स्वच्छता ही सेवा-2026 के तहत आदित्यपुर में आयुष स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित।
सरायकेला-खरसावां
स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम-2026 के तहत जिला आयुष समिति के तत्वावधान में पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, आदित्यपुर में आयुष स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में विभाग के कर्मियों एवं उनके परिजनों सहित कुल 80 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई।
शिविर में आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी डॉ. सैफी, डॉ. श्वेता सुषमा, डॉ. प्रभा महतो एवं डॉ. शैलेश कुमार द्वारा स्वास्थ्य जांच की गई। इस दौरान रक्तचाप, ब्लड शुगर सहित अन्य आवश्यक स्वास्थ्य जांच की गई तथा जरूरत के अनुसार दवाओं का वितरण किया गया।
शिविर का उद्घाटन अधीक्षण अभियंता ए.के. जायसवाल एवं कार्यपालक अभियंता शिव कुमार दिनकर द्वारा किया गया। इस अवसर पर लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने तथा स्वस्थ जीवनशैली के लिए आयुष पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
शिविर के दौरान योग प्रशिक्षक रमानाथ महतो एवं सस्ती महतो द्वारा योग सत्र आयोजित कर प्रतिभागियों को विभिन्न योगाभ्यास कराए गए तथा नियमित योग के महत्व की जानकारी दी गई।
शिविर के सफल आयोजन में आशा कुमारी, रमा मिंज, संध्या पूर्ति, माधवी पूर्ति एवं मिशेल गुड़िया (सहिया) का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
पितृसत्ता पर नेता प्रतिपक्ष का प्रहार! -स्त्री रूपी देवी की पूजा, बेटी के अधिकार और पितृसत्ता की दीवार! -कानूनों -योजनाओं से नारी सशक्त, फिर सामाजिक सोच बदलने में क्यों बाकी है लंबा सफ़र?
नेता प्रतिपक्ष के पितृसत्ता वाले सवाल ने छेड़ी बड़ी राष्ट्रीय बहस! -नारी शक्ति के लिए कानूनों का कवच,फिर पितृसत्ता की जड़ें क्यों मजबूत -क़्या संसद,सरकार, न्यायपालिका और समाज की भूमिका महत्वपूर्ण? -समग्र व्यापक विश्लेषण
कानून ने दिए अधिकार, योजनाओं ने बढ़ाया सहारा, न्यायपालिका ने खोले समानता के द्वार- क्या पितृसत्तात्मक सामाजिक व्यवस्था बन रही है समानता की राह में चुनौती? -क्या समाज पितृसत्ता की बेड़ियां तोड़ पाएगा? -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
वैश्विक स्तरपर वैश्विक स्तरपर भारत की सांस्कृतिक पहचान में नारी को शक्ति, सृजन और मातृत्व के प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। माँ दुर्गा, काली और शक्ति के विविध स्वरूपों की आराधना इसका उदाहरण है, लेकिन इसी सांस्कृतिक धरातल पर एक विरोधाभास भी दिखाई देता है,एक ओर नारी को देवी मानने की परंपरा और दूसरी ओर परिवार, संपत्ति, निर्णय सामाजिक स्वतंत्रता तथा सार्वजनिक स्थानों में पुरुष- प्रधान सोच।यही बहस 29 सितंबर 2026 को फिर राष्ट्रीय विमर्श में आई। लोकसभा में विपक्ष के नेता नें पितृसत्ता पर प्रहार करते हुए महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चल रहे छात्र आंदोलनों का समर्थन करते हुए कहा कि महिलाओं के विरुद्ध अपराध होने पर समाधान उनकी स्वतंत्रता और आवाजाही सीमित करना नहीं होना चाहिए।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह बताना चाहूंगा कि आधुनिक भारत ने संविधान,संसद,सरकार और न्यायपालिका के माध्यम से इस अंतर को कम करने के अनेक प्रकार क़े प्रयास किए हैं।संविधान का समानता का सिद्धांत, बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार देने वाला हिंदू उत्तराधिकार संशोधन अधिनियम 2005, घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम 2005, दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961, कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संरक्षण संबंधी 2013 का कानून और नारी शक्ति वंदन अधिनियम इसके प्रमुख उदाहरण हैं। 2005 के संशोधन ने बेटी को पुत्र की तरह जन्म से सह दायिकी संपत्ति में समान अधिकार दिया।
साथियों, भारत कीराजनीतिक व्यवस्था ने भी प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में बड़ा संवैधानिक कदम उठाया है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम अर्थात संविधान का 106 वां संशोधन अधिनियम 2023 लोकसभा,राज्य विधान सभाओं और दिल्ली विधान सभा में करीब एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान करता है। हालांकि वास्तविक आरक्षण संबंधित जनगणना के प्रकाशन और उसके आधार पर होने वाले परिसीमन के बाद लागू होना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं में करीब 14.5 लाख निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं,कुल निर्वाचित प्रतिनिधियों का लगभग 46 प्रतिशत हैं।
साथियों, सरकारी योजनाओं का दायरा भी व्यापक है।मिशन शक्ति के अंतर्गत संबल में वन स्टॉप सेंटर,महिला हेल्पलाइन,बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और नारी अदालत शामिल हैं,जबकि समर्थ्य महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यक्रमों को समेटता है।प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में पात्र गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पहले जीवित बच्चे के लिए 5,000 रुपये और दूसरी संतान लड़की होने पर 6,000 रुपये की सहायता का प्रावधान है। अगस्त 2026 तक देश में 991 कार्यरत वन स्टॉप सेंटरों के माध्यम से 15.20 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता दिए जाने की जानकारी सरकार ने दी है। सुकन्या समृद्धि, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना तथा महिलाओं के नाम आवास आवंटन जैसी पहलें भी महिला-केंद्रित नीति का हिस्सा हैं।
साथियों, लेकिन कानून में समानता और सामाजिक व्यवहार में समानता एक ही चीज नहीं हैं। यहीं पितृसत्ता का प्रश्न सामने आता है। पैट्रियार्की शब्द की जड़ यूनानी अवधारणाओं पैटर अर्थात पिता और आर्के अर्थात शासन से जुड़ी मानी जाती है,अर्थात पिता या पुरुष- प्रधान सत्ता।आधुनिक सामाजिक अर्थ में पितृसत्ता उस संरचना को कहा जाता है जिसमें परिवार,संपत्ति आर्थिक संसाधनों और सामाजिक-सार्वजनिक निर्णयों पर पुरुषों का अनुपातहीन नियंत्रण स्थापित हो सकता है और महिलाओं की भूमिका अपेक्षाकृत गौण बनाई जाती है। इसका अर्थ यह नहीं कि प्रत्येक परिवार, पुरुष या सामाजिक परंपरा अनिवार्य रूप से दमनकारी है;बल्कि यह उन संरचनात्मक प्रवृत्तियों का वर्णन है जिनमें लिंग के आधार पर अधिकार और अवसर असमान हो जाते हैं।
साथियों, पितृसत्ता का प्रभाव संपत्ति और आर्थिक निर्भरता से लेकर श्रम-विभाजन, विवाह, महिला की स्वतंत्र आवाजाही, यौनिकता और प्रजनन संबंधी निर्णयों तक दिखाई दे सकता है। कई समाजों में परिवार का नाम पिता से चलना,विवाह के बाद महिला द्वारा पति का उपनाम अपनाना अथवा घरेलू निर्णयों में पुरुष को अंतिम निर्णायक मानना जैसी परंपराएं इसी व्यापक विमर्श का हिस्सा मानी जाती हैं। किंतु हर ऐसी व्यक्तिगत प्रथा को स्वतः कानूनी अपराध नहीं कहा जा सकता। राज्य का संवैधानिक दायित्व वहां अधिक स्पष्ट होता है जहां सामाजिक प्रथा भेदभाव, हिंसा, जबरदस्ती अथवा किसी मौलिक या वैधानिक अधिकार के उल्लंघन में सटीकता से बदलती है।
साथियों, यही बहस 29 सितंबर 2026 को फिर राष्ट्रीय विमर्श में आई। लोकसभा में विपक्ष के नेता का वक्तव्य दक्षिण दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की से कथित सामूहिक बलात्कार, बिहार के जमुई में नाबालिगों के कथित उत्पीड़न और महिला सुरक्षा को लेकर हो रहे प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में आया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने सरकार की आलोचना करते हुए महिलाओं को अपराधों के लिए दंडित करने अथवा उन पर प्रतिबंध लगाने की मानसिकता के विरुद्धआवाज उठाई। यह एक राजनीतिक आरोप और दृष्टिकोण है; सरकार तथा सत्तारूढ़ पक्ष की जवाबदेही पर विपक्ष के दावों को उसी रूप में देखा जाना चाहिए, न कि स्वतः सिद्ध निष्कर्ष के रूप में।जमुई मामले में एक नाबालिग लड़की और उसके साथी के कथित उत्पीड़न के वीडियो ने विवाद पैदा किया और आरोपियों के विरुद्ध पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई की गई; राजनीतिक दलों ने घटना की व्याख्या और सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगाए। दक्षिण दिल्ली के आस्था कुंजप्रकरण में 17 वर्षीय लड़की ने तीन व्यक्तियों पर सामूहिक बलात्कार का आरोप लगाया, जिसके बाद बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने महिला सुरक्षा को लेकर सटीकता से प्रदर्शन किए।
साथियों, यह समस्या केवल भारत तक सीमित नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2026 की जानकारी के अनुसार दुनिया में लगभग तीन में से एक महिला ने अपने जीवनकाल में अंतरंग साथी द्वारा शारीरिक अथवा यौन हिंसा या गैर-साथी द्वारा यौन हिंसा का अनुभव किया है। संगठन लैंगिक असमानता को महिला हिंसा कीमहत्वपूर्ण जड़ों में गिनता है। इसलिए पीड़िता से यह पूछना कि वह कहां गई थी, क्या पहना था या किस समय बाहर थी, अपराधी की जवाबदेही से ध्यान हटाकर पीड़िता को दोष देने वाली मानसिकता को बढ़ा सकता है।
साथियों, न्यायपालिका ने भी लैंगिक समानता के प्रश्न पर महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किए हैं। मदुरै जिले के नल्लुथेवनपट्टी स्थित दुर्गा मंदिर में पिन्नियक्कल ने अपने पिता की मृत्यु के बाद वंशानुगत पुजारी पद पर दावा किया था। मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति के. चंद्रू ने 2008 में उनके पक्ष में निर्णय देते हुए लैंगिक पूर्वाग्रह से मुक्त धार्मिक वेदी की संवैधानिक भावना पर जोर दिया।इसी क्रम में 2018 का सबरीमाला फैसला ऐतिहासिक रहा। पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 4:1 बहुमत से 10 से 50 वर्ष आयु की महिलाओं के मंदिर प्रवेश पर रोक को असंवैधानिक माना। बहुमत ने कहा कि अनुच्छेद 25 के अंतर्गत धार्मिक आस्था और उपासना की स्वतंत्रता महिलाओं को भी उपलब्ध है तथा महिलाओं का बहिष्कार आवश्यक धार्मिक प्रथा सिद्ध नहीं हुआ। न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा ने असहमति व्यक्त करते हुए धार्मिक समुदाय की स्वायत्तता और न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा पर अलग दृष्टिकोण रखा। इसलिए यह फैसला समानता और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संवैधानिक संतुलन की बहस का भी सटीकता से महत्वपूर्ण उदाहरण है।
साथियों राजनीतिक प्रतिनिधित्व में भी केवल आरक्षण पर्याप्त नहीं है। निर्वाचित महिला प्रतिनिधि के स्थान पर पति या पुरुष रिश्तेदार द्वारा वास्तविक सत्ता चलाने की शिकायतें लंबे समय से सरपंच-पति अथवा प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व की समस्या के रूप में उठती रही हैं। केंद्र सरकार ने फरवरी 2026 में संसद को बताया कि पंचायत स्थानीय शासन का राज्य-विषय है और निर्वाचित महिलाओं की स्वतंत्र निर्णय क्षमता से संबंधित कार्रवाई मुख्यतः राज्यों के क्षेत्राधिकार में आती है; साथ ही राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के अंतर्गत निर्वाचित प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण का समर्थन किया जा रहा है।
अतः पितृसत्ता को समाप्त करने के लिए कोई एक ऐसा दंड कानून बनाना सरल नहीं है जो हर पारिवारिक- सामाजिक व्यवहार को नियंत्रित कर दे। बेहतर रास्ता यह है कि जहां पितृसत्तात्मक व्यवहार हिंसा,दहेज,घरेलू उत्पीड़न,यौन अपराध, संपत्ति से वंचित करने या कार्यस्थल पर उत्पीड़न में परिवर्तित होता है वहां मौजूदा कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन हो; वहीं गैर-अपराधिक सामाजिक पूर्वाग्रहों को शिक्षा, आर्थिक स्वावलंबन, बाल्यावस्था से लैंगिक संवेदनशीलता, पुरुषों और लड़कों की भागीदारी तथा जन-जागरूकता से चुनौती दी जाए। यौन अपराधों के मामलों में पीड़ित-केंद्रित जांच, पर्याप्त विशेष एवं त्वरित अदालतें, समयबद्ध फॉरेंसिक जांच और गवाह-सुरक्षा भी महत्वपूर्ण हैं।
अतःअगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि भारत के सामने चुनौती कानूनों की अनुपस्थिति मात्र नहीं,बल्कि संवैधानिक समानता को सामाजिक व्यवहार में उतारने की है।देवी की आराधना और बेटी की वास्तविक स्वतंत्रता के बीच यदि अंतर बना रहे,तो महिला सशक्तिकरण अधूरा रहेगा।सरकार कानून बना सकती है, पुलिस अपराध रोक सकती है,न्यायपालिका अधिकारों की रक्षा कर सकती है और संसद प्रतिनिधित्व का रास्ता खोल सकती है;लेकिन घर,विद्यालय,समुदाय और सामाजिक संस्कारों में स्त्री को स्वतंत्र निर्णयकर्ता मानने की मानसिकता समाज को स्वयं विकसित करनी होगी। नारी सशक्तिकरण का अगला चरण केवल ‘महिला की सुरक्षा’ नहीं, बल्कि उसकी स्वतंत्रता, गरिमा, समान अवसर और निर्णय लेने की वास्तविक शक्ति सुनिश्चित करना है।
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, गम्हरिया में 3-बेड वाले डायलिसिस सेंटर का उपायुक्त ने किया शुभारंभ।
सरायकेला/गम्हरिया
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), गम्हरिया में The Hans Foundation के सहयोग से स्थापित 3-बेड वाले डायलिसिस सेंटर का शुभारंभ उपायुक्त श्री नितिश कुमार सिंह के द्वारा किया गया। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. सरयू प्रसाद सिंह, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी (MOIC), गम्हरिया एवं The Hans Foundation के अन्य प्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।
उक्त डायलिसिस सेंटर के माध्यम से क्षेत्र के जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध होगी। इस अवसर पर उपायुक्त ने कहा कि सरायकेला सदर अस्पताल में पूर्व से ही मरीजों को निःशुल्क डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। अब गम्हरिया में भी यह सुविधा उपलब्ध होने से क्षेत्र के जरूरतमंद डायलिसिस मरीजों को अपने निकट निःशुल्क उपचार की सुविधा प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार एवं मरीजों को सुगम स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में आगे भी राजनगर, तिरुलडीह समेत अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में डायलिसिस सेंटर प्रारंभ करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
उपायुक्त ने CHC की विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाओं का किया निरीक्षण
डायलिसिस सेंटर के शुभारंभ के उपरांत उपायुक्त द्वारा CHC, गम्हरिया के विभिन्न वार्डों, महिला एवं पुरुष मरीज वार्ड, ओपीडी, ऑपरेशन कक्ष, दवा भंडार कक्ष, प्रयोगशाला सहित विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं का अवलोकन किया गया। निरीक्षण के क्रम में पूर्व में दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुपालन तथा सुधार से संबंधित बिंदुओं की जानकारी ली गई।
उपायुक्त ने मरीजों एवं आमजनों को सुगम, गुणवत्तापूर्ण एवं बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं का नियमित अनुश्रवण एवं आवश्यक सुधार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
निरीक्षण के क्रम में CHC परिसर की टूटी हुई चारदीवारी की शीघ्र मरम्मत कराने का निर्देश दिया गया। साथ ही केंद्र परिसर में नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने तथा मरीजों एवं उनके परिजनों के लिए समुचित एवं सुविधाजनक बैठने की व्यवस्था उपलब्ध कराने को कहा गया। मरीजों के साथ सहयोगात्मक एवं संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया।
उपायुक्त ने केंद्र में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं एवं सरकार की जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी आमजनों तक प्रभावी रूप से पहुंचाने के लिए परिसर के विभिन्न प्रमुख स्थानों पर बड़े एवं स्पष्ट अक्षरों में आवश्यक सूचना प्रदर्शित करने का निर्देश दिया। साथ ही उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाएं निःशुल्क हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित करने को कहा गया, ताकि मरीजों एवं उनके परिजनों को स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी सहज रूप से प्राप्त हो सके।
निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध संसाधनों एवं व्यवस्थाओं का समुचित उपयोग सुनिश्चित करने तथा आमजनों को गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए संबंधित पदाधिकारियों एवं चिकित्सकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
दुर्गा पूजा त्यौहार के मद्देनजर गम्हरिया-आदित्यपुर क्षेत्र में शराब की अड्डेबाजी के विरुद्ध उत्पाद विभाग एवं पुलिस प्रशासन का संयुक्त अभियान।
सरायकेला-खरसावां
आगामी दुर्गा पूजा के मद्देनजर उपायुक्त, सरायकेला-खरसावां के निर्देशानुसार संध्या उत्पाद विभाग एवं गम्हरिया थाना की संयुक्त टीम द्वारा छोटा गम्हरिया एवं ऊषा मार्टिन क्षेत्र में शराब की अड्डेबाजी के विरुद्ध अभियान चलाया गया।
अभियान के दौरान सड़क किनारे स्थित होटल एवं खाद्य स्टॉल संचालकों को अनावश्यक जमावड़ा को बढ़ावा नहीं देने तथा प्रतिष्ठानों के आसपास शराब का सेवन एवं अड्डेबाजी नहीं होने देने का निर्देश दिया गया। सार्वजनिक स्थलों एवं मैदानों में शराब का सेवन कर रहे लोगों को वहां से हटाया गया। इसके अतिरिक्त आदित्यपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत केडिया लाल बिल्डिंग एवं बिको मोड़ क्षेत्र में भी गश्ती कर स्थिति का जायजा लिया गया।
शराब की अड्डेबाजी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश, नियमित रूप से चलेगा अभियान
उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सार्वजनिक स्थलों, होटल एवं खाद्य प्रतिष्ठानों के आसपास शराब की अड्डेबाजी को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अड्डेबाजी में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा ऐसे स्थलों पर नियमित निगरानी एवं अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है।
उपायुक्त ने आमजनों से दुर्गा पूजा के दौरान शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने तथा विधि-व्यवस्था के संधारण में जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि शराब की अड्डेबाजी एवं अन्य असामाजिक गतिविधियों की सूचना तत्काल संबंधित प्रशासनिक अथवा पुलिस पदाधिकारियों को दें।
उद्योग सचिव, झारखण्ड अरवा राजकमल की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा एवं सुगम यातायात परिचालन को लेकर उच्चस्तरीय बैठक संपन्न।
सरायकेला/खरसावां
सरायकेला-खरसावां जिले में सड़क सुरक्षा एवं सुगम यातायात परिचालन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उद्योग सचिव, झारखंड सरकार अरवा राजकमल की अध्यक्षता में परिसदन सभागार, सरायकेला में बैठक आयोजित की गई।
बैठक में उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी नितिश कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक मनोज सर्वांगीयारी, उद्योग विभाग की अपर सचिव प्रीति रानी, महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र ( जीएमडीसी ) रविशंकर प्रसाद, जिला परिवहन पदाधिकारी शंकराचार्य सामद, सिविल सर्जन डॉ. सरयू प्रसाद सिंह सहित संबंधित विभागीय पदाधिकारी एवं विभिन्न औद्योगिक प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक में झारखंड उच्च न्यायालय के निर्देश के आलोक में औद्योगिक क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा एवं यातायात परिचालन की समीक्षा की गई। विशेष रूप से औद्योगिक प्रतिष्ठानों के आसपास मुख्य सड़कों पर भारी वाहनों के अनियंत्रित एवं अनावश्यक ठहराव से यातायात परिचालन प्रभावित होने, भारी वाहनों के लिए पर्याप्त एवं सुव्यवस्थित पार्किंग की उपलब्धता, पार्किंग स्थलों पर वाहन चालकों के लिए आवश्यक सुविधाएं तथा मुख्य सड़कों पर अनधिकृत रूप से खड़े वाहनों के कारण उत्पन्न यातायात संबंधी समस्याओं के समाधान को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
चिलियामा क्षेत्र में रूंगटा स्टील प्लांट के बाहर मुख्य सड़क पर ट्रकों के खड़े रहने से संबंधित जनहित याचिका के संदर्भ में भी आवश्यक बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया। औद्योगिक प्रतिष्ठानों को अपने परिसर में आने वाले भारी वाहनों के लिए पर्याप्त एवं सुव्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया, ताकि मुख्य सड़कों पर वाहनों के अनावश्यक ठहराव को कम करते हुए यातायात का सुचारु एवं सुरक्षित परिचालन सुनिश्चित किया जा सके।
पार्किंग स्थलों को सुव्यवस्थित एवं सुविधायुक्त रखने का निर्देश
औद्योगिक संस्थान रूंगटा माइंस (राजनगर) की पार्किंग व्यवस्था के निरीक्षण के क्रम में संबंधित अधिकारियों एवं औद्योगिक प्रतिष्ठान के प्रतिनिधियों को पार्किंग स्थल को सुव्यवस्थित रखने तथा वाहन चालकों की सुविधा के अनुरूप वहां आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। साथ ही, पार्किंग स्थल पर वाहनों के सुचारु आवागमन एवं सुरक्षित ठहराव की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।
मुख्य सड़कों पर अनावश्यक एवं अनधिकृत रूप से खड़े वाहनों के कारण यातायात परिचालन प्रभावित न हो, इसके लिए ऐसे वाहनों के विरुद्ध नियमित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ मुख्य सड़कों पर यातायात परिचालन की नियमित निगरानी करते हुए अनावश्यक रूप से खड़े वाहनों को व्यवस्थित कराने तथा सुगम यातायात परिचालन सुनिश्चित करने को कहा गया।
सीएचसी राजनगर का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सुविधाओं का लिया जायजा
राजनगर निरीक्षण के क्रम में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, राजनगर का निरीक्षण कर उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं एवं चिकित्सा व्यवस्था का जायजा लिया गया। इस दौरान डेडिकेटेड ट्रॉमा सेंटर के प्रस्ताव की समीक्षा की गई तथा संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। दुर्घटना के पश्चात प्रभावित लोगों को त्वरित एवं समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने तथा प्रस्ताव के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
उद्योग सचिव अरवा राजकमल ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में सुगम एवं सुरक्षित यातायात परिचालन के लिए प्रशासन, पुलिस, परिवहन विभाग एवं औद्योगिक प्रतिष्ठानों के बीच प्रभावी समन्वय आवश्यक है। उन्होंने औद्योगिक प्रतिष्ठानों को अपने परिसर में आने वाले भारी वाहनों के लिए पर्याप्त एवं व्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था विकसित करने, वाहन चालकों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा मुख्य सड़कों पर अनावश्यक रूप से वाहनों के ठहराव को नियंत्रित करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
बैठक में औद्योगिक क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा, सुगम एवं व्यवस्थित यातायात परिचालन, भारी वाहनों के लिए पर्याप्त एवं सुव्यवस्थित पार्किंग, पार्किंग स्थलों पर वाहन चालकों के लिए आवश्यक सुविधाएं, मुख्य सड़कों पर अनावश्यक रूप से खड़े वाहनों को व्यवस्थित करने तथा संबंधित विभागों एवं औद्योगिक प्रतिष्ठानों के बीच समन्वय स्थापित कर यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।
शब्बीर मर्डर केस में बड़ी कार्रवाई: लंबे समय से फरार मुख्य आरोपी फरहान खान पुलिस की गिरफ्त में।
सरायकेला/कपाली
सरायकेला-खरसावां: कपाली ओपी इलाके में हुए चर्चित शब्बीर हत्याकांड के एक प्रमुख फरार आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बाहर था।
गिरफ्तारी के बाद कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया।
कपाली ओपी प्रभारी अविनाश कुमार के मुताबिक, जनवरी 2025 में शब्बीर पर धारदार हथियार से सुनियोजित हमला किया गया था, जिसमें उसकी मौत हो गई थी। घटना के बाद पुलिस ने अभियान चलाकर इस केस में शामिल ज्यादातर आरोपियों को पहले ही पकड़कर जेल भेज दिया था।
लेकिन एक मुख्य आरोपी घटना के दिन से ही फरार था और लगातार ठिकाने बदल रहा था। पकड़े गए युवक की पहचान ताजनगर निवासी मोहम्मद फरहान उर्फ फरहान खान (19), पिता स्व. मुमताज खान के रूप में हुई है।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि खुफिया जानकारी और टेक्निकल सर्विलांस की मदद से टीम ने छापा मारकर उसे पकड़ा। उन्होंने कहा कि इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए फरार अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
वीर बिरसा मुंडा स्टेडियम बचाओ उलगुलान सफल, शिबू सोरेन की प्रतिमा का निर्णय वापस; 29 सितंबर को सरायकेला में होगी समीक्षा बैठक।
सरायकेला-खरसावां
‘वीर बिरसा मुंडा स्टेडियम बचाओ उलगुलान’ को आदिवासी समाज के एकजुट प्रयास से सफलता मिली है। आंदोलन के दबाव में प्रशासन ने स्टेडियम परिसर में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय वापस ले लिया है, जिसका आंदोलनकारियों ने स्वागत किया है।
इस सफलता की समीक्षा और आगे की रणनीति तय करने के लिए मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को सुबह 10:00 बजे, बिरसा मुंडा स्टेडियम, सरायकेला में समीक्षा बैठक बुलाई गई है। बैठक में आंदोलन की समीक्षा के साथ-साथ स्टेडियम से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा होगी।
आयोजकों ने आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाने वाले सभी आंदोलनकारियों की उपस्थिति अनिवार्य बताई है। साथ ही जो साथी अब तक आंदोलन से नहीं जुड़ पाए हैं, उनसे भी बैठक में शामिल होने की अपील की गई है।
बैठक में अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 11 सदस्यीय समन्वय टीम का गठन किया गया है। यह टीम विभिन्न संगठनों, समाज के पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, मीडिया और राजनीतिक दलों से समन्वय कर लोगों को बैठक से जोड़ेगी।
समन्वय की जिम्मेदारी इस प्रकार सौंपी गई है: • सावित्री कुदादा – AHSMS केंद्रीय अध्यक्ष कृष्णा बोदरा के सभी पदाधिकारियों से समन्वय
• विष्णु बानरा, राष्ट्रीय अध्यक्ष कोल सेना – AHSMS केंद्रीय अध्यक्ष मुकेश बिरुआ एवं AHSYM के पदाधिकारियों से समन्वय
• दिवाकर सरदार – सीनी-उपरदुगनी क्षेत्र के आदिवासी भूमिज/मुंडा समाज से समन्वय
• रहिन्द्र सरदार एवं श्री जगदीश सरदार – चांडिल अनुमंडल/पूर्वी सिंहभूम क्षेत्र से समन्वय
• महेश मिंज – सरायकेला-खरसावां/पश्चिमी सिंहभूम जिला से समन्वय
• साधु बानरा, DESHAULI फाउंडेशन – खूंटी/रांची जिला से समन्वय
• कोल झारखंड बोदरा, अध्यक्ष मानकी मुंडा – कोल्हान के डाकुवा/मुंडा/मानकी से समन्वय
• गणेश गगराई, अध्यक्ष आदिवासी हो समाज महासभा – कोल्हान के मुखिया/पंचायत समिति/जिला परिषद सदस्यों से समन्वय
• वीर सिंह सीजुई – कोल्हान के प्रिंट मीडिया/यूट्यूबर/ब्लॉगर्स से समन्वय
• विष्णु सरदार – सभी राजनीतिक दलों से समन्वय
• सावन सोय, अध्यक्ष ऑल इंडिया हो लैंग्वेज एक्शन कमेटी – 10 सदस्यीय टीम से समन्वय कर 28 सितंबर तक उपस्थिति सूची और मुख्य एजेंडा तैयार करेंगे। एजेंडा मानसिंह मुंडा, सुखराम सोय और रामचंद्र मुंडा के साथ मिलकर तैयार किया जाएगा।
परिसदन सभागार सरायकेला में झारखंड विधानसभा की प्राक्कलन समिति की अध्यक्षता में विकास योजनाओं की विस्तृत समीक्षा बैठक संपन्न।
सरायकेला-खरसावां
झारखंड विधानसभा की प्राक्कलन समिति का सरायकेला-खरसावां जिले में दौरा हुआ। इस क्रम में सरायकेला परिसदन सभागार में समिति के माननीय सभापति हेमलाल मुर्मू की अध्यक्षता में जिले में संचालित विभिन्न विकास योजनाओं एवं विभागीय कार्यों की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में समिति के माननीय सदस्य नागेंद्र महतो, माननीय सदस्य मथुरा प्रसाद महतो एवं माननीय सदस्य सोमेश सोरेन उपस्थित रहे तथा सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां विधानसभा क्षेत्र के माननीय विधायक श्री दशरथ गागराई उपस्थित रहे।
बैठक से पूर्व समिति के माननीय सभापति एवं माननीय सदस्यों, माननीय विधायक का उपायुक्त नितिश कुमार सिंह एवं पुलिस अधीक्षक मनोज सर्वांगीयारी द्वारा पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। साथ ही परियोजना निदेशक, ITDA उषा मुंडू, अपर उपायुक्त जयवर्धन कुमार समेत विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, कार्यपालक अभियंता एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में विभिन्न विकास योजनाओं की समीक्षा के क्रम में संबंधित विभागों के पदाधिकारियों एवं कार्यपालक अभियंताओं को निर्देश दिया गया कि जिले में संचालित योजनाओं की समुचित जानकारी स्थानीय जनप्रतिनिधियों, यथा माननीय विधायक एवं माननीय सांसद को भी उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि उनके स्तर से भी समय-समय पर योजनाओं की समीक्षा की जा सके तथा योजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कराने के लिए आवश्यक प्रयास किए जा सकें। पूर्ण हो चुकी योजनाओं का यथाशीघ्र स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में उद्घाटन एवं नई योजनाओं का शिलान्यास कराने की कार्रवाई सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया।
लंबित योजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए सभी कार्यदायी एजेंसियों के कार्यपालक अभियंताओं को योजनाओं की नियमित निगरानी करने तथा जवाबदेही तय करते हुए कार्यों को निश्चित समय में पूर्ण कराने का निर्देश दिया गया।
सभी कार्यपालक अभियंताओं को लंबित योजनाओं पर विशेष निगरानी रखने, संवेदकों के साथ नियमित बैठक करने तथा योजनाओं का स्थल निरीक्षण कर कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। राज्य संपोषित योजनाओं में निर्धारित समय-सीमा से विलंबित कार्यों को दिसंबर माह तक पूर्ण करने का निर्देश दिया गया। साथ ही, ऐसे संवेदक जिनके द्वारा विभिन्न विभागों में आवंटित कार्य निर्धारित समय पर पूर्ण नहीं किए जा रहे हैं अथवा अनावश्यक विलंब किया जा रहा है, उन्हें आगामी योजनाओं में कार्य नहीं देने तथा विभागीय दिशा-निर्देशों के आलोक में नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
जिन योजनाओं में काफी विलंब से कार्य संचालित हैं, उनके संबंध में संबंधित विभाग के कार्यपालक अभियंताओं को कार्यशैली में सुधार लाने, संवेदकों के साथ समन्वय स्थापित कर योजनाओं को यथाशीघ्र पूर्ण कराने का निर्देश दिया गया। साथ ही, ऐसी योजनाओं की उपायुक्त स्तर से नियमित समीक्षा करते हुए आवश्यक ठोस निर्णय लेने एवं लंबित कार्यों को शीघ्र पूर्ण कराने की कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
खनन एवं भूतत्व की समीक्षा के क्रम में खनन गतिविधियों से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित ग्राम एवं टोलों का नियमानुसार विकास सुनिश्चित करने तथा अवैध खनन एवं परिचालन के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।
पर्यटन विकास की समीक्षा के क्रम में जिले में पर्यटन विकास की दिशा में सकारात्मक पहल करने तथा पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की सुविधा के अनुरूप आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के क्रम में सदर अस्पताल, सीएचसी समेत अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सक एवं आवश्यक दल-बल के साथ उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। सभी स्वास्थ्य केंद्रों में लोगों को सुगम एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाएं, यह सुनिश्चित करने को कहा गया। मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी योजना समेत सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ योग्य लोगों तक पहुंचाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
स्कूली शिक्षा विभाग की समीक्षा के क्रम में विद्यालयों में खेल-खेल में शिक्षा, स्वच्छता एवं बच्चों को गुड बिहेवियर का ज्ञान देने की दिशा में आवश्यक पहल सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
इसके अतिरिक्त विभिन्न विभागों की समीक्षा के क्रम में निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूर्ण करने तथा विभाग की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत पात्र लाभुकों तक पहुंचाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। लंबित कार्यों एवं योजनाओं में अनावश्यक विलंब नहीं हो, कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण हों तथा योजनाओं के निर्धारित उद्देश्यों की पूर्ति सुनिश्चित हो, इस दिशा में विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रभावी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।
बैठक के अंत में अपर उपायुक्त जयवर्धन कुमार द्वारा माननीय सभापति एवं समिति के अन्य माननीय सदस्यों द्वारा विभिन्न विभागों की समीक्षा के क्रम में दिए गए दिशा-निर्देशों एवं सुधार संबंधी बिंदुओं पर आवश्यक कार्रवाई करते हुए सभी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आश्वस्त किया गया। साथ ही, समिति को अनुपालन से अवगत कराने की बात कही गई।
तीन दिन की बैंक महा हड़ताल :पांच-दिवसीय बैंकिंग से कर्मचारियों के बढ़ते बोझ तक -सरकार,बैंककर्मी और जनता के बीच क्यों गहराया टकराव?
राष्ट्रव्यापी बैंक महाहड़ताल 28-30 सितंबर 2026: क्या थमेगी देश की वित्तीय धड़कन? -8 लाख कर्मचारी आंदोलन की राह पर -जनता -कारोबार और अर्थव्यवस्था पर कितना असर? 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन का बड़ा अल्टीमेटम -समग्र व्यापक विश्लेषण
भारतीय बैंकिंग के सामने बड़ा सवाल -काम का बढ़ता बोझ या कर्मचारियों की घटती ताकत? 8 लाख बैंक कर्मियों की 3 दिवसीय बैंक महा हड़ताल ने खोली भारतीय बैंकिंग व्यवस्था की बड़ी बहस -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
वैश्विक स्तरपर भारत का मामला गूंज उठा हैक़ि बैंकिंग क्षेत्र 28 से 30 सितंबर 2026 के बीच एक बड़े औद्योगिक टकराव की दहलीज पर खड़ा है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है और मांगों का समाधान नहीं होने पर 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी भी दी है।यूएफबीयू सात बैंक यूनियनों का साझा मंच है औरउसके अनुसार लगभग आठ लाख कर्मचारी- अधिकारी तथा बैंकिंग कार्यबल का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा उसके दायरे में आता है।यह आंदोलन इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि 30 सितंबर बैंकों की छमाही लेखा- बंदी का दिन है। ऐसे समय में लगातार तीन कार्यदिवस शाखा-स्तरीय गतिविधियों में व्यवधान का असर केवल बैंक कर्मचारियों और ग्राहकों तक सीमित न रहकर व्यापार, चेक निपटान, नकदी प्रबंधन,ऋण संबंधी प्रक्रियाओं और व्यापक वित्तीय गतिविधियों तक पहुंच सकता है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र मीडिया में आई खबरों के अनुसार बताना चाहूंगा क़ि,हड़ताल के केंद्र में सबसे बड़ी मांग पांच-दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की है। वर्तमान व्यवस्था में बैंक दूसरे और चौथे शनिवार को बंद रहते हैं, जबकि पहले, तीसरे और जहां लागू हो पांचवें शनिवार को शाखाएं खुलती हैं।यूनियनें सभी शनिवारों को अवकाश घोषित करने की मांग कर रही हैं।उनका तर्क है कि सोमवार से शुक्रवार तक दैनिक कार्य- अवधि बढ़ाकर इसकी भरपाई की जा सकती है,जिससे ग्राहकों के लिए कुल बैंकिंग समय में उल्लेखनीय कमी आवश्यक नहीं होगी। मार्च 2024 के वेतन संशोधन समझौते के दौरान भारतीय बैंक संघ और यूनियनों के बीच पांच-दिवसीय बैंकिंग पर सहमति बनी और प्रस्ताव सरकारी स्वीकृति के लिए भेजा गया था; लेकिन अंतिम सरकारी मंजूरी और आवश्यक अधिसूचना अभी लंबित है। यही वह बिंदु है जहां दोनों पक्षों की व्याख्या अलग हो जाती है,यूनियनें इसे सहमत मांग के क्रियान्वयन में दो वर्ष से अधिक की देरी मानती हैं,जबकि सरकार का कहना है कि प्रस्ताव विचाराधीन है और अंतिम निर्णय के लिए विभिन्न हितधारकों के पहलुओं को देखना आवश्यक है।
साथियों, विवाद का दूसरा बड़ा मुद्दा प्रदर्शन- आधारित प्रोत्साहन योजना यानी पीएलआई रहा है।वर्ष 2020 के वेतन समझौते से जुड़ी प्रोत्साहन व्यवस्था के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के लिए संशोधित योजना को लेकर अधिकारी संगठनों ने आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने के बाद सरकार ने पीएलआई योजना को फिलहाल स्थगित रखने का निर्णय लिया है। वित्त मंत्रालय ने 21 सितंबर को स्पष्ट किया कि यूनियनों की दो प्रमुख मांगों पांच- दिवसीय बैंकिंग और पीएलआई वापस लेने,में से पीएलआई को स्थगित करके एक प्रमुख मुद्दे कासमाधान किया जा चुका है;अब मुख्य विवाद पांच- दिवसीय कार्य सप्ताह पर केंद्रित है। सरकार ने यूनियनों से आंदोलन स्थगित कर बातचीत जारी रखने की अपील भी की है। पेंशन संशोधन, समान पेंशन व्यवस्था तथा कर्मचारियों की कुछ अन्य सेवा-शर्तें भी व्यापक श्रमिक असंतोष का हिस्सा रही हैं।
साथियों, इस आंदोलन के पीछे कार्यबल और बढ़ते काम के बोझ का प्रश्न भी गंभीर है।सरकारी आँकड़ों के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कर्मचारियों की संख्या 2020- 21 में लगभग 7.90 लाख थी,जो 2024- 25 में घटकर करीब 7.58 लाख रह गई, अर्थात लगभग 32 हजार अथवा करीब 4 प्रतिशत की कमी।जून 2025 तक इन बैंकों में 32,567 पद रिक्त थे,जिनमें 17,500 अधिकारी 12,861 लिपिक और 2,206 अधीनस्थ कर्मचारी पद शामिल थे।हालांकि सरकार का पक्ष है कि आवश्यक कार्यबल का लगभग 96 प्रतिशत उपलब्ध था, पिछले पांच वर्षों में 1,48,687 कर्मचारियों की भर्ती की गई और 2025-26 के लिए 48,570 कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया भी शुरू की गई थी। इसलिए कर्मचारियों की कमी के प्रश्न पर भी दो दृष्टिकोण हैं,यूनियनें बढ़ते कारोबार और लक्ष्य के मुकाबले अपर्याप्त मानव संसाधन का मुद्दा उठाती हैं,जबकि सरकार उपलब्ध कार्यबल और जारी भर्तियों की ओर संकेत करती है। साथियों,बैंक कर्मचारियों के मानसिक दबाव का मुद्दा फरवरी 2026 में राज्यसभा तक पहुंचा था। केरल से सीपीआई (एम) सांसद ने सदन में दावा किया कि पिछले एक दशक में काम के दबाव,उत्पीड़न और अत्यधिक लक्ष्यों जैसी परिस्थितियों से जुड़े मामलों में करीब 500 बैंक कर्मचारियों ने आत्महत्या की।उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में हजारों रिक्त पदों और कर्मचारियों पर बढ़ते दबाव का भी उल्लेख किया तथा गुजरात, तमिलनाडु और केरल के कुछ मामलों का उदाहरण दिया।यहां सावधानी आवश्यक है,करीब 500 आत्महत्याओं की संख्या को आरबीआई अथवा सरकार द्वारा जारी प्रमाणित राष्ट्रीय आधिकारिक आँकड़े के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा; यह संसद में सांसद द्वारा उठाया गया दावा है,जिसकी पृष्ठभूमि में बैंक कर्मचारियों की कार्यस्थितियों पर पहले प्रकाशित रिपोर्टें भी रही हैं।
साथियों, तीन दिवसीय हड़ताल का सर्वाधिक प्रत्यक्ष प्रभाव सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शाखाओं में दिखाई देने की संभावना है।नकद जमा-निकासी,चेक समाशोधन खाते से संबंधित दस्तावेजी कार्य,ऋण प्रक्रियाएं और शाखा- आधारित सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।30 सितंबर छमाही समापन का दिन होने के कारण लेखा- मिलान,प्रावधान तथा कोष और बाजार संबंधी गतिविधियों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। हालांकि इसका अर्थ पूरे भारतीय बैंकिंग तंत्र का ठप हो जाना नहीं है। यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और एटीएम जैसी डिजिटल सेवाओं के सामान्य रूप से उपलब्ध रहने की अपेक्षा है।निजी बैंकों पर प्रभाव अपेक्षाकृत सीमित रहने की संभावना है, हालांकि जिन निजी बैंकों में संबंधित यूनियनों के सदस्य हैं वहां कुछ स्थानीय व्यवधान संभव है। सहकारी बैंकों पर प्रभाव भी उनकी यूनियन-संबद्धता और स्थानीय भागीदारी पर निर्भर करेगा; अतः सभी निजी और सहकारी बैंक स्वतः तीन दिन बंद रहेंगे, ऐसा कहना सही नहीं होगा।
साथियों सरकार ने संभावित परेशानी कम करने के लिए एक असाधारण कदम उठाते हुए रविवार 27 सितंबर 2026 को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को सामान्य रूप से खोलने का निर्णय लिया रविवार को बैंक के खुली रही। रिजर्व बैंक ने शाखाओं, कार्यालयों, एटीएम से संबद्ध शाखाओं और मुद्रा-कोषों को पूर्ण संचालन की अनुमति दी थीं।सरकार का तर्क था कि 26 सितंबर के सप्ताहांत अवकाश और 28-30 सितंबर की प्रस्तावित हड़ताल के बीच रविवार भी बंद रहने पर जनता को लंबी अवधि तक शाखा सेवाओं में व्यवधान झेलना पड़ सकता था। लेकिन इस निर्णय का कर्मचारी संगठनों के एक हिस्से ने विरोध किया था।ऑल संभवतः इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन ने अपने सदस्यों से रविवार को काम पर न आने की सलाह देते हुए कहा था कि 27 सितंबर औद्योगिक व्यवस्था के तहत अवकाश का दिन है और पहले से तय सेवा-शर्तों में एकतरफा बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।
साथियों यह आंदोलन भारतीय बैंकिंग व्यवस्था के सामने एक व्यापक प्रश्न खड़ा करता है, जब डिजिटल बैंकिंग खातों, ऋण, सरकारी योजनाओं बीमा-वितरण और वित्तीय समावेशन के कारण बैंकों की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं, तब कर्मचारियों के कार्य-जीवन संतुलन और ग्राहक-सुविधा के बीच नया संतुलन कैसे बनाया जाए? पांच-दिवसीय बैंकिंग के समर्थक कहते हैं कि भारतीय बैंकिंग को अन्य आधुनिक वित्तीय संस्थानों की कार्य-संस्कृति के अनुरूप लाने का समय आ गया है; दूसरी ओर सरकार को ग्राहक पहुंच,ग्रामीण बैंकिंग, कार्य -घंटों और अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव सहित कई पक्षों का आकलन करना है।उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों से कर्मचारियों की संख्या में 2020-21 से 2024-25 के बीच लगभग चार प्रतिशत गिरावट जरूर दिखाई देती है, लेकिन 2026 तक बैंक खातों, मुनाफे और काम में कितने प्रतिशत की वृद्धि हुई” का एकल समेकित तुलनीय आरबीआई आँकड़ा उपलब्ध स्रोतों में स्पष्ट रूप से प्रमाणित नहीं मिला; इसलिए अपुष्ट प्रतिशत जोड़ना उचित नहीं होगा।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरी विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि यदि कहा जाए कि 28 से 30 सितंबर की प्रस्तावित तीन दिवसीय बैंक हड़ताल केवल शनिवार की छुट्टी का संघर्ष नहीं, बल्कि बैंकिंग क्षेत्र में कार्य-जीवन संतुलन, मानव संसाधन, बढ़ते कार्यभार, कर्मचारी कल्याण और ग्राहक सुविधा के बीच संतुलन की बड़ी बहस बन चुकी है, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। सरकार ने पीएलआई को स्थगित करके एक विवाद को फिलहाल शांत किया है,लेकिन पांच-दिवसीय बैंकिंग का मूल प्रश्न अभी अनसुलझा है। तीन दिवसीय हड़ताल के बाद 26 अक्टूबर से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी इस विवाद को और गंभीर बनाती है।इसलिए सरकार, भारतीय बैंक संघ और कर्मचारी संगठनों के बीच समयबद्ध समाधान केवल बैंक कर्मचारियों के हित में नहीं, बल्कि करोड़ों खाताधारकों व्यापार-जगत और भारतीय अर्थव्यवस्था की निर्बाध वित्तीय धड़कन के लिए भी आवश्यक है।
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318
बैंक हड़ताल पर ब्रेक, यूनियनों ने विरोध प्रदर्शन वापस लिया।
जमशेदपुर
बैंक कर्मियों और अधिकारियों द्वारा घोषित हड़ताल अभी नहीं होगी। इंडियन बैंक्स एसोसिएशन और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के प्रतिनिधियों के बीच रविवार को हुई वार्ता में कई अहम मुद्दों पर सहमति बन गई, जिसके बाद हड़ताल के साथ-साथ विरोध से जुड़े सभी कार्यक्रमों को रोकने का फैसला लिया गया।
यूएफबीयू की जानकारी के मुताबिक, बैठक में पांच दिन के कार्य सप्ताह की मांग पर गंभीरता से विचार करने हेतु आईबीए और यूएफबीयू की एक संयुक्त उच्चस्तरीय कमेटी तुरंत बनाने पर सहमति हुई है। यह कमेटी सभी संबंधित पक्षों से बातचीत कर इसका हल निकालने की कोशिश करेगी।
वहीं स्केल-4 और उससे वरिष्ठ अधिकारियों के लिए लागू परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम में बदलाव को लेकर आईबीए सरकार के सामने सिफारिश रखेगा। इसके अलावा 8 मार्च 2024 के समझौते में अटके हुए विषयों को जल्द निपटाने पर भी दोनों पक्षों में सहमति बनी।
वार्ता सफल रहने के बाद यूएफबीयू ने प्रस्तावित हड़ताल और आंदोलन संबंधी कार्यक्रमों को फिलहाल टाल दिया है। इस संबंध में 27 सितंबर 2026 को परिपत्र जारी किया गया। इससे बैंक स्टाफ और अधिकारियों में आंदोलन को लेकर बनी असमंजस की स्थिति दूर होने की संभावना है।
90% लाने वाला जमशेदपुर का होनहार छात्र 9वीं मंजिल से कैसे गिरा? शरीर पर चोटें कहानी से अलग, पिता ने लगाई CBI जांच की गुहार।
जमशेदपुर
जमशेदपुर के डीबीएमएस स्कूल से लगभग 90% अंक लाकर मणिपाल इंस्टीट्यूट में पढ़ रहे लक्ष्य मिश्रा की 6-7 अप्रैल की रात संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। कॉलेज प्रशासन ने परिजनों को सूचना दी कि छात्र 9वें फ्लोर से गिर गया।
पिता का कहना है कि बेटे के शरीर पर लगी चोटें 9वें फ्लोर से गिरने से मेल नहीं खातीं। घटनास्थल पर खून का कोई निशान नहीं था। आरोप है कि फॉरेंसिक टीम के आने से पहले ही हॉस्टल के फ्लोर को धो दिया गया और शव को चादर-तकिए में लपेट दिया गया।
सबसे बड़ा सवाल – हादसे के बाद बच्चे को 20 किमी दूर सरकारी अस्पताल ले जाने के बजाय कॉलेज के ही निजी अस्पताल में क्यों रखा गया? और हॉस्टल का अटेंडेंस रजिस्टर 5.25 बता रहा है जबकि हॉस्पिटल का रजिस्टर 30 दिन का अटेंडेंस दिखा रहा है।
परिजनों ने कर्नाटक पुलिस से निष्पक्ष जांच और बिसरा को सुरक्षित रख कर दिल्ली AIIMS के डॉक्टरों से दोबारा पोस्टमार्टम जांच की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से भी गुहार लगाई है।
साथ ही इस पुरे मामले पर पिता ने CBI जांच की गुहार लगाई है।
ईचागढ़ के बिस्टाटांड गांव में गरीबों के हक पर डाका: आवास योजना से वंचित हैं धनंजय और भजोहरि, जर्जर छतों के नीचे और हाथियों के खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं परिवार।
सरायकेला/ईचागढ़
(मालखान महतो )
प्रखंड अंतर्गत बिस्टाटांड गांव से प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की एक बेहद दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। यहाँ सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ (PMAY) गरीबों के लिए महज़ एक छलावा बनकर रह गई है। कागजों पर विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाले प्रशासन की नाक के नीचे बिस्टाटांड गांव के असली जरूरतमंद आज भी नारकीय जीवन जीने को विवश हैं। गांव के अत्यंत गरीब और लाचार ग्रामीण धनंजय महतो और भजोहरि महतो का जीवन आज गंभीर संकट में है। दोनों परिवारों के कच्चे मकान पूरी तरह से जर्जर और ढलने की कगार पर पहुंच चुके हैं। स्थिति इतनी दयनीय है कि घरों की छतें पूरी तरह टूट चुकी हैं, जिसके कारण उन्हें बारिश और धूप से बचने के लिए बांस और प्लास्टिक शीट (तिरपाल) का सहारा लेना पड़ रहा है।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह पूरा इलाका हाथी प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, जहाँ अक्सर जंगली हाथियों का आतंक बना रहता है। ऐसे संवेदनशील और खतरनाक इलाके में जर्जर और कच्चे मकानों में रहना इन गरीब परिवारों के लिए मौत को दावत देने जैसा है। सिर पर पक्की छत न होने और हाथियों के हमले के लगातार बने रहने वाले खौफ के कारण इन परिवारों को हर पल अनहोनी का डर सताता रहता है और उनका हर दिन जान हथेली पर लेकर गुजर रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक गरीबों तक पहुंचने के बजाय, बिचौलियों और स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले अपात्र लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। जरूरतमंदों के हक को ताक पर रखकर उन लोगों को आवास आवंटित किए जा रहे हैं जो आर्थिक रूप से पहले से ही सक्षम हैं, जबकि असली हकदार दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।
इस गंभीर मामले को लेकर बिस्टाटांड गांव के लोगों ने कई बार स्थानीय प्रखंड कार्यालय के चक्कर काटे और अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण अब तक कोई सुध नहीं ली गई है। अधिकारियों की इस गहरी उदासीनता से ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
अब ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च-स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके। इसके साथ ही, हाथी प्रभावित इस संवेदनशील क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए पीड़ित धनंजय महतो और भजोहरि महतो को फौरन प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सुरक्षित पक्का मकान मुहैया कराया जाए, और इस योजना में गड़बड़ी करने वाले तथा अपात्रों को लाभ दिलाने वाले भ्रष्ट तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।