीदियों को अधिकाधिक आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर स्वावलंबी बनाने तथा ‘लखपति दीदी’ की संख्या में वृद्धि के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने को कहा गया।
मनरेगा एवं आवास योजनाओं के अंतर्गत स्वीकृत योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा रोजगार सृजन में तेजी लाने का निर्देश दिया गया।
नगर विकास विभाग को नगर निकाय क्षेत्रों में स्वच्छता, पेयजल एवं विद्युत आपूर्ति से संबंधित व्यवस्थाओं को सुदृढ़ रखने तथा निर्माण एवं विकास कार्यों को गुणवत्तापूर्ण तरीके से निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने का निर्देश दिया गया।
उपायुक्त ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि सरकारी योजनाओं की जानकारी स्थानीय भाषा में सरल एवं प्रभावी तरीके से आमजनों तक पहुंचाई जाए। इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर बैनर, फ्लेक्स एवं होर्डिंग के साथ-साथ सोशल मीडिया, गीत-संगीत, नुक्कड़ नाटक, पेंटिंग एवं वॉल पेंटिंग जैसे जनसंचार माध्यमों का प्रभावी उपयोग करने को कहा गया। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ केवल जागरूक एवं सक्रिय लाभुकों तक सीमित न रहे, बल्कि अंतिम पायदान पर खड़े प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं की जानकारी एवं लाभ पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।
बैठक के अंत में सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, गुणवत्तापूर्ण निष्पादन एवं निर्धारित समय-सीमा में लक्ष्य प्राप्त करने का निर्देश दिया गया। साथ ही योजनाओं की नियमित समीक्षा एवं क्षेत्र स्तर पर सतत निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया।
बैठक के अंत में भारत सरकार, गृह मंत्रालय के जनगणना कार्य निदेशालय, झारखण्ड द्वारा भारत की जनगणना-2027 के प्रथम चरण के मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना कार्य में सराहनीय योगदान के लिए प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायकेला एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी, चांडिल को प्रदान किए गए प्रशस्ति-पत्र उपायुक्त द्वारा प्रदान कर सम्मानित किया गया।
बैठक में उप विकास आयुक्त श्रीमती रीना हांसदा, अपर उपायुक्त जयबर्धन कुमार, नगर आयुक्त आदित्यपुर एजाज अनवर, अनुमंडल पदाधिकारी सरायकेला अभिनव प्रकाश, अनुमंडल पदाधिकारी चांडिल नितिन शिवम गुप्ता, सिविल सर्जन, जिला परिवहन पदाधिकारी, जिला खनन पदाधिकारी सहित जिला स्तरीय पदाधिकारी, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं अंचलाधिकारी, सभी विभागों के कार्यपालक अभियन्ता, उपस्थित थे।
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शराबबंदी के बावजूद मौत का कारोबार! गुजरात से तमिलनाडु सहित अनेक राज्यों तक जहरीली शराब की त्रासदी और शासन- व्यवस्था के सामने सबसे बड़ा सवाल
जहरीली शराब का काला साम्राज्य: एक तरफ शराबबंदी, दूसरी तरफ जहरीली शराब का कारोबार! क्या भारत का सिस्टम मिलावटखोर माफिया के आगे बेबस है? -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र
वैश्विक स्तरपर हाल के दिनों में गुजरात के भावनगर जिले से सामने आई जहरीली शराब की त्रासदी ने एक बार फिर पूरे देश के सामने वह असहज प्रश्न खड़ा कर दिया है,जिसका उत्तर भारत वर्षों से तलाश रहा है जब शराबबंदी लागू है,जब कानून कठोर हैं,जब पुलिस, प्रशासन,आबकारी विभाग और खुफिया तंत्र मौजूद हैं, तब आखिर जहरीली और अवैध शराब आम लोगों तक पहुंचती कैसे है?20 अगस्त 2026 को उपलब्धनवीनतम रिपोर्टों के अनुसार भावनगर त्रासदी में मृतकों की संख्या सात से बढ़कर आठ हो गई है और करीब 39 लोग उपचाराधीन बताए गए हैं। जांच में कथित रूप से मेथनॉल से तैयार जहरीली शराब,लोकप्रिय ब्रांड की नकली बोतलों और अंतरराज्यीय आपूर्ति नेटवर्क के संकेत मिले हैं; पुलिस ने 21 आरोपियों को नामजद कर 13 गिरफ्तारियां किए जाने की भी जानकारी दी है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र बताना चाहूंगा कि भावनगर की घटना इसलिए और गंभीर है क्योंकि गुजरात भारत के उन राज्यों में है जहां दशकों से शराबबंदी लागू है।शराब की बिक्री,खरीद और सेवन पर प्रतिबंध का मूल उद्देश्य सामाजिक स्वास्थ्य, परिवारों की सुरक्षा और नशे से होने वाले अपराधों को नियंत्रित करना रहा है,लेकिन जमीन पर यदि प्रतिबंधित शराब भूमिगत बाजार में उपलब्ध हो जाए तो समस्या केवल शराब सेवन की नहीं रह जाती; वह अवैध अर्थव्यवस्था,संगठित अपराध, भ्रष्टाचार, नकली ब्रांड, रासायनिक विषाक्तता और प्रशासनिक विफलता का संयुक्त संकट बन जाती है।भावनगर में सामने आया कथित नकली आईएमएफएल नेटवर्क इसी खतरनाक तंत्र की ओर संकेत करता है। रिपोर्टों के अनुसार शराब कथित रूप से मध्य प्रदेश से कच्चे माल के साथ जुड़ी थी, जबकि निर्माण भावनगर क्षेत्र में किए जाने की बात जांच में सामने आई है।डिस्क्लेमर यह पूरी जानकारी मीडिया से ली गई है।
साथियों,लेकिन भावनगर की कहानी कोई अकेली कहानी नहीं है। यह भारत में जहरीली शराब की उन अनगिनत त्रासदियों की नई कड़ी है जिनमें गरीब और निम्न आय वर्ग के लोग सबसे अधिक प्रभावित होते रहे हैं।वर्ष 2024 में तमिलनाडु के कल्लाकुरिची में मेथनॉल- मिश्रित अवैध शराब ने ऐसा कहर बरपाया कि देश स्तब्ध रह गया। शुरुआती दिनों में मृतकों की संख्या तेजी से बढ़ी और अंततः सरकारी तथा मीडिया रिपोर्टों में 65 मौतों और 200 से अधिक लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई।इस त्रासदी में उल्टी,पेटदर्द,दस्त और गंभीर विषाक्तता के लक्षणों के बाद लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया।जांच में मेथनॉल की मौजूदगी सामने आई, जबकि अवैध शराब के नेटवर्क से जुड़े लोगों पर कार्रवाई की गई और प्रशासनिक स्तर पर भी अधिकारियों के विरुद्ध कदम उठाए गए।कल्लाकुरिची से ठीक एक वर्ष पहले, मई 2023 में तमिलनाडु के विलुप्पुरम और चेंगलपट्टू जिलों में अवैध शराब पीने से 22 लोगों की मौत हुई थी। एक ही राज्य में लगातार दो वर्षों में ऐसी घटनाओं का सामने आना इस बात का प्रमाण है कि समस्या किसी एक गांव, एक शराब विक्रेता या एक स्थानीय गिरोह तक सीमित नहीं है। यह उस आपूर्ति शृंखला का हिस्सा है जिसमें अवैध उत्पादन, रसायनों का दुरुपयोग, वितरण स्थानीय संरक्षण और मांग,सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
साथियों, गुजरात स्वयं इस संकट से बार-बार जूझता रहा है।जुलाई 2022 में बोटाद और आसपास के क्षेत्रों में जहरीली शराब की त्रासदी में सरकारी आंकड़ों के अनुसार मृतकों की संख्या 42 तक पहुंची थी।उस मामले में औद्योगिक मेथनॉल के इस्तेमाल की बातसामने आई थी और शुरुआती जांच में यह भी बताया गया था कि रासायनिक पदार्थ को शराब के रूप में इस्तेमाल किया गया। यह तथ्य अत्यंत महत्वपूर्ण है,क्योंकि मेथनॉल कोई सामान्य शराब नहीं है; यह औद्योगिक रसायन है और मानव शरीर में जाने पर गंभीर विषाक्तता, दृष्टि-हानि, अंगों की विफलता और मृत्यु तक का कारण बन सकता है। इसलिए जहरीली शराब की त्रासदी को केवल ‘नकली शराब’ कहकर समाप्त कर देना समस्या की वास्तविक गंभीरता को कम करके देखना होगा।गुजरात के इतिहास में इससे भी बड़ी त्रासदी जुलाई 2009 में सामने आई थी,जब अहमदाबाद में जहरीली शराब के सेवन से 136 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग अस्पताल पहुंचे थे। उस घटना के बाद अवैध शराब नेटवर्क पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई और कानून को और कठोर बनाने की चर्चा हुई। लेकिन डेढ़ दशक से अधिक समय बाद भी 2022 और अब 2026 की घटनाएं यह पूछने के लिए मजबूर करती हैं कि क्या केवल कठोर कानून बनाना पर्याप्त है, अथवा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूरी प्रशासनिक प्रणाली को पुनर्गठित करने की आवश्यकता है?
साथियों, यह प्रश्न केवल गुजरात तक सीमित नहीं है। बिहार में वर्ष 2022 की छपरा-केंद्रित जहरीली शराब त्रासदी में मृतकों की संख्या बाद में 80 से अधिक पहुंच गई; एक रिपोर्ट के अनुसार 17 दिसंबर तक आंकड़ा 81 तक पहुंच चुका था। बिहार में 2016 से शराबबंदी लागू होने के बावजूद इस तरह की घटनाओं का सामने आना भी उसी विरोधाभास को रेखांकित करता है,कानून की किताब में प्रतिबंध और जमीन पर अवैध आपूर्ति, दोनों साथ-साथ चल सकते हैं यदि प्रवर्तन व्यवस्था में गंभीर छेद हों।पंजाब में वर्ष 2020 की जहरीली शराब त्रासदी भी स्वतंत्र भारत की सबसे भयावह घटनाओं में गिनी जाती है। अमृतसर, तरनतारन और गुरदासपुर क्षेत्रों में अवैध शराब के सेवन से मृतकों की संख्या बाद की रिपोर्टों में 120 के आसपास पहुंची।रेउटर्स की शुरुआती रिपोर्ट में 86 मौतों की पुष्टि की गई थी, जबकि बाद की रिपोर्टिंग में आंकड़ा और बढ़ा। इतना ही नहीं, पंजाब में बाद के वर्षों में भी ऐसी घटनाएं सामने आती रहीं; 2025 में अमृतसर के मजीठा क्षेत्र में कथित जहरीली शराब से दो दर्जन से अधिक मौतों ने फिर वही सवाल उठाया कि पिछली त्रासदियों से आखिर कितना सबक लिया गया।
साथियों, इन घटनाओं को एक साथ देखने पर भारत के सामने एक भयावह पैटर्न उभरता है।एक राज्य में शराबबंदी है,दूसरे में शराब उपलब्ध है लेकिन गरीबों के लिए महंगी है;कहीं अवैध शराब सस्ती होने के कारण बिकती है, कहीं प्रतिबंध के कारण भूमिगत बाजार बनता है और कहीं संगठित अपराधी लोकप्रिय ब्रांड की बोतलों में जहरीला तरल भरकर उपभोक्ता को भ्रमित करते हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि वास्तविक पीड़ित प्रायः वही लोग बनते हैं जिनके पास महंगी चिकित्सा सुविधा, कानूनी सहायता और सामाजिक सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होती। जहरीली शराब केवल शरीर को नहीं मारती; वह पूरे परिवार की आर्थिक रीढ़ तोड़ देती है। परिवार का कमाने वाला सदस्य मरता है तो पीछे बच्चों की शिक्षा, बुजुर्गों की देखभाल, कर्ज, भोजन और भविष्य सभी प्रश्न बनकर खड़े हो जाते हैं।
साथियों, इस संकट की जड़ में केवल उपभोक्ता को दोष देना आसान है, लेकिन पर्याप्त नहीं।निश्चित रूप सेअवैध शराब का सेवन गंभीर जोखिम है और लोगों को ऐसी शराब से दूर रहना चाहिए,परंतु शासन का दायित्व केवल नागरिकों को चेतावनी देना नहीं है।शासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि जहरीला उत्पाद बाजार तक पहुंच ही न सके। इसके लिए पुलिस और आबकारी विभाग की पारंपरिक छापेमारी व्यवस्था से आगे बढ़कर सप्लाई-चेन इंटेलिजेंस विकसित करनी होगी। मेथनॉल और अन्य औद्योगिक रसायनों की खरीद-बिक्री, परिवहन और अंतिम उपयोग की डिजिटल निगरानी, संदिग्ध थोक खरीद की पहचान,नकली बोतलों और लेबलों केउत्पादन पर कार्रवाई तथा अंतरराज्यीय सूचना साझाकरण को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए।भावनगर की घटना इस दृष्टि से विशेष चेतावनी है कि यदि जहरीली शराब कथित रूप से एक राज्य से दूसरे राज्य तक कच्चे माल के माध्यम से पहुंच सकती है और फिर स्थानीय स्तर पर तैयार होकर नकली ब्रांड के रूप में बाजार में जा सकती है, तो केवल जिला पुलिस की कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। यह अंतरराज्यीय संगठित अपराध की तरह जांच मांगती है।पुलिस,आबकारी, राजस्व, रसायन एवं उद्योग विभाग, स्वास्थ्य विभाग और साइबर/वित्तीय जांच एजेंसियों के बीच वास्तविक समय में सूचना साझा करने की व्यवस्था आवश्यक है। जिस प्रकार मादक पदार्थों के नेटवर्क की जांच में वित्तीय लेनदेन, मोबाइल संचार और सप्लाई चैन का विश्लेषण किया जाता है, उसी प्रकार अवैध शराब के बड़े नेटवर्क पर भी सटीकता से किया जाना चाहिए। साथियों, एक और महत्वपूर्ण प्रश्न प्रशासनिक जवाबदेही का है। हर त्रासदी के बाद कुछ गिरफ्तारियां,कुछ निलंबन और कुछ छापेमारी होती है;लेकिन कुछ महीनों बाद व्यवस्था फिर सामान्य हो जाती है। यही चक्र सबसे बड़ा खतरा है। आवश्यकता इस बात की है कि किसी क्षेत्र में अवैध शराब पकड़े जाने पर केवल विक्रेता नहीं, बल्कि उस क्षेत्र में लंबे समय तक चल रही अवैध भट्ठियों और वितरण नेटवर्क की प्रशासनिक जवाबदेही भी तय हो। यदि किसी इलाके में वर्षों से अवैध शराब बिक रही है, तो यह पूछना स्वाभाविक है कि स्थानीय खुफिया तंत्र को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? यदि जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि कार्रवाई हुई तो नेटवर्क इतनी सटिका से दोबारा कैसे खड़ा हो गया?
साथियों, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत को इस समस्या को केवल कानून-व्यवस्था के प्रश्न के रूप में नहीं बल्कि पब्लिक हेल्थ और फूड-सेफ्टी जैसी बहु-क्षेत्रीय चुनौती के रूप में देखना होगा।जहरीली शराब का संकट अचानक सामने आने वाली सामूहिक विषाक्तता है, इसलिए प्रत्येक जिले में त्वरित प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल होना चाहिए।अस्पतालों में मेथनॉल विषाक्तता की पहचान तत्काल उपचार,विष-विज्ञान प्रयोगशालाओं की क्षमता और चिकित्सकों के लिए प्रशिक्षण को मजबूत करना होगा। घटना के शुरुआती घंटों में जितनी तेजी से संदिग्ध शराब के नमूने सुरक्षित किए जाएं और मरीजों की पहचान हो,उतनी ही अधिक जानें बचाई जा सकती हैं।इसके साथ ही उपभोक्ता जागरूकता को भीआधुनिक बनाया जाना चाहिए। केवल यह कहना कि अवैध शराब न पीएं पर्याप्त नहीं है। ग्रामीण और शहरी गरीब समुदायों तक स्थानीय भाषाओं में यह जानकारी पहुंचनी चाहिए कि मेथनॉल विषाक्तता के लक्षण क्या हैं,कब तत्काल अस्पताल जाना है, संदिग्ध शराब को छूने या पीने के बाद क्या करना है और किस प्रकार के उत्पादों से विशेष सावधानी बरतनी है। स्वास्थ्य व्यवस्था को भी यह समझना होगा कि जहरीली शराब की घटना में हर घंटा निर्णायक हो सकता है।
साथियों, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भावनगर, कल्लाकुरिची,बोटाद,बिहार और पंजाब की घटनाओं को अलग- अलग राज्य की राजनीतिक घटनाओं के रूप में देखने की भूल नहीं की जानी चाहिए। इनके बीच एक साझा राष्ट्रीय चुनौती दिखाई देती है,अवैध शराब का बाजार मांग,गरीबी, बेरोजगारी कीमत, प्रतिबंध, संगठित अपराध, कमजोर निगरानी और भ्रष्टाचार के मिश्रण से पैदा होता है।इसलिए समाधान भी बहुआयामी होना चाहिए। शराबबंदी हो या नियंत्रित बिक्री दोनों मॉडलों में राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी नागरिकों की जान की सुरक्षा है। नीति का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि वह अवैध और जहरीले बाजार को कितना कमजोर करती है, न कि केवल इस आधार पर कि कानून कितना कठोर है।आज भावनगर में आठ मौतों और दर्जनों लोगों के अस्पताल पहुंचने की खबर केवल गुजरात के लिए चेतावनी नहीं है; यह पूरे भारत के लिए एक राष्ट्रीय अलार्म है। कल्लाकुरिची में 65 मौतें होने के बाद भी यदि कुछ समय बाद किसी दूसरे राज्य में वही कहानी दोहराई जाती है, तो समस्या केवल अपराधियों की नहीं रह जाती, यह संस्थागत सीख की कमी का संकेत बन जाती है। भारत को अब हर जहरीली शराब त्रासदी के बाद ‘कितने गिरफ्तार हुए’ पूछने से आगे बढ़कर यह पूछना होगा कि कितने नेटवर्क खत्म हुए, कितनी अवैध भट्टियां स्थायी रूप से बंद हुईं, मेथनॉल की अवैध आपूर्ति कितनी रोकी गई, कितने अधिकारियों की जवाबदेही तय हुई और अगली त्रासदी रोकने के लिए क्या स्थायी व्यवस्था बनाई गई?
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318
आयकर कर्मचारी महासंघ (ITEF), रांची इकाई द्वारा आज लंच आवर के दौरान पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme – OPS) की बहाली की मांग को लेकर सेंट्रल रेवेन्यू बिल्डिंग, रांची में एक प्रभावशाली प्रदर्शन/सभा आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में लगभग 150 आयकर कर्मचारी एकजुट होकर शामिल हुए और सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक एवं सुरक्षित जीवन के लिए OPS की बहाली की मांग को मजबूती से उठाया।
इस अवसर पर ITEF रांची इकाई के सचिव श्री आभाष नाथ ने कहा, “सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन जीने के लिए OPS के अलावा कुछ भी स्वीकार्य नहीं है। कर्मचारी अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण और उत्पादक वर्षों को सरकार की सेवा में समर्पित करता है। सेवानिवृत्ति के बाद उसे आर्थिक अनिश्चितता नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और निश्चितता मिलनी चाहिए।”
ITEF रांची इकाई के अध्यक्ष मनोज कुमार शुक्ला ने कहा, “OPS के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा। पुरानी पेंशन केवल पेंशन का विषय नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों के सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न है। हम लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपना संघर्ष लगातार जारी रखेंगे।”
रूपक प्रसाद ने कहा, “सभी भारत के कर्मचारियों को एकजुट होकर OPS के लिए लड़ाई जारी रखनी है। कर्मचारियों की एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। देशभर के कर्मचारियों को एकजुट होकर सुरक्षित और सम्मानजनक सेवानिवृत्ति के अधिकार के लिए आवाज बुलंद करनी होगी।”
ITEF रांची इकाई ने स्पष्ट किया कि OPS की मांग किसी कर्मचारी के विरुद्ध नहीं है। यह उस कर्मचारी की सेवानिवृत्ति सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन की मांग है जिसने अपने जीवन के कई दशक सरकारी सेवा को समर्पित किए हैं। लगभग 150 कर्मचारियों की भागीदारी ने यह संदेश स्पष्ट किया कि OPS की मांग को लेकर कर्मचारियों में व्यापक एकता और प्रतिबद्धता है। कर्मचारियों ने एक स्वर में कहा कि सेवानिवृत्ति सेवा का अंत हो सकती है, लेकिन आर्थिक चिंता की शुरुआत नहीं होनी चाहिए।
“एकजुट रहेंगे — संघर्ष जारी रखेंगे।” OPS — सम्मान, सुरक्षा और न्याय के लिए
विधायक के निर्देश पर सिल्ली- रांगामाटी सड़क की मरम्मत शुर।
सरायकेला/ईचागढ़
लगातार हो रही बारिश के कारण सिल्ली–रांगामाटी मुख्य सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। इससे राहगीरों एवं वाहन चालकों को आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।स्थानीय विधायक सबिता महतो को सड़क की जर्जर स्थिति की सूचना मिलते ही उन्होंने त्वरित संज्ञान लिया। विधायक के निर्देश पर ईचागढ़ झामुमो प्रखंड सचिव अमित सिन्हा को सड़क पर बने गड्ढों को तत्काल भरने एवं आवश्यक मरम्मत कार्य कराने का निर्देश दिया गया।
निर्देश के बाद सड़क के गड्ढों की मरम्मत का कार्य शुरू कराया गया।स्थानीय लोगों ने त्वरित कार्रवाई के लिए विधायक श्रीमती सबिता महतो के प्रति आभार जताया। ग्रामीणों ने कहा कि बारिश के दौरान सड़क पर गड्ढों के कारण आवागमन में काफी परेशानी हो रही थी। मरम्मत होने से लोगों को राहत मिलेगी।
उपायुक्त की अध्यक्षता में कौशल विकास एवं आजीविका संवर्धन से संबंधित समीक्षा बैठक संपन्न।
सरायकेला/खरसावां
उपायुक्त नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में कौशल विकास एवं आजीविका संवर्धन से संबंधित समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में संचालित विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रमों, प्रशिक्षण केंद्रों, श्रमिक पंजीकरण, प्लेसमेंट, रोजगार एवं स्वरोजगार से संबंधित कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान विगत समीक्षा बैठकों में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की क्रमवार समीक्षा करते हुए लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने का निर्देश संबंधित पदाधिकारियों को दिया गया। उपायुक्त ने कहा कि कौशल विकास कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण प्रदान करना नहीं, बल्कि प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को उनकी योग्यता एवं उपलब्ध रोजगार अवसरों के अनुरूप रोजगार अथवा स्वरोजगार से जोड़ना है।
उन्होंने निर्देश दिया कि जिले के विभिन्न औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्र के संस्थानों से प्राप्त रिक्त पदों की मांग के अनुरूप ट्रेड-वार प्रशिक्षण की कार्ययोजना तैयार की जाए। औद्योगिक संस्थानों द्वारा लाइव पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई रिक्तियों का नियमित रूप से अनुश्रवण करते हुए संबंधित ट्रेड में प्रशिक्षण प्राप्त स्थानीय युवाओं के प्लेसमेंट हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। साथ ही सभी औद्योगिक संस्थानों को अपनी रिक्तियों की जानकारी पोर्टल पर नियमित रूप से अद्यतन करने के लिए आवश्यक समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया गया।
बैठक में जिले में संचालित सभी 13 प्रशिक्षण केंद्रों एवं प्रखंड स्तर पर संचालित 9 प्रशिक्षण केंद्रों के नियमित संचालन की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने प्रशिक्षण केंद्रों में प्रशिक्षण की गुणवत्ता एवं नियमितता सुनिश्चित करने तथा प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों के रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़ाव के लिए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार कर कार्य करने का निर्देश दिया। प्रशिक्षण पूर्ण कर चुके अभ्यर्थियों का ट्रैकिंग एवं प्लेसमेंट सुनिश्चित करने तथा पात्र अभ्यर्थियों को संबंधित सरकारी कल्याणकारी एवं स्वरोजगार योजनाओं से जोड़ने का निर्देश दिया गया।
काशी साहू कॉलेज, सरायकेला में स्किल पार्क के संचालन हेतु तैयार प्रस्ताव एवं अब तक की प्रगति की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने बॉयज एवं गर्ल्स हॉस्टल, आईटी लैब, कक्षा-कक्ष, सुरक्षा व्यवस्था सहित अन्य आवश्यक तैयारियों को विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप नियमानुसार यथाशीघ्र पूर्ण करने का निर्देश दिया।
उपायुक्त ने राजनगर एवं खरसावां प्रखंड में सिलाई मशीन प्रशिक्षण का कार्य यथाशीघ्र प्रारंभ करने तथा प्रशिक्षण के उपरांत अभ्यर्थियों को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने हेतु संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
PNB RSETI की समीक्षा के क्रम में प्रशिक्षण प्राप्त ऐसे अभ्यर्थियों, जो अब तक रोजगार अथवा स्वरोजगार से नहीं जुड़ पाए हैं, को चिह्नित कर उनसे संपर्क स्थापित करने, काउंसलिंग एवं आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। प्रशिक्षण प्राप्त इच्छुक अभ्यर्थियों का बैंक लिंकेज सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि वे वित्तीय सहायता एवं संबंधित योजनाओं का लाभ प्राप्त कर स्वरोजगार प्रारंभ कर सकें।
बैठक में श्रमिक पंजीकरण की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने विभागीय योजनाओं के अंतर्गत विशेष कैंप आयोजित कर पात्र श्रमिकों से आवेदन प्राप्त करने एवं छूटे हुए श्रमिकों का पंजीकरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को अपने-अपने विभागों में संचालित रोजगार, स्वरोजगार एवं कल्याणकारी योजनाओं का स्थानीय भाषा में व्यापक प्रचार-प्रसार करने तथा पात्र लाभुकों को योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने हेतु प्रभावी कार्रवाई करने को कहा।
नियोजन कार्यालय की समीक्षा के क्रम में उपायुक्त ने जिला नियोजन पदाधिकारी को जिला शिक्षा पदाधिकारी के साथ समन्वय स्थापित कर जिले के विभिन्न विद्यालयों में कक्षा 10वीं, 11वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों के लिए विशेषज्ञों के माध्यम से करियर एवं रोजगार संबंधी काउंसलिंग आयोजित कराने का निर्देश दिया। उन्होंने निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप नियमित रोजगार मेलों का आयोजन करने तथा स्थानीय युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए प्रभावी पहल करने को कहा।
उपायुक्त ने निर्देश दिया कि रोजगार मेला आयोजित किए जाने से पूर्व संबंधित क्षेत्र में स्थानीय भाषा के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक योग्य एवं इच्छुक अभ्यर्थी रोजगार मेले में शामिल होकर उपलब्ध अवसरों का लाभ उठा सकें। रोजगार मेलों में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों के प्रशिक्षण, योग्यता एवं उपलब्ध रिक्तियों के अनुरूप रोजगार से जोड़ने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
उपायुक्त ने कहा कि कौशलयुक्त मानव संसाधन जिले के समग्र एवं सतत विकास की महत्वपूर्ण आधारशिला है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों एवं प्रशिक्षण संस्थानों को आपसी समन्वय एवं उत्तरदायित्व के साथ कार्य करते हुए प्रशिक्षण, प्लेसमेंट एवं स्वरोजगार की पूरी प्रक्रिया को परिणामोन्मुखी बनाने तथा अधिक से अधिक स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी पहल सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
बैठक में श्रम अधीक्षक अविनाश कुमार ठाकुर, जिला नियोजन पदाधिकारी, डीपीएम-जेएसएलपीएस, संबंधित विभागों के पदाधिकारी एवं विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
मनसा पूजा के अवसर पर छोटा गम्हरिया में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़।
सरायकेला/छोटा गम्हरिया
छोटा गम्हरिया में आयोजित मनसा पूजा के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। वर्ष 1963 से आयोजित हो रही इस पारंपरिक पूजा में क्षेत्र के श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल होकर माता मनसा की पूजा-अर्चना कर सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना कर रहे हैं।
पूजा स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है और श्रद्धालु उत्साह के साथ पूजा कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।
मनसा पूजा समिति के सदस्यों ने बताया कि यह पूजा कई वर्षों से क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा का हिस्सा रही है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या इस आयोजन के प्रति लोगों की आस्था को दर्शाती है।
पूजा आयोजन में संस्थापक स्वर्गीय राधानाथ मोदक, स्वर्गीय राखोहरि मोदक एवं स्वर्गीय आदोरी बाला मोदक के योगदान को भी श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। वहीं मंदिर समिति के सदस्यों में शंकर मोदक, दिवाकर मोदक, मनोरंजन मोदक एवं अभिषेक मोदक की महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हैं।
धार्मिक उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा यह आयोजन क्षेत्र के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।